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विश्व शिक्षा का तीर्थ है आक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी- एड. अख्तर खान "अकेला " ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी, ऑक्सफोर्ड यूँ तो किसी के लिये काला अक्षर भैंस बराबर ज़ीरो है, तो किसी के लिये हीरो है, जी हां पर्यटन की दृष्टि से ऑक्सफोर्ड ज़िरो हो सकता है, लेकिन जिज्ञासु, कलाकार, रिसर्च स्कॉलर, शिक्षाविद, प्रबुद्ध लोगों के लिये ऑक्सफोर्ड, भारत के तक्षिला, नालन्दा की तरह, विश्व शिक्षा का तीर्थ है, मंदिर है, मदरसा है, अल्लाह का शुक्र में शिक्षा के इस तीर्थ से रूबरू हुआ, मुझे खुशी है के भारत , भारत की सँस्कृति, संस्कृत और भारतीयों से ऑक्सफोर्ड का सकारात्मक एकेडमिक सम्बन्ध रहा है, खुशी की बात यह भी है कि भारत के दो पूर्व प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी, मनमोहन सिंह अर्थ शास्त्री ने यही ऑक्सफोर्ड में शिक्षा प्राप्त की थी, विश्व शिक्षा की रैंकिंग पर आज भी ऑक्सफ़ोर्ड सर्वश्रेष्ठ ओर प्रथम रैंकिंग पर है,, ऑक्सफोर्ड और भारत का सम्बन्ध केवल भारतीय विद्यार्थियों के पढ़ने तक सीमित नहीं है; यह लगभग 450 वर्षों से अधिक पुराना, और शिक्षा, संस्कृत-अध्ययन, भारतीय इतिहास-संस्कृति, औपनिवेशिक प्रशासन, स्वतंत्रता आंदोलन तथा आधुनिक शोध-सहयोग तक फैला हुआ सम्बन्ध है। भारत और ऑक्सफोर्ड का ऐतिहासिक , पहला सम्बन्ध 1580 से है, ऑक्सफोर्ड के अनुसार भारत से उसका शुरुआती दर्ज सम्बन्ध 1580 में मिलता है, जब Oxford के New College से जुड़े Thomas Stephens भारत पहुँचे। वे गोवा में रहे और भारतीय भाषाओं तथा संस्कृति से जुड़े लेखन के लिए जाने गए। इसके बाद Oxford के अनेक विद्वानों और विद्यार्थियों का भारत से सम्बन्ध बढ़ा। 17वीं शताब्दी में Edward Terry और Thomas Roe जैसे Oxford से जुड़े लोगों ने भारत की यात्राओं और अनुभवों पर लेखन किया। . संस्कृत और भारतीय अध्ययन मामले में 1832 में भारत से Oxford का सबसे महत्वपूर्ण शैक्षणिक सम्बन्ध संस्कृत-अध्ययन से बना। 1832 में Oxford ने Boden Professorship of Sanskrit स्थापित की। बाद में Sir Monier Monier-Williams इस क्षेत्र के सबसे महत्वपूर्ण विद्वान बने। उनका उद्देश्य भारत की भाषाओं, धर्मों, साहित्य और संस्कृति का व्यवस्थित अध्ययन Oxford में विकसित करना था। Oxford का Indian Institute — एक ऐतिहासिक मील का पत्थर रहा, भारत और Oxford के रिश्ते की सबसे दिखाई देने वाली निशानी थी: Indian Institute, Broad Street, Oxford Monier Monier-Williams ने 1875 में इसके निर्माण का प्रस्ताव रखा। इसके लिए भारत के राजाओं, भारतीय दानदाताओं तथा ब्रिटिश अधिकारियों से धन जुटाया गया। ,1883 में इसकी foundation stone रखी गई और भवन का विकास 1880 के दशक में हुआ; पूरा भवन 1896 में सम्पन्न हुआ। इसका उद्देश्य था— भारतीय भाषाओं का अध्ययन भारतीय साहित्य भारतीय धर्म और दर्शन भारतीय इतिहास भारतीय कानून भारतीय समाज एवं संस्कृति Indian Civil Service के उम्मीदवारों का प्रशिक्षण था, अर्थात Oxford में भारत के लिए एक पूरा संस्थागत अध्ययन-केंद्र बनाया गया था। आज इस ऐतिहासिक भवन में Oxford Martin School है। भारतीय Institute की पुस्तकों और संग्रह का बड़ा हिस्सा बाद में Bodleian Library तथा Ashmolean Museum में चला गया। भारतीय विद्यार्थियों का Oxford में प्रवेश एक बहुत महत्वपूर्ण तथ्य है कि पहले भारतीय विद्यार्थी 1871 में Oxford पहुँचे। Oxford University उस समय Oxford में धार्मिक और सामाजिक प्रतिबंधों के कारण भारतीयों के लिए प्रवेश आसान नहीं था। 