बेतिया के मंडल कारा में बंद गोपालपुर थाना क्षेत्र निवासी भूलन साह (35) की जीएमसीएच बेतिया में इलाज के दौरान मौत हो गई, जिसके बाद उनके परिजनों ने उत्पाद विभाग के कर्मियों पर गिरफ्तारी के दौरान मारपीट करने का गंभीर आरोप लगाया है। परिजनों का दावा है कि इस मारपीट के कारण ही भूलन साह की तबीयत बिगड़ी और अंततः उनकी मृत्यु हो गई। प्राप्त जानकारी के अनुसार, उत्पाद विभाग ने 9 जून को भूलन साह को सिकटा थाना क्षेत्र से कथित तौर पर नशे की हालत में गिरफ्तार किया था और उन्हें मंडल कारा भेज दिया था। बताया गया कि 10 जून को जेल में उनकी तबीयत अचानक खराब हो गई, जिसके बाद कारा प्रशासन ने उन्हें जीएमसीएच बेतिया के इमरजेंसी वार्ड में भर्ती कराया। इलाज के दौरान 12 जून को करीब 1:30 बजे उनकी मौत हो गई, जिससे परिजनों में कोहराम मच गया। मृतक के परिजनों ने आरोप लगाया है कि उन्हें घटना की जानकारी समय पर नहीं दी गई और मृत्यु के बाद ही कारा प्रशासन द्वारा सूचित किया गया। परिजनों के अनुसार, 10 जून को ही भूलन साह की जमानत के लिए न्यायालय में आवेदन दिया गया था और जमानत राशि भी जमा कर दी गई थी। उन्होंने यह भी दावा किया कि 9 जून को भूलन साह अपने ससुराल मंगलपुर घरारी में जमीन खरीदने के सिलसिले में गए थे और उनके पास करीब दो लाख रुपये नकद थे, साथ ही एक मोबाइल फोन भी था, जो गिरफ्तारी के बाद से लापता है। घटना की सूचना मिलने पर पुलिस और अस्पताल प्रशासन ने शव को कब्जे में लेकर आवश्यक कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है। मामले में लगाए गए मारपीट और नकदी गायब होने के आरोपों तथा अन्य तथ्यों की जांच की जा रही है। मृतक की पत्नी लीलावती देवी ने बताया कि उनके तीन पुत्र हैं—प्रमोद कुमार (10 वर्ष), अखिलेश कुमार (8 वर्ष) एवं छबीला कुमार (6 वर्ष)। उन्होंने बताया कि भूलन साह मछली खरीद-बिक्री का कार्य कर परिवार का भरण-पोषण करते थे, और उनकी मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। परिजनों द्वारा लगाए गए मारपीट और रुपये गायब होने के आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। मामले की वास्तविक स्थिति जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
बेतिया के मंडल कारा में बंद गोपालपुर थाना क्षेत्र निवासी भूलन साह (35) की जीएमसीएच बेतिया में इलाज के दौरान मौत हो गई, जिसके बाद उनके परिजनों ने उत्पाद विभाग के कर्मियों पर गिरफ्तारी के दौरान मारपीट करने का गंभीर आरोप लगाया है। परिजनों का दावा है कि इस मारपीट के कारण ही भूलन साह की तबीयत बिगड़ी और अंततः उनकी मृत्यु हो गई। प्राप्त जानकारी के अनुसार, उत्पाद विभाग ने 9 जून को भूलन साह को सिकटा थाना क्षेत्र से कथित तौर पर नशे की हालत में गिरफ्तार किया था और उन्हें मंडल कारा भेज दिया था। बताया गया कि 10 जून को जेल में उनकी तबीयत अचानक खराब हो गई, जिसके बाद कारा प्रशासन ने उन्हें जीएमसीएच बेतिया के इमरजेंसी वार्ड में भर्ती कराया। इलाज के दौरान 12 जून को करीब 1:30 बजे उनकी मौत हो गई, जिससे परिजनों में कोहराम मच गया। मृतक के परिजनों ने आरोप लगाया है कि उन्हें घटना की जानकारी समय पर नहीं दी गई और मृत्यु के बाद ही कारा प्रशासन द्वारा सूचित किया गया। परिजनों के अनुसार, 10 जून को ही भूलन साह की जमानत के लिए न्यायालय में आवेदन दिया गया था और जमानत राशि भी जमा कर दी गई थी। उन्होंने यह भी दावा किया कि 9 जून को भूलन साह अपने ससुराल मंगलपुर घरारी में जमीन खरीदने के सिलसिले में गए थे और उनके पास करीब दो लाख रुपये नकद थे, साथ ही एक मोबाइल फोन भी था, जो गिरफ्तारी के बाद से लापता है। घटना की सूचना मिलने पर पुलिस और अस्पताल प्रशासन ने