रूस ने दिया भारत को अपनी हाई-स्पीड इवोल्गा ट्रेन का ऑफर रूस ने भारत को इवोल्गा हाई-स्पीड ट्रेन तकनीक ऑफर की. 360 किमी प्रति घंटा गति, 80% स्थानीय सामग्री होगी. वंदे भारत स्लीपर डील के बाद यह मेक इन इंडिया और हाई-स्पीड रेल लक्ष्यों से जुड़ा प्रस्ताव है. Advertisement भारत अपनी रेल व्यवस्था को आधुनिक बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है. हाई-स्पीड ट्रेन प्रोजेक्ट देश की प्राथमिकता में शामिल हैं. इसी बीच रूसी कंपनी ट्रांसमैशहोल्डिंग ने भारत को अपनी इवोल्गा हाई-स्पीड ट्रेन तकनीक पेश की है. यह प्रस्ताव INNOPROM.India कार्यक्रम के दौरान सामने आया. इवोल्गा ट्रेन 360 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ सकती है. आठ डिब्बों वाले सेट में 642 यात्री बैठ सकते हैं. इसकी उम्र 30 साल बताई गई है. इसमें 80% स्थानीय सामग्री का इस्तेमाल संभव है. यह ऑफर भारत-रूस के मौजूदा रेल सहयोग को आगे बढ़ाने वाला है. ट्रांसमैशहोल्डिंग पहले से भारत में सक्रिय है. कंपनी ने वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों के निर्माण के लिए संयुक्त उद्यम के जरिए 6.5 अरब डॉलर का सौदा किया है. इसके तहत 120 ट्रेनें बनाई जानी हैं. इस अनुभव के आधार पर रूस अब हाई-स्पीड सेगमेंट में भी कदम रखना चाहता है. मुंबई-अहमदाबाद जैसे कॉरिडोर में यह तकनीक उपयोगी साबित हो सकती है. सबसे महत्वपूर्ण बात 80 प्रतिशत लोकल कंटेंट की है. इससे मेक इन इंडिया पहल को सीधा लाभ मिलेगा. तकनीक हस्तांतरण और स्थानीय उत्पादन से भारतीय उद्योग को नई क्षमता हासिल होगी. भारत वर्तमान में सेमी-हाई स्पीड वंदे भारत ट्रेनों पर फोकस कर रहा है जो 160 से 180 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलती हैं. पूर्ण हाई-स्पीड नेटवर्क के लिए बुलेट ट्रेन जैसी परियोजनाएं चल रही हैं. जापानी शिंकानसेन तकनीक मुंबई-अहमदाबाद कॉरिडोर के लिए चुनी गई है. रूसी प्रस्ताव इस क्षेत्र में विकल्प बढ़ा सकता है. खासकर लागत और स्थानीय निर्माण के मामले में यह फायदेमंद हो सकता है. भारत-रूस रेल सहयोग की पृष्ठभूमि भारत और रूस के बीच रेल क्षेत्र में पुराना सहयोग रहा है. ट्रांसमैशहोल्डिंग का वंदे भारत स्लीपर प्रोजेक्ट इसका ताजा उदाहरण है. लातूर स्थित फैक्ट्री में उत्पादन शुरू हो चुका है. भारतीय इंजीनियरों को रूस में ट्रेनिंग भी दी जा रही है. इस संयुक्त उद्यम ने दोनों देशों के औद्योगिक संबंधों को मजबूत किया है. अब इवोल्गा जैसी उन्नत तकनीक का ऑफर इसी सहयोग का विस्तार है. INNOPROM.India जैसे मंच पर यह चर्चा होना स्वाभाविक है. यहां औद्योगिक और तकनीकी साझेदारी पर जोर दिया जाता है. रूस भारत को न सिर्फ तैयार ट्रेन बेचना चाहता है बल्कि संयुक्त उत्पादन और तकनीक साझा करने को तैयार है. इससे भारत की आत्मनिर्भरता बढ़ेगी और निर्यात क्षमता भी विकसित हो सकती है.