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इंदौर की पहचान से जुड़ी कान्ह नदी को नया स्वरूप देने के उद्देश्य से नगर निगम द्वारा कृष्णपुरा पुल (नगर निगम मुख्यालय) से लोखंडे पुल तक करीब 1200 मीटर क्षेत्र में एक महत्वाकांक्षी रिवर फ्रंट परियोजना विकसित की जा रही है। इस परियोजना का कार्य तेजी से जारी है, जिसके पूरा होने के बाद शहरवासियों को नदी का एक सुंदर और व्यवस्थित स्वरूप देखने को मिलेगा। शुक्रवार को परियोजना स्थल का निरीक्षण करने पहुंचे महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने मीडिया को बताया कि नगर निगम ने इस 1200 मीटर के हिस्से को रिवर फ्रंट के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया था, और यह कार्य तेजी से प्रगति पर है। महापौर ने जानकारी दी कि नगर निगम परिसर से लेकर लोखंडे पुल के आगे तक नदी के दोनों ओर रिटेनिंग वॉल और वॉल पिचिंग का कार्य चल रहा है। साथ ही, नदी में मिलने वाले सीवरेज के ग्रे वॉटर को अलग प्रवाहित करने और उपचारित जल को नदी में प्रवाहित करने की व्यवस्था भी बनाई जा रही है, जिससे नदी की स्वच्छता और सौंदर्य दोनों में सुधार होगा। उन्होंने बताया कि परियोजना का वित्तीय अनुमोदन हो चुका है और निर्माण कार्य युद्धस्तर पर चल रहा है, हालांकि इसे पूर्ण होने में अभी लगभग 15 माह का समय और लगेगा। इसके पूरा होने पर खान नदी का स्वरूप पूरी तरह बदल जाएगा और जल के बेहतर उपयोग व प्रबंधन का एक प्रभावी मॉडल भी विकसित होगा। महापौर भार्गव ने मानसून को देखते हुए अधिकारियों को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने निर्देशित किया कि वर्षा के दौरान जल प्रवाह बढ़ने की स्थिति में रिटेनिंग वॉल और पिचिंग कार्य की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जाए, ताकि बारिश से कोई क्षति या व्यवधान न हो। महापौर ने इस परियोजना को केवल सौंदर्यीकरण तक सीमित न मानते हुए, इसे नदी पुनर्जीवन, जल प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया, जिससे भविष्य में इंदौर को एक नई पहचान मिलेगी। अवलोकन के दौरान जल कार्य प्रभारी अभिषेक शर्मा बबलू, एमआईसी सदस्य राजेश उदावत सहित नगरपालिका निगम के संबंधित अधिकारी भी मौजूद रहे।

