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प्रयागराज के मांडा थाना क्षेत्र के बरहा कला गांव में स्थित एक मंदिर के समीप चबूतरे और सड़क के खड़ंजे को लेकर हुए विवाद की सूचना पर डायल 112 नंबर की पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस सूचना के आधार पर जांच पड़ताल कर रही थी, तभी दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया और देखते ही देखते यह कहासुनी में बदल गया। कहासुनी बढ़ने पर दोनों पक्षों से जुड़ी महिलाएं, युवतियों, पुरुषों और युवकों के बीच जमकर मारपीट शुरू हो गई। वे एक-दूसरे पर टूट पड़े और ईंट-पत्थर से वार करने लगे। घटना के वायरल वीडियो में मारपीट के दौरान एक बालक को भी घसीटते हुए देखा गया है। डायल 112 नंबर की पुलिस ने दोनों पक्षों को अलग करने का भरसक प्रयास किया, लेकिन वे लगातार मारपीट करते रहे। मौके पर मौजूद लोग तमाशाबीन बने रहे और उन्होंने हस्तक्षेप नहीं किया। कड़ी मशक्कत के बाद पुलिस किसी प्रकार दोनों पक्षों को एक-दूसरे से अलग कर सकी। इस झड़प में दोनों पक्षों से कई लोग जख्मी हो गए हैं। इस पूरी घटना का वीडियो इंटरनेट प्लेटफॉर्म पर तेजी से वायरल हो रहा है।

7 hrs ago
user_राजेश कुमार
राजेश कुमार
रिपोर्टर मेजा, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश•
7 hrs ago

प्रयागराज के मांडा थाना क्षेत्र के बरहा कला गांव में स्थित एक मंदिर के समीप चबूतरे और सड़क के खड़ंजे को लेकर हुए विवाद की सूचना पर डायल 112 नंबर की पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस सूचना के आधार पर जांच पड़ताल कर रही थी, तभी दोनों पक्षों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया और देखते ही देखते यह कहासुनी में बदल गया। कहासुनी बढ़ने पर दोनों पक्षों से जुड़ी महिलाएं, युवतियों, पुरुषों और युवकों के बीच जमकर मारपीट शुरू हो गई। वे एक-दूसरे पर टूट पड़े और ईंट-पत्थर से वार करने लगे। घटना के वायरल वीडियो में मारपीट के दौरान एक बालक को भी घसीटते हुए देखा गया है। डायल 112 नंबर की पुलिस ने दोनों पक्षों को अलग करने का भरसक प्रयास किया, लेकिन वे लगातार मारपीट करते रहे। मौके पर मौजूद लोग तमाशाबीन बने रहे और उन्होंने हस्तक्षेप नहीं किया। कड़ी मशक्कत के बाद पुलिस किसी प्रकार दोनों पक्षों को एक-दूसरे से अलग कर सकी। इस झड़प में दोनों पक्षों से कई लोग जख्मी हो गए हैं। इस पूरी घटना का वीडियो इंटरनेट प्लेटफॉर्म पर तेजी से वायरल हो रहा है।

