पलामू जिले के पाण्डु प्रखंड की तीसीबार पंचायत में भीषण गर्मी के बीच पेयजल का गहरा संकट छा गया है। पंचायत भवन के पास स्थित जलमीनार कई वर्षों से बंद पड़ा है, जिसके कारण पंचायत कार्यालय आने वाले ग्रामीणों, राहगीरों और यात्रियों को पीने के पानी के लिए भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। पंचायत भवन मुख्य मार्ग के किनारे होने के कारण यहां रोजाना बड़ी संख्या में लोग विभिन्न कामों से आते हैं। बावजूद इसके, परिसर और आसपास शुद्ध पेयजल की कोई उचित व्यवस्था नहीं है; न तो सार्वजनिक चापाकल हैं और न ही किसी और माध्यम से पानी उपलब्ध है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि यह बंद जलमीनार चालू हो जाए तो पंचायत क्षेत्र के लोगों के साथ-साथ राहगीरों को भी काफी राहत मिल सकती है। उनका आरोप है कि सरकार की जलापूर्ति योजनाओं और जनसुविधाओं के दावों के बावजूद, पंचायत मुख्यालय जैसे महत्वपूर्ण स्थान पर पीने के पानी की कमी चिंता का विषय है। ग्रामीणों ने बंद जलमीनार की तुरंत मरम्मत करने, पंचायत भवन परिसर में स्थायी पेयजल व्यवस्था बनाने और गर्मी को देखते हुए तत्काल अस्थायी जलापूर्ति की मांग की है। इस संबंध में तीसीबार पंचायत की मुखिया पूनम देवी ने बताया कि जलमीनार को फिर से चालू कराने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि दो से चार दिनों के भीतर मरम्मत का काम पूरा कर जलमीनार को फिर से चालू कर दिया जाएगा, जिससे लोगों को पेयजल संकट से राहत मिलेगी। फिलहाल, ग्रामीणों की उम्मीदें प्रशासन और पंचायत प्रतिनिधियों की पहल पर टिकी हैं। यह देखना होगा कि वर्षों से बंद पड़ा यह जलमीनार कब तक शुरू होता है और लोगों को पेयजल की समस्या से स्थायी रूप से निजात मिल पाती है या नहीं।
पलामू जिले के पाण्डु प्रखंड की तीसीबार पंचायत में भीषण गर्मी के बीच पेयजल का गहरा संकट छा गया है। पंचायत भवन के पास स्थित जलमीनार कई वर्षों से बंद पड़ा है, जिसके कारण पंचायत कार्यालय आने वाले ग्रामीणों, राहगीरों और यात्रियों को पीने के पानी के लिए भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। पंचायत भवन मुख्य मार्ग के किनारे होने के कारण यहां रोजाना बड़ी संख्या में लोग विभिन्न कामों से आते हैं। बावजूद इसके, परिसर और आसपास शुद्ध पेयजल की कोई उचित व्यवस्था नहीं है; न तो सार्वजनिक चापाकल हैं और न ही किसी और माध्यम से पानी उपलब्ध है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि यह बंद जलमीनार चालू हो जाए तो पंचायत क्षेत्र के लोगों के साथ-साथ राहगीरों को भी काफी राहत मिल सकती है। उनका आरोप है कि सरकार की जलापूर्ति योजनाओं और जनसुविधाओं के दावों के बावजूद, पंचायत मुख्यालय जैसे महत्वपूर्ण स्थान पर पीने के पानी की कमी चिंता का विषय है। ग्रामीणों ने बंद जलमीनार की तुरंत मरम्मत करने, पंचायत भवन परिसर में स्थायी पेयजल व्यवस्था बनाने और गर्मी को देखते हुए तत्काल अस्थायी जलापूर्ति की मांग की है। इस संबंध में तीसीबार पंचायत की मुखिया पूनम देवी ने बताया कि जलमीनार को फिर से चालू कराने के लिए आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि दो से चार दिनों के भीतर मरम्मत का काम पूरा कर जलमीनार को फिर से चालू कर दिया जाएगा, जिससे लोगों को पेयजल संकट से राहत मिलेगी। फिलहाल, ग्रामीणों की उम्मीदें प्रशासन और पंचायत प्रतिनिधियों की पहल पर टिकी हैं। यह देखना होगा कि वर्षों से बंद पड़ा यह जलमीनार कब तक शुरू होता है और लोगों को पेयजल की समस्या से स्थायी रूप से निजात मिल पाती है या नहीं।
