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मुख्यमंत्री श्री धामी की पहल से लोहाघाट में लेगेसी वेस्ट निस्तारण शुरू, 1.17 करोड़ की लागत से सुधरेगी स्वच्छता व्यवस्था। चम्पावत 11 मार्च 2026, सूवि। शंखपाल ट्रेंचिंग ग्राउंड में लेगेसी वेस्ट निस्तारण कार्य शुरु, लोहाघाट बनेगा स्वच्छ और पर्यावरण अनुकूल शहर नगर पालिका परिषद लोहाघाट द्वारा वर्षों से जमा लेगेसी वेस्ट (पुराने कूड़े) के वैज्ञानिक निस्तारण का कार्य तेज़ी से किया जा रहा है। इस महत्वपूर्ण कार्य के लिए माननीय मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा 1 करोड़ 17 लाख रुपये की धनराशि जारी की गई थी, जिसके माध्यम से शहर को स्वच्छ और पर्यावरण अनुकूल बनाने की दिशा में ठोस पहल की जा रही है। नगर पालिका द्वारा लोहाघाट के शंखपाल स्थित ट्रैंचिंग ग्राउंड में जमा लगभग 13,648 मीट्रिक टन लेगेसी वेस्ट के वैज्ञानिक निस्तारण की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इसके लिए ट्रॉमल मशीन का उपयोग करते हुए कचरे को वैज्ञानिक पद्धति से अलग-अलग श्रेणियों में विभाजित किया जा रहा है, जिससे कचरे का सुरक्षित और व्यवस्थित निस्तारण संभव हो सके। अधिशासी अधिकारी नगर पालिका परिषद लोहाघाट श्री सौरव नेगी ने बताया कि ट्रॉमल मशीन के माध्यम से कचरे को जैविक और अजैविक भागों में अलग किया जा रहा है। जैविक कचरे का नियमानुसार निस्तारण किया जा रहा है, जबकि अजैविक कचरे को पुनर्चक्रण (रिसाइक्लिंग) के लिए अलग किया जा रहा है। इससे वर्षों से जमा कूड़े के बड़े ढेर धीरे-धीरे समाप्त होंगे और शहर में स्वच्छता व्यवस्था को मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा माननीय मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी कि इस पहल से न केवल शहर की सुंदरता में वृद्धि होगी, बल्कि लंबे समय से जमा कचरे से उत्पन्न होने वाली दुर्गंध और पर्यावरण प्रदूषण से भी लोगों को राहत मिलेगी। यह कार्य स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

3 hrs ago
user_Champawat news
Champawat news
Local News Reporter चंपावत, चंपावत, उत्तराखंड•
3 hrs ago
d5726a19-b1e2-4038-b1cf-900b486bad5a

मुख्यमंत्री श्री धामी की पहल से लोहाघाट में लेगेसी वेस्ट निस्तारण शुरू, 1.17 करोड़ की लागत से सुधरेगी स्वच्छता व्यवस्था। चम्पावत 11 मार्च 2026, सूवि। शंखपाल ट्रेंचिंग ग्राउंड में लेगेसी वेस्ट निस्तारण कार्य शुरु, लोहाघाट बनेगा स्वच्छ और पर्यावरण अनुकूल शहर नगर पालिका परिषद लोहाघाट द्वारा वर्षों से जमा लेगेसी वेस्ट (पुराने कूड़े) के वैज्ञानिक निस्तारण का कार्य तेज़ी से किया जा रहा है। इस महत्वपूर्ण कार्य के लिए माननीय मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह

धामी द्वारा 1 करोड़ 17 लाख रुपये की धनराशि जारी की गई थी, जिसके माध्यम से शहर को स्वच्छ और पर्यावरण अनुकूल बनाने की दिशा में ठोस पहल की जा रही है। नगर पालिका द्वारा लोहाघाट के शंखपाल स्थित ट्रैंचिंग ग्राउंड में जमा लगभग 13,648 मीट्रिक टन लेगेसी वेस्ट के वैज्ञानिक निस्तारण की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इसके लिए ट्रॉमल मशीन का उपयोग करते हुए कचरे को वैज्ञानिक पद्धति से