4 days ago
user_Naseem Khan
Naseem Khan
इंदौर, इंदौर, मध्य प्रदेश•
4 days ago

इंदौर की पहचान से जुड़ी कान्ह नदी को नया स्वरूप देने के उद्देश्य से नगर निगम द्वारा कृष्णपुरा पुल (नगर निगम मुख्यालय) से लोखंडे पुल तक करीब 1200 मीटर क्षेत्र में एक महत्वाकांक्षी रिवर फ्रंट परियोजना विकसित की जा रही है। इस परियोजना का कार्य तेजी से जारी है, जिसके पूरा होने के बाद शहरवासियों को नदी का एक सुंदर और व्यवस्थित स्वरूप देखने को मिलेगा। शुक्रवार को परियोजना स्थल का निरीक्षण करने पहुंचे महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने मीडिया को बताया कि नगर निगम ने इस 1200 मीटर के हिस्से को रिवर फ्रंट के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया था, और यह कार्य तेजी से प्रगति पर है। महापौर ने जानकारी दी कि नगर निगम परिसर से लेकर लोखंडे पुल के आगे तक नदी के दोनों ओर रिटेनिंग वॉल और वॉल पिचिंग का कार्य चल रहा है। साथ ही, नदी में मिलने वाले सीवरेज के ग्रे वॉटर को अलग प्रवाहित करने और उपचारित जल को नदी में प्रवाहित करने की व्यवस्था भी बनाई जा रही है, जिससे नदी की स्वच्छता और सौंदर्य दोनों में सुधार होगा। उन्होंने बताया कि परियोजना का वित्तीय अनुमोदन हो चुका है और निर्माण कार्य युद्धस्तर पर चल रहा है, हालांकि इसे पूर्ण होने में अभी लगभग 15 माह का समय और लगेगा। इसके पूरा होने पर खान नदी का स्वरूप पूरी तरह बदल जाएगा और जल के बेहतर उपयोग व प्रबंधन का एक प्रभावी मॉडल भी विकसित होगा। महापौर भार्गव ने मानसून को देखते हुए अधिकारियों को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने निर्देशित किया कि वर्षा के दौरान जल प्रवाह बढ़ने की स्थिति में रिटेनिंग वॉल और पिचिंग कार्य की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जाए, ताकि बारिश से कोई क्षति या व्यवधान न हो। महापौर ने इस परियोजना को केवल सौंदर्यीकरण तक सीमित न मानते हुए, इसे नदी पुनर्जीवन, जल प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया, जिससे भविष्य में इंदौर को एक नई पहचान मिलेगी। अवलोकन के दौरान जल कार्य प्रभारी अभिषेक शर्मा बबलू, एमआईसी सदस्य राजेश उदावत सहित नगरपालिका निगम के संबंधित अधिकारी भी मौजूद रहे।

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  • इंदौर कलेक्टर कार्यालय में मंगलवार को आयोजित जनसुनवाई में शहर और ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में फरियादी अपनी समस्याएं लेकर पहुंचे। कलेक्टर शिवम वर्मा ने स्वयं उपस्थित लोगों से सीधा संवाद किया, उनकी शिकायतें सुनीं और संबंधित अधिकारियों को त्वरित निराकरण के निर्देश दिए। जनसुनवाई के दौरान आर्थिक सहायता से जुड़े कई विषयों के साथ-साथ राजस्व संबंधी और पुलिस संबंधी प्रकरण भी सामने आए। इसके अतिरिक्त, माता-पिता और पुत्र के बीच विवाद जैसे पारिवारिक मामले भी कलेक्टर के समक्ष प्रस्तुत किए गए। कलेक्टर ने जानकारी दी कि सभी प्रकरणों को दर्ज कर लिया गया है और उन पर नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है। विशेष रूप से, तत्कालीन प्रकृति के गंभीर प्रकरणों में मौके पर ही तत्काल सहायता भी उपलब्ध कराई गई। जनसुनवाई में बिजली, पानी, पेंशन, नामांतरण और अतिक्रमण जैसी विभिन्न शिकायतें भी प्राप्त हुईं। कलेक्टर शिवम वर्मा ने बताया कि मुख्यमंत्री के स्पष्ट निर्देश हैं कि सभी जनसुनवाई में प्राप्त समस्याओं का प्राथमिक रूप से निराकरण किया जाए। साथ ही, किसी भी तरह की आकस्मिक स्थिति में सहायता की तत्काल व्यवस्था की जाए। प्रशासन इन्हीं निर्देशों के अनुसार कार्य कर रहा है, और अधिकारियों को सभी शिकायतों का तय समय-सीमा में निराकरण कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है।
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    इंदौर कलेक्टर कार्यालय में मंगलवार को आयोजित जनसुनवाई में शहर और ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में फरियादी अपनी समस्याएं लेकर पहुंचे। कलेक्टर शिवम वर्मा ने स्वयं उपस्थित लोगों से सीधा संवाद किया, उनकी शिकायतें सुनीं और संबंधित अधिकारियों को त्वरित निराकरण के निर्देश दिए।

