अंकिता भंडारी न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच ने देहरादून में भाजपा प्रदेश प्रभारी दुष्यंत गौतम के आगमन पर कड़ा विरोध प्रदर्शन किया। गांधी पार्क के बाहर जमा हुए आक्रोशित प्रदर्शनकारियों ने उस होटल तक पहुँचने का प्रयास किया जहाँ दुष्यंत गौतम ठहरे हुए थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। इसके बाद प्रदर्शनकारी सड़क पर बैठ गए और सांकेतिक रूप से जाम लगा दिया। प्रदर्शनकारियों का यह गुस्सा अंकिता भंडारी मामले में दुष्यंत गौतम और अजय कुमार का नाम सामने आने के बाद शुरू हुए राज्यव्यापी आंदोलन से जुड़ा है। उनका कहना है कि मुख्यमंत्री द्वारा सीबीआई जांच की मांग के बावजूद, इन दोनों से कोई पूछताछ नहीं हुई है और सरकार उन्हें सम्मानित कर रही है। निर्मला बिष्ट ने आरोप लगाया कि पूरा उत्तराखंड इन दोनों को अंकिता का आरोपी मान रहा है। कमला पंत ने सीबीआई की निष्क्रियता पर सवाल उठाते हुए कहा कि मध्य प्रदेश में महिला हत्या के मामलों में सीबीआई तीन दिन में सक्रिय हो जाती है, जबकि उत्तराखंड में अंकिता के मामले में तीन महीने बीतने के बाद भी वह मौन है। सुजाता पॉल ने तो यहाँ तक कहा कि सरकार की बेशर्मी यह बताती है कि इस हत्याकांड में वीआईपी आरोपियों को बचाने में राज्य सरकार और केंद्र सरकार के मुखिया भी शामिल हैं। त्रिलोचन भट्ट ने भाजपा की कुछ महिलाओं द्वारा इन 'आरोपी वीआईपी' का स्वागत करने पर शर्म व्यक्त की, वहीं ब्रिगेडियर डंगवाल ने अंकिता को न्याय मिलने तक आंदोलन जारी रखने की बात कही। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग थी कि जब तक सीबीआई जांच पूरी नहीं हो जाती, दुष्यंत गौतम और अजय कुमार को उनके पदों से हटा दिया जाना चाहिए था, जो कि नहीं किया गया। उनका यह भी कहना था कि राज्यभर में हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद दुष्यंत गौतम उत्तराखंड नहीं आ रहे थे और पार्टी के बैनरों-होर्डिंगों पर भी उनकी तस्वीरें नहीं थीं, लेकिन पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के देहरादून दौरे पर वे अचानक सक्रिय हो गए हैं। कल कई जगहों पर उनके होर्डिंग लगाए गए और फिर हटा दिए गए, लेकिन इसके बावजूद वे पूरी ठसक के साथ देहरादून में जमे हुए हैं और कार्यक्रमों में हिस्सा ले रहे हैं। पुलिस द्वारा होटल की ओर बढ़ने से रोके जाने पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक हुई। पुलिस की जोर-जबरदस्ती के बाद प्रदर्शनकारी सड़क पर बैठ गए और राजपुर रोड पर कुछ देर तक यातायात ठप रहा। आक्रोशित प्रदर्शनकारियों ने विरोध स्वरूप दुष्यंत गौतम और अजय कुमार का पुतला भी फूंका। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि दुष्यंत गौतम और अजय कुमार उत्तराखंड से वापस नहीं लौटे तो बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतरेंगे और उग्र आंदोलन किया जाएगा, जिससे सड़कें कुछ देर के लिए नहीं, बल्कि पूरे दिन के लिए जाम कर दी जाएंगी।
अंकिता भंडारी न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच ने देहरादून में भाजपा प्रदेश प्रभारी दुष्यंत गौतम के आगमन पर कड़ा विरोध प्रदर्शन किया। गांधी पार्क के बाहर जमा हुए आक्रोशित प्रदर्शनकारियों ने उस होटल तक पहुँचने का प्रयास किया जहाँ दुष्यंत गौतम ठहरे हुए थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। इसके बाद प्रदर्शनकारी सड़क पर बैठ गए और सांकेतिक रूप से जाम लगा दिया। प्रदर्शनकारियों का यह गुस्सा अंकिता भंडारी मामले में दुष्यंत गौतम और अजय कुमार का नाम सामने आने के बाद शुरू हुए राज्यव्यापी आंदोलन से जुड़ा है। उनका कहना है कि मुख्यमंत्री द्वारा सीबीआई जांच की मांग के बावजूद, इन दोनों से कोई पूछताछ नहीं हुई है और सरकार
