जनजातीय संस्कृति और पर्यावरण संरक्षण पर सीआरएसयू का विशेष अध्ययन- कुलगुरु प्रो. राम पाल सैनी जनजातीय संस्कृति और पर्यावरण संरक्षण पर सीआरएसयू का विशेष अध्ययन- कुलगुरु प्रो. राम पाल सैनी चौधरी रणबीर सिंह विश्वविद्यालय, जींद के माननीय कुलगुरु प्रो. राम पाल सैनी के कुशल नेतृत्व, दूरदर्शी मार्गदर्शन एवं सतत प्रेरणा के अंतर्गत भूगोल विभाग द्वारा जबलपुर जिला, मध्य प्रदेश की बैगा तथा गोंड बहुल क्षेत्रों में एक विस्तृत शैक्षणिक क्षेत्रीय अध्ययन (फील्ड सर्वे) का सफल आयोजन किया गया। इस अध्ययन में विभाग के 48 विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। यह अध्ययन विद्यार्थियों के लिए केवल एक शैक्षणिक भ्रमण नहीं था, बल्कि जमीनी स्तर पर समाज, संस्कृति और पर्यावरण को समझने का एक सशक्त अवसर सिद्ध हुआ। क्षेत्रीय अध्ययन के समापन उपरांत विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. राम पाल सैनी ने विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को इस सफल आयोजन के लिए हार्दिक बधाई दी। उन्होंने कहा, “ऐसे क्षेत्रीय अध्ययन विद्यार्थियों को पुस्तक आधारित ज्ञान से आगे बढ़ाकर वास्तविक जीवन की परिस्थितियों से परिचित कराते हैं। जनजातीय समाज के जीवन, उनकी समस्याओं और उनके पारंपरिक ज्ञान को समझना अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि यही हमारे देश की सांस्कृतिक विविधता और पर्यावरणीय संतुलन की आधारशिला है।” उन्होंने कहा, “भूगोल केवल मानचित्रों और सिद्धांतों तक सीमित विषय नहीं है, बल्कि यह समाज, प्रकृति और मानव के पारस्परिक संबंधों को समझने का विज्ञान है। मुझे प्रसन्नता है कि हमारे विद्यार्थी जमीनी स्तर पर शोध कर रहे हैं और समाज के वंचित वर्गों को समझने का प्रयास कर रहे हैं। भविष्य में भी इस प्रकार के शैक्षणिक भ्रमण और अनुसंधान कार्य निरंतर आयोजित किए जाएँगे, ताकि विद्यार्थियों का समग्र विकास सुनिश्चित हो सके।” प्रो. सैनी ने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि वे अपने अनुभवों को शोध लेखों, परियोजनाओं और प्रस्तुतियों के माध्यम से साझा करें, जिससे समाज में जनजातीय जीवन और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़े। उन्होंने यह भी आशा व्यक्त की कि इस प्रकार के प्रयास विश्वविद्यालय की शैक्षणिक उत्कृष्टता को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने में सहायक सिद्ध होंगे। अध्ययन के दौरान विद्यार्थियों ने गोंड जनजाति एवं बैगा जनजाति के सामाजिक, आर्थिक एवं सांस्कृतिक जीवन का गहन अध्ययन किया। उन्होंने जनजातीय बस्तियों का भ्रमण कर उनकी आजीविका के साधनों, पारंपरिक कृषि पद्धतियों, आवास शैली, खान-पान, वेशभूषा, लोक-विश्वास, रीति-रिवाज तथा पारिवारिक संरचना का प्रत्यक्ष अवलोकन किया। विद्यार्थियों ने यह भी जाना कि इन समुदायों की जीवनशैली प्रकृति के साथ गहरे जुड़ाव को दर्शाती है। विशेष रूप से बैगा जनजाति, जिसे भारत सरकार द्वारा संवेदनशील जनजातीय समूह (PVTG) का दर्जा प्राप्त है, सामाजिक एवं आर्थिक दृष्टि से अत्यंत पिछड़ी मानी जाती है। यह जनजाति मुख्यतः दूरस्थ एवं घने वन क्षेत्रों में निवास करती है तथा वनों से प्राप्त संसाधनों पर ही अपनी आजीविका निर्भर करती है। विद्यार्थियों ने यह समझने का प्रयास किया कि किस प्रकार ये जनजातियाँ वन संपदा का संतुलित उपयोग करते हुए पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान देती हैं। उन्होंने पारंपरिक ज्ञान प्रणाली, औषधीय पौधों की जानकारी तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण की स्थानीय विधियों का भी अध्ययन किया। अध्ययन के अंतर्गत कुछ विद्यार्थियों ने सतपुड़ा क्षेत्र में पक्षियों की विभिन्न प्रजातियों का भौगोलिक एवं पारिस्थितिकीय अध्ययन भी किया। इस दौरान क्षेत्र की जैव विविधता, प्राकृतिक वनस्पति, स्थलाकृति तथा जलवायु संबंधी विशेषताओं का अवलोकन किया गया। पक्षी प्रजातियों की विविधता ने यह स्पष्ट किया कि सतपुड़ा क्षेत्र पर्यावरणीय संतुलन की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस अध्ययन से विद्यार्थियों को जैव विविधता संरक्षण की आवश्यकता एवं मानव-प्रकृति संबंधों की गहराई को समझने का अवसर मिला। इस शैक्षणिक भ्रमण एवं शोध कार्य में डॉ. मंजीत सिंह, डॉ. देवेंद्र यादव, श्रीमती पूनम एवं श्री मनीष कुमार का विशेष मार्गदर्शन रहा। उन्होंने विद्यार्थियों को क्षेत्रीय अध्ययन की विधियों, आंकड़ों के संकलन, साक्षात्कार तकनीक तथा विश्लेषण की प्रक्रियाओं के बारे में मार्गदर्शन प्रदान किया, जिससे विद्यार्थियों का व्यावहारिक ज्ञान सुदृढ़ हुआ।
जनजातीय संस्कृति और पर्यावरण संरक्षण पर सीआरएसयू का विशेष अध्ययन- कुलगुरु प्रो. राम पाल सैनी जनजातीय संस्कृति और पर्यावरण संरक्षण पर सीआरएसयू का विशेष अध्ययन- कुलगुरु प्रो. राम पाल सैनी चौधरी रणबीर सिंह विश्वविद्यालय, जींद के माननीय कुलगुरु प्रो. राम पाल सैनी के कुशल नेतृत्व, दूरदर्शी मार्गदर्शन एवं सतत प्रेरणा के अंतर्गत भूगोल विभाग द्वारा जबलपुर जिला, मध्य प्रदेश की बैगा तथा गोंड बहुल क्षेत्रों में एक विस्तृत शैक्षणिक क्षेत्रीय अध्ययन (फील्ड सर्वे) का सफल आयोजन किया गया। इस अध्ययन में विभाग के 48 विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। यह अध्ययन विद्यार्थियों के लिए केवल एक शैक्षणिक भ्रमण नहीं था, बल्कि जमीनी स्तर पर समाज, संस्कृति और पर्यावरण को समझने का एक सशक्त अवसर सिद्ध हुआ। क्षेत्रीय अध्ययन के समापन उपरांत विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. राम पाल सैनी ने विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को इस सफल आयोजन के लिए हार्दिक बधाई दी। उन्होंने कहा, “ऐसे क्षेत्रीय अध्ययन विद्यार्थियों को पुस्तक आधारित ज्ञान से आगे बढ़ाकर वास्तविक जीवन की परिस्थितियों से परिचित कराते हैं। जनजातीय समाज के जीवन, उनकी समस्याओं और उनके पारंपरिक ज्ञान को समझना अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि यही हमारे देश की सांस्कृतिक विविधता और पर्यावरणीय संतुलन की आधारशिला है।” उन्होंने कहा, “भूगोल केवल मानचित्रों और सिद्धांतों तक सीमित विषय नहीं है, बल्कि यह समाज, प्रकृति और मानव के
पारस्परिक संबंधों को समझने का विज्ञान है। मुझे प्रसन्नता है कि हमारे विद्यार्थी जमीनी स्तर पर शोध कर रहे हैं और समाज के वंचित वर्गों को समझने का प्रयास कर रहे हैं। भविष्य में भी इस प्रकार के शैक्षणिक भ्रमण और अनुसंधान कार्य निरंतर आयोजित किए जाएँगे, ताकि विद्यार्थियों का समग्र विकास सुनिश्चित हो सके।” प्रो. सैनी ने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि वे अपने अनुभवों को शोध लेखों, परियोजनाओं और प्रस्तुतियों के माध्यम से साझा करें, जिससे समाज में