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मध्य प्रदेश के अशोकनगर जिले में 10 वर्षीय मूकबधिर दिव्यांग बालिका के साथ हुए जघन्य सामूहिक दुष्कर्म के मामले में न्यायालय ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अशोकनगर के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश माननीय श्री के. के. निमामा ने तीनों आरोपियों भगवत कुशवाह, जगदीश कुशवाह और अजय कुशवाह को दोषी करार देते हुए शेष प्राकृतिक जीवन तक आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही कोर्ट ने प्रत्येक दोषी पर 20,000 रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। इस सनसनीखेज मामले में पुलिस की त्वरित कार्रवाई के चलते महज 24 घंटे के भीतर आरोपियों की गिरफ्तारी की गई, 38 दिनों में विवेचना पूरी हुई और सिर्फ 8 महीनों के भीतर न्यायालय से दोषियों को सजा मिल गई। यह दर्दनाक घटना तब हुई जब आरोपी अजय कुशवाहा, जगदीश कुशवाहा और भगवत कुशवाहा ने मूकबधिर दिव्यांग बालिका की लाचारी का फायदा उठाया। वे उसे जबरन मक्का के खेत में ले गए और उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दिया। बालिका का शोर सुनकर जब आसपास के प्रत्यक्षदर्शी वहां पहुंचे, तो आरोपी पीड़िता को घायल अवस्था में ही छोड़कर मौके से फरार हो गए। परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने तत्काल मामला दर्ज कर पीड़िता का इलाज कराया। चूंकि पीड़िता मूकबधिर थी, इसलिए पुलिस ने कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए द्विभाषीय विशेषज्ञ (साइन लैंग्वेज इंटरप्रेटर) की मदद ली और धारा 183 बीएनएसएस के तहत कोर्ट के सामने उसके बयान दर्ज कराए। अशोकनगर पुलिस अधीक्षक श्री राजीव कुमार मिश्रा के निर्देशन में महिलाओं और दिव्यांगों के खिलाफ अपराधों पर जीरो टॉलरेंस नीति के तहत सख्त कार्रवाई की गई। पुलिस टीम ने तेजी दिखाते हुए वारदात के 24 घंटे के अंदर तीनों आरोपियों को दबोच लिया। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने वैज्ञानिक ढंग से जांच की, डीएनए सैंपल और पीड़िता की दिव्यांगता व उम्र के साक्ष्य जुटाए। पुलिस ने अपराध क्रमांक 166/2025 में भारतीय न्याय संहिता की धारा 65(2), 70(2), 96 बीएनएस, पॉक्सो एक्ट की धारा 5(g), 5(m), 5(j) और दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम की धारा 92 (घ) के तहत कार्रवाई की। इसके बाद मात्र 38 दिनों में विवेचना पूरी कर 02 नवंबर 2025 को न्यायालय में चालान क्रमांक 165/2025 पेश किया गया। मुकदमे के दौरान पुलिस ने गवाहों की समय पर कोर्ट में उपस्थिति सुनिश्चित की, जिससे अभियोजन पक्ष ने मजबूती से पैरवी की। इस उत्कृष्ट विवेचना और सफल पैरवी के लिए एसपी राजीव कुमार मिश्रा ने पूरी टीम की सराहना की है। इस टीम में जिला अभियोजन अधिकारी श्री संजीव श्रीवास्तव, उप निरीक्षक आशुतोष गुप्ता (वर्तमान थाना प्रभारी नई सराय), उप निरीक्षक पुनीत दीक्षित (तत्कालीन थाना प्रभारी नईसरांय व विवेचक), सहायक उप निरीक्षक भोलाराम रघुवंशी, कोर्ट मुंशी शिवराम, कोर्ट मोहर्रिर नीरज सक्सेना और आरक्षक अमित रघुवंशी शामिल रहे। एसपी ने दोहराया कि अशोकनगर पुलिस महिलाओं, बालिकाओं और दिव्यांगों के खिलाफ अपराध करने वालों के विरुद्ध कठोरतम कानूनी कार्रवाई करने और पीड़ितों को शीघ्र न्याय दिलाने के लिए पूर्ण प्रतिबद्धता के साथ कार्य करती रहेगी।