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  • राज्यमंत्री राकेश राठौर ने कुकुरकटवा गाँव में तिहरे हत्याकांड के पीड़ित परिवार से मुलाकात की। इस मुलाकात के दौरान उन्होंने पीड़ित परिवार से उनकी समस्याओं को जाना और उन्हें हरसंभव पूरी मदद का भरोसा दिलाया। राज्यमंत्री ने यह भी कहा कि हत्यारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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    राज्यमंत्री राकेश राठौर ने कुकुरकटवा गाँव में तिहरे हत्याकांड के पीड़ित परिवार से मुलाकात की। इस मुलाकात के दौरान उन्होंने पीड़ित परिवार से उनकी समस्याओं को जाना और उन्हें हरसंभव पूरी मदद का भरोसा दिलाया। राज्यमंत्री ने यह भी कहा कि हत्यारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
    user_Umesh chandra patrkar
    Umesh chandra patrkar
    Advertising Photographer मेजा, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश•
    18 hrs ago
  • प्रयागराज में मासूम अली असगर का ऐतिहासिक झूला चक रौजा से बड़े अदब, एहतेराम और अकीदत के साथ उठाया गया। इस झूले को फूलों से बेहद खूबसूरती से सजाया गया था, जिसमें गौस माली ने अपनी कारीगरी का प्रदर्शन किया। चांदी के झूले में सोने का पंजा भी लगाया गया था, जो उसकी शोभा और बढ़ा रहा था। यह झूला हुसैन और हैदर के दिलबर का प्रतीक बताया गया, जिसमें मासूम सकीना के आंसू और असगर का झूला कासिम के हाथों की मेहंदी की तरह बोलेगा। जुलूस के आगे-आगे सिया हजरात नोहा पढ़ते और मातम करते हुए चल रहे थे, जिससे माहौल में गहरे गम और भक्ति का रंग घुल गया। 'या अली या हुसैन' के बुलंद नारों के बीच रौजे से झूला अपने तयशुदा वक्त पर उठाया गया, और हुसैन के सिपाही अपने मजबूत कंधों पर इसे गश्त कराने के लिए निकल पड़े। झूला जब सड़क पर आया तो हर तरफ केवल सिर ही सिर दिखाई दे रहे थे, ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे हुसैनी सैलाब उमड़ आया हो। यह जुलूस बहादुरगंज, जी.टी. रोड, बताशा मंडी, गुड़ मंडी, लोकनाथ, कोतवाली, बजाजा पट्टी, घंटाघर, सब्जी मंडी और गढी सराय जैसे अपने कदीमी रास्तों से होते हुए इमामबाड़े पहुंचा, जहां मासूम अली असगर का झूला रखा गया। इस ऐतिहासिक झूले की जियारत के लिए शिया, सुन्नी, हिंदू और मुस्लिम सभी समाजों के लाखों अकीदतमंदों ने शिरकत की, जो इस आयोजन की व्यापक पहुंच और एकता को दर्शाता है। पूरे रास्ते भर लंगर का इंतजाम था, जिसमें बालुशाही, शीरमल, बिरयानी, कैंपा, बंद चीजें, पानी और शरबत बांटा जा रहा था। कंधा देने वालों पर पानी, गुलाब जल और केवड़ा छिड़का जा रहा था। जब झूला बजाजा पट्टी पहुंचा, तो लाउडस्पीकर पर 'झूला झुलाए किस हम झूला झुलाए' का नोहा बज रहा था, जबकि दूसरी ओर 'या अली या हुसैन' के नारे गूंज रहे थे, जिससे कई लोगों की आंखें नम थीं और कलेजा फटने जैसा एहसास हो रहा था। इस धार्मिक आयोजन में सदर विधायक, दर्जनों पार्षद, कई समाजसेवी, सिविल डिफेंस के सदस्य, झूले के संयोजक गुलाब नबी, गुलाम मोहम्मद, चांद मियां, इसरार नियाजी, मोहन जी, टंडन, गुल्लू पहलवान, अजीम पहलवान, मोहम्मद आमिर, महबूब डाबर और अकरम शगुन सहित लाखों अकीदतमंद शामिल हुए।
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    प्रयागराज में मासूम अली असगर का ऐतिहासिक झूला चक रौजा से बड़े अदब, एहतेराम और अकीदत के साथ उठाया गया। इस झूले को फूलों से बेहद खूबसूरती से सजाया गया था, जिसमें गौस माली ने अपनी कारीगरी का प्रदर्शन किया। चांदी के झूले में सोने का पंजा भी लगाया गया था, जो उसकी शोभा और बढ़ा रहा था। यह झूला हुसैन और हैदर के दिलबर का प्रतीक बताया गया, जिसमें मासूम सकीना के आंसू और असगर का झूला कासिम के हाथों की मेहंदी की तरह बोलेगा।

जुलूस के आगे-आगे सिया हजरात नोहा पढ़ते और मातम करते हुए चल रहे थे, जिससे माहौल में गहरे गम और भक्ति का रंग घुल गया। 'या अली या हुसैन' के बुलंद नारों के बीच रौजे से झूला अपने तयशुदा वक्त पर उठाया गया, और हुसैन के सिपाही अपने मजबूत कंधों पर इसे गश्त कराने के लिए निकल पड़े। झूला जब सड़क पर आया तो हर तरफ केवल सिर ही सिर दिखाई दे रहे थे, ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे हुसैनी सैलाब उमड़ आया हो। यह जुलूस बहादुरगंज, जी.टी. रोड, बताशा मंडी, गुड़ मंडी, लोकनाथ, कोतवाली, बजाजा पट्टी, घंटाघर, सब्जी मंडी और गढी सराय जैसे अपने कदीमी रास्तों से होते हुए इमामबाड़े पहुंचा, जहां मासूम अली असगर का झूला रखा गया।

