आदिवासी अंचल को बड़ी राहत की उम्मीद:राजपुर स्वास्थ्य केंद्र को उप-जिला अस्पताल बनाने की मांग पर मुख्यमंत्री सचिवालय ने दिए कार्रवाई के निर्देश संवाददाता - विकास कुमार यादव दुर्गम वनांचल की जीवनरेखा बनेगा राजपुर, उप-जिला अस्पताल उन्नयन की जगी उम्मीद बलरामपुर - जिले के राजपुर स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को सिविल/उप-जिला अस्पताल में उन्नयन किए जाने की लंबे समय से उठ रही मांग अब शासन स्तर पर गंभीरता से ली जा रही है। क्षेत्र के पत्रकार एवं सामाजिक प्रतिनिधि अभिषेक कुमार सोनी द्वारा मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री, विधायक सामरी एवं कलेक्टर बलरामपुर को प्रस्तुत विस्तृत आवेदन पर मुख्यमंत्री सचिवालय ने संज्ञान लेते हुए संबंधित विभाग को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश जारी किए हैं। मुख्यमंत्री सचिवालय, रायपुर से जारी पत्र में स्वास्थ्य सेवाओं के संचालक को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि आवेदन पत्र पर नियमानुसार आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित की जाए, की गई कार्रवाई से आवेदक को अवगत कराया जाए तथा पूरे प्रकरण की जानकारी जनदर्शन पोर्टल में दर्ज करते हुए संबंधित अभिलेख भी अपलोड किए जाएं। इससे स्पष्ट होता है कि मामले को प्राथमिकता के साथ प्रक्रिया में लिया गया है। प्रस्तुत आवेदन में विस्तार से बताया गया है कि राजपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के दक्षिण-पश्चिम क्षेत्र में स्थित एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य केंद्र है, जो न केवल राजपुर विकासखंड बल्कि आसपास के सैकड़ों ग्राम पंचायतों, दूरस्थ वनांचल एवं आदिवासी क्षेत्रों की बड़ी आबादी को स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कर रहा है। अनुमानित 1 से 2 लाख की जनसंख्या प्रत्यक्ष रूप से इस केंद्र पर निर्भर है, जिससे यहां मरीजों का अत्यधिक दबाव बना रहता है। आवेदन में यह भी उल्लेख किया गया है कि भौगोलिक दृष्टि से यह क्षेत्र काफी दुर्गम है और कई गांवों के लिए राजपुर ही सबसे सुलभ स्वास्थ्य केंद्र है। इसके बावजूद वर्तमान में यहां उपलब्ध संसाधन क्षेत्र की आवश्यकताओं के अनुरूप पर्याप्त नहीं हैं। विशेषज्ञ चिकित्सकों (स्त्री रोग विशेषज्ञ, शिशु रोग विशेषज्ञ, सर्जन, फिजिशियन) की कमी, सीमित बेड क्षमता, आईसीयू/एचडीयू का अभाव, ब्लड बैंक/ब्लड स्टोरेज यूनिट की अनुपलब्धता तथा आधुनिक जांच सुविधाओं (एक्स-रे, सोनोग्राफी, पैथोलॉजी) की कमी के कारण गंभीर मरीजों को रेफर करना मजबूरी बन गई है। आवेदन में यह भी बताया गया है कि राजपुर से अंबिकापुर की दूरी लगभग 50 से 70 किलोमीटर है। इस मार्ग में वन क्षेत्र, घुमावदार सड़कें एवं कई स्थानों पर खराब रास्ते होने के कारण आपातकालीन स्थिति में मरीजों को समय पर उच्च स्तरीय उपचार मिल पाना अत्यंत कठिन हो जाता है। इसके चलते विशेषकर गर्भवती महिलाओं, नवजात शिशुओं एवं दुर्घटना पीड़ितों के लिए जोखिम की स्थिति बनी रहती है और कई बार जनहानि तक की आशंका उत्पन्न हो जाती है। इसके साथ ही यह तथ्य भी सामने रखा गया है कि जिला मुख्यालय बलरामपुर स्थित अस्पताल में भी उन्नत जीवन रक्षक सुविधाएं जैसे आईसीयू पर्याप्त रूप से उपलब्ध नहीं हैं, जिसके कारण गंभीर मरीजों को सीधे अंबिकापुर भेजना पड़ता है। ऐसी स्थिति में राजपुर जैसे भौगोलिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र