जनजातीय जीवन और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़े। उन्होंने यह भी आशा व्यक्त की कि इस प्रकार के प्रयास विश्वविद्यालय की शैक्षणिक उत्कृष्टता को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने में सहायक सिद्ध होंगे। अध्ययन के दौरान विद्यार्थियों ने गोंड जनजाति एवं बैगा जनजाति के सामाजिक, आर्थिक एवं सांस्कृतिक जीवन का गहन अध्ययन किया। उन्होंने जनजातीय बस्तियों का भ्रमण कर उनकी आजीविका के साधनों, पारंपरिक कृषि पद्धतियों, आवास शैली, खान-पान, वेशभूषा, लोक-विश्वास, रीति-रिवाज तथा पारिवारिक संरचना का प्रत्यक्ष अवलोकन किया। विद्यार्थियों ने यह भी जाना कि इन समुदायों की जीवनशैली प्रकृति के साथ गहरे जुड़ाव को दर्शाती है। विशेष रूप से बैगा जनजाति, जिसे भारत सरकार द्वारा संवेदनशील जनजातीय समूह (PVTG) का दर्जा प्राप्त है, सामाजिक एवं आर्थिक दृष्टि से अत्यंत पिछड़ी मानी
जाती है। यह जनजाति मुख्यतः दूरस्थ एवं घने वन क्षेत्रों में निवास करती है तथा वनों से प्राप्त संसाधनों पर ही अपनी आजीविका निर्भर करती है। विद्यार्थियों ने यह समझने का प्रयास किया कि किस प्रकार ये जनजातियाँ वन संपदा का संतुलित उपयोग करते हुए पर्यावरण संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान देती हैं। उन्होंने पारंपरिक ज्ञान प्रणाली, औषधीय पौधों की जानकारी तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण की स्थानीय विधियों का भी अध्ययन किया। अध्ययन के अंतर्गत कुछ विद्यार्थियों ने सतपुड़ा क्षेत्र में पक्षियों की विभिन्न प्रजातियों का भौगोलिक एवं पारिस्थितिकीय अध्ययन भी किया। इस दौरान क्षेत्र की जैव विविधता, प्राकृतिक वनस्पति, स्थलाकृति तथा जलवायु संबंधी विशेषताओं का अवलोकन किया गया। पक्षी प्रजातियों की विविधता ने यह स्पष्ट किया कि सतपुड़ा क्षेत्र पर्यावरणीय संतुलन की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस अध्ययन से विद्यार्थियों को जैव विविधता संरक्षण की आवश्यकता एवं मानव-प्रकृति संबंधों की गहराई को समझने का अवसर मिला। इस शैक्षणिक भ्रमण एवं शोध कार्य में डॉ. मंजीत सिंह, डॉ. देवेंद्र यादव, श्रीमती पूनम एवं श्री मनीष कुमार का विशेष मार्गदर्शन रहा। उन्होंने विद्यार्थियों को क्षेत्रीय अध्ययन की विधियों, आंकड़ों के संकलन, साक्षात्कार तकनीक तथा विश्लेषण की प्रक्रियाओं के बारे में मार्गदर्शन प्रदान किया, जिससे विद्यार्थियों का व्यावहारिक ज्ञान सुदृढ़ हुआ।
- हरियाणा मानव अधिकार आयोग के अध्यक्ष ललित बत्रा ने शहीद सौरभ गर्ग की प्रतिमा पर अर्पित की पुष्पांजलि; मरणोपरांत सम्मान के लिए प्रक्रिया जारी पिल्लूखेड़ा (जींद), 17 फरवरी 2026: हरियाणा मानव अधिकार आयोग की टीम ने आज पिल्लूखेड़ा में शहीद सौरभ गर्ग के स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी और नमन किया। आयोग के अध्यक्ष ललित बत्रा ने इस मौके पर बताया कि शहीद सौरभ गर्ग के परिजनों की ओर से मरणोपरांत उचित पुरस्कार प्रदान करने की लगातार मांग की जा रही थी। आयोग ने इस मामले का संज्ञान लिया और जांच की।तत्कालीन उपायुक्त द्वारा इसकी अनुशंसा पहले ही की जा चुकी थी, जिसे केस बनाकर चंडीगढ़ भेजा गया था। प्रक्रिया के अनुसार यह मामला केंद्र सरकार को भेजा गया। केंद्र से अनुमति मिलने के बाद भी प्रशासनिक स्तर पर कुछ विलंब हुआ, जिसके चलते सौरभ गर्ग के पिता ने मानव अधिकार आयोग में आवेदन दिया। आयोग की हिदायत पर स्मारक के रखरखाव के लिए माली, स्वीपर सहित आवश्यक कर्मचारियों की नियुक्ति सरकार द्वारा की गई है।