शव को कब्जे में लेकर आवश्यक कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है। मामले में लगाए गए मारपीट और नकदी गायब होने के आरोपों तथा अन्य तथ्यों की जांच की जा रही है। मृतक की पत्नी लीलावती देवी ने बताया कि उनके तीन पुत्र हैं—प्रमोद कुमार (10 वर्ष), अखिलेश कुमार (8 वर्ष) एवं छबीला कुमार (6 वर्ष)। उन्होंने बताया कि भूलन साह मछली खरीद-बिक्री का कार्य कर परिवार का भरण-पोषण करते थे, और उनकी मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। परिजनों द्वारा लगाए गए मारपीट और रुपये गायब होने के आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। मामले की वास्तविक स्थिति जांच रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
- जनसुराज पार्टी के जिला महासचिव और लौरिया विधानसभा संयोजक अजय ठाकुर ने शुक्रवार को लौरिया प्रखंड के ठाकुर टोला स्थित अपने कार्यालय में एक प्रेस वार्ता आयोजित कर एनडीए सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने रोजगार, पलायन, किसानों की समस्याओं और राज्य सरकार की नीतियों को लेकर सरकार की आलोचना की। ठाकुर ने आरोप लगाया कि चुनाव पूर्व किए गए कई वादे आज भी पूरे नहीं हुए हैं। उन्होंने दावा किया कि पाँच वर्षों में एक करोड़ लोगों को रोजगार देने का सरकार का वादा पूरी तरह विफल रहा है, क्योंकि राज्य में सीमित लोगों को ही रोजगार मिल रहा है। बड़ी संख्या में युवा रोजगार की तलाश में दूसरे राज्यों की ओर पलायन करने को मजबूर हैं। उन्होंने यह भी कहा कि युवाओं और छात्रों को रोजगार के नाम पर बड़े-बड़े सपने दिखाए गए, लेकिन सरकार गठन के महीनों बाद भी कोई ठोस पहल नहीं दिख रही है। इसके अतिरिक्त, उन्होंने जीविका समूह से जुड़ी महिलाओं को दो लाख रुपये देने के वादे, बढ़ते कर्ज और परिवारवाद के मुद्दे भी उठाए। किसानों की समस्याओं का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि हर साल यूरिया खाद की किल्लत से किसान परेशान रहते हैं और आंदोलन करने को विवश होते हैं, लेकिन समाधान केवल कागजों तक ही सीमित रह जाता है। अजय ठाकुर ने जोर देकर कहा कि बिहार में रोजगार की कमी, युवाओं का पलायन, किसानों की खाद समस्या और अधूरे चुनावी वादे आज सबसे बड़े जनसरोकार के मुद्दे हैं। उन्होंने घोषणा की कि जनसुराज पार्टी इन सवालों को लेकर जनता के बीच जाएगी और सरकार को जवाबदेह बनाने का काम करेगी। उन्होंने यह भी बताया कि 20 जून से जनसुराज पार्टी बिहार नवनिर्माण अभियान के एक नए चरण की शुरुआत करेगी, जिसके तहत जनसुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर बिहटा स्थित बिहार नवनिर्माण आश्रम में रहकर लोगों के बीच कार्य करेंगे और संगठन को गाँव-गाँव तक मजबूत बनाने का अभियान चलाएंगे। इस प्रेस वार्ता में पिंटू ठाकुर, अनमोल कुमार, विनय माझी, कौशल्या देवी, नितेश राणा, अबीता ठाकुर, अरविंद राम, जय सिंधु, हैप्पी कुमार सहित दर्जनों कार्यकर्ता उपस्थित रहे।1
- कई वर्षों से कश्मीर और हिमाचल प्रदेश से जुड़ी सेब की पहचान अब बदल रही है, क्योंकि बिहार की धरती पर भी लाल सेबों की बंपर पैदावार हो रही है। पश्चिम चम्पारण के किसान इस बदलाव की नई मिसाल पेश कर रहे हैं, जिससे बिहार अब सेब उत्पादन की दिशा में तेजी से आत्मनिर्भर बन रहा है। पश्चिम चम्पारण के साथ-साथ गया, बेगूसराय और मुजफ्फरपुर जैसे कई जिलों में किसान अब व्यावसायिक स्तर पर सेब की खेती कर अच्छी आमदनी कमा रहे हैं। पश्चिम चम्पारण के नौतन प्रखंड स्थित बैकुंठवा गांव के किसान शिशिर दूबे ने दो साल पहले करीब 70 सेब के पौधे लगाए थे, जो अब फलों से लदे हुए हैं। प्रत्येक पेड़ से 8 से 10 किलो तक सेब का उत्पादन हो रहा