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2 हजार साल पुराना रहस्य! यीशु के कफन में मिला भारत का कनेक्शन, वैज्ञानिक भी हैरान 12 2 हजार साल पुराना रहस्य! यीशु के कफन में मिला भारत का कनेक्शन, वैज्ञानिक भी हैरान  Newstrack9 hrs ago  Shroud of Turin India Connection: मानवता और त्याग की मिसाल माने जाने वाले यीशु मसीह ने पूरी दुनिया को प्रेम, करुणा और क्षमा का संदेश दिया। उन्होंने लोगों को सिखाया कि नफरत के बजाय प्यार से ही धरती को सींचा जा सकता है और इंसानियत ही सबसे बड़ा धर्म है। ऐसे महान व्यक्तित्व से जुड़ी हर चीज आज भी लोगों की गहरी आस्था का केंद्र है। इन्हीं में से एक है 'ट्यूरिन का कफन' (Shroud of Turin), जिसे यीशु मसीह से जोड़कर देखा जाता है। ईसाई धर्म की सबसे रहस्यमयी और चर्चित धरोहरों में शामिल 'ट्यूरिन का कफन' (Shroud of Turin) एक बार फिर चर्चा में है। माना जाता है कि इसी कपड़े में लगभग 2000 साल पहले यीशु मसीह के शरीर को क्रूस पर चढ़ाए जाने के बाद लपेटा गया था। अब हाल ही में हुई DNA जांच ने इस कफन को लेकर एक नया दावा किया है, जिसमें इसके भारत से संभावित संबंध की बात सामने आई है। इस खुलासे ने इतिहास, विज्ञान और आस्था तीनों के बीच नई बहस छेड़ दी है।आइए जानते हैं इस विषय पर विस्तार से - कैसा है 'ट्यूरिन का कफन' और इसका क्या महत्व है ट्यूरिन का कफन एक लंबा लिनेन कपड़ा है, जिसकी लंबाई करीब 4.4 मीटर और चौड़ाई 1.1 मीटर है। इस कपड़े पर एक इंसानी आकृति की हल्की छाप दिखाई देती है, जिसे कई लोग यीशु मसीह का शरीर मानते हैं। यह कफन पिछले लगभग 500 वर्षों से इटली के ट्यूरिन शहर में स्थित सेंट जॉन द बैपटिस्ट कैथेड्रल में सुरक्षित रखा गया है। यह केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं है, बल्कि वैज्ञानिकों के लिए भी एक रहस्य बना हुआ है, क्योंकि इसकी असलियत को लेकर वर्षों से सवाल उठते रहे हैं। ट्यूरिन का कफन की नई DNA जांच में क्या सामने आया ऐतिहासिक महत्व से जुड़े इस कफन हाल में किए गए DNA विश्लेषण में इस कफन से लिए गए नमूनों में कई तरह की जैविक सामग्री पाई गई है। इसमें इंसानों के अलावा जानवरों और पौधों से जुड़े DNA के अंश भी शामिल हैं। सबसे दिलचस्प बात यह रही कि मानव DNA का एक बड़ा हिस्सा भारतीय वंश से जुड़ा पाया गया। रिपोर्ट के अनुसार, करीब 40 प्रतिशत DNA ऐसे लोगों से मेल खाता है जिनकी जड़ें भारत से हो सकती हैं। इस खुलासे ने कफन की उत्पत्ति को लेकर नई बहसें छेड़ दी हैं। दरअसल, यह अध्ययन 1978 में इटली के पडोवा विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों द्वारा एकत्र किए गए नमूनों पर आधारित है। उस समय इन नमूनों को सुरक्षित तो कर लिया गया था, लेकिन तकनीक सीमित होने के कारण उनका गहराई से विश्लेषण नहीं हो पाया था। अब आधुनिक DNA तकनीक की मदद से उन्हीं नमूनों की दोबारा जांच की गई, जिससे यह नई जानकारी सामने आई है। इस तरह पुराने शोध को नई तकनीक ने एक नया दृष्टिकोण दिया है। शोधकर्ताओं की इस तथ्य से जुड़ी क्या है राय इस अध्ययन में शामिल वैज्ञानिक गियानी बारकासिया और उनकी टीम ने पहले भी यह संभावना जताई थी कि5 कफन में इस्तेमाल