उमरिया जिले में जनगणना के अंतर्गत मकानसूचीकरण का कार्य निर्धारित समय से पूर्व सफलतापूर्वक पूर्ण होने पर सोमवार को कलेक्टर सभागार में एक सम्मान समारोह आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में कलेक्टर एवं प्रमुख जनगणना अधिकारी श्रीमती राखी सहाय ने जनगणना कार्य में उत्कृष्ट योगदान देने वाले चार्ज अधिकारियों और तहसील स्तरीय अधिकारियों को प्रमाण-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए श्रीमती राखी सहाय ने सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों के समर्पण, टीम भावना और सक्रिय सहयोग की सराहना की, जिसकी बदौलत मकानसूचीकरण का कार्य तय समय से पहले पूरा किया जा सका। उन्होंने जनगणना को शासन की एक महत्वपूर्ण एवं आधारभूत प्रक्रिया बताया और भविष्य में भी इसी प्रतिबद्धता के साथ कार्य करने की अपेक्षा व्यक्त की। श्रीमती सहाय ने इस उपलब्धि को उमरिया जिले की पूरी टीम की मेहनत और समन्वय का परिणाम बताया। जिला जनगणना अधिकारी एवं अपर कलेक्टर प्रमोद कुमार सेन गुप्ता ने जानकारी दी कि मकानसूचीकरण कार्य के लिए जिले में 12 चार्ज अधिकारियों की नियुक्ति की गई थी, जिसमें 1203 प्रगणकों और 204 सुपरवाइजरों की सेवाएँ ली गईं। इनके माध्यम से कुल 1412 हाउस लिस्टिंग ब्लॉक (एचएलबी) का कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण किया गया। उन्होंने चार्ज अधिकारियों, मास्टर ट्रेनरों, पटवारियों और शिक्षकों के योगदान की भी सराहना करते हुए भविष्य में इसी प्रकार सहयोग बनाए रखने का आह्वान किया। सम्मान समारोह के दौरान कलेक्टर एवं प्रमुख जनगणना अधिकारी श्रीमती राखी सहाय ने जिला जनगणना अधिकारी एवं अपर कलेक्टर प्रमोद कुमार सेन गुप्ता, एसडीएम मानपुर हरनीत कौर कलसी, एसडीएम बांधवगढ़ अंबिकेश प्रताप सिंह, एसडीएम पाली मीनाक्षी इंगले, डिप्टी कलेक्टर एवं जिला जनगणना नोडल अधिकारी प्रत्यूष श्रीवास्तव, और जनगणना जिला उमरिया के पर्यवेक्षक अजय सिंह रजावत सहित विभिन्न चार्ज अधिकारियों एवं तहसील स्तरीय अधिकारियों को प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया। कार्यक्रम का संचालन मास्टर ट्रेनर सुशील मिश्रा ने किया।
उमरिया जिले में जनगणना के अंतर्गत मकानसूचीकरण का कार्य निर्धारित समय से पूर्व सफलतापूर्वक पूर्ण होने पर सोमवार को कलेक्टर सभागार में एक सम्मान समारोह आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम में कलेक्टर एवं प्रमुख जनगणना अधिकारी श्रीमती राखी सहाय ने जनगणना कार्य में उत्कृष्ट योगदान देने वाले चार्ज अधिकारियों और तहसील स्तरीय अधिकारियों को प्रमाण-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए श्रीमती राखी सहाय ने सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों के समर्पण, टीम भावना और सक्रिय सहयोग की सराहना की, जिसकी बदौलत मकानसूचीकरण का कार्य तय समय से पहले पूरा किया जा सका। उन्होंने जनगणना को शासन की एक महत्वपूर्ण एवं आधारभूत प्रक्रिया बताया और भविष्य में भी इसी प्रतिबद्धता के साथ कार्य करने की अपेक्षा व्यक्त की। श्रीमती सहाय ने इस उपलब्धि को उमरिया जिले की पूरी टीम की मेहनत और समन्वय का परिणाम बताया। जिला जनगणना अधिकारी एवं अपर कलेक्टर प्रमोद कुमार सेन गुप्ता ने जानकारी दी कि मकानसूचीकरण कार्य के लिए जिले में 12 चार्ज अधिकारियों की नियुक्ति की गई थी, जिसमें 1203 प्रगणकों और 204 सुपरवाइजरों की सेवाएँ ली गईं। इनके माध्यम से कुल 1412 हाउस