चुनौतियां और संभावनाएं हाई-स्पीड ट्रेन परियोजनाओं में सुरक्षा, ट्रैक इंफ्रास्ट्रक्चर और सिग्नलिंग सिस्टम सबसे महत्वपूर्ण होते हैं. सिर्फ ट्रेन लाना काफी नहीं. पूरे कॉरिडोर को हाई-स्पीड के अनुकूल बनाना पड़ता है. लागत भी ज्यादा होती है. जापानी तकनीक के साथ तुलना में रूसी ऑफर कितना प्रतिस्पर्धी है यह देखना होगा. मौजूदा वंदे भारत अनुभव से सीखकर प्रक्रिया को तेज किया जा सकता है. भारत सरकार मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत के तहत घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा दे रही है. 80 प्रतिशत लोकल कंटेंट का वादा इस दिशा में सकारात्मक है. अगर सौदा होता है तो रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और तकनीकी कौशल का विकास होगा. मुंबई-अहमदाबाद के अलावा अन्य संभावित कॉरिडोर जैसे दिल्ली-वाराणसी या दक्षिण भारत के रूट्स पर भी विचार किया जा सकता है. रूसी प्रस्ताव भारत के हाई-स्पीड रेल लक्ष्यों से मेल खाता है. वंदे भारत की सफलता के बाद अब अगला कदम पूर्ण हाई-स्पीड नेटवर्क का है. तकनीक हस्तांतरण और संयुक्त उत्पादन से दोनों देशों को लाभ होगा. भारत को अपनी जरूरतों के मुताबिक बातचीत करनी होगी. सुरक्षा मानकों, लागत और समय सीमा पर सहमति जरूरी है. यह ऑफर भारत-रूस रणनीतिक साझेदारी को रेल क्षेत्र में नई ऊंचाई दे सकता है. अगर सफलता मिली तो भारतीय यात्री तेज और आरामदायक यात्रा का आनंद ले सकेंगे. साथ ही घरेलू उद्योग वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनेगा. आने वाले समय में इस प्रस्ताव पर औपचारिक चर्चाएं आगे बढ़ने की उम्मीद है. भारत की रेल क्रांति में रूसी तकनीक एक महत्वपूर्ण अध्याय लिख सकती है.
रूस ने दिया भारत को अपनी हाई-स्पीड इवोल्गा ट्रेन का ऑफर रूस ने भारत को इवोल्गा हाई-स्पीड ट्रेन तकनीक ऑफर की. 360 किमी प्रति घंटा गति, 80% स्थानीय सामग्री होगी. वंदे भारत स्लीपर डील के बाद यह मेक इन इंडिया और हाई-स्पीड रेल लक्ष्यों से जुड़ा प्रस्ताव है. Advertisement भारत अपनी रेल व्यवस्था को आधुनिक बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है. हाई-स्पीड ट्रेन प्रोजेक्ट देश की प्राथमिकता में शामिल हैं. इसी बीच रूसी कंपनी ट्रांसमैशहोल्डिंग ने भारत को अपनी इवोल्गा हाई-स्पीड ट्रेन तकनीक पेश की है. यह प्रस्ताव INNOPROM.India कार्यक्रम के दौरान सामने आया. इवोल्गा ट्रेन 360 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ सकती है. आठ डिब्बों वाले सेट में 642 यात्री बैठ सकते हैं. इसकी उम्र 30 साल बताई गई है. इसमें 80% स्थानीय सामग्री का इस्तेमाल संभव है. यह ऑफर भारत-रूस के मौजूदा रेल सहयोग को आगे बढ़ाने वाला है. ट्रांसमैशहोल्डिंग पहले से भारत में सक्रिय है. कंपनी ने वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों के निर्माण के लिए संयुक्त उद्यम के जरिए 6.5 अरब डॉलर का सौदा किया है. इसके तहत 120 ट्रेनें बनाई जानी हैं. इस अनुभव के आधार पर रूस अब हाई-स्पीड सेगमेंट में भी कदम रखना चाहता है. मुंबई-अहमदाबाद जैसे कॉरिडोर में यह तकनीक उपयोगी साबित हो सकती है. सबसे महत्वपूर्ण बात 80 प्रतिशत लोकल कंटेंट की है. इससे मेक इन इंडिया पहल को सीधा लाभ मिलेगा. तकनीक हस्तांतरण
