मध्य प्रदेश के भोपाल में ट्रैफिक नियमों को ताक पर रखने का एक और मामला सामने आया है, जहां एक बीजेपी मंडल अध्यक्ष बिना हेलमेट के गाड़ी चला रहे थे। जब ड्यूटी पर मौजूद पुलिस ने उन्हें रोका, तो उन्होंने नियमों का पालन करने के बजाय सीधे जिला उपाध्यक्ष को फोन मिला दिया। हालांकि, ट्रैफिक टीआई (TI) संजय सूर्यवंशी ने इस सिफारिश को मानने से साफ इनकार कर दिया, जिसके बाद पुलिस और बीजेपी नेता के बीच सड़क पर ही काफी बहस हुई। इस घटना को लेकर जनता में भारी नाराजगी है और लोग सवाल उठा रहे हैं कि नेताओं की यह 'मुफ्तखोरी' और 'वीआईपी संस्कृति' आखिर कब तक चलेगी? नेताओं को मिलने वाली कैंटीन, टोल और पेंशन जैसी सरकारी सुविधाओं के बाद अब हेलमेट में भी छूट की चाहत ने इनके दोहरे चेहरे को पूरी तरह उजागर कर दिया है। यह समय पुलिसकर्मियों का मनोबल बढ़ाने का है, न कि उन्हें धमकाने का।
मध्य प्रदेश के भोपाल में ट्रैफिक नियमों को ताक पर रखने का एक और मामला सामने आया है, जहां एक बीजेपी मंडल अध्यक्ष बिना हेलमेट के गाड़ी चला रहे थे। जब ड्यूटी पर मौजूद पुलिस ने उन्हें रोका, तो उन्होंने नियमों का पालन करने के बजाय सीधे जिला उपाध्यक्ष को फोन मिला दिया। हालांकि, ट्रैफिक टीआई (TI) संजय सूर्यवंशी ने इस सिफारिश को मानने से साफ इनकार कर दिया, जिसके बाद पुलिस और बीजेपी नेता के बीच सड़क पर ही काफी बहस हुई। इस घटना को लेकर जनता में भारी नाराजगी है और लोग सवाल उठा रहे हैं कि नेताओं की यह 'मुफ्तखोरी' और 'वीआईपी संस्कृति' आखिर कब तक चलेगी? नेताओं को मिलने वाली कैंटीन, टोल और पेंशन जैसी सरकारी सुविधाओं के बाद अब हेलमेट में भी छूट की चाहत ने इनके दोहरे चेहरे को पूरी तरह उजागर कर दिया है। यह समय पुलिसकर्मियों का मनोबल बढ़ाने का है, न कि उन्हें धमकाने का।
- मध्य प्रदेश के विधायक आरिफ मसूद ने यूसीसी बिल को लेकर एक बयान दिया है। अपने इस बयान में विधायक आरिफ मसूद ने सीधे तौर पर आरोप लगाया है कि यूसीसी बिल के अंदर ही चोरी की गई है। उन्होंने इस बिल पर खुद बिल के भीतर ही चोरी होने का गंभीर आरोप मढ़ा है।1
- भोपाल नगर निगम में नई इलेक्ट्रिक (ई) बस का निरीक्षण किया गया है। इस दौरान महापौर, नगर निगम कमिश्नर, सभी पार्षदों और अधिकारियों ने नई ई-बस का निरीक्षण कर उसकी सुविधाओं का बारीकी से अवलोकन किया। भोपाल में आधुनिक और पर्यावरण-अनुकूल सार्वजनिक परिवहन की दिशा में इस पहल को एक बेहद महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।2
- भोपाल में आशा-ऊषा कार्यकर्ताओं ने अपनी मांगों को लेकर एक विशाल धरना प्रदर्शन किया। इस विरोध प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं द्वारा अपनी मांगों के संबंध में एक ज्ञापन भी सौंपा गया।4
- भोपाल के हुजूर से शायर गंगाधर मलाजपुरे ने अपनी भावनाएं व्यक्त करते हुए एक बेहद खूबसूरत और दर्दभरी शायरी साझा की है। उन्होंने लिखा है, 'तेरे प्यार की तमन्ना गम जिंदगी कैसा है, बड़ी तेज आंधी आए चिराग बुझ न जाए, मोहब्बत रास न आए।' इस शायरी के माध्यम से उन्होंने प्यार की चाहत, जिंदगी के गमों और तेज आंधी के बीच चिराग के बुझ जाने के डर के साथ ही मोहब्बत रास न आने के गहरे दर्द को बयां किया है।1
- भोपाल के खुशीलाल मैदान में मध्य प्रदेशभर से आए दिव्यांगजन अपनी विभिन्न मांगों को लेकर धरने पर बैठ गए हैं। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग सामाजिक सुरक्षा पेंशन को 600 रुपये से बढ़ाकर 5 हजार रुपये प्रतिमाह करने की है। दिव्यांगजनों का साफ कहना है कि इस भयंकर महंगाई के दौर में महज 600 रुपये की पेंशन से दवा, इलाज और रोजमर्रा का जरूरी खर्च चलाना संभव नहीं है। इस प्रदर्शन में विकलांग बल के प्रदेश अध्यक्ष भारत मुनिया, राष्ट्रीय महासचिव पुनीत कुमार और राष्ट्रीय सदस्य मैथिल शरण शर्मा भी शामिल हुए। इन सभी ने सरकार से दिव्यांगों के लिए आवास, शौचालय, रोजगार और विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ सुनिश्चित कराने की मांग पुरजोर तरीके से उठाई है। धरने पर बैठे प्रदर्शनकारियों ने सरकार को कड़ी चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें जल्द पूरी नहीं की गईं, तो इस आंदोलन को पूरे प्रदेश में और भी तेज किया जाएगा।1
