जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र के बदले जाएंगे नियम, बिना चर्चा के ही लोकसभा में पास हो गया विधेयक... * जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र के बदले जाएंगे नियम, बिना चर्चा के ही लोकसभा में पास हो गया विधेयक... * * लोकसभा में बिना चर्चा के पास हुआ, मृत्यु जन्म और मृत्यु प्रमाण विधेयक... * by: तरुण कुमार सिंह.. * *लोकसभा में शुक्रवार को जन्म और मृत्यु पंजीकरण संबंधी विधेयक में बिना चर्चा के ही हंगामे के बीच ध्वनिमत से पारित हो गया। इसमें जन्म और मृत्यु की सूचना देरी से देने वालों के खिलाफ नियम सख्त किए गए हैं। हंगामा करते रहे विपक्षी सांसद, इधर पास हो गया विधेयक लोकसभा ने शुक्रवार को जन्म और मृत्यु के पंजीकरण संबंधी कानून में संशोधन करने के प्रावधान वाले विधेयक को विपक्षी दलों के सदस्यों के हंगामे के बीच बिना चर्चा के पारित कर दिया। राज्यसभा में बीते 29 जुलाई को यह विधेयक पारित किया गया था। गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने लोकसभा में विपक्ष के हंगामे के बीच जन्म और मृत्यु का पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 को पारित करने के लिए पेश किया। इस दौरान विपक्षी दलों के सदस्य दिल्ली में प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस की कार्रवाई और राम मंदिर के चढ़ावे की कथित चोरी के मामले को लेकर नारेबाजी कर रहे थे। बिना चर्चा के ध्वनिमत से पारित हुआ विधेयक सदन ने बिना चर्चा के ध्वनिमत से विधेयक को पारित कर दिया। विपक्षी सदस्यों ने विधेयक पर अपने संशोधन भी पेश नहीं किए। बीते 20 जुलाई को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने विधेयक को मंजूरी दी थी और इसे 29 जुलाई को सदन में पेश किया गया था। इस विधेयक का उद्देश्य जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 (2023 में संशोधित) की धारा 13(3) में और संशोधन करना है, ताकि विलंब से होने वाले पंजीकरण के प्रावधानों को और अधिक कड़ा बनाया जा सके। नियमों में क्या होगा बदलाव मौजूदा प्रावधानों के तहत यदि जन्म या मृत्यु का पंजीकरण एक वर्ष से अधिक की देरी से कराया जाता है, तो इसके लिए जिला मजिस्ट्रेट (डीएम), उप-मंडल मजिस्ट्रेट (एसडीएम) अथवा किसी कार्यपालक मजिस्ट्रेट के आदेश की आवश्यकता होती है। विधेयक में देरी की अवधि के आधार पर दो-स्तरीय मंजूरी व्यवस्था का प्रावधान किया गया है। इस नए कानून के जरिए जन्म-मृत्यु से जुड़े रिकॉर्ड को डिजिटल और ज्यादा व्यवस्थित करने के साथ ही फर्जी दस्तावेजों पर रोक लगाने की तैयारी है। इसके मुताबिक जन्म प्रमाणपत्र को सरकारी सेवाओं और प्रक्रियाओं में प्रमुख दस्तावेज के तौर पर स्वीकार किया जाएगा। नया कानून लागू होने के बाद यह सबसे जरूरी दस्तावेज बन जाएगा। विधेयक पारित होने के बाद संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने कहा कि यह इतना महत्वपूर्ण विधेयक है और ”हम चाहते थे कि सब सदस्य इसके भाग लें।” उन्होंने कहा कि बार-बार अनुरोध के बावजूद विपक्ष के साथियों ने विधेयक पर चर्चा में भाग नहीं लिया और अब उन्हें सदन से बाहर जाकर यह नहीं कहना चाहिए कि बिना चर्चा के क्यों पारित किया। रीजीजू ने कहा, ”यह दुर्भाग्यपूर्ण है। जनता आपसे जवाब मांगेगी। अब आप बाहर जाकर यह आरोप नहीं लगा सकते कि बिना चर्चा के विधेयक पारित कराया गया है। आपने अवसर गंवा दिया है।” उन्होंने विपक्ष से आग्रह किया कि सदन में आगे आने वाले विधेयकों पर सहयोग करें और चर्चा में भाग लें। पीठासीन सभापति दिलीप सैकिया ने हंगामा कर रहे विपक्ष के साथियों से कहा कि सभी ने कार्य मंत्रणा समिति की बैठक में विधेयक पर सहयोग की बात कही थी, लेकिन यहां आप हंगामा कर रहे हैं। उन्होंने कहा, ”आपके सहयोग के बिना विधेयक पारित करना पड़ा। यह सही नहीं है।’ हंगामा नहीं थमने पर सैकिया ने कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित कर दी।
जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र के बदले जाएंगे नियम, बिना चर्चा के ही लोकसभा में पास हो गया विधेयक... * जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र के बदले जाएंगे नियम, बिना चर्चा के ही लोकसभा में पास हो गया विधेयक... * * लोकसभा में बिना चर्चा के पास हुआ, मृत्यु जन्म और मृत्यु प्रमाण विधेयक... * by: तरुण कुमार सिंह.. * *लोकसभा में शुक्रवार को जन्म और मृत्यु पंजीकरण संबंधी विधेयक में बिना चर्चा के ही हंगामे के बीच ध्वनिमत से पारित हो गया। इसमें जन्म और मृत्यु की सूचना देरी से देने वालों के खिलाफ नियम सख्त किए गए हैं। हंगामा करते रहे विपक्षी सांसद, इधर पास हो गया विधेयक लोकसभा ने शुक्रवार को जन्म और मृत्यु के पंजीकरण संबंधी कानून में संशोधन करने के प्रावधान वाले विधेयक को विपक्षी दलों के सदस्यों के हंगामे के बीच बिना चर्चा के पारित कर दिया। राज्यसभा में बीते 29 जुलाई को यह विधेयक पारित किया गया था। गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने लोकसभा में विपक्ष के हंगामे के बीच जन्म और मृत्यु का पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 को पारित करने के लिए पेश किया। इस दौरान विपक्षी दलों के सदस्य दिल्ली में प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस की कार्रवाई और राम मंदिर के चढ़ावे की कथित चोरी के मामले को लेकर नारेबाजी कर रहे थे। बिना चर्चा के ध्वनिमत से पारित हुआ विधेयक सदन ने बिना चर्चा के ध्वनिमत से विधेयक को पारित कर दिया। विपक्षी सदस्यों ने विधेयक पर अपने संशोधन भी पेश नहीं किए। बीते 20 जुलाई को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने विधेयक को मंजूरी दी थी और इसे 29 जुलाई को सदन में पेश किया गया था। इस विधेयक का उद्देश्य जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 (2023 में संशोधित) की धारा 13(3) में और संशोधन करना है, ताकि विलंब से होने वाले पंजीकरण के प्रावधानों को और अधिक कड़ा बनाया जा सके। नियमों में क्या होगा बदलाव मौजूदा प्रावधानों के तहत यदि जन्म या मृत्यु का पंजीकरण एक वर्ष से अधिक की देरी से कराया जाता है, तो इसके लिए जिला मजिस्ट्रेट (डीएम), उप-मंडल मजिस्ट्रेट (एसडीएम) अथवा किसी कार्यपालक मजिस्ट्रेट के आदेश की आवश्यकता होती है। विधेयक में देरी की अवधि के आधार पर दो-स्तरीय मंजूरी व्यवस्था का प्रावधान किया गया है। इस नए कानून के जरिए जन्म-मृत्यु से जुड़े रिकॉर्ड को डिजिटल और ज्यादा व्यवस्थित करने के साथ ही फर्जी दस्तावेजों पर रोक लगाने की तैयारी है। इसके मुताबिक जन्म प्रमाणपत्र को सरकारी सेवाओं और प्रक्रियाओं में प्रमुख दस्तावेज के तौर पर स्वीकार किया जाएगा। नया कानून लागू होने के बाद यह सबसे जरूरी दस्तावेज बन जाएगा। विधेयक पारित होने के बाद संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने कहा कि यह इतना महत्वपूर्ण विधेयक है और ”हम चाहते थे कि सब सदस्य इसके भाग लें।” उन्होंने कहा कि बार-बार अनुरोध के बावजूद विपक्ष के साथियों ने विधेयक पर चर्चा में भाग नहीं लिया और अब उन्हें सदन से बाहर जाकर यह नहीं कहना चाहिए कि बिना चर्चा के क्यों पारित किया। रीजीजू ने कहा, ”यह दुर्भाग्यपूर्ण है। जनता आपसे जवाब मांगेगी। अब आप बाहर जाकर यह आरोप नहीं लगा सकते कि बिना चर्चा के विधेयक पारित कराया गया है। आपने अवसर गंवा दिया है।” उन्होंने विपक्ष से आग्रह किया कि सदन में आगे आने वाले विधेयकों पर सहयोग करें और चर्चा में भाग लें। पीठासीन सभापति दिलीप सैकिया ने हंगामा कर रहे विपक्ष के साथियों से कहा कि सभी ने कार्य मंत्रणा समिति की बैठक में विधेयक पर सहयोग की बात कही थी, लेकिन यहां आप हंगामा कर रहे हैं। उन्होंने कहा, ”आपके सहयोग के बिना विधेयक पारित करना पड़ा। यह सही नहीं है।’ हंगामा नहीं थमने पर सैकिया ने कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित कर दी।
- छोटी माता माँ कथा ....................................1