उल्लेखनीय है कि 8 दिसंबर 2012 को पिल्लूखेड़ा में गैस सिलेंडर रिसाव से लगी भीषण आग में फंसे 11 लोगों की जान बचाने के लिए सौरभ गर्ग ने अद्वितीय साहस और त्याग का परिचय दिया था। इस दौरान वे स्वयं शहीद हो गए। उनके इस बलिदान को सम्मान मिलना चाहिए। परिवार की ओर से निरंतर प्रयास किए गए हैं।सरकार द्वारा उनके परिवार को अनुदान राशि प्रदान की गई है और 5 लाख रुपये की लागत से स्मारक का निर्माण भी करवाया गया। विधानसभा में उनके सम्मान में दो मिनट का मौन भी रखा गया था, जो उनके योगदान की मान्यता दर्शाता है।आयोग के अध्यक्ष ललित बत्रा ने कहा कि मरणोपरांत सम्मान की वर्तमान आवेदन प्रक्रिया पर कार्यवाही जारी है। आयोग का प्रयास है कि सौरभ गर्ग के साहस और त्याग को पूर्ण एवं उचित पहचान मिल सके।1
- बांगर की धरती पर सीएम नायब सिंह सैनी पहली बार राजनीति सभा को संबोधित करने आ रहे है। हाइवे स्थिति अतिरिक्त अनाज मंडी में विधायक देवेंद्र चतरभुज अत्री की अगुवाई में होने वाली धन्यवाद एवं उचाना विकास रैली में वो पहुंचेंगे। सीएम हेलिकॉप्टर से आएंगे जो सभा स्थल से कुछ दूरी पर उतरेगा। अतिरिक्त अनाज मंडी का जो शैड है वो सबसे बड़ा शैड है। यहां पर आने वालों के बैठने के लिए कुर्सियां अलग-अलग सेक्टर बना कर लगाई गई है। महिलाओंं, पुरूषों के बैठने के लिए अलग-अलग सेक्टर बनाए गए है। सभा स्थल पर बनाई तीन स्टेज मेन वीवीआईपी स्टेज होगी जहां सीएम नायब सिंह सैनी सहित प्रमुख लोग मौजूद रहेंगे। वीवीआई लोगों के लिए कुछ दूरी पर स्टेज बनाई गई है तो सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत करने वाले कलाकारों के लिए अलग स्टेज बनाई गई है। सभा स्थल पर आने के लिए अलग-अलग बेरीगेटसों से लोगों को गुजरना होगा। मंडी के दो गेटों से एंटी होगी। वाहनों के लिए पार्किंग सभा स्थल के आस-पास बनाया गया है। सीएम को विभिन्न समाजों के लोग सम्मानित करेंगे। इस दिन अनेकों उद्घाटन एवं शिलान्यास भी होंगे। जनसभा के बाद सीएम आढ़तियों द्वारा आयोजित कार्यक्रम में भी गीता विद्या मंदिर स्कूल उचाना मंडी में आएंगे। पुलिस प्रशासन द्वारा हर जगह सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध किए गए है।1
- Post by Haripal Haripal1
- मेदांता हॉस्पिटल गुरुग्राम के वरिष्ठ डॉक्टर त्रेहन जिंदगी के बारे में क्या कहते हैं और साथ के बाद इंसान को क्या करना चाहिए यह पूरी बात सुनिए उनकी जुबान से।1
- पाकिस्तान से रोहतक आई 1200 साल पुरानी गद्दी का रहस्य | बाबा राघव देव जी का सनातन पर बड़ा संदेश . #rohtak #haryana #pakistan #news #digitalbhoomi #db #explore1
- पलवल पुलिस को मिली इस बड़ी कामयाबी का खुलासा आयोजित प्रेस वार्ता में करते हुए डीएसपी पलवल मनोज वर्मा ने बताया कि पुलिस अधीक्षक पलवल वरुण सिंगला के कुशल निर्देशन एवं नेतृत्व में जिला पुलिस लगातार अपराधियों पर शिकंजा कस रही है इसी कड़ी में पलवल पुलिस को बड़ी सफलता प्राप्त हुई है। वाहन में लिफ्ट देने के बहाने लूटपाट करने वाली अंतरराज्यीय गैंग का भंडाफोड कर तीन आरोपियों को सीआईए स्टाफ द्वारा केएमपी फ्लाई ओवर के नीचे से गिरफ्तार किया गया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, आरोपी राहगीरों को