झांसी की रानी जब अंग्रेजों के घेरे को तोड़ते हुए ग्वालियर के पास अपनी अंतिम जंग लड़ रही थीं, तब अंग्रेज साये की तरह उनका पीछा कर रहे थे। उसी बीच एक अंग्रेज सिपाही की गोली रानी की बाईं जंघा (Left Thigh) में जा लगी। कल्पना कीजिए उस मंजर की... रानी के दोनों हाथों में नंगी तलवारें थीं। गोली लगने के बाद जब शरीर का संतुलन बिगड़ने लगा, तो उन्होंने पल भर की भी देरी नहीं की। बाएं हाथ की तलवार को फेंक कर उन्होंने घोड़े की लगाम थामी और दाईं ओर की तलवार से उस अंग्रेज को वहीं खत्म कर दिया जिसने गोली चलाई थी। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। अभी रानी संभल ही रही थीं कि एक और अंग्रेज सवार ने पीछे से वार किया। तलवार का वह प्रहार इतना गहरा था कि रानी के सिर का एक हिस्सा कट गया और उनकी दाईं आंख बाहर आ गई। असहनीय पीड़ा, बहता खून और शरीर का आधा हिस्सा कटा हुआ... लेकिन 'झांसी' की रगों में दौड़ता हुआ वह स्वाभिमान अभी थमा नहीं था। ऐसी घायल अवस्था में भी, अपनी आखिरी सांस के साथ रानी ने उस अंग्रेज पर ऐसा प्रहार किया कि उसका कंधा शरीर से अलग हो गया। ठीक उसी वक्त रानी के वफादार साथी गुल मुहम्मद वहां पहुंचे और उन्होंने उस अंग्रेज के दो टुकड़े कर दिए। रानी लक्ष्मीबाई के इस बलिदान के समय वहां उनके विश्वसनीय साथी गुल मुहम्मद, रघुनाथ, देशमुख और नन्हे बालक दामोदर राव मौजूद थे। इस पूरे घटनाक्रम का सबसे प्रमाणिक विवरण **वृंदावनलाल वर्मा** की लेखनी में मिलता है। वृंदावनलाल वर्मा जी के परदादा 'आनंदराय' झांसी के दीवान थे, जिन्होंने रानी के साथ लड़ते हुए अपने प्राण न्योछावर किए थे। जब वृंदावनलाल केवल 10 वर्ष के थे, तब उनकी परदादी ने उन्हें वह आंखों देखा हाल सुनाया था, जो पीढ़ियों से उनके परिवार की स्मृति में बसा था। आज जब हम झांसी का दुर्ग देखते हैं, तो वह केवल पत्थरों की दीवार नहीं लगती, बल्कि उस बलिदान की मूक गवाह लगती है जहाँ एक महिला ने साबित किया था कि स्वतंत्रता की कीमत लहू से चुकाई जाती है। शत-शत नमन ऐसी वीरांगना को! 🙏🚩
झांसी की रानी जब अंग्रेजों के घेरे को तोड़ते हुए ग्वालियर के पास अपनी अंतिम जंग लड़ रही थीं, तब अंग्रेज साये की तरह उनका पीछा कर रहे थे। उसी बीच एक अंग्रेज सिपाही की गोली रानी की बाईं जंघा (Left Thigh) में जा लगी। कल्पना कीजिए उस मंजर की... रानी के दोनों हाथों में नंगी तलवारें थीं। गोली लगने के बाद जब शरीर का संतुलन बिगड़ने लगा, तो उन्होंने पल भर की भी देरी नहीं की। बाएं हाथ की तलवार को फेंक कर उन्होंने घोड़े की लगाम थामी और दाईं ओर की तलवार से उस अंग्रेज को वहीं खत्म कर दिया जिसने गोली चलाई थी। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। अभी रानी संभल ही रही थीं कि एक और अंग्रेज सवार ने पीछे से वार किया। तलवार का वह प्रहार इतना गहरा था कि रानी के सिर का एक हिस्सा कट गया और उनकी दाईं आंख बाहर आ गई। असहनीय पीड़ा, बहता खून और शरीर का आधा हिस्सा कटा हुआ... लेकिन 'झांसी' की रगों में दौड़ता हुआ वह स्वाभिमान अभी थमा नहीं था। ऐसी घायल अवस्था में भी, अपनी आखिरी सांस के साथ रानी ने उस अंग्रेज पर ऐसा प्रहार किया कि उसका कंधा शरीर से अलग हो गया। ठीक उसी वक्त रानी के वफादार साथी गुल मुहम्मद वहां पहुंचे और उन्होंने उस अंग्रेज के दो टुकड़े कर दिए। रानी लक्ष्मीबाई के इस बलिदान के समय वहां उनके विश्वसनीय साथी गुल मुहम्मद, रघुनाथ, देशमुख और नन्हे बालक दामोदर राव मौजूद थे। इस पूरे घटनाक्रम का सबसे प्रमाणिक विवरण **वृंदावनलाल वर्मा** की लेखनी में मिलता है। वृंदावनलाल वर्मा जी के परदादा 'आनंदराय' झांसी के दीवान थे, जिन्होंने रानी के साथ लड़ते हुए अपने प्राण न्योछावर किए थे। जब वृंदावनलाल केवल 10 वर्ष के थे, तब उनकी परदादी ने उन्हें वह आंखों देखा हाल सुनाया था, जो पीढ़ियों से उनके परिवार की स्मृति में बसा था। आज जब हम झांसी का दुर्ग देखते हैं, तो वह केवल पत्थरों की दीवार नहीं लगती, बल्कि उस बलिदान की मूक गवाह लगती है जहाँ एक महिला ने साबित किया था कि स्वतंत्रता की कीमत लहू से चुकाई जाती है। शत-शत नमन ऐसी वीरांगना को! 🙏🚩
- परशुराम जयंती पर परशुराम वंशजों का जुटान भजन-आरती महाप्रसाद से हुआ समापन।1
- चाय से शुरू होकर गाय पर लटक गई सरकार अभी तो टेलर है पिक्चर बाकी है सियानी घोष1
- Post by Thakur Chandan Kumar1
- Post by Pawan Mahto Reporter1
- पूरा देखें1
- सड़क पर 'जश्न' या कानून का उल्लंघन? सड़क पर नाच, जनता परेशान: शादियों के नाम पर बीच सड़क पर डीजे बजाकर नाचना अब एक बड़ी मुसीबत बन चुका है। लोग अपनी खुशी के लिए घंटों ट्रैफिक जाम कर देते हैं, जिससे एम्बुलेंस और जरूरी काम से निकले लोग फंसे रह जाते हैं। सिर्फ 10 बजे का नियम काफी नहीं: आयोजकों को लगता है कि रात 10 बजे तक वे कुछ भी करने के लिए स्वतंत्र हैं। पर सवाल यह है कि क्या जश्न के नाम पर सार्वजनिक रास्ता रोकना सही है? प्रशासन की ढिलाई: कई बार पुलिस की मौजूदगी में भी यह सब होता है, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जाती। नजरअंदाज करने की यह आदत आम जनता के लिए सिरदर्द बन गई है। हमारा सवाल: आपकी निजी खुशी दूसरों के लिए सजा क्यों?1
- Post by Santu Kumar SAH1
- आखिर क्या हुआ जिससे चर्चित राजद नेत्री प्रिया भीड़ के सामने देर रात्री फुट फुट कर रोने लगी ?? #Priyaraj #Rjd #Viralnews #Harlakhi #Madhubaninews1