शिवहर जिले में नए डिग्री कॉलेजों की घोषणा के बीच तरियानी प्रखंड को छोड़ दिए जाने पर वहाँ के छात्रों में भारी निराशा है। उच्चतर शिक्षा के लिए इलाहाबाद में पढ़ाई कर रहे तरियानी के निवासी रक्षित राज ने इस उपेक्षा पर तीखा आक्रोश व्यक्त किया है। उन्होंने सवाल उठाया है कि शायद तरियानी के बच्चों का इकलौता कसूर यही है कि उन्होंने गलत प्रखंड में जन्म ले लिया है। जिले में पिपराही, डुमरी कटसरी, पूरनहिया और शिवहर को डिग्री कॉलेज के लिए योग्य माना गया है, जबकि केवल तरियानी को ही अयोग्य ठहरा दिया गया है। रक्षित राज ने प्रशासन पर तंज कसते हुए कहा कि शायद किसी सरकारी फ़ाइल में तरियानी के सामने दर्ज है कि यहाँ सपनों की अनुमति नहीं है। डिग्री कॉलेज न खुलने के कारण तरियानी के छात्रों को रोजाना 10-20 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ेगा और घंटों बसों के लिए तरसना पड़ेगा। उन्होंने कटाक्ष किया कि किताबों से ज्यादा सड़कों पर संघर्ष करना ही शायद नई शिक्षा नीति का चमकता 'प्रायोगिक मॉडल' है, जिसके लिए पूरे प्रखंड को प्रयोगशाला बना दिया गया है। इस मुद्दे पर उन्होंने बेलसंड विधानसभा के जनप्रतिनिधि को भी घेरा है, क्योंकि तरियानी इसी क्षेत्र के अंतर्गत आता है। रक्षित ने कहा कि जनप्रतिनिधियों को अपनी ही मंत्री डॉ. श्वेता गुप्ता से सीखना चाहिए, जिनके क्षेत्र में पहले से एक कॉलेज था और अब तीन नए कॉलेज खुल गए हैं। रक्षित राज ने सीधे प्रशासन से 4 तीखे सवाल पूछे हैं कि क्या यह कारण प्रशासनिक है, भूमि की बाधा है, या फिर अगला चरण तय है? उन्होंने पूछा कि अगर यह महज़ इत्तेफ़ाक़ है, तो बार-बार सिर्फ इसी एक प्रखंड को क्यों निशाना बनाया जाता है? अंत में उन्होंने अपील की कि अभिभावक और छात्र देख लें कि उन्हें तराज़ू के किस पलड़े पर तौला जा रहा है, क्योंकि हक़ न मिलने पर सबसे पहले सम्मान छिनता है।
शिवहर जिले में नए डिग्री कॉलेजों की घोषणा के बीच तरियानी प्रखंड को छोड़ दिए जाने पर वहाँ के छात्रों में भारी निराशा है। उच्चतर शिक्षा के लिए इलाहाबाद में पढ़ाई कर रहे तरियानी के निवासी रक्षित राज ने इस उपेक्षा पर तीखा आक्रोश व्यक्त किया है। उन्होंने सवाल उठाया है कि शायद तरियानी के बच्चों का इकलौता कसूर यही है कि उन्होंने गलत प्रखंड में जन्म ले लिया है। जिले में पिपराही, डुमरी कटसरी, पूरनहिया और शिवहर को डिग्री कॉलेज के लिए योग्य माना गया है, जबकि केवल तरियानी को ही अयोग्य ठहरा दिया गया है। रक्षित राज ने प्रशासन पर तंज कसते हुए कहा कि शायद किसी सरकारी फ़ाइल में तरियानी के सामने दर्ज है कि यहाँ सपनों की अनुमति नहीं है। डिग्री कॉलेज न खुलने के कारण तरियानी के छात्रों को रोजाना 10-20 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ेगा और घंटों बसों के लिए तरसना पड़ेगा। उन्होंने कटाक्ष किया कि किताबों से ज्यादा सड़कों पर संघर्ष करना ही शायद नई शिक्षा नीति का चमकता 'प्रायोगिक मॉडल' है, जिसके लिए पूरे प्रखंड को प्रयोगशाला बना दिया गया है। इस मुद्दे पर उन्होंने बेलसंड विधानसभा के जनप्रतिनिधि को भी घेरा है, क्योंकि तरियानी इसी क्षेत्र के अंतर्गत आता है। रक्षित ने कहा कि जनप्रतिनिधियों को अपनी ही मंत्री डॉ. श्वेता गुप्ता से सीखना चाहिए, जिनके क्षेत्र में पहले से एक कॉलेज था और अब तीन नए कॉलेज खुल गए हैं। रक्षित राज ने सीधे प्रशासन से 4 तीखे सवाल पूछे हैं कि क्या यह कारण प्रशासनिक है, भूमि की बाधा है, या फिर अगला चरण तय है? उन्होंने पूछा कि अगर यह महज़ इत्तेफ़ाक़ है, तो बार-बार सिर्फ इसी एक प्रखंड को क्यों निशाना बनाया जाता है? अंत में उन्होंने अपील की कि अभिभावक और छात्र देख लें कि उन्हें तराज़ू के किस पलड़े पर तौला जा रहा है, क्योंकि हक़ न मिलने पर सबसे पहले सम्मान छिनता है।