उन्हें सम्मानित कर रही है। निर्मला बिष्ट ने आरोप लगाया कि पूरा उत्तराखंड इन दोनों को अंकिता का आरोपी मान रहा है। कमला पंत ने सीबीआई की निष्क्रियता पर सवाल उठाते हुए कहा कि मध्य प्रदेश में महिला हत्या के मामलों में सीबीआई तीन दिन में सक्रिय हो जाती है, जबकि उत्तराखंड में अंकिता के मामले में तीन महीने बीतने के बाद भी वह मौन है। सुजाता पॉल ने तो यहाँ तक कहा कि सरकार की बेशर्मी यह बताती है कि इस हत्याकांड में वीआईपी आरोपियों को बचाने में राज्य सरकार और केंद्र सरकार के मुखिया भी शामिल हैं। त्रिलोचन भट्ट ने भाजपा की कुछ महिलाओं द्वारा इन 'आरोपी वीआईपी' का स्वागत करने पर
शर्म व्यक्त की, वहीं ब्रिगेडियर डंगवाल ने अंकिता को न्याय मिलने तक आंदोलन जारी रखने की बात कही। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग थी कि जब तक सीबीआई जांच पूरी नहीं हो जाती, दुष्यंत गौतम और अजय कुमार को उनके पदों से हटा दिया जाना चाहिए था, जो कि नहीं किया गया। उनका यह भी कहना था कि राज्यभर में हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद दुष्यंत गौतम उत्तराखंड नहीं आ रहे थे और पार्टी के बैनरों-होर्डिंगों पर भी उनकी तस्वीरें नहीं थीं, लेकिन पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के देहरादून दौरे पर वे अचानक सक्रिय हो गए हैं। कल कई जगहों पर उनके होर्डिंग लगाए गए और फिर हटा दिए गए, लेकिन इसके बावजूद वे पूरी
ठसक के साथ देहरादून में जमे हुए हैं और कार्यक्रमों में हिस्सा ले रहे हैं। पुलिस द्वारा होटल की ओर बढ़ने से रोके जाने पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक हुई। पुलिस की जोर-जबरदस्ती के बाद प्रदर्शनकारी सड़क पर बैठ गए और राजपुर रोड पर कुछ देर तक यातायात ठप रहा। आक्रोशित प्रदर्शनकारियों ने विरोध स्वरूप दुष्यंत गौतम और अजय कुमार का पुतला भी फूंका। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि दुष्यंत गौतम और अजय कुमार उत्तराखंड से वापस नहीं लौटे तो बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतरेंगे और उग्र आंदोलन किया जाएगा, जिससे सड़कें कुछ देर के लिए नहीं, बल्कि पूरे दिन के लिए जाम कर दी जाएंगी।
- देहरादून के रायपुर हाथीखाना चौक पर सड़क खोदे जाने के बाद अभी तक उसकी मरम्मत नहीं की गई है। मूल जानकारी के अनुसार, 'सिविल लाइन वालों' द्वारा खोदी गई इस सड़क के कारण लोगों को प्रतिदिन भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। नागरिकों ने संबंधित अधिकारियों से इस सड़क को जल्द से जल्द बनाने का आग्रह किया है, ताकि उनकी दैनिक समस्याओं का समाधान हो सके।1
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- उत्तराखंड में शनिवार से मौसम का मिजाज अचानक बदल गया है। लगातार हो रही बारिश जहाँ एक ओर तापमान में गिरावट लाकर लोगों को गर्मी से राहत दे रही है, वहीं दूसरी ओर राज्य के कई इलाकों से नुकसान की खबरें भी सामने आ रही हैं। रविवार सुबह से भी बारिश का दौर जारी है, जिससे वातावरण में ठंडक बढ़ी है और मौसम सुहावना हो गया है। देहरादून सहित पहाड़ी क्षेत्रों में भारी बारिश के चलते जनजीवन प्रभावित हुआ है। इस स्थिति को देखते हुए, शासन-प्रशासन ने लोगों से पहाड़ी क्षेत्रों में विशेष सावधानी बरतने और अनावश्यक यात्रा से बचने की अपील की है।1