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यह पोस्ट भक्तिमय शुभकामनाओं के साथ शुरू होती है, जिसमें हरे कृष्ण और हरे राम मंत्र का जप करने तथा प्रसन्न रहने की प्रेरणा दी गई है। इसमें रामचरितमानस के अयोध्याकांड की एक चौपाई, "हानि लाभ जीवन मरण, जस अपजस बिधि हाथ" का उल्लेख किया गया है, जिसका सरल अर्थ है कि हानि-लाभ, जीवन-मरण, सम्मान और अपमान जैसी जीवन की कई बातें हमारे नियंत्रण में नहीं होतीं। इस पर आधारित सीख यह है कि कुछ चीजें प्रयास से बदलती हैं और कुछ स्वीकार करने से, इसलिए जहाँ कर्म करना है वहाँ पूरी शक्ति लगानी चाहिए और जहाँ नियंत्रण नहीं है वहाँ मन को शांत रखना चाहिए। इसके अतिरिक्त, एक संवाद में पार्थ के यह कहने पर कि वह खुद को अस्थिर महसूस करता है, माधव उत्तर देते हैं कि मन का स्वभाव बदलना है और उसे स्थिर करने का अर्थ उसे रोकना नहीं, बल्कि समझना है; भावनाओं को दबाने के बजाय स्वीकार करने से वे शांत होती हैं, क्योंकि व्यक्ति अपने विचारों से बड़ा है और भावनाएँ केवल आने-जाने वाले बादल हैं। पोस्ट में एक व्यक्ति की कहानी बताई गई है, जिसका स्वभाव पहले चिड़चिड़ा, तनावपूर्ण और तुरंत प्रतिक्रिया देने वाला था। एक दिन जब उसकी पत्नी ने बाहर जाने की बात कही, बेटे का मॉक परीक्षा का खराब परिणाम आया, और बेटी ने गाड़ी में डेंट लगा दिया, तो उसने सभी परिस्थितियों में आश्चर्यजनक शांति के साथ "ठीक है" कहकर प्रतिक्रिया दी। उसके इस बदले हुए व्यवहार से परिवार के सदस्य चिंतित हो गए और उन्होंने उससे पूछा कि क्या सब ठीक है। इस पर व्यक्ति ने मुस्कुराते हुए समझाया कि उसने यह समझ लिया है कि हर इंसान अपनी ज़िंदगी के लिए खुद ज़िम्मेदार है। पहले वह हर छोटी-बड़ी बात की चिंता करता था, जैसे पत्नी के देर होने पर परेशान होना या बच्चों के कम नंबर आने पर खुद को दोषी मानना। लेकिन उसे एहसास हुआ कि उसकी चिंता से किसी की समस्या हल नहीं होती, बल्कि यह सिर्फ उसकी अपनी शांति बर्बाद करती है। उसने कहा कि वह सलाह, प्यार और सहारा दे सकता है, पर किसी की ज़िंदगी उसके लिए नहीं जी सकता; हर किसी को अपने फैसलों के नतीजे खुद झेलने होते हैं। इसलिए, उसने उन चीजों को नियंत्रित करना बंद करने का फैसला किया जो उसके नियंत्रण में नहीं थीं, और उसने जोर दिया कि परवाह करने और कंट्रोल करने में फर्क है। उस व्यक्ति ने अपने परिवार से कहा कि उसका रोल उनसे प्यार करना, रास्ता दिखाना और साथ खड़ा होना है, जबकि उनका रोल अपनी ज़िंदगी खुद संभालना, फैसले लेना और उनके नतीजे झेलना है, क्योंकि इसी से हर कोई बढ़ता है। उसने कहा कि अब जब कुछ गलत होता है, तो वह खुद को शांत रखता है और भरोसा करता है कि वे उससे सीखेंगे। इस बदलाव का घर पर गहरा प्रभाव पड़ा: बेटा खुद ज़िम्मेदारी समझकर पढ़ने लगा, बेटी ने गाड़ी ठीक कराने की प्रक्रिया संभाली, और पत्नी ने घर के काम अधिक सजगता से करने शुरू किए। माहौल में शांति छा गई, क्योंकि जब एक व्यक्ति नियंत्रण छोड़ देता है, तो दूसरे खुद को संभालना सीख जाते हैं। पोस्ट के अंत में नींबू के 10 घरेलू नुस्खे बताए गए हैं, जिनमें मोटापा दूर करने के लिए शहद के साथ नींबू की शिकंजी, सूखा रोग में नींबू का सेवन, दमा में नींबू का रस और शहद, माइग्रेन में नींबू के छिलके का लेप, मलेरिया ज्वर में काली मिर्च के साथ नींबू, त्वचा का रंग निखारने के लिए नमक के साथ नींबू के रस से नहाना, दाद के लिए नौसादर के साथ नींबू, गंजेपन के लिए नींबू के बीज का लेप, बहरेपन के लिए दालचीनी के तेल के साथ नींबू का रस, और रक्त की कमी दूर करने के लिए गाजर के रस में नींबू निचोड़कर पीना शामिल है।