1 hr ago
user_रीड न्यूज मीडिया एजेंसी
रीड न्यूज मीडिया एजेंसी
पत्रकार अशोकनगर, अशोकनगर, मध्य प्रदेश•
1 hr ago
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मध्य प्रदेश के अशोकनगर जिले में 10 वर्षीय मूकबधिर दिव्यांग बालिका के साथ हुए जघन्य सामूहिक दुष्कर्म के मामले में न्यायालय ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। अशोकनगर के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश माननीय श्री के. के. निमामा ने तीनों आरोपियों भगवत कुशवाह, जगदीश कुशवाह और अजय कुशवाह को दोषी करार देते हुए शेष प्राकृतिक जीवन तक आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इसके साथ ही कोर्ट ने प्रत्येक दोषी पर 20,000 रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। इस सनसनीखेज मामले में पुलिस की त्वरित कार्रवाई के चलते महज 24 घंटे के भीतर आरोपियों की गिरफ्तारी की गई, 38 दिनों में विवेचना पूरी हुई और सिर्फ 8 महीनों के भीतर न्यायालय से दोषियों को सजा मिल गई। यह दर्दनाक घटना तब हुई जब आरोपी अजय कुशवाहा, जगदीश कुशवाहा और भगवत कुशवाहा ने मूकबधिर दिव्यांग बालिका की लाचारी का फायदा उठाया। वे उसे जबरन मक्का के खेत में ले गए और उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म की वारदात को अंजाम दिया। बालिका का शोर सुनकर जब आसपास के प्रत्यक्षदर्शी वहां पहुंचे, तो आरोपी पीड़िता को घायल अवस्था में ही छोड़कर मौके से फरार हो गए। परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने तत्काल मामला दर्ज कर पीड़िता का इलाज कराया। चूंकि पीड़िता मूकबधिर थी, इसलिए पुलिस ने कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए द्विभाषीय विशेषज्ञ (साइन लैंग्वेज इंटरप्रेटर) की मदद ली और धारा 183 बीएनएसएस के तहत कोर्ट के सामने उसके बयान दर्ज कराए। अशोकनगर पुलिस अधीक्षक श्री राजीव कुमार मिश्रा के निर्देशन में महिलाओं और दिव्यांगों के खिलाफ अपराधों पर जीरो टॉलरेंस नीति के तहत सख्त कार्रवाई की गई। पुलिस टीम ने तेजी दिखाते हुए वारदात के 24 घंटे के अंदर तीनों आरोपियों को दबोच लिया। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने वैज्ञानिक ढंग से जांच की, डीएनए सैंपल और पीड़िता की दिव्यांगता व उम्र के साक्ष्य जुटाए। पुलिस ने अपराध क्रमांक 166/2025 में भारतीय न्याय संहिता की धारा 65(2), 70(2), 96 बीएनएस, पॉक्सो एक्ट की धारा 5(g), 5(m), 5(j) और दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम की धारा 92 (घ) के तहत कार्रवाई की। इसके बाद मात्र 38 दिनों में विवेचना पूरी कर 02 नवंबर 2025 को न्यायालय में चालान क्रमांक 165/2025 पेश किया गया। मुकदमे के दौरान पुलिस ने गवाहों की समय पर कोर्ट में उपस्थिति सुनिश्चित की, जिससे अभियोजन पक्ष ने मजबूती से पैरवी की। इस उत्कृष्ट विवेचना और सफल पैरवी के लिए एसपी राजीव कुमार मिश्रा ने पूरी टीम की सराहना की है। इस टीम