मध्य प्रदेश के उमरिया जिले में विश्व तंबाकू निषेध दिवस के अवसर पर जिला जेल और जिला चिकित्सालय उमरिया के सभागार में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिसमें तंबाकू त्यागने का संदेश दिया गया। इन कार्यक्रमों का मुख्य उद्देश्य लोगों को तंबाकू के सेवन से होने वाली गंभीर बीमारियों, मृत्यु और सामाजिक-आर्थिक दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करना था। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा वर्ष 1987 से प्रत्येक वर्ष 31 मई को यह दिवस मनाया जाता है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. व्ही. एस. चंदेल के निर्देशन में आयोजित इस कार्यक्रम का संचालन राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम के जिला नोडल अधिकारी डॉ. संदीप सिंह ने किया। डॉ. सिंह ने एलईडी प्रस्तुतीकरण और हिंदी चलचित्र के माध्यम से तंबाकू तथा निकोटीन युक्त उत्पादों के दुष्प्रभावों के बारे में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि तंबाकू उद्योग युवाओं को आकर्षित करने के लिए विभिन्न भ्रामक और आक्रामक प्रचार रणनीतियों का उपयोग करता है। डॉ. सिंह ने उपस्थित लोगों से तंबाकू की लत छोड़ने का संकल्प लेने का आह्वान भी किया। इसी कार्यक्रम के दौरान, डॉ. सिंह ने कोटपा अधिनियम-2003 की प्रमुख धाराओं से भी अवगत कराया, जिसमें सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान निषेध, तंबाकू उत्पादों के विज्ञापन पर प्रतिबंध, 18 वर्ष से कम आयु के व्यक्तियों को बिक्री पर रोक और शैक्षणिक संस्थानों के 100 गज के दायरे में बिक्री प्रतिबंधित होने जैसे प्रावधान शामिल हैं। जिला क्षय रोग नियंत्रण कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ. मुकुल तिवारी ने बताया कि तंबाकू का सेवन टीबी सहित कई गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ाता है। अंत में, सिविल सर्जन एवं अस्पताल अधीक्षक डॉ. के. सी. सोनी ने सभी उपस्थित स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों, आशा कार्यकर्ताओं, पैरामेडिकल एवं किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम से जुड़े छात्र-छात्राओं को तंबाकू का सेवन न करने और समाज को इसके प्रति जागरूक करने की शपथ दिलाई। छात्राओं ने रंगोली के माध्यम से भी तंबाकू के दुष्प्रभावों का प्रभावी संदेश दिया।
मध्य प्रदेश के उमरिया जिले में विश्व तंबाकू निषेध दिवस के अवसर पर जिला जेल और जिला चिकित्सालय उमरिया के सभागार में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिसमें तंबाकू त्यागने का संदेश दिया गया। इन कार्यक्रमों का मुख्य उद्देश्य लोगों को तंबाकू के सेवन से होने वाली गंभीर बीमारियों, मृत्यु और सामाजिक-आर्थिक दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करना था। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा वर्ष 1987 से प्रत्येक वर्ष 31 मई को यह दिवस मनाया जाता है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. व्ही. एस. चंदेल के निर्देशन में आयोजित इस कार्यक्रम का संचालन राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम के जिला नोडल अधिकारी डॉ. संदीप सिंह ने किया। डॉ. सिंह ने एलईडी प्रस्तुतीकरण और हिंदी चलचित्र के माध्यम से तंबाकू तथा निकोटीन युक्त उत्पादों के दुष्प्रभावों के बारे में विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि तंबाकू उद्योग युवाओं को आकर्षित करने के लिए विभिन्न भ्रामक और आक्रामक प्रचार रणनीतियों का उपयोग करता है। डॉ. सिंह ने उपस्थित लोगों से तंबाकू की लत छोड़ने का संकल्प लेने का आह्वान भी किया। इसी कार्यक्रम के दौरान, डॉ. सिंह ने कोटपा अधिनियम-2003 की प्रमुख धाराओं से भी अवगत कराया, जिसमें सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान निषेध, तंबाकू उत्पादों के विज्ञापन पर प्रतिबंध, 18 वर्ष से कम आयु के व्यक्तियों को बिक्री पर रोक और शैक्षणिक संस्थानों के 100 गज के दायरे में बिक्री प्रतिबंधित होने जैसे प्रावधान शामिल हैं। जिला क्षय रोग नियंत्रण कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ. मुकुल तिवारी ने बताया कि तंबाकू का सेवन टीबी सहित कई गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ाता है। अंत में, सिविल सर्जन एवं अस्पताल अधीक्षक डॉ. के. सी. सोनी ने सभी उपस्थित स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों, आशा कार्यकर्ताओं, पैरामेडिकल एवं किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम से जुड़े छात्र-छात्राओं को तंबाकू का सेवन न करने और समाज को इसके प्रति जागरूक करने की शपथ दिलाई। छात्राओं ने रंगोली के माध्यम से भी तंबाकू के दुष्प्रभावों का प्रभावी संदेश दिया।