4 hrs ago
user_Suresh Chandra Agrawal
Suresh Chandra Agrawal
चौमू, जयपुर, राजस्थान•
4 hrs ago

यह पोस्ट भक्तिमय शुभकामनाओं के साथ शुरू होती है, जिसमें हरे कृष्ण और हरे राम मंत्र का जप करने तथा प्रसन्न रहने की प्रेरणा दी गई है। इसमें रामचरितमानस के अयोध्याकांड की एक चौपाई, "हानि लाभ जीवन मरण, जस अपजस बिधि हाथ" का उल्लेख किया गया है, जिसका सरल अर्थ है कि हानि-लाभ, जीवन-मरण, सम्मान और अपमान जैसी जीवन की कई बातें हमारे नियंत्रण में नहीं होतीं। इस पर आधारित सीख यह है कि कुछ चीजें प्रयास से बदलती हैं और कुछ स्वीकार करने से, इसलिए जहाँ कर्म करना है वहाँ पूरी शक्ति लगानी चाहिए और जहाँ नियंत्रण नहीं है वहाँ मन को शांत रखना चाहिए। इसके अतिरिक्त, एक संवाद में पार्थ के यह कहने पर कि वह खुद को अस्थिर महसूस करता है, माधव उत्तर देते हैं कि मन का स्वभाव बदलना है और उसे स्थिर करने का अर्थ उसे रोकना नहीं, बल्कि समझना है; भावनाओं को दबाने के बजाय स्वीकार करने से वे शांत होती हैं, क्योंकि व्यक्ति अपने विचारों से बड़ा है और भावनाएँ केवल आने-जाने वाले बादल हैं। पोस्ट में एक व्यक्ति की कहानी बताई गई है, जिसका स्वभाव पहले चिड़चिड़ा, तनावपूर्ण और तुरंत प्रतिक्रिया देने वाला था। एक दिन जब उसकी पत्नी ने बाहर जाने की बात कही, बेटे का मॉक परीक्षा का खराब परिणाम आया, और बेटी ने गाड़ी में डेंट लगा दिया, तो उसने सभी परिस्थितियों में आश्चर्यजनक शांति के साथ "ठीक है" कहकर प्रतिक्रिया दी। उसके इस बदले हुए व्यवहार से परिवार के सदस्य चिंतित हो गए और उन्होंने उससे पूछा कि क्या सब ठीक है। इस पर व्यक्ति ने मुस्कुराते हुए समझाया कि उसने यह समझ लिया है कि हर इंसान अपनी ज़िंदगी के लिए खुद ज़िम्मेदार है। पहले वह हर छोटी-बड़ी बात की चिंता करता था, जैसे पत्नी के देर होने पर परेशान होना या बच्चों के कम नंबर आने पर खुद को दोषी मानना। लेकिन उसे एहसास हुआ कि उसकी चिंता से किसी की समस्या हल नहीं होती, बल्कि यह सिर्फ उसकी अपनी शांति बर्बाद करती है। उसने कहा कि वह सलाह, प्यार और सहारा दे सकता है, पर किसी की ज़िंदगी उसके लिए नहीं जी सकता; हर किसी को अपने फैसलों के नतीजे खुद झेलने होते हैं। इसलिए, उसने उन चीजों को नियंत्रित करना बंद करने का फैसला किया जो उसके नियंत्रण में नहीं थीं, और उसने जोर दिया कि परवाह करने और कंट्रोल करने में फर्क है। उस व्यक्ति ने अपने परिवार से कहा कि उसका रोल उनसे प्यार करना, रास्ता दिखाना और साथ खड़ा होना है, जबकि उनका रोल अपनी ज़िंदगी खुद संभालना, फैसले लेना और उनके नतीजे झेलना है, क्योंकि इसी से हर कोई बढ़ता है। उसने कहा कि अब जब कुछ गलत होता है, तो वह खुद को शांत रखता है और भरोसा