लिस्टिंग ब्लॉक (एचएलबी) का कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण किया गया। उन्होंने चार्ज अधिकारियों, मास्टर ट्रेनरों, पटवारियों और शिक्षकों के योगदान की भी सराहना करते हुए भविष्य में इसी प्रकार सहयोग बनाए रखने का आह्वान किया। सम्मान समारोह के दौरान कलेक्टर एवं प्रमुख जनगणना अधिकारी श्रीमती राखी सहाय ने जिला जनगणना अधिकारी एवं अपर कलेक्टर प्रमोद कुमार सेन गुप्ता, एसडीएम मानपुर हरनीत कौर कलसी, एसडीएम बांधवगढ़ अंबिकेश प्रताप सिंह, एसडीएम पाली मीनाक्षी इंगले, डिप्टी कलेक्टर एवं जिला जनगणना नोडल अधिकारी प्रत्यूष श्रीवास्तव, और जनगणना जिला उमरिया के पर्यवेक्षक अजय सिंह रजावत सहित विभिन्न चार्ज अधिकारियों एवं तहसील स्तरीय अधिकारियों को प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया। कार्यक्रम का संचालन मास्टर ट्रेनर सुशील मिश्रा ने किया।
- मध्य प्रदेश के शहडोल जिले के बुढार थाना क्षेत्र से पुलिस की कथित 'पहचान चूक' का एक संवेदनशील और गंभीर मामला सामने आया है, जिसने स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली और डिजिटल वेरिफिकेशन के दावों पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बुढार के प्रतिष्ठित नागरिक श्री सत्यजीत शुक्ला के निवास पर बुढार थाना पुलिस की एक टीम अचानक पहुँच गई। पुलिस ने परिवार को बताया कि श्री सत्यजीत शुक्ला के खिलाफ धोखाधड़ी का कोई पुराना आपराधिक मामला लंबित है और वे उसी सिलसिले में पूछताछ तथा कार्रवाई के लिए आए हैं। पुलिस की इस अप्रत्याशित दस्तक से पूरा परिवार हैरान और भारी मानसिक तनाव में आ गया। इस विकट परिस्थिति में श्री सत्यजीत शुक्ला के पुत्र विकास शुक्ला ने घबराने के बजाय सूझबूझ का परिचय देते हुए तत्काल पूरी पुलिसिया कार्रवाई की लाइव वीडियो रिकॉर्डिंग शुरू कर दी। कैमरे की मौजूदगी और विकास शुक्ला द्वारा पूछे गए तीखे, तथ्यात्मक और कानूनी सवालों के बाद पुलिस टीम असमंजस में पड़ गई। जब विकास शुक्ला ने पुलिस अधिकारियों से संबंधित मामले के पुख्ता अभिलेख, केस डायरी और पहचान संबंधी ठोस दस्तावेज मांगे, तब जाकर पुलिसिया तंत्र ने अपनी फाइलें दोबारा जाँचीं। गहन पूछताछ, दस्तावेजों के मिलान और वीडियो ग्राफ़ी के साक्ष्य के सामने आखिरकार बुढार पुलिस को अपनी तकनीकी और प्रक्रियात्मक चूक स्वीकार करनी पड़ी। पुलिस ने माना कि उन्हें जिस व्यक्ति की तलाश थी, वह कोई और था और यह भारी भ्रम नाम तथा उपनाम (सत्यजीत शुक्ला) की समानता के कारण उत्पन्न हुआ था। बाद में पुलिस अधिकारियों ने स्थिति को संभालते हुए स्पष्ट किया कि इस पीड़ित परिवार के श्री सत्यजीत शुक्ला के नाम पर बुढार थाने में ऐसा कोई भी आपराधिक रिकॉर्ड दर्ज नहीं है और न ही उनके खिलाफ कोई कार्रवाई लंबित है। इसके बाद पुलिस ने परिवार को आश्वस्त किया और वहाँ से लौट गई। हालाँकि, पुलिस की 'सॉरी' के साथ मामला खत्म होने के बावजूद, पत्रकारों और समाजसेवियों ने इस घटना के बाद प्रशासनिक व्यवस्था से कुछ सीधे और कड़े सवाल पूछे हैं। उन्होंने सवाल उठाया है कि क्या सिर्फ नाम की समानता किसी को भी संदिग्ध बना देगी और क्या शाहडोल पुलिस के पास किसी के घर दबिश देने से पहले 'मल्टी-लेवल वेरिफिकेशन' (जैसे पिता का नाम, उम्र, हुलिया, पता और आधार/पहचान पत्र का मिलान) की कोई व्यवस्था नहीं है। इसके साथ ही, इस गरिमापूर्ण परिवार को पुलिस के घर पहुँचने से जो मानसिक आघात और सामाजिक असहजता झेलनी पड़ी, उसकी भरपाई कौन