जनसुनवाई के दौरान आर्थिक सहायता से जुड़े कई विषयों के साथ-साथ राजस्व संबंधी और पुलिस संबंधी प्रकरण भी सामने आए। इसके अतिरिक्त, माता-पिता और पुत्र के बीच विवाद जैसे पारिवारिक मामले भी कलेक्टर के समक्ष प्रस्तुत किए गए। कलेक्टर ने जानकारी दी कि सभी प्रकरणों को दर्ज कर लिया गया है और उन पर नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है। विशेष रूप से, तत्कालीन प्रकृति के गंभीर प्रकरणों में मौके पर ही तत्काल सहायता भी उपलब्ध कराई गई। जनसुनवाई में बिजली, पानी, पेंशन, नामांतरण और अतिक्रमण जैसी विभिन्न शिकायतें भी प्राप्त हुईं।

कलेक्टर शिवम वर्मा ने बताया कि मुख्यमंत्री के स्पष्ट निर्देश हैं कि सभी जनसुनवाई में प्राप्त समस्याओं का प्राथमिक रूप से निराकरण किया जाए। साथ ही, किसी भी तरह की आकस्मिक स्थिति में सहायता की तत्काल व्यवस्था की जाए। प्रशासन इन्हीं निर्देशों के अनुसार कार्य कर रहा है, और अधिकारियों को सभी शिकायतों का तय समय-सीमा में निराकरण कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है।
    user_SUNDARAM EXPRESS NEWS
    SUNDARAM EXPRESS NEWS
    Media company मल्हारगंज, इंदौर, मध्य प्रदेश•
    17 hrs ago
  • इंदौर, मध्यप्रदेश में रेती माफियाओं के खिलाफ खनिज विभाग ने एक बड़ी कार्रवाई की है, जिससे रेत कारोबारियों और वाहन संचालकों में हड़कंप मच गया है। इंदौर कलेक्टर के निर्देश पर खनिज विभाग की टीम ने दूधिया रेती मंडी में ओवरलोड वाहनों के खिलाफ एक विशेष अभियान चलाया। इस अभियान के दौरान ओवरलोड रेती से भरे कई वाहनों की जांच की गई और उनके रॉयल्टी दस्तावेजों का भी सत्यापन किया गया। प्रारंभिक कार्रवाई में 6 वाहनों को जब्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। सूत्रों के अनुसार, कार्रवाई के दौरान कुछ व्यापारियों और वाहन चालकों द्वारा कथित तौर पर एक महिला अधिकारी पर कार्रवाई रोकने का दबाव बनाया गया, वहीं कुछ स्थानीय नेताओं के भी हस्तक्षेप की बातें सामने आई हैं। खनिज विभाग ने साफ किया है कि अवैध खनन, ओवरलोडिंग और रॉयल्टी से संबंधित अनियमितताओं के मामलों में उनकी जांच जारी रहेगी तथा दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
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    इंदौर, मध्यप्रदेश में रेती माफियाओं के खिलाफ खनिज विभाग ने एक बड़ी कार्रवाई की है, जिससे रेत कारोबारियों और वाहन संचालकों में हड़कंप मच गया है। इंदौर कलेक्टर के निर्देश पर खनिज विभाग की टीम ने दूधिया रेती मंडी में ओवरलोड वाहनों के खिलाफ एक विशेष अभियान चलाया।

इस अभियान के दौरान ओवरलोड रेती से भरे कई वाहनों की जांच की गई और उनके रॉयल्टी दस्तावेजों का भी सत्यापन किया गया। प्रारंभिक कार्रवाई में 6 वाहनों को जब्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। सूत्रों के अनुसार, कार्रवाई के दौरान कुछ व्यापारियों और वाहन चालकों द्वारा कथित तौर पर एक महिला अधिकारी पर कार्रवाई रोकने का दबाव बनाया गया, वहीं कुछ स्थानीय नेताओं के भी हस्तक्षेप की बातें सामने आई हैं।