करता है कि वे उससे सीखेंगे। इस बदलाव का घर पर गहरा प्रभाव पड़ा: बेटा खुद ज़िम्मेदारी समझकर पढ़ने लगा, बेटी ने गाड़ी ठीक कराने की प्रक्रिया संभाली, और पत्नी ने घर के काम अधिक सजगता से करने शुरू किए। माहौल में शांति छा गई, क्योंकि जब एक व्यक्ति नियंत्रण छोड़ देता है, तो दूसरे खुद को संभालना सीख जाते हैं। पोस्ट के अंत में नींबू के 10 घरेलू नुस्खे बताए गए हैं, जिनमें मोटापा दूर करने के लिए शहद के साथ नींबू की शिकंजी, सूखा रोग में नींबू का सेवन, दमा में नींबू का रस और शहद, माइग्रेन में नींबू के छिलके का लेप, मलेरिया ज्वर में काली मिर्च के साथ नींबू, त्वचा का रंग निखारने के लिए नमक के साथ नींबू के रस से नहाना, दाद के लिए नौसादर के साथ नींबू, गंजेपन के लिए नींबू के बीज का लेप, बहरेपन के लिए दालचीनी के तेल के साथ नींबू का रस, और रक्त की कमी दूर करने के लिए गाजर के रस में नींबू निचोड़कर पीना शामिल है।

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  • यह संदेश बार-बार होने वाले नजला-जुकाम, लगातार छींकें आने, सांस लेने में दिक्कत, बलग़म की समस्या और धूल, मौसम या अन्य चीज़ों से होने वाली एलर्जी जैसी सामान्य समस्याओं पर प्रकाश डालता है। इसमें ज़ोर दिया गया है कि इन परेशानियों को नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए और समय रहते सही देखभाल व विशेषज्ञ की सलाह लेना अत्यंत आवश्यक है। इन समस्याओं से निपटने और स्वस्थ जीवन सुनिश्चित करने के लिए कुछ महत्वपूर्ण उपाय सुझाए गए हैं। इनमें स्वच्छ वातावरण बनाए रखना, धूल और धुएँ से दूर रहना, पर्याप्त मात्रा में पानी पीना, नियमित रूप से व्यायाम और योग करना शामिल है। इसके अतिरिक्त, सलाह दी गई है कि उपचार हमेशा डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही किया जाए। संदेश का समापन इस प्रेरणादायक वाक्य से होता है कि 'स्वस्थ सांसें, स्वस्थ जीवन की पहचान हैं', जो लोगों को अपनी सेहत का ध्यान रखने और खुलकर सांस लेने के लिए प्रोत्साहित करता है। अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए 075686 28143 पर संपर्क करने का विकल्प भी दिया गया है।
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    यह संदेश बार-बार होने वाले नजला-जुकाम, लगातार छींकें आने, सांस लेने में दिक्कत, बलग़म की समस्या और धूल, मौसम या अन्य चीज़ों से होने वाली एलर्जी जैसी सामान्य समस्याओं पर प्रकाश डालता है। इसमें ज़ोर दिया गया है कि इन परेशानियों को नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए और समय रहते सही देखभाल व विशेषज्ञ की सलाह लेना अत्यंत आवश्यक है।

इन समस्याओं से निपटने और स्वस्थ जीवन सुनिश्चित करने के लिए कुछ महत्वपूर्ण उपाय सुझाए गए हैं। इनमें स्वच्छ वातावरण बनाए रखना, धूल और धुएँ से दूर रहना, पर्याप्त मात्रा में पानी पीना, नियमित रूप से व्यायाम और योग करना शामिल है। इसके अतिरिक्त, सलाह दी गई है कि उपचार हमेशा डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही किया जाए।