करेगा, इस पर भी गंभीर सवाल उठाए गए हैं। यह भी पूछा गया कि यदि जागरूक युवा विकास शुक्ला ने पूरी सजगता से वीडियो रिकॉर्डिंग न की होती और तीखे सवाल न पूछे होते, तो क्या पुलिस अपनी गलती इतनी आसानी से मानती या फिर किसी निर्दोष को थाने के चक्कर काटने पड़ते। इस घटना के बाद पीड़ित शुक्ला परिवार और स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों ने इस पूरे घटनाक्रम की उच्च स्तरीय प्रशासनिक समीक्षा की मांग की है। उनका कहना है कि आधुनिक पुलिसिंग के इस दौर में, जहाँ डिजिटल रिकॉर्ड और सीसीटीएनएस जैसी प्रणालियाँ मौजूद हैं, वहाँ इस तरह की मानवीय और प्रक्रियात्मक त्रुटियां असहनीय हैं। नागरिकों ने भविष्य में बुढार या पूरे शहडोल संभाग में किसी भी अन्य निर्दोष नागरिक के मौलिक अधिकारों, सम्मान और मानसिक शांति के साथ ऐसा खिलवाड़ न हो, यह सुनिश्चित करने के लिए पुलिस द्वारा रिकॉर्ड के शत-प्रतिशत सत्यापन की मांग की है।1
- कटनी नगर के प्रसिद्ध दक्षिण मुखी हनुमान मंदिर (कमानिया गेट) में भक्तिमय वातावरण के बीच सुप्रसिद्ध भागवत कथा वाचक सुश्री साक्षी शुक्ला का आगमन हुआ। उनके स्वागत के लिए मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु और धर्मप्रेमी उपस्थित रहे। आगमन के बाद सुश्री साक्षी शुक्ला ने अपने मुखारविंद से मधुर स्वर में हनुमान भजनों की प्रस्तुति दी, जिसे सुनकर सभी श्रद्धालु भक्ति रस में सराबोर हो गए। भजन संध्या के दौरान, "मोरे संकट के कटैया हनुमान हमारे संकट काटो प्रभु" जैसे कई लोकप्रिय भजनों ने वातावरण को पूरी तरह भक्तिमय बना दिया। श्रद्धालु भजनों पर झूमते नजर आए और पूरे मंदिर परिसर में जय श्रीराम तथा जय बजरंगबली के जयघोष गूंजते रहे। इस अवसर पर सुश्री साक्षी शुक्ला ने भगवान हनुमान की भक्ति, सेवा, समर्पण और सदाचार के महत्व पर प्रकाश डालते हुए लोगों को धर्म एवं मानव सेवा के मार्ग पर चलने का संदेश दिया। कार्यक्रम के अंत में, मंदिर समिति के पदाधिकारियों ने सुश्री साक्षी शुक्ला का पुष्पमाला एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मान किया। आरती और प्रसाद वितरण के साथ आयोजन का समापन हुआ। उपस्थित श्रद्धालुओं ने ऐसे आध्यात्मिक आयोजनों को समाज में सकारात्मक ऊर्जा और धार्मिक जागरूकता बढ़ाने वाला बताया।1
- जबलपुर रेंज के डीआईजी अतुल सिंह ने सोमवार को कटनी के कोतवाली थाने का अचानक निरीक्षण किया, जिससे पुलिस महकमे में हलचल तेज हो गई। इस दौरान उन्होंने थाना व्यवस्थाओं, अपराध नियंत्रण और सुरक्षा व्यवस्था का गहन जायजा लिया। निरीक्षण के समय अभिनय विश्वकर्मा और संतोष डेहरिया सहित कई पुलिस अधिकारी मौजूद थे। डीआईजी ने थाना अभिलेख, अपराध रजिस्टर, लंबित मामलों और विवेचनाओं की बारीकी से समीक्षा की और साफ संदेश दिया कि अपराध तथा अपराधियों के प्रति किसी भी प्रकार की लापरवाही बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने थाना परिसर की साफ-सफाई, मालखाना व्यवस्था और सुरक्षा इंतजामों का भी जायजा लिया। डीआईजी अतुल सिंह ने निर्देश दिए कि जनता की शिकायतों का त्वरित, पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण निराकरण सुनिश्चित किया जाए, ताकि पुलिस और आमजन के बीच विश्वास और मजबूत हो सके। उन्होंने शहर में रात्रि गश्त बढ़ाने, संदिग्ध गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रखने और चिन्हित अपराधियों पर लगातार नजर रखते हुए उनके खिलाफ सख्त वैधानिक कार्रवाई करने को कहा। साथ ही, यातायात व्यवस्था और शहर की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत बनाने पर विशेष जोर दिया गया। इस मौके पर एसपी अभिनय विश्वकर्मा ने जिले में कानून-व्यवस्था बनाए रखने और अपराध नियंत्रण के लिए चलाए जा रहे अभियानों की जानकारी दी, जबकि एएसपी संतोष डेहरिया ने कोतवाली क्षेत्र की चुनौतियों और उनके समाधान हेतु किए जा रहे प्रयासों से अवगत कराया। निरीक्षण के अंत में, डीआईजी अतुल सिंह ने थाना स्टाफ को बेहतर पुलिसिंग, जनसहयोग और कानून-व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनता की सुरक्षा और भरोसा पुलिस की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।1
- कटनी नगर में एक मंदिर में आयोजित शुभ कार्यक्रम की भव्य सजावट ने सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा। रंग-बिरंगे फूलों से की गई सज्जा, मनमोहक रोशनी और भक्तिमय वातावरण ने वहां मौजूद श्रद्धालुओं का मन मोह लिया। इस कार्यक्रम में भक्तों ने पूरे उत्साह के साथ सहभागिता की।1
- मध्य प्रदेश के मैहर स्थित घुनवारा पंचायत में जल जीवन मिशन और सरकारी पेयजल योजनाओं पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाने के बावजूद, स्थानीय ग्रामीण अब पानी की गुणवत्ता पर सवाल उठा रहे हैं। सोशल मीडिया पर सामने आए एक वीडियो ने गाँव की पेयजल व्यवस्था को लेकर नई बहस छेड़ दी है। ग्रामीणों का दावा है कि उनके नलों से मटमैला और झागदार पानी आ रहा है, जो उपयोग के लायक नहीं है। वीडियो में कथित तौर पर सप्लाई किए जा रहे पानी की खराब गुणवत्ता को दिखाया गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि स्वच्छ पानी घर-घर पहुँचाना ही योजना का उद्देश्य है, तो ऐसी स्थिति क्यों उत्पन्न हो रही है। ग्रामीणों के अनुसार, यह समस्या सिर्फ असुविधा नहीं, बल्कि स्वास्थ्य का एक गंभीर मुद्दा है, क्योंकि दूषित पानी से बच्चों, बुजुर्गों और आम नागरिकों में बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। इस गंभीर स्थिति के चलते कई बड़े सवाल उठ रहे हैं: क्या जलापूर्ति व्यवस्था की नियमित जांच होती है? क्या पानी की गुणवत्ता का परीक्षण किया गया है? यदि पाइपलाइन, टंकी या जल स्रोत में कोई खराबी है, तो उसे ठीक करने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं? ग्रामीण यह भी जानना चाहते हैं कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी स्वच्छ पेयजल क्यों नहीं मिल रहा, और यदि शिकायत सही पाई जाती है तो किसकी जिम्मेदारी तय होगी। ग्रामीणों ने प्रशासन से पानी के नमूनों की जांच कराने और लापरवाही पाए जाने पर जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। फिलहाल, वायरल वीडियो और ग्रामीणों की शिकायतों ने घुनवारा की पेयजल व्यवस्था को सवालों के घेरे में ला खड़ा किया है। (नोट: यह समाचार स्थानीय लोगों की शिकायतों और उपलब्ध वीडियो के आधार पर तैयार किया गया है, और पानी की गुणवत्ता व संबंधित आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी)।1
- सतना जिले में चंदन के पेड़ चोरी करने वाले एक गिरोह का नागौद पुलिस ने पर्दाफाश किया है। पुलिस ने इस पारदी गिरोह की तीन महिलाओं समेत कुल 6 सदस्यों को गिरफ्तार किया है। पूछताछ के दौरान, गिरोह के सदस्यों ने नागौद, रामपुर बाघेलान, सिंहपुर, अमरपाटन और चौकी बाबूपुर जैसे विभिन्न इलाकों में चंदन के पेड़ चोरी की कई घटनाओं को अंजाम देने की बात स्वीकार की है। यह सफलता टीआई अशोक पांडेय के नेतृत्व में पुलिस टीम को मिली है।1