इस ऐतिहासिक झूले की जियारत के लिए शिया, सुन्नी, हिंदू और मुस्लिम सभी समाजों के लाखों अकीदतमंदों ने शिरकत की, जो इस आयोजन की व्यापक पहुंच और एकता को दर्शाता है। पूरे रास्ते भर लंगर का इंतजाम था, जिसमें बालुशाही, शीरमल, बिरयानी, कैंपा, बंद चीजें, पानी और शरबत बांटा जा रहा था। कंधा देने वालों पर पानी, गुलाब जल और केवड़ा छिड़का जा रहा था। जब झूला बजाजा पट्टी पहुंचा, तो लाउडस्पीकर पर 'झूला झुलाए किस हम झूला झुलाए' का नोहा बज रहा था, जबकि दूसरी ओर 'या अली या हुसैन' के नारे गूंज रहे थे, जिससे कई लोगों की आंखें नम थीं और कलेजा फटने जैसा एहसास हो रहा था।

इस धार्मिक आयोजन में सदर विधायक, दर्जनों पार्षद, कई समाजसेवी, सिविल डिफेंस के सदस्य, झूले के संयोजक गुलाब नबी, गुलाम मोहम्मद, चांद मियां, इसरार नियाजी, मोहन जी, टंडन, गुल्लू पहलवान, अजीम पहलवान, मोहम्मद आमिर, महबूब डाबर और अकरम शगुन सहित लाखों अकीदतमंद शामिल हुए।
    user_दैनिक राष्ट्रीय जगत न्यूज संपा
    दैनिक राष्ट्रीय जगत न्यूज संपा
    मेजा, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश•
    21 hrs ago
  • कौशाम्बी में भाकियू श्रमिक जनशक्ति द्वारा अपनी मासिक पंचायत का आयोजन किया गया। इस पंचायत के दौरान किसानों और मजदूरों से संबंधित समस्याओं पर प्रमुखता से जोर दिया गया।
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    कौशाम्बी में भाकियू श्रमिक जनशक्ति द्वारा अपनी मासिक पंचायत का आयोजन किया गया। इस पंचायत के दौरान किसानों और मजदूरों से संबंधित समस्याओं पर प्रमुखता से जोर दिया गया।
    user_T B NEWS
    T B NEWS
    Koraon, Prayagraj•
    9 hrs ago
  • प्रयागराज के करछना थाना क्षेत्र में मोहर्रम की दसवीं बड़े ही धूमधाम और ग़मगीन माहौल में मनाई गई, जहाँ अक़ीदतमन्दों ने नम आँखों से ताज़िया, अलम, ताबूत, झूला और ज़ुलजनाह पर चढ़ाए गए फूलों को सुपुर्द-ए-खाक किया। करबला के मैदान में तीन दिन के भूखे-प्यासे खानदाने रिसालत की शहादत, यानि आशूरा की याद में, हर तरफ ग़म की चादर और आँखों में आँसू लिए अक़ीदतमन्दों ने नंगे पैर इमामबाड़ों से करबला तक का पैदल सफ़र तय किया। इस अवसर पर प्रवीण कुमार गौतम, थाना प्रभारी करछना, भी उपस्थित रहे। इस दौरान, बख्शी बाज़ार स्थित इमामबाड़ा नज़ीर हुसैन से, जिसे लगभग उन्नीस सौ अट्ठाईस (1928) में लड्डन मरहूम द्वारा क़ायम किया गया था, तुर्बत का क़दीमी जुलूस निकाला गया। मौलाना आमिरुर रिज़वी ने शहादत का मसायब पढ़ा। तुर्बत व अलम का यह जुलूस बख्शी बाज़ार, दायरा शाह अजमल, रानी मण्डी, बच्चा जी धर्मशाला से होते हुए ज़ैग़म अब्बास की मर्सिया ख्वानी करते हुए इमामबाड़ा मीर हुसैनी पहुँचा। इमामबाड़े में ज़ाकिरे अहलेबैत रज़ा अब्बास ज़ैदी ने ग़मगीन मसायब ए हुसैन पढ़े। मजलिस के बाद, अन्जुमन आबिदया के नौहाख्वान मिर्ज़ा काज़िम अली व वेज़ारत ने पुरदर्द नौहा पढ़ते हुए जुलूस को डॉ. चड्ढा रोड, कोतवाली, नखास कोहना, खुल्दाबाद, हिम्मतगंज होते हुए चकिया स्थित शिया करबला तक पहुँचाकर सम्पन्न