10 दिनो से पानी आपूर्ति वन्द, ग्रामिणो का फूटा गुस्सा, प्रदर्शन , ठाकुरद्वारा। गांव गोपीवाला में पेयजल संकट ने गंभीर रूप ले लिया है। पिछले 10 दिनों से पानी की टंकी बंद पड़ी है, जिससे ग्रामीणों को शुद्ध पानी के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है। हैरानी की बात यह है कि बार-बार शिकायत के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही। ग्रामीणों का आरोप है कि सुपरवाइजर मनोज यादव रोजाना “कल टंकी चालू होगी” का रटा-रटाया आश्वासन देकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहे हैं, लेकिन हकीकत यह है कि 10 दिन बीत जाने के बाद भी टंकी सूखी खड़ी है और लोग बूंद-बूंद पानी को तरस रहे हैं। स्थिति और भी बदतर तब हो जाती है जब गांव की सड़कों पर फटी पाइपलाइन से पानी लीकेज हो रहा है। एक तरफ लोगों को पीने के लिए पानी नहीं मिल रहा, वहीं दूसरी तरफ सड़कों पर बहता पानी सिस्टम की नाकामी का मजाक उड़ा रहा है। टूटी सड़कों के कारण राहगीरों का चलना भी दूभर हो गया है। आखिरकार परेशान ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने टंकी चालू कराने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। ग्रामीणों ने बताया कि इस संबंध में एसडीएम प्रीति सिंह से भी शिकायत की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। प्रदर्शन में यशपाल सिंह, विपिन कुमार, विजयपाल सिंह, उदयवीर सिंह, दीपांशु चौहान, अभिषेक कुमार, नवीन कुमार, मुन्ना सिंह सहित कई ग्रामीण मौजूद रहे। सवाल यह है कि आखिर कब तक “कल” का झुनझुना पकड़ाकर ग्रामीणों को बहलाया जाता रहेगा और कब जिम्मेदार अपनी जिम्मेदारी निभाएंगे?
10 दिनो से पानी आपूर्ति वन्द, ग्रामिणो का फूटा गुस्सा, प्रदर्शन , ठाकुरद्वारा। गांव गोपीवाला में पेयजल संकट ने गंभीर रूप ले लिया है। पिछले 10 दिनों से पानी की टंकी बंद पड़ी है, जिससे ग्रामीणों को शुद्ध पानी के लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है। हैरानी की बात यह है कि बार-बार शिकायत के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों के कानों पर जूं तक नहीं रेंग रही। ग्रामीणों का आरोप है कि सुपरवाइजर मनोज यादव रोजाना “कल टंकी चालू होगी” का रटा-रटाया आश्वासन देकर अपनी जिम्मेदारी से
पल्ला झाड़ रहे हैं, लेकिन हकीकत यह है कि 10 दिन बीत जाने के बाद भी टंकी सूखी खड़ी है और लोग बूंद-बूंद पानी को तरस रहे हैं। स्थिति और भी बदतर तब हो जाती है जब गांव की सड़कों पर फटी पाइपलाइन से पानी लीकेज हो रहा है। एक तरफ लोगों को पीने के लिए पानी नहीं मिल रहा, वहीं दूसरी तरफ सड़कों पर बहता पानी सिस्टम की नाकामी का मजाक उड़ा रहा है। टूटी सड़कों के कारण राहगीरों का चलना भी दूभर हो गया
है। आखिरकार परेशान ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने टंकी चालू कराने की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। ग्रामीणों ने बताया कि इस संबंध में एसडीएम प्रीति सिंह से भी शिकायत की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। प्रदर्शन में यशपाल सिंह, विपिन कुमार, विजयपाल सिंह, उदयवीर सिंह, दीपांशु चौहान, अभिषेक कुमार, नवीन कुमार, मुन्ना सिंह सहित कई ग्रामीण मौजूद रहे। सवाल यह है कि आखिर कब तक “कल” का झुनझुना पकड़ाकर ग्रामीणों को बहलाया जाता रहेगा और कब जिम्मेदार अपनी जिम्मेदारी निभाएंगे?
