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बिहार के कोशी नदी के किनारे बसे इलाकों की स्थिति आज भी बेहद दयनीय बनी हुई है, जहाँ हर साल बाढ़, कटाव और विस्थापन के कारण लोगों का जीवन प्रभावित होता है। विशेष रूप से सुपौल, सहरसा, मधेपुरा, अररिया, पूर्णिया और कटिहार जैसे जिलों में कोशी का प्रभाव सबसे अधिक देखा जाता है। नदी को 'बिहार का शोक' कहा जाता है, क्योंकि इसके बढ़ते जलस्तर से हर वर्ष गाँव डूब जाते हैं, खेत और घर कटाव में बह जाते हैं, जिसके कारण लोगों को बार-बार पलायन करना पड़ता है। इन क्षेत्रों में, खासकर तटबंधों और पटवन परियोजनाओं के पास, कई परिवार अस्थायी झोपड़ियों में जीवन बिताने को मजबूर हैं, जहाँ सड़क, बिजली, स्कूल और अस्पताल जैसी बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव है। खेती योग्य भूमि लगातार कम हो रही है, जिससे रोजगार की समस्या गहरा गई है। बाढ़ के कारण फसलें बर्बाद हो जाती हैं और युवा बेहतर अवसर की तलाश में पंजाब, दिल्ली व हरियाणा जैसे राज्यों की ओर पलायन कर रहे हैं। महिलाओं और बच्चों के लिए परिस्थितियाँ और भी कठिन हैं। शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएँ भी बुरी तरह प्रभावित हैं; बरसात के मौसम में स्कूल बंद हो जाते हैं और नाव ही एकमात्र आवागमन का साधन बचती है, जिससे समय पर स्वास्थ्य सुविधाएँ भी नहीं मिल पातीं। सरकार द्वारा तटबंधों के निर्माण व मरम्मत, राहत शिविरों की स्थापना, प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत सहायता, बाढ़ सहायता राशि और सड़क व पुल निर्माण जैसे कार्य किए जा रहे हैं। हालाँकि, कई क्षेत्रों में ये सुविधाएँ अभी भी पूरी तरह से नहीं पहुँच पाई हैं। इन कठिन परिस्थितियों के बावजूद, स्थानीय लोग खेती, मछली पालन, पशुपालन और दिहाड़ी मजदूरी करके किसी तरह अपना जीवन यापन कर रहे हैं। उनकी प्रमुख माँगें हैं कि उन्हें स्थायी पुनर्वास मिले, बेहतर शिक्षा व स्वास्थ्य सुविधाएँ मिलें और कटाव को रोकने के लिए मजबूत व प्रभावी उपाय किए जाएँ।

8 hrs ago
user_Vandebharat news bihar sarif nalanda
Vandebharat news bihar sarif nalanda
Local News Reporter बिहार शरीफ, नालंदा, बिहार•
8 hrs ago

बिहार के कोशी नदी के किनारे बसे इलाकों की स्थिति आज भी बेहद दयनीय बनी हुई है, जहाँ हर साल बाढ़, कटाव और विस्थापन के कारण लोगों का जीवन प्रभावित होता है। विशेष रूप से सुपौल, सहरसा, मधेपुरा, अररिया, पूर्णिया और कटिहार जैसे जिलों में कोशी का प्रभाव सबसे अधिक देखा जाता है। नदी को 'बिहार का शोक' कहा जाता है, क्योंकि इसके बढ़ते जलस्तर से हर वर्ष गाँव डूब जाते हैं, खेत और घर कटाव में बह जाते हैं, जिसके कारण लोगों को बार-बार पलायन करना पड़ता है। इन क्षेत्रों में, खासकर तटबंधों और पटवन परियोजनाओं के पास, कई परिवार अस्थायी झोपड़ियों में जीवन बिताने को मजबूर हैं, जहाँ सड़क, बिजली, स्कूल और अस्पताल जैसी बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव है। खेती योग्य