राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के गुरला गांव में स्थित लगभग 1000 वर्ष प्राचीन श्री देव मंगरी नाथ मंदिर का भव्य नव-निर्माण कार्य तेजी से शुरू हो गया है। यह पावन धाम सदियों से क्षेत्र में आस्था, श्रद्धा और धार्मिक परंपराओं का प्रमुख केंद्र रहा है, जिसकी पूजा-अर्चना और सेवा गुर्जर समाज के परिवार पीढ़ियों से करते आ रहे हैं। यह प्राचीन मंदिर अपनी धार्मिक महिमा, लोक आस्था और अलौकिक चमत्कारों के लिए खास पहचान रखता है, जहाँ श्रद्धालुओं का विश्वास है कि श्री देव मंगरी नाथ जी की कृपा से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और क्षेत्र में सुख, शांति तथा समृद्धि बनी रहती है। मंदिर में हर वर्ष भादवा माह की छठ और माघ माह की सप्तमी (सातम) पर बड़े धार्मिक आयोजन किए जाते हैं, जिनमें भजन संध्या, रात्रि जागरण और विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम शामिल होते हैं। इनमें गुरला सहित आसपास के कई गांवों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु भाग लेते हैं। मंदिर की एक विशेष परंपरा भादवा माह की अखंड ज्योति है, जो पूरे भादवा माह निरंतर प्रज्ज्वलित रहती है। अखंड ज्योति की पूर्णाहुति पर एक भव्य झूलूस (शोभायात्रा) निकाली जाती है, जिसके समापन पर विद्यालय के विद्यार्थियों, देव भक्तों और ग्रामवासियों को भोजन प्रसाद वितरित किया जाता है। यह परंपरा वर्षों से सामाजिक समरसता, धार्मिक एकता और लोककल्याण का संदेश देती आ रही है। वर्तमान में ग्रामवासियों, श्रद्धालुओं और भामाशाहों के सहयोग से मंदिर का नव-निर्माण कार्य तीव्र गति से चल रहा है। ग्रामीणों का उद्देश्य इस ऐतिहासिक धरोहर को भव्य स्वरूप प्रदान कर इसे आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखना है। इस निर्माण कार्य में समाज के सभी वर्गों का सहयोग मिल रहा है, जिससे पूरे क्षेत्र में उत्साह और श्रद्धा का माहौल बना हुआ है। ग्रामवासियों का मानना है कि श्री देव मंगरी नाथ मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल ही नहीं, बल्कि गुरला ग्राम की आस्था, संस्कृति, इतिहास और सामाजिक एकता का भी प्रतीक है, और इसके पूर्ण होने पर यह धाम क्षेत्र की धार्मिक व सांस्कृतिक पहचान को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाएगा। जय श्री देव मंगरी नाथ की जय, जय श्री देव नारायण भगवान, गुरला धाम की जय।
राजस्थान के भीलवाड़ा जिले के गुरला गांव में स्थित लगभग 1000 वर्ष प्राचीन श्री देव मंगरी नाथ मंदिर का भव्य नव-निर्माण कार्य तेजी से शुरू हो गया है। यह पावन धाम सदियों से क्षेत्र में आस्था, श्रद्धा और धार्मिक परंपराओं का प्रमुख केंद्र रहा है, जिसकी पूजा-अर्चना और सेवा गुर्जर समाज के परिवार पीढ़ियों से करते आ रहे हैं। यह प्राचीन मंदिर अपनी धार्मिक महिमा, लोक आस्था और अलौकिक चमत्कारों के लिए खास पहचान रखता है, जहाँ श्रद्धालुओं का विश्वास है कि श्री देव मंगरी नाथ जी की कृपा से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और क्षेत्र में सुख, शांति तथा समृद्धि बनी रहती है। मंदिर में हर वर्ष भादवा माह की छठ और माघ माह की सप्तमी (सातम) पर बड़े धार्मिक आयोजन किए जाते हैं, जिनमें भजन संध्या, रात्रि जागरण और विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम शामिल होते हैं। इनमें गुरला सहित आसपास के कई गांवों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु भाग लेते हैं। मंदिर की एक विशेष परंपरा भादवा माह की अखंड ज्योति है, जो पूरे भादवा माह निरंतर प्रज्ज्वलित रहती है। अखंड ज्योति की पूर्णाहुति