हुआ लिनेन भारत या सिंधु घाटी क्षेत्र से जुड़ा हो सकता है। नई जांच में उन्होंने पाया कि कफन में अलग-अलग समय के DNA मौजूद हैं, जिनमें मध्यकालीन और आधुनिक दोनों तरह के निशान शामिल हैं। शोधकर्ताओं का मानना है कि यह कफन सदियों तक विभिन्न लोगों और वातावरण के संपर्क में रहा, जिसके कारण इसमें इतनी विविधता दिखाई देती है। कफन में मिले कई तरह के DNA जांच के दौरान कफन में कई तरह के DNA पाए गए, जिनमें इंसानों के अलावा घरेलू और जंगली जानवरों के निशान भी शामिल हैं। इसमें कुत्ते, बिल्लियां, खेतों के पशु, हिरण और खरगोश जैसे जीवों के DNA के अंश मिले हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि कफन अलग-अलग स्थानों और परिस्थितियों में रहा है और कई प्रकार के जैविक संपर्कों से प्रभावित हुआ है। इस पवित्र कफन का भारत से क्या है कनेक्शन वैज्ञानिकों ने यह भी समझाने की कोशिश की है कि इस कफन में भारतीय DNA कैसे पहुंचा हो सकता है। एक संभावना यह है कि प्राचीन समय में रोमन साम्राज्य और भारत के बीच व्यापारिक संबंध थे, और कफन बनाने के लिए इस्तेमाल हुआ कपड़ा या सूत भारत से आयात किया गया हो। दूसरी संभावना यह है कि सदियों के दौरान कई भारतीय या एशियाई लोग इस कफन के संपर्क में आए हों, जिससे उनका DNA इसमें स्थानांतरित हो गया हो। इसके अलावा, पर्यावरणीय कारण भी हो सकते हैं, जैसे धूल, पौधों और अन्य जैविक तत्वों के संपर्क से DNA का मिश्रण होना। कैसे साबित होती है इस कफन की सत्यता हालांकि यह शोध बेहद दिलचस्प है, लेकिन इससे यह साबित नहीं होता कि यह कफन वास्तव में यीशु मसीह का ही है या इसका भारत से सीधा संबंध है। वैज्ञानिकों का कहना है कि इतने लंबे समय तक अलग-अलग लोगों और वातावरण के संपर्क में रहने के कारण मूल DNA की पहचान करना बहुत मुश्किल हो गया है। इसलिए इस शोध को एक संकेत के रूप में देखा जा रहा है, न कि एक अंतिम प्रमाण के तौर पर। 1354 ईसवी में पहली बार हुआ था इसका उल्लेख ट्यूरिन का कफन आज भी आस्था और विज्ञान के बीच बहस का केंद्र बना हुआ है। इसका पहला ऐतिहासिक उल्लेख 1354 में फ्रांस में मिलता है और तब से लेकर अब तक इसकी प्रामाणिकता पर सवाल उठते रहे हैं। हर साल लाखों लोग इसे देखने आते हैं और इसे पवित्र मानते हैं, जबकि वैज्ञानिक इसके रहस्य को सुलझाने की कोशिश में लगे हुए हैं। अब हाल ही में ट्यूरिन के कफन को लेकर सामने आई नई DNA रिपोर्ट ने इस रहस्य को और गहरा कर दिया है। भारत से संभावित जुड़ाव का दावा इसे और भी दिलचस्प बनाता है, लेकिन अभी तक कोई ठोस निष्कर्ष नहीं निकला है। यह कफन आज भी इतिहास, विज्ञान और आस्था के संगम पर खड़ा एक अनसुलझा रहस्य बना हुआ है, जो आने वाले समय में भी लोगों की जिज्ञासा का केंद्र रहे

3 hrs ago
user_डॉ. उमेश कुमार
डॉ. उमेश कुमार
गोलमुरी-कम-जुगसलाई, पूर्वी सिंहभूम, झारखंड•
3 hrs ago
a88ef708-8a9e-4760-8820-80556b92a0f2