संदेश का समापन इस प्रेरणादायक वाक्य से होता है कि 'स्वस्थ सांसें, स्वस्थ जीवन की पहचान हैं', जो लोगों को अपनी सेहत का ध्यान रखने और खुलकर सांस लेने के लिए प्रोत्साहित करता है। अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए 075686 28143 पर संपर्क करने का विकल्प भी दिया गया है।
    user_Dr.Sharwan
    Dr.Sharwan
    Local News Reporter Jaipur, Rajasthan•
    53 min ago
  • यह बात कही गई है कि हमें दूसरों का अपमान नहीं करना चाहिए, क्योंकि सभी को अपने संस्कार और संस्कृति के अनुसार जीवन जीने का अधिकार है। हालांकि, इसी के साथ यह भी ज़ोर दिया गया है कि चाटुकारिता के लिए अपनी स्वयं की संस्कृति और संस्कारों की अवहेलना भी नहीं करनी चाहिए। व्यक्ति को अपने जीवन में अपनी स्वयं की सामर्थ्य और बल पर जीना चाहिए।
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    यह बात कही गई है कि हमें दूसरों का अपमान नहीं करना चाहिए, क्योंकि सभी को अपने संस्कार और संस्कृति के अनुसार जीवन जीने का अधिकार है। हालांकि, इसी के साथ यह भी ज़ोर दिया गया है कि चाटुकारिता के लिए अपनी स्वयं की संस्कृति और संस्कारों की अवहेलना भी नहीं करनी चाहिए। व्यक्ति को अपने जीवन में अपनी स्वयं की सामर्थ्य और बल पर जीना चाहिए।
    user_दौलत राम शर्मा शास्त्री
    दौलत राम शर्मा शास्त्री
    Voice of people आंधी, जयपुर, राजस्थान•
    10 hrs ago
  • राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के नेता और नागौर के सांसद हनुमान बेनीवाल ने भारतपुर में एक राजनीतिक सभा को संबोधित करते हुए अपनी निर्भीक छवि को स्पष्ट रूप से दोहराया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनके जीवन का यह अटल उसूल है कि वे कोई भी लड़ाई अधूरी नहीं छोड़ते, और वे किसी भी व्यक्ति से डरते नहीं हैं। बेनीवाल ने यह भी कहा कि वे हमेशा वही बोलते हैं जो उनके दिल में होता है। यह बयान राजस्थान की राजनीति में, विशेषकर जाट आरक्षण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर, उनकी दृढ़ता और बेबाक रुख को दर्शाता है।
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    राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के नेता और नागौर के सांसद हनुमान बेनीवाल ने भारतपुर में एक राजनीतिक सभा को संबोधित करते हुए अपनी निर्भीक छवि को स्पष्ट रूप से दोहराया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनके जीवन का यह अटल उसूल है कि वे कोई भी लड़ाई अधूरी नहीं छोड़ते, और वे किसी भी व्यक्ति से डरते नहीं हैं। बेनीवाल ने यह भी कहा कि वे हमेशा वही बोलते हैं जो उनके दिल में होता है। यह बयान राजस्थान की राजनीति में, विशेषकर जाट आरक्षण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर, उनकी दृढ़ता और बेबाक रुख को दर्शाता है।
    user_Pawan sharma
    Pawan sharma
    Court reporter जयपुर, जयपुर, राजस्थान•
    14 hrs ago
  • हनुमान बेनीवाल ने भरतपुर में धमाकेदार एंट्री की। उनकी इस जोरदार उपस्थिति को देखकर स्थानीय लोगों ने कहा कि 'तूफान आया' है।
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    हनुमान बेनीवाल ने भरतपुर में धमाकेदार एंट्री की। उनकी इस जोरदार उपस्थिति को देखकर स्थानीय लोगों ने कहा कि 'तूफान आया' है।
