महादलित महिला के शव को श्मशान में नहीं मिली जगह, “भाईचारे” के दावों पर खड़े हुए सवाल महादलित महिला के शव को श्मशान में नहीं मिली जगह, “भाईचारे” के दावों पर खड़े हुए सवाल नारे बड़े-बड़े, लेकिन ज़मीन पर जातिवाद कायम—परिजन घंटों भटकते रहे एक ओर समाज में “सब बराबर हैं” और “भाईचारा” जैसे बड़े-बड़े नारे गूंजते हैं, वहीं दूसरी ओर जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयान कर रही है। ताजा मामला एक महादलित महिला के अंतिम संस्कार से जुड़ा है, जहां उसके परिजनों को श्मशान घाट में जगह तक नहीं दी गई। बताया जा रहा है कि महिला के निधन के बाद जब परिवार अंतिम संस्कार के लिए श्मशान घाट पहुंचा, तो वहां मौजूद कुछ लोगों ने जाति का हवाला देते हुए उन्हें रोक दिया। “भाईचारा” शायद वहीं खत्म हो गया, जहां इंसान की पहचान उसकी जाति से शुरू होती है। परिजन घंटों तक शव को लेकर भटकते रहे, लेकिन कहीं भी उन्हें अंतिम संस्कार की अनुमति नहीं मिली। अंततः उन्हें मजबूरी में गांव के बाहर ही अंतिम संस्कार करना पड़ा—शायद यही है “समानता” का असली रूप। घटना के बाद इलाके में तनाव का माहौल है। सूचना मिलने पर पुलिस और प्रशासन मौके पर पहुंचे और स्थिति को संभालने की कोशिश की। अधिकारियों ने जांच और कार्रवाई का आश्वासन दिया है, जैसा कि अक्सर ऐसे मामलों में होता है। जब मंचों पर “हिंदू-हिंदू भाई-भाई” के नारे लगाए जाते हैं, तब शायद यह बताना भूल जाते हैं कि यह भाईचारा किस-किस के लिए है। क्योंकि जमीन पर तो हालात यह हैं कि मरने के बाद भी इंसान को उसकी जाति से आज़ादी नहीं मिलती। यह घटना सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि समाज के आईने में दिखती सच्चाई है—जहां शब्दों में एकता है, लेकिन व्यवहार में गहरी खाई अब भी मौजूद है। #justice #equality #humanity #stopdiscrimination #dalitrights
महादलित महिला के शव को श्मशान में नहीं मिली जगह, “भाईचारे” के दावों पर खड़े हुए सवाल महादलित महिला के शव को श्मशान में नहीं मिली जगह, “भाईचारे” के दावों पर खड़े हुए सवाल नारे बड़े-बड़े, लेकिन ज़मीन पर जातिवाद कायम—परिजन घंटों भटकते रहे एक ओर समाज में “सब बराबर हैं” और “भाईचारा” जैसे बड़े-बड़े नारे गूंजते हैं, वहीं दूसरी ओर जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयान कर रही है। ताजा मामला एक महादलित महिला के अंतिम संस्कार से जुड़ा है, जहां उसके परिजनों को श्मशान घाट में जगह तक नहीं दी गई। बताया जा रहा है कि महिला के निधन के बाद जब परिवार अंतिम संस्कार के लिए श्मशान घाट पहुंचा, तो वहां मौजूद कुछ लोगों ने जाति का हवाला देते हुए उन्हें रोक दिया। “भाईचारा” शायद वहीं खत्म हो गया, जहां इंसान की पहचान उसकी जाति से शुरू होती है। परिजन घंटों तक शव को लेकर भटकते रहे, लेकिन कहीं भी उन्हें अंतिम संस्कार की अनुमति नहीं मिली। अंततः उन्हें मजबूरी में गांव के बाहर ही अंतिम संस्कार करना पड़ा—शायद यही है “समानता” का असली रूप। घटना के बाद इलाके में तनाव का माहौल है। सूचना मिलने पर पुलिस और प्रशासन मौके पर पहुंचे और स्थिति को संभालने की कोशिश की। अधिकारियों ने जांच और कार्रवाई का आश्वासन दिया है, जैसा कि अक्सर ऐसे मामलों में होता है। जब मंचों पर “हिंदू-हिंदू भाई-भाई” के नारे लगाए जाते हैं, तब शायद यह बताना भूल जाते हैं कि यह भाईचारा किस-किस के लिए है। क्योंकि जमीन पर तो हालात यह हैं कि मरने के बाद भी इंसान को उसकी जाति से आज़ादी नहीं मिलती। यह घटना सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि समाज के आईने में दिखती सच्चाई है—जहां शब्दों में एकता है, लेकिन व्यवहार में गहरी खाई अब भी मौजूद है। #justice #equality #humanity #stopdiscrimination #dalitrights
- मध्य इज़राइल के काफ़र क़ासिम शहर पर मलबा गिरा1
- दिनांक 26.03.2026 को थाना महाराजपुर क्षेत्रान्तर्गत पुरवामीर ब्रिज के पास एक महिंद्रा TUV वाहन का पिछला ब्रेक फंसने से वाहन अनियंत्रित होकर पलट गया। घटना में चालक व परिवार के 04 लोग (बच्चे एवं महिला) घायल हुए, जिन्हें परिजनों द्वारा उपचार हेतु ले जाया गया। मौके पर यातायात सामान्य है, अन्य आवश्यक विधिक कार्यवाही की जा रही है।1
- carvaan mathmatics class - 8th exercise - 1.31