- मध्य प्रदेश सरकार ने राज्य में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की दिशा में प्रक्रिया आरंभ कर दी है। इस संबंध में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एक बड़ा बयान देते हुए कहा कि UCC को लागू करने से पहले पूरे प्रदेश के नागरिकों से सुझाव लिए जाएंगे।1
- शहडोल जिले के बुढार थाना क्षेत्र से पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला एक बेहद संवेदनशील मामला सामने आया है, जहाँ बुढार पुलिस ने बिना पुख्ता जाँच और सत्यापन के एक निर्दोष परिवार, शुक्ला परिवार, को भारी मानसिक तनाव दिया। पुलिस की कथित पहचान चूक के कारण उन्हें शर्मिंदगी और परेशानी का सामना करना पड़ा। दरअसल, बुढार क्षेत्र के प्रतिष्ठित नागरिक श्री सत्यजीत शुक्ला के निवास पर अचानक बुढार थाना पुलिस की एक टीम पहुँच गई। पुलिस ने परिजनों को बताया कि श्री सत्यजीत शुक्ला के खिलाफ धोखाधड़ी का कोई पुराना आपराधिक मामला लंबित है और वे उसी सिलसिले में पूछताछ और कार्रवाई के लिए आए हैं। पुलिस को अचानक दरवाजे पर देखकर पूरा परिवार हैरान और परेशान हो गया, लेकिन श्री सत्यजीत शुक्ला के पुत्र विकास शुक्ला ने सूझबूझ दिखाते हुए तत्काल पूरी पुलिसिया कार्रवाई की वीडियो ग्राफ़ी (लाइव वीडियो रिकॉर्डिंग) शुरू कर दी। कैमरे की मौजूदगी और विकास शुक्ला द्वारा पूछे गए तथ्यात्मक तथा कानूनी सवालों से पुलिस टीम असमंजस में पड़ गई। जब विकास शुक्ला ने पुलिस अधिकारियों से संबंधित मामले के पुख्ता अभिलेख, केस डायरी और पहचान संबंधी ठोस दस्तावेज मांगे, तब पुलिस ने अपनी फाइलें दोबारा जाँची। गहन पूछताछ और वीडियो ग्राफ़ी के साक्ष्य के सामने आखिरकार बुढार पुलिस को अपनी तकनीकी और प्रक्रियात्मक चूक स्वीकार करनी पड़ी। पुलिस ने माना कि उन्हें जिस व्यक्ति की तलाश थी, वह कोई और है और यह भ्रम नाम और उपनाम (सत्यजीत शुक्ला) की समानता के कारण पैदा हुआ था। बाद में पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि इस पीड़ित परिवार के श्री सत्यजीत शुक्ला के नाम पर बुढार थाने में ऐसा कोई आपराधिक रिकॉर्ड दर्ज नहीं है, और न ही उनके खिलाफ कोई कार्रवाई लंबित है। इसके बाद पुलिस परिवार को आश्वस्त कर लौट गई। इस घटना के बाद पत्रकारों और समाजसेवियों ने प्रशासनिक व्यवस्था से कड़े सवाल पूछे हैं कि क्या नाम की समानता किसी को भी संदिग्ध बना देगी और क्या शाहडोल पुलिस के पास दबिश देने से पहले 'मल्टी-लेवल वेरिफिकेशन' की कोई व्यवस्था नहीं है। उन्होंने इस गरिमापूर्ण परिवार को हुए मानसिक आघात और सामाजिक असहजता का जिम्मेदार कौन है, इस पर भी प्रश्न उठाया। लोगों का कहना है कि यदि विकास शुक्ला ने वीडियो रिकॉर्डिंग न की होती, तो क्या पुलिस इतनी आसानी से अपनी गलती मानती। पीड़ित शुक्ला परिवार और स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों ने इस पूरे घटनाक्रम की उच्च स्तरीय प्रशासनिक समीक्षा और कड़े दिशा-निर्देशों की मांग की है, ताकि भविष्य में बुढार या पूरे शहडोल संभाग में किसी भी अन्य निर्दोष नागरिक के मौलिक अधिकारों, सम्मान और मानसिक शांति के साथ ऐसा खिलवाड़ न हो।1
- कटनी नगर में माँ विंध्यवासिनी मंदिर में श्रद्धा और भक्ति के साथ भव्य महाआरती का आयोजन किया गया। इस दिव्य दरबार में भक्तों ने जयकारों, दीपों और पूजा-अर्चना के साथ माँ विंध्याचल महारानी का आशीर्वाद प्राप्त किया और अपनी सुख-समृद्धि की कामना की।1