*असन्तोषी व्यक्ति कभी सुखी नहीं रह सकता* आई टी आई कालेज इटौरा "रीवा" में शुक्ला परिवार के द्वारा आयोजित श्रीमद् भागवत सप्ताह कथा ज्ञान यज्ञ के सप्तम् दिवस की कथा का विस्तार से विवेचन करते हुए श्रीधाम वृन्दावन से पधारे भागवत कृपाकांक्षी आचार्य श्री रामाभिलाष मिश्र जी ने कहा कि जीवन में कितना भी धन ऐश्वर्य की सम्पन्नता हो लेकिन यदि मन में सन्तोष नहीं है तो वह व्यक्ति कभी भी सुखी नहीं रह सकता। वहीं जिसके पास धन की कमी भले ही हो, सुख सुविधाओं की कमी हो परन्तु उसका मन सन्तुष्ट है तो वह व्यक्ति वास्तव में परम सुखी है।वह हमेशा मानसिक असंतुलन से दूर रहेगा। कथा प्रसंग में परम भक्त सुदामा चरित्र पर प्रकाश डालते हुए आचार्य जी ने कहा कि श्रीसुदामा जी के जीवन में धन की कमी थी, निर्धनता थी लेकिन वह स्वयं परं सन्तुष्ट थे। इसीलिये सुदामा जी हमेशा सुखी जीवन जी रहे थे। क्योंकि उनके पास ब्रह्म (प्रभुनाम) रूपी धन था। धन की तो उनके जीवन में न्यूनता थी परन्तु प्रभुनाम रूपी धन की पूर्णता थी। हमेशा भक्तिभाव से ओत-प्रोत होकर प्रभु नाम में लीन रहते थे। उनके घर में वस्त्र आभूषण तो दूर अन्न का एक कण भी नहीं था। जिसे लेकर वो प्रभु श्रीद्वारिकाधीश के पास जा सकें। परन्तु श्री सुदामा जी की धर्म पत्नी सुशीला जी के मन में इच्छा थी, मन में बहुत बड़ी भावना थी कि हमारे पति भगवान श्रीद्वारिकाधीश जी के पास खाली हाथ न जायं। सुशीला जी चार घर गईं और चार मुट्ठी चावल मांगकर लायीं और वही चार मुट्ठी चावल को लेकर श्री सुदामा जी प्रभु श्रीद्वारिकाधीश जी के पास गये। और प्रभु ने उन चावलों का भोग बड़े ही भाव के साथ लगाया। उन भावभक्ति पूरित चावलों का भोग लगाकर प्रभु ने यही कहा कि हमारा भक्त हमें भाव से पत्र,पुष्प, फल अथवा जल ही अर्पण करता है, तो में उसे बड़े ही आदर के साथ स्वीकार करता हूँ। प्रभु ने चावल ग्रहण कर श्री सुदामा जी को अपार सम्पत्ति प्रदान कर दी। आर्चायश्री ने सुदामा जी के प्रसंग का सार तत्व बताते हुए समझाया कि प्रत्येक व्यक्ति अपना मूल्य समझे और विश्वास करे कि हम संसार के सबसे महत्व पूर्ण व्यक्ति हैं। तो वह हमेशा कार्यशील बना रहेगा। क्योंकि समाज में सम्मान अमीरी से नहीं इमानदारी और सज्जनता से प्राप्त होता है। श्री परीक्षित जी के मोक्ष के बाद कथा का विश्राम हुआ, विश्राम आरती में विशेष रूप से पं.राम लाल द्विवेदी ,प्रधानश्रोता श्रीमती निर्मला शुक्ला, शिशिर शुक्ला, पद्मश्रीशुक्ला,राहुल शुक्ला, शालिनीशुक्ला,कपिल शुक्ला आदि उपस्थित थे|
*असन्तोषी व्यक्ति कभी सुखी नहीं रह सकता* आई टी आई कालेज इटौरा "रीवा" में शुक्ला परिवार के द्वारा आयोजित श्रीमद् भागवत सप्ताह कथा ज्ञान यज्ञ के सप्तम् दिवस की कथा का विस्तार से विवेचन करते हुए श्रीधाम वृन्दावन से पधारे भागवत कृपाकांक्षी आचार्य श्री रामाभिलाष मिश्र जी ने कहा कि जीवन में कितना भी धन ऐश्वर्य की सम्पन्नता हो लेकिन यदि मन में सन्तोष नहीं है तो वह व्यक्ति कभी भी सुखी नहीं रह सकता। वहीं जिसके पास धन की कमी भले ही हो, सुख सुविधाओं की कमी हो परन्तु उसका मन सन्तुष्ट है तो वह व्यक्ति वास्तव में परम सुखी है।