- उमरिया जिले के ग्राम जरहा में कलेक्टर श्रीमती राखी सहाय ने दिव्यांगजनों को आवश्यक उपकरण वितरित किए। इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में ग्राम जरहा निवासी नरेश सिंह जी भी उपस्थित रहे। वितरित किए गए उपकरण पाकर दिव्यांगजन अत्यधिक प्रसन्न दिखाई दिए। यह पहल मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री और सामाजिक न्याय एवं निःशक्तजन कल्याण विभाग, मध्य प्रदेश के तत्वावधान में जन कल्याण और सामाजिक न्याय को बढ़ावा देने के उद्देश्य से की गई है।1
- बघेली कलाकार मनीष पटेल की 'बेवजह' गिरफ्तारी को लेकर पटेल समाज में गहरा रोष है। समाज का आरोप है कि एक ओर जहां रेपिस्ट खुलेआम घूम रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कॉमेडियन मनीष पटेल को अनुचित तरीके से जेल में डाल दिया गया है। उनकी रिहाई की मांग को लेकर पटेल समाज पूरी एकजुटता के साथ खड़ा है। इस संबंध में 'पटेल समाज जिंदाबाद' और 'पटेल एकता जिंदाबाद' जैसे नारे लगाए जा रहे हैं, साथ ही यह संकल्प दोहराया जा रहा है कि 'जेल का ताला टूटेगा, अपना मनीष भाई छूटेगा'।1
- शहडोल जिले के जयसिंहनगर थाना पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम देते हुए 350.500 किलोग्राम गांजा, दो चार पहिया वाहन और दो मोबाइल फोन जब्त किए हैं। इस मामले में मिर्जापुर, उत्तर प्रदेश के निवासी 20 वर्षीय राहुल कुमार चर्मकार को गिरफ्तार किया गया है, जबकि तीन अन्य आरोपी अभी भी फरार बताए जा रहे हैं। यह कार्रवाई मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर जनकपुर रोड बाईपास मार्ग पर की गई नाकाबंदी के दौरान हुई। पुलिस ने एक स्विफ्ट कार और एक इनोवा वाहन की तलाशी ली, जिसमें से भारी मात्रा में गांजा बरामद हुआ। बरामद गांजे की अनुमानित कीमत 35.05 लाख रुपये बताई गई है, और जब्त की गई कुल संपत्ति का अनुमानित मूल्य लगभग 61.12 लाख रुपये है। पुलिस ने गिरफ्तार आरोपी के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया है और फरार चल रहे अन्य आरोपियों की तलाश तेज कर दी है। इस पूरी कार्रवाई में थाना प्रभारी निरीक्षक अजय कुमार के नेतृत्व में पुलिस टीम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।1
- कलेक्टर श्रीमती राखी सहाय ने उमरिया के ग्राम तिवनी में हुए सड़क हादसे में घायल हुए लोगों से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पाली पहुँचकर मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने सभी घायलों का हालचाल जाना और स्वास्थ्यकर्मियों से उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली। श्रीमती सहाय ने चिकित्सकों को घायलों के बेहतर उपचार को सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक निर्देश भी दिए।1
- जयसिंहनगर थाना पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए लगभग 350 किलोग्राम गांजा और दो वाहन जब्त करने का दावा किया है, जिसके साथ एक आरोपी की गिरफ्तारी भी हुई है। हालांकि, इस कार्रवाई के बाद क्षेत्र में जब्त गांजे की वास्तविक मात्रा को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। कुछ स्थानीय लोगों और सोशल मीडिया यूजर्स का दावा है कि बरामदगी की मात्रा पुलिस द्वारा बताई गई 350 किलोग्राम से अधिक थी, जिससे यह बहस तेज हो गई है कि जब्त गांजा वास्तव में 350 किलो था या 5 क्विंटल। सार्वजनिक मंचों पर यह भी चर्चा हो रही है कि इस मामले में अन्य संभावित आरोपियों की भूमिका की जांच किस स्तर तक पहुंची है और क्या पुलिस पूरे नेटवर्क का खुलासा कर पाएगी। लोगों के बीच यह प्रमुख सवाल भी उठ रहे हैं कि जब्त गांजे की वास्तविक मात्रा क्या है, क्या पूरे गिरोह की पहचान हो चुकी है, अन्य आरोपियों की तलाश जारी है या नहीं, और जब्त वाहन किसके नाम पर पंजीकृत हैं। क्षेत्र की जनता यह मांग कर रही है कि यदि जब्ती इतनी बड़ी है, तो मामले की जांच पूरी पारदर्शिता के साथ सार्वजनिक की जानी चाहिए, ताकि किसी भी प्रकार की अफवाह या भ्रम की स्थिति समाप्त हो सके। इन चर्चाओं के बीच, पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की विवेचना अभी जारी है और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। यह स्पष्ट किया गया है कि सोशल मीडिया और स्थानीय स्तर पर चल रही इन चर्चाओं एवं आरोपों की अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, और मामले से संबंधित तथ्य केवल जांच तथा पुलिस रिकॉर्ड के आधार पर ही प्रमाणित माने जाएंगे।1