भिवानी में पंडित लख्मीचंद सम्मान से सम्मानित हरियाणवी कवि और चिंतक वीएम बेचैन अपनी नई प्रस्तुति "हाय-हाय तेरे चबोड़े" के जरिए हरियाणवी भाषा के प्रचलित शब्द "चबोड़े" का सही मतलब और सामाजिक संदेश जन-जन तक पहुंचाने जा रहे हैं। यह गीत 13 जुलाई को सभी डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर रिलीज होने जा रहा है, जिसका मुख्य उद्देश्य नई पीढ़ी को हरियाणवी भाषा और संस्कृति के साथ जोड़ना है। 'नए भारत का उदय' से बातचीत में वीएम बेचैन ने बताया कि हरियाणवी बोली का हर शब्द अपने भीतर गहरा अनुभव और लोकज्ञान समेटे हुए है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पहले के समय में बड़े-बुजुर्ग शरारती या अपनी हद से बाहर जाने वाले को समझाने के लिए कहते थे, "घणे चबोड़े ना करै।" इसका सीधा मतलब यह होता था कि इंसान अपनी औकात, मर्यादा और सीमा से बाहर न जाए। आज की युवा पीढ़ी आधुनिकता की दौड़ में अपनी मातृभाषा और उसके शब्दों के सही अर्थ से दूर होती जा रही है। ऐसे में कलाकारों और साहित्यकारों का फर्ज बनता है कि वे हरियाणवी संस्कृति, भाषा, शब्द और लोक परंपराओं का अधिक से अधिक प्रचार-प्रसार करें ताकि नौजवान पीढ़ी अपनी सांस्कृतिक विरासत को समझ सके। वीएम बेचैन के अनुसार, "हाय-हाय तेरे चबोड़े" गीत सिर्फ मनोरंजन नहीं है, बल्कि यह हरियाणवी शब्दों के पीछे छिपे जीवन-दर्शन और सामाजिक संदेश को सरल तरीके से दिखाने का एक सार्थक प्रयास है। उन्होंने तमाम हरियाणवी प्रेमियों से अपील की है कि वे इस गीत के रिलीज होने के बाद इस पर रील्स बनाएं और इसे ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाकर अपनी मातृभाषा की रक्षा में भागीदार बनें। इस गीत में "चबोड़े" शब्द को नए संदर्भों और उदाहरणों के साथ पेश किया गया है, जिसका मतलब हर व्यक्ति अपने अनुभव और समझ के मुताबिक निकाल सकता है।
भिवानी में पंडित लख्मीचंद सम्मान से सम्मानित हरियाणवी कवि और चिंतक वीएम बेचैन अपनी नई प्रस्तुति "हाय-हाय तेरे चबोड़े" के जरिए हरियाणवी भाषा के प्रचलित शब्द "चबोड़े" का सही मतलब और सामाजिक संदेश जन-जन तक पहुंचाने जा रहे हैं। यह गीत 13 जुलाई को सभी डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर रिलीज होने जा रहा है, जिसका मुख्य उद्देश्य नई पीढ़ी को हरियाणवी भाषा और संस्कृति के साथ जोड़ना है। 'नए भारत का उदय' से बातचीत में वीएम बेचैन ने बताया कि हरियाणवी बोली का हर शब्द अपने भीतर गहरा अनुभव और लोकज्ञान समेटे हुए है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पहले के समय में बड़े-बुजुर्ग शरारती या अपनी हद से बाहर जाने वाले को समझाने के लिए कहते थे, "घणे चबोड़े ना करै।" इसका सीधा मतलब यह होता था कि इंसान अपनी औकात, मर्यादा और सीमा से बाहर न जाए। आज की युवा पीढ़ी आधुनिकता की दौड़ में अपनी मातृभाषा और उसके शब्दों के सही अर्थ से दूर होती जा रही है। ऐसे में कलाकारों और साहित्यकारों का फर्ज बनता है कि वे हरियाणवी संस्कृति, भाषा, शब्द और लोक परंपराओं का अधिक से अधिक प्रचार-प्रसार करें ताकि नौजवान पीढ़ी अपनी सांस्कृतिक विरासत को समझ सके। वीएम बेचैन के अनुसार, "हाय-हाय तेरे चबोड़े" गीत सिर्फ मनोरंजन नहीं है, बल्कि यह हरियाणवी शब्दों के पीछे छिपे जीवन-दर्शन और सामाजिक संदेश को सरल तरीके से दिखाने का एक सार्थक प्रयास है। उन्होंने तमाम हरियाणवी प्रेमियों से अपील की है कि वे इस गीत के रिलीज होने के बाद इस पर रील्स बनाएं और इसे ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाकर अपनी मातृभाषा की रक्षा में भागीदार बनें। इस गीत में "चबोड़े" शब्द को नए संदर्भों और उदाहरणों के साथ पेश किया गया है, जिसका मतलब हर व्यक्ति अपने अनुभव और समझ के मुताबिक निकाल सकता है।
- भिवानी में ओबीसी ब्रिगेड के अध्यक्ष राजेंदर तंवर ने आंदोलन को लेकर हुंकार भरी है। उन्होंने लोगों का आह्वान करते हुए स्पष्ट शब्दों में कहा कि जिस दिन सभी सड़कों पर उतर आएंगे, उसी दिन यह आंदोलन पूरी तरह सफल हो जाएगा।1
