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प्रतिबंधित पेड़ों की कटान: बिना अनुमति महुआ जैसे प्रतिबंधित पेड़ों पर कुल्हाड़ी कैसे चली? पर्यावरण के 'रक्षक' ही बने 'भक्षक': थाल्हापार में महुआ के प्रतिबंधित पेड़ों पर चली कुल्हाड़ी, डीएफओ की चुप्पी ने खड़े किए सवाल बस्ती। प्रदेश सरकार एक ओर 'वृक्षारोपण जन अभियान' चलाकर करोड़ों पौधे रोपने का ढोल पीट रही है, वहीं दूसरी ओर बस्ती जनपद के जिम्मेदार अधिकारी ही सरकारी मंशा को पलीता लगाने में जुटे हैं। ताजा मामला लालगंज थाना क्षेत्र के थाल्हापार का है, जहाँ वन विभाग और लकड़ी माफियाओं की जुगलबंदी ने प्रतिबंधित महुआ के पेड़ों का अस्तित्व मिटा दिया। हैरानी की बात यह है कि सूचना मिलने के बाद भी डीएफओ जैसे जिम्मेदार अधिकारी की 'ना-नुकूर' भ्रष्टाचार और मिलीभगत की ओर साफ इशारा कर रही है। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल, विभाग ने साधी चुप्पी थाल्हापार में हुए इस अवैध कटान का वीडियो सोशल मीडिया पर जंगल की आग की तरह फैला। जब जनता के माध्यम से विभाग को भनक लगी, तो कार्रवाई करने के बजाय जिम्मेदारों ने कथित तौर पर 'धनादोहन' का अवसर तलाशना शुरू कर दिया। सूत्रों की मानें तो तीन-चार दिनों तक मामले को दबाए रखा गया और मौका मिलते ही लकड़ी को मौके से गायब करवा दिया गया। डीएफओ की कार्यप्रणाली पर उठ रहे गंभीर सवाल जब मीडिया की टीमों ने साक्ष्यों के साथ जिला स्तरीय अधिकारियों का घेराव किया, तो डीएफओ बस्ती अपनी जिम्मेदारी से बचती और साक्ष्य छुपाती नजर आईं। हद तो तब हो गई जब घटना के 24 घंटे बीत जाने के बाद भी डीएफओ अपने अधीनस्थों से कार्रवाई की रिपोर्ट तक नहीं ले सकीं। विभाग की यह सुस्ती स्पष्ट करती है कि मामला केवल लापरवाही का नहीं, बल्कि 'लीपापोती' के खेल का है। "जब रक्षक ही मौन हो जाए, तो पर्यावरण संरक्षण की बात करना बेमानी है। थाल्हापार की घटना ने वन विभाग की कार्यशैली को कटघरे में खड़ा कर दिया है।" मुख्य बिंदु: जो जांच का विषय हैं प्रतिबंधित पेड़ों की कटान: बिना अनुमति महुआ जैसे प्रतिबंधित पेड़ों पर कुल्हाड़ी कैसे चली? साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़: वीडियो वायरल होने के बाद भी लकड़ी को मौके से क्यों और किसके आदेश पर हटवाया गया? अधिकारियों की टालमटोल: डीएफओ द्वारा रिपोर्ट मंगवाने में देरी करना क्या दोषियों को बचाने की साजिश है? खबर लिखे जाने तक वन विभाग की टीम किसी ठोस नतीजे पर पहुँचने के बजाय मामले को ठंडे बस्ते में डालने की जुगत में लगी रही। अब देखना यह है कि क्या शासन स्तर से इन लापरवाह अधिकारियों पर कोई गाज गिरती है या फिर इसी तरह 'कागजी हरियाली' के बीच बस्ती का पर्यावरण लुटता रहेगा।

5 hrs ago
user_अजीत मिश्रा (खोजी)
अजीत मिश्रा (खोजी)
Journalist बस्ती, बस्ती, उत्तर प्रदेश•
5 hrs ago
910099d6-5da3-4bd0-85d8-bd0fcfb261b1