में उप-जिला अस्पताल की स्थापना अत्यंत आवश्यक एवं जनहितकारी कदम होगा। अभिषेक कुमार सोनी ने अपने आवेदन में मांग की है कि राजपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को शीघ्र सिविल/उप-जिला अस्पताल में उन्नयन किया जाए तथा यहां विशेषज्ञ चिकित्सकों की पदस्थापना, 24×7 आपातकालीन सेवा, ट्रॉमा सेंटर, आईसीयू/एचडीयू, ब्लड बैंक/ब्लड स्टोरेज यूनिट एवं आधुनिक जांच सुविधाओं की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि क्षेत्रवासियों को समय पर और बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें। मुख्यमंत्री सचिवालय द्वारा इस पर त्वरित संज्ञान लेते हुए कार्रवाई के निर्देश जारी किए जाने से क्षेत्र में उम्मीद की किरण जगी है। स्थानीय नागरिकों का मानना है कि यदि शासन स्तर पर शीघ्र निर्णय लिया गया तो न केवल राजपुर बल्कि आसपास के दूरस्थ एवं आदिवासी क्षेत्रों के हजारों लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा का लाभ मिलेगा और अनावश्यक रेफरल तथा जनहानि की घटनाओं में कमी आएगी। इस जनहित मुद्दे पर अभिषेक कुमार सोनी ने क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों एवं आम नागरिकों से सहयोग और समर्थन की अपील की है। उन्होंने कहा कि राजपुर स्वास्थ्य केंद्र का उन्नयन पूरे क्षेत्र की आवश्यकता है और इसके लिए सामूहिक प्रयास जरूरी है। आवश्यकता पड़ने पर जनसमर्थन अभियान भी चलाया जाएगा, ताकि शासन-प्रशासन इस मांग पर शीघ्र निर्णय ले सके।
आदिवासी अंचल को बड़ी राहत की उम्मीद:राजपुर स्वास्थ्य केंद्र को उप-जिला अस्पताल बनाने की मांग पर मुख्यमंत्री सचिवालय ने दिए कार्रवाई के निर्देश संवाददाता - विकास कुमार यादव दुर्गम वनांचल की जीवनरेखा बनेगा राजपुर, उप-जिला अस्पताल उन्नयन की जगी उम्मीद बलरामपुर - जिले के राजपुर स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को सिविल/उप-जिला अस्पताल में उन्नयन किए जाने की लंबे समय से उठ रही मांग अब शासन स्तर पर गंभीरता से ली जा रही है। क्षेत्र के पत्रकार एवं सामाजिक प्रतिनिधि अभिषेक कुमार सोनी द्वारा मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री, विधायक सामरी एवं कलेक्टर बलरामपुर को प्रस्तुत विस्तृत आवेदन पर मुख्यमंत्री सचिवालय ने संज्ञान लेते हुए संबंधित विभाग को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश जारी किए हैं। मुख्यमंत्री सचिवालय, रायपुर से जारी पत्र में स्वास्थ्य सेवाओं के संचालक को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि आवेदन पत्र पर नियमानुसार आवश्यक कार्यवाही सुनिश्चित की जाए, की गई कार्रवाई से आवेदक को अवगत कराया जाए तथा पूरे प्रकरण की जानकारी जनदर्शन पोर्टल में दर्ज करते हुए संबंधित अभिलेख भी अपलोड किए जाएं। इससे स्पष्ट होता है कि मामले को प्राथमिकता के साथ प्रक्रिया में लिया गया है। प्रस्तुत आवेदन में विस्तार से बताया गया है कि राजपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, बलरामपुर-रामानुजगंज जिले के दक्षिण-पश्चिम क्षेत्र में स्थित एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य केंद्र है, जो न केवल राजपुर विकासखंड बल्कि आसपास के सैकड़ों ग्राम पंचायतों, दूरस्थ वनांचल एवं आदिवासी क्षेत्रों की बड़ी आबादी को स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कर रहा है। अनुमानित 1 से 2 लाख की जनसंख्या प्रत्यक्ष रूप से