1871 के बाद विश्वविद्यालय धीरे-धीरे अधिक व्यापक रूप से भारतीय विद्यार्थियों के लिए खुला, इसके बाद भारतीय विद्यार्थी Oxford के विभिन्न Colleges में आने लगे। Cornelia Sorabji — भारतीय महिलाओं के लिए ऐतिहासिक कदम भारत-Oxford सम्बन्ध में Cornelia Sorabji का नाम अत्यंत महत्वपूर्ण है। वे 1889 में Somerville College आईं और Oxford में पढ़ने वाली पहली भारतीय महिला बनीं। उन्होंने कानून का अध्ययन किया और आगे चलकर भारत की पहली महिला वकील के रूप में ऐतिहासिक पहचान बनाई। उनका जीवन भारतीय महिलाओं की उच्च शिक्षा और कानूनी अधिकारों के इतिहास में बहुत महत्वपूर्ण है। इंदिरा गांधी और Oxford Indira Gandhi ने Oxford के Somerville College में अध्ययन किया। वे बाद में भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री बनीं। Somerville College का भारत से विशेष सम्बन्ध आज भी माना जाता है—Cornelia Sorabji और Indira Gandhi दोनों इसकी सबसे प्रसिद्ध भारतीय alumnae में हैं। डॉ. मनमोहन सिंह Manmohan Singh का Oxford से गहरा academic सम्बन्ध रहा। वे Oxford में उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले भारत के सबसे प्रसिद्ध अर्थशास्त्रियों में रहे और आगे चलकर भारत के प्रधानमंत्री बने। Oxford की India profile उन्हें अपने प्रमुख भारतीय alumni में शामिल करती है। साहित्य और कला में भारतीय Oxfordians भारत से Oxford का सम्बन्ध राजनीति तक सीमित नहीं रहा। प्रमुख भारतीय Oxford alumni में: Vikram Seth — विश्व प्रसिद्ध उपन्यासकार Amitav Ghosh — प्रसिद्ध भारतीय अंग्रेजी लेखक Girish Karnad — नाटककार और अभिनेता Soha Ali Khan — अभिनेत्री Mansur Ali Khan Pataudi — भारतीय क्रिकेट कप्तान शामिल हैं, Oxford और भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन का रिश्ता, यह सम्बन्ध थोड़ा जटिल भी है। एक तरफ Oxford ने ब्रिटिश साम्राज्य के लिए Indian Civil Service के अधिकारियों को तैयार किया। दूसरी तरफ Oxford भारतीय राष्ट्रवादी विचारों और औपनिवेशिक शासन के विरोध का भी महत्वपूर्ण बौद्धिक स्थान बना। उदाहरण के लिए Lala Har Dayal Oxford में पढ़े और बाद में प्रमुख anticolonial activist बने। वे St John's College में 1905 में दाखिल हुए और Oxford में Sanskrit तथा debating activities से जुड़े रहे। Oxford से जुड़े भारतीय और ब्रिटिश intellectual circles में भारत की स्वतंत्रता, स्वशासन और साम्राज्यवाद पर तीखी बहसें होती थीं। डॉ. राधाकृष्णन — भारत और Oxford के बीच बौद्धिक पुल Sarvepalli Radhakrishnan का सम्बन्ध विशेष रूप से उल्लेखनीय है। वे Oxford में Spalding Professor of Eastern Religions and Ethics रहे—1936 से 1952 तक। उन्होंने भारतीय दर्शन और पूर्वी धार्मिक विचारों को Oxford तथा पश्चिमी academic दुनिया में प्रस्तुत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी मृत्यु के बाद उनके द्वारा छोड़ी गई राशि से Radhakrishnan Bequest बना, जो Oxford में Indian Studies के विद्वानों और व्याख्यानों को समर्थन देता है। Oxford–India सम्बन्ध आज सम्बन्ध औपनिवेशिक दौर से बिल्कुल अलग रूप ले चुका है।अब प्रमुख क्षेत्र हैं: भारत ↔ Oxford संयुक्त scientific research चिकित्सा,public health, climate change, environment, sustainable, development, economics, law, artificial intelligence, Indian history, South Asian studies education,व social sciences,व Oxford की India-Oxford Initiative (IndOx) ने IIT Delhi, IIT Gandhinagar, IISER Pune, IIM Ahmedabad, CMC और अन्य भारतीय संस्थानों के साथ research collaborations विकसित किए हैं। Oxford India Centre for Sustainable Development विशेष रूप से महत्वपूर्ण है Oxford India Centre for Sustainable Development, जो Somerville College से जुड़ा है। यह भारत से आने वाले, postgraduate scholars को समर्थन देता है और भारत के सामने मौजूद विषयों पर शोध करता है, जैसे: पानी, खाद्य सुरक्षा, पर्यावरण, स्वास्थ्य, gender equality sustainable development, भारत ने भी Oxford को केवल विद्यार्थी नहीं दिए—भारतीय राजाओं, दानदाताओं, विद्वानों और शिक्षाविदों ने Oxford के भारतीय अध्ययन को आर्थिक और बौद्धिक रूप से मजबूत किया। Indian Institute के लिए भारतीय रियासतों और भारतीय दानदाताओं से बड़ी धनराशि आई थी। इसलिए Oxford–India सम्बन्ध को केवल “अंग्रेजों ने भारत पर शासन किया और भारतीय Oxford में पढ़े” के रूप में देखना अधूरा होगा। यह सम्बन्ध संस्कृत और भारतीय दर्शन से शुरू होकर औपनिवेशिक प्रशासन, भारतीय राष्ट्रवाद, स्वतंत्र भारत के नेताओं, साहित्यकारों और आज के संयुक्त वैज्ञानिक शोध तक पहुँचा है,,, अख़्तर खान अकेला कोटा राजस्थान 9829086339