प्रतिबंधित पेड़ों की कटान: बिना अनुमति महुआ जैसे प्रतिबंधित पेड़ों पर कुल्हाड़ी कैसे चली? पर्यावरण के 'रक्षक' ही बने 'भक्षक': थाल्हापार में महुआ के प्रतिबंधित पेड़ों पर चली कुल्हाड़ी, डीएफओ की चुप्पी ने खड़े किए सवाल बस्ती। प्रदेश सरकार एक ओर 'वृक्षारोपण जन अभियान' चलाकर करोड़ों पौधे रोपने का ढोल पीट रही है, वहीं दूसरी ओर बस्ती जनपद के जिम्मेदार अधिकारी ही सरकारी मंशा को पलीता लगाने में जुटे हैं। ताजा मामला लालगंज थाना क्षेत्र के थाल्हापार का है, जहाँ वन विभाग और लकड़ी माफियाओं की जुगलबंदी ने प्रतिबंधित महुआ के पेड़ों का अस्तित्व मिटा दिया। हैरानी की बात यह है कि सूचना मिलने के बाद भी डीएफओ जैसे जिम्मेदार अधिकारी की 'ना-नुकूर' भ्रष्टाचार और मिलीभगत की ओर साफ इशारा कर रही है। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल, विभाग ने साधी चुप्पी थाल्हापार में हुए इस अवैध कटान का वीडियो सोशल मीडिया पर जंगल की आग की तरह फैला। जब जनता के माध्यम से विभाग को भनक लगी, तो कार्रवाई करने के बजाय जिम्मेदारों ने कथित तौर पर 'धनादोहन' का अवसर तलाशना शुरू कर दिया। सूत्रों की मानें तो तीन-चार दिनों तक मामले को दबाए रखा गया और मौका मिलते ही लकड़ी को मौके से गायब करवा दिया गया। डीएफओ की कार्यप्रणाली पर उठ रहे गंभीर सवाल जब मीडिया की टीमों ने साक्ष्यों के साथ जिला स्तरीय अधिकारियों का घेराव किया, तो डीएफओ बस्ती अपनी जिम्मेदारी से बचती और साक्ष्य छुपाती नजर आईं। हद तो तब हो गई जब घटना के 24 घंटे बीत जाने के बाद भी डीएफओ अपने अधीनस्थों से कार्रवाई की रिपोर्ट तक नहीं ले सकीं। विभाग की यह सुस्ती स्पष्ट करती है कि मामला केवल लापरवाही का नहीं, बल्कि 'लीपापोती' के खेल का है। "जब रक्षक ही मौन हो जाए, तो पर्यावरण संरक्षण की बात करना बेमानी है। थाल्हापार की घटना ने वन विभाग की कार्यशैली को कटघरे में खड़ा कर दिया है।" मुख्य बिंदु: जो जांच का विषय हैं प्रतिबंधित पेड़ों की कटान: बिना अनुमति महुआ जैसे प्रतिबंधित पेड़ों पर कुल्हाड़ी कैसे चली? साक्ष्यों के साथ छेड़छाड़: वीडियो वायरल होने के बाद भी लकड़ी को मौके से क्यों और किसके आदेश पर हटवाया गया? अधिकारियों की टालमटोल: डीएफओ द्वारा रिपोर्ट मंगवाने में देरी करना क्या दोषियों को बचाने की साजिश है? खबर लिखे जाने तक वन विभाग की टीम किसी ठोस नतीजे पर पहुँचने के बजाय मामले को ठंडे बस्ते में डालने की जुगत में लगी रही। अब देखना यह है कि क्या शासन स्तर से इन लापरवाह अधिकारियों पर कोई गाज गिरती है या फिर इसी तरह 'कागजी हरियाली' के बीच बस्ती का पर्यावरण लुटता रहेगा।

More news from Uttar Pradesh and nearby areas
  • 🙏😊
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    🙏😊
    user_Santosh Jaiswal
    Santosh Jaiswal
    Basti, Uttar Pradesh•
    34 min ago
  • आदरणीय नेताजी की दूरअंदेशी आज भी रास्ता दिखाती है संसद में आदरणीय नेताजी श्री मुलायम सिंह यादव जी का एक पुराना बयान आज फिर याद आ रहा है। उस वक्त उन्होंने बड़ी बेबाकी से कहा था “पता नहीं अमेरिका से इतना डरते क्यों हैं… क्या है अमेरिका वक़्त गुज़रता गया, हालात बदलते गए… मगर आज जब दुनिया की सियासत को देखते हैं तो एहसास होता है कि आदरणीय नेताजी की बातों में कितनी दूरअंदेशी और सच्चाई छुपी हुई थी। उन्होंने हमेशा हिंदुस्तान की ख़ुद्दारी, आत्मसम्मान और आज़ाद फैसलों की वकालत की। आदरणीय नेताजी एक ऐसी सोच के रहनुमा थे जो मुल्क को किसी के दबाव में नहीं, बल्कि अपने दम और अपनी शर्तों पर खड़ा देखना चाहते थे आज उनका यह बयान सुनकर दिल यही कहता है कि सच्चे लीडर वही होते हैं जो आने वाले वक़्त को पहले ही पढ़ लेते हैं। नेताजी की सियासी दूरअंदेशी को सलाम। आदरणीय नेताजी और उनके विचार सदा अमर रहे