और स्थानीय उत्पादन से भारतीय उद्योग को नई क्षमता हासिल होगी. भारत वर्तमान में सेमी-हाई स्पीड वंदे भारत ट्रेनों पर फोकस कर रहा है जो 160 से 180 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलती हैं. पूर्ण हाई-स्पीड नेटवर्क के लिए बुलेट ट्रेन जैसी परियोजनाएं चल रही हैं. जापानी शिंकानसेन तकनीक मुंबई-अहमदाबाद कॉरिडोर के लिए चुनी गई है. रूसी प्रस्ताव इस क्षेत्र में विकल्प बढ़ा सकता है. खासकर लागत और स्थानीय निर्माण के मामले में यह फायदेमंद हो सकता है. भारत-रूस रेल सहयोग की पृष्ठभूमि भारत और रूस के बीच रेल क्षेत्र में पुराना सहयोग रहा है. ट्रांसमैशहोल्डिंग का वंदे भारत स्लीपर प्रोजेक्ट इसका ताजा उदाहरण है. लातूर स्थित फैक्ट्री में उत्पादन शुरू हो चुका है. भारतीय इंजीनियरों को रूस में ट्रेनिंग भी दी जा रही है. इस संयुक्त उद्यम ने दोनों देशों के औद्योगिक संबंधों को मजबूत किया है. अब इवोल्गा जैसी उन्नत तकनीक का ऑफर इसी सहयोग का विस्तार है. INNOPROM.India जैसे मंच पर यह चर्चा होना स्वाभाविक है. यहां औद्योगिक और तकनीकी साझेदारी पर जोर दिया जाता है. रूस भारत को न सिर्फ तैयार ट्रेन बेचना चाहता है बल्कि संयुक्त उत्पादन और तकनीक साझा करने को तैयार है. इससे भारत की आत्मनिर्भरता बढ़ेगी और निर्यात क्षमता भी विकसित हो सकती है.चुनौतियां और संभावनाएं हाई-स्पीड ट्रेन परियोजनाओं में सुरक्षा, ट्रैक इंफ्रास्ट्रक्चर और सिग्नलिंग सिस्टम सबसे महत्वपूर्ण होते हैं. सिर्फ ट्रेन लाना काफी नहीं.
पूरे कॉरिडोर को हाई-स्पीड के अनुकूल बनाना पड़ता है. लागत भी ज्यादा होती है. जापानी तकनीक के साथ तुलना में रूसी ऑफर कितना प्रतिस्पर्धी है यह देखना होगा. मौजूदा वंदे भारत अनुभव से सीखकर प्रक्रिया को तेज किया जा सकता है. भारत सरकार मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत के तहत घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा दे रही है. 80 प्रतिशत लोकल कंटेंट का वादा इस दिशा में सकारात्मक है. अगर सौदा होता है तो रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और तकनीकी कौशल का विकास होगा. मुंबई-अहमदाबाद के अलावा अन्य संभावित कॉरिडोर जैसे दिल्ली-वाराणसी या दक्षिण भारत के रूट्स पर भी विचार किया जा सकता है. रूसी प्रस्ताव भारत के हाई-स्पीड रेल लक्ष्यों से मेल खाता है. वंदे भारत की सफलता के बाद अब अगला कदम पूर्ण हाई-स्पीड नेटवर्क का है. तकनीक हस्तांतरण और संयुक्त उत्पादन से दोनों देशों को लाभ होगा. भारत को अपनी जरूरतों के मुताबिक बातचीत करनी होगी. सुरक्षा मानकों, लागत और समय सीमा पर सहमति जरूरी है. यह ऑफर भारत-रूस रणनीतिक साझेदारी को रेल क्षेत्र में नई ऊंचाई दे सकता है. अगर सफलता मिली तो भारतीय यात्री तेज और आरामदायक यात्रा का आनंद ले सकेंगे. साथ ही घरेलू उद्योग वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनेगा. आने वाले समय में इस प्रस्ताव पर औपचारिक चर्चाएं आगे बढ़ने की उम्मीद है. भारत की रेल क्रांति में रूसी तकनीक एक महत्वपूर्ण अध्याय लिख सकती है.