लिफ्ट देने का भरोसा देकर सुनसान स्थान पर ले जाते थे तथा उनके साथ मारपीट कर नकदी व कीमती सामान लूट लेते थे। इस संबंध में थाना कैम्प व सदर पलवल में विभिन्न धाराओं के तहत चार मामला दर्ज किए गए। मामलों की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक पलवल वरुण सिंगला IPS के कुशल निर्देशन में सीआईए पलवल प्रभारी इंस्पेक्टर रविंदर की टीम का गठन किया गया। जो सीआईए इंस्पेक्टर रविंदर की टीम ने तकनीकी एवं गुप्त सूचना के आधार पर केएमपी फ्लाई ओवर के नीचे से दबिश देकर तीनों आरोपियों को काबू किया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान इस प्रकार है: 1 विकास उर्फ ओटे पुत्र कन्नू लाल निवासी तिर्लोकपुरी मयूर विहार नई दिल्ली 2 मुन्ना पुत्र विजय निवासी कासली देवरिया गोरखपुर उत्तर प्रदेश 3 अजय मिश्रा उर्फ राहुल उर्फ मुसद्दी पुत्र सुरेश मिश्रा निवासी तिर्लोकपुरी दिल्ली पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से वारदात में प्रयोग की गई आई 10 गाड़ी व एक देसी कट्टा बरामद किया है। आरोपियों के खिलाफ दिल्ली, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड तथा हरियाणा के विभिन्न थानों में तीन दर्जन के करीब लूट आदि संगीन वारदात दर्ज है जिनमें जिला पलवल के थाना कैंप व सदर पलवल में वर्ष 2025/26 की चार लूट वारदात भी शामिल है। आरोपियों को न्यायालय में पेश कर पुलिस रिमांड पर लिया जाएगा, ताकि अन्य वारदातों के संबंध में पूछताछ की जा सके। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपियों द्वारा क्षेत्र में अन्य वारदातों को अंजाम देने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।1
- महम में हुई पंचायत में विकास श्योराण ने क्या कहा सुने विडियो..1
- जींद में आज से शुरू हुईं सीबीएसई 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षाएं जींद, 17 फरवरी 2026: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की कक्षा 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाएं आज से पूरे देश में शुरू हो गई हैं। जींद शहर में भी इन परीक्षाओं की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और प्रशासन ने नकल रोकने के लिए कड़े इंतजाम किए हैं। जींद में कुल 16 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं, जहां लगभग 9 हजार छात्र-छात्राएं परीक्षा दे रहे हैं। परीक्षाएं सुबह 10:30 बजे से दोपहर 1:30 बजे तक चलेंगी। प्रशासन की पैनी नजर परीक्षा पर बनी हुई है। सभी परीक्षा केंद्रों के बाहर धारा 163 (पूर्व में धारा 144 जैसी प्रतिबंधात्मक धारा) लागू कर दी गई है। केंद्रों के आसपास पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है ताकि किसी भी प्रकार की अनुचित गतिविधि पर रोक लगाई जा सके। नकल और अनुचित साधनों को रोकने के लिए परीक्षा केंद्रों के आसपास सभी फोटोस्टेट की दुकानें बंद करवा दी गई हैं। इससे छात्रों को बाहर से कोई सामग्री लाने में मुश्किल हो और नकल की संभावना कम हो। सीबीएसई की ओर से पूरे देश में करीब 43 लाख से अधिक छात्र इन परीक्षाओं में शामिल हो रहे हैं, जिसमें जींद के छात्र भी शामिल हैं। छात्रों से अपील की गई है कि वे समय पर परीक्षा केंद्र पहुंचें, एडमिट कार्ड साथ रखें और बोर्ड के दिशा-निर्देशों का पालन करें। सभी छात्रों को शुभकामनाएं! मेहनत और ईमानदारी से परीक्षा दें, सफलता जरूर मिलेगी।1