भूमि लगातार कम हो रही है, जिससे रोजगार की समस्या गहरा गई है। बाढ़ के कारण फसलें बर्बाद हो जाती हैं और युवा बेहतर अवसर की तलाश में पंजाब, दिल्ली व हरियाणा जैसे राज्यों की ओर पलायन कर रहे हैं। महिलाओं और बच्चों के लिए परिस्थितियाँ और भी कठिन हैं। शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएँ भी बुरी तरह प्रभावित हैं; बरसात के मौसम में स्कूल बंद हो जाते हैं और नाव ही एकमात्र आवागमन का साधन बचती है, जिससे समय पर स्वास्थ्य सुविधाएँ भी नहीं मिल पातीं। सरकार द्वारा तटबंधों के निर्माण व मरम्मत, राहत शिविरों की स्थापना, प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत सहायता, बाढ़ सहायता राशि और सड़क व पुल निर्माण जैसे कार्य किए जा रहे हैं। हालाँकि, कई क्षेत्रों में ये सुविधाएँ अभी भी पूरी तरह से नहीं पहुँच पाई हैं। इन कठिन परिस्थितियों के बावजूद, स्थानीय लोग खेती, मछली पालन, पशुपालन और दिहाड़ी मजदूरी करके किसी तरह अपना जीवन यापन कर रहे हैं। उनकी प्रमुख माँगें हैं कि उन्हें स्थायी पुनर्वास मिले, बेहतर शिक्षा व स्वास्थ्य सुविधाएँ मिलें और कटाव को रोकने के लिए मजबूत व प्रभावी उपाय किए जाएँ।

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  • बिहारशरीफ नगर निगम में टेम्पो और ई-रिक्शा के टोल टैक्स को लेकर एक गंभीर विवाद गहराता जा रहा है। इस पूरे मामले में ठेके की राशि आधी होने और वाहन चालकों से निर्धारित शुल्क से अधिक वसूली के गंभीर आरोप लगे हैं, जिसे "टोल टैक्स का बड़ा खेल" बताया जा रहा है। जानकारी के अनुसार, वर्ष 2025-26 के लिए जो टोल टैक्स ठेका पिछले साल ₹56 लाख में हुआ था, वह इस बार घटकर मात्र ₹28.50 लाख में दे दिया गया है। इसी बीच, वाहन चालकों का आरोप है कि ठेकेदारों द्वारा उनसे निर्धारित शुल्क से कहीं अधिक राशि वसूली जा रही है। इस पर संज्ञान लेते हुए, समाजसेवी संजय कुमार सिन्हा ने पूरे प्रकरण की गहन जांच की मांग की है। उन्होंने मौजूदा टेंडर को तत्काल रद्द करने और एक नया टेंडर जारी करने की आवश्यकता पर जोर दिया है। यह बड़ा सवाल उठाया जा रहा है कि आखिर इतने बड़े अंतर के साथ आधी राशि में यह ठेका कैसे स्वीकृत हुआ और वाहन चालकों से मनमानी वसूली के आरोपों में कितनी सच्चाई है, जिसकी पड़ताल की जानी बाकी है।
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    बिहारशरीफ नगर निगम में टेम्पो और ई-रिक्शा के टोल टैक्स को लेकर एक गंभीर विवाद गहराता जा रहा है। इस पूरे मामले में ठेके की राशि आधी होने और वाहन चालकों से निर्धारित शुल्क से अधिक वसूली के गंभीर आरोप लगे हैं, जिसे "टोल टैक्स का बड़ा खेल" बताया जा रहा है।

जानकारी के अनुसार, वर्ष 2025-26 के लिए जो टोल टैक्स ठेका पिछले साल ₹56 लाख में हुआ था, वह इस बार घटकर मात्र ₹28.50 लाख में दे दिया गया है। इसी बीच, वाहन चालकों का आरोप है कि ठेकेदारों द्वारा उनसे निर्धारित शुल्क से कहीं अधिक राशि वसूली जा रही है। इस पर संज्ञान लेते हुए, समाजसेवी संजय कुमार सिन्हा ने पूरे प्रकरण की गहन जांच की मांग की है। उन्होंने मौजूदा टेंडर को तत्काल रद्द करने और एक नया टेंडर जारी करने की आवश्यकता पर जोर दिया है।