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    आदरणीय नेताजी की दूरअंदेशी आज भी रास्ता दिखाती है
संसद में आदरणीय नेताजी श्री मुलायम सिंह यादव जी का एक पुराना बयान आज फिर याद आ रहा है।
उस वक्त उन्होंने बड़ी बेबाकी से कहा था  “पता नहीं अमेरिका से इतना डरते क्यों हैं… क्या है अमेरिका
वक़्त गुज़रता गया, हालात बदलते गए… मगर आज जब दुनिया की सियासत को देखते हैं तो एहसास होता है कि आदरणीय नेताजी की बातों में कितनी दूरअंदेशी और सच्चाई छुपी हुई थी। उन्होंने हमेशा हिंदुस्तान की ख़ुद्दारी, आत्मसम्मान और आज़ाद फैसलों की वकालत की।
आदरणीय नेताजी  एक ऐसी सोच के रहनुमा थे जो मुल्क को किसी के दबाव में नहीं, बल्कि अपने दम और अपनी शर्तों पर खड़ा देखना चाहते थे
आज उनका यह बयान सुनकर दिल यही कहता है कि
सच्चे लीडर वही होते हैं जो आने वाले वक़्त को पहले ही पढ़ लेते हैं।
नेताजी की सियासी दूरअंदेशी को सलाम।
आदरणीय नेताजी और उनके विचार सदा अमर रहे
    user_Dinesh yadav
    Dinesh yadav
    Political party office Basti, Lucknow•
    1 hr ago
  • पिछले कई सालों से दुनिया में हो रहे लड़ाई झगड़ों से बहुत ही बुरी हालत दुनिया की होने वाली है अब सबको अपील करना चाहिए पूरी दुनिया को कि अब बहुत हो चुका अब शांति चाहिए जय हिंद 🇮🇳
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    पिछले कई सालों से दुनिया में हो रहे लड़ाई झगड़ों से बहुत ही बुरी हालत दुनिया की होने वाली है अब सबको अपील करना चाहिए पूरी दुनिया को कि अब बहुत हो चुका अब शांति चाहिए जय हिंद 🇮🇳
    user_अनिल कुमार गुप्ता
    अनिल कुमार गुप्ता
    Local News Reporter बस्ती, बस्ती, उत्तर प्रदेश•
    5 hrs ago
  • भ्रष्टाचार की 'डिजिटल' सेंध: बांसी के फूलपुर में बिना काम किए मोबाइल से लग रही हाजिरी, सरकारी धन की खुली लूट सिद्धार्थनगर (बांसी)। उत्तर प्रदेश सरकार और प्रशासन भले ही जीरो टॉलरेंस की नीति का दम भरते हों, लेकिन बांसी ब्लॉक के ग्राम पंचायत फूलपुर में मनरेगा योजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुकी है। यहाँ 'डिजिटल इंडिया' का एक ऐसा काला कारनामा सामने आया है, जहाँ मजदूर साइड पर पसीना बहाने के बजाय मोबाइल की स्क्रीन में 'कैद' होकर अपनी हाजिरी दर्ज करा रहे हैं। तकनीक का तमाशा: मोबाइल से मोबाइल की फोटो खींचकर हाजिरी सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, फूलपुर में सचिव और रोजगार सेवक की जुगलबंदी ने भ्रष्टाचार का नया 'टेक्निकल मॉडल' तैयार किया है। नियमतः मजदूरों को कार्यस्थल पर मौजूद रहकर फेस-कैप्चर (Face Capture) के जरिए उपस्थिति दर्ज करानी होती है, लेकिन यहाँ खेल ही निराला है। मास्टर रोल में दर्ज 49 मजदूरों की हाजिरी कथित तौर पर घर बैठे ही मोबाइल से मोबाइल के फोटो खींचकर लगाई जा रही है। जिओ-टैग (Geo-tag) फोटो में भी इस जालसाजी के निशान साफ देखे जा सकते हैं। बिना फावड़ा चले खातों में जा रहा है पैसा मामला सिर्फ़ हाजिरी तक सीमित नहीं है। ग्राम पंचायत फूलपुर में कार्य कोड 3151011/LD/958486255824933467 (एमएसआर संख्या: 6691) के तहत 'वीरेन्द्र सिंह के खेत से भरवाडीह सड़क तक मिट्टी कार्य' के नाम पर सरकारी धन की निकासी की जा रही है। आरोप