- इन दिनों उत्तराखंड की राजनीति में भीमताल विधानसभा एक ऐसे प्रसंग का साक्षी बनती दिखाई दे रही है, जहाँ एक व्यक्ति की उपस्थिति मात्र से विमर्श की दिशा परिवर्तित होती प्रतीत हो रही है। लाखन सिंह नेगी का कांग्रेस में प्रवेश केवल राजनीतिक औपचारिकता भर नहीं, बल्कि उस अंतर्धारा का संकेत भी माना जा सकता है, जो सत्ता और प्रतिरोध के बीच निरंतर प्रवाहित होती रहती है। जिला पंचायत सदस्य अपहरण कांड ने जिस प्रकार लोकतांत्रिक संस्थाओं की संवेदनशीलता पर प्रश्नचिह्न अंकित किए, और उसके साथ-साथ जिन परिस्थितियों में नेगी के व्यक्तिगत व सामाजिक जीवन को प्रभावित करने के प्रयासों की चर्चाएँ सामने आईं, उसने इस समूचे घटनाक्रम को एक व्यापक राजनीतिक आख्यान में परिवर्तित कर दिया। ऐसे समय में, जब सत्ता का प्रभाव अनेक स्तरों पर अनुभव किया जाता है, उसके प्रतिकूल खड़े रहना केवल राजनीतिक साहस का नहीं, बल्कि धैर्य और स्थिरता का भी परिचायक माना जाता है। हिमालय की भाँति अडिग रहने का रूपक यहाँ मात्र अलंकार नहीं, बल्कि उस मनोवृत्ति का संकेत है, जो प्रतिकूल परिस्थितियों में भी स्वयं को विचलित नहीं होने देती। किंतु राजनीति केवल प्रतीकों और रूपकों की भूमि नहीं होती; वह परिणामों की कसौटी पर भी परखी जाती है। अतः 2027 का चुनावी परिदृश्य यह निर्धारित करेगा कि यह संघर्षशील छवि और जन-आकांक्षाओं का यह संयोग किस दिशा में परिणत होता है क्या यह जनादेश में रूपांतरित होगा, या फिर समय की धारा कोई अन्य कथा रच देगी। फिलहाल इतना अवश्य कहा जा सकता है कि लाखन सिंह नेगी का कांग्रेस के चेहरे के तौर पर यह आगमन भीमताल ही नहीं, बल्कि उत्तराखंड की समकालीन राजनीति में एक नए अध्याय की प्रस्तावना जैसा प्रतीत होता है, जिसकी पूर्ण कथा अभी लिखी जानी शेष है।1
- *पानी की टंकी पर लटका मिला युवक का शव, इलाके में मचा हड़कंप*1
- श्रीसत्यनारायणभगवान जी की कथा के बाद आरती...1
- जिला बिजनोर थानां स्योहारा पर है गंभीर-गंभीर आरोप, यहां की पुलिस कानून को नही मानती करती है अपनी मनमानी,1
- कालागढ़ रोड ग्राम घासी वाला थाना अफजलगढ़ तहसील धामपुर से बिरला फार्म रोड अफजलगढ़ में अवैध कॉलोनी में मिट्टी का अवैध खनन चल रहा है तहसील प्रशासन और पुलिस की मिली भगत से खनन माफिया के हौसले बुलंद है डीएम मैडम का आदेश की अवैध खनन नहीं चलेगा तहसील प्रशासन और पुलिस प्रशासन के लिए बौना साबित हो रहा है इन ट्रैक्टरों से किसी भी समय अब कोई भी अप्रिय घटना हो सकती है कृपा करके इन्हें रोकने की कृपा करें और जो भी अधिकारी इसमें दोषी हैं उनके खिलाफ आवश्यक कार्रवाई करने की कृपा करें3
- उत्तराखंड के नैनीताल जिले के ग्राम सभा मंगौली में उत्तराखंड सरकार द्वारा नई शराब की दुकान खोलने पर ग्रामीणों ने नई शराब की दुकान मंगौली में खुलने का सड़क में बैठ कर खुलकर विरोध कर नारेबाजी की ! #uttarakhandupdate #nainital #Mangoli #uttarakhand #news #Nainitalmangoli1
- कानपुर के हाता गम्मू खाँ में लावारिस एक्टिवा गाड़ी से क्षेत्र में दहशत का माहौल कानपुर। हाता गम्मू खाँ क्षेत्र के निवासियों में इन दिनों खासी दहशत फैली हुई है। विगत कई महीनों से इलाके में एक लावारिस एक्टिवा स्कूटर गाड़ी खड़ी है, जिसका कोई मालिकाना हक या सुराग नहीं मिल रहा है। क्षेत्रीय निवासी गुलाम नबी ने बताया कि गाड़ी काफी समय से वहीं खड़ी है। जब स्थानीय लोगों ने इसके बारे में पूछताछ की तो आस-पास रहने वाले शेरू ने बताया कि इस गाड़ी पर अक्सर लोफर लड़के आकर बैठते हैं। इनकी वजह से लड़कियों का घर से निकलना मुश्किल हो गया है। इसी इलाके के दुकानदार रजब अली ने बताया, “मेरी दुकान के ठीक पास ही यह गाड़ी खड़ी रहती है। लोफर लड़के यहां बैठकर गंदे-गंदे कमेंट करते हैं। अगर उन्हें टोका-टाकी की जाए तो वे लड़ाई-झगड़े पर उतारू हो जाते हैं। हम महल्ले वाले बहुत परेशान हैं।” स्थानीय लोगों ने सामूहिक रूप से चौकी छोटे मियां का हाता, थाना कर्नलगंज से अपील की है कि पुलिस इस लावारिस गाड़ी को अपने कब्जे में ले ले। उन्होंने कहा, “न जाने किसने इस गाड़ी को यहां लाकर खड़ी कर दी है। इसके अंदर कोई बम या संदिग्ध वस्तु न हो, इस बात का हमें डर लगा रहता है। हम लोग बहुत पीड़ित हैं।” क्षेत्रवासियों की मांग है कि पुलिस तुरंत इस लावारिस वाहन को हटाकर जांच करे और लोफर तत्वों पर भी सख्त कार्रवाई करे, ताकि महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।3
- जो भी फ्रॉड होते हैं उसमें सिम का उपयोग होता है और पुलिस सबसे पहले सिम धारक को पकड़ती है फिर वो रोते हुए बताता है कि साहब ये सिम तो मैं चलाता ही नहीं हूँ। फर्जी सिम का खेल-भिजवा देगा जेल। संचार साथी ऐप में जाकर अपने नाम से कितने मोबाइल कनेक्शन हैं ये ज़रूर चेक करें। फर्जी सिम के फर्जीवाड़ा से बचें।1