“वन दरोगा पर ‘हरियाली हत्या’ का आरोप: जुर्माने की रसीद से ढका गया पेड़ों का कत्ल!” “रेंजर बेखबर, दरोगा ‘एक्टिव’—शंकरगढ़ में आम के बाग उजड़े, सिस्टम पर उठे गंभीर सवाल”। शंकरगढ़,प्रयागराज। यमुनानगर क्षेत्र के शंकरगढ़ ब्लॉक अंतर्गत ग्राम पंचायत मवैया पहलवान के मौजा लोटना गांव से वन विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहां वर्षों पुराने हरे-भरे आम के पेड़ों को न केवल बेरहमी से काटा गया, बल्कि जेसीबी मशीनों से उनकी जड़ों तक उखाड़कर पूरे सबूत मिटाने की कोशिश की गई। ग्रामीणों का आरोप है कि यह कोई साधारण कटान नहीं, बल्कि पूरी तरह से सुनियोजित “हरियाली सफाया अभियान” था। पहले पेड़ों को काटा गया, फिर भारी मशीनों से जमीन खोदकर जड़ों को खत्म किया गया और बाद में ट्रैक्टरों से जमीन समतल कर दी गई, ताकि मौके पर कोई निशान तक न बचे। मामले ने उस समय और तूल पकड़ लिया जब प्रमोशन पाए वन दरोगा जितेंद्र पटेल ने सफाई देते हुए कहा कि पेड़ों की कटाई पर जुर्माना वसूला जा चुका है और उसकी रसीद भी काट दी गई है। लेकिन इसी प्रकरण पर जब वन क्षेत्राधिकारी (रेंजर) से बात की गई, तो उन्होंने साफ कहा कि उन्हें इस पूरे मामले की कोई जानकारी नहीं है और वे जांच कराएंगे।—अब सबसे बड़ा सवाल यही है— क्या बिना रेंजर की जानकारी के इतना बड़ा खेल संभव है? क्या जुर्माने की आड़ में अवैध कटान को वैध बनाया जा रहा है? ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि क्षेत्र में लकड़हारों को खुला संरक्षण दिया जा रहा है और जिम्मेदार अधिकारी जानबूझकर आंखें मूंदे हुए हैं। गांव की चौपालों में अब यह चर्चा आम हो गई है कि “दाल में काला नहीं, पूरी दाल ही काली है।” यह पूरा मामला वन विभाग के अधिकारियों—डीएफओ, डीसीएफ, रेंजर और वन दरोगा—की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। एक ओर दरोगा जुर्माने की बात कर रहे हैं, तो दूसरी ओर रेंजर अनभिज्ञता जता रहे हैं—यह या तो गंभीर लापरवाही है या फिर किसी बड़े खेल की ओर इशारा। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में वृक्ष संरक्षण को लेकर स्पष्ट संदेश दिया था कि “एक पेड़, दस पुत्र समान होता है”। लेकिन शंकरगढ़ में जिस तरह से हरे-भरे पेड़ों का सफाया किया गया, वह इस संदेश की खुली अनदेखी है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि— रेंजर की जांच आखिर कहां तक पहुंची?—क्या जांच सिर्फ कागजों में चल रही है या सच में दोषियों तक पहुंचेगी? फिलहाल,निगाहें जिला प्रशासन और वन विभाग के उच्च अधिकारियों पर टिकी हैं। देखना यह है कि इस “हरियाली कत्ल” पर सख्त कार्रवाई होती है या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।
“वन दरोगा पर ‘हरियाली हत्या’ का आरोप: जुर्माने की रसीद से ढका गया पेड़ों का कत्ल!” “रेंजर बेखबर, दरोगा ‘एक्टिव’—शंकरगढ़ में आम के बाग उजड़े, सिस्टम पर उठे गंभीर सवाल”। शंकरगढ़,प्रयागराज। यमुनानगर क्षेत्र के शंकरगढ़ ब्लॉक अंतर्गत ग्राम पंचायत मवैया पहलवान के मौजा लोटना गांव से वन विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहां वर्षों पुराने हरे-भरे आम के पेड़ों को न केवल बेरहमी से काटा गया, बल्कि जेसीबी मशीनों से उनकी जड़ों तक उखाड़कर पूरे सबूत मिटाने की कोशिश की गई। ग्रामीणों का आरोप है कि यह कोई साधारण कटान नहीं, बल्कि पूरी तरह से सुनियोजित “हरियाली सफाया अभियान” था। पहले पेड़ों को काटा गया, फिर भारी मशीनों से जमीन खोदकर जड़ों को खत्म किया गया और बाद में ट्रैक्टरों से जमीन समतल कर दी गई, ताकि मौके पर कोई निशान तक न बचे। मामले ने उस समय और तूल पकड़ लिया जब प्रमोशन पाए वन दरोगा जितेंद्र पटेल ने सफाई देते हुए कहा कि पेड़ों की कटाई पर जुर्माना वसूला जा चुका है और उसकी रसीद भी काट दी गई है। लेकिन इसी प्रकरण पर जब वन क्षेत्राधिकारी (रेंजर) से बात की गई, तो उन्होंने साफ कहा कि उन्हें इस पूरे मामले की कोई जानकारी नहीं है और वे जांच कराएंगे।