- गयाजी जिला के टेकारी अनुमंडल के कोच प्रखंड के उतरेन गांव कि रहने वाली ढाई साल कि वाणी 158देशों के झंडे को पहचानकर उसके देश का नाम बता देती है गयाजी से अवनीश कुमार कि रिपोर्ट ढाई साल की बच्ची ने खेल-खेल में रच दिया इतिहास, 153 देशों के झंडे पहचानकर बताती है नाम… इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज हुआ नाम, अब वर्ल्ड रिकॉर्ड पर नजर बिहार के गया जिले से एक ऐसी खबर सामने आई है, जो आपको हैरान कर देगी। महज ढाई साल की उम्र… और सैकड़ों देशों के झंडे देखकर उनके नाम बताने की अद्भुत प्रतिभा। गया के टेकारी अनुमंडल के कोच प्रखंड के उतरेन गांव की रहने वाली नन्हीं वाणी ने अपनी इस अनोखी प्रतिभा से इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में अपना नाम दर्ज कराया है। अब वाणी के परिवार की नजर प्रतिष्ठित गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड पर है। इसके लिए वाणी को दुनिया के 195 देशों के झंडे पहचानने होंगे। ये तस्वीरें हैं गया जिले के कोच प्रखंड के उतरेन गांव की रहने वाली महज 2 साल 10 महीने की नन्हीं वाणी की। उम्र भले ही छोटी है, लेकिन प्रतिभा ऐसी कि बड़े-बड़े भी हैरान रह जाएं। वाणी को अलग-अलग देशों के झंडे दिखाइए और वह तुरंत झंडे को देखकर देश का नाम बता देती है। बताया जा रहा है कि वाणी अब तक 153 से अधिक देशों के झंडों को पहचानकर उनके नाम बता चुकी है। वाणी की इस अद्भुत प्रतिभा का पता उसके पिता रविकांत कुमार को उस वक्त चला, जब ढाई साल की उम्र में खेल-खेल में वाणी ने एक पोस्टर पर बने 20 देशों के झंडे देखकर उनके नाम बता दिए। इसके बाद पिता ने वाणी की प्रतिभा को गंभीरता से लिया और उसकी क्षमता को निखारने की कोशिश शुरू की। कुछ ही समय में वाणी ने 45 एशियाई देशों के झंडे पहचानने शुरू कर दिए। 29 जून 2026 को वाणी को 45 एशियन कंट्री के नाम पहचानने के लिए पहला अवार्ड मिला। इसके बाद परिवार ने उसकी तैयारी और तेज कर दी। महज 10 दिनों के अंदर वाणी ने 127 देशों के झंडे पहचानने की क्षमता हासिल कर ली। परिवार ने इसका वीडियो बनाकर इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड को भेजा, जिसके बाद वाणी का रिकॉर्ड कंफर्म किया गया। परिजनों के मुताबिक, वाणी ने 127 देशों के नाम महज 6 मिनट 35 सेकंड में झंडे देखकर बताए। इससे पहले 45 देशों के नाम उसने 2 मिनट 10 सेकंड में बताए थे, जिसके आधार पर उसे प्रमाण पत्र भी मिला। इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड की ओर से वाणी को मेडल, आई कार्ड और रिकॉर्ड बुक देकर सम्मानित किया गया है। बेटी की इस प्रतिभा को देखकर पिता रविकांत कुमार भी बेहद उत्साहित हैं। उनका कहना है कि वाणी को बचपन से ही रंगों में काफी रुचि थी। इसी वजह से अलग-अलग देशों के झंडों के रंग और डिजाइन को देखकर वह उन्हें आसानी से पहचान लेती है। अब परिवार का लक्ष्य वाणी का नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज कराना है। वाणी की मां पल्लवी मिश्रा और परिवार के अन्य सदस्य भी उसकी प्रतिभा से बेहद खुश हैं। परिवार का कहना है कि दोनों बेटियां अभी छोटी हैं और अल्फाबेट भी पूरी तरह नहीं जानतीं, लेकिन वाणी सैकड़ों देशों के नाम झंडे देखकर बता देती है। यही वजह है कि परिवार वाणी की इस प्रतिभा को आगे बढ़ाने में जुटा हुआ है। वाणी के दादा राम पांडे बताते हैं कि उनकी पोती को रंगों की शानदार समझ है। वह झंडे के रंग और पैटर्न को देखकर देश का नाम बता देती है। परिवार ने अब दुनिया के 195 देशों के झंडों की तैयारी शुरू कर दी है, ताकि वाणी जल्द से जल्द वर्ल्ड रिकॉर्ड की ओर कदम बढ़ा सके। गया की नन्हीं वाणी की यह प्रतिभा वाकई अद्भुत है। जिस उम्र में बच्चे खेल-खेल में अक्षर और रंग सीखते हैं, उस उम्र में वाणी सैकड़ों देशों के झंडे पहचानकर उनके नाम बता रही है। इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में नाम दर्ज होने के बाद अब वाणी और उसके परिवार की नजर गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड पर है। अगर वाणी 195 देशों के झंडे पहचानने में कामयाब होती है, तो यह नन्हीं प्रतिभा दुनिया के सामने बिहार और गया का नाम रोशन कर सकती है।1
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