- ड्यूटी के दौरान गोली लगने से जान गंवाने वाली महिला सिपाही प्रियंका का राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार, अंतिम यात्रा में उमड़ा जन सैलाब। कौशांबी में ड्यूटी के दौरान राइफल से गोली लगने से जान गंवाने वाली गाजीपुर की 28 वर्षीय महिला सिपाही प्रियंका यादव बुधवार को पंचतत्व में विलीन हो गईं। दुल्लहपुर क्षेत्र के सिखड़ी गांव में तड़के करीब चार बजे प्रियंका का पार्थिव शरीर पहुंचते ही परिवार में कोहराम मच गया और अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण उमड़ पड़े। मां प्रमिला यादव और बहन प्रीति ने प्रियंका के पार्थिव शरीर को कंधा दिया, जबकि पिता रविंद्र यादव बेटी की अंतिम यात्रा में खुद को संभाल नहीं सके। गांव से निकली अंतिम यात्रा में सड़क के दोनों ओर लोगों की भीड़ जुटी रही। गाजीपुर के गंगा घाट पर प्रियंका का राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। पिता रविंद्र यादव ने नम आंखों से मुखाग्नि दी। कौशांबी से पहुंचे पुलिसकर्मियों ने शोक सलामी देकर अपनी साथी महिला सिपाही को अंतिम विदाई दी।1
- जमानिया: संविदा सफाई कर्मी तलाई राम की मौत पर पालिका अध्यक्ष की संवेदनहीनता, सवाल पूछने पर कतराते नजर आए चेयरमैन जमानिया (गाजीपुर)। नगर पालिका परिषद जमानिया में बीती 14 सितंबर को एक संविदा सफाई कर्मी की छत से गिरकर आकस्मिक मौत के मामले ने अब राजनीतिक और प्रशासनिक तूल पकड़ लिया है। इस भीषण हादसे में मृतक कर्मचारी तलाई राम की असमय मृत्यु से जहां एक तरफ उनका पूरा परिवार दाने-दाने को मोहताज हो गया है, वहीं दूसरी तरफ जमानिया नगर पालिका अध्यक्ष (चेयरमैन) की कथित संवेदनहीनता सामने आई है। पीड़ित परिवार की सुध लेने और मदद का ठोस आश्वासन देने के बजाय, चेयरमैन इस संवेदनशील मुद्दे पर उठ रहे सवालों से बचते और कतराते नजर आ रहे हैं, जिससे स्थानीय जनता और सफाई कर्मचारियों में भारी उबाल है। सवालों से बचते दिखे पालिका अध्यक्ष, जनता में आक्रोश हादसे के बाद जब स्थानीय पत्रकारों और जागरूक नागरिकों ने मृतक तलाई राम के परिवार के हित, पुनर्वास और आर्थिक सहायता को लेकर नगर पालिका अध्यक्ष से सवाल करने की कोशिश की, तो वे सीधे जवाब देने से बचते दिखे। प्रत्यक्षदर्शियों और सूत्रों के मुताबिक, चेयरमैन महोदय सफाई कर्मी तलाई राम की मौत के प्रति बेहद उदासीन नजर आए और इस गंभीर मुद्दे पर बात करने से कतराते रहे। एक जनप्रतिनिधि का अपनी ही पालिका के गरीब संविदा कर्मी की मौत पर ऐसा टालमटोल वाला रवैया उनकी संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।1
- समाजवादी PDA कार्यकर्ता सम्मान समारोह में आए कार्यकर्ताओं को संबोधन करते हुए सदर विधायक जय किशन साहू। आज 13 सितंबर 2026 को विधानसभा सदर गाजीपुर में बूथ, सेक्टर, जोनल, ब्लॉक संगठन के पदाधिकारी, विधानसभा के पदाधिकारी, विधानसभा व जनपद के वरिष्ठ नेतागण का सम्मान समारोह कार्यक्रम शहनाई पैलेस गाजीपुर में सपा जिलाध्यक्ष गोपाल सिंह यादव की अध्यक्षता में संपन्न हुआ। सम्मान समारोह कार्यक्रम के संयोजक