—अब सबसे बड़ा सवाल यही है— क्या बिना रेंजर की जानकारी के इतना बड़ा खेल संभव है? क्या जुर्माने की आड़ में अवैध कटान को वैध बनाया जा रहा है? ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि क्षेत्र में लकड़हारों को खुला संरक्षण दिया जा रहा है और जिम्मेदार अधिकारी जानबूझकर आंखें मूंदे हुए हैं। गांव की चौपालों में अब यह चर्चा आम हो गई है कि “दाल में काला नहीं, पूरी दाल ही काली है।” यह पूरा मामला वन विभाग के अधिकारियों—डीएफओ, डीसीएफ, रेंजर और वन दरोगा—की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। एक ओर दरोगा जुर्माने की बात कर रहे हैं, तो दूसरी ओर रेंजर अनभिज्ञता जता रहे हैं—यह या तो गंभीर लापरवाही है या फिर किसी बड़े खेल की ओर इशारा। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाल ही में वृक्ष संरक्षण को लेकर स्पष्ट संदेश दिया था कि “एक पेड़, दस पुत्र समान होता है”। लेकिन शंकरगढ़ में जिस तरह से हरे-भरे पेड़ों का सफाया किया गया, वह इस संदेश की खुली अनदेखी है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि— रेंजर की जांच आखिर कहां तक पहुंची?—क्या जांच सिर्फ कागजों में चल रही है या सच में दोषियों तक पहुंचेगी? फिलहाल,निगाहें जिला प्रशासन और वन विभाग के उच्च अधिकारियों पर टिकी हैं। देखना यह है कि इस “हरियाली कत्ल” पर सख्त कार्रवाई होती है या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।
- Post by Shiva Pasi1
- प्रयागराज के नैनी में एक महिला से 4 लाख रुपए की ठगी करने पर आरोपी युवक की महिला के द्वारा चप्पलों से पिटाई का एक वीडीओ सामने आया है जो कि सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है बता दें कि वीडियो में महिला द्वारा युवक के ऊपर चप्पलों की बरसात की जा रही है वहीं आसपास के लोगों द्वारा युवक को पुलिस को सौंपने की बात भी कही जा रही है, वहीं अभी तक यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि वह युवक महिला से किन कारणों से पैसे लिया था जबकि कुछ लोगों का कहना है कि वह महिला की नौकरी लगवाने के नाम पर महिला से 4 लाख रूपए लिए थे और वहीं समय बीत जाने के बाद न तो नौकरी मिली और न ही पैसे जिससे नाराज़ महिला ने युवक को देखते ही आग बबूला हो गई और भरे बाज़ार में युवक की चप्पलों से पिटाई करना शुरू कर दिया। वही इस पिटाई का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।1
- प्रयागराज, कोरॉव। किसान की फसल जलकर हुई राख, खेत में अज्ञात कारणों से लगी आग।1
- Post by हिमांशु गुप्ता समाचार नेशन1
- प्रयागराज। जनपद में देर रात से ही झमाझम बारिश हो रही है। अचानक जनपद में मौसम ने अपना मिजाज बदला और आंधियो के साथ झमाझम बारिश हुई।1
- प्रयागराज पुलिस कमिश्नर के दिशा निर्देश में नारकोटिक्स टास्क फोर्स कमिश्नरेट प्रयागराजवा थाना धूमनगंज की संयुक्त पुलिस टीम द्वारा तीन अभियुक्त गिरफ्तार कब्जे से 6 पैकेट स्मैक कुल वजन 727 ग्राम अनुमानित अंतरराष्ट्रीय कीमत एक करोड़ 45 लाख 4 मोबाइल फोन 4940 नगद बरामद एक अवैध तमंचा 315 बोर जिंदा कारतूस बरामदअभियुक्त दीपक कुमार गौतम आशीष कुमार मौर्य विवेक कुमार प्रेस कॉन्फ्रेंस में डी सी पी कुलदीप गुनावत ने किया खुलासा1