2 हजार साल पुराना रहस्य! यीशु के कफन में मिला भारत का कनेक्शन, वैज्ञानिक भी हैरान 12 2 हजार साल पुराना रहस्य! यीशु के कफन में मिला भारत का कनेक्शन, वैज्ञानिक भी हैरान  Newstrack9 hrs ago  Shroud of Turin India Connection: मानवता और त्याग की मिसाल माने जाने वाले यीशु मसीह ने पूरी दुनिया को प्रेम, करुणा और क्षमा का संदेश दिया। उन्होंने लोगों को सिखाया कि नफरत के बजाय प्यार से ही धरती को सींचा जा सकता है और इंसानियत ही सबसे बड़ा धर्म है। ऐसे महान व्यक्तित्व से जुड़ी हर चीज आज भी लोगों की गहरी आस्था का केंद्र है। इन्हीं में से एक है 'ट्यूरिन का कफन' (Shroud of Turin), जिसे यीशु मसीह से जोड़कर देखा जाता है। ईसाई धर्म की सबसे रहस्यमयी और चर्चित धरोहरों में शामिल 'ट्यूरिन का कफन' (Shroud of Turin) एक बार फिर चर्चा में है। माना जाता है कि इसी कपड़े में लगभग 2000 साल पहले यीशु मसीह के शरीर को क्रूस पर चढ़ाए जाने के बाद लपेटा गया था। अब हाल ही में हुई DNA जांच ने इस कफन को लेकर एक नया दावा किया है, जिसमें इसके भारत से संभावित संबंध की बात सामने आई है। इस खुलासे ने इतिहास, विज्ञान और आस्था तीनों के बीच नई बहस छेड़ दी है।आइए जानते हैं इस विषय पर विस्तार से - कैसा है 'ट्यूरिन का कफन' और इसका क्या महत्व है ट्यूरिन का कफन एक लंबा लिनेन कपड़ा है, जिसकी लंबाई करीब 4.4 मीटर और चौड़ाई 1.1 मीटर है। इस कपड़े पर एक इंसानी आकृति की हल्की छाप दिखाई देती है, जिसे कई लोग यीशु मसीह का शरीर मानते हैं। यह कफन पिछले लगभग 500 वर्षों से इटली के ट्यूरिन शहर में स्थित सेंट जॉन द बैपटिस्ट कैथेड्रल में सुरक्षित रखा गया है। यह केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं है, बल्कि वैज्ञानिकों के लिए भी एक रहस्य बना हुआ है, क्योंकि इसकी असलियत को लेकर वर्षों से सवाल उठते रहे हैं। ट्यूरिन का कफन की नई DNA जांच में क्या सामने आया ऐतिहासिक महत्व से जुड़े इस कफन हाल में किए गए DNA विश्लेषण में इस कफन से लिए गए नमूनों में कई तरह की जैविक सामग्री पाई गई है। इसमें इंसानों के अलावा जानवरों और पौधों से जुड़े DNA के अंश भी शामिल हैं। सबसे दिलचस्प बात यह रही कि मानव DNA का एक बड़ा हिस्सा भारतीय वंश से जुड़ा पाया गया। रिपोर्ट के अनुसार, करीब 40 प्रतिशत DNA ऐसे लोगों से मेल खाता है जिनकी जड़ें भारत से हो सकती हैं। इस खुलासे ने कफन की उत्पत्ति को लेकर नई बहसें छेड़ दी हैं। दरअसल, यह अध्ययन 1978 में इटली के पडोवा विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों द्वारा एकत्र किए गए नमूनों पर आधारित है। उस समय इन नमूनों को सुरक्षित तो कर लिया गया था, लेकिन तकनीक सीमित होने के कारण उनका गहराई से विश्लेषण नहीं हो पाया था। अब आधुनिक DNA तकनीक की मदद से उन्हीं नमूनों की दोबारा जांच की गई, जिससे यह नई जानकारी सामने आई है। इस तरह पुराने शोध को नई तकनीक ने एक नया दृष्टिकोण दिया है। शोधकर्ताओं की इस तथ्य से जुड़ी क्या है राय इस अध्ययन में शामिल वैज्ञानिक गियानी बारकासिया और उनकी टीम ने पहले भी यह संभावना जताई थी कि5 कफन में इस्तेमाल हुआ लिनेन भारत या सिंधु घाटी क्षेत्र से जुड़ा हो सकता है। नई जांच में उन्होंने पाया कि कफन में अलग-अलग समय के DNA मौजूद हैं, जिनमें मध्यकालीन और आधुनिक दोनों तरह के निशान शामिल हैं। शोधकर्ताओं का मानना है कि यह कफन सदियों तक विभिन्न लोगों और वातावरण के संपर्क में रहा, जिसके कारण इसमें इतनी