है कि धरातल पर बिना कोई कार्य किए, मनरेगा का पैसा मजदूरों के खातों में हस्तांतरित किया जाता है और निकासी होते ही इसका बंदरबांट कर लिया जाता है। डीसी मनरेगा की चुप्पी पर सवाल सचिव की 'मेहरबानी' और रोजगार सेवक की इस 'जादुई तकनीक' ने शासन की मंशा पर पानी फेर दिया है। स्थानीय लोगों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि आखिर इतनी बड़ी धांधली डीसी मनरेगा और उच्चाधिकारियों की नजरों से कैसे बच रही है? क्या जिम्मेदारों को इस फर्जीवाड़े की भनक नहीं है, या फिर भ्रष्टाचार की यह जड़ें ऊपर तक जुड़ी हुई हैं? बड़ा सवाल: क्या जिला प्रशासन इस गंभीर मामले की जांच कराकर दोषी सचिव और रोजगार सेवक पर कठोर कार्यवाही करेगा, या फिर फूलपुर में मनरेगा के धन की इसी तरह 'डिजिटल लूट' जारी रहेगी? रिपोर्ट: अजीत मिश्रा (खोजी) वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज
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    भ्रष्टाचार की 'डिजिटल' सेंध: बांसी के फूलपुर में बिना काम किए मोबाइल से लग रही हाजिरी, सरकारी धन की खुली लूट
सिद्धार्थनगर (बांसी)। उत्तर प्रदेश सरकार और प्रशासन भले ही जीरो टॉलरेंस की नीति का दम भरते हों, लेकिन बांसी ब्लॉक के ग्राम पंचायत फूलपुर में मनरेगा योजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुकी है। यहाँ 'डिजिटल इंडिया' का एक ऐसा काला कारनामा सामने आया है, जहाँ मजदूर साइड पर पसीना बहाने के बजाय मोबाइल की स्क्रीन में 'कैद' होकर अपनी हाजिरी दर्ज करा रहे हैं।
तकनीक का तमाशा: मोबाइल से मोबाइल की फोटो खींचकर हाजिरी
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, फूलपुर में सचिव और रोजगार सेवक की जुगलबंदी ने भ्रष्टाचार का नया 'टेक्निकल मॉडल' तैयार किया है। नियमतः मजदूरों को कार्यस्थल पर मौजूद रहकर फेस-कैप्चर (Face Capture) के जरिए उपस्थिति दर्ज करानी होती है, लेकिन यहाँ खेल ही निराला है। मास्टर रोल में दर्ज 49 मजदूरों की हाजिरी कथित तौर पर घर बैठे ही मोबाइल से मोबाइल के फोटो खींचकर लगाई जा रही है। जिओ-टैग (Geo-tag) फोटो में भी इस जालसाजी के निशान साफ देखे जा सकते हैं।
बिना फावड़ा चले खातों में जा रहा है पैसा
मामला सिर्फ़ हाजिरी तक सीमित नहीं है। ग्राम पंचायत फूलपुर में कार्य कोड 3151011/LD/958486255824933467 (एमएसआर संख्या: 6691) के तहत 'वीरेन्द्र सिंह के खेत से भरवाडीह सड़क तक मिट्टी कार्य' के नाम पर सरकारी धन की निकासी की जा रही है। आरोप है कि धरातल पर बिना कोई कार्य किए, मनरेगा का पैसा मजदूरों के खातों में हस्तांतरित किया जाता है और निकासी होते ही इसका बंदरबांट कर लिया जाता है।
डीसी मनरेगा की चुप्पी पर सवाल
सचिव की 'मेहरबानी' और रोजगार सेवक की इस 'जादुई तकनीक' ने शासन की मंशा पर पानी फेर दिया है। स्थानीय लोगों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि आखिर इतनी बड़ी धांधली डीसी मनरेगा और उच्चाधिकारियों की नजरों से कैसे बच रही है? क्या जिम्मेदारों को इस फर्जीवाड़े की भनक नहीं है, या फिर भ्रष्टाचार की यह जड़ें ऊपर तक जुड़ी हुई हैं?
बड़ा सवाल: क्या जिला प्रशासन इस गंभीर मामले की जांच कराकर दोषी सचिव और रोजगार सेवक पर कठोर कार्यवाही करेगा, या फिर फूलपुर में मनरेगा के धन की इसी तरह 'डिजिटल लूट' जारी रहेगी?