- पलामू जिले के पाण्डु प्रखंड अंतर्गत तीसीबार पंचायत स्थित करियर क्लासेस ने अपना प्रथम स्थापना दिवस बड़े हर्षोल्लास और धूमधाम से मनाया, जिसमें विद्यार्थियों का उत्साह देखने लायक था। इस अवसर पर छात्र-छात्राओं ने विभिन्न गतिविधियों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। बताया गया कि करियर क्लासेस की शुरुआत सीमित संसाधनों और कुछ ही विद्यार्थियों के साथ हुई थी, लेकिन संस्थापक तय्यब आलम और शिक्षकों की लगन व कड़ी मेहनत के कारण यह अब क्षेत्र का एक प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थान बन गया है। वर्तमान में यहाँ सैकड़ों छात्र-छात्राएँ शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। संस्थान कक्षा 7वीं से 10वीं, 11वीं-12वीं के छात्रों के साथ-साथ विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की भी तैयारी करवाता है। इस अवसर पर संस्थापक तय्यब आलम ने अपनी खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि संस्थान की सफलता लोगों के बढ़ते विश्वास का प्रमाण है और भविष्य में भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के निरंतर प्रयास जारी रहेंगे। स्थापना दिवस के इस कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने केक काटकर जश्न मनाया और अपने शिक्षकों व अतिथियों का सम्मान किया। इस दौरान उपस्थित शिक्षकों और गणमान्य अतिथियों ने विद्यार्थियों को अनुशासन, कड़ी मेहनत और लगन के साथ पढ़ाई करने के लिए प्रेरित किया। मौके पर रूपेश कुमार, अनीश कुमार, सोनू कुमार, नईम सर, मुख्य अतिथि पिंटू सर, जितेंद्र सर और उमेश सर सहित कई अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। सभी ने करियर क्लासेस की निरंतर प्रगति पर प्रसन्नता जाहिर की और संस्थान के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।3
- पलामू उपायुक्त के निर्देशानुसार, एक प्रशिक्षु झारखंड प्रशासनिक अधिकारी ने विश्रामपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान, उन्होंने स्वास्थ्य केंद्र की विधि व्यवस्था की जांच की।1
- पलामू पुलिस ने आज मेदिनीनगर शहर के छः मुहान चौक पर यातायात सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए एक अनोखी पहल की। पुलिस अधीक्षक कपिल चौधरी के निर्देश पर चलाए गए इस अभियान में, बिना हेलमेट दोपहिया वाहन चलाने वाले गैर-जिम्मेदार चालकों को हेलमेट देकर उन्हें यातायात नियमों के प्रति समझाया गया। इस पहल में यातायात प्रभारी सतेंद्र दुबे और समाज सेवी सफीक अंसारी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसमें यातायात जवान हरेंद्र कुमार, धर्मेंद्र कुमार और शीतल प्रजापति ने भी सहयोग किया। वहीं, जो चालक पहले से हेलमेट पहनकर वाहन चला रहे थे, उनका गुलाब का फूल देकर स्वागत किया गया। इस तरह से बिना हेलमेट चालकों को हेलमेट बांटने का यह शायद पहला अवसर था। पलामू पुलिस के इस सराहनीय कार्य की लोगों ने जमकर तारीफ की। मौके पर मौजूद राहगीरों और अन्य लोगों ने एक स्वर में कहा कि अगर हर पुलिसकर्मी की सोच ऐसी हो तो यह बहुत ही प्रशंसनीय होगा।1
- गढ़वा जिले के कांडी प्रखंड अंतर्गत चटनिया पंचायत में, पंचायत सचिव और मुखिया प्रतिनिधि द्वारा आंगनबाड़ी सेविकाओं को मईया योजना के सत्यापन की प्रक्रिया समझाई गई। इस दौरान, उपस्थित सभी लोगों को सत्यापन से संबंधित आवश्यक जानकारी प्रदान की गई।1
- ग्रामीणों ने धूल, प्रदूषण और टूटी सड़कों को अपनी रोज़मर्रा की गंभीर समस्या बताया है। उनका कहना है कि इन समस्याओं को लेकर कई बार शिकायतें की जा चुकी हैं, लेकिन इसके बावजूद अब तक कोई समाधान नहीं निकला है। इसी निराशा के चलते, ग्रामीण संबंधित अधिकारियों से तत्काल कार्रवाई की मांग कर रहे हैं और यह सवाल उठा रहे हैं कि आखिर उनकी आवाज़ कब सुनी जाएगी।1