विविधता दिखाई देती है। कफन में मिले कई तरह के DNA जांच के दौरान कफन में कई तरह के DNA पाए गए, जिनमें इंसानों के अलावा घरेलू और जंगली जानवरों के निशान भी शामिल हैं। इसमें कुत्ते, बिल्लियां, खेतों के पशु, हिरण और खरगोश जैसे जीवों के DNA के अंश मिले हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि कफन अलग-अलग स्थानों और परिस्थितियों में रहा है और कई प्रकार के जैविक संपर्कों से प्रभावित हुआ है। इस पवित्र कफन का भारत से क्या है कनेक्शन वैज्ञानिकों ने यह भी समझाने की कोशिश की है कि इस कफन में भारतीय DNA कैसे पहुंचा हो सकता है। एक संभावना यह है कि प्राचीन समय में रोमन साम्राज्य और भारत के बीच व्यापारिक संबंध थे, और कफन बनाने के लिए इस्तेमाल हुआ कपड़ा या सूत भारत से आयात किया गया हो। दूसरी संभावना यह है कि सदियों के दौरान कई भारतीय या एशियाई लोग इस कफन के संपर्क में आए हों, जिससे उनका DNA इसमें स्थानांतरित हो गया हो। इसके अलावा, पर्यावरणीय कारण भी हो सकते हैं, जैसे धूल, पौधों और अन्य जैविक तत्वों के संपर्क से DNA का मिश्रण होना। कैसे साबित होती है इस कफन की सत्यता हालांकि यह शोध बेहद दिलचस्प है, लेकिन इससे यह साबित नहीं होता कि यह कफन वास्तव में यीशु मसीह का ही है या इसका भारत से सीधा संबंध है। वैज्ञानिकों का कहना है कि इतने लंबे समय तक अलग-अलग लोगों और वातावरण के संपर्क में रहने के कारण मूल DNA की पहचान करना बहुत मुश्किल हो गया है। इसलिए इस शोध को एक संकेत के रूप में देखा जा रहा है, न कि एक अंतिम प्रमाण के तौर पर। 1354 ईसवी में पहली बार हुआ था इसका उल्लेख ट्यूरिन का कफन आज भी आस्था और विज्ञान के बीच बहस का केंद्र बना हुआ है। इसका पहला ऐतिहासिक उल्लेख 1354 में फ्रांस में मिलता है और तब से लेकर अब तक इसकी प्रामाणिकता पर सवाल उठते रहे हैं। हर साल लाखों लोग इसे देखने आते हैं और इसे पवित्र मानते हैं, जबकि वैज्ञानिक इसके रहस्य को सुलझाने की कोशिश में लगे हुए हैं। अब हाल ही में ट्यूरिन के कफन को लेकर सामने आई नई DNA रिपोर्ट ने इस रहस्य को और गहरा कर दिया है। भारत से संभावित जुड़ाव का दावा इसे और भी दिलचस्प बनाता है, लेकिन अभी तक कोई ठोस निष्कर्ष नहीं निकला है। यह कफन आज भी इतिहास, विज्ञान और आस्था के संगम पर खड़ा एक अनसुलझा रहस्य बना हुआ है, जो आने वाले समय में भी लोगों की जिज्ञासा का केंद्र रहे

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  • *दोस्तों कांग्रेस के इन्हीं नेताओं के कारण जेहादियों का मनोबल बढ़ा हुआ है इतना सब कुछ जानने के बाद भी ये नेता अपने बयानों से बाज नहीं आ रहे हैं अब ऐसे नेताओं को जूते 🥿से स्वागत करना शुरू करना चाहिए!*
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    *दोस्तों कांग्रेस के इन्हीं नेताओं के कारण जेहादियों का मनोबल बढ़ा हुआ है इतना सब कुछ जानने के बाद भी ये नेता अपने बयानों से बाज नहीं आ रहे हैं अब ऐसे नेताओं को जूते 🥿से स्वागत करना शुरू करना चाहिए!*
    user_डॉ. उमेश कुमार
    डॉ. उमेश कुमार
    गोलमुरी-कम-जुगसलाई, पूर्वी सिंहभूम, झारखंड•
    5 hrs ago
