नवादा में गुप्त सूचना पर बड़ी कार्रवाई: उत्पाद विभाग ने पिकअप से 771 लीटर विदेशी शराब बरामद की  नवादा जिले में रविवार को मद्य निषेध विभाग की उत्पाद टीम ने एक बार फिर शराब तस्करों पर बड़ी चोट की है। गुप्त सूचना के आधार पर की गई इस कार्रवाई ने न केवल शराब तस्करी के एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश किया, बल्कि यह भी स्पष्ट कर दिया कि बिहार में शराबबंदी लागू रहने के बावजूद तस्कर किस तरह नए-नए तरीकों से शराब की खेप को राज्य में पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं। फतेहपुर-अकबरपुर ओवरब्रिज के पास की गई इस कार्रवाई में उत्पाद टीम ने खाद की बोरियों के नीचे छुपाई गई भारी मात्रा में विदेशी शराब जब्त की है। यह पूरी कार्रवाई अवर निरीक्षक नागो लाकड़ा एवं अवर निरीक्षक श्री न्यूटन के नेतृत्व में की गई।  कुल बरामद शराब: 771.840 लीटर कुल बोतलें: 2688 वाहन संख्या: BR04 GL 7939 गिरफ्तार चालक: पवन कुमार, हजारीबाग ◆ कैसे मिली सूचना और कैसे हुई कार्रवाई? मद्य निषेध विभाग को शनिवार देर रात एक पुख्ता गुप्त सूचना मिली थी कि झारखंड की ओर से शराब की एक बड़ी खेप पिकअप वाहन से बिहार में प्रवेश करने वाली है। वाहन का नंबर भी उपलब्ध कराया गया था—BR04 GL 7939। सूचना में यह भी बताया गया कि यह वाहन झारखंड के कोडरमा से शराब लादकर बिहार के नवादा होते हुए बिहारशरीफ पहुंचाने की योजना पर निकला है। सूचना मिलते ही अवर निरीक्षक नागो लाकड़ा और अवर निरीक्षक श्री न्यूटन ने तुरंत टीम को सक्रिय किया और रणनीति तैयार की। रात में ही टीम ने कई स्थानों पर निगरानी शुरू कर दी। अंततः फतेहपुर-अकबरपुर ओवरब्रिज के पास घेराबंदी कर वाहन को रोकने की योजना बनाई गई, क्योंकि यह जगह तस्करों के लिए एक सामान्य मार्ग मानी जाती है। रविवार सुबह जैसे ही उस नंबर का संदिग्ध पिकअप दिखाई दिया, टीम ने उसे घेरकर रोक लिया। ◆ खाद की बोरियों के नीचे छुपाई गई थी भारी मात्रा में शराब जब वाहन की तलाशी ली गई तो शुरू में उसमें केवल खाद की बोरियाँ दिखाई दीं। लेकिन अधिकारियों को शक था कि कुछ और भी छुपाया गया है। जब बोरियों को हटाकर नीचे की परत की जाँच की गई तो टीम दंग रह गई—नीचे सलीके से छुपाकर रखी गई विदेशी शराब की सैकड़ों पेटियाँ मौजूद थीं। यह साफ दर्शाता है कि तस्कर खाद के नाम पर वाहन को सामान्य दिखाकर जांच से बचने की कोशिश कर रहे थे। ◆ बरामद शराब का विस्तृत विवरण जांच में निम्नलिखित विदेशी शराब बरामद की गई: रॉयल स्टैग डीलक्स प्रीमियम व्हिस्की 375 एमएल – 41 कार्टन (369 लीटर) रॉयल स्टैग 750 एमएल – 11 कार्टन (99 लीटर) रॉयल स्टैग 180 एमएल – 31 पेटी (267.840 लीटर) ब्लेंडर्स प्राइड 750 एमएल – 1 कार्टन (9 लीटर) आईकॉनिक व्हिस्की 375 एमएल – 1 कार्टन (9 लीटर) मैकडोवेल नंबर-1 375 एमएल – 1 कार्टन (9 लीटर) इंपिरियल ब्लू 375 एमएल – 1 कार्टन (9 लीटर) कुल मात्रा: 771.840 लीटर कुल बोतलें: 2688 ◆ चालक गिरफ्तार, कई खुलासों की उम्मीद वाहन को रोकने के दौरान चालक को मौके पर ही पकड़ लिया गया। उसकी पहचान पवन कुमार, पिता जमडोरी दास, ग्राम जामसौती, थाना चरकुमा, जिला हजारीबाग (झारखंड) के रूप में हुई