- किशनगंज के पश्चिम पाली में एम बाजार के पास स्थित MGM के डॉक्टर अभय कुमार के निजी क्लिनिक में भारी गंदगी होने और वहां के कंपाउंडर द्वारा अभद्र व्यवहार किए जाने का आरोप लगा है। क्लिनिक की इस बदहाल व्यवस्था और स्टाफ के दुर्व्यवहार को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। इस पूरे मामले को लेकर अब क्लिनिक की अव्यवस्थाओं और कंपाउंडर के इस अनुचित आचरण के खिलाफ उचित जांच कराए जाने की मांग की जा रही है।1
- अररिया नगर परिषद क्षेत्र के वार्ड संख्या 11 में ग्रामीणों ने एक खाली जमीन पर कचरा फेंके जाने का विरोध किया है। यह खाली जमीन खड़िया बस्ती ईदगाह चौक से बंसवाड़ी जाने वाली सड़क पर डेम्हेली, बंसवारी और झमटा रोड के पास स्थित है, जहां कचरा फेंके जाने को लेकर ग्रामीणों ने अपनी आपत्ति दर्ज कराई है।1
- जय गुरुदेव और जय महाकाल के पावन जयकारों के साथ श्रद्धा प्रकट की गई है। इस उद्घोष में बार-बार आदरपूर्वक 'जय गुरुदेव' और 'जय महाकाल' का नाम जपते हुए अपनी गहरी आस्था व्यक्त की गई है।1
- अररिया जिले के कुरसाकांटा सहित सभी नागरिकों के लिए अपने कानूनी अधिकारों से जुड़ी जानकारी होना बेहद जरूरी है। प्रत्येक व्यक्ति को अपने अधिकारों के प्रति सजग और जागरूक होना आवश्यक है।1
- अररिया के कुरसाकांटा में ₹2.75 करोड़ के गबन के बड़े खेल का मामला सामने आया है, जहां पुलिस के पहुंचने से पहले ही आरोपी ईओ फरार हो गया। छापेमारी की भनक आखिर किसने दी, इसे लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। पुलिस ने आरोपी ईओ के आवास और कार्यालय में घंटों तक सघन तलाशी ली, लेकिन वह हाथ नहीं आया। अब फरार आरोपी ईओ के खिलाफ वारंट, इश्तेहार और कुर्की-जब्ती की कार्रवाई की तैयारी की जा रही है। इस करोड़ों के घोटाले में क्या कोई बड़ा खुलासा होगा या फिर कई और चौंकाने वाले राज सामने आएंगे, इसे लेकर सस्पेंस बना हुआ है।1
- अररिया में नगर परिषद द्वारा कूड़ा फेंकने के खिलाफ स्थानीय लोग सड़क पर उतर आए हैं और कड़ा विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। इस समस्या को लेकर फैसल जावेद यासीन के नेतृत्व में एक बड़ा प्रदर्शन आयोजित किया गया, जिसमें आक्रोशित लोगों ने प्रशासन को अपनी मांगों को लेकर एक ज्ञापन भी सौंपा। 'नदी बचाओ' और 'स्वच्छ अररिया' की मांग के साथ दमहेली और बांसबारी जैसे क्षेत्रों के लोग इस गंभीर मुद्दे को लेकर नगर परिषद के खिलाफ लामबंद हैं।1
- बिहार के किशनगंज में जिला प्रशासन ने महानंदा-डोंक घाटों पर छापेमारी की है। इस कार्रवाई के दौरान प्रशासन ने मौके से ट्रैक्टर, नावें और 2500 सीएफटी अवैध बालू जब्त की है। इस मामले में अब जिला प्रशासन द्वारा प्राथमिकी दर्ज कराने की प्रक्रिया की जा रही है।1
- बिहार के किशनगंज जिला अंतर्गत टेढ़ागाछ में आयोजित जनता दरबार में 7 मामलों का मौके पर ही निपटारा कर दिया गया है। इसके साथ ही इस जनता दरबार में प्राप्त हुए कई अन्य आवेदनों पर भी त्वरित कार्रवाई शुरू कर दी गई है।1