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से पेट्रोल-डीजल का उपयोग कम करने का आग्रह किया है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत में अपने तेल के कुएं नहीं हैं, जिसके कारण आयात पर निर्भरता को कम करना अत्यंत आवश्यक है।1
- गया जिले के डुमरिया प्रखंड के वार्ड संख्या 5 में नाली मरम्मत का कार्य अधूरा पड़ा हुआ है। अनिल प्रसाद के घर से विजय भारती के घर तक की नाली की रिपेयरिंग नहीं की गई है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि मुखिया जी ने नाली मरम्मत का काम आधा-अधूरा छोड़कर सारा पैसा हड़प लिया है।1
- झारखंड मुक्ति मोर्चा के केंद्रीय सदस्य और मीडिया पैनलिस्ट धीरज दुबे ने गढ़वा जिले में बढ़ते भूमि विवादों और भू-माफियाओं की सक्रियता पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने जिला प्रशासन से इन मामलों का त्वरित और निष्पक्ष निपटारा करने की मांग करते हुए कहा कि भूमि विवाद अब केवल राजस्व संबंधी समस्या नहीं रहे, बल्कि ये कानून-व्यवस्था और सामाजिक सौहार्द के लिए भी चुनौती बन रहे हैं। धीरज दुबे के अनुसार, गढ़वा जिले में भू-माफियाओं की संख्या लगातार बढ़ रही है, जो संगठित होकर और महिलाओं को आगे कर जमीन पर जबरन दावा करने या उसे विवादित बनाने का प्रयास करते हैं। इनका मुख्य उद्देश्य वास्तविक भूमि मालिकों पर मानसिक और सामाजिक दबाव डालकर उनकी जमीन को कम कीमत पर खरीदना है, जिससे गरीब और कमजोर वर्ग के लोग सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि रघुवर दास सरकार के कार्यकाल में तत्कालीन मुख्य सचिव राजबाला वर्मा के नेतृत्व में भूमि रिकॉर्ड को ऑनलाइन करने की प्रक्रिया शुरू की गई थी, जिसका उद्देश्य पारदर्शिता लाना था। हालांकि, इस ऑनलाइनकरण के दौरान हुई तकनीकी और प्रशासनिक त्रुटियों के कारण कई भूमि विवाद उत्पन्न हो गए, जहां एक व्यक्ति की जमीन दूसरे के नाम दर्ज हो गई, जिससे वर्षों पुराने स्वामित्व विवाद खड़े हुए और कई जगहों पर तनाव व हिंसक घटनाएं भी सामने आईं। धीरज दुबे ने आरोप लगाया कि जिले में भूमि कारोबार अब एक संगठित व्यवसाय का रूप ले चुका है, जिसमें भूमि की बढ़ती कीमतों के कारण कई लोग अवैध तरीके से जमीन के सौदों में शामिल हो रहे हैं। उनके अनुसार, कुछ भू-माफियाओं को राजनीतिक संरक्षण भी प्राप्त है, क्योंकि पिछले चुनावों में कई भूमि कारोबारियों ने प्रत्याशियों को आर्थिक सहयोग दिया था और अब बदले में उन्हें संरक्षण मिलने की चर्चा आम है। ऐसे माहौल में आम नागरिकों के लिए न्याय प्राप्त करना कठिन हो गया है। उन्होंने विशेष रूप से गढ़वा नगर परिषद से सटे पंचायत क्षेत्रों में सबसे अधिक भूमि विवादों का जिक्र किया, जहां शहरीकरण और जमीन के बढ़ते बाजार मूल्य के कारण अवैध कब्जा, फर्जी दस्तावेज और स्वामित्व विवाद के मामले बढ़े हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इन मामलों का समय पर समाधान नहीं किया गया तो यह भविष्य में बड़े अपराधों और सामाजिक संघर्ष का कारण बन सकता है। उन्होंने जिला प्रशासन से मांग की है कि भूमि विवादों के निपटारे के लिए एक विशेष अभियान चलाया जाए। इसके तहत विवादित जमीनों की जांच के लिए जरूरत के अनुसार विशेष शिविर लगाए जाएं और राजस्व, निबंधन तथा पुलिस विभाग के बीच बेहतर समन्वय स्थापित किया जाए। धीरज दुबे ने कहा कि समयबद्ध कार्रवाई और पारदर्शी जांच से आम लोगों का प्रशासन पर विश्वास मजबूत होगा तथा भूमि विवादों को अपराध का रूप लेने से रोका जा सकेगा। उन्होंने प्रशासन से इस दिशा में गंभीर और प्रभावी पहल करने की अपील की।1