    user_Vivek singh jadoun
    Vivek singh jadoun
    News Anchor Jaipur, Rajasthan•
    15 hrs ago
  • जयपुर के नजदीक स्थित रणथंभौर में एक बाघिन का बेहद खूबसूरत नज़ारा देखने को मिला है।
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    जयपुर के नजदीक स्थित रणथंभौर में एक बाघिन का बेहद खूबसूरत नज़ारा देखने को मिला है।
    user_Avinash Barala
    Avinash Barala
    Local News Reporter आंधी, जयपुर, राजस्थान•
    15 hrs ago
  • मध्य प्रदेश की राजनीति में एक बयान को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि भाजपा के पूर्व मंत्री और वर्तमान विधायक ओमप्रकाश सकलेचा बांगरेड गाँव में एक स्वास्थ्य केंद्र के भूमिपूजन कार्यक्रम में पहुँचे थे। इस दौरान, ग्रामीणों ने वर्षों से लंबित सड़क निर्माण का मुद्दा उठाते हुए विधायक से अपना वादा पूरा करने की माँग की। बताया जा रहा है कि सड़क को लेकर सवाल पूछे जाने पर विधायक ने कथित तौर पर कहा, "वोट देना है तो दो..."। इस कार्यक्रम का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि उन्हें चुनाव के दौरान सड़क निर्माण का आश्वासन दिया गया था, लेकिन अब तक इस पर काम शुरू नहीं हुआ है। विधायक के इस बयान को विपक्ष ने जनता का अपमान बताते हुए भाजपा पर निशाना साधा है। दूसरी ओर, विधायक के समर्थक दावा कर रहे हैं कि उनके बयान को उसके संदर्भ से काटकर पेश किया गया है। इस पूरे मामले को लेकर क्षेत्र में राजनीतिक माहौल गरमा गया है और सड़क निर्माण का मुद्दा एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गया है, जिससे प्रदेश में सियासी घमासान छिड़ गया है।
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    मध्य प्रदेश की राजनीति में एक बयान को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। आरोप है कि भाजपा के पूर्व मंत्री और वर्तमान विधायक ओमप्रकाश सकलेचा बांगरेड गाँव में एक स्वास्थ्य केंद्र के भूमिपूजन कार्यक्रम में पहुँचे थे। इस दौरान, ग्रामीणों ने वर्षों से लंबित सड़क निर्माण का मुद्दा उठाते हुए विधायक से अपना वादा पूरा करने की माँग की। बताया जा रहा है कि सड़क को लेकर सवाल पूछे जाने पर विधायक ने कथित तौर पर कहा, "वोट देना है तो दो..."। इस कार्यक्रम का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो गया है।

ग्रामीणों का आरोप है कि उन्हें चुनाव के दौरान सड़क निर्माण का आश्वासन दिया गया था, लेकिन अब तक इस पर काम शुरू नहीं हुआ है। विधायक के इस बयान को विपक्ष ने जनता का अपमान बताते हुए भाजपा पर निशाना साधा है। दूसरी ओर, विधायक के समर्थक दावा कर रहे हैं कि उनके बयान को उसके संदर्भ से काटकर पेश किया गया है।

इस पूरे मामले को लेकर क्षेत्र में राजनीतिक माहौल गरमा गया है और सड़क निर्माण का मुद्दा एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गया है, जिससे प्रदेश में सियासी घमासान छिड़ गया है।
    user_Sunita sharma
    Sunita sharma
    Court reporter जयपुर, जयपुर, राजस्थान•
    18 hrs ago
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