अलग-अलग श्रेणियों में विभाजित किया जा रहा है, जिससे कचरे का सुरक्षित और व्यवस्थित निस्तारण संभव हो सके। अधिशासी अधिकारी नगर पालिका परिषद लोहाघाट श्री सौरव नेगी ने बताया कि ट्रॉमल मशीन के माध्यम से कचरे को जैविक और अजैविक भागों में अलग किया जा रहा है। जैविक कचरे का नियमानुसार निस्तारण किया जा रहा है, जबकि अजैविक कचरे को पुनर्चक्रण (रिसाइक्लिंग) के लिए अलग किया जा रहा है। इससे वर्षों से

जमा कूड़े के बड़े ढेर धीरे-धीरे समाप्त होंगे और शहर में स्वच्छता व्यवस्था को मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा माननीय मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी कि इस पहल से न केवल शहर की सुंदरता में वृद्धि होगी, बल्कि लंबे समय से जमा कचरे से उत्पन्न होने वाली दुर्गंध और पर्यावरण प्रदूषण से भी लोगों को राहत मिलेगी। यह कार्य स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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  • Post by 🚨👑MR. SINGH
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    Post by 🚨👑MR. SINGH
    user_🚨👑MR. SINGH
    🚨👑MR. SINGH
    Corrections Department Pithoragarh, Uttarakhand•
    8 hrs ago
  • उत्तराखंड के शांत वादियों में तेज स्पीड का हुड़दंग। इन्हें किसी का कोई भय नही। पुलिस प्रशासन से निवेदन है उक्त रफ्तार में इन सभी की पहचान करके दंडात्मक कार्यवाही करे।और पहाड़ों में सड़क हादसो में रोक लगे।
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    उत्तराखंड के शांत वादियों में तेज स्पीड का हुड़दंग। इन्हें किसी का कोई भय नही। पुलिस प्रशासन से निवेदन है उक्त रफ्तार में इन सभी की पहचान करके दंडात्मक कार्यवाही करे।और पहाड़ों में सड़क हादसो में रोक लगे।
    user_नवीन चन्द्र आर्य
    नवीन चन्द्र आर्य
    Nainital, Uttarakhand•
    8 hrs ago
  • जंगलों की अंधाधुंध कटाई, अनियंत्रित पर्यटन, सड़क व भवन निर्माण और वाहनों के बढ़ते दबाव से बिगड़ रही पहाड़ों की सुंदर तस्वीर पहाड़ों में प्राकृतिक आपदाओं से ज्यादा मानवीय गतिविधियों से उपज रही आपदाओं का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। पर्यावरण के दृष्टिगत विकास के मानक तय नहीं और जंगलों की अंधाधुंध कटाई, अनियंत्रित पर्यटन, सड़क व भवन निर्माण और वाहनों के बढ़ते दबाव ने पहाड़ों की सुंदर तस्वीर बिगड़ रही है। जिसका भयानक खामियाजा बादल फटने, ग्लेशियर पिघलने, बाढ़ और सूखे के रूप भुगतना पढ़ रहा है। पहाड़ों की तबाही के सिलसिला का इतिहास बहुत पुराना नहीं है, बल्कि तभी से शुरू हुआ, जब विकास की गति में तेजी आई । पहाड़ों को काटना प्रकृति के साथ सबसे बड़ी भूल कही जा सकती है, जो पेड़ों को काटे बिना संभव नहीं। साथ ही भूस्खलन को बढ़ावा देती है और यह किसीसे छिपा नहीं की भूस्खलन की त्रासदियां हर वर्ष जानलेवा साबित होती है तो वृक्षों की कमी से कार्बन जैसी घातक गैसों में वृद्धि स्वाभाविक है, जो वायु प्रदूषण को न्यौता देना है और प्रदूषण रोकने के प्रयास अभी तक नाकाफी साबित हुए हैं। फलस्वरूप पीएम 2.5 जैसी जहरीली गैसों में निरंतर वृद्धि हो रही है। पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे विकास के चलते अंधाधुंध होटल और रिजॉर्ट