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न्यू कबाड़ खाने में लोग कचरे से ओर गंदगी से होराहे है परेशान लोगोका कहना हे कई बार शिकायत करने के बाबजूद ना तो नगर निगम द्वारा नालिया साफ होती हे नाटो कचरा उठाया जाता है बड़ा सवाल ये है क्यों शिकायत करनेके बाबजूद समस्या का निराकरण नहीं हुआ आला अधि कारि को अवगत करदिए गया हे जल्द से जल्द समस्या का निराकरण कराया जाए ए एम न्यूज से जफर खान न्यू कबाड़ खाने में लोग कचरे से ओर गंदगी से होराहे है परेशान लोगोका कहना हे कई बार शिकायत करने के बाबजूद ना तो नगर निगम द्वारा नालिया साफ होती हे नाटो कचरा उठाया जाता है बड़ा सवाल ये है क्यों शिकायत करनेके बाबजूद समस्या का निराकरण नहीं हुआ आला अधि कारि को अवगत करदिए गया हे जल्द से जल्द समस्या का निराकरण कराया जाए ए एम न्यूज से जफर खान
Aamir Khan
न्यू कबाड़ खाने में लोग कचरे से ओर गंदगी से होराहे है परेशान लोगोका कहना हे कई बार शिकायत करने के बाबजूद ना तो नगर निगम द्वारा नालिया साफ होती हे नाटो कचरा उठाया जाता है बड़ा सवाल ये है क्यों शिकायत करनेके बाबजूद समस्या का निराकरण नहीं हुआ आला अधि कारि को अवगत करदिए गया हे जल्द से जल्द समस्या का निराकरण कराया जाए ए एम न्यूज से जफर खान न्यू कबाड़ खाने में लोग कचरे से ओर गंदगी से होराहे है परेशान लोगोका कहना हे कई बार शिकायत करने के बाबजूद ना तो नगर निगम द्वारा नालिया साफ होती हे नाटो कचरा उठाया जाता है बड़ा सवाल ये है क्यों शिकायत करनेके बाबजूद समस्या का निराकरण नहीं हुआ आला अधि कारि को अवगत करदिए गया हे जल्द से जल्द समस्या का निराकरण कराया जाए ए एम न्यूज से जफर खान
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- *मोहन सरकार में बिजली बिल वसूली जोरों पर ?* *सिस्टम की दबंगई और किसान की लाचारी पर सवाल* मध्यप्रदेश में इन दिनों बिजली बिल वसूली को लेकर जो हालात बन रहे हैं, वे आम जनता, खासकर किसानों के लिए चिंता का विषय बनते जा रहे हैं। हाल ही में राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा की विधानसभा क्षेत्र से एक ऐसा मामला सामने आया, जिसने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि बिजली बिल बकाया होने पर विभाग ने एक किसान का ट्रैक्टर जब्त कर लिया वह ट्रैक्टर, जो उसके जीवनयापन का मुख्य साधन था। यह घटना सिर्फ एक किसान की परेशानी नहीं, बल्कि उस मानसिकता का प्रतीक बनती जा रही है जिसमें वसूली को सेवा से ज्यादा प्राथमिकता दी जा रही है। किसान, जो पहले से ही मौसम, लागत और बाजार की मार झेल रहा है, अब सरकारी तंत्र की सख्ती के सामने भी लाचार नजर आ रहा है। क्या अब गरीबों को अपने घर के बर्तन-भांडे भी छुपाकर रखने होंगे? क्या वसूली का दायरा इतना बढ़ जाएगा कि इंसान की गरिमा भी कुर्की की सूची में शामिल हो जाए? यह सवाल इसलिए भी उठता है क्योंकि ऐसी घटनाएं जनता के मन में डर और अविश्वास पैदा करती हैं। सरकार का तर्क होता है कि राजस्व वसूली जरूरी है, ताकि व्यवस्था चल सके। लेकिन सवाल यह है कि क्या यह वसूली मानवीय संवेदनाओं को दरकिनार करके की जाएगी? क्या कोई वैकल्पिक समाधान नहीं हो सकता जैसे किस्तों में भुगतान, सब्सिडी, या विशेष राहत योजना? आज जरूरत है संतुलन की जहाँ सरकार अपनी जिम्मेदारी निभाए, वहीं जनता के हालात को भी समझे। किसान केवल उपभोक्ता नहीं है, वह देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। यदि वही असुरक्षित महसूस करेगा, तो विकास की सारी बातें खोखली साबित होंगी। यह मामला एक चेतावनी है सिस्टम को अपनी कार्यशैली पर पुनर्विचार करना होगा, वरना “वसूली” और “विकास” के बीच की खाई और गहरी होती जाएगी।1
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- *🛑बांग्लादेश में एक बड़ा हादसा हो गया. एक बस गहरी नदी में गिरने से 23 यात्रियों की मौत हो गई.* ये बस करीब 40 लोगों को लेकर जा रही थी, जिनमें कई बच्चे भी शामिल थे. जानकारी के मुताबिक, बस सवार लोग ईद की छुट्टियां मनाकर ढाका वापस लौट रहे थे. उसी दौरान ये दर्दनाक हादसा हो गया. राहत और बचाव कार्य लगातार जारी है. कई लोग अब तक लापता बताए जा रहे हैं. मरने वालों का आंकड़ा बढ़ सकता है. ये हादसा बुधवार शाम लगभग 5.15 बजे के आसपास हुआ.हादसे के बाद क्रेन की मदद से बस को नदी से बाहर निकाला गया. हालात बहुत ही मुश्किल थे. खराब मौसम के बीच रेस्क्यू आसान नहीं था. बस को नदी से बाहर निकालने में करीब 6 घंटे लगे. जानकारी के मुताबिक, एक फेरी (नाव) पर चढ़ने की कोशिश करते समय बस संतुलन खोकर पदमा नदी में जा गिरी. हादसे के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई. सेना, पुलिस, फायर ब्रिगेड, तटरक्षक बल की टीमें मिलकर रेस्क्यू ऑपरेशन चला रही हैं. दरअसल बस फेरी (नाव) पर चढ़ने की कोशिश करते समय नदी में जा गिरी. लापता यात्रियों को ढूढने की कोशिश जारी है. वहीं मृतकों के शव नदी से बाहर निकाले जा रहे हैं. अधिकारियों के मुताबिक, यह दुर्घटना दक्षिण-पश्चिमी राजबारी में दौलाडिया टर्मिनल पर बुधवार शाम लगभग 5.15 बजे हुई, जब बस पद्मा नदी में जा गिरी. घटनास्थल पर मौजूद एक अधिकारी ने बताया कि ढाका जा रही बस में 40 यात्री सवार थे. वह (दौलाडिया) टर्मिनल पर नौका पर चढ़ते समय नदी में गिर गई. प्रत्यक्षदर्शियों ने भी बताया कि 40 यात्रियों से भरी बस जैसे ही फेरी की ओर बढ़ी, तभी एक छोटी नाव से टकरा गई. इस टक्कर की वजह से बस का बैलेंस बिगड़ गया और सीधे गहरी नदी में जा गिरी.1
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