  • नीतीश कुमार के गृह जिला नालंदा में मणिपुर की तरह एक बेटी को परेड करवाया गया है। सरकार वाले लोग नया CM चुनने में व्यस्त हैं। पुलिस का इकबाल समाप्त हो चुका है। सूअर की खोली में पैदा हुए दलाल पत्रकार इसे जंगलराज कहने से डर रहें हैं।
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    नीतीश कुमार के गृह जिला नालंदा में मणिपुर की तरह एक बेटी को परेड करवाया गया है।
सरकार वाले लोग नया CM चुनने में व्यस्त हैं। पुलिस का इकबाल समाप्त हो चुका है।
सूअर की खोली में पैदा हुए दलाल पत्रकार इसे जंगलराज कहने से डर रहें हैं।
    user_DALMA NEWS live
    DALMA NEWS live
    आदित्यपुर (गमहरिया), सरायकेला खरसावां, झारखंड•
    1 hr ago
  • राजनगर के रेनबो स्मार्ट स्कूल बड़ा कूनाबेड़ा में वार्षिक परीक्षा परिणाम घोषित हुआ, जिसमें विद्यार्थियों ने बेहतरीन प्रदर्शन किया। कुल 110 में से 107 छात्रों ने 80% से अधिक अंक हासिल कर विद्यालय का नाम रोशन किया। प्री-नर्सरी की वेदंशी महतो 98.56% के साथ टॉपर रहीं, जबकि एलकेजी की इशिता महतो 98.25% के साथ दूसरे स्थान पर रहीं। इस अवसर पर प्रथम, द्वितीय व तृतीय स्थान प्राप्त छात्रों को सम्मानित किया गया। साथ ही वार्षिक खेलकूद प्रतियोगिता के विजेताओं को भी मेडल व प्रमाण पत्र देकर पुरस्कृत किया गया। प्रधानाचार्य साधन ज्योतिषी ने छात्रों को मेहनत, नैतिकता और आत्मविश्वास के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि शिक्षा के साथ खेलकूद भी व्यक्तित्व विकास में अहम भूमिका निभाता है। कार्यक्रम में शिक्षक-शिक्षिकाओं व अभिभावकों का सराहनीय सहयोग रहा। विद्यालय द्वारा निःशुल्क नामांकन व “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” योजना के तहत विशेष सुविधा भी दी जा रही है।
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    राजनगर के रेनबो स्मार्ट स्कूल बड़ा कूनाबेड़ा में वार्षिक परीक्षा परिणाम घोषित हुआ, जिसमें विद्यार्थियों ने बेहतरीन प्रदर्शन किया। कुल 110 में से 107 छात्रों ने 80% से अधिक अंक हासिल कर विद्यालय का नाम रोशन किया। प्री-नर्सरी की वेदंशी महतो 98.56% के साथ टॉपर रहीं, जबकि एलकेजी की इशिता महतो 98.25% के साथ दूसरे स्थान पर रहीं।
इस अवसर पर प्रथम, द्वितीय व तृतीय स्थान प्राप्त छात्रों को सम्मानित किया गया। साथ ही वार्षिक खेलकूद प्रतियोगिता के विजेताओं को भी मेडल व प्रमाण पत्र देकर पुरस्कृत किया गया।
प्रधानाचार्य साधन ज्योतिषी ने छात्रों को मेहनत, नैतिकता और आत्मविश्वास के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि शिक्षा के साथ खेलकूद भी व्यक्तित्व विकास में अहम भूमिका निभाता है।
कार्यक्रम में शिक्षक-शिक्षिकाओं व अभिभावकों का सराहनीय सहयोग रहा। विद्यालय द्वारा निःशुल्क नामांकन व “बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ” योजना के तहत विशेष सुविधा भी दी जा रही है।
    user_Ravi repoter Rajnagar
    Ravi repoter Rajnagar
    Reporting गोविंदपुर (राजनगर), सरायकेला खरसावां, झारखंड•
    2 hrs ago
