सरदार सरोवर परियोजना को लेकर दिल्ली में केंद्रीय मंत्रियों और चार राज्यों के मुख्यमंत्रियों के बीच हुए 'वन टाइम सेटलमेंट' समझौते पर नर्मदा बचाओ आंदोलन (NBA) ने बेहद गंभीर सवाल उठाए हैं। बड़वानी में आंदोलन की शीर्ष नेता मेधा पाटकर, राहुल यादव और राजकुमार सिन्हा सहित अन्य पदाधिकारियों ने एक विस्तृत प्रेस विज्ञप्ति जारी कर मध्यस्थता के नाम पर मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के विस्थापितों के अधिकारों की अनदेखी करने का सीधा आरोप लगाया है। आंदोलन ने सवाल उठाया है कि मध्य प्रदेश के डूबक्षेत्र की 7,669 करोड़ रुपये की वैध भरपाई और पुनर्वास के लिए मांगे गए 2,900 करोड़ रुपये के दावे को किस आधार पर दरकिनार किया गया है। आंदोलन के नेताओं के अनुसार, नर्मदा जल विवाद न्यायाधिकरण (1979) और सर्वोच्च अदालत के वर्ष 2000 के फैसलों के तहत डूब क्षेत्र की पूरी लागत और विस्थापितों के संपूर्ण पुनर्वास का खर्च गुजरात सरकार को उठाना कानूनी बंधन है। कुछ समय पूर्व तक दोनों राज्यों के मुख्य सचिवों की बैठकों में गुजरात द्वारा मध्य प्रदेश को 7,388 करोड़ रुपये देने की खबरें आ रही थीं, लेकिन नए समझौते के अनुसार उल्टा मध्य प्रदेश को ही गुजरात को 550 करोड़ रुपये और महाराष्ट्र को 27 करोड़ रुपये का भुगतान करना तय कर दिया गया है। इसके अलावा, आंदोलन ने परियोजना की लागत पर भी सवाल उठाए हैं कि वर्ष 1983 में जिस परियोजना की लागत 4,200 करोड़ आंकी गई थी, वह बढ़कर 75,000 से 90,000 करोड़ रुपये कैसे हो गई। आरोप है कि गुजरात सरकार द्वारा स्टैच्यू ऑफ यूनिटी और वहां की पर्यटन योजनाओं पर खर्च किए गए करोड़ों रुपये भी बांध की मूल लागत में जोड़ दिए गए हैं, जिस पर मध्य प्रदेश सरकार ने कोई स्पष्टता हासिल नहीं की। नर्मदा बचाओ आंदोलन ने दोटूक कहा है कि मध्य प्रदेश के हजारों आदिवासी, दलित, श्रमिक, कुम्हार, केवट और मछुआरे आज भी वैकल्पिक भूमि, मकान के भूखंड और गृह निर्माण अनुदान की प्रतीक्षा कर रहे हैं। ऐसे में वित्तीय सहायता न मिलने पर मध्य प्रदेश सरकार इन विस्थापितों का पुनर्वास कैसे करेगी? आंदोलन ने मांग की है कि सरकार संवैधानिक उपायों का उपयोग कर राज्य का मजबूत पक्ष रखे।
सरदार सरोवर परियोजना को लेकर दिल्ली में केंद्रीय मंत्रियों और चार राज्यों के मुख्यमंत्रियों के बीच हुए 'वन टाइम सेटलमेंट' समझौते पर नर्मदा बचाओ आंदोलन (NBA) ने बेहद गंभीर सवाल उठाए हैं। बड़वानी में आंदोलन की शीर्ष नेता मेधा पाटकर, राहुल यादव और राजकुमार सिन्हा सहित अन्य पदाधिकारियों ने एक विस्तृत प्रेस विज्ञप्ति जारी कर मध्यस्थता के नाम पर मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के विस्थापितों के अधिकारों की अनदेखी करने का सीधा आरोप लगाया है। आंदोलन ने सवाल उठाया है कि मध्य प्रदेश के डूबक्षेत्र की 7,669 करोड़ रुपये की वैध भरपाई और पुनर्वास के लिए मांगे गए 2,900 करोड़ रुपये के दावे को किस आधार पर दरकिनार किया गया है। आंदोलन के नेताओं के अनुसार, नर्मदा जल विवाद न्यायाधिकरण (1979) और सर्वोच्च अदालत के वर्ष 2000 के फैसलों के तहत डूब क्षेत्र की पूरी लागत और विस्थापितों के संपूर्ण पुनर्वास का खर्च गुजरात सरकार को उठाना कानूनी बंधन है। कुछ समय पूर्व तक दोनों राज्यों के मुख्य सचिवों की बैठकों में गुजरात द्वारा मध्य प्रदेश को 7,388 करोड़ रुपये देने की खबरें आ रही थीं, लेकिन नए समझौते के अनुसार उल्टा मध्य प्रदेश को ही गुजरात को 550 करोड़ रुपये और महाराष्ट्र को 27 करोड़ रुपये का भुगतान