में जिला अभियोजन अधिकारी श्री संजीव श्रीवास्तव, उप निरीक्षक आशुतोष गुप्ता (वर्तमान थाना प्रभारी नई सराय), उप निरीक्षक पुनीत दीक्षित (तत्कालीन थाना प्रभारी नईसरांय व विवेचक), सहायक उप निरीक्षक भोलाराम रघुवंशी, कोर्ट मुंशी शिवराम, कोर्ट मोहर्रिर नीरज सक्सेना और आरक्षक अमित रघुवंशी शामिल रहे। एसपी ने दोहराया कि अशोकनगर पुलिस महिलाओं, बालिकाओं और दिव्यांगों के खिलाफ अपराध करने वालों के विरुद्ध कठोरतम कानूनी कार्रवाई करने और पीड़ितों को शीघ्र न्याय दिलाने के लिए पूर्ण प्रतिबद्धता के साथ कार्य करती रहेगी।

More news from मध्य प्रदेश and nearby areas
  • अशोकनगर जिले के शाढ़ौरा नगर और इसके आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में रविवार, 12 जुलाई 2026 को बिजली आपूर्ति अस्थायी रूप से बाधित रहेगी। विद्युत वितरण केंद्र शाढ़ौरा द्वारा जारी सूचना के अनुसार, इस दिन सुबह 10:00 बजे से लेकर शाम 4:00 बजे तक कुल 6 घंटे का बिजली शटडाउन लिया जाएगा। इस दौरान 11 केवी शाढ़ौरा टाउन फीडर और 11 केवी मुशावदा पंप फीडर से जुड़ी बिजली सप्लाई पूरी तरह बंद रहेगी, जिससे नगर सहित संबंधित ग्रामीण इलाकों के लोग प्रभावित होंगे। शाढ़ौरा विद्युत वितरण केंद्र के सहायक प्रबंधक ने बताया कि यह शटडाउन आरडीएसएस (RDSS) योजना के अंतर्गत 11 केवी लाइन के कंडक्टर संवर्धन कार्य को पूरा करने के लिए लिया जा रहा है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि संवर्धन का यह काम निर्धारित समय से पहले पूरा हो जाता है, तो सभी प्रभावित क्षेत्रों की विद्युत आपूर्ति को तत्काल बहाल कर दिया जाएगा।
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    अशोकनगर जिले के शाढ़ौरा नगर और इसके आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में रविवार, 12 जुलाई 2026 को बिजली आपूर्ति अस्थायी रूप से बाधित रहेगी। विद्युत वितरण केंद्र शाढ़ौरा द्वारा जारी सूचना के अनुसार, इस दिन सुबह 10:00 बजे से लेकर शाम 4:00 बजे तक कुल 6 घंटे का बिजली शटडाउन लिया जाएगा। इस दौरान 11 केवी शाढ़ौरा टाउन फीडर और 11 केवी मुशावदा पंप फीडर से जुड़ी बिजली सप्लाई पूरी तरह बंद रहेगी, जिससे नगर सहित संबंधित ग्रामीण इलाकों के लोग प्रभावित होंगे।

शाढ़ौरा विद्युत वितरण केंद्र के सहायक प्रबंधक ने बताया कि यह शटडाउन आरडीएसएस (RDSS) योजना के अंतर्गत 11 केवी लाइन के कंडक्टर संवर्धन कार्य को पूरा करने के लिए लिया जा रहा है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि संवर्धन का यह काम निर्धारित समय से पहले पूरा हो जाता है, तो सभी प्रभावित क्षेत्रों की विद्युत आपूर्ति को तत्काल बहाल कर दिया जाएगा।
    user_Devesh Ojha patrakaar
    Devesh Ojha patrakaar
    Local News Reporter शाढ़ोरा, अशोकनगर, मध्य प्रदेश•
    16 hrs ago
  • पानीहाटी के पूर्व विधायक निर्मल घोष को नव तृणमूल के ऋतब्रत से मिलने जाते देखा गया है। इस मुलाकात को लेकर प्रतिक्रिया देते हुए मंत्री अर्जुन सिंह ने कहा है कि निर्मल घोष क्या करते हैं और किस तृणमूल के साथ रहते हैं, यह उनका पूरी तरह से निजी मामला है। लेकिन कानून अपने रास्ते पर चलेगा। मंत्री अर्जुन सिंह ने स्पष्ट किया कि निर्मल घोष चाहे किसी के भी साथ रहें, उन्हें गिरफ्तार किया जाएगा और पुलिस अपना काम करेगी।
