नियमों को ताक पर रखकर खड़े किए जा रहे मोबाइल टावर: सुरक्षा नदारद, बढ़ रहा है बड़ा खतरा नियमों को ताक पर रखकर खड़े किए जा रहे मोबाइल टावर: सुरक्षा नदारद, बढ़ रहा है बड़ा खतरा गाडरवारा। शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक, मोबाइल टावरों का जाल बिछाने की होड़ में सुरक्षा और सरकारी नियमों की जमकर धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। वर्तमान में मोबाइल टावर न केवल स्वास्थ्य के लिए चिंता का विषय बन रहे हैं, बल्कि इनके प्रबंधन में बरती जा रही लापरवाही किसी बड़ी अनहोनी को खुला निमंत्रण दे रही है। सुरक्षा के इंतजाम जीरो, उपद्रवियों का डेरा नियमों के मुताबिक, हर मोबाइल टावर की सुरक्षा के लिए संबंधित कंपनी द्वारा गार्ड की नियुक्ति अनिवार्य है। साथ ही, टावर के चारों ओर ऊंची बाड़ (Fence) लगाना जरूरी है ताकि कोई अनधिकृत व्यक्ति ऊपर न चढ़ सके। लेकिन हकीकत इसके उलट है: * चौकीदारों का अभाव: अधिकांश टावरों पर कोई गार्ड तैनात नहीं है। * आसानी से पहुंच: बाउंड्री न होने के कारण आए दिन असामाजिक तत्व या मानसिक रूप से विक्षिप्त लोग टावरों पर चढ़कर हंगामा करते हैं, जिससे प्रशासन और पुलिस की सांसें फूल जाती हैं। * अनदेखी: टावरों की समय-समय पर रंगाई-पुताई (सफेद और लाल रंग) भी नहीं की जा रही है, जो विमानन सुरक्षा के लिए जरूरी है। स्वास्थ्य पर मंडराता खतरा विशेषज्ञों और मानवाधिकार आयोग की रिपोर्टों के अनुसार, रिहायशी इलाकों में लगे ये टावर रेडिएशन के कारण गंभीर बीमारियों का कारण बन सकते हैं। * आयोग की गाइडलाइंस: आयोग ने स्पष्ट किया था कि टावर ऐसे भूखंडों पर हों जिनका आकार कम से कम 2500 वर्ग फुट हो और रेडियस में कोई घना आवास न हो। * जनरेटर से प्रदूषण: टावरों को चलाने के लिए इस्तेमाल होने वाले भारी-भरकम जनरेटरों से निकलने वाला शोर और धुआं स्थानीय निवासियों, विशेषकर बच्चों और बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव डाल रहा है। लालच में दांव पर भविष्य जांच में सामने आया है कि कई मकान मालिक थोड़े से आर्थिक लालच में आकर अपनी छतों पर टावर लगवाने की अनुमति दे देते हैं। उन्हें इस बात का अंदाजा नहीं है कि बिना किसी सुरक्षा मानक के लगाए गए ये भारी-भरकम ढांचे भूकंप या तेज हवाओं की स्थिति में उनके परिवार और पड़ोसियों के लिए जानलेवा साबित हो सकते हैं। > निष्कर्ष: यदि समय रहते प्रशासन और संबंधित कंपनियों ने इन टावरों की सुरक्षा ऑडिट नहीं की, तो गाडरवारा और आसपास के क्षेत्रों में कभी भी कोई बड़ी दुर्घटना घट सकती है। >
नियमों को ताक पर रखकर खड़े किए जा रहे मोबाइल टावर: सुरक्षा नदारद, बढ़ रहा है बड़ा खतरा नियमों को ताक पर रखकर खड़े किए जा रहे मोबाइल टावर: सुरक्षा नदारद, बढ़ रहा है बड़ा खतरा गाडरवारा। शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक, मोबाइल टावरों का जाल बिछाने की होड़ में सुरक्षा और सरकारी नियमों की जमकर धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। वर्तमान में मोबाइल टावर न केवल स्वास्थ्य के लिए चिंता का विषय बन रहे हैं, बल्कि इनके प्रबंधन में बरती जा रही लापरवाही किसी बड़ी अनहोनी को खुला निमंत्रण दे रही है। सुरक्षा के इंतजाम जीरो, उपद्रवियों का डेरा नियमों के मुताबिक, हर मोबाइल टावर की सुरक्षा के लिए संबंधित कंपनी द्वारा गार्ड की नियुक्ति अनिवार्य है। साथ ही, टावर के चारों ओर ऊंची बाड़ (Fence) लगाना जरूरी है ताकि कोई अनधिकृत व्यक्ति ऊपर न चढ़ सके। लेकिन हकीकत इसके उलट है: * चौकीदारों का अभाव: अधिकांश टावरों पर कोई गार्ड तैनात नहीं है। * आसानी से पहुंच: बाउंड्री न होने के कारण आए दिन असामाजिक तत्व या मानसिक रूप से विक्षिप्त लोग टावरों