खनिज विभाग ने साफ किया है कि अवैध खनन, ओवरलोडिंग और रॉयल्टी से संबंधित अनियमितताओं के मामलों में उनकी जांच जारी रहेगी तथा दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
    user_राष्ट्रीय भारत न्यूज़ 100
    राष्ट्रीय भारत न्यूज़ 100
    Newspaper publisher Indore, Madhya Pradesh•
    17 hrs ago
  • देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी में एक आयुर्वेदिक डॉक्टर, आकाश पाठक, की नियुक्ति नियमों के विरुद्ध की गई है। इस आरोप के अनुसार, इस नियम विरुद्ध नियुक्ति के चलते यूनिवर्सिटी को प्रतिमाह ₹50,000 का नुकसान हो रहा है।
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    देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी में एक आयुर्वेदिक डॉक्टर, आकाश पाठक, की नियुक्ति नियमों के विरुद्ध की गई है। इस आरोप के अनुसार, इस नियम विरुद्ध नियुक्ति के चलते यूनिवर्सिटी को प्रतिमाह ₹50,000 का नुकसान हो रहा है।
    user_पत्रकार नलिन दीक्षित
    पत्रकार नलिन दीक्षित
    Court reporter इंदौर, इंदौर, मध्य प्रदेश•
    17 hrs ago
  • धार और इंदौर जिले की सीमा से लगे ग्राम खण्डवा, कल्याणसी खेड़ी और भरदला क्षेत्र में करोड़ों रुपये के कथित मुरम घोटाले का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। किसानों की निजी भूमि पर अवैध उत्खनन, स्वीकृत पट्टों से बाहर खनन, राजस्व चोरी और खनिज माफियाओं को संरक्षण दिए जाने के गंभीर आरोप लगे हैं, जिससे प्रशासनिक तंत्र कटघरे में खड़ा हो गया है। सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्षेत्र में लंबे समय से शिकायतों के बावजूद कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई, और आखिर एक आर्मी ऑफिसर के दखल के बाद ही खनिज विभाग क्यों सक्रिय हुआ। सूत्रों के अनुसार, प्रभावित किसानों और एक आर्मी ऑफिसर द्वारा मामले को उच्च स्तर तक पहुंचाने के बाद ही खनिज विभाग की टीम मौके पर पहुंची। शिकायत में किसानों की निजी भूमि पर बड़े पैमाने पर अवैध उत्खनन और करोड़ों रुपये के राजस्व नुकसान का उल्लेख था। ग्रामीणों का आरोप है कि सीमित खनन की अनुमति वाले क्षेत्रों से बाहर निकलकर आसपास की निजी कृषि भूमि तक खुदाई कर दी गई, जिसमें बिना अनुमति जेसीबी और भारी मशीनों का उपयोग किया गया। इसके परिणामस्वरूप कई खेतों में गहरे गड्ढे बन गए हैं और उपजाऊ भूमि को भारी क्षति पहुंची है। ग्रामीणों का दावा है कि यदि ड्रोन सर्वे और वैज्ञानिक मापन कराया जाए तो उत्खनन की वास्तविक मात्रा और करोड़ों की राजस्व चोरी सामने आ सकती है। मामले की जांच के लिए पहुंचे अधिकारियों से पत्रकारों ने अवैध उत्खनन, स्वीकृत पट्टों की सीमा के उल्लंघन, राजस्व चोरी के प्रमाण और किसी अधिकारी की संदिग्ध भूमिका जैसे कई सवाल पूछे, साथ ही दोषियों पर कार्रवाई को लेकर भी प्रश्न किए। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, जांच दल ने किसी भी सवाल का स्पष्ट जवाब नहीं दिया और मीडिया से दूरी बनाते हुए मौके से लौट गया। अधिकारियों की इस चुप्पी से अब नए संदेह पैदा हो गए हैं, और ग्रामीण पूछ रहे हैं कि यदि जांच निष्पक्ष है तो मीडिया और जनता से जानकारी क्यों छिपाई जा रही है। प्रभावित किसानों में इस पूरे मामले को लेकर भारी आक्रोश है, क्योंकि उनकी भूमि को भारी नुकसान हुआ है। उन्होंने प्रशासन से अवैध उत्खनन की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। इसके अतिरिक्त, ग्रामीणों और शिकायतकर्ताओं ने मुख्यमंत्री, प्रमुख सचिव खनिज, संभागायुक्त, कलेक्टर और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों से पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने की गुहार लगाई है। उन्होंने ड्रोन सर्वे, जीपीएस मैपिंग और वैज्ञानिक मापन कराने की मांग भी दोहराई है, ताकि सच्चाई सामने आ सके। फिलहाल, क्षेत्र की जनता की निगाहें इस पूरे मामले पर टिकी हुई हैं और सभी को जांच रिपोर्ट का इंतजार है। हालांकि, सबसे बड़ा सवाल यही बना हुआ है कि क्या करोड़ों के इस कथित मुरम घोटाले की निष्पक्ष जांच होगी, किसानों को न्याय मिलेगा, और खनिज माफियाओं तथा जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जाएगी, या फिर यह जांच भी फाइलों में दबकर रह जाएगी।
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    धार और इंदौर जिले की सीमा से लगे ग्राम खण्डवा, कल्याणसी खेड़ी और भरदला क्षेत्र में करोड़ों रुपये के कथित मुरम घोटाले का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। किसानों की निजी भूमि पर अवैध उत्खनन, स्वीकृत पट्टों से बाहर खनन, राजस्व चोरी और खनिज माफियाओं को संरक्षण दिए जाने के गंभीर आरोप लगे हैं, जिससे प्रशासनिक तंत्र कटघरे में खड़ा हो गया है। सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्षेत्र में लंबे समय से शिकायतों के बावजूद कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई, और आखिर एक आर्मी ऑफिसर के दखल के बाद ही खनिज विभाग क्यों सक्रिय हुआ।