कराया। वहीं, दूसरा क़दीमी दुलदुल जुलूस इमामबारगाह मिर्ज़ा नक़ी बेग से बशीर हुसैन की सरपरस्ती में निकाला गया, जिसमें अन्जुमन हैदरिया रानीमंडी के नौहाख्वान हसन रिज़वी व उनके साथियों ने पुरदर्द नौहों की सदाओं के साथ अपने परम्परागत मार्गों से होते हुए चकिया करबला पर पहुँचकर ताज़िये और फूलों को कर्बला में बनाए गए बड़े गड्ढ़े (गंजे शहीदां) में पुरसा पेश करते हुए दफ्न किया। इसके अतिरिक्त, दरियाबाद से आशूरा को निकाले गए जुलूस दरियाबाद स्थित क़ब्रिस्तान पहुँचे, जहाँ अक़ीदत के फूलों व ताज़िये को दरगाह इमाम हुसैन के पास बने छोटे-छोटे गड्ढों में सुपुर्द-ए-खाक किया गया। कर्बला में सैकड़ों अक़ीदतमन्दों ने खुले आसमान में आमाले आशूरा भी किया और नमाज़ अदा की। यह अमल छै माह के मासूम अली असग़र की शहादत के बाद हज़रत इमाम हुसैन द्वारा उनके बेशीर लाशे को खैमे में वापस ले जाते समय सात बार आगे बढ़ने और फिर अपने क़दमों को पीछे कर लेने के मरहले को याद दिलाता है। मौलाना रज़ा अब्बास ज़ैदी की क़यादत में यह आमाले आशूरा सम्पन्न हुआ। शाम को, चौदह सौ साल पहले करबला के मैदान में हज़रत इमाम हुसैन व अन्य खानदाने रिसालत के शहीद हो जाने के बाद यज़ीदी लश्कर द्वारा खैमों में आग लगा देने और लूटपाट की याद में 'शामें ग़रीबां' का जुलूस निकाला गया। रानीमंडी क़ाज़मी लॉज व इमामबाड़ा आबिदया में शामें ग़रीबां की मजलिस हुई, जहाँ हाय सकीना, हाय प्यास की सदाओं के साथ सड़कों, गलियों व घरों की सभी लाईटों को बन्द कर अंधेरे में या हुसैन या हुसैन की सदाओं के साथ जुलूस निकाला गया। नौहा 'भय्या तुझे घर जा के कहां पाएगी ज़ैनब, घबराएगी ज़ैनब' पढ़ा गया, जिससे हर तरफ आहो बुका की सदा गूंजने लगी। काली चादर में ढ़ला ज़ीन का दुलदुल भी निकाला गया, जिसमें बच्चे व छोटी बच्चियां हाथों में खाली कूज़े और मशालें लेकर 'हाय सकीना हाय प्यास, अम्मू मैं प्यासी हूं' की सदा बुलन्द करते हुए जुलूस के साथ चलती रहीं। दरियाबाद में दरगाह इमाम हुसैन के बाहर क़ब्रिस्तान में भी अक़ीदतमन्दों ने मजलिस व मातम किया और मोमबत्ती की रौशनी में ज़ुलजनाह निकाला गया। मौलाना आमिरुर रिज़वी के अज़ाखाने पर देर रात शामें ग़रीबां की मजलिस हुई, जिसे अशरफ अब्बास खां ने खिताब किया। शानू नक़वी व शादाब नक़वी ने सवाल व जवाबी नौहा पढ़ा, तो वहीं अन्जुमन नक़विया के नौहाख्वानो शबीह हसन शाहरुख व अन्य ने भी नौहा पढ़ा, जिससे माहौल संजीदा हो गया।
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    प्रयागराज के करछना थाना क्षेत्र में मोहर्रम की दसवीं बड़े ही धूमधाम और ग़मगीन माहौल में मनाई गई, जहाँ अक़ीदतमन्दों ने नम आँखों से ताज़िया, अलम, ताबूत, झूला और ज़ुलजनाह पर चढ़ाए गए फूलों को सुपुर्द-ए-खाक किया। करबला के मैदान में तीन दिन के भूखे-प्यासे खानदाने रिसालत की शहादत, यानि आशूरा की याद में, हर तरफ ग़म की चादर और आँखों में आँसू लिए अक़ीदतमन्दों ने नंगे पैर इमामबाड़ों से करबला तक का पैदल सफ़र तय किया। इस अवसर पर प्रवीण कुमार गौतम, थाना प्रभारी करछना, भी उपस्थित रहे।