5 hrs ago
user_Journalist Harish Yadav
Journalist Harish Yadav
Social Media Manager Ladpura, Kota•
5 hrs ago

विश्व शिक्षा का तीर्थ है आक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी- एड. अख्तर खान "अकेला " ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी, ऑक्सफोर्ड यूँ तो किसी के लिये काला अक्षर भैंस बराबर ज़ीरो है, तो किसी के लिये हीरो है, जी हां पर्यटन की दृष्टि से ऑक्सफोर्ड ज़िरो हो सकता है, लेकिन जिज्ञासु, कलाकार, रिसर्च स्कॉलर, शिक्षाविद, प्रबुद्ध लोगों के लिये ऑक्सफोर्ड, भारत के तक्षिला, नालन्दा की तरह, विश्व शिक्षा का तीर्थ है, मंदिर है, मदरसा है, अल्लाह का शुक्र में शिक्षा के इस तीर्थ से रूबरू हुआ, मुझे खुशी है के भारत , भारत की सँस्कृति, संस्कृत और भारतीयों से ऑक्सफोर्ड का सकारात्मक एकेडमिक सम्बन्ध रहा है, खुशी की बात यह भी है कि भारत के दो पूर्व प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी, मनमोहन सिंह अर्थ शास्त्री ने यही ऑक्सफोर्ड में शिक्षा प्राप्त की थी, विश्व शिक्षा की रैंकिंग पर आज भी ऑक्सफ़ोर्ड सर्वश्रेष्ठ ओर प्रथम रैंकिंग पर है,, ऑक्सफोर्ड और भारत का सम्बन्ध केवल भारतीय विद्यार्थियों के पढ़ने तक सीमित नहीं है; यह लगभग 450 वर्षों से अधिक पुराना, और शिक्षा, संस्कृत-अध्ययन, भारतीय इतिहास-संस्कृति, औपनिवेशिक प्रशासन, स्वतंत्रता आंदोलन तथा आधुनिक शोध-सहयोग तक फैला हुआ सम्बन्ध है। भारत और ऑक्सफोर्ड का ऐतिहासिक , पहला सम्बन्ध 1580 से है, ऑक्सफोर्ड के अनुसार भारत से उसका शुरुआती दर्ज सम्बन्ध 1580 में मिलता है, जब Oxford के New College से जुड़े Thomas Stephens भारत पहुँचे। वे गोवा में रहे और भारतीय भाषाओं तथा संस्कृति से जुड़े लेखन के लिए जाने गए। इसके बाद Oxford के अनेक विद्वानों और विद्यार्थियों का भारत से सम्बन्ध बढ़ा। 17वीं शताब्दी में Edward Terry और Thomas Roe जैसे Oxford से जुड़े लोगों ने भारत की यात्राओं और अनुभवों पर लेखन किया। . संस्कृत और भारतीय अध्ययन मामले में 1832 में भारत से Oxford का सबसे महत्वपूर्ण शैक्षणिक सम्बन्ध संस्कृत-अध्ययन से बना। 1832 में Oxford ने Boden Professorship of Sanskrit स्थापित की। बाद में Sir Monier Monier-Williams इस क्षेत्र के सबसे महत्वपूर्ण विद्वान बने। उनका उद्देश्य भारत की भाषाओं, धर्मों, साहित्य और संस्कृति का व्यवस्थित अध्ययन Oxford में विकसित करना था। Oxford का Indian Institute — एक ऐतिहासिक मील का पत्थर रहा, भारत और Oxford के रिश्ते की सबसे दिखाई देने वाली निशानी थी: Indian Institute, Broad Street, Oxford Monier Monier-Williams ने 1875 में इसके निर्माण का प्रस्ताव रखा। इसके लिए भारत के राजाओं, भारतीय दानदाताओं तथा ब्रिटिश अधिकारियों से धन जुटाया गया। ,1883 में इसकी foundation stone रखी गई और भवन का विकास 1880 के दशक में हुआ; पूरा भवन 1896 में सम्पन्न हुआ। इसका उद्देश्य था— भारतीय भाषाओं का अध्ययन भारतीय साहित्य भारतीय धर्म और दर्शन भारतीय इतिहास भारतीय कानून भारतीय समाज एवं संस्कृति Indian Civil Service के उम्मीदवारों का प्रशिक्षण था, अर्थात Oxford में भारत के लिए एक पूरा संस्थागत अध्ययन-केंद्र बनाया गया था। आज इस ऐतिहासिक भवन में Oxford Martin School है। भारतीय Institute की पुस्तकों और संग्रह का बड़ा हिस्सा बाद में Bodleian Library तथा Ashmolean Museum में चला गया। भारतीय विद्यार्थियों का Oxford में प्रवेश एक बहुत महत्वपूर्ण तथ्य है कि पहले भारतीय विद्यार्थी 1871 में Oxford पहुँचे। Oxford University उस समय Oxford में धार्मिक और सामाजिक प्रतिबंधों के कारण भारतीयों के लिए प्रवेश आसान नहीं था। 