पर एक भव्य झूलूस (शोभायात्रा) निकाली जाती है, जिसके समापन पर विद्यालय के विद्यार्थियों, देव भक्तों और ग्रामवासियों को भोजन प्रसाद वितरित किया जाता है। यह परंपरा वर्षों से सामाजिक समरसता, धार्मिक एकता और लोककल्याण का संदेश देती आ रही है। वर्तमान में ग्रामवासियों, श्रद्धालुओं और भामाशाहों के सहयोग से मंदिर का नव-निर्माण कार्य तीव्र गति से चल रहा है। ग्रामीणों का उद्देश्य इस ऐतिहासिक धरोहर को भव्य स्वरूप प्रदान कर इसे आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखना है। इस निर्माण कार्य में समाज के सभी वर्गों का सहयोग मिल रहा है, जिससे पूरे क्षेत्र में उत्साह और श्रद्धा का माहौल बना हुआ है। ग्रामवासियों का मानना है कि श्री देव मंगरी नाथ मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल ही नहीं, बल्कि गुरला ग्राम की आस्था, संस्कृति, इतिहास और सामाजिक एकता का भी प्रतीक है, और इसके पूर्ण होने पर यह धाम क्षेत्र की धार्मिक व सांस्कृतिक पहचान को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाएगा। जय श्री देव मंगरी नाथ की जय, जय श्री देव नारायण भगवान, गुरला धाम की जय।
- धरोल गांव के पास एक भीषण सड़क हादसा हो गया, जहां एक बाइक सड़क किनारे खड़े एक ट्रक में जा घुसी। इस दर्दनाक दुर्घटना में बाइक सवार एक व्यक्ति की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दूसरा गंभीर रूप से घायल हो गया है।1
- राजस्थान के चित्तौड़ जिले की बेगूं तहसील के उत्थन कलां गांव में ग्रामीण एक प्रस्तावित फैक्ट्री के लिए अपनी पुस्तैनी जमीन के अधिग्रहण और पेड़ों की कटाई का कड़ा विरोध कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सरकार के आदेश पर लगाई जा रही यह फैक्ट्री लगभग 9 गांवों को प्रभावित करेगी, जिससे उनकी खेती की जमीन छिन जाएगी और भविष्य में भारी पर्यावरण प्रदूषण होगा। वे इस बात को लेकर चिंतित हैं कि जमीन जाने के बाद किसान खेती कहाँ और कैसे करेंगे, तथा पर्यावरण प्रदूषण की जिम्मेदारी किसकी होगी। इस मामले को लेकर जन सुनवाई के लिए आए एक डीएसपी अधिकारी से गांव वालों ने बात की और अपना गहरा आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि वे अपनी पुस्तैनी जमीन किसी भी कीमत पर नहीं जाने देंगे। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि डीएसपी अधिकारी उनकी पूरी बातें सुने बिना ही वहां से चले गए, जिससे गांव वालों का गुस्सा और भड़क गया। ग्रामीणों ने अपनी जमीन और पर्यावरण को बचाने के लिए दृढ़ संकल्प दिखाया है, उन्होंने स्पष्ट किया कि वे अपनी पुस्तैनी जमीन नहीं जाने देंगे, ना ही इतने सारे पेड़ कटने देंगे, और ना ही फैक्ट्री को अपने क्षेत्र में पड़ने देंगे। उन्होंने लोगों से इस पोस्ट को आगे शेयर कर उनकी मदद करने की अपील की है।2
- चित्तौड़गढ़ में एक बड़ी कार्रवाई की गई, जहाँ सुबह 4 बजे चित्तौड़गढ़ दुर्ग पर बुलडोजर चलाकर एक अवैध दो मंजिला होटल को पूरी तरह से जमींदोज कर दिया गया।1
- एक व्यक्ति ने अपने जीवन में सब कुछ किया और सब कुछ सहा, जहाँ उन्हें केवल बर्बादियों का मेला दिखाई दिया। उन्होंने समाज के तानों को भी चुपचाप झेला और अपने हर दर्द को अकेले ही सीने में पाले रखा। यह सब उन्होंने अपने बच्चों और पत्नी को बेहतर सुविधाएँ प्रदान करने के लिए किया, जिसके चलते उन्हें दुनिया और अपने कार्यस्थल पर लोगों की सैकड़ों गालियाँ सुनने की आदत पड़ गई थी। हालांकि, जब उन्हें स्वयं सहारे की सबसे अधिक आवश्यकता महसूस हुई, तब उन्हें यह कड़वा एहसास हुआ कि वे कितने अकेले हैं, जो 'मर्द समाज' की एक गहरी और दर्दनाक सच्चाई को उजागर करता है।1