है। पूछताछ में उसने स्वीकार किया कि शराब उसे झारखंड के कोडरमा से मिली थी और उसे बिहारशरीफ में पहुंचाना था। उसने यह भी संकेत दिया कि इसके पीछे एक संगठित गिरोह काम करता है, जो लगातार झारखंड से शराब की तस्करी कर बिहार पहुंचा रहा है। ◆ तस्करी का बड़ा नेटवर्क आ सकता है सामने प्रारंभिक पूछताछ से ऐसा प्रतीत होता है कि शराब माफिया खाद व अन्य कृषि सामग्री के नाम पर वाहनों का उपयोग करते हैं, ताकि बिहार की सीमा पर चेकिंग से बचा जा सके। खाद की बोरियों के नीचे शराब छुपाना उनकी स्थापित रणनीति बन गई है। मद्य निषेध विभाग अब चालक से मिले सुरागों के आधार पर यह पता लगाने में जुट गया है कि शराब भेजने वाला कौन था, इसका वास्तविक मालिक कौन है, और बिहारशरीफ में इसका ग्राहक या प्राप्तकर्ता कौन था। जांच अधिकारियों का मानना है कि गिरफ्तार चालक तस्करी चेन का सबसे निचला हिस्सा है। उसके बयान और मोबाइल डेटा के आधार पर कई बड़े नामों के सामने आने की संभावना है। टीम ने मोबाइल फोन, वाहन और बरामद माल को जब्त कर लिया है। इनसे प्राप्त जानकारी आगे की कार्रवाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। ◆ बिहार में शराबबंदी और तस्करों की चालें बिहार में शराबबंदी लागू होने के बाद तस्कर विभिन्न तरीकों से शराब की आपूर्ति कर रहे हैं। राज्य के सीमावर्ती क्षेत्रों—विशेषकर झारखंड, उत्तर प्रदेश और बंगाल की सीमाओं से शराब की अवैध आवाजाही होती रहती है। इस घटना ने यह फिर साबित कर दिया कि तस्कर न सिर्फ सक्रिय हैं बल्कि लगातार नए तरीके भी अपनाते रहते हैं। उत्पाद विभाग के अधिकारियों ने बताया कि तस्कर खाद, सब्जी, फल, दूध और यहां तक कि निर्माण सामग्री वाले वाहनों का उपयोग अधिक करते हैं, ताकि सामान्य जांच में उन्हें आसानी से पकड़ा न जा सके। लेकिन मद्य निषेध टीम की सतर्कता ऐसी गतिविधियों पर भारी पड़ रही है। ◆ छापेमारी में सिपाही मोहम्मद इरफान अहमद की अहम भूमिका पूरी कार्रवाई में मद्य निषेध सिपाही मोहम्मद इरफान अहमद भी महत्वपूर्ण भूमिका में रहे। उन्होंने घेराबंदी, वाहन की पहचान और जांच प्रक्रिया में सक्रिय योगदान दिया। टीमवर्क के परिणामस्वरूप शराब की यह सबसे बड़ी हालिया बरामदगी संभव हो सकी है। ◆ निष्कर्ष: शराब माफियाओं पर उत्पाद विभाग की कड़ी निगरानी नवादा जिले में हुई यह कार्रवाई बिहार में शराब तस्करों के लिए एक बड़ा संदेश है कि कानून से बचना आसान नहीं है। सरकार शराबबंदी को लेकर सख्त है और उत्पाद विभाग लगातार सक्रिय रहकर ऐसी अवैध गतिविधियों पर नकेल कस रहा है। चालक से मिली जानकारी के बाद एक बड़े नेटवर्क के उजागर होने की पूरी संभावना है। यदि ऐसा होता है, तो बिहार में शराब तस्करी को एक बड़े झटके का सामना करना पड़ सकता है। टीम ने स्पष्ट किया है कि आगे भी इस तरह की अभियानात्मक कार्रवाई निरंतर जारी रहेगी और शराबबंदी कानून का उल्लंघन करने वालों पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।