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    पानीहाटी के पूर्व विधायक निर्मल घोष को नव तृणमूल के ऋतब्रत से मिलने जाते देखा गया है। इस मुलाकात को लेकर प्रतिक्रिया देते हुए मंत्री अर्जुन सिंह ने कहा है कि निर्मल घोष क्या करते हैं और किस तृणमूल के साथ रहते हैं, यह उनका पूरी तरह से निजी मामला है। लेकिन कानून अपने रास्ते पर चलेगा। मंत्री अर्जुन सिंह ने स्पष्ट किया कि निर्मल घोष चाहे किसी के भी साथ रहें, उन्हें गिरफ्तार किया जाएगा और पुलिस अपना काम करेगी।
    user_JONOMON KHOBOR
    JONOMON KHOBOR
    Guna, Madhya Pradesh•
    3 hrs ago
  • guna city
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    guna city
    user_Abhishek Kushwah guna
    Abhishek Kushwah guna
    गुना नगर, गुना, मध्य प्रदेश•
    5 hrs ago
  • मध्य प्रदेश में ऐतिहासिक गोदावर्मन बनाम भारत सरकार मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के पालन को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। भ्रष्टाचार विरोधी संस्था 'सिस्टम परिवर्तन अभियान' (Crusaders Against Corruption) ने मध्य प्रदेश के प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख को पत्र लिखकर आरोप लगाया है कि सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट आदेश के बावजूद राज्य में अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई है। संस्था ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि 15 मई 2025 को सर्वोच्च न्यायालय ने गोदावर्मन प्रकरण में महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए राज्यों को निर्देश दिए थे कि वास्तविक रूप से वन श्रेणी में आने वाली सभी जमीनों का संरक्षण सुनिश्चित किया जाए। इसके तहत वन भूमि से अवैध कब्जे हटाने, अवैध उपयोग की स्थिति में संबंधितों से भूमि का मूल्य वसूलने और उस राशि का उपयोग वनीकरण व वन संरक्षण में करने का निर्देश था। संगठन का आरोप है कि इस आदेश के लगभग 14 महीने बीत जाने के बाद भी मध्य प्रदेश में न तो अतिक्रमण हटाया गया है और न ही अवैध उपयोगकर्ताओं से भूमि की कीमत वसूली गई है, जबकि कई क्षेत्रों में वन भूमि पर निर्माण और व्यावसायिक गतिविधियां लगातार जारी हैं। पत्र में सीहोर वनमंडल के एक मामले को प्रमुखता से उठाते हुए आरोप लगाया गया है कि लगभग 50 लाख वर्गफुट वन भूमि पर्यटन विभाग को हस्तांतरित कर दी गई, जहां अब एक निजी होटल और रिसॉर्ट परियोजना विकसित की जा रही है। संस्था का दावा है कि इस वन क्षेत्र में बड़ी संख्या में पेड़ मौजूद थे और निर्माण के चलते यह क्षेत्र प्रभावित हुआ है। संगठन ने पूरे प्रदेश में वन भूमि का सर्वे कराने, अवैध कब्जे हटाने, भूमि का मूल्य वसूलने और दोषी अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने की मांग की है। हालांकि, इन आरोपों की वन विभाग या किसी स्वतंत्र एजेंसी द्वारा पुष्टि नहीं की गई है और इस मामले पर फिलहाल वन विभाग की प्रतिक्रिया आना बाकी है।