इस केंद्र पर निर्भर है, जिससे यहां मरीजों का अत्यधिक दबाव बना रहता है। आवेदन में यह भी उल्लेख किया गया है कि भौगोलिक दृष्टि से यह क्षेत्र काफी दुर्गम है और कई गांवों के लिए राजपुर ही सबसे सुलभ स्वास्थ्य केंद्र है। इसके बावजूद वर्तमान में यहां उपलब्ध संसाधन क्षेत्र की आवश्यकताओं के अनुरूप पर्याप्त नहीं हैं। विशेषज्ञ चिकित्सकों (स्त्री रोग विशेषज्ञ, शिशु रोग विशेषज्ञ, सर्जन, फिजिशियन) की कमी, सीमित बेड क्षमता, आईसीयू/एचडीयू का अभाव, ब्लड बैंक/ब्लड स्टोरेज यूनिट की अनुपलब्धता तथा आधुनिक जांच सुविधाओं (एक्स-रे, सोनोग्राफी, पैथोलॉजी) की कमी के कारण गंभीर मरीजों को रेफर करना मजबूरी बन गई है। आवेदन में यह भी बताया गया है कि राजपुर से अंबिकापुर की दूरी लगभग 50 से 70 किलोमीटर है। इस मार्ग में वन क्षेत्र, घुमावदार सड़कें एवं कई स्थानों पर खराब रास्ते होने के कारण आपातकालीन स्थिति में मरीजों को समय पर उच्च स्तरीय उपचार मिल पाना अत्यंत कठिन हो जाता है। इसके चलते विशेषकर गर्भवती महिलाओं, नवजात शिशुओं एवं दुर्घटना पीड़ितों के लिए जोखिम की स्थिति बनी रहती है और कई बार जनहानि तक की आशंका उत्पन्न हो जाती है। इसके साथ ही यह तथ्य भी सामने रखा गया है कि जिला मुख्यालय बलरामपुर स्थित अस्पताल में भी उन्नत जीवन रक्षक सुविधाएं जैसे आईसीयू पर्याप्त रूप से उपलब्ध नहीं हैं, जिसके कारण गंभीर मरीजों को सीधे अंबिकापुर भेजना पड़ता है। ऐसी स्थिति में राजपुर जैसे भौगोलिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र में उप-जिला अस्पताल की स्थापना अत्यंत आवश्यक एवं जनहितकारी कदम होगा। अभिषेक कुमार सोनी ने अपने आवेदन में मांग की है कि राजपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को शीघ्र सिविल/उप-जिला अस्पताल में उन्नयन किया जाए तथा यहां विशेषज्ञ चिकित्सकों की पदस्थापना, 24×7 आपातकालीन सेवा, ट्रॉमा सेंटर, आईसीयू/एचडीयू, ब्लड बैंक/ब्लड स्टोरेज यूनिट एवं आधुनिक जांच सुविधाओं की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि क्षेत्रवासियों को समय पर और बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकें। मुख्यमंत्री सचिवालय द्वारा इस पर त्वरित संज्ञान लेते हुए कार्रवाई के निर्देश जारी किए जाने से क्षेत्र में उम्मीद की किरण जगी है। स्थानीय नागरिकों का मानना है कि यदि शासन स्तर पर शीघ्र निर्णय लिया गया तो न केवल राजपुर बल्कि आसपास के दूरस्थ एवं आदिवासी क्षेत्रों के हजारों लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा का लाभ मिलेगा और अनावश्यक रेफरल तथा जनहानि की घटनाओं में कमी आएगी। इस जनहित मुद्दे पर अभिषेक कुमार सोनी ने क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों एवं आम नागरिकों से सहयोग और समर्थन की अपील की है। उन्होंने कहा कि राजपुर स्वास्थ्य केंद्र का उन्नयन पूरे क्षेत्र की आवश्यकता है और इसके लिए सामूहिक प्रयास जरूरी है। आवश्यकता पड़ने पर जनसमर्थन अभियान भी चलाया जाएगा, ताकि शासन-प्रशासन इस मांग पर शीघ्र निर्णय ले सके।