इस दौरान, बख्शी बाज़ार स्थित इमामबाड़ा नज़ीर हुसैन से, जिसे लगभग उन्नीस सौ अट्ठाईस (1928) में लड्डन मरहूम द्वारा क़ायम किया गया था, तुर्बत का क़दीमी जुलूस निकाला गया। मौलाना आमिरुर रिज़वी ने शहादत का मसायब पढ़ा। तुर्बत व अलम का यह जुलूस बख्शी बाज़ार, दायरा शाह अजमल, रानी मण्डी, बच्चा जी धर्मशाला से होते हुए ज़ैग़म अब्बास की मर्सिया ख्वानी करते हुए इमामबाड़ा मीर हुसैनी पहुँचा। इमामबाड़े में ज़ाकिरे अहलेबैत रज़ा अब्बास ज़ैदी ने ग़मगीन मसायब ए हुसैन पढ़े। मजलिस के बाद, अन्जुमन आबिदया के नौहाख्वान मिर्ज़ा काज़िम अली व वेज़ारत ने पुरदर्द नौहा पढ़ते हुए जुलूस को डॉ. चड्ढा रोड, कोतवाली, नखास कोहना, खुल्दाबाद, हिम्मतगंज होते हुए चकिया स्थित शिया करबला तक पहुँचाकर सम्पन्न कराया। वहीं, दूसरा क़दीमी दुलदुल जुलूस इमामबारगाह मिर्ज़ा नक़ी बेग से बशीर हुसैन की सरपरस्ती में निकाला गया, जिसमें अन्जुमन हैदरिया रानीमंडी के नौहाख्वान हसन रिज़वी व उनके साथियों ने पुरदर्द नौहों की सदाओं के साथ अपने परम्परागत मार्गों से होते हुए चकिया करबला पर पहुँचकर ताज़िये और फूलों को कर्बला में बनाए गए बड़े गड्ढ़े (गंजे शहीदां) में पुरसा पेश करते हुए दफ्न किया। इसके अतिरिक्त, दरियाबाद से आशूरा को निकाले गए जुलूस दरियाबाद स्थित क़ब्रिस्तान पहुँचे, जहाँ अक़ीदत के फूलों व ताज़िये को दरगाह इमाम हुसैन के पास बने छोटे-छोटे गड्ढों में सुपुर्द-ए-खाक किया गया।

कर्बला में सैकड़ों अक़ीदतमन्दों ने खुले आसमान में आमाले आशूरा भी किया और नमाज़ अदा की। यह अमल छै माह के मासूम अली असग़र की शहादत के बाद हज़रत इमाम हुसैन द्वारा उनके बेशीर लाशे को खैमे में वापस ले जाते समय सात बार आगे बढ़ने और फिर अपने क़दमों को पीछे कर लेने के मरहले को याद दिलाता है। मौलाना रज़ा अब्बास ज़ैदी की क़यादत में यह आमाले आशूरा सम्पन्न हुआ।