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    मध्य प्रदेश में ऐतिहासिक गोदावर्मन बनाम भारत सरकार मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के पालन को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। भ्रष्टाचार विरोधी संस्था 'सिस्टम परिवर्तन अभियान' (Crusaders Against Corruption) ने मध्य प्रदेश के प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख को पत्र लिखकर आरोप लगाया है कि सुप्रीम कोर्ट के स्पष्ट आदेश के बावजूद राज्य में अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई है।

संस्था ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि 15 मई 2025 को सर्वोच्च न्यायालय ने गोदावर्मन प्रकरण में महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए राज्यों को निर्देश दिए थे कि वास्तविक रूप से वन श्रेणी में आने वाली सभी जमीनों का संरक्षण सुनिश्चित किया जाए। इसके तहत वन भूमि से अवैध कब्जे हटाने, अवैध उपयोग की स्थिति में संबंधितों से भूमि का मूल्य वसूलने और उस राशि का उपयोग वनीकरण व वन संरक्षण में करने का निर्देश था। संगठन का आरोप है कि इस आदेश के लगभग 14 महीने बीत जाने के बाद भी मध्य प्रदेश में न तो अतिक्रमण हटाया गया है और न ही अवैध उपयोगकर्ताओं से भूमि की कीमत वसूली गई है, जबकि कई क्षेत्रों में वन भूमि पर निर्माण और व्यावसायिक गतिविधियां लगातार जारी हैं।

पत्र में सीहोर वनमंडल के एक मामले को प्रमुखता से उठाते हुए आरोप लगाया गया है कि लगभग 50 लाख वर्गफुट वन भूमि पर्यटन विभाग को हस्तांतरित कर दी गई, जहां अब एक निजी होटल और रिसॉर्ट परियोजना विकसित की जा रही है। संस्था का दावा है कि इस वन क्षेत्र में बड़ी संख्या में पेड़ मौजूद थे और निर्माण के चलते यह क्षेत्र प्रभावित हुआ है। संगठन ने पूरे प्रदेश में वन भूमि का सर्वे कराने, अवैध कब्जे हटाने, भूमि का मूल्य वसूलने और दोषी अधिकारियों की जिम्मेदारी तय करने की मांग की है। हालांकि, इन आरोपों की वन विभाग या किसी स्वतंत्र एजेंसी द्वारा पुष्टि नहीं की गई है और इस मामले पर फिलहाल वन विभाग की प्रतिक्रिया आना बाकी है।
    user_Deepak ojha
    Deepak ojha
    Local News Reporter गुना नगर, गुना, मध्य प्रदेश•
    21 hrs ago
  • गुना के बमोरी विधानसभा क्षेत्र के तहत आने वाली ग्राम पंचायत झागर के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में साइकिल वितरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम के दौरान कक्षा 9 में नवीन प्रवेश लेने वाले छात्र-छात्राओं को साइकिलें प्रदान की गईं। इस अवसर पर विद्यालय के प्राचार्य नरेंद्र भार्गव, ब्लॉक शिक्षा अधिकारी आशुतोष श्रीवास्तव और स्कूल का समस्त स्टाफ विशेष रूप से उपस्थित रहा। विद्यालय के प्राचार्य नरेंद्र भार्गव ने बताया कि दूरदराज के क्षेत्रों से आने वाले नौवीं कक्षा के विद्यार्थियों को निशुल्क साइकिल वितरण का कार्य लगातार जारी है। शासन की इस कल्याणकारी योजना से दूरस्थ क्षेत्रों के छात्र-छात्राओं को विद्यालय आने-जाने में काफी सुविधा मिलेगी। प्राचार्य ने छात्रों को नियमित रूप से स्कूल आने और अच्छे अंकों