यह बड़ा सवाल उठाया जा रहा है कि आखिर इतने बड़े अंतर के साथ आधी राशि में यह ठेका कैसे स्वीकृत हुआ और वाहन चालकों से मनमानी वसूली के आरोपों में कितनी सच्चाई है, जिसकी पड़ताल की जानी बाकी है।
    user_Sanjay Kumar
    Sanjay Kumar
    Local News Reporter बिहार शरीफ, नालंदा, बिहार•
    16 min ago
  • DSP संकेत कुमार ने अपना पदभार संभालने के तुरंत बाद ही एक्शन में आते हुए, महज 14 घंटे के भीतर एक लूटकांड का सफलतापूर्वक खुलासा कर दिया है। यह त्वरित कार्रवाई उनकी कार्यकुशलता को दर्शाती है।
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    DSP संकेत कुमार ने अपना पदभार संभालने के तुरंत बाद ही एक्शन में आते हुए, महज 14 घंटे के भीतर एक लूटकांड का सफलतापूर्वक खुलासा कर दिया है। यह त्वरित कार्रवाई उनकी कार्यकुशलता को दर्शाती है।
    user_VN News Bihar
    VN News Bihar
    Bihar Sharif, Nalanda•
    1 hr ago
  • भारतीय डाक विभाग के नालंदा मंडल द्वारा आज बिहार शरीफ के टाउन हॉल में वित्तीय वर्ष 2026-2027 को लेकर एक समीक्षा बैठक सह सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। इस दौरान डाक विभाग की विभिन्न सेवाओं की गहन समीक्षा की गई, जिसका मुख्य उद्देश्य जिले के लोगों को और भी बेहतर सेवाएँ प्रदान करना तथा अधिक से अधिक लोगों को डाकघर से जोड़ना था। इस बैठक में इन बिंदुओं पर विस्तृत चर्चा हुई। कार्यक्रम के तहत उत्कृष्ट कार्य करने वाले डाककर्मियों को सम्मानित भी किया गया। सर्वाधिक खाता खोलने की श्रेणी में इस्लामपुर उपडाकघर के संजय कुमार ने प्रथम, हरनौत के संतोष कुमार ने द्वितीय और राजगीर के सोमन कुमार बोस ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों को जोड़ने के लिए श्री कुमार अभिषेक को पुरस्कृत किया गया। इसके अतिरिक्त, दीपू कुमार, जितेंद्र कुमार, विशाल कुमार, डायरेक्ट एजेंट के रूप में कुमकुम कुमारी, सिमरन, विशाल कुमार, और पोस्टल लाइफ इंश्योरेंस के क्षेत्र में प्रीति गुप्ता, रूबी कुमारी, अशोक कुमार को भी सम्मानित किया गया। प्रधान डाकघर के पोस्टमास्टर श्री मनीष कुमार आनंद को भी सर्वाधिक खाता खोलने के लिए विशेष रूप से सम्मानित किया गया, साथ ही सीमा कुमारी, आलोक कुमार प्रखर, मुन्ना कुमार, सिंकू कुमारी, मनोज कुमार, और संजीव कुमार जैसे अन्य कर्मियों को भी उनके योगदान के लिए सराहा गया। डाक अधीक्षक कुंदन कुमार ने इस अवसर पर जनता से अपील की कि वे डाक विभाग की विभिन्न बचत योजनाओं, बीमा सेवाओं और डिजिटल सुविधाओं का अधिकतम लाभ उठाएँ। उन्होंने लोगों को डाकघर से जुड़कर सुरक्षित एवं विश्वसनीय सेवाओं का लाभ प्राप्त करने के लिए प्रोत्साहित किया। इस समारोह में पोस्टमास्टर मनीष कुमार आनंद, डाक निरीक्षक रामाशीष कुमार, विकास राय, इंद्रेश विक्रांत, रंजीत रजक, डिप्टी पोस्टमास्टर अमलेश कुमार, मिथलेश कुमार, शैलेन्द्र कुमार सहित मंडल के सभी डाककर्मी उपस्थित रहे।
