हरियाणा की राजनीति में कुलदीप बिश्नोई के 'बब्बर शेर' वाले अंदाज़ का असर साफ दिख रहा है। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा गर्म है कि कुलदीप बिश्नोई से टकराव मोल लेना मोहन लाल बड़ौनी को भारी पड़ गया, जिसके परिणामस्वरूप उनकी कुर्सी चली गई। सूत्रों के अनुसार, पिछले कुछ समय से संगठन और सत्ता के भीतर खींचतान चल रही थी, जहाँ अंदरखाने नाराज़गी और कई फैसलों को लेकर लगातार टकराव की खबरें सामने आ रही थीं। हालाँकि, राजनीति में सिर्फ बयान नहीं, बल्कि ज़नाधार और दिल्ली तक सीधी पहुँच मायने रखती है, और यही तीनों चीज़ें कुलदीप बिश्नोई के पास हैं। हरियाणा की राजनीति का उनका लंबा अनुभव, हर वर्ग में मज़बूत पकड़ और हाईकमान तक सीधी पहुंच उन्हें विरोधियों पर हमेशा भारी साबित करती है। मोहन लाल बड़ौनी की कुर्सी जाने के बाद अब राजनीतिक चर्चाओं का बाजार तेज़ी से गर्म हो गया है, जहाँ लोग इसे 'सिर्फ शुरुआत' मान रहे हैं। एक और नाम जो अब तेज़ी से चर्चा में है, वह है रेखा शर्मा; ऐसी अटकलें हैं कि क्या अगला राजनीतिक झटका उन्हें लग सकता है? क्या संगठन में बड़े बदलाव होने वाले हैं और हरियाणा की राजनीति में एक नया समीकरण आकार लेने वाला है? इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में ही मिलेंगे। निश्चित रूप से, हरियाणा की राजनीति इस समय एक बेहद दिलचस्प मोड़ पर खड़ी है, जहाँ कई नेता अपनी कुर्सियां बचाने में जुटे हैं, वहीं दूसरी तरफ कुलदीप बिश्नोई का राजनीतिक कद लगातार बढ़ता हुआ दिखाई दे रहा है। राजनीति में दोस्ती और दुश्मनी समय के साथ बदलती रहती है, लेकिन अंततः ताकत उसी की चलती है जिसके पीछे जनता खड़ी हो और संगठन में जिसकी पकड़ मज़बूत हो। अब देखना यह होगा कि आने वाले दिनों में हरियाणा की राजनीति में कौन अपनी जगह बना पाएगा, कौन हटेगा, और किसकी 'दहाड़' सबसे भारी पड़ेगी।
हरियाणा की राजनीति में कुलदीप बिश्नोई के 'बब्बर शेर' वाले अंदाज़ का असर साफ दिख रहा है। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा गर्म है कि कुलदीप बिश्नोई से टकराव मोल लेना मोहन लाल बड़ौनी को भारी पड़ गया, जिसके परिणामस्वरूप उनकी कुर्सी चली गई। सूत्रों के अनुसार, पिछले कुछ समय से संगठन और सत्ता के भीतर खींचतान चल रही थी, जहाँ अंदरखाने नाराज़गी और कई फैसलों को लेकर लगातार टकराव की खबरें सामने आ रही थीं। हालाँकि, राजनीति में सिर्फ बयान नहीं, बल्कि ज़नाधार और दिल्ली तक सीधी पहुँच मायने रखती है, और यही तीनों चीज़ें कुलदीप बिश्नोई के पास हैं। हरियाणा की राजनीति का उनका लंबा अनुभव, हर वर्ग में मज़बूत पकड़ और हाईकमान तक सीधी पहुंच उन्हें विरोधियों पर हमेशा भारी साबित करती है। मोहन लाल बड़ौनी की कुर्सी जाने के बाद अब राजनीतिक चर्चाओं का बाजार तेज़ी से गर्म हो गया है, जहाँ लोग इसे 'सिर्फ शुरुआत' मान रहे हैं। एक और नाम जो अब तेज़ी से चर्चा में है, वह है रेखा शर्मा; ऐसी अटकलें हैं कि क्या अगला राजनीतिक झटका उन्हें लग सकता है? क्या संगठन में बड़े बदलाव होने वाले हैं और हरियाणा की राजनीति में एक नया समीकरण आकार लेने वाला है? इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में ही मिलेंगे। निश्चित रूप से, हरियाणा की राजनीति इस समय एक बेहद दिलचस्प मोड़ पर खड़ी है, जहाँ कई नेता अपनी कुर्सियां बचाने में जुटे हैं, वहीं दूसरी तरफ कुलदीप बिश्नोई का राजनीतिक कद लगातार बढ़ता हुआ दिखाई दे रहा है। राजनीति में दोस्ती और दुश्मनी समय के साथ बदलती रहती है, लेकिन अंततः ताकत उसी की चलती है जिसके पीछे जनता खड़ी हो और संगठन में जिसकी पकड़ मज़बूत हो। अब देखना यह होगा कि आने वाले दिनों में हरियाणा की राजनीति में कौन अपनी जगह बना पाएगा, कौन हटेगा, और किसकी 'दहाड़' सबसे भारी पड़ेगी।