रिपोर्ट:
अजीत मिश्रा (खोजी)
वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज
    user_अजीत मिश्रा (खोजी)
    अजीत मिश्रा (खोजी)
    Journalist बस्ती, बस्ती, उत्तर प्रदेश•
    9 hrs ago
  • इतेंद्र कश्यप राष्ट्रीय मत्स्य विभाग भारत सरकार बिहार में मुलाक़ात हुई और बहुत अच्छा लग
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    इतेंद्र कश्यप राष्ट्रीय मत्स्य विभाग भारत सरकार
बिहार में मुलाक़ात हुई और बहुत अच्छा लग
    user_Rohit nishad Rohit Kumar
    Rohit nishad Rohit Kumar
    Artist Khalilabad, Sant Kabeer Nagar•
    1 hr ago
  • Post by आज की आवाज
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    Post by आज की आवाज
    user_आज की आवाज
    आज की आवाज
    खलीलाबाद, संत कबीर नगर, उत्तर प्रदेश•
    1 hr ago
  • आज दिनाँक 10.03.2026 को अपर पुलिस अधीक्षक संतकबीरनगर सुशील कुमार सिंह द्वारा पुलिस लाइन परेड ग्राउण्ड मे साप्ताहिक मंगलवार परेड की सलामी लेकर परेड का निरीक्षण किया गया । परेड में सम्मिलित पुलिस कर्मियों के टर्नआउट को चेक करते हुए सभी अधिकारी / कर्मचारीगणों को ड्यूटी के दौरान उच्च कोटि की वर्दी पहनने व जनता से मधुर व्यवहार स्थापित करने के लिए निर्देशित किया गया । निरीक्षण के पश्चात कर्मियों को शारीरिक रुप से फिट रहने हेतु दौड़ लगवाई गई व परेड के दौरान अनुशासन व एकरुपता के लिए टोलीवार ड्रिल कराई गई । महोदय द्वारा परेड के उपरान्त पुलिस लाइन्स परिसर में मेस, गणना कार्यालय, आमी बैरक आदि का निरीक्षण किया गया तथा पुलिस लाइन की बेहतर साफ-सफाई हेतु प्रतिसार निरीक्षक को निर्देशित किया गया । महोदय द्वारा पुलिस लाइन के आदेश कक्ष मे सभी गार्द रजिस्टरों को चेक करते हुए गार्द की सुरक्षा के संबंध मे सभी गार्द कमांडरों को आवश्यक दिशा निर्देश दिये गये ।
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    आज दिनाँक 10.03.2026 को अपर पुलिस अधीक्षक संतकबीरनगर सुशील कुमार सिंह द्वारा पुलिस लाइन परेड ग्राउण्ड मे साप्ताहिक मंगलवार परेड की सलामी लेकर परेड का निरीक्षण किया गया । परेड में सम्मिलित पुलिस कर्मियों के टर्नआउट को चेक करते हुए सभी अधिकारी / कर्मचारीगणों को ड्यूटी के दौरान उच्च कोटि की वर्दी पहनने व जनता से मधुर व्यवहार स्थापित करने के लिए निर्देशित किया गया । निरीक्षण के पश्चात कर्मियों को शारीरिक रुप से फिट रहने हेतु दौड़ लगवाई गई व परेड के दौरान अनुशासन व एकरुपता के लिए टोलीवार ड्रिल कराई गई । महोदय द्वारा परेड के उपरान्त पुलिस लाइन्स परिसर में मेस, गणना कार्यालय, आमी बैरक आदि का निरीक्षण किया गया तथा पुलिस लाइन की बेहतर साफ-सफाई हेतु प्रतिसार निरीक्षक को निर्देशित किया गया । महोदय द्वारा पुलिस लाइन के आदेश कक्ष मे सभी गार्द रजिस्टरों को चेक करते हुए गार्द की सुरक्षा के संबंध मे सभी गार्द कमांडरों को आवश्यक दिशा निर्देश दिये गये ।
    user_शक्ति श्रीवास्तव बाबुल
    शक्ति श्रीवास्तव बाबुल
    खलीलाबाद, संत कबीर नगर, उत्तर प्रदेश•
    1 hr ago
  • समाजवादी पार्टी के माननीय सांसदों ने संसद के मकर द्वार पर देश में बढ़ती महंगाई और आलू किसानों की बदहाली को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। जब जाएंगे भाजपाई, तभी घटेगी महंगाई...
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    समाजवादी पार्टी के माननीय सांसदों ने संसद के मकर द्वार पर देश में बढ़ती महंगाई और आलू किसानों की बदहाली को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। 
जब जाएंगे भाजपाई, 
तभी घटेगी महंगाई...
    user_Dinesh yadav
    Dinesh yadav
    Political party office Basti, Lucknow•
    4 hrs ago
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