सदर के विधायक श्री जैकिशन साहू जी बड़ी संख्या में आए कार्यकर्ताओं को अंग वस्त्र पेन व डायरी देकर स्वागत व सम्मान किया करते हुए आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विधायक जंगीपुर डॉ वीरेंद्र यादव ने सभी कार्यकर्ताओं को एकजुट होकर पीडीए समाज के अधिकारों ,लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए 2027 में समाजवादी पार्टी के माननीय राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अखिलेश यादव जी को उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनाने का आवाह्न किया। सम्मान समारोह का संचालन विधानसभा अध्यक्ष तहसीन अहमद ने किया। कार्यक्रम में सर्वश्री पूर्व सांसद श्री जगदीश कुशवाहा ,पूर्व विधायक श्री खुर्शीद अहमद, पूर्व जिला अध्यक्षगण श्री रामधारी यादव श्री सुदर्शन यादव, डॉक्टर नन्हकू यादव, बलिराम पटेल, मुन्नन यादव, आमिर अली, सीमा यादव, कन्हैयालाल विश्वकर्मा, डॉ समीर सिंह, आत्मा, सदानंद, राजेश, रमेश, सुशील जायसवाल, कमलेश, सूरज रामबिंद, परशुराम बिंद, विभा पाल, बिंदु वाला बिन्द, पुनीता सिंह, शौर्या सिंह, रीना रीता विश्वकर्मा सुषमा बिन्द, धनु, राकेश यादव फेकन राजेंद्र यादव, कन्हैया यादव, फेकू यादव, अजय, अभिषेक कुशवाहा अमित ठाकुर संतोष देवेंद्र, महेंद्र बिंद, शिशु रजनीकांत, पंकज जिला पंचायत, भीम यादव, धर्मदेव, रमेश गोड़, राहुल निषाद, जगत मोहन एडवोकेट, विजय शंकर एडवोकेट, गोपाल एडवोकेट, बचनू, अमन, बाबी चौधरी, असलम खान, तिलक प्रधान, सरदार प्रधान, प्रदीप प्रधान, बलराम यादव सहित बड़ी संख्या में बूथ, सेक्टर, जोनल के पदाधिकारी उपस्थितरहे। Neelam Express रियोर्टर:- प्रहलाद बौद्ध बात सच की ....1
- गणेश पूजा समारोह आज साली भद्र होम्स डीएम नगर पाली गांव सचिन सूरत में धूमधाम से मनाया गया मैं विनोद राजभर मीडिया पत्रकार गणेश मूर्ति जी बैठाया गया साली भद्र होम्स पाली गांव दम नगर सचिन सूरत आज गणपति जी का स्थापना किया हम लोग चलता रहेगा बहुत धूमधाम से हम लोग को मनाया गणपति पूजा समारोह मेरे पूरी कमेटी के साथ आयोजन किया गया गणपति पूजा समारोह में मेरे भाई परिवार सब भाग लिए और उसे हिसाब से मनाई मैं विनोद राजभर मीडिया पत्रकार आप लोगों के तहे दिल से धन्यवाद1
- गरीब समाज पार्टी का तहसील पर प्रदर्शन, 10 सूत्रीय मांगों को लेकर जमकर नारेबाजी बेरोजगारी और महंगाई के मुद्दे पर सरकार के खिलाफ जताई नाराजगी गरीब समाज पार्टी ने तहसील परिसर में 10 सूत्रीय मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। इस दौरान कार्यकर्ताओं ने बेरोजगारी और लगातार बढ़ती महंगाई को लेकर जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि महंगाई बढ़ने से गरीब परिवारों के सामने आर्थिक संकट गहरा गया है। बेरोजगारी के कारण बड़ी संख्या में लोगों के पास आय का कोई स्थायी स्रोत नहीं है, जिससे परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो रहा है। पार्टी कार्यकर्ताओं ने सरकार से 10 सूत्रीय मांगों पर गंभीरता से विचार करते हुए गरीब, मजदूर और बेरोजगार वर्ग के हित में ठोस कदम उठाने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान तहसील परिसर में काफी देर तक नारेबाजी होती रही।1