1871 के बाद विश्वविद्यालय धीरे-धीरे अधिक व्यापक रूप से भारतीय विद्यार्थियों के लिए खुला, इसके बाद भारतीय विद्यार्थी Oxford के विभिन्न Colleges में आने लगे। Cornelia Sorabji — भारतीय महिलाओं के लिए ऐतिहासिक कदम भारत-Oxford सम्बन्ध में Cornelia Sorabji का नाम अत्यंत महत्वपूर्ण है। वे 1889 में Somerville College आईं और Oxford में पढ़ने वाली पहली भारतीय महिला बनीं। उन्होंने कानून का अध्ययन किया और आगे चलकर भारत की पहली महिला वकील के रूप में ऐतिहासिक पहचान बनाई। उनका जीवन भारतीय महिलाओं की उच्च शिक्षा और कानूनी अधिकारों के इतिहास में बहुत महत्वपूर्ण है। इंदिरा गांधी और Oxford Indira Gandhi ने Oxford के Somerville College में अध्ययन किया। वे बाद में भारत की पहली महिला प्रधानमंत्री बनीं। Somerville College का भारत से विशेष सम्बन्ध आज भी माना जाता है—Cornelia Sorabji और Indira Gandhi दोनों इसकी सबसे प्रसिद्ध भारतीय alumnae में हैं। डॉ. मनमोहन सिंह Manmohan Singh का Oxford से गहरा academic सम्बन्ध रहा। वे Oxford में उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले भारत के सबसे प्रसिद्ध अर्थशास्त्रियों में रहे और आगे चलकर भारत के प्रधानमंत्री बने। Oxford की India profile उन्हें अपने प्रमुख भारतीय alumni में शामिल करती है। साहित्य और कला में भारतीय Oxfordians भारत से Oxford का सम्बन्ध राजनीति तक सीमित नहीं रहा। प्रमुख भारतीय Oxford alumni में: Vikram Seth — विश्व प्रसिद्ध उपन्यासकार Amitav Ghosh — प्रसिद्ध भारतीय अंग्रेजी लेखक Girish Karnad — नाटककार और अभिनेता Soha Ali Khan — अभिनेत्री Mansur Ali Khan Pataudi — भारतीय क्रिकेट कप्तान शामिल हैं, Oxford और भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन का रिश्ता, यह सम्बन्ध थोड़ा जटिल भी है। एक तरफ Oxford ने ब्रिटिश साम्राज्य के लिए Indian Civil Service के अधिकारियों को तैयार किया। दूसरी तरफ Oxford भारतीय राष्ट्रवादी विचारों और औपनिवेशिक शासन के विरोध का भी महत्वपूर्ण बौद्धिक स्थान बना। उदाहरण के लिए Lala Har Dayal Oxford में पढ़े और बाद में प्रमुख anticolonial activist बने। वे St John's College में 1905 में दाखिल हुए और Oxford में Sanskrit तथा debating activities से जुड़े रहे। Oxford से जुड़े भारतीय और ब्रिटिश intellectual circles में भारत की स्वतंत्रता, स्वशासन और साम्राज्यवाद पर तीखी बहसें होती थीं। डॉ. राधाकृष्णन — भारत और Oxford के बीच बौद्धिक पुल Sarvepalli Radhakrishnan का सम्बन्ध विशेष रूप से उल्लेखनीय है। वे Oxford में Spalding Professor of Eastern Religions and Ethics रहे—1936 से 1952 तक। उन्होंने भारतीय दर्शन और पूर्वी धार्मिक विचारों को Oxford तथा पश्चिमी academic दुनिया में प्रस्तुत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी मृत्यु के बाद उनके द्वारा छोड़ी गई राशि से Radhakrishnan Bequest बना, जो Oxford में Indian Studies के विद्वानों और व्याख्यानों को समर्थन देता है। Oxford–India सम्बन्ध आज सम्बन्ध औपनिवेशिक दौर से बिल्कुल अलग रूप ले चुका है।अब प्रमुख क्षेत्र हैं: भारत ↔ Oxford संयुक्त scientific research चिकित्सा,public health, climate change, environment, sustainable, development, economics, law, artificial intelligence, Indian history, South Asian studies education,व social sciences,व Oxford की India-Oxford Initiative (IndOx) ने IIT Delhi, IIT Gandhinagar, IISER Pune, IIM Ahmedabad, CMC और अन्य भारतीय संस्थानों के साथ research collaborations विकसित किए हैं। Oxford India Centre for Sustainable Development विशेष रूप से महत्वपूर्ण है Oxford India Centre for Sustainable Development, जो Somerville College से जुड़ा है। यह भारत से आने वाले, postgraduate scholars को समर्थन देता है और भारत के सामने मौजूद विषयों पर शोध करता है, जैसे: पानी, खाद्य सुरक्षा, पर्यावरण, स्वास्थ्य, gender equality sustainable development, भारत ने भी Oxford को केवल विद्यार्थी नहीं दिए—भारतीय राजाओं, दानदाताओं, विद्वानों और शिक्षाविदों ने Oxford के भारतीय अध्ययन को आर्थिक और बौद्धिक रूप से मजबूत किया। Indian Institute के लिए भारतीय रियासतों और भारतीय दानदाताओं से बड़ी धनराशि आई थी। इसलिए Oxford–India सम्बन्ध को केवल “अंग्रेजों ने भारत पर शासन किया और भारतीय Oxford में पढ़े” के रूप में देखना अधूरा होगा। यह सम्बन्ध संस्कृत और भारतीय दर्शन से शुरू होकर औपनिवेशिक प्रशासन, भारतीय राष्ट्रवाद, स्वतंत्र भारत के नेताओं, साहित्यकारों और आज के संयुक्त वैज्ञानिक शोध तक पहुँचा है,,, अख़्तर खान अकेला कोटा राजस्थान 9829086339