करना तय कर दिया गया है। इसके अलावा, आंदोलन ने परियोजना की लागत पर भी सवाल उठाए हैं कि वर्ष 1983 में जिस परियोजना की लागत 4,200 करोड़ आंकी गई थी, वह बढ़कर 75,000 से 90,000 करोड़ रुपये कैसे हो गई। आरोप है कि गुजरात सरकार द्वारा स्टैच्यू ऑफ यूनिटी और वहां की पर्यटन योजनाओं पर खर्च किए गए करोड़ों रुपये भी बांध की मूल लागत में जोड़ दिए गए हैं, जिस पर मध्य प्रदेश सरकार ने कोई स्पष्टता हासिल नहीं की। नर्मदा बचाओ आंदोलन ने दोटूक कहा है कि मध्य प्रदेश के हजारों आदिवासी, दलित, श्रमिक, कुम्हार, केवट और मछुआरे आज भी वैकल्पिक भूमि, मकान के भूखंड और गृह निर्माण अनुदान की प्रतीक्षा कर रहे हैं। ऐसे में वित्तीय सहायता न मिलने पर मध्य प्रदेश सरकार इन विस्थापितों का पुनर्वास कैसे करेगी? आंदोलन ने मांग की है कि सरकार संवैधानिक उपायों का उपयोग कर राज्य का मजबूत पक्ष रखे।
- बड़वानी से 255 शिव भक्तों का एक जत्था पवित्र अमरनाथ यात्रा के लिए रवाना हो गया है।1
- बड़वानी जिले के जुलवानिया के युवा आयुर्वेद डॉक्टर जयपाल यादव और उनकी पत्नी ने मिलकर एक नए उपकरण की खोज की है। उनकी इस मेहनत और बड़ी खोज के लिए भारत सरकार द्वारा पेटेंट हेतु प्रमाण पत्र जारी किया गया है। डॉक्टर यादव को मिली इस नई उपलब्धि से क्षेत्रवासियों में खुशी का माहौल है और सभी ने उन्हें बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं।1
- मध्यप्रदेश के अलीराजपुर में आगामी 9 अगस्त को मनाए जाने वाले विश्व आदिवासी दिवस की तैयारियां काफी जोर-शोर से की जाएंगी।1
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- Post by पत्रकार निलेश शर्मा गुरु1
- मध्य प्रदेश के आलीराजपुर जिले के बोरी थाना क्षेत्र में एक विधवा महिला के साथ डकैती और सामूहिक दुष्कर्म की दिल दहला देने वाली वारदात सामने आई है। यह सनसनीखेज घटना शुक्रवार-शनिवार की दरमियानी रात करीब 2 बजे की है, जिसके बाद से पूरे क्षेत्र में सनसनी फैल गई है। करीब 6 हथियारबंद बदमाश विधवा महिला के घर का दरवाजा तोड़कर भीतर घुस गए और इस घिनौने अपराध को अंजाम दिया। बदमाशों ने महिला को बंधक बनाकर उसके साथ मारपीट की और उस पर 8 किलोग्राम चांदी छिपाने का आरोप लगाया। भय के कारण पीड़ित महिला ने अपने पास रखी करीब 1 किलोग्राम चांदी बदमाशों को सौंप दी, लेकिन आरोपी 8 किलोग्राम चांदी की मांग पर अड़े रहे। इसके बाद आरोपियों ने पूरे घर का सामान अस्त-व्यस्त कर दिया और चांदी की खोज में घर के भीतर कई स्थानों पर खुदाई भी की। मनचाही चांदी न मिलने पर आरोपियों ने महिला के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया, जिससे पीड़िता के गुप्तांग सहित शरीर पर गंभीर शारीरिक चोटें आईं। वारदात के बाद महिला को बोरी के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां से प्राथमिक उपचार के बाद उसकी गंभीर हालत को देखते हुए इंदौर रेफर कर दिया गया है। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस अधीक्षक रघुवंश सिंह भदोरिया तुरंत मौके पर पहुंचे और घटनास्थल का निरीक्षण कर जांच के संबंध में अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। पुलिस अधीक्षक ने बताया कि मामले में डकैती, सामूहिक दुष्कर्म तथा अन्य संबंधित धाराओं में प्रकरण दर्ज किया गया है। आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए विशेष पुलिस टीमें गठित की गई हैं और पुलिस सभी पहलुओं पर गंभीरता से जांच करते हुए 24 घंटे के भीतर मामले का खुलासा करने का प्रयास कर रही है।1