सूत्रों के अनुसार, प्रभावित किसानों और एक आर्मी ऑफिसर द्वारा मामले को उच्च स्तर तक पहुंचाने के बाद ही खनिज विभाग की टीम मौके पर पहुंची। शिकायत में किसानों की निजी भूमि पर बड़े पैमाने पर अवैध उत्खनन और करोड़ों रुपये के राजस्व नुकसान का उल्लेख था। ग्रामीणों का आरोप है कि सीमित खनन की अनुमति वाले क्षेत्रों से बाहर निकलकर आसपास की निजी कृषि भूमि तक खुदाई कर दी गई, जिसमें बिना अनुमति जेसीबी और भारी मशीनों का उपयोग किया गया। इसके परिणामस्वरूप कई खेतों में गहरे गड्ढे बन गए हैं और उपजाऊ भूमि को भारी क्षति पहुंची है। ग्रामीणों का दावा है कि यदि ड्रोन सर्वे और वैज्ञानिक मापन कराया जाए तो उत्खनन की वास्तविक मात्रा और करोड़ों की राजस्व चोरी सामने आ सकती है।

मामले की जांच के लिए पहुंचे अधिकारियों से पत्रकारों ने अवैध उत्खनन, स्वीकृत पट्टों की सीमा के उल्लंघन, राजस्व चोरी के प्रमाण और किसी अधिकारी की संदिग्ध भूमिका जैसे कई सवाल पूछे, साथ ही दोषियों पर कार्रवाई को लेकर भी प्रश्न किए। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, जांच दल ने किसी भी सवाल का स्पष्ट जवाब नहीं दिया और मीडिया से दूरी बनाते हुए मौके से लौट गया। अधिकारियों की इस चुप्पी से अब नए संदेह पैदा हो गए हैं, और ग्रामीण पूछ रहे हैं कि यदि जांच निष्पक्ष है तो मीडिया और जनता से जानकारी क्यों छिपाई जा रही है।