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  • रीति-रिवाज और भक्ति के रंग में निकली तीज माता की सवारी बूंदी की ऐतिहासिक एवं प्रसिद्ध कजली तीज महोत्सव के तहत मंगलवार को तीज माता की भव्य सवारी धार्मिक आस्था, लोक संस्कृति और राजस्थानी परंपराओं के रंग में सराबोर होकर निकली। तीज माता की सवारी को लेकर शहर में दिनभर उत्साह और उल्लास का माहौल रहा। सवारी के मार्ग में बड़ी संख्या में महिला-पुरुष श्रद्धालु उमड़े और जगह-जगह तीज माता के दर्शन कर पूजा-अर्चना की। तीज माता की सवारी में अनेक आकर्षक झांकियां शामिल रहीं। सजी-धजी गाड़ियों, हाथी, रथ, डीजे, बैंड-बाजे सहित विभिन्न झांकियों ने शोभायात्रा को भव्य रूप प्रदान किया। विष्णु भगवान, हनुमानजी तथा राधा-कृष्ण की आकर्षक झांकियां श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहीं। राजस्थानी संस्कृति की झलक भी सवारी में देखने को मिली। पारंपरिक वेशभूषा में महिलाओं के नृत्य और लोक संस्कृति की प्रस्तुतियों ने राह चलते लोगों को भी अपनी ओर आकर्षित किया। नगर परिषद की ओर से आयोजित कजली तीज महोत्सव में इस बार आयोजन को धार्मिक परंपरा और सांस्कृतिक स्वरूप के साथ आगे बढ़ाने का प्रयास दिखाई दिया। कजली तीज की सवारी के दौरान शहर के बाजारों और प्रमुख मार्गों पर लोगों की भीड़ रही। तीज माता के जयकारों, ढोल-नगाड़ों, बैंड-बाजों और राजस्थानी लोकधुनों से शहर का वातावरण भक्तिमय एवं उत्सवी बना रहा।
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    रीति-रिवाज और भक्ति के रंग में निकली तीज माता की सवारी 
बूंदी की ऐतिहासिक एवं प्रसिद्ध कजली तीज महोत्सव के तहत मंगलवार को तीज माता की भव्य सवारी धार्मिक आस्था, लोक संस्कृति और राजस्थानी परंपराओं के रंग में सराबोर होकर निकली। तीज माता की सवारी को लेकर शहर में दिनभर उत्साह और उल्लास का माहौल रहा। सवारी के मार्ग में बड़ी संख्या में महिला-पुरुष श्रद्धालु उमड़े और जगह-जगह तीज माता के दर्शन कर पूजा-अर्चना की।
तीज माता की सवारी में अनेक आकर्षक झांकियां शामिल रहीं। सजी-धजी गाड़ियों, हाथी, रथ, डीजे, बैंड-बाजे सहित विभिन्न झांकियों ने शोभायात्रा को भव्य रूप प्रदान किया। विष्णु भगवान, हनुमानजी तथा राधा-कृष्ण की आकर्षक झांकियां श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहीं। राजस्थानी संस्कृति की झलक भी सवारी में देखने को मिली। पारंपरिक वेशभूषा में महिलाओं के नृत्य और लोक संस्कृति की प्रस्तुतियों ने राह चलते लोगों को भी अपनी ओर आकर्षित किया।
नगर परिषद की ओर से आयोजित कजली तीज महोत्सव में इस बार आयोजन को धार्मिक परंपरा और सांस्कृतिक स्वरूप के साथ आगे बढ़ाने का प्रयास दिखाई दिया। कजली तीज की सवारी के दौरान शहर के बाजारों और प्रमुख मार्गों पर लोगों की भीड़ रही। तीज माता के जयकारों, ढोल-नगाड़ों, बैंड-बाजों और राजस्थानी लोकधुनों से शहर का वातावरण भक्तिमय एवं उत्सवी बना रहा।
    user_Journalist Harish Yadav
    Journalist Harish Yadav
    Social Media Manager Ladpura, Kota•
    7 hrs ago
  • 16 बा महाधिवेशन एवं कोटा का द्वितीय अधिवेशन की जानकारी आयोजन समिति के अध्यक्ष ने चर्चा करते हुए प्रांतीय अध्यक्ष और व्यापार संघ के महासचिव अशोक माहेश्वरी ने पत्रकारों को जानकारी दी।
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    16 बा महाधिवेशन एवं कोटा का द्वितीय अधिवेशन की जानकारी आयोजन समिति के अध्यक्ष ने चर्चा करते हुए प्रांतीय अध्यक्ष और व्यापार संघ के महासचिव अशोक माहेश्वरी ने पत्रकारों को जानकारी दी।
    user_रमेश गांधी
    रमेश गांधी
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    7 hrs ago
  • छतरपुर में तीन घंटे तक एंबुलेंस का इंतज़ार करती रही प्रसूता डबल इंजन की सरकार वाले राज्य की हालत: एम्बुलेंस नहीं मिली, तो खाट बनी 'जननी एक्सप्रेस': छतरपुर में प्रसूता तीन घंटे तक एंबुलेंस का इंतज़ार करती रही, लेकिन एंबुलेंस नहीं पहुंची: मजबूर परिजनों को 2 किलोमीटर कीचड़ में पैदल चलकर खाट पर प्रसूता को अस्पताल पहुंचाना पड़ा...