- भोपाल के शहर काज़ी, शहर मुफ़्ती, विधायक आतिफ़ अकील और विधायक आरिफ मसूद के एक प्रतिनिधिमंडल ने विधानसभा अध्यक्ष से मुलाकात की है। इस मुलाकात के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर अपना विरोध दर्ज कराया। उन्होंने यूसीसी से जुड़ी अपनी तमाम आपत्तियों से विधानसभा अध्यक्ष को अवगत कराया है। प्रतिनिधिमंडल ने विधानसभा अध्यक्ष को एक ज्ञापन सौंपकर इस प्रस्ताव पर पुनर्विचार करने की मांग की है। डेलिगेशन का कहना है कि इस बेहद संवेदनशील मुद्दे पर सभी पक्षों की राय ली जानी चाहिए। इस मुलाकात के सामने आने के बाद से ही राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा काफी तेज़ हो गई है।1
- हज-2027 के लिए ऑनलाइन आवेदन करने की अंतिम तारीख को आगे बढ़ा दिया गया है। पूर्व में आवेदन करने की आखिरी तिथि 20 जुलाई निर्धारित थी, जिसे अब बढ़ाकर 24 जुलाई-2026 कर दिया गया है।1
- मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में ओबीसी महासभा द्वारा अपनी विभिन्न मांगों को लेकर किए गए विधानसभा घेराव के दौरान भारी हंगामा हुआ। प्रदेशभर से बड़ी संख्या में कार्यकर्ता रंगमहल चौराहे पर एकत्रित हुए और वहां जनसभा करने के बाद जब उन्होंने विधानसभा की ओर कूच करने का प्रयास किया, तो पुलिस ने उन्हें बैरिकेडिंग लगाकर रोक दिया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तीखी धक्का-मुक्की हुई, जिसके बाद हालात को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने वॉटर कैनन का इस्तेमाल कर पानी की बौछारें छोड़ीं। भारी पुलिस बल की तैनाती और सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच भी प्रदर्शनकारी पीछे नहीं हटे और अपनी मांगों को लेकर डटे रहे। इस प्रदर्शन को समर्थन देने के लिए नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, कांग्रेस विधायक ओंकार सिंह मरकाम, सचिन यादव, समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मनोज यादव और ओबीसी महासभा के प्रदेश अध्यक्ष धर्मेंद्र कुशवाहा भी मौके पर पहुंचे। इन नेताओं ने एक सुर में सरकार को घेरते हुए कहा कि मध्य प्रदेश में ओबीसी वर्ग की आबादी 52 फीसदी है, इसके बावजूद सरकार उन्हें 27 प्रतिशत आरक्षण का पूरा लाभ नहीं दे रही है। ओबीसी महासभा ने यह मांग भी उठाई कि होल्ड किए गए 13 फीसदी पदों को तत्काल बहाल किया जाए। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इस गंभीर मुद्दे को मध्य प्रदेश विधानसभा में भी उठाने का ऐलान किया है। ओबीसी महासभा की प्रमुख मांगों में ओबीसी वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना, संविधान के अनुच्छेद 340 के तहत उप-वर्गीकरण लागू करना और देश में जातिगत जनगणना कराना शामिल है। इसके साथ ही उन्होंने शिक्षा, रोजगार और राजनीतिक प्रतिनिधित्व में ओबीसी की भागीदारी सुनिश्चित करने, ओबीसी आयोग को संवैधानिक दर्जा देने और ओबीसी उद्यमियों, युवाओं व महिलाओं के लिए विशेष योजनाएं व वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है। इस प्रदर्शन के चलते विधानसभा क्षेत्र के आसपास का यातायात कुछ समय के लिए प्रभावित हुआ और संगठन ने चेतावनी दी है कि मांगें जल्द पूरी न होने पर आंदोलन को और उग्र किया जाएगा।2