प्रभावित किसानों में इस पूरे मामले को लेकर भारी आक्रोश है, क्योंकि उनकी भूमि को भारी नुकसान हुआ है। उन्होंने प्रशासन से अवैध उत्खनन की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। इसके अतिरिक्त, ग्रामीणों और शिकायतकर्ताओं ने मुख्यमंत्री, प्रमुख सचिव खनिज, संभागायुक्त, कलेक्टर और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों से पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने की गुहार लगाई है। उन्होंने ड्रोन सर्वे, जीपीएस मैपिंग और वैज्ञानिक मापन कराने की मांग भी दोहराई है, ताकि सच्चाई सामने आ सके।

फिलहाल, क्षेत्र की जनता की निगाहें इस पूरे मामले पर टिकी हुई हैं और सभी को जांच रिपोर्ट का इंतजार है। हालांकि, सबसे बड़ा सवाल यही बना हुआ है कि क्या करोड़ों के इस कथित मुरम घोटाले की निष्पक्ष जांच होगी, किसानों को न्याय मिलेगा, और खनिज माफियाओं तथा जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जाएगी, या फिर यह जांच भी फाइलों में दबकर रह जाएगी।
    user_Jaypal Gurjar
    Jaypal Gurjar
    इंदौर, इंदौर, मध्य प्रदेश•
    18 hrs ago
  • इंदौर में खनिज विभाग ने रेत माफियाओं के खिलाफ एक विशेष अभियान चलाते हुए दूधिया रेती मंडी में बड़ी कार्रवाई की है। इंदौर कलेक्टर के निर्देश पर हुई इस दबिश के दौरान ओवरलोड रेती से भरे कई वाहनों की जांच की गई और उनके रॉयल्टी दस्तावेजों का सत्यापन भी किया गया। प्रारंभिक कार्रवाई में, खनिज विभाग ने 6 वाहनों को जब्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिससे रेती कारोबारियों और वाहन संचालकों में हड़कंप की स्थिति बनी हुई है। सूत्रों के अनुसार, कार्रवाई के दौरान कुछ व्यापारियों और वाहन चालकों द्वारा एक महिला अधिकारी पर कार्रवाई रोकने का दबाव बनाया गया। इसके अतिरिक्त, कुछ स्थानीय नेताओं द्वारा भी इस मामले में हस्तक्षेप किए जाने की बातें सामने आई हैं। खनिज विभाग ने स्पष्ट किया है कि अवैध खनन, ओवरलोडिंग और रॉयल्टी अनियमितताओं से जुड़े मामलों में उनकी जांच लगातार जारी रहेगी तथा दोषियों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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    इंदौर में खनिज विभाग ने रेत माफियाओं के खिलाफ एक विशेष अभियान चलाते हुए दूधिया रेती मंडी में बड़ी कार्रवाई की है। इंदौर कलेक्टर के निर्देश पर हुई इस दबिश के दौरान ओवरलोड रेती से भरे कई वाहनों की जांच की गई और उनके रॉयल्टी दस्तावेजों का सत्यापन भी किया गया। प्रारंभिक कार्रवाई में, खनिज विभाग ने 6 वाहनों को जब्त करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिससे रेती कारोबारियों और वाहन संचालकों में हड़कंप की स्थिति बनी हुई है।

सूत्रों के अनुसार, कार्रवाई के दौरान कुछ व्यापारियों और वाहन चालकों द्वारा एक महिला अधिकारी पर कार्रवाई रोकने का दबाव बनाया गया। इसके अतिरिक्त, कुछ स्थानीय नेताओं द्वारा भी इस मामले में हस्तक्षेप किए जाने की बातें सामने आई हैं।