- *कक्षा-1 की छात्रा समारा नाज की शिकायत पर पूर्ण हुआ रास्ते का निर्माण।* *कक्षा-1 की छात्रा समारा नाज की शिकायत पर पूर्ण हुआ रास्ते का निर्माण।* *जिलाधिकारी ने भटकुला पट्टी पहुंचकर सड़क की गुणवत्ता का किया स्थलीय निरीक्षण।* *समस्याओं के त्वरित निस्तारण के साथ जनसुविधाओं का ध्यान रखना जिला प्रशासन की प्राथमिकता : जिलाधिकारी।* नगर पालिका परिषद मऊ के अंतर्गत भटकुला पट्टी स्थित वार्ड नंबर-17 में रास्ता निर्माण को लेकर कक्षा-1 की छात्रा समारा नाज द्वारा जनसुनवाई के दौरान जिलाधिकारी महोदय के समक्ष शिकायत की गई थी। जिला प्रशासन द्वारा शिकायत का तत्काल संज्ञान लेते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए, जिसके क्रम में रास्ता निर्माण का कार्य पूर्ण करा लिया गया। आज जिलाधिकारी श्री आनंद वर्द्धन द्वारा मौके पर पहुंचकर नवनिर्मित रास्ते का स्थलीय निरीक्षण किया गया तथा निर्माण कार्य की गुणवत्ता की जांच की गई। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से निर्माण कार्य की गुणवत्ता एवं अन्य आवश्यक बिंदुओं के संबंध में जानकारी प्राप्त की तथा आवश्यक निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने आसपास की गलियों का भी सर्वे कराकर आवश्यकतानुसार कार्रवाई करने के निर्देश अधिशासी अधिकारी नगरपालिका को दिए। उन्होंने स्थानीय लोगों से संवाद कर क्षेत्र की अन्य समस्याओं एवं मूलभूत सुविधाओं के संबंध में जानकारी ली तथा प्राप्त समस्याओं के नियमानुसार एवं समयबद्ध ढंग से समाधान के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए। निरीक्षण के उपरांत जिलाधिकारी ने छात्रा समारा नाज से मुलाकात की तथा उसे साइकिल एवं चॉकलेट उपहार स्वरूप भेंट की। रास्ते का निर्माण पूर्ण होने और उपहार पाकर समारा नाज काफी प्रसन्न हुई। बच्ची एवं उसके परिजनों द्वारा जिला प्रशासन की त्वरित कार्रवाई के लिए जिलाधिकारी के प्रति आभार व्यक्त किया गया। इस दौरान आसपास के स्थानीय लोगों ने भी क्षेत्र में कराए गए कार्यों तथा जिलाधिकारी द्वारा मौके पर पहुंचकर समस्याओं का जायजा लेने और उनके समाधान के लिए दिए गए निर्देशों की सराहना की। निरीक्षण के दौरान अधिशासी अधिकारी, नगर पालिका परिषद मऊ सहित अन्य संबंधित अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।2
- *जिलाधिकारी ने कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय रानीपुर का किया आकस्मिक निरीक्षण* *जिलाधिकारी ने कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय रानीपुर का किया आकस्मिक निरीक्षण* *बालिकाओं से संवाद कर शैक्षणिक स्तर की ली जानकारी, व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के दिए निर्देश* जिलाधिकारी श्री आनंद वर्द्धन ने कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय, रानीपुर का आकस्मिक निरीक्षण कर विद्यालय में पठन-पाठन, आवासीय