- स्वरूप नगर संदिग्ध परिस्थितियों में मोतीझील में मिला शव। झील में तैरता हुआ मिला शव,मॉर्निंग वॉक करने आए लोगों ने देखा। झील में शव दिखने से मॉर्निंग वॉकर्स में मचा हड़कंप। पुलिस को दी गई सूचना,मौके पर पहुंची पुलिस। पुलिस शव को झील से निकालने का कर रही प्रयास। मामला स्वरूप नगर थाना क्षेत्र के कारगिल पार्क का।1
- Post by द कहर न्यूज़ एजेंसी1
- नवरात्र के पावन अवसर पर गुरुवार को कानपुर के जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह अपनी पत्नी रश्मि सिंह के साथ घाटमपुर स्थित मां कूष्मांडा देवी मंदिर पहुंचे। यहां उन्होंने विधि-विधान से मां के दर्शन किए, पूजन-अर्चन किया और यज्ञशाला में हवन में आहुतियां दीं। इस दौरान उन्होंने मंदिर परिसर की व्यवस्थाओं का भी निरीक्षण किया और अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। डीएम जितेंद्र प्रताप सिंह अपने निजी कार्यक्रम के तहत करीब 11:45 बजे कूष्मांडा मंदिर परिसर पहुंचे। मंदिर पहुंचते ही उन्होंने सबसे पहले मां कूष्मांडा के दरबार में मत्था टेका और गर्भ गृह के केअर टेकर माली समाज की महिला के मार्गदर्शन में विधिवत पूजन किया। इसके बाद वह यज्ञशाला पहुंचे, जहां हवन-पूजन की सभी तैयारियां पहले से पूरी थी। आचार्य ने डीएम और उनकी पत्नी को आसन पर बैठाकर पूजन संपन्न कराया और हवन शुरू कराया। दोनों ने मंत्रोच्चारण के साथ हवन कुंड में आहुतियां दीं। इस दौरान एसडीएम अविचल प्रताप सिंह और तहसीलदार अंकिता पाठक भी मौजूद रहीं। पालिका के अधिशासी अधिकारी महेंद्र कुमार ने स्वयं उपस्थित रहकर साफ-सफाई व अन्य व्यवस्थाएं सुनिश्चित कीं। जब तक डीएम परिसर में रहे, सभी संबंधित अधिकारी मौके पर डटे रहे। दर्शन-पूजन के बाद जिलाधिकारी ने मंदिर परिसर, भीड़ प्रबंधन, स्वच्छता, पेयजल और सुरक्षा इंतजामों का जायजा लिया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि नवरात्र के दौरान श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा सर्वोपरि रखी जाए, कतारबद्ध दर्शन की व्यवस्था बनी रहे और साफ-सफाई में कोई कमी न रहे।1
- चायल क्षेत्र में बेटियों के हौसले और प्रतिभा का एक शानदार उदाहरण सामने आया है। “मेरी बेटी मेरा स्वाभिमान” अभियान के अंतर्गत आयोजित परीक्षा में सैकड़ों प्रतिभागियों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिली, लेकिन इस मुकाबले में वैष्णवी सरोज ने अपनी मेहनत, लगन और आत्मविश्वास के दम पर पहला स्थान हासिल कर सभी को गर्वित कर दिया। इस परीक्षा का आयोजन चायल के पूर्व विधायक Sanjay Gupta द्वारा चलाए जा रहे अभियान के तहत किया गया, जिसका उद्देश्य बेटियों को शिक्षा और आत्मनिर्भरता के लिए प्रेरित करना है। कार्यक्रम में क्षेत्र की सैकड़ों प्रतिभाशाली बेटियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और अपनी योग्यता का प्रदर्शन किया। कड़ी प्रतिस्पर्धा के बीच वैष्णवी सरोज ने शानदार प्रदर्शन करते हुए प्रथम स्थान प्राप्त किया। उनकी इस उपलब्धि पर उन्हें उपहार स्वरूप स्कूटी प्रदान की गई, जिसने उनकी मेहनत को और भी खास बना दिया। इस जीत के साथ उन्होंने न केवल अपने माता-पिता का नाम रोशन किया, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणा बन गईं। इस मौके पर मौजूद लोगों ने वैष्णवी की जमकर सराहना की और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। कार्यक्रम ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि अगर अवसर और प्रोत्साहन मिले, तो बेटियां हर क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छू सकती हैं। वैष्णवी सरोज को इस ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए हार्दिक बधाई एवं उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं।1
- आज इजरायल ने तुर्की के जहाज पर हमला किया। तुर्की-इजराइल युद्ध की तैयारी चल रही है। युद्ध का मैदान गोलान हाइट्स होगा। यरूशलेम मुक्त होगा1
- युद्ध लंबा खिंचा तो हर व्यक्ति प्रभावित होगा। हमें मानसिक रूप से इसके लिए तैयार रहना होगा। अफवाहों पर ध्यान नहीं देना होगा। जब कोई संकट या चुनौती सामने आती है, तो उसका मुकाबला करने के लिए प्रत्येक व्यक्ति को सरकार के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने के लिए अपने आप को तैयार करना होगा। यही सच्ची राष्ट्रभक्ति होती है।1