है, जिनकी गुणवत्ता, मिठास, रंग और आकार किसी भी पहाड़ी प्रदेश में उगने वाले सेब से कम नहीं है। शिशिर दूबे के अनुसार, शुरुआत में बिहार की गर्म जलवायु में सेब की खेती की सफलता पर लोगों को विश्वास नहीं था, लेकिन अब दूर-दूर से लोग उनके बगीचे को देखने और खेती की तकनीक जानने आ रहे हैं। इस अभियान में बेतिया शहर के व्यवसायी मेराजुल हक भी शामिल हुए हैं, जिन्होंने पर्यावरण प्रेम के चलते अपने आवास और परिसर में सेब के कई पौधे लगाए, जो अब फल दे रहे हैं। उनका मानना है कि फलदार पौधे लगाकर पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ आर्थिक लाभ भी कमाया जा सकता है। पश्चिम चम्पारण में मझौलिया के रविकांत पांडे और रामनगर के विजय गिरी जैसे अन्य किसान भी सेब की खेती में सफलता हासिल कर रहे हैं, जिनके बागानों में दर्जनों पौधे लगातार फल दे रहे हैं। बिहार में उगाए जा रहे सेब की सबसे बड़ी खासियत इसकी समय से पहले उपलब्धता है। जहां हिमाचल और कश्मीर में सेब की कटाई सितंबर और अक्टूबर में होती है, वहीं बिहार में जून और जुलाई तक इसकी तुड़ाई पूरी हो जाती है। इससे किसानों को सीधा फायदा मिलता है क्योंकि उनका उत्पाद बाजार में दो महीने पहले पहुंच जाता है और उन्हें बेहतर कीमतें मिलती हैं। वर्तमान में पश्चिम चम्पारण में ये सेब ₹200 प्रति किलो तक बिक रहा है, जबकि कई जगहों पर इसकी कीमत ₹250 प्रति किलो तक पहुंच रही है। यह सेब बेहद मीठा, रसीला और आकर्षक लाल रंग का होता है, जो पकने पर पूरी तरह लाल हो जाता है। किसानों द्वारा उगाई जा रही सेब की यह विशेष किस्म HRMN-99 (हरमन-99) है, जिसे विशेष रूप से गर्म जलवायु वाले क्षेत्रों के लिए विकसित किया गया है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह किस्म 45 से 48 डिग्री सेल्सियस तक की भीषण गर्मी में भी आसानी से विकसित होती है और पौधारोपण के एक से दो वर्ष के भीतर ही फल देना शुरू कर देती है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि यह किस्म बिहार के किसानों के लिए आय का एक नया स्रोत बन सकती है, क्योंकि यह पारंपरिक खेती के मुकाबले बेहतर लाभ देने की क्षमता रखती है। यदि सरकारी स्तर पर तकनीकी सहायता और बाजार की बेहतर व्यवस्था उपलब्ध हो, तो बिहार भविष्य में सेब उत्पादन के क्षेत्र में एक नई पहचान बना सकता है। पश्चिम चम्पारण में सेब के पौधे खेती में नवाचार और नई सोच से असंभव को संभव बनाने का प्रमाण हैं, जो बिहार में सेब उत्पादन की एक नई कहानी लिख रहे हैं। कभी पहाड़ों की पहचान माना जाने वाला सेब अब बिहार की मिट्टी में भी सफलता की नई फसल बन चुका है और यह बिहार का लाल सेब अब देशभर में अपनी अलग पहचान बनाने की ओर अग्रसर है।1
- पश्चिम चंपारण जिले के योगपट्टी ब्लॉक के तहत ढढवा ग्राम पंचायत के दूधियवा गांव में सड़क की हालत बेहद खराब है। गांव के लोगों ने संबंधित अधिकारियों से भावुक अपील की है कि कृपया इस सड़क का जल्द से जल्द निर्माण कराया जाए, ताकि उन्हें खराब सड़क के कारण हो रही परेशानियों से निजात मिल सके। यह गांव नवलपुर थाना क्षेत्र में आता है।1
- सुगौली के एक युवा नेता मनप्रीत को लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) में एक महत्वपूर्ण पद दिया गया है। उन्हें युवा लोजपा रामविलास का प्रदेश सचिव नियुक्त किया गया है। इस नई जिम्मेदारी मिलने के बाद, मनप्रीत ने यह प्रतिबद्धता जताई है कि वे पार्टी को मजबूत करने और उसके विस्तार के लिए कार्य करेंगे।1