नवादा में गुप्त सूचना पर बड़ी कार्रवाई: उत्पाद विभाग ने पिकअप से 771 लीटर विदेशी शराब बरामद की  नवादा जिले में रविवार को मद्य निषेध विभाग की उत्पाद टीम ने एक बार फिर शराब तस्करों पर बड़ी चोट की है। गुप्त सूचना के आधार पर की गई इस कार्रवाई ने न केवल शराब तस्करी के एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश किया, बल्कि यह भी स्पष्ट कर दिया कि बिहार में शराबबंदी लागू रहने के बावजूद तस्कर किस तरह नए-नए तरीकों से शराब की खेप को राज्य में पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं। फतेहपुर-अकबरपुर ओवरब्रिज के पास की गई इस कार्रवाई में उत्पाद टीम ने खाद की बोरियों के नीचे छुपाई गई भारी मात्रा में विदेशी शराब जब्त की है। यह पूरी कार्रवाई अवर निरीक्षक नागो लाकड़ा एवं अवर निरीक्षक श्री न्यूटन के नेतृत्व में की गई।  कुल बरामद शराब: 771.840 लीटर कुल बोतलें: 2688 वाहन संख्या: BR04 GL 7939 गिरफ्तार चालक: पवन कुमार, हजारीबाग ◆ कैसे मिली सूचना और कैसे हुई कार्रवाई? मद्य निषेध विभाग को शनिवार देर रात एक पुख्ता गुप्त सूचना मिली थी कि झारखंड की ओर से शराब की एक बड़ी खेप पिकअप वाहन से बिहार में प्रवेश करने वाली है। वाहन का नंबर भी उपलब्ध कराया गया था—BR04 GL 7939। सूचना में यह भी बताया गया कि यह वाहन झारखंड के कोडरमा से शराब लादकर बिहार के नवादा होते हुए बिहारशरीफ पहुंचाने की योजना पर निकला है। सूचना मिलते ही अवर निरीक्षक नागो लाकड़ा और अवर निरीक्षक श्री न्यूटन ने तुरंत टीम को सक्रिय किया और रणनीति तैयार की। रात में ही टीम ने कई स्थानों पर निगरानी शुरू कर दी। अंततः फतेहपुर-अकबरपुर ओवरब्रिज के पास घेराबंदी कर वाहन को रोकने की योजना बनाई गई, क्योंकि यह जगह तस्करों के लिए एक सामान्य मार्ग मानी जाती है। रविवार सुबह जैसे ही उस नंबर का संदिग्ध पिकअप दिखाई दिया, टीम ने उसे घेरकर रोक लिया। ◆ खाद की बोरियों के नीचे छुपाई गई थी भारी मात्रा में शराब जब वाहन की तलाशी ली गई तो शुरू में उसमें केवल खाद की बोरियाँ दिखाई दीं। लेकिन अधिकारियों को शक था कि कुछ और भी छुपाया गया है। जब बोरियों को हटाकर नीचे की परत की जाँच की गई तो टीम दंग रह गई—नीचे सलीके से छुपाकर रखी गई विदेशी शराब की सैकड़ों पेटियाँ मौजूद थीं। यह साफ दर्शाता है कि तस्कर खाद के नाम पर वाहन को सामान्य दिखाकर जांच से बचने की कोशिश कर रहे थे। ◆ बरामद शराब का विस्तृत विवरण जांच में निम्नलिखित विदेशी शराब बरामद की गई: रॉयल स्टैग डीलक्स प्रीमियम व्हिस्की 375 एमएल – 41 कार्टन (369 लीटर) रॉयल स्टैग 750 एमएल – 11 कार्टन (99 लीटर) रॉयल स्टैग 180 एमएल – 31 पेटी (267.840 लीटर) ब्लेंडर्स प्राइड 750 एमएल – 1 कार्टन (9 लीटर) आईकॉनिक व्हिस्की 375 एमएल – 1 कार्टन (9 लीटर) मैकडोवेल नंबर-1 375 एमएल – 1 कार्टन (9 लीटर) इंपिरियल ब्लू 375 एमएल – 1 कार्टन (9 लीटर) कुल मात्रा: 771.840 लीटर कुल बोतलें: 2688 ◆ चालक गिरफ्तार, कई खुलासों की उम्मीद वाहन को रोकने के दौरान चालक को मौके पर ही पकड़ लिया गया। उसकी पहचान पवन कुमार, पिता जमडोरी दास, ग्राम जामसौती, थाना चरकुमा, जिला हजारीबाग (झारखंड) के रूप में हुई है। पूछताछ में उसने स्वीकार किया कि शराब उसे झारखंड के कोडरमा से मिली थी और उसे बिहारशरीफ में पहुंचाना था। उसने यह भी संकेत दिया कि इसके पीछे एक संगठित गिरोह काम करता है, जो लगातार झारखंड से