की संख्या के कोई मानक नहीं हैं, जबकि इतना तो तय होना चाहिए कि किसीभी क्षेत्र के क्षेत्रफल के हिसाब से विकास हो। साथ ही वाहनों की आवाजाही की संख्या भी क्षेत्र की क्षमता के अनुसार निर्धारित होनी चाहिए। मगर इस दिशा में कोई कदम अभी तक नहीं उठाए गए हैं। जिस कारण कई तरह की दुश्वारियों से दोचार होना पड़ता है। बिजली पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं को लेकर हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स, हाईवे और सुरंग खोदा जाना प्रकृति के साथ अन्याय है। बांधों का निर्माण क्षेत्रीय मौसम पर बड़ा असर डालता है, जो उस क्षेत्र के साथ नजदीकी क्षेत्रों की बारिश में अनिश्चितता पैदा करता है और कृषि, आर्थिकी और सामाजिक स्तर प्रभावित होता है। मानवीय गतिविधियों के चलते पर्वतीय क्षेत्रों में एक बड़ा दुष्प्रभाव हिमालय भुगत रहा है। हालाकि इसकी इसके पीछे प्रमुख जिम्मेदार वैश्विक ताप में वृद्धि है, लेकिन पर्वतीय क्षेत्र में मानवीय गतिविधि भी कम जिम्मेदार नहीं है। पहाड़ों में नदियों किनारे निर्माण, अत्यधिक वाहनों की आवाजाही, प्लास्टिक कचरा और बेहिसाब माइनिंग पर्यावरण पर अटैक जैसा है। हिमालय से जुड़े राज्य लेह लद्दाख, हिमाचल और उत्तराखंड में अभी तक किया गया विकास आपदाओं को जन्मदाता रहा है। लिहाजा प्रदूषण बढ़ रहा है तो नुकसान अनेक उठाने पड़ रहे हैं। जिस ओर गंभीरता से ध्यान देने की सख्त जरूरत है। समय रहते इस दिशा में सार्थक प्रयास नहीं किए गए तो भविष्य में आपदाओं से निबटने के निबटने के लिए तैयार रहना होगा। पर्यावरण विशेषज्ञों की रिपोर्ट मानवीय कृत्य को जिम्मेदार मानती हैं आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान एरीज के वरिष्ठ पर्यावरण व वायुमंडलीय वैज्ञानिक डॉ नरेंद्र सिंह कहते हैं कि अनियोजित माननीय विकास को लेकर कई रिपोर्ट आ चुकी हैं, जो प्रकृति के साथ खिलवाड़ का विरोध करती हैं। विकास का आधार वैज्ञानिक होना चाहिए और पर्यावरण के अनुरूप होना चाहिए। भारतीय मौसम विभाग, वाडिया इंस्टीट्यूट हिमालयन जियोलॉजी और पर्यावरण मंत्रालय समेत कई अन्य रिपोर्ट आ चुकी हैं। एरीज भी हिमालय क्षेत्र की वायुमंडलीय स्थिति पर कई शोध कर चुका है, जो बताता है कि विकास पर्यावरण संरक्षण के आधार पर होना चाहिए। खनन से अधिक निकलती है मीथेन ऑस्ट्रेलियाई पर्यावरण वैज्ञानिकों का शोध बताता है कि खनन से मीथेन गैस अधिक निकलती है, जो ग्लोबल वार्मिंग बढ़ाने में अधिक जिम्मेदार मानी जाती है। कार्बन डाईऑक्साइड की तुलना में मीथेन 40 प्रतिशत अधिक वैश्विक ताप बढ़ाती है। इधर पहाड़ों में निरंतर खनन जारी है तो जिम्मेदार कोई और नहीं इंसान है।
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    जंगलों की अंधाधुंध कटाई, अनियंत्रित पर्यटन, सड़क व भवन निर्माण और वाहनों के बढ़ते दबाव से बिगड़ रही पहाड़ों की सुंदर तस्वीर 
पहाड़ों में प्राकृतिक आपदाओं से ज्यादा मानवीय गतिविधियों से उपज रही आपदाओं का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। पर्यावरण के दृष्टिगत विकास के मानक तय नहीं और जंगलों की अंधाधुंध कटाई, अनियंत्रित पर्यटन, सड़क व भवन निर्माण और वाहनों के बढ़ते दबाव ने पहाड़ों की सुंदर तस्वीर बिगड़ रही है। जिसका भयानक खामियाजा बादल फटने, ग्लेशियर पिघलने, बाढ़ और सूखे के रूप भुगतना पढ़ रहा है।