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    छतरपुर में तीन घंटे तक एंबुलेंस का इंतज़ार करती रही प्रसूता
डबल इंजन की सरकार वाले राज्य की हालत: एम्बुलेंस नहीं मिली, तो खाट बनी 'जननी एक्सप्रेस': छतरपुर में प्रसूता तीन घंटे तक एंबुलेंस का इंतज़ार करती रही, लेकिन एंबुलेंस  नहीं पहुंची: मजबूर परिजनों को 2 किलोमीटर कीचड़ में पैदल चलकर खाट पर प्रसूता को अस्पताल पहुंचाना पड़ा...
    user_Ahmed Siraj Farooqi
    Ahmed Siraj Farooqi
    रिपोर्टर लाडपुरा, कोटा, राजस्थान•
    23 hrs ago
  • छबड़ा में खाद का महासंकट! आधी रात से कतारों में खड़े अन्नदाता, सिस्टम बेखबर! 🚜💔
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    छबड़ा में खाद का महासंकट! आधी रात से कतारों में खड़े अन्नदाता, सिस्टम बेखबर! 🚜💔
    user_Naval suman Ajmera
    Naval suman Ajmera
    बारां, बारां, राजस्थान•
    3 hrs ago
  • धाकड़ समाज के आराध्य देव श्री धरणीधर भगवान का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया खानपुर,धाकड़ समाज के आराध्य देव श्री धरणीधर भगवान का जन्मोत्सव आज पूरे क्षेत्र में बड़ी श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। इस अवसर पर रास्ते में जगह जगह पुश वर्षा और समाजजनों द्वारा बधाई पोस्टर लगाए गए हैं।
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    धाकड़ समाज के आराध्य देव श्री धरणीधर भगवान का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया
खानपुर,धाकड़ समाज के आराध्य देव श्री धरणीधर भगवान का जन्मोत्सव आज पूरे क्षेत्र में बड़ी श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। इस अवसर पर रास्ते में जगह जगह पुश वर्षा और समाजजनों द्वारा बधाई पोस्टर लगाए गए हैं।
    user_Ram raj Nagar
    Ram raj Nagar
    Local News Reporter खानपुर, झालावाड़, राजस्थान•
    5 hrs ago
  • झालावाड _दुग्ध विक्रेताओं ने किया प्रदर्शन, मिनी सचिवालय कलेक्ट्रेट पर की नारेबाजी,दूध की खरीद 12 रूपये फैट से करने की मांग,दूध की दुकानो पर भी 10 रूपये प्रति लीटर बढाये दाम,आज से बढी हुई कीमते लागू करने की दी सूचना,कम कीमत पर दूध बेचने वाले विक्रेता पर दुग्ध विक्रेता संघ लगाएगा जुर्माना,कहा पशु आहार सहित अन्य बढ़ते खर्च के चलते बढ़ानी पड़ रही है कीमतें । झालावाड़-जिले मे आज पशुपालको और किसान संघ ने दूध के दाम बढ़ाने की मांग को लेकर मिनी सचिवालय स्थित जिला कलेक्ट्रेट कार्यालय पर नारेबाजी कर प्रदर्शन किया। इस दौरान बड़ी संख्या में किसान और पशुपालक शहर के खंडिया क्षेत्र में इकट्ठा हुए और रैली के रूप में मिनी सचिवालय पहुंचे। यहां उन्होंने जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा और दूध के दामों में बढ़ोतरी के आदेश जारी करने की मांग की। पशुपालकों ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो कल से वे दूध का वितरण बंद कर देंगे। उन्होंने कहा कि सभी पशुपालक और किसान संघ धरने पर बैठेंगे, जिससे आम लोगों को परेशानी हो सकती है। दूध विक्रेता पशुपालक संघ ने ज्ञापन में बताया कि पशुपालन अब लगातार मुश्किल और महंगा होता जा रहा है। चारे की बढ़ती कीमतों ने उनकी परेशानी बढ़ा दी है। सूखा और हरा चारा, खल, चुनी और दाने जैसे पशु आहार के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। इसके अलावा पशुओं की चिकित्सा, डॉक्टर की फीस और रखरखाव का खर्च भी बढ़ गया है। ऐसे में पुराने दामों पर दूध बेचने से उन्हें लागत भी नहीं मिल पा रही है, जिससे परिवार चलाना मुश्किल हो रहा है। पशुपालकों ने सरकार से मांग की है कि उनके हितों को देखते हुए दूध और दुग्ध उत्पादों के नए और सही दाम तय किए जाएं। उन्होंने 12 रुपए प्रति लीटर फैट, गाय का दूध 80 रुपए प्रति लीटर और भैंस का दूध 100 रुपए प्रति लीटर करने की मांग की। इसके साथ ही देसी घी का दाम 1000 रुपए प्रति किलो और गाय के घी का दाम 1500 रुपए प्रति किलो तय करने की मांग भी रखी गई। पशुपालकों का कहना है कि दूध की दरों में बढ़ोतरी से उन्हें बढ़ती लागत से राहत मिलेगी। उन्होंने प्रशासन से अपील की है कि उनकी मांगों पर जल्द फैसला लेकर आदेश जारी किए जाएं।