से उत्तीर्ण होकर अपना भविष्य संवारने की सीख दी। उन्होंने जोर देकर कहा कि शिक्षा ही जीवन का मूल आधार है और शिक्षित होकर ही हम अपना जीवन सुधार सकते हैं। इस मौके पर विद्यालय के स्टाफ ने सभी अभिभावकों से अपने बच्चों को नियमित रूप से स्कूल भेजने की अपील की। स्टाफ ने जानकारी दी कि शासन द्वारा छात्रों के हित में साइकिल के साथ-साथ निशुल्क छात्रवृत्ति और पुस्तकों का भी वितरण किया जा रहा है, जिसका लाभ विद्यार्थियों को समय पर मिल रहा है।
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    गुना के बमोरी विधानसभा क्षेत्र के तहत आने वाली ग्राम पंचायत झागर के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में साइकिल वितरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम के दौरान कक्षा 9 में नवीन प्रवेश लेने वाले छात्र-छात्राओं को साइकिलें प्रदान की गईं। इस अवसर पर विद्यालय के प्राचार्य नरेंद्र भार्गव, ब्लॉक शिक्षा अधिकारी आशुतोष श्रीवास्तव और स्कूल का समस्त स्टाफ विशेष रूप से उपस्थित रहा।

विद्यालय के प्राचार्य नरेंद्र भार्गव ने बताया कि दूरदराज के क्षेत्रों से आने वाले नौवीं कक्षा के विद्यार्थियों को निशुल्क साइकिल वितरण का कार्य लगातार जारी है। शासन की इस कल्याणकारी योजना से दूरस्थ क्षेत्रों के छात्र-छात्राओं को विद्यालय आने-जाने में काफी सुविधा मिलेगी। प्राचार्य ने छात्रों को नियमित रूप से स्कूल आने और अच्छे अंकों से उत्तीर्ण होकर अपना भविष्य संवारने की सीख दी। उन्होंने जोर देकर कहा कि शिक्षा ही जीवन का मूल आधार है और शिक्षित होकर ही हम अपना जीवन सुधार सकते हैं।

इस मौके पर विद्यालय के स्टाफ ने सभी अभिभावकों से अपने बच्चों को नियमित रूप से स्कूल भेजने की अपील की। स्टाफ ने जानकारी दी कि शासन द्वारा छात्रों के हित में साइकिल के साथ-साथ निशुल्क छात्रवृत्ति और पुस्तकों का भी वितरण किया जा रहा है, जिसका लाभ विद्यार्थियों को समय पर मिल रहा है।
    user_रणधीर चदेल
    रणधीर चदेल
    पत्रकार (फोटोग्राफर) Guna, Madhya Pradesh•
    23 hrs ago
  • शिवपुरी के रन्नौद में यह निर्णय लिया गया है कि किसी भी कार्यकर्ता का इस्तीफा स्वीकार नहीं किया जाएगा।
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    शिवपुरी के रन्नौद में यह निर्णय लिया गया है कि किसी भी कार्यकर्ता का इस्तीफा स्वीकार नहीं किया जाएगा।
    user_Mr_Pawan_kumar Yaduvanshi
    Mr_Pawan_kumar Yaduvanshi
    रन्नौद, शिवपुरी, मध्य प्रदेश•
    9 hrs ago
  • विदिशा के सिविल लाइन थाना क्षेत्र स्थित पीतल मिल चौराहा के पास एक बंद पड़ी दुकान में सटोरिए ने बाकायदा सट्टे की दुकान खोल रखी है। यहाँ खुलेआम सट्टा चल रहा है और इसके लिए बाकायदा कर्मचारी रखे गए हैं जो शिफ्ट-बाय-शिफ्ट में काम करते हैं। इस खुलेआम चल रहे सट्टे के कारोबार की खबर सिविल लाइन पुलिस को भी है, लेकिन जब भी पुलिस दबिश देने जाती है, उसके पहले ही सट्टा खेलने और खिलाने वाले गायब हो जाते हैं। सट्टा खिलाने वाला मास्टरमाइंड अब तक पुलिस की पकड़ से दूर है।