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    भारतीय डाक विभाग के नालंदा मंडल द्वारा आज बिहार शरीफ के टाउन हॉल में वित्तीय वर्ष 2026-2027 को लेकर एक समीक्षा बैठक सह सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। इस दौरान डाक विभाग की विभिन्न सेवाओं की गहन समीक्षा की गई, जिसका मुख्य उद्देश्य जिले के लोगों को और भी बेहतर सेवाएँ प्रदान करना तथा अधिक से अधिक लोगों को डाकघर से जोड़ना था। इस बैठक में इन बिंदुओं पर विस्तृत चर्चा हुई।

कार्यक्रम के तहत उत्कृष्ट कार्य करने वाले डाककर्मियों को सम्मानित भी किया गया। सर्वाधिक खाता खोलने की श्रेणी में इस्लामपुर उपडाकघर के संजय कुमार ने प्रथम, हरनौत के संतोष कुमार ने द्वितीय और राजगीर के सोमन कुमार बोस ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों को जोड़ने के लिए श्री कुमार अभिषेक को पुरस्कृत किया गया। इसके अतिरिक्त, दीपू कुमार, जितेंद्र कुमार, विशाल कुमार, डायरेक्ट एजेंट के रूप में कुमकुम कुमारी, सिमरन, विशाल कुमार, और पोस्टल लाइफ इंश्योरेंस के क्षेत्र में प्रीति गुप्ता, रूबी कुमारी, अशोक कुमार को भी सम्मानित किया गया। प्रधान डाकघर के पोस्टमास्टर श्री मनीष कुमार आनंद को भी सर्वाधिक खाता खोलने के लिए विशेष रूप से सम्मानित किया गया, साथ ही सीमा कुमारी, आलोक कुमार प्रखर, मुन्ना कुमार, सिंकू कुमारी, मनोज कुमार, और संजीव कुमार जैसे अन्य कर्मियों को भी उनके योगदान के लिए सराहा गया।

डाक अधीक्षक कुंदन कुमार ने इस अवसर पर जनता से अपील की कि वे डाक विभाग की विभिन्न बचत योजनाओं, बीमा सेवाओं और डिजिटल सुविधाओं का अधिकतम लाभ उठाएँ। उन्होंने लोगों को डाकघर से जुड़कर सुरक्षित एवं विश्वसनीय सेवाओं का लाभ प्राप्त करने के लिए प्रोत्साहित किया। इस समारोह में पोस्टमास्टर मनीष कुमार आनंद, डाक निरीक्षक रामाशीष कुमार, विकास राय, इंद्रेश विक्रांत, रंजीत रजक, डिप्टी पोस्टमास्टर अमलेश कुमार, मिथलेश कुमार, शैलेन्द्र कुमार सहित मंडल के सभी डाककर्मी उपस्थित रहे।
    user_Vandebharat news bihar sarif nalanda Ramendra Kumar
    Vandebharat news bihar sarif nalanda Ramendra Kumar
    Local News Reporter बिहार शरीफ, नालंदा, बिहार•
    4 hrs ago
  • भारतीय डाक विभाग के नालंदा मंडल द्वारा वित्तीय वर्ष 2026-2027 को लेकर एक समीक्षा बैठक सह सम्मान समारोह का आयोजन टाउन हॉल बिहार शरीफ में किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य डाक विभाग की विभिन्न सेवाओं की समीक्षा करना तथा जिले के लोगों को और बेहतर सेवाएँ प्रदान करने के साथ-साथ अधिक से अधिक लोगों को डाकघर से जोड़ना था, जिस पर विस्तृत चर्चा हुई। समारोह के दौरान उत्कृष्ट कार्य करने वाले डाककर्मियों को सम्मानित भी किया गया। सर्वाधिक खाता खोलने की श्रेणी में इस्लामपुर उपडाकघर के संजय कुमार को प्रथम, हरनौत के संतोष कुमार को द्वितीय और राजगीर के