- सरगुजा। नशे के सौदागरों पर संभागीय आबकारी उड़नदस्ता सरगुजा टीम की जीरो टॉलरेंस की नीति जारी है। जिला आबकारी अधिकारी इंद्रबली सिंह मार्कण्डेय के मार्गदर्शन में एवं सहायक जिला आबकारी अधिकारी रंजीत गुप्ता के नेतृत्व में आबकारी उड़नदस्ता टीम की लगातार कार्यवाही से नशे के सौदागरों में हड़कंप मचा हुआ है। दिनांक 03-04-26 को शाम को मुखबिर से सटीक सूचना मिली कि जिला रायगढ़ एवं जशपुर के सप्लायर लोग थाना सीतापुर अंतर्गत राधापुर बेरियर के आस-पास भारी मात्रा में गांजा की सप्लाई करने वाले हैं।सूचना यह भी मिली कि उनमें से एक के पास सफेद रंग की पल्सर बाईक भी होगी जिसका नंबर CG13BB 9565 है। आबकारी उड़नदस्ता की टीम देर शाम से ही सिविल ड्रेस में राधापुर बैरियर के आस-पास घेराबंदी कर निगरानी रखी हुई थी।लगभग रात्रि 9 बजे के आस पास दो पल्सर बाइक में 5 लोग राधापुर बैरियर से बनेया रोड में सुनसान जगह पर जाकर खड़े हुए। आबकारी उड़नदस्ता की टीम चारों तरफ से आगे बढ़ी जिसे देख अचानक सभी बाइक सवार भागने लगे और रात्रि का फायदा उठाकर तीन लोग भाग गए तथा दो लोगों को पकड़ा जा सका। दो लोग पकड़े गए उन्होंने अपना नाम टीकेश्वर यादव निवासी लैलूंगा जिला रायगढ़ तथा खिलेश्वर यादव निवासी राजाआमा जिला जशपुर बताया। भागने वाले तीनों आरोपी का नाम दीनू यादव, किशोर पैकरा एवं प्रदीप यादव है,तीनों राजाआमा थाना बागबहार जिला जशपुर के रहने वाले है। जो दो लोग पकड़े गए उन दोनों के पास पिट्ठू बैग में 7-7 पैकेट गांजा कुल 14 किलो मादक पदार्थ गांजा जब्त कर एनडीपीएस एक्ट की धारा 20 सी के तहत कार्रवाई की गई। पकड़े गए कुल गांजे की कीमत लगभग तीन लाख रुपए है,तथा पकड़े गए दो बाइक की कीमत पांच लाख रुपए है। सहायक जिला आबकारी अधिकारी रंजीत गुप्ता ने बताया कि जशपुर एवं रायगढ़ जिला गांजा की तस्करी के लिए कुख्यात है क्योंकि दोनों जिला का बॉर्डर ओड़िशा राज्य से लगा हुआ है। ओड़िशा राज्य गाँजा की खेती के लिए कुख्यात है। रायगढ और जशपुर जिले के कुछ लोग इसी बॉर्डर का फायदा उठाकर गांजे का धड़ल्ले से व्यापार करते हैं। उड़ीसा में गाँजा बहुत सस्ता है उसी सस्ते गांजे को लोग छत्तीसगढ़ में महंगे रेट में बेचकर काफी मुनाफा कमाते हैं। उक्त कार्यवाही में सहायक जिला आबकारी रंजीत गुप्ता आबकारी मुख्य आरक्षक कुमारूराम, अशोक सोनी तथा नगर सैनिक रणविजय सिंह..महिला सैनिक चंद्रावती एवं नीरज चौहान की महत्वपूर्ण भूमिका रही।2
- Post by Simant Prajapati1
- *✰क्या है अमर ग्रन्थ का इतिहास?✰* अवश्य देखिए *गरीब दास जी महाराज की सतलोक यात्रा* स्पेशल *AI वीडियो* 04 अप्रैल 2026 को शनिवार शाम 05:00 बजे सिर्फ *Sant Rampal Ji Maharaj* Youtube Channel पर1
- राज्यसभा सांसद फूलोदेवी नेताम का बालोद में भव्य स्वागत, कांग्रेसियों ने माला पहनाकर किया जोरदार अभिनंदन राज्यसभा सदस्य बनने के बाद पहली बार अपने गृह क्षेत्र बालोद पहुंचीं छत्तीसगढ़ की सांसद फूलोदेवी नेताम का कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने गर्मजोशी भरे स्वागत के साथ भव्य अभिनंदन किया। फूलोदेवी नेताम रायपुर से अपने गृह नगर जाते समय बालोद जिले के ग्राम पुरूर में थोड़ी देर के लिए रुकीं। यहां बालोद जिला कांग्रेस के कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों ने उन्हें फूल मालाओं से लाद दिया और मिठाइयां खिलाकर स्वागत किया। इस मौके पर फूलोदेवी नेताम ने जिले के कांग्रेस पदाधिकारियों से चर्चा की और पार्टी में बेहतर ढंग से कार्य करने की अपील की। उन्होंने कहा, “जब भी मुझे संसद में बोलने का मौका मिला है, तो मैंने छत्तीसगढ़ के विकास और प्रगति के लिए, यहां के कोटे के लिए, किसानों, नौजवानों, महिलाओं के लिए हमेशा आवाज उठाई है और आगे भी उठाती रहूंगी।” कार्यकर्ताओं ने सांसद जी के इस पहले दौरे पर उत्साह दिखाते हुए उन्हें पूरे सम्मान के साथ विदा किया। द छत्तीसगढ़ — आपकी आवाज, आपकी खबर।1