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    विदिशा के सिविल लाइन थाना क्षेत्र स्थित पीतल मिल चौराहा के पास एक बंद पड़ी दुकान में सटोरिए ने बाकायदा सट्टे की दुकान खोल रखी है। यहाँ खुलेआम सट्टा चल रहा है और इसके लिए बाकायदा कर्मचारी रखे गए हैं जो शिफ्ट-बाय-शिफ्ट में काम करते हैं।

इस खुलेआम चल रहे सट्टे के कारोबार की खबर सिविल लाइन पुलिस को भी है, लेकिन जब भी पुलिस दबिश देने जाती है, उसके पहले ही सट्टा खेलने और खिलाने वाले गायब हो जाते हैं। सट्टा खिलाने वाला मास्टरमाइंड अब तक पुलिस की पकड़ से दूर है।
    user_रिपोर्टर rupesh yadav
    रिपोर्टर rupesh yadav
    Photographer सिरोंज, विदिशा, मध्य प्रदेश•
    22 hrs ago
  • कोलकाता के नेताजी सुभाष चंद्र बोस हवाई अड्डे (दमदम हवाई अड्डा) की सुरक्षा को लेकर एक बड़ा कदम उठाते हुए रनवे के बेहद करीब स्थित सदी पुरानी गौरीपुर जामे मस्जिद को स्थानांतरित करने की योजना बनाई जा रही है। इस सिलसिले में शुक्रवार को उत्तर 24 परगना के जिला मजिस्ट्रेट (डीएम) कार्यालय में स्थानीय विधायक और मस्जिद समिति के सदस्यों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इसके बाद हवाई अड्डा प्राधिकरण के प्रतिनिधियों और सुरक्षा समिति के सदस्यों की मौजूदगी वाले एक विशेष निरीक्षण दल ने मस्जिद का दौरा किया। हवाई अड्डा सुरक्षा समिति ने भी इस मुद्दे पर अलग से बैठक की है। करीब 136 साल पुरानी यह मस्जिद, जिसे 'बांकड़ा मस्जिद' भी कहा जाता है, हवाई अड्डे की सुरक्षा के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि रनवे से बिल्कुल सटीक दूरी पर स्थित होने के कारण, भारी बारिश या घने कोहरे में कम दृश्यता के दौरान यह मस्जिद पायलटों के लिए 'विजुअल इल्यूजन' (दृष्टिभ्रम) पैदा करती है, जिससे किसी गंभीर दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। इसके अलावा, इस मस्जिद की वजह से पिछले 30 वर्षों से हवाई अड्डे के दूसरे रनवे के विस्तार का काम रुका हुआ है। हालांकि मस्जिद स्थानांतरण का मामला पिछले तीन दशकों से चर्चा में है, लेकिन स्थानीय बाधाओं और पिछली वामपंथी व तृणमूल कांग्रेस सरकारों की ढिलाई के कारण हवाई अड्डे की सुरक्षा के बजाय धार्मिक भावनाओं की राजनीति हावी रही। इस ऐतिहासिक स्थल का इतिहास पुराना है। कोलकाता हवाई अड्डा 1924 में शुरू हुआ था और 1962 में एअरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने हवाई अड्डे के विस्तार के लिए इस प्राचीन वक्फ संपत्ति का अधिग्रहण किया था। उस समय इसके पास से गुजरने वाले यशोर रोड को 1965 में मुख्य मार्ग से ढाई किलोमीटर घुमाकर गौरीपुर मोड़ से जोड़ दिया गया, जिससे अब मस्जिद यशोर रोड से करीब 3 किलोमीटर दूर हवाई अड्डे की चारदीवारी के अंदर सुरक्षित है। नमाजियों के लिए यहाँ जाने की एक विशेष और कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई है; गौरीपुर काली मंदिर के विपरीत बने एक छोटे लोहे के गेट पर CISF वॉच टावर तैनात है। यहाँ घंटी बजाने के बाद नमाज पढ़ने वालों का आधार कार्ड जांचा जाता है और फिर हवाई अड्डा प्राधिकरण उन्हें विशेष बसों के जरिए मस्जिद तक ले जाता है। दैनिक तीन शिफ्टों में ऐसी 4 बसों की व्यवस्था होती है। यदि भविष्य में इस मस्जिद को हटाने या ढहाने का काम शुरू होता है, तो बाहरी दुनिया को इसका पता भी नहीं चलेगा क्योंकि हवाई अड्डे के अपने उपकरण सीधे रनवे के रास्ते पुराने टर्मिनल के कार्गो विभाग से वहाँ तक पहुँच सकते हैं।