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    झालावाड _दुग्ध विक्रेताओं ने किया प्रदर्शन, मिनी सचिवालय कलेक्ट्रेट पर की नारेबाजी,दूध की खरीद 12 रूपये फैट से करने की मांग,दूध की दुकानो पर भी 10 रूपये प्रति लीटर बढाये दाम,आज से बढी हुई कीमते लागू करने की दी सूचना,कम कीमत पर दूध बेचने वाले विक्रेता पर दुग्ध विक्रेता संघ लगाएगा जुर्माना,कहा पशु आहार सहित अन्य बढ़ते खर्च के चलते बढ़ानी पड़ रही है कीमतें ।
झालावाड़-जिले मे आज पशुपालको और किसान संघ ने दूध के दाम बढ़ाने की मांग को लेकर मिनी सचिवालय स्थित जिला कलेक्ट्रेट कार्यालय पर नारेबाजी कर प्रदर्शन किया। इस दौरान बड़ी संख्या में किसान और पशुपालक शहर के खंडिया क्षेत्र में इकट्ठा हुए और रैली के रूप में मिनी सचिवालय पहुंचे। यहां उन्होंने जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा और दूध के दामों में बढ़ोतरी के आदेश जारी करने की मांग की।
पशुपालकों ने चेतावनी दी है कि अगर उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो कल से वे दूध का वितरण बंद कर देंगे। उन्होंने कहा कि सभी पशुपालक और किसान संघ धरने पर बैठेंगे, जिससे आम लोगों को परेशानी हो सकती है।
दूध विक्रेता पशुपालक संघ ने ज्ञापन में बताया कि पशुपालन अब लगातार मुश्किल और महंगा होता जा रहा है। चारे की बढ़ती कीमतों ने उनकी परेशानी बढ़ा दी है। सूखा और हरा चारा, खल, चुनी और दाने जैसे पशु आहार के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। इसके अलावा पशुओं की चिकित्सा, डॉक्टर की फीस और रखरखाव का खर्च भी बढ़ गया है। ऐसे में पुराने दामों पर दूध बेचने से उन्हें लागत भी नहीं मिल पा रही है, जिससे परिवार चलाना मुश्किल हो रहा है।
पशुपालकों ने सरकार से मांग की है कि उनके हितों को देखते हुए दूध और दुग्ध उत्पादों के नए और सही दाम तय किए जाएं। उन्होंने 12 रुपए प्रति लीटर फैट, गाय का दूध 80 रुपए प्रति लीटर और भैंस का दूध 100 रुपए प्रति लीटर करने की मांग की।
इसके साथ ही देसी घी का दाम 1000 रुपए प्रति किलो और गाय के घी का दाम 1500 रुपए प्रति किलो तय करने की मांग भी रखी गई। पशुपालकों का कहना है कि दूध की दरों में बढ़ोतरी से उन्हें बढ़ती लागत से राहत मिलेगी। उन्होंने प्रशासन से अपील की है कि उनकी मांगों पर जल्द फैसला लेकर आदेश जारी किए जाएं।
    user_HARI MOHAN CHUDAWAT
    HARI MOHAN CHUDAWAT
    Local News Reporter झालरापाटन, झालावाड़, राजस्थान•
    14 hrs ago
  • वार्ड 19 में चुनावी घमासानः कांग्रेस से टिकट कटने के बाद निखिल गौतम बने निर्दलीय उम्मीदवार वार्ड 19 में चुनावी घमासानः कांग्रेस से टिकट कटने के बाद निखिल गौतम बने निर्दलीय उम्मीदवार, आधिकारिक प्रत्याशीयों की राह हुई मुश्किल * स्थानीय वार्ड 19 के चुनावी रण में मुकाबला बेहद रोचक और कड़ा हो गया है। कांग्रेस पार्टी से टिकट के प्रबल दावेदार माने जा रहे निखिल गौतम ने पार्टी द्वारा सिंबल न दिए जाने के बाद बगावती तेवर अपनाते हुए निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनावी मैदान में ताल ठोक दी है। निखिल गौतम के इस फैसले से वार्ड 19 के सियासी समीकरण पूरी तरह बदल गए हैं। बगावत से समीकरण बिगड़े, आधिकारिक उम्मीदवारो के लिए चुनौती लंबे समय से क्षेत्र में सक्रिय निखिल गौतम कांग्रेस से दावेदारी पेश कर रहे थे, लेकिन पार्टी की ओर से टिकट कटने के बाद उनके समर्थकों में नाराजगी देखी गई। समर्थकों के दबाव और स्थानीय पकड़ के दम पर उन्होंने निर्दलीय मैदान में उतरने का फैसला किया।
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    वार्ड 19 में चुनावी घमासानः कांग्रेस से टिकट कटने के बाद निखिल गौतम बने निर्दलीय उम्मीदवार
वार्ड 19 में चुनावी घमासानः कांग्रेस से टिकट कटने के बाद निखिल गौतम बने निर्दलीय उम्मीदवार, आधिकारिक प्रत्याशीयों की राह हुई मुश्किल *
स्थानीय वार्ड 19 के चुनावी रण में मुकाबला बेहद रोचक और कड़ा हो गया है। 
