लंबे समय तक काम लिया, तो पद स्थायी माना जाएगा: कर्मचारियों के हक में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला-Supreme Court हाल ही में उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) ने श्रमिक अधिकारों और रोजगार की सुरक्षा को लेकर एक ऐतिहासिक निर्णय सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी कर्मचारी से एक ही पद पर लंबे समय तक निरंतर काम लिया जाता है, तो उस पद को केवल 'अस्थायी' या 'तदर्थ' (Ad-hoc) मानकर कर्मचारी को उसके लाभों से वंचित नहीं किया जा सकता। यह फैसला उन हजारों कर्मचारियों के लिए आशा की किरण लेकर आया है जो वर्षों से सरकारी या निजी संस्थानों में 'कांट्रैक्ट' या 'डेली वेजर' के रूप में काम कर रहे हैं। फैसले के मुख्य बिंदु सुप्रीम कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में नियोक्ता (Employer) की उन नीतियों की आलोचना की, जो काम की प्रकृति स्थायी होने के बावजूद कर्मचारियों को अस्थायी बनाए रखती हैं। फैसले के प्रमुख अंश निम्नलिखित हैं: काम की प्रकृति सर्वोपरि: यदि काम का स्वरूप स्थायी है और वह संस्थान की नियमित गतिविधियों का हिस्सा है, तो कर्मचारी को अनिश्चित काल तक अस्थायी नहीं रखा जा सकता। अनुचित श्रम व्यवहार पर रोक: कोर्ट ने कहा कि केवल बजट बचाने या उत्तरदायित्व से बचने के लिए कर्मचारियों को 'परमानेंट' न करना एक प्रकार का शोषक व्यवहार है। समान कार्य, समान गरिमा: लंबे समय तक सेवा देने वाले कर्मचारी सेवा के लाभों, पेंशन और अन्य सामाजिक सुरक्षा कवर के हकदार हैं। कोर्ट की सख्त टिप्पणी न्यायाधीशों की पीठ ने स्पष्ट रूप से कहा: "प्रशासन किसी पद को दशकों तक 'अस्थायी' नहीं कह सकता यदि उस पर काम लगातार जारी है। यह कर्मचारी के मौलिक अधिकारों का हनन है और उसे उचित पारिश्रमिक व स्थिरता से वंचित करना न्यायसंगत नहीं है।" निष्कर्ष यह 'सुप्रीम' फैसला न केवल कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति को सुधारेगा, बल्कि उन्हें मानसिक सुरक्षा और सामाजिक सम्मान भी प्रदान करेगा। यह नियोक्ताओं के लिए एक कड़ा संदेश है कि वे 'जरूरत पड़ने पर उपयोग करो और फिर हटा दो' की संस्कृति को अब और बढ़ावा नहीं दे सकते। यदि पद की आवश्यकता स्थायी है, तो वहां काम करने वाले का हक भी स्थायी है।
लंबे समय तक काम लिया, तो पद स्थायी माना जाएगा: कर्मचारियों के हक में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला-Supreme Court हाल ही में उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) ने श्रमिक अधिकारों और रोजगार की सुरक्षा को लेकर एक ऐतिहासिक निर्णय सुनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी कर्मचारी से एक ही पद पर लंबे समय तक निरंतर काम लिया जाता है, तो उस पद को केवल 'अस्थायी' या 'तदर्थ' (Ad-hoc) मानकर कर्मचारी को उसके लाभों से वंचित नहीं किया जा सकता। यह फैसला उन हजारों कर्मचारियों के लिए आशा की किरण लेकर आया है जो वर्षों से सरकारी या निजी संस्थानों में 'कांट्रैक्ट' या 'डेली वेजर' के रूप में काम कर रहे हैं। फैसले के मुख्य बिंदु सुप्रीम कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में नियोक्ता (Employer) की उन नीतियों की आलोचना की, जो काम की प्रकृति स्थायी होने के बावजूद कर्मचारियों को अस्थायी बनाए रखती हैं। फैसले के प्रमुख अंश निम्नलिखित हैं: काम की प्रकृति सर्वोपरि: यदि काम का स्वरूप स्थायी है और वह संस्थान की नियमित गतिविधियों का हिस्सा है, तो कर्मचारी को अनिश्चित काल तक अस्थायी नहीं रखा जा सकता। अनुचित श्रम व्यवहार पर रोक: कोर्ट ने कहा कि केवल बजट बचाने या उत्तरदायित्व से बचने के लिए कर्मचारियों को 'परमानेंट' न करना एक प्रकार का शोषक व्यवहार है। समान कार्य, समान गरिमा: लंबे समय तक