वह हमेशा मानसिक असंतुलन से दूर रहेगा। कथा प्रसंग में परम भक्त सुदामा चरित्र पर प्रकाश डालते हुए आचार्य जी ने कहा कि श्रीसुदामा जी के जीवन में धन की कमी थी, निर्धनता थी लेकिन वह स्वयं परं सन्तुष्ट थे। इसीलिये सुदामा जी हमेशा सुखी जीवन जी रहे थे। क्योंकि उनके पास ब्रह्म (प्रभुनाम) रूपी धन था। धन की तो उनके जीवन में न्यूनता थी परन्तु प्रभुनाम रूपी धन की पूर्णता थी। हमेशा भक्तिभाव से ओत-प्रोत होकर प्रभु नाम में लीन रहते थे। उनके घर में वस्त्र आभूषण तो दूर अन्न का एक कण भी नहीं था। जिसे लेकर वो प्रभु श्रीद्वारिकाधीश के पास जा सकें। परन्तु श्री सुदामा जी की धर्म पत्नी सुशीला जी के मन में इच्छा थी, मन में बहुत बड़ी भावना थी कि हमारे पति भगवान श्रीद्वारिकाधीश जी के पास खाली हाथ न जायं। सुशीला जी चार घर गईं और चार मुट्ठी चावल मांगकर लायीं और वही चार मुट्ठी चावल को लेकर श्री सुदामा जी प्रभु श्रीद्वारिकाधीश जी के पास गये। और प्रभु ने उन चावलों का भोग बड़े ही भाव के साथ लगाया। उन भावभक्ति पूरित चावलों का भोग लगाकर प्रभु ने यही कहा कि हमारा भक्त हमें भाव से पत्र,पुष्प, फल अथवा जल ही अर्पण करता है, तो में उसे बड़े ही आदर के साथ स्वीकार करता हूँ। प्रभु ने चावल ग्रहण कर श्री सुदामा जी को अपार सम्पत्ति प्रदान कर दी। आर्चायश्री ने सुदामा जी के प्रसंग का सार तत्व बताते हुए समझाया कि प्रत्येक व्यक्ति अपना मूल्य समझे और विश्वास करे कि हम संसार के सबसे महत्व पूर्ण व्यक्ति हैं। तो वह हमेशा कार्यशील बना रहेगा। क्योंकि समाज में सम्मान अमीरी से नहीं इमानदारी और सज्जनता से प्राप्त होता है। श्री परीक्षित जी के मोक्ष के बाद कथा का विश्राम हुआ, विश्राम आरती में विशेष रूप से पं.राम लाल द्विवेदी ,प्रधानश्रोता श्रीमती निर्मला शुक्ला, शिशिर शुक्ला, पद्मश्रीशुक्ला,राहुल शुक्ला, शालिनीशुक्ला,कपिल शुक्ला आदि उपस्थित थे|
- Post by उमेश पाठक सेमरिया रीवा1
- Post by Prakash Pathak Satna1
- Post by Bolti Divare1
- महंत ने कहा तेरी नौकरी खा जाऊंगा1
- ✍️रीवा ब्यरो चीफ रिप्पू पाण्डेय ✍️ *रीवा से बड़ी खबर 70 वर्षीय वृद्ध की चाकू से गोदकर हत्या, चोरहटा थाना क्षेत्र अंतर्गत नौबस्ता चौकी अंतर्गत 70 वर्षीय वृद्ध की चाकू से गोदकर निर्मम हत्या कर दी गई। घटना से क्षेत्र में सनसनी फैली हुई है। मामले में नौबस्ता चौकी प्रभारी पर भी लापरवाही के आरोप लगाए जा रहे हैं। घटना के कई घंटे बीत जाने के बाद भी पुलिस अभी तक आरोपियों तक नहीं पहुंच सकी है, जिससे परिजनों और स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है।परिजन आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं। वहीं पुलिस का कहना है की मामले की जाँच की जा रही है*1
- 🙏🙏🙏जय लोकल यूथ महासंघ Mp भरो हुंकार और दिखा दो रैली में ताकत भोपाल का कोना कोना भर दो लोकल यूथ से ताकि सरकार को लगे कि वास्तव में लोकल यूथ कि जनसंख्या है आप सब लोग तैयार रहो अपने लड़ाई खुद लड़ो यही से सफलता की शुरुआत होती है हर लोकल यूथ तैयार होकर कमर कसो दूसरों पर निर्भर मत रहो खुद खडा होना सीखो तब सफलता मिलेगी पहले बैकल्पिक शाला में शिक्षक 500 रुपया का महिना में पढ़ाते थे जब संगठन तैयार किया उनके एक एक साथी तैयार होकर साथ निभाया और उनका वेतन कई गुना बढ़ चुका है तो सब अपने अधिकार के लिए तैयार रहना जब तक कुछ मांगा नहीं जाता तब तक कुछ नहीं मिलता धन्यवाद साथियों भोपाल चलो भोपाल चलो2
- मऊगंज NH-135 पर ‘खूनी रेस’ का खौफनाक अंत, 3 लड़के बाइक से स्टंट कर रहे थे, हाथ में कट्टा, दूसरी बाइक पर इनके दोस्त वीडियो बना रहे थे अगले ही पल ट्रेलर से भिड़ंत… 3 भाइयों की मौत हो गई कितना खौफनाक और दर्दनाक है1
- Post by उमेश पाठक सेमरिया रीवा1