पर चढ़कर हंगामा करते हैं, जिससे प्रशासन और पुलिस की सांसें फूल जाती हैं। * अनदेखी: टावरों की समय-समय पर रंगाई-पुताई (सफेद और लाल रंग) भी नहीं की जा रही है, जो विमानन सुरक्षा के लिए जरूरी है। स्वास्थ्य पर मंडराता खतरा विशेषज्ञों और मानवाधिकार आयोग की रिपोर्टों के अनुसार, रिहायशी इलाकों में लगे ये टावर रेडिएशन के कारण गंभीर बीमारियों का कारण बन सकते हैं। * आयोग की गाइडलाइंस: आयोग ने स्पष्ट किया था कि टावर ऐसे भूखंडों पर हों जिनका आकार कम से कम 2500 वर्ग फुट हो और रेडियस में कोई घना आवास न हो। * जनरेटर से प्रदूषण: टावरों को चलाने के लिए इस्तेमाल होने वाले भारी-भरकम जनरेटरों से निकलने वाला शोर और धुआं स्थानीय निवासियों, विशेषकर बच्चों और बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव डाल रहा है। लालच में दांव पर भविष्य जांच में सामने आया है कि कई मकान मालिक थोड़े से आर्थिक लालच में आकर अपनी छतों पर टावर लगवाने की अनुमति दे देते हैं। उन्हें इस बात का अंदाजा नहीं है कि बिना किसी सुरक्षा मानक के लगाए गए ये भारी-भरकम ढांचे भूकंप या तेज हवाओं की स्थिति में उनके परिवार और पड़ोसियों के लिए जानलेवा साबित हो सकते हैं। > निष्कर्ष: यदि समय रहते प्रशासन और संबंधित कंपनियों ने इन टावरों की सुरक्षा ऑडिट नहीं की, तो गाडरवारा और आसपास के क्षेत्रों में कभी भी कोई बड़ी दुर्घटना घट सकती है। >
- करेली में निकले जवारे3
- Post by Jagtapal Yadav g2
- कल अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के पदाधिकारियो और कॉलेज के छात्र-छात्राओं ने कॉलेज के गेट के सामने जबरदस्त धरना प्रदर्शन किया। इन्होंने बताया कि हरसूद कॉलेज में लाखों रुपए का भ्रष्टाचार हुआ है जिसके खिलाफ अभी प्रदर्शन कर रहे हैं1
- Post by Dharmendra sahu1
- Post by कृष्णकांत प्रदीप शर्मा करेली1
- Writing 🚨 ग्वालियर में गोलीबारी का मामला गरमाया 🚨 ग्वालियर जिले के थाना हजीरा क्षेत्र में हुई गोलीबारी की घटना ने शहर में सनसनी फैला दी है। इस मामले में आरोपी विजय पंडित ने खुद सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल कर अपनी सफाई दी है। वीडियो में विजय पंडित का दावा है कि गोली चलाने के पीछे कुछ खास वजहें थीं, जिनके चलते उसे यह कदम उठाना पड़ा। हालांकि, वीडियो सामने आने के बाद मामले ने नया मोड़ ले लिया है और लोगों के बीच तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। 👉 क्या है पूरा मामला? स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, यह घटना आपसी विवाद से जुड़ी बताई जा रही है, लेकिन वायरल वीडियो में आरोपी अपनी अलग कहानी बता रहा है। 👉 पुलिस की कार्रवाई जारी थाना हजीरा पुलिस पूरे मामले की जांच में जुट गई है। वीडियो की सत्यता और आरोपी के दावों की भी जांच की जा रही है। ⚠️ सवाल अभी भी बाकी आखिर क्या थी असली वजह, जिसने विजय पंडित को गोली चलाने पर मजबूर किया? क्या वीडियो में कही गई बातें सच हैं या कहानी कुछ और है? 📌 अपडेट के लिए जुड़े रहें हमारे साथ ऐसी ही हर छोटी-बड़ी खबर के लिए पेज को Follow, Like और Share जरूर करें। #Gwalior #BreakingNews #CrimeNews #Hajira #ViralVideo #MPNews1
- नरसिंहपुर जिला मुख्यालय के सदर मडिया में सामूहिक जावरा समिति के द्वारा जवारे रखे गए थे इस ऐतिहासिक जवारा के विसर्जन जुलूस में कैबिनेट मंत्री प्रहलाद पटेल पहुंचे और मां भगवती और जवारो का पूजा अर्चन किया बता दे कि इस ऐतिहासिक सामुहिक जवारा समिति ने 851 कलशों की स्थापना की थी और आज पूर्णिमा बुधवार विसर्जन जुलूस सदर मड़िया से निकाला जा रहा हैं जिसमे क्षेत्र के हजारों लोगों की उपस्थिति होगी ।1
- करेली राम मंदिर से निकले जवारे2