शाम को, चौदह सौ साल पहले करबला के मैदान में हज़रत इमाम हुसैन व अन्य खानदाने रिसालत के शहीद हो जाने के बाद यज़ीदी लश्कर द्वारा खैमों में आग लगा देने और लूटपाट की याद में 'शामें ग़रीबां' का जुलूस निकाला गया। रानीमंडी क़ाज़मी लॉज व इमामबाड़ा आबिदया में शामें ग़रीबां की मजलिस हुई, जहाँ हाय सकीना, हाय प्यास की सदाओं के साथ सड़कों, गलियों व घरों की सभी लाईटों को बन्द कर अंधेरे में या हुसैन या हुसैन की सदाओं के साथ जुलूस निकाला गया। नौहा 'भय्या तुझे घर जा के कहां पाएगी ज़ैनब, घबराएगी ज़ैनब' पढ़ा गया, जिससे हर तरफ आहो बुका की सदा गूंजने लगी। काली चादर में ढ़ला ज़ीन का दुलदुल भी निकाला गया, जिसमें बच्चे व छोटी बच्चियां हाथों में खाली कूज़े और मशालें लेकर 'हाय सकीना हाय प्यास, अम्मू मैं प्यासी हूं' की सदा बुलन्द करते हुए जुलूस के साथ चलती रहीं। दरियाबाद में दरगाह इमाम हुसैन के बाहर क़ब्रिस्तान में भी अक़ीदतमन्दों ने मजलिस व मातम किया और मोमबत्ती की रौशनी में ज़ुलजनाह निकाला गया। मौलाना आमिरुर रिज़वी के अज़ाखाने पर देर रात शामें ग़रीबां की मजलिस हुई, जिसे अशरफ अब्बास खां ने खिताब किया। शानू नक़वी व शादाब नक़वी ने सवाल व जवाबी नौहा पढ़ा, तो वहीं अन्जुमन नक़विया के नौहाख्वानो शबीह हसन शाहरुख व अन्य ने भी नौहा पढ़ा, जिससे माहौल संजीदा हो गया।
    user_Susheel Kumar
    Susheel Kumar
    करछना, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश•
    9 hrs ago
  • प्रयागराज के मांडा थाना क्षेत्र अंतर्गत बरहा कला गांव में मंदिर से मूर्ति चोरी, सरकारी खड़ंजे को उखाड़ने और मंदिर परिसर की टाइल्स को लेकर चल रहा विवाद गुरुवार को हिंसक हो गया। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि इस मामले में पीड़ित राजेश कुमार ने 24 जून 2026 को मांडा थाने में एक प्रार्थना पत्र देकर न्याय की गुहार लगाई थी, लेकिन कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। पीड़ित परिवार के अनुसार, आज विवाद के दौरान दूसरे पक्ष ने ईंट-पत्थरों से हमला कर दिया, जिसमें राजेश कुमार की दो बच्चियां घायल हो गईं। इस हमले में उन्हें सिर में गंभीर चोटें आई हैं। घटना की सूचना डायल 112 को दी गई थी, लेकिन आरोप है कि पुलिस के मौके पर पहुंचने के बावजूद उनके सामने ही ईंट-पत्थर चलाए गए और हमला जारी रहा। इस घटना के बाद क्षेत्र में तनाव का माहौल व्याप्त है। घायल बच्चियों को इलाज के लिए भेज दिया गया है, वहीं पीड़ित पक्ष ने आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। फिलहाल, पुलिस मामले की जांच में जुटी है।
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    प्रयागराज के मांडा थाना क्षेत्र अंतर्गत बरहा कला गांव में मंदिर से मूर्ति चोरी, सरकारी खड़ंजे को उखाड़ने और मंदिर परिसर की टाइल्स को लेकर चल रहा विवाद गुरुवार को हिंसक हो गया। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि इस मामले में पीड़ित राजेश कुमार ने 24 जून 2026 को मांडा थाने में एक प्रार्थना पत्र देकर न्याय की गुहार लगाई थी, लेकिन कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।

पीड़ित परिवार के अनुसार, आज विवाद के दौरान दूसरे पक्ष ने ईंट-पत्थरों से हमला कर दिया, जिसमें राजेश कुमार की दो बच्चियां घायल हो गईं। इस हमले में उन्हें सिर में गंभीर चोटें आई हैं। घटना की सूचना डायल 112 को दी गई थी, लेकिन आरोप है कि पुलिस के मौके पर पहुंचने के बावजूद उनके सामने ही ईंट-पत्थर चलाए गए और हमला जारी रहा।

इस घटना के बाद क्षेत्र में तनाव का माहौल व्याप्त है। घायल बच्चियों को इलाज के लिए भेज दिया गया है, वहीं पीड़ित पक्ष ने आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। फिलहाल, पुलिस मामले की जांच में जुटी है।
    user_JOURNALIST PANKAJ SINGH
    JOURNALIST PANKAJ SINGH
    Teacher हंडिया, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश•
    14 hrs ago
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