  • रांची : नगड़ी के प्राचीन राधा कृष्ण मंदिर कथा स्थल में श्रीमद् देवी भागवत कथा का तीसरा दिन रांची जिला के कई प्रखंडों में सैकड़ो सनातन श्रीमद् देवी भागवत कथा में प्रवचन सुनने पहुंचे नगड़ी के प्राचीन राधा कृष्ण मंदिर प्रांगण में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद् देवी भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के तीसरे दिन का आयोजन भक्ति ,आस्था और आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण रहा। इस अवसर पर रांची जिले के कई प्रखंडों के सनातन धर्म प्रेमी श्रद्धालु कथा में शामिल हुए।
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    रांची : नगड़ी के प्राचीन राधा कृष्ण मंदिर कथा स्थल में श्रीमद् देवी भागवत कथा का तीसरा दिन 
रांची जिला के कई प्रखंडों में सैकड़ो सनातन श्रीमद् देवी भागवत कथा में प्रवचन सुनने पहुंचे 
नगड़ी के प्राचीन राधा कृष्ण मंदिर प्रांगण में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद् देवी भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के तीसरे दिन का आयोजन भक्ति ,आस्था और आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण रहा। इस अवसर पर रांची जिले के कई प्रखंडों के सनातन धर्म प्रेमी श्रद्धालु कथा में शामिल हुए।
    user_NUNU RAM MAHATO
    NUNU RAM MAHATO
    Local News Reporter गोविंदपुर (राजनगर), सरायकेला खरसावां, झारखंड•
    3 hrs ago
  • शुरू ऐप न्यूज़ चैनल मैं आपका स्वागत है मैं रवि गुप्ता प्रेस रिपोर्टर आप देख सकते हैं कि सरायकेला बिरसा मुंडा स्टेडियम में गृह रक्षा वाहिनी की लिखित परीक्षा एवं शारीरिक परीक्षा महिला प्रत्याशी की आज राजनगर प्रखंड की हुई। कुल 648 महिला प्रत्याशी ने भाग लिया।
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    शुरू ऐप न्यूज़ चैनल मैं आपका स्वागत है मैं रवि गुप्ता प्रेस रिपोर्टर आप देख सकते हैं कि सरायकेला बिरसा मुंडा स्टेडियम में गृह रक्षा वाहिनी की लिखित परीक्षा एवं शारीरिक परीक्षा महिला प्रत्याशी की आज राजनगर प्रखंड की हुई। कुल 648 महिला प्रत्याशी ने भाग लिया।
    user_Ravi Gupta
    Ravi Gupta
    सरायकेला, सरायकेला खरसावां, झारखंड•
    5 hrs ago
  • Post by Chintu Nand
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    Post by Chintu Nand
    user_Chintu Nand
    Chintu Nand
    गोविंदपुर (राजनगर), सरायकेला खरसावां, झारखंड•
    10 hrs ago
  • रांची पुलिस की मानवीय पहलः लाचार बुजुर्ग को मिला सहारा, समय पर पहुंची मदद।
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    रांची पुलिस की मानवीय पहलः लाचार बुजुर्ग को मिला सहारा, समय पर पहुंची मदद।
    user_Janata Platform
    Janata Platform
    Voice of people Namkum, Ranchi•
    54 min ago
  • *इस फोटो को थोड़ी देर देखते रहिये, आपको इसका जवानी का चेहरा नज़र आयेगा! ग़जब है ना* 💥👉🏽👌🏾👌🏾👌🏾
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    *इस फोटो को थोड़ी देर देखते रहिये, आपको इसका जवानी का चेहरा नज़र आयेगा! ग़जब है ना*  💥👉🏽👌🏾👌🏾👌🏾
    user_डॉ. उमेश कुमार
    डॉ. उमेश कुमार
    गोलमुरी-कम-जुगसलाई, पूर्वी सिंहभूम, झारखंड•
    8 hrs ago
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