सोमन कुमार बोस को तृतीय स्थान प्राप्त हुआ। सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों को अधिक से अधिक जोड़ने के लिए श्री कुमार अभिषेक को पुरस्कृत किया गया। इसके अतिरिक्त, दीपू कुमार, जितेंद्र कुमार, विशाल कुमार, डायरेक्ट एजेंट के रूप में कुमकुम कुमारी, सिमरन, विशाल कुमार और पोस्टल लाइफ इंश्योरेंस के क्षेत्र में प्रीति गुप्ता, रूबी कुमारी, अशोक कुमार को भी पुरस्कृत किया गया। सीमा कुमारी, आलोक कुमार प्रखर, मुन्ना कुमार, सिंकू कुमारी, मनोज कुमार, संजीव कुमार सहित प्रधान डाकघर के पोस्टमास्टर श्री मनीष कुमार आनंद को सर्वाधिक खाता खोलने के लिए विशेष रूप से सम्मानित किया गया। इस अवसर पर डाक अधीक्षक कुंदन कुमार ने आम जनता से अपील की कि वे डाक विभाग की विभिन्न बचत योजनाओं, बीमा सेवाओं और डिजिटल सुविधाओं का अधिकतम लाभ उठाएँ तथा डाकघर से जुड़कर सुरक्षित एवं विश्वसनीय सेवाओं का लाभ प्राप्त करें। समारोह में पोस्टमास्टर मनीष कुमार आनंद, डाक निरीक्षक रामाशीष कुमार, विकास राय, इंद्रेश विक्रांत, रंजीत रजक, डिप्टी पोस्टमास्टर अमलेश कुमार, मिथलेश कुमार, शैलेन्द्र कुमार सहित मंडल के सभी डाककर्मी उपस्थित थे।
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    भारतीय डाक विभाग के नालंदा मंडल द्वारा वित्तीय वर्ष 2026-2027 को लेकर एक समीक्षा बैठक सह सम्मान समारोह का आयोजन टाउन हॉल बिहार शरीफ में किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य डाक विभाग की विभिन्न सेवाओं की समीक्षा करना तथा जिले के लोगों को और बेहतर सेवाएँ प्रदान करने के साथ-साथ अधिक से अधिक लोगों को डाकघर से जोड़ना था, जिस पर विस्तृत चर्चा हुई।

समारोह के दौरान उत्कृष्ट कार्य करने वाले डाककर्मियों को सम्मानित भी किया गया। सर्वाधिक खाता खोलने की श्रेणी में इस्लामपुर उपडाकघर के संजय कुमार को प्रथम, हरनौत के संतोष कुमार को द्वितीय और राजगीर के सोमन कुमार बोस को तृतीय स्थान प्राप्त हुआ। सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों को अधिक से अधिक जोड़ने के लिए श्री कुमार अभिषेक को पुरस्कृत किया गया। इसके अतिरिक्त, दीपू कुमार, जितेंद्र कुमार, विशाल कुमार, डायरेक्ट एजेंट के रूप में कुमकुम कुमारी, सिमरन, विशाल कुमार और पोस्टल लाइफ इंश्योरेंस के क्षेत्र में प्रीति गुप्ता, रूबी कुमारी, अशोक कुमार को भी पुरस्कृत किया गया। सीमा कुमारी, आलोक कुमार प्रखर, मुन्ना कुमार, सिंकू कुमारी, मनोज कुमार, संजीव कुमार सहित प्रधान डाकघर के पोस्टमास्टर श्री मनीष कुमार आनंद को सर्वाधिक खाता खोलने के लिए विशेष रूप से सम्मानित किया गया।

इस अवसर पर डाक अधीक्षक कुंदन कुमार ने आम जनता से अपील की कि वे डाक विभाग की विभिन्न बचत योजनाओं, बीमा सेवाओं और डिजिटल सुविधाओं का अधिकतम लाभ उठाएँ तथा डाकघर से जुड़कर सुरक्षित एवं विश्वसनीय सेवाओं का लाभ प्राप्त करें।

समारोह में पोस्टमास्टर मनीष कुमार आनंद, डाक निरीक्षक रामाशीष कुमार, विकास राय, इंद्रेश विक्रांत, रंजीत रजक, डिप्टी पोस्टमास्टर अमलेश कुमार, मिथलेश कुमार, शैलेन्द्र कुमार सहित मंडल के सभी डाककर्मी उपस्थित थे।