पहाड़ों की तबाही के सिलसिला का इतिहास बहुत पुराना नहीं है, बल्कि तभी से शुरू हुआ, जब विकास की गति में तेजी आई । पहाड़ों को काटना प्रकृति के साथ सबसे बड़ी भूल कही जा सकती है, जो पेड़ों को काटे बिना संभव नहीं। साथ ही भूस्खलन को बढ़ावा देती है और यह किसीसे छिपा नहीं की भूस्खलन की त्रासदियां हर वर्ष जानलेवा साबित होती है तो वृक्षों की कमी से कार्बन जैसी घातक गैसों में वृद्धि स्वाभाविक है, जो वायु प्रदूषण को न्यौता देना है और प्रदूषण रोकने के प्रयास अभी तक नाकाफी साबित हुए हैं। फलस्वरूप पीएम 2.5 जैसी जहरीली गैसों में निरंतर वृद्धि हो रही है। पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए किए जा रहे विकास के चलते अंधाधुंध होटल और रिजॉर्ट की संख्या के कोई मानक नहीं हैं, जबकि इतना तो तय होना चाहिए कि किसीभी  क्षेत्र के क्षेत्रफल के हिसाब से विकास हो। साथ ही  वाहनों की आवाजाही की संख्या भी क्षेत्र की क्षमता के अनुसार निर्धारित होनी चाहिए। मगर इस दिशा में कोई कदम अभी तक नहीं उठाए गए हैं। जिस कारण कई तरह की दुश्वारियों से दोचार होना पड़ता है। बिजली पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं को लेकर हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स,   हाईवे और सुरंग खोदा जाना प्रकृति के साथ अन्याय है। बांधों का निर्माण क्षेत्रीय मौसम पर बड़ा असर डालता है, जो उस क्षेत्र के साथ नजदीकी क्षेत्रों की बारिश में अनिश्चितता पैदा करता है और कृषि, आर्थिकी और सामाजिक स्तर प्रभावित होता है। मानवीय गतिविधियों के चलते पर्वतीय क्षेत्रों में एक बड़ा दुष्प्रभाव हिमालय भुगत रहा है। हालाकि इसकी इसके पीछे प्रमुख जिम्मेदार वैश्विक ताप में वृद्धि है, लेकिन पर्वतीय क्षेत्र में मानवीय गतिविधि भी कम जिम्मेदार नहीं है। पहाड़ों में नदियों किनारे निर्माण, अत्यधिक वाहनों की आवाजाही,  प्लास्टिक कचरा और बेहिसाब माइनिंग पर्यावरण पर अटैक जैसा है। हिमालय से जुड़े राज्य लेह लद्दाख, हिमाचल और उत्तराखंड में अभी तक किया गया विकास आपदाओं को जन्मदाता रहा है। लिहाजा प्रदूषण बढ़ रहा है तो नुकसान अनेक उठाने पड़ रहे हैं। जिस ओर गंभीरता से ध्यान देने की सख्त जरूरत है। समय रहते इस दिशा में सार्थक प्रयास नहीं किए गए तो भविष्य में आपदाओं से निबटने के निबटने के लिए तैयार रहना होगा। 
पर्यावरण विशेषज्ञों की रिपोर्ट मानवीय कृत्य को जिम्मेदार मानती हैं
आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान एरीज के वरिष्ठ पर्यावरण व वायुमंडलीय वैज्ञानिक डॉ नरेंद्र सिंह कहते हैं कि अनियोजित माननीय विकास को लेकर कई रिपोर्ट आ चुकी हैं, जो प्रकृति के साथ खिलवाड़ का विरोध करती हैं। विकास का आधार वैज्ञानिक होना चाहिए और पर्यावरण के अनुरूप होना चाहिए। भारतीय मौसम विभाग, वाडिया इंस्टीट्यूट हिमालयन जियोलॉजी और पर्यावरण मंत्रालय समेत कई अन्य रिपोर्ट आ चुकी हैं। एरीज भी हिमालय क्षेत्र की वायुमंडलीय स्थिति पर कई शोध कर चुका है, जो बताता है कि विकास पर्यावरण संरक्षण के आधार पर होना चाहिए।
खनन से अधिक निकलती है मीथेन 