- राजसमंद जिले के रेलमगरा क्षेत्र में पिछले कई दिनों से जारी भीषण गर्मी और उमस के बीच रविवार दोपहर मौसम ने अचानक करवट ली। दोपहर करीब 2 बजे आसमान में घने काले बादल छा गए और तेज गर्जना के साथ हल्की बारिश शुरू हो गई। बारिश के साथ चली ठंडी हवाओं ने लोगों को गर्मी और उमस से काफी राहत पहुँचाई। लगभग आधे घंटे तक हुई इस बारिश से क्षेत्र की सड़कों पर पानी बहने लगा और पूरे वातावरण में ठंडक घुल गई। इस सुहावने मौसम का आनंद लेते हुए बाजारों और सार्वजनिक स्थानों पर भी लोगों की चहल-पहल बढ़ गई। बारिश रुकने के कुछ समय बाद सूरज फिर निकल आया, फिर भी मौसम में बनी ठंडक ने लोगों को लगातार राहत का अहसास कराया। किसानों का मानना है कि इस मौसम परिवर्तन से फसलों और कृषि कार्यों को भी लाभ मिलने की उम्मीद है।3
- भीलवाड़ा जिले के आकोला स्थित होलीरड़ा गांव में एक भव्य महायज्ञ का आयोजन किया गया, जहाँ जोड़ों द्वारा इक्यावन हजार आहुतियां समर्पित की गईं। इस धार्मिक अनुष्ठान के दौरान विभिन्न महत्वपूर्ण क्रियाएं संपन्न हुईं। पंडित गोपाल भट्ट ने बताया कि सुबह सबसे पहले स्थापित देवता पूजन, आवाहित देवता हवन और पुरुषसूक्त हवन किया गया। इसके बाद रुद्र थाग हवन संपन्न हुआ और नूतन मूर्तियों का फलादिवास कराया गया। महायज्ञ के अंत में महाआरती का आयोजन भी किया गया। इस अवसर पर हमीरगढ़ से पधारे संत जागेश्वर दास यज्ञशाला में उपस्थित रहे और उन्होंने श्रद्धालुओं को सनातन धर्म में यज्ञ के महत्व के बारे में विस्तार से समझाया। यज्ञ के प्रधान यजमानों में दीपक हरिशंकर जाट, हीरा लाल जाट और मथुरा लाल जाट शामिल थे, जिन्होंने अन्य सदस्यों के साथ मिलकर सभी उपस्थित लोगों का स्वागत किया।4
- चित्तौड़गढ़ जिले के निंबाहेड़ा स्थित कमधज नगर में एक टेंट हाउस गोदाम में भीषण आग लग गई। घटना की सूचना मिलते ही विधायक श्रीचंद कृपलानी तुरंत घटनास्थल पर पहुंचे और उन्होंने स्थिति का जायजा लिया। इस दौरान विधायक कृपलानी ने राहत कार्यों और सुरक्षा व्यवस्था को सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक निर्देश भी दिए।1
- निजी स्वार्थ, बदले की भावना, दबाव या लाभ के लिए जानबूझकर झूठा आरोप लगाना न केवल नैतिक रूप से गलत है, बल्कि कई परिस्थितियों में यह कानूनी रूप से भी एक गंभीर मामला हो सकता है, जो किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा, करियर, मानसिक स्वास्थ्य और पारिवारिक जीवन को गहरा नुकसान पहुँचाता है। इसी संदर्भ में, अभिनेत्री शिल्पा शिंदे ने हाल ही में एक साक्षात्कार में स्वीकार किया है कि उन्होंने टीवी शो के निर्माता संजय कोहली के खिलाफ जो यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था, वह बाद में झूठा साबित हुआ। उन्होंने अपनी उस स्थिति को स्पष्ट करते हुए कहा कि उस समय वे एक विवादित परिस्थिति में थीं और उन्हें कोई दूसरा रास्ता नहीं दिख रहा था।1
- चित्तौड़गढ़ जिले के निम्बाहेड़ा में सोमवार सुबह काबरा टेंट के गोदाम में भीषण आग लग गई। यह गोदाम कमधज नगर आवासीय कॉलोनी में स्थित था। आग इतनी भयंकर थी कि देखते ही देखते तीसरी मंजिल तक फैल गई। सूचना मिलने पर मौके पर 10 दमकल आग बुझाने पहुँचीं, लेकिन उन्हें अंदर जाने के लिए जेसीबी बुलाकर गोदाम की दीवार तुड़वानी पड़ी। कई घंटों के अथक प्रयासों के बावजूद भी आग पर पूरी तरह से काबू नहीं पाया जा सका। गनीमत यह रही कि इस हादसे के समय गोदाम के अंदर कोई मौजूद नहीं था, जिसके कारण कोई जनहानि नहीं हुई। घटनास्थल पर एसडीएम, डिप्टी, थानाधिकारी सहित पुलिस जाप्ता और अन्य प्रशासनिक अधिकारी भी मौजूद रहे।1