सेवा देने वाले कर्मचारी सेवा के लाभों, पेंशन और अन्य सामाजिक सुरक्षा कवर के हकदार हैं। कोर्ट की सख्त टिप्पणी न्यायाधीशों की पीठ ने स्पष्ट रूप से कहा: "प्रशासन किसी पद को दशकों तक 'अस्थायी' नहीं कह सकता यदि उस पर काम लगातार जारी है। यह कर्मचारी के मौलिक अधिकारों का हनन है और उसे उचित पारिश्रमिक व स्थिरता से वंचित करना न्यायसंगत नहीं है।" निष्कर्ष यह 'सुप्रीम' फैसला न केवल कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति को सुधारेगा, बल्कि उन्हें मानसिक सुरक्षा और सामाजिक सम्मान भी प्रदान करेगा। यह नियोक्ताओं के लिए एक कड़ा संदेश है कि वे 'जरूरत पड़ने पर उपयोग करो और फिर हटा दो' की संस्कृति को अब और बढ़ावा नहीं दे सकते। यदि पद की आवश्यकता स्थायी है, तो वहां काम करने वाले का हक भी स्थायी है।
- छाता में हो रहा खुलेआम देह व्यापार पुलिस ने रेड मार लिया युवक-युवतियां को हिरासत में1
- Post by Pravendra kumar1
- A cover pur mat mathura1
- RPRNEWSTV DIGITAL 👉 “मां मंशा देवी मंदिर में ऐतिहासिक दंगल – शिवा पहलवान को नहीं मिला कोई टक्कर देने वाला 💪” 👉 “जाजम पट्टी मगोर्रा में हुआ महादंगल, आखिरी इनाम ₹1 लाख… पर अखाड़ा रह गया खाली!” 🎤 पूरी स्क्रिप्ट (Voiceover / Reel Script) 🎬 इंट्रो (Hook) मथुरा जनपद के जाजम पट्टी मगोर्रा में आज कुछ ऐसा हुआ… जिसे देखकर हर कोई हैरान रह गया! 😱 🎬 मुख्य जानकारी मां मंशा देवी मंदिर प्रांगण में आयोजित हुआ एक विशाल कुश्ती दंगल, जहां दूर-दूर से आए पहलवानों ने अपने दमखम का शानदार प्रदर्शन किया 💪 🎬 हाइलाइट दंगल की आखिरी और सबसे बड़ी कुश्ती के लिए रखा गया था ₹1,00,000 का इनाम 💰 और इस मुकाबले के लिए अखाड़े में उतरे शिवा पहलवान… 🎬 ट्विस्ट (Viral Point) लेकिन हैरानी की बात ये रही कि… शिवा पहलवान को चुनौती देने के लिए कोई भी पहलवान अखाड़े में नहीं उतरा! 😳 🎬 क्लाइमैक्स जिसके बाद पूरे मैदान में गूंज उठी तालियां 👏 और शिवा पहलवान को विजेता घोषित कर दिया गया 🏆 🎬 आउट्रो ऐसे ही रोमांचक और देसी खेलों की खबरों के लिए हमारे चैनल को फॉलो करना ना भूलें 🙏🔥1
- Nayi bani sadak ki gunvatta behad ghatiya hai. Sadak bante hi ukhadne lagi hai aur ismein sahi samagri ka istemal nahi kiya gaya. Yeh janata ke paise ki barbaadi aur bhrashtachar ka nateja hai. Hum maang karte hain ki is ghatna ki jaanch ho aur sadak ka nirmaan dobara sahi manakon ke anusar kiya jaye.1
- छाता में दर्दनाक टक्कर: होटल के बाहर खड़े ट्रैक्टर से भिड़ी कार, मची अफरा-तफरी1
- भीषण सड़क हादसा: अनियंत्रित कार होटल के बाहर खड़े ट्रैक्टर में घुसी, मची चीख-पुकार राष्ट्रीय राजमार्ग-19 पर मंगलवार को एक भीषण सड़क हादसा हो गया। छाता स्थित आर्गेनिक कुंज के समीप दिल्ली की ओर से आ रही एक तेज रफ्तार कार अनियंत्रित होकर सड़क किनारे एक होटल पर खड़े ट्रैक्टर ट्राली में पीछे से जाकर टकराई। भिड़ंत इतनी जोरदार थी कि कार के परखच्चे उड़ गए और मौके पर कोहराम मच गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कार की गति काफी अधिक थी। होटल के सामने खड़े ट्रैक्टर ट्राली में टकराते ही कार पूरी तरह क्षतिग्रस्त (क्षत-विक्षत) हो गई। हादसे के वक्त कार में चार लोग सवार थे। टक्कर की आवाज सुनकर आसपास के लोग और राहगीर तुरंत मदद के लिए दौड़े। कार की पिछली सीट पर बैठे दो व्यक्तियों को स्थानीय लोगों ने सुरक्षित बाहर निकाल लिया। कार का अगला हिस्सा बुरी तरह पिचक जाने के कारण चालक और एक महिला अंदर ही फंस गए। सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुँच गई और ग्रामीणों की मदद से फंसे हुए लोगों को बाहर निकालने के प्रयास कर रहे है। मौके पर ट्रैक्टर को उठाने के लिए जेसीबी मंगाई गई है।4
- Post by RPR NEWS TV1