- रोहतक के गवर्नमेंट मॉडल संस्कृति प्राइमरी स्कूल, कायस्थान (पाड़ा मोहल्ला) में रविवार को विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल और पीजीआईएमएस रोहतक के संयुक्त तत्वावधान में एक निःशुल्क मेगा स्वास्थ्य जांच शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर के दौरान कुल 198 मरीजों के स्वास्थ्य की जांच की गई और उन्हें डॉक्टरों द्वारा उचित चिकित्सकीय परामर्श दिया गया। शिविर के मुख्य अतिथि पीजीआईएमएस के निदेशक डॉ. एस.के. सिंघल ने ओरल हेल्थ पर विशेष जोर देते हुए कहा कि मुंह और दांतों की सही देखभाल पूरे शरीर के स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी है, क्योंकि ओरल हेल्थ ही सभी बीमारियों का द्वार है। उन्होंने कहा कि समय पर जांच करवाने से कई गंभीर बीमारियों से बचाव संभव है। इसके साथ ही उन्होंने बताया कि शिविर में आए गंभीर मरीजों को आगे के बेहतर उपचार के लिए पीजीआईएमएस रेफर किया जाएगा। पीजीआईडीएस के वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ. मंजूनाथ बी.सी. ने बताया कि शिविर में डेंटल बस के माध्यम से मरीजों के दांतों का उपचार किया गया। दांतों के इलाज के साथ ही यहां ब्लड शुगर, बीपी और हीमोग्लोबिन की जांच की गई और विभिन्न विशेषज्ञ डॉक्टरों ने मरीजों को निःशुल्क परामर्श और दवाइयां उपलब्ध कराईं। कार्यक्रम के आयोजक श्री ईश्वर ने बताया कि स्वास्थ्य जांच के साथ-साथ इस अवसर पर पौधारोपण और भंडारे का भी आयोजन किया गया। इस पूरे कार्यक्रम में विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के पदाधिकारी, चिकित्सक और बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक मौजूद रहे।1
- भिवानी के नवोदय स्कूल में 10वीं कक्षा के छात्र दीपांशु की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत से सनसनी फैल गई है। इस घटना के बाद छात्र के परिवार ने बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। परिजनों का साफ तौर पर कहना है कि यह आत्महत्या का मामला नहीं है, बल्कि छात्र की हत्या की गई है।1
- रेवाड़ी की ऐतिहासिक ब्रास मार्केट में व्यापारी पूरी तरह से टैक्स भरने के बावजूद बुनियादी सुविधाओं से महरूम हैं। यहां की जर्जर सड़कें, सीवर व्यवस्था की बदहाली और जलभराव की गंभीर समस्या व्यापारियों के लिए बड़ी मुसीबत बनी हुई है। पूरा टैक्स चुकाने के बाद भी सुविधाएं अधूरी रहने से परेशान व्यापारियों ने अब इस ऐतिहासिक बाजार में मॉडर्न इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने की जोरदार मांग उठाई है।1
- स्वास्थ्य मंत्री आरती राव भिवानी पहुंची हैं।1
- हरियाणा के पूर्व मंत्री जेपी दलाल ने अपना एक बयान दिया है।1
- "काम नारियल फोड़ने से नहीं, करने से होगा"—इसी संदेश को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से सामाजिक कार्यकर्ता संजय रामफल ने रविवार को चरखी दादरी के कोर्ट परिसर में स्वच्छता अभियान चलाया। इस दौरान उन्होंने स्वयं झाड़ू लगाकर परिसर की सफाई की और उपस्थित लोगों को स्वच्छता के प्रति जागरूक किया। संजय रामफ़ल ने इस बात पर जोर दिया कि स्वच्छता केवल सरकार या प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह प्रत्येक नागरिक का नैतिक कर्तव्य है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे सार्वजनिक स्थानों पर कूड़ा-कचरा न फैलाएं, केवल डस्टबिन का ही उपयोग करें तथा दूसरों को भी स्वच्छता के लिए प्रेरित करें। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल औपचारिकताएं निभाने या प्रतीकात्मक कार्यक्रम करने से बदलाव नहीं आता, बल्कि स्वयं आगे बढ़कर काम करने से ही समाज में सकारात्मक परिवर्तन संभव होता है। इस अभियान के दौरान वहां उपस्थित लोगों ने भी स्वच्छता बनाए रखने का संकल्प लिया। उन्होंने संजय रामफल की इस पहल की सराहना करते हुए भविष्य में भी ऐसे स्वच्छता अभियानों से जुड़े रहने का भरोसा दिया।4
- हरियाणा के भिवानी में ओबीसी ब्रिगेड हरियाणा के महासचिव मुक्तयार सिंह सदर ने एचपीएससी (HPSC) आंदोलन को लेकर तीखा रुख अपनाया है। उन्होंने इस आंदोलन को लेकर कड़ा रुख अपनाते हुए गंभीर सवाल उठाए हैं और इसे लेकर आड़े हाथों लिया है।1