ऑस्ट्रेलियाई पर्यावरण वैज्ञानिकों का शोध बताता है कि खनन से मीथेन गैस अधिक निकलती है, जो ग्लोबल वार्मिंग बढ़ाने में अधिक जिम्मेदार मानी जाती है।  कार्बन डाईऑक्साइड की तुलना में मीथेन 40 प्रतिशत अधिक वैश्विक ताप बढ़ाती है। इधर पहाड़ों में निरंतर खनन जारी है तो जिम्मेदार कोई और नहीं इंसान है।
    user_NTL
    NTL
    Nainital, Uttarakhand•
    22 hrs ago
  • उत्तराखंड खेड़ा में अतिक्रमण मुक्त कराई गई जमीन पर नहीं मिलेगी नमाज पढ़ने की परमिशन — रुद्रपुर के महापौर विकास शर्मा बोले, नमाज के लिए मुस्लिम समाज खुद करें वैकल्पिक व्यवस्था।
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    उत्तराखंड खेड़ा में अतिक्रमण मुक्त कराई गई जमीन पर नहीं मिलेगी नमाज पढ़ने की परमिशन — रुद्रपुर के महापौर विकास शर्मा बोले, नमाज के लिए मुस्लिम समाज खुद करें वैकल्पिक व्यवस्था।
    user_रिपोर्टर अर्जुन कुमार
    रिपोर्टर अर्जुन कुमार
    Local News Reporter रुद्रपुर, उधम सिंह नगर, उत्तराखंड•
    1 day ago
  • कलीनगर के भैरो कला में पारिवारिक विवाद में हुई मारपीट, पुलिस मामले की जांच में जुटी
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    कलीनगर के भैरो कला में पारिवारिक विवाद में हुई मारपीट, पुलिस मामले की जांच में जुटी
    user_इंद्रजीत सिंह राजपूत संपादक
    इंद्रजीत सिंह राजपूत संपादक
    Association or organisation Pilibhit, Uttar Pradesh•
    16 min ago
  • Post by BREAKING RV NEWS , Vimal Singh
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    Post by BREAKING RV NEWS , Vimal Singh
    user_BREAKING RV NEWS , Vimal Singh
    BREAKING RV NEWS , Vimal Singh
    Media and information sciences faculty बहेड़ी, बरेली, उत्तर प्रदेश•
    2 hrs ago
  • चंपावत: मादली क्षेत्र में 4 गोवंश लावारिस हालत में मिले,
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    चंपावत: मादली क्षेत्र में 4 गोवंश लावारिस हालत में मिले,
    user_The Public Matter
    The Public Matter
    पत्रकार चंपावत, चंपावत, उत्तराखंड•
    4 hrs ago
  • मामला सिसोना गांव का है जैसा की विडियो में देख सकते हैं। कि एक व्यक्ति नशे में महिला के साथ अभद्रता और पत्थर से मारपीट कर रहा है। हालांकि इसकी वजह अभी स्पष्ट नहीं है कि किस बात को लेकर यह मामला है। उत्तराखंड पुलिस से निवेदन है इस मामले को संज्ञान में लेकर तुरंत उचित दडंतात्मक कार्यवाही करें।
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    मामला सिसोना गांव का है जैसा की विडियो में देख सकते हैं। कि एक व्यक्ति नशे में महिला के साथ अभद्रता और पत्थर से मारपीट कर रहा है। 
हालांकि इसकी वजह अभी स्पष्ट नहीं है कि किस बात को लेकर यह मामला है।
उत्तराखंड पुलिस से निवेदन है इस मामले को संज्ञान में लेकर तुरंत उचित दडंतात्मक कार्यवाही करें।
    user_नवीन चन्द्र आर्य
    नवीन चन्द्र आर्य
    Nainital, Uttarakhand•
    12 hrs ago
  • Post by मनोज गंगवार
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    Post by मनोज गंगवार
    user_मनोज गंगवार
    मनोज गंगवार
    पत्रकार बहेड़ी, बरेली, उत्तर प्रदेश•
    3 hrs ago
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