व्यवस्था, भोजन, स्वच्छता एवं निर्माण कार्यों की स्थिति का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने विद्यालय की विभिन्न कक्षाओं में पहुंचकर बालिकाओं से संवाद किया तथा उनकी पढ़ाई-लिखाई से संबंधित विषयों पर सवाल-जवाब किए। अधिकांश बालिकाओं द्वारा प्रश्नों के संतोषजनक उत्तर दिए गए। जिलाधिकारी ने छात्राओं को नियमित अध्ययन करने तथा शिक्षकों द्वारा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। जिलाधिकारी ने विद्यालय के किचन एवं स्टॉक रूम का निरीक्षण किया। उन्होंने उपलब्ध खाद्य सामग्री का स्टॉक रजिस्टर से मिलान कराया तथा भोजन में प्रयुक्त होने वाली सामग्रियों की गुणवत्ता की भी जांच की, जो संतोषजनक पाई गई। उन्होंने भोजन की गुणवत्ता एवं स्वच्छता व्यवस्था को निरंतर बनाए रखने के निर्देश दिए। इसके पश्चात जिलाधिकारी ने बालिकाओं के डॉरमेट्री का निरीक्षण किया। छात्रावास में बेहतर वेंटिलेशन की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, ताकि बालिकाओं को रहने के लिए स्वच्छ एवं सुविधाजनक वातावरण उपलब्ध हो सके। जिलाधिकारी ने कंप्यूटर कक्ष का भी निरीक्षण किया। सभी कंप्यूटर क्रियाशील स्थिति में पाए गए तथा बालिकाएं कंप्यूटर पर कार्य करती हुई मिलीं। उन्होंने कंप्यूटर शिक्षा को और प्रभावी बनाने के निर्देश दिए। वहीं लाइब्रेरी के निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने निर्देशित किया कि बालिकाओं की आवश्यकता के अनुरूप सभी आवश्यक एवं उपयोगी पुस्तकें उपलब्ध कराना सुनिश्चित किया जाए। विद्यालय परिसर में टॉयलेट ब्लॉक एवं अतिरिक्त डॉरमेट्री के निर्माण कार्य का भी जिलाधिकारी ने निरीक्षण किया। निर्माण कार्य कार्यदायी संस्था यूपीसीएलडीएफ द्वारा कराया जा रहा है। जिलाधिकारी ने निर्माण कार्यों में गुणवत्ता का विशेष ध्यान रखते हुए निर्धारित मानकों के अनुरूप कार्य पूर्ण कराने के निर्देश दिए। अतिरिक्त डॉरमेट्री में बाथरूम एवं टॉयलेट का निर्माण अलग स्थान पर प्रस्तावित होने पर उन्होंने नक्शे का पुनः परीक्षण कर, यथासंभव डॉरमेट्री परिसर के अंदर ही बाथरूम एवं टॉयलेट की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान विद्यालय के पीछे स्थित जर्जर भवन का भी जिलाधिकारी ने जायजा लिया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई पूर्ण करते हुए जर्जर भवन को ध्वस्त कराने के निर्देश दिए, ताकि किसी प्रकार की दुर्घटना की संभावना न रहे। जिलाधिकारी ने कहा कि आवासीय विद्यालय में अध्ययनरत बालिकाओं को सुरक्षित, स्वच्छ, गुणवत्तापूर्ण एवं सुविधाजनक शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिकता है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को विद्यालय की व्यवस्थाओं की नियमित निगरानी करते हुए आवश्यक सुधार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान खंड शिक्षा अधिकारी रानीपुर श्री सुनील कुमार सिंह सहित अन्य संबंधित अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।4
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