शराब की तस्करी कर बिहार पहुंचा रहा है। ◆ तस्करी का बड़ा नेटवर्क आ सकता है सामने प्रारंभिक पूछताछ से ऐसा प्रतीत होता है कि शराब माफिया खाद व अन्य कृषि सामग्री के नाम पर वाहनों का उपयोग करते हैं, ताकि बिहार की सीमा पर चेकिंग से बचा जा सके। खाद की बोरियों के नीचे शराब छुपाना उनकी स्थापित रणनीति बन गई है। मद्य निषेध विभाग अब चालक से मिले सुरागों के आधार पर यह पता लगाने में जुट गया है कि शराब भेजने वाला कौन था, इसका वास्तविक मालिक कौन है, और बिहारशरीफ में इसका ग्राहक या प्राप्तकर्ता कौन था। जांच अधिकारियों का मानना है कि गिरफ्तार चालक तस्करी चेन का सबसे निचला हिस्सा है। उसके बयान और मोबाइल डेटा के आधार पर कई बड़े नामों के सामने आने की संभावना है। टीम ने मोबाइल फोन, वाहन और बरामद माल को जब्त कर लिया है। इनसे प्राप्त जानकारी आगे की कार्रवाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। ◆ बिहार में शराबबंदी और तस्करों की चालें बिहार में शराबबंदी लागू होने के बाद तस्कर विभिन्न तरीकों से शराब की आपूर्ति कर रहे हैं। राज्य के सीमावर्ती क्षेत्रों—विशेषकर झारखंड, उत्तर प्रदेश और बंगाल की सीमाओं से शराब की अवैध आवाजाही होती रहती है। इस घटना ने यह फिर साबित कर दिया कि तस्कर न सिर्फ सक्रिय हैं बल्कि लगातार नए तरीके भी अपनाते रहते हैं। उत्पाद विभाग के अधिकारियों ने बताया कि तस्कर खाद, सब्जी, फल, दूध और यहां तक कि निर्माण सामग्री वाले वाहनों का उपयोग अधिक करते हैं, ताकि सामान्य जांच में उन्हें आसानी से पकड़ा न जा सके। लेकिन मद्य निषेध टीम की सतर्कता ऐसी गतिविधियों पर भारी पड़ रही है। ◆ छापेमारी में सिपाही मोहम्मद इरफान अहमद की अहम भूमिका पूरी कार्रवाई में मद्य निषेध सिपाही मोहम्मद इरफान अहमद भी महत्वपूर्ण भूमिका में रहे। उन्होंने घेराबंदी, वाहन की पहचान और जांच प्रक्रिया में सक्रिय योगदान दिया। टीमवर्क के परिणामस्वरूप शराब की यह सबसे बड़ी हालिया बरामदगी संभव हो सकी है। ◆ निष्कर्ष: शराब माफियाओं पर उत्पाद विभाग की कड़ी निगरानी नवादा जिले में हुई यह कार्रवाई बिहार में शराब तस्करों के लिए एक बड़ा संदेश है कि कानून से बचना आसान नहीं है। सरकार शराबबंदी को लेकर सख्त है और उत्पाद विभाग लगातार सक्रिय रहकर ऐसी अवैध गतिविधियों पर नकेल कस रहा है। चालक से मिली जानकारी के बाद एक बड़े नेटवर्क के उजागर होने की पूरी संभावना है। यदि ऐसा होता है, तो बिहार में शराब तस्करी को एक बड़े झटके का सामना करना पड़ सकता है। टीम ने स्पष्ट किया है कि आगे भी इस तरह की अभियानात्मक कार्रवाई निरंतर जारी 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- समाजसेवी व कोशला पंचायत के पूर्व मुखिया रविंद्र सिंह का निधन #हृदय गति रुकना बताया गया वजह #डॉ अनुज ने निधन पर जताया शोक #कहा, उनका जाना अपूर्णनीय क्षति नवादा लाइव नेटवर्क। नवादा जिले के नारदीगंज प्रखंड के प्रसिद्ध समाजसेवी और कोशला पंचायत के पूर्व मुखिया रविंद्र सिंह का हृदय गति रुक जाने से निधन हो गया। निधन से पूरे इलाके में शोक की लहर फैल गई है। परिजन, शुभचिंतक और क्षेत्र के लोग गहरे सदमे में हैं। स्वर्गीय रविंद्र सिंह