- गोपालगंज के नगर थाना क्षेत्र स्थित सुंदर पट्टी गांव में एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया, जहाँ एक अनियंत्रित बाइक की टक्कर से 55 वर्षीय साइकिल सवार मजदूर बैजनाथ यादव की मौत हो गई। बैजनाथ यादव, जो नगर थाना क्षेत्र के कोन्हवा गांव के निवासी थे, रोज़ की तरह थावे के वृंदावन गांव से मजदूरी कर साइकिल से अपने घर लौट रहे थे। सुंदर पट्टी गांव के पास पहुँचते ही उन्हें एक तेज़ रफ़्तार बाइक ने टक्कर मार दी। इस टक्कर में बैजनाथ यादव के साथ-साथ बाइक पर सवार दोनों युवक भी गंभीर रूप से घायल हो गए। तीनों को तत्काल इलाज के लिए सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहाँ उपचार के दौरान मजदूर बैजनाथ यादव ने दम तोड़ दिया। घायल बाइक सवारों की पहचान नगर थाना क्षेत्र के बसडिला निवासी 16 वर्षीय रेयाज अली और छपरा निवासी 19 वर्षीय मोहम्मद इब्राहम के रूप में हुई है, जो अपने मामा के घर आया था। स्थानीय लोगों की मदद से पुलिस ने घटना स्थल से ही दोनों बाइक सवारों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने मृतक के शव को पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल भेजा और पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंप दिया।1
- कुशीनगर में नारायणी नदी में नहाने गए दो किशोर शुक्रवार को लापता हो गए थे, जिनमें से एक 10 वर्षीय पवन का शव शनिवार को लगभग 24 घंटे के कठिन बचाव अभियान के बाद बरामद कर लिया गया है। दूसरे 11 वर्षीय किशोर शिवम की तलाश अभी भी जारी है। शुक्रवार को स्थानीय गोताखोरों ने घंटों तक लापता बच्चों की खोजबीन की, लेकिन उन्हें कोई सफलता नहीं मिली। इसके बाद पुलिस प्रशासन ने मौके पर एसडीआरएफ (SDRF) की टीम को बुलाया। शनिवार को टीम ने करीब 24 घंटे के रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद पवन का शव नदी से बरामद कर लिया, जिसके बाद परिजनों में चीख-पुकार मच गई। घटना की जानकारी मिलने के बाद से ही बरवापट्टी थाना प्रभारी दिनेश कुमार अपनी टीम के साथ मौके पर कैंप कर रहे हैं। पुलिस ने पवन के शव का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। थाना प्रभारी ने बताया है कि एक बच्चे का शव मिल गया है, और एसडीआरएफ की टीम, स्थानीय मल्लाह व ग्रामीण मिलकर दूसरे लापता बच्चे शिवम की तलाश में जुटे हैं। उन्होंने जल्द ही शिवम को भी ढूंढ लेने की उम्मीद जताई है।1
- सम्राट सीमांचल मिशन पर हैं, और इस बीच मुख्यमंत्री की गाड़ी नीतीश के 'पॉलिटिकल ट्रैक' पर आगे बढ़ रही है। राजनीतिक गलियारों में इस घटनाक्रम पर पैनी नजर रखी जा रही है।1
- बेतिया व्यवहार न्यायालय ने जनसुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर को पश्चिम चंपारण के भाजपा सांसद डॉ. संजय जायसवाल के खिलाफ की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों के मामले में संज्ञान लेते हुए नोटिस जारी किया है। प्रशांत किशोर पर आरोप है कि उन्होंने सितंबर 2025 में एक जनसभा के दौरान सांसद डॉ. संजय जायसवाल पर "तेल चोर" सहित अन्य आपत्तिजनक टिप्पणियां की थीं। इसके अतिरिक्त, अगस्त 2025 में बेतिया फ्लाईओवर ब्रिज के कथित गलत अलाइनमेंट के संदर्भ में भी उन्होंने सांसद पर निजी लाभ के लिए कार्य करने तथा "टूटपुंजिया नेता" जैसे शब्दों का प्रयोग किया था। इन बयानों को मानहानिकारक बताते हुए सांसद एवं लोकसभा सचेतक डॉ. संजय जायसवाल ने बेतिया व्यवहार न्यायालय में एक परिवाद दायर किया था। न्यायालय ने मामले का संज्ञान लिया और प्रशांत किशोर को अपना पक्ष रखने के लिए उपस्थित होने का निर्देश दिया है। सांसद के अधिवक्ता चंद्रिका कुशवाहा ने मीडिया को जानकारी दी कि दायर परिवाद में यह आरोप लगाया गया है कि इन टिप्पणियों से सांसद की व्यक्तिगत और राजनीतिक छवि के साथ-साथ उनके पूरे परिवार की प्रतिष्ठा को भी नुकसान पहुँचा है, जिसके लिए मानहानि का दावा किया गया है।1