कांग्रेस पार्टी से टिकट के प्रबल दावेदार माने जा रहे निखिल गौतम ने पार्टी द्वारा सिंबल न दिए जाने के बाद बगावती तेवर अपनाते हुए निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनावी मैदान में ताल ठोक दी है। 
निखिल गौतम के इस फैसले से वार्ड 19 के सियासी समीकरण पूरी तरह बदल गए हैं। बगावत से समीकरण बिगड़े, आधिकारिक उम्मीदवारो के लिए चुनौती
लंबे समय से क्षेत्र में सक्रिय निखिल गौतम कांग्रेस से दावेदारी पेश कर रहे थे, लेकिन पार्टी की ओर से टिकट कटने के बाद उनके समर्थकों में नाराजगी देखी गई। 
समर्थकों के दबाव और स्थानीय पकड़ के दम पर उन्होंने निर्दलीय मैदान में उतरने का फैसला किया।
    user_Jitendra Kumar
    Jitendra Kumar
    Local News Reporter लाडपुरा, कोटा, राजस्थान•
    9 hrs ago
  • कोटा शहर में सबसे पहले भारतीय जनता पार्टी के बाड कमाक 44 के प्रत्याशी प्रेम सिंह गौड़ के कार्यालय का उद्धघाटन आज शहर अध्यक्ष राकेश जैन ने किया। उक्त अवसर पर पूर्व वरिष्ठ पषद राकेश पुटरा सहित सैकड़ो महिला पुरुष कार्यकर्ता उपस्थित थे।
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    कोटा शहर में सबसे पहले भारतीय जनता पार्टी के बाड कमाक 44 के प्रत्याशी प्रेम सिंह गौड़ के कार्यालय का उद्धघाटन आज शहर अध्यक्ष राकेश जैन ने किया।
 उक्त अवसर पर पूर्व वरिष्ठ पषद राकेश पुटरा सहित सैकड़ो महिला पुरुष कार्यकर्ता उपस्थित थे।
    user_रमेश गांधी
    रमेश गांधी
    लाडपुरा, कोटा, राजस्थान•
    1 day ago
  • 🚨 ब्रेकिंग न्यूज़ | छबड़ा 12–15 घंटे लाइन में किसान, फिर भी खाद नहीं—जवाबदेह कौन? 🚨 ब्रेकिंग न्यूज़ | छबड़ा 12–15 घंटे लाइन में किसान, फिर भी खाद नहीं—जवाबदेह कौन? 📍 छबड़ा में खाद वितरण व्यवस्था पर गंभीर सवाल खाद लेने के लिए किसान सुबह से लंबी कतारों में खड़े हैं। कई किसान 12 से 15 घंटे तक इंतजार करने के बाद भी खाद मिलने से वंचित रह जाने का दावा कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि पहले दिन घंटों लाइन में लगने के बाद भी नंबर नहीं आता और अगले दिन फिर उसी कतार में लगना पड़ता है। इस दौरान कई किसानों के QR Code की वैधता समाप्त होने की बात भी सामने आ रही है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब किसानों को घंटों लाइन में लगना पड़ रहा है, तो खाद वितरण की ऐसी व्यवस्था क्यों नहीं बनाई गई कि हर पात्र किसान को व्यवस्थित तरीके से खाद मिल सके? ❓ क्या लाइन में लगने का कोई स्पष्ट नियम है? ❓ किसान को खाद मिलने की गारंटी कौन देगा? ❓ QR Code की वैधता खत्म होने पर किसान की जिम्मेदारी कौन लेगा? ❓ घंटों इंतजार के बावजूद खाद नहीं मिलने की जवाबदेही किसकी है?
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    🚨 ब्रेकिंग न्यूज़ | छबड़ा

12–15 घंटे लाइन में किसान, फिर भी खाद नहीं—जवाबदेह कौन?
🚨 ब्रेकिंग न्यूज़ | छबड़ा
12–15 घंटे लाइन में किसान, फिर भी खाद नहीं—जवाबदेह कौन?
📍 छबड़ा में खाद वितरण व्यवस्था पर गंभीर सवाल
खाद लेने के लिए किसान सुबह से लंबी कतारों में खड़े हैं। कई किसान 12 से 15 घंटे तक इंतजार करने के बाद भी खाद मिलने से वंचित रह जाने का दावा कर रहे हैं।
किसानों का कहना है कि पहले दिन घंटों लाइन में लगने के बाद भी नंबर नहीं आता और अगले दिन फिर उसी कतार में लगना पड़ता है। इस दौरान कई किसानों के QR Code की वैधता समाप्त होने की बात भी सामने आ रही है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब किसानों को घंटों लाइन में लगना पड़ रहा है, तो खाद वितरण की ऐसी व्यवस्था क्यों नहीं बनाई गई कि हर पात्र किसान को व्यवस्थित तरीके से खाद मिल सके?
❓ क्या लाइन में लगने का कोई स्पष्ट नियम है?
❓ किसान को खाद मिलने की गारंटी कौन देगा?
❓ QR Code की वैधता खत्म होने पर किसान की जिम्मेदारी कौन लेगा?
❓ घंटों इंतजार के बावजूद खाद नहीं मिलने की जवाबदेही किसकी है?
    user_Naval suman Ajmera
    Naval suman Ajmera
    बारां, बारां, राजस्थान•
    10 hrs ago
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