- Post by गुरु ज्ञान1
- प्रयागराज। उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा आयोजित पांच दिवसीय भरत नाट्य समारोह का भव्य समापन मंगलवार को केंद्र प्रेक्षागृह में हुआ। अंतिम दिन महाकवि भवभूति रचित प्राचीन संस्कृत नाटक महावीरचरितम् का डॉ. हिमांशु द्विवेदी के निर्देशन और संगीत परिकल्पना में मंचन दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर गया। इस नाटक ने रामायण की अमर कथा को नाटकीय बिंबों, फ्लैशबैक और आधुनिक दृष्टिकोण से प्रस्तुत कर सबको तालियों के पुल बांधने पर मजबूर कर दिया। कार्यक्रम का आगाज मुख्य अतिथि प्रो. कीर्ति सिंह (इलाहाबाद विश्वविद्यालय), विशिष्ट अतिथि घनश्याम शाही (क्षेत्रीय संगठन मंत्री अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, पूर्वी उत्तर प्रदेश ), अभिलाष मिश्रा (काशी प्रांत संगठन मंत्री) एवं केंद्र निदेशक सुदेश शर्मा, उपनिदेशक (कार्यक्रम) डॉ. मुकेश उपाध्याय और उपनिदेशक (प्रशासन) डॉ. आदित्य कुमार श्रीवास्तव व कार्यक्रम सलाहकार कल्पना सहाय ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। मंच पर पारंपरिक संगीत और नृत्य ने वातावरण को पवित्र बना दिया। नाटक विश्वामित्र के यज्ञ महोत्सव से प्रारंभ होता है। जनक के छोटे भाई कुशध्वज उर्मिला व सीता संग पधारते हैं। राम-लक्ष्मण की उनसे भेंट में प्रेम का बीज अंकुरित होता है। तभी सर्वमाय नामक राक्षस माल्यवान के इशारे पर रावण का पत्र पढ़ता है, जिसमें सीता से विवाह का अहंकारी प्रस्ताव है। "यह अन्याय है!"—सर्वमाय क्रोधित होकर चीखता है। बीच में राम द्वारा अहल्या उद्धार, ताड़का-मारीच-सुबाहु वध के वृतांत रोमांचित करते हैं। विश्वामित्र राम को दिव्यास्त्र प्रदान करते हैं। शिवधनुष मंगवाकर राम उसे चूर-चूर कर देते हैं—रामायण की मूल कथा से हटकर यहां विवाह शर्त नहीं, विश्वामित्र की आज्ञा है। राम-सीता, लक्ष्मण-उर्मिला का विवाह धूमधाम से होता है। क्रोधित सर्वमाय माल्यवान को सूचना दे भागता है। षड्यंत्रों का नाटकीय मोड़ आता है। माल्यवान-सुरपनखा परशुराम को भड़काते हैं, लेकिन राम की सौम्यता से वे पिघल जाते हैं: "हे राम, यह धनुष लो, विजयी हो!" फ्लैशबैक में सुरपनखा मंथरा बनी कैकेयी को दो वर दिलवाती—राम का 14 वर्ष वनवास, भरत का राज्याभिषेक। राम प्रसन्नता से स्वीकारते हैं। जंगल में सीता हरण, जटायु वध, शबरी मिलन, बाली का राम-भक्त बनकर मृत्यु—सब चित्रित। रावण बाली भेजता है, लेकिन वह भक्त हो जाता है। मंदोदरी बार-बार समझाती है, "यह अधर्म है रावण!", पर वही अड़िग। युद्ध में राम विजयी, विभीषण को लंका सौंप अयोध्या लौटते हैं। कलाकारों ने अपने अभिनय से नाटक में जान डाल दी। अमिताभ आचार्य ने राम की भूमिका में गंभीरता दिखाई, वहीं अमन व्यास लक्ष्मण के रूप में जोश से भरे नजर आए। खुशी बघेल ने सीता के किरदार को बहुत ही सहजता से निभाया। शुभराज शुक्ला ने रावण और परशुराम दोनों किरदारों में दम दिखाया। सबसे ज्यादा ध्यान खींचा ऋतुराज चौहान ने, जिन्होंने मंथरा का किरदार निभाया। उनकी एक्टिंग इतनी प्रभावशाली रही कि दर्शक उनसे नजर नहीं हटा पाए। इस अवसर पर मुख्य अतिथि एवं नाट्य निर्देशक को केंद्र निदेशक द्वारा पौधा एवं अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का संचालन सुधांशु शुक्ला ने किया।1