समाज सेवा के क्षेत्र में काफी सक्रिय रहते थे। वे गरीबों और जरूरतमंदों की मदद के लिए हमेशा तत्पर रहते थे तथा कई सामाजिक और धार्मिक कार्यक्रमों में बढ़-चढ़कर भाग लेते थे। उनके निधन की खबर सुनते ही कई सामाजिक कार्यकर्ता, जनप्रतिनिधि और स्थानीय लोगों ने उनके आवास पर पहुंचकर शोक व्यक्त किया और परिजनों को ढांढस बंधाया। शिक्षाविद एवं समाजसेवी डॉ अनुज सिंह ने अपने समर्थकों के साथ उनके पैतृक आवास रामे पहुंचकर शोक व्यक्त किया और परिजनों को ढांढस बंधाया। उन्होंने कहा कि उनके द्वारा किए गए सामाजिक कार्यों को क्षेत्र के लोग हमेशा याद रखेंगे। डाॅ अनुज सिंह ने कहा कि मेरे साथ-साथ पूरे नारदीगंज प्रखंड की जनता काफी दुखी हैं। उन्होंने कहा कि नारदीगंज प्रखंड ने एक प्रखर समाजसेवी को खो दिया, जो नारदीगंज बाजार में बिना डर भय के सच बोला करते थे और सही को सही और गलत को गलत कहा करते थे। इन्होंने कई वर्षों तक कोशला पंचायत की जनता की सेवा की। भगवान से प्रार्थना है कि दिवंगत आत्मा को अपनी चरणों में स्थान दें और परिवार को पहाड़- सा दुख सहने की शक्ति दें। दुख की इस घड़ी में हम सभी उनके परिवार के साथ खड़े हैं और रहेंगे। नारदीगंज प्रखंड के लिए समाजसेवी के रूप में रविंद्र सिंह हमेशा याद किए जाएंगे। इस दुख की घड़ी में ओड़ों के समाजसेवी संजय सिंह, बस्ती बीघा के जेपी चौधरी, नारदीडीह के प्रवीण कुमार, प्राथमिक शिक्षक संघ के जिलाअध्यक्ष अशोक कुमार सिंह, पचाड़ा पंचायत के पूर्व मुखिया महेश सिंह, बढ़ौना के पंचायत समिति प्रतिनिधि सोनू कुमार सहित नारदिनी इलाके के कई गांवों के हजारों लोग उनके आवास पर श्रद्धांजलि देने पहुंचे।2
- गोविंदपुर में जमीन विवाद को लेकर आवेदन, न्याय की गुहार नवादा जिले के गोविंदपुर प्रखंड के दरमनिया बाजार क्षेत्र में जमीन विवाद का मामला सामने आया है। स्थानीय निवासी संजय पांडे ने प्रशासन को आवेदन देकर अपनी पैतृक जमीन पर अवैध कब्जे की कोशिश का आरोप लगाया है और न्याय की गुहार लगाई है। दिए गए आवेदन के अनुसार संजय पांडे, पिता स्व. तीर्थराज शर्मा, निवासी दरमनिया बाजार, थाना गोविंदपुर, जिला नवादा ने बताया कि उनकी माता आशा देवी के नाम से मौजा बिशनुपुर टोला दरमनिया बाजार में जमीन खरीदी गई थी। इस जमीन का पुराना खाता संख्या 317 है, जिसमें प्लॉट संख्या 23 में 8 डिसमिल तथा प्लॉट संख्या 24 में 33.5 डिसमिल, कुल मिलाकर 41.5 डिसमिल जमीन वर्ष 1975 में रजिस्ट्री के माध्यम से खरीदी गई थी। यह जमीन परमेश्वर सिंह तथा उनके पुत्र भुवनेश्वर सिंह द्वारा रजिस्ट्री की गई थी। संजय पांडे का आरोप है कि विनोद कुमार, बिंदी सिंह, प्रह्लाद कुमार सिंह और विजय कुमार सिंह सहित कुछ लोग उक्त जमीन को अपना बताकर उस पर कब्जा करने की कोशिश कर रहे हैं। विरोध करने पर उन्हें परेशान किए जाने की भी बात कही गई है। उन्होंने बताया कि जमीन से संबंधित सभी वैध कागजात उनके पास मौजूद हैं, इसके बावजूद उन्हें न्याय नहीं मिल पा रहा है। संजय पांडे और विजय कुमार शर्मा ने बताया कि इस मामले को लेकर उन्होंने पहले भी कई बार संबंधित अधिकारियों को आवेदन दिया है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कर जमीन की सही स्थिति स्पष्ट करने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है।1