खनिज विभाग ने स्पष्ट किया है कि अवैध खनन, ओवरलोडिंग और रॉयल्टी अनियमितताओं से जुड़े मामलों में उनकी जांच लगातार जारी रहेगी तथा दोषियों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
    user_राष्ट्रीय भारत न्यूज़ 100
    राष्ट्रीय भारत न्यूज़ 100
    Newspaper publisher Indore, Madhya Pradesh•
    17 hrs ago
  • इंदौर, मध्य प्रदेश की उत्कर्ष पैराडाइज कॉलोनी में सार्वजनिक भूमि पर अवैध कब्जे का आरोप लगाते हुए रहवासियों ने इसके खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। इस संबंध में, कॉलोनी के रहवासियों ने उप-विभागीय मजिस्ट्रेट (SDM) से शिकायत दर्ज कराई है। उनकी मुख्य मांग है कि सार्वजनिक भूमि पर की गई अवैध फेंसिंग को तुरंत हटाया जाए और इस मामले में संलिप्त भू-माफियाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
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    इंदौर, मध्य प्रदेश की उत्कर्ष पैराडाइज कॉलोनी में सार्वजनिक भूमि पर अवैध कब्जे का आरोप लगाते हुए रहवासियों ने इसके खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। इस संबंध में, कॉलोनी के रहवासियों ने उप-विभागीय मजिस्ट्रेट (SDM) से शिकायत दर्ज कराई है। उनकी मुख्य मांग है कि सार्वजनिक भूमि पर की गई अवैध फेंसिंग को तुरंत हटाया जाए और इस मामले में संलिप्त भू-माफियाओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
    user_Jaypal Gurjar
    Jaypal Gurjar
    इंदौर, इंदौर, मध्य प्रदेश•
    18 hrs ago
  • देश के सबसे स्वच्छ और नंबर वन शहर इंदौर के वार्ड क्रमांक 70 स्थित आदर्श इंदिरा नगर के रहवासी पानी की भीषण किल्लत और नलों से आ रहे नाली के गंदे, बदबूदार पानी से त्रस्त हैं। इस क्षेत्र में 'आदर्श' केवल नाम में है, जबकि जमीनी हकीकत यह है कि यहाँ के लोगों के हलक सूखे हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, नर्मदा की पाइपलाइन में पानी का प्रेशर लगभग न के बराबर है, जिसके चलते उन्हें पानी भरने के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता है। इतना ही नहीं, जो पानी आता भी है, वह पीने लायक नहीं होता, क्योंकि नलों से 'अमृत' के बजाय नाली का बदबूदार और गंदा पानी खौल रहा है। पार्षद भरत रघुवंशी के इस क्षेत्र में पानी को लेकर त्राहि-त्राहि मची हुई है। इस गंभीर समस्या के कारण रहवासियों का गुस्सा सातवें आसमान पर है और वे बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं।
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    देश के सबसे स्वच्छ और नंबर वन शहर इंदौर के वार्ड क्रमांक 70 स्थित आदर्श इंदिरा नगर के रहवासी पानी की भीषण किल्लत और नलों से आ रहे नाली के गंदे, बदबूदार पानी से त्रस्त हैं। इस क्षेत्र में 'आदर्श' केवल नाम में है, जबकि जमीनी हकीकत यह है कि यहाँ के लोगों के हलक सूखे हैं।

स्थानीय लोगों के अनुसार, नर्मदा की पाइपलाइन में पानी का प्रेशर लगभग न के बराबर है, जिसके चलते उन्हें पानी भरने के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता है। इतना ही नहीं, जो पानी आता भी है, वह पीने लायक नहीं होता, क्योंकि नलों से 'अमृत' के बजाय नाली का बदबूदार और गंदा पानी खौल रहा है। पार्षद भरत रघुवंशी के इस क्षेत्र में पानी को लेकर त्राहि-त्राहि मची हुई है।

इस गंभीर समस्या के कारण रहवासियों का गुस्सा सातवें आसमान पर है और वे बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं।
    user_Ck_news
    Ck_news
    Video Creator इंदौर, इंदौर, मध्य प्रदेश•
    16 hrs ago
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