    user_Vandebharat news bihar sarif nalanda
    Vandebharat news bihar sarif nalanda
    Local News Reporter बिहार शरीफ, नालंदा, बिहार•
    7 hrs ago
  • Post by Dharamveerkumar
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    Post by Dharamveerkumar
    user_Dharamveerkumar
    Dharamveerkumar
    Artist बिहार शरीफ, नालंदा, बिहार•
    17 hrs ago
  • एक सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से एक महिला को बचाने के लिए तत्काल मदद की मार्मिक पुकार लगाई गई है। पोस्ट में एक अज्ञात व्यक्ति को 'हरामखोर' बताते हुए, उसके लिए कठोरतम सज़ा की पुरजोर मांग की गई है, जिससे लोगों में गहरा आक्रोश और हैरानी साफ झलक रही है।
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    एक सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से एक महिला को बचाने के लिए तत्काल मदद की मार्मिक पुकार लगाई गई है। पोस्ट में एक अज्ञात व्यक्ति को 'हरामखोर' बताते हुए, उसके लिए कठोरतम सज़ा की पुरजोर मांग की गई है, जिससे लोगों में गहरा आक्रोश और हैरानी साफ झलक रही है।
    user_Rajesh Kumar
    Rajesh Kumar
    Consultant Bihar Sharif, Nalanda•
    21 hrs ago
  • नालंदा जिले के बिहार शरीफ शहर में 'लंदन सिटी ऑफ बिहार' नामक एक दुकान है। यह दुकान विभिन्न प्रकार के समान और सामग्री उचित मूल्य पर उपलब्ध कराने के लिए जानी जाती है, और इसे क्षेत्र में 'सुपर नंबर वन' विक्रेता बताया गया है।
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    नालंदा जिले के बिहार शरीफ शहर में 'लंदन सिटी ऑफ बिहार' नामक एक दुकान है। यह दुकान विभिन्न प्रकार के समान और सामग्री उचित मूल्य पर उपलब्ध कराने के लिए जानी जाती है, और इसे क्षेत्र में 'सुपर नंबर वन' विक्रेता बताया गया है।
    user_News article 19
    News article 19
    बिहार शरीफ, नालंदा, बिहार•
    22 hrs ago
  • बिहार में कोसी नदी के किनारे बसे इलाकों की स्थिति आज भी अत्यंत दयनीय बनी हुई है, जहाँ हर वर्ष बाढ़, कटाव और विस्थापन के कारण लोगों का जीवन बुरी तरह प्रभावित होता है। कोसी नदी को 'बिहार का शोक' कहा जाता है, क्योंकि इसके कारण सुपौल, सहरसा, मधेपुरा, अररिया, पूर्णिया और कटिहार जैसे जिलों में हर साल पानी का स्तर बढ़ने से गाँव डूब जाते हैं और खेत व घर कटाव में बह जाते हैं, जिससे लोगों को बार-बार पलायन करना पड़ता है। तटबंधों या पटवन वाले क्षेत्रों के पास रहने वाले कई परिवार अस्थायी झोपड़ियों में गुजारा करते हैं, जहाँ सड़क, बिजली, स्कूल और अस्पताल जैसी मूलभूत सुविधाओं का घोर अभाव है। खेती योग्य जमीन लगातार कम हो रही है, और लोग मजदूरी व पशुपालन के सहारे किसी तरह जीवन यापन कर रहे हैं। बाढ़ से खेती बर्बाद होने के कारण युवाओं को रोजगार की तलाश में पंजाब, दिल्ली और हरियाणा जैसे अन्य राज्यों