- चरखी दादरी में ग्रामीणों का भारी गुस्सा देखने को मिला, जहाँ एक धरना प्रदर्शन विधायक की मौजूदगी के बावजूद समाप्त नहीं हुआ। यह स्थिति ग्रामीणों के बीच तीव्र असंतोष का कारण बनी हुई है, जैसा कि सामने आए दृश्य और सोशल मीडिया पोस्ट दर्शाते हैं। यह प्रदर्शन विशेष रूप से चरखी दादरी के समसपुर गाँव से संबंधित है और हैशटैग से संकेत मिलता है कि यह नशा मुक्त हरियाणा और नशा मुक्त भारत अभियान के तहत मादक पदार्थों के खिलाफ एक मुहिम है। प्रदर्शनकारी ग्रामीणों की नाराजगी इस बात पर केंद्रित है कि स्थानीय विधायक के सामने होने के बावजूद भी उनका धरना क्यों नहीं उठाया गया, जिससे प्रशासन और जन प्रतिनिधियों की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। फौगाट खाप का भी इस मामले से संबंध बताया गया है।1
- आज PT News हरियाणा की 50 बड़ी खबरें प्रसारित करेगा, जिन्हें मात्र 10 मिनट में कवर किया जाएगा।2
- भिवानी में भारत की कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सवादी की जिला कमेटी ने शहर में एक प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन पेट्रोल, डीजल और गैस के बढ़ते दामों के साथ-साथ किसानों के लिए खरीफ सीजन में उर्वरकों की पर्याप्त व्यवस्था न होने की मांग को लेकर आयोजित किया गया था।1
- भोले बाबा के भक्तों के मन में यह सवाल उठता है कि जब नंदी जी महाराज घर पर आते हैं, तो यह क्या संदेश लेकर आता है।1
- भिवानी में कामरेड ओमप्रकाश ने महंगाई के मुद्दे को लेकर जिला उपायुक्त (डीसी) को एक ज्ञापन सौंपा। यह ज्ञापन महंगाई के विरोध में दिया गया।1
- शहीद भगतसिंह के प्रपौत्र युग्वेंदर सिंह सिन्धु ने युवाओं से रक्तदान करने की भावुक अपील की है। उन्होंने बताया कि 13 जून 2026 को विश्व रक्तदाता दिवस की पूर्व संध्या पर एक रक्तदान शिविर का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें उन्होंने युवाओं से अधिक से अधिक संख्या में बढ़-चढ़कर भाग लेने का आग्रह किया। युग्वेंदर सिंह सिन्धु ने जोर देकर कहा कि रक्तदान करना शहीदों को एक सच्ची श्रद्धांजलि है, क्योंकि यह किसी के अनमोल जीवन को बचाने में सहायक होता है।1
- निजी अस्पतालों द्वारा की जा रही लूट का पर्दाफाश हुआ है, जहाँ आयुष्मान कार्ड धारकों से भी पैसे वसूले गए। इस घटना ने एक बार फिर निजी स्वास्थ्य सेवाओं में व्याप्त अनियमितताओं को उजागर किया है। इस गंभीर मामले में, कष्ट निवारण समिति की बैठक में मंत्री राजेश नागर ने तुरंत कार्रवाई की। उन्होंने नोडल अधिकारी विनोद शर्मा को निलंबित कर दिया और संबंधित अस्पताल पर भी कड़ी गाज़ गिरी, जो दिखाता है कि इस धोखाधड़ी पर प्रशासन ने सख्ती बरती है।1
- एक फौजी की बेटी की पुकार अब बड़े पैमाने पर चर्चा का विषय बन गई है, जिसे समाज के मुँह पर एक सीधा तमाचा बताया जा रहा है। लोगों का कहना है कि फौजी की बेटी ने ऐसा क्या माँग लिया कि उनकी इस बहादुर पहल की अब हर तरफ बात हो रही है।1