- लव-कुश जंगल में युवक का शव मिलने से सनसनी, एफएसएल टीम कर रही जांच मेसकौर (नवादा)। नवादा जिले के मेसकौर प्रखंड अंतर्गत सीतामढ़ी थाना क्षेत्र के रसलपुर गांव के समीप स्थित लव-कुश जंगल में सोमवार की सुबह एक युवक का शव मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई। ग्रामीणों ने सुबह शौच के लिए जाने के दौरान जंगल के पास एक व्यक्ति को मृत अवस्था में पड़ा देखा। इसके बाद आसपास के लोगों की भीड़ जुट गई और तत्काल इसकी सूचना सीतामढ़ी थाना पुलिस को दी गई। सूचना मिलते ही थानाध्यक्ष पप्पू शर्मा पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर पहुंचे और मामले की जांच शुरू कर दी। ग्रामीणों की पहचान के आधार पर मृतक की पहचान मुन्ना यादव (35 वर्ष) के रूप में हुई है। वह गांधीनगर गांव के निवासी बताए जा रहे हैं। मृतक के पिता का नाम स्वर्गीय जाहुरी यादव बताया गया है। पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। घटना की गंभीरता को देखते हुए नवादा से एफएसएल (फॉरेंसिक साइंस लैब) की टीम को भी मौके पर बुलाया गया, जिसने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण किया और साक्ष्य जुटाए। चार दिन पहले हुआ था पति-पत्नी में विवाद स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, मृतक मुन्ना यादव का अपनी पत्नी के साथ अक्सर घरेलू विवाद होता रहता था। बताया जा रहा है कि करीब चार दिन पहले भी पति-पत्नी के बीच झगड़ा हुआ था। इसके बाद उसकी पत्नी अपने मायके चली गई थी। तब से मुन्ना यादव घर से बाहर थे। सोमवार की सुबह उनका शव लव-कुश जंगल के पास मिलने से इलाके में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। शनिवार को घर से निकले थे, फिर नहीं लौटे मृतक की चाची नीलम देवी ने बताया कि शनिवार को दिन में करीब एक बजे मुन्ना यादव खिचड़ी खाकर अपने भगना अखिलेश कुमार के साथ घर से निकले थे। इसके बाद वह वापस घर नहीं लौटे। सोमवार को उनकी लाश रसलपुर गांव के समीप लव-कुश जंगल में मिलने की खबर मिली, जिसके बाद परिवार में कोहराम मच गया। मां ने बहू पर लगाया हत्या का आरोप मृतक की मां ने बताया कि चार दिन पहले बेटे और बहू के बीच झगड़ा हुआ था, जिसके बाद बहू अपने मायके चली गई थी। बहू का नाम राखी देवी है, जो गया जिले के वजीरगंज थाना क्षेत्र के तिलोरा गांव की रहने वाली बताई जाती है। मृतक के दो छोटे बच्चे भी हैं। पुत्र दिलखुश कुमार (6 वर्ष) और पुत्री स्वीटी कुमारी (3 वर्ष) हैं। मां ने आरोप लगाते हुए कहा कि उनके बेटे की हत्या में बहू का ही हाथ हो सकता है। उन्होंने पुलिस से मामले की गहराई से जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से होगा खुला4
- अधिक से अधिक संख्या मेंभाग ले 9204860331.6205258126.2
- Post by Garibnath Sahani1
- बिहार शरीफ - Nishant Kumar भजन “हरे कृष्ण हरे राम” को अच्छे से सुनने के लिए स्पीकर खरीदने दुकान पहुंचे। दुकान में भजन की धुन के बीच उनका शांत और आध्यात्मिक अंदाज देखने को मिला। यह वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। 🔊🙏1