में पलायन करना पड़ता है, जिससे महिलाओं और बच्चों की स्थिति और भी विकट हो जाती है। शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएँ भी बुरी तरह प्रभावित हैं; बरसात के मौसम में स्कूल बंद हो जाते हैं और नाव ही एकमात्र सहारा बचती है, जबकि स्वास्थ्य सेवाएँ समय पर उपलब्ध नहीं हो पातीं। सरकार द्वारा तटबंध निर्माण और मरम्मत, राहत शिविर, प्रधानमंत्री आवास योजना, बाढ़ सहायता राशि, तथा सड़क व पुल निर्माण जैसे कार्य किए जा रहे हैं। हालांकि, कई क्षेत्रों में अभी भी ये सुविधाएँ पूरी तरह से नहीं पहुँच पाई हैं। इन कठिन परिस्थितियों के बावजूद स्थानीय लोग खेती, मछली पालन, पशुपालन और दिहाड़ी मजदूरी करके जीवन चला रहे हैं। वे लगातार स्थायी पुनर्वास, बेहतर शिक्षा व स्वास्थ्य सुविधाएँ और कटाव को रोकने के लिए मजबूत उपायों की मांग कर रहे हैं।
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    बिहार में कोसी नदी के किनारे बसे इलाकों की स्थिति आज भी अत्यंत दयनीय बनी हुई है, जहाँ हर वर्ष बाढ़, कटाव और विस्थापन के कारण लोगों का जीवन बुरी तरह प्रभावित होता है। कोसी नदी को 'बिहार का शोक' कहा जाता है, क्योंकि इसके कारण सुपौल, सहरसा, मधेपुरा, अररिया, पूर्णिया और कटिहार जैसे जिलों में हर साल पानी का स्तर बढ़ने से गाँव डूब जाते हैं और खेत व घर कटाव में बह जाते हैं, जिससे लोगों को बार-बार पलायन करना पड़ता है।

तटबंधों या पटवन वाले क्षेत्रों के पास रहने वाले कई परिवार अस्थायी झोपड़ियों में गुजारा करते हैं, जहाँ सड़क, बिजली, स्कूल और अस्पताल जैसी मूलभूत सुविधाओं का घोर अभाव है। खेती योग्य जमीन लगातार कम हो रही है, और लोग मजदूरी व पशुपालन के सहारे किसी तरह जीवन यापन कर रहे हैं। बाढ़ से खेती बर्बाद होने के कारण युवाओं को रोजगार की तलाश में पंजाब, दिल्ली और हरियाणा जैसे अन्य राज्यों में पलायन करना पड़ता है, जिससे महिलाओं और बच्चों की स्थिति और भी विकट हो जाती है। शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएँ भी बुरी तरह प्रभावित हैं; बरसात के मौसम में स्कूल बंद हो जाते हैं और नाव ही एकमात्र सहारा बचती है, जबकि स्वास्थ्य सेवाएँ समय पर उपलब्ध नहीं हो पातीं।

सरकार द्वारा तटबंध निर्माण और मरम्मत, राहत शिविर, प्रधानमंत्री आवास योजना, बाढ़ सहायता राशि, तथा सड़क व पुल निर्माण जैसे कार्य किए जा रहे हैं। हालांकि, कई क्षेत्रों में अभी भी ये सुविधाएँ पूरी तरह से नहीं पहुँच पाई हैं। इन कठिन परिस्थितियों के बावजूद स्थानीय लोग खेती, मछली पालन, पशुपालन और दिहाड़ी मजदूरी करके जीवन चला रहे हैं। वे लगातार स्थायी पुनर्वास, बेहतर शिक्षा व स्वास्थ्य सुविधाएँ और कटाव को रोकने के लिए मजबूत उपायों की मांग कर रहे हैं।
    user_Vandebharat news bihar sarif nalanda Ramendra Kumar
    Vandebharat news bihar sarif nalanda Ramendra Kumar
    Local News Reporter बिहार शरीफ, नालंदा, बिहार•
    4 hrs ago
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