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    कोलकाता के नेताजी सुभाष चंद्र बोस हवाई अड्डे (दमदम हवाई अड्डा) की सुरक्षा को लेकर एक बड़ा कदम उठाते हुए रनवे के बेहद करीब स्थित सदी पुरानी गौरीपुर जामे मस्जिद को स्थानांतरित करने की योजना बनाई जा रही है। इस सिलसिले में शुक्रवार को उत्तर 24 परगना के जिला मजिस्ट्रेट (डीएम) कार्यालय में स्थानीय विधायक और मस्जिद समिति के सदस्यों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इसके बाद हवाई अड्डा प्राधिकरण के प्रतिनिधियों और सुरक्षा समिति के सदस्यों की मौजूदगी वाले एक विशेष निरीक्षण दल ने मस्जिद का दौरा किया। हवाई अड्डा सुरक्षा समिति ने भी इस मुद्दे पर अलग से बैठक की है।

करीब 136 साल पुरानी यह मस्जिद, जिसे 'बांकड़ा मस्जिद' भी कहा जाता है, हवाई अड्डे की सुरक्षा के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि रनवे से बिल्कुल सटीक दूरी पर स्थित होने के कारण, भारी बारिश या घने कोहरे में कम दृश्यता के दौरान यह मस्जिद पायलटों के लिए 'विजुअल इल्यूजन' (दृष्टिभ्रम) पैदा करती है, जिससे किसी गंभीर दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। इसके अलावा, इस मस्जिद की वजह से पिछले 30 वर्षों से हवाई अड्डे के दूसरे रनवे के विस्तार का काम रुका हुआ है। हालांकि मस्जिद स्थानांतरण का मामला पिछले तीन दशकों से चर्चा में है, लेकिन स्थानीय बाधाओं और पिछली वामपंथी व तृणमूल कांग्रेस सरकारों की ढिलाई के कारण हवाई अड्डे की सुरक्षा के बजाय धार्मिक भावनाओं की राजनीति हावी रही।

इस ऐतिहासिक स्थल का इतिहास पुराना है। कोलकाता हवाई अड्डा 1924 में शुरू हुआ था और 1962 में एअरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने हवाई अड्डे के विस्तार के लिए इस प्राचीन वक्फ संपत्ति का अधिग्रहण किया था। उस समय इसके पास से गुजरने वाले यशोर रोड को 1965 में मुख्य मार्ग से ढाई किलोमीटर घुमाकर गौरीपुर मोड़ से जोड़ दिया गया, जिससे अब मस्जिद यशोर रोड से करीब 3 किलोमीटर दूर हवाई अड्डे की चारदीवारी के अंदर सुरक्षित है। नमाजियों के लिए यहाँ जाने की एक विशेष और कड़ी सुरक्षा व्यवस्था की गई है; गौरीपुर काली मंदिर के विपरीत बने एक छोटे लोहे के गेट पर CISF वॉच टावर तैनात है। यहाँ घंटी बजाने के बाद नमाज पढ़ने वालों का आधार कार्ड जांचा जाता है और फिर हवाई अड्डा प्राधिकरण उन्हें विशेष बसों के जरिए मस्जिद तक ले जाता है। दैनिक तीन शिफ्टों में ऐसी 4 बसों की व्यवस्था होती है। यदि भविष्य में इस मस्जिद को हटाने या ढहाने का काम शुरू होता है, तो बाहरी दुनिया को इसका पता भी नहीं चलेगा क्योंकि हवाई अड्डे के अपने उपकरण सीधे रनवे के रास्ते पुराने टर्मिनल के कार्गो विभाग से वहाँ तक पहुँच सकते हैं।
    user_JONOMON KHOBOR
    JONOMON KHOBOR
    Guna, Madhya Pradesh•
    22 hrs ago
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