- *भानुप्रतापपुर/ शराब दुकान में गड़बड़ी के आरोप, विरोध में उतरी शिवसेना , सुपरवाइजर का पुतला दहन किया।** भानुप्रतापपुर, शासकीय शराब दुकान भानुप्रतापपुर में शराब दुकान के सुपरवाइजर कर्मवीर गुप्ता द्वारा तय दर से अधिक दर पर शासकीय शराब बेची जाने एवं गांव गांव में शराब कोचीयाओ से मिली भगत कर गांव गांव में शासकीय शराब भेज कर बिकवा कर क्षेत्र का माहौल खराब करने, शराब उपभोक्ताओं का शोषण करने के कारण शिवसेना द्वारा शासकीय शराब दुकान भानुप्रतापपुर में शासकीय शराब दुकान के सुपरवाइजर कर्मवीर गुप्ता का पुतला दहन किया गया। विदीत हो की शासकीय शराब दुकान चारामा में कर्मवीर गुप्ता के द्वारा अनियमितता , शराब कोचियों को गांव-गांव में शराब बेचने, तय दर से अधिक दर पर शराब बेचने के कारण बर्खास्त किया जा चुका है। किंतु वह अपने पहुंच के दम पर शासकीय शराब दुकान भानुप्रतापपुर में सुपरवाइजरी की नौकरी कर रहा है जबकि नियम यह है कि कोई भी बर्खास्त कर्मचारियों को कहीं पर काम में नहीं रखा जाएगा। किंतु मिली भगत कर कर्मवीर गुप्ता भानुप्रतापपुर शासकीय शराब दुकान में सुपरवाइजरी कर रहा है। और अनियमितता करते हुए तय दर से अधिक दर पर शराब बेचकर भानुप्रतापपुर क्षेत्र के शराब उपभोक्ताओं का आर्थिक शोषण कर रहा है। गांव गांव में शासकीय शराब अवैध रूप से भिजवाकर गांव-गांव का माहौल खराब कर रहा है। एवं शासकीय शराब में पानी मिलाकर क्षेत्र के शराब उपभोक्ताओं का आर्थिक शोषण कर रहा है । शिवसेना द्वारा आगे कहा गया है कि अगर भ्रष्ट शासकीय शराब दुकान भानुप्रतापपुर के सुपरवाइजर कर्मवीर गुप्ता पर कार्यवाही नहीं की जाती है तो शिवसेना द्वारा आंदोलन का विस्तार किया जाएगा और क्षेत्र के शराब उपभोक्ताओं को उनका हक और अधिकार दिलाया जाएगा।*1
- जिले के अंदरुनी क्षेत्रों में अब विकास को मिलेगी नई राह, विभिन्न ग्रामों में पेयजल सुविधा के लिए भूमिपूजन कोंडागांव :- जिले के माओवाद प्रभावित रहे अंदरुनी क्षेत्रों में अब विकास की नई राह खुलती नजर आ रही है। माओवाद मुक्त होते ही ग्राम पंचायतों में आधारभूत सुविधाओं के विस्तार के लिए कार्य शुरू हो गए हैं। इसी कड़ी में जिला पंचायत अध्यक्ष रीता सोरी द्वारा विभिन्न ग्रामों में पेयजल सुविधा के लिए भूमि पूजन किया गया। कोंडागांव जिला मुख्यालय से लगभग 10 किलोमीटर अंदर स्थित ग्राम ठोटी मड़ानार पंचायत मुँगवाल, ग्राम पंचायत पेरामपाल एवं ग्राम पंचायत चमई में पेयजल हेतु नल खनन कार्य के लिए भूमि पूजन संपन्न हुआ।यह क्षेत्र पहले कभी माओवाद प्रभावित रहे हैं, जहां अब शांति स्थापित होने के बाद विकास कार्यों को गति दी जा रही है। पेयजल जैसी बुनियादी सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में यह पहल ग्रामीणों के लिए बड़ी राहत साबित होगी। इस अवसर पर ग्रामीणों ने खुशी जाहिर करते हुए अपनी विभिन्न समस्याएं भी जिला पंचायत अध्यक्ष के समक्ष रखीं। उन्होंने आश्वस्त किया कि क्षेत्र के समग्र विकास के लिए निरंतर प्रयास किए जाएंगे। भूमि पूजन कार्यक्रम में जिला पंचायत कोंडागांव के सभापति एवं सदस्य नन्दलाल राठौर, योगेश बैध, गोकुल बैध, सियादास मानिकपुरी (ग्राम सरपंच) सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।2
- छत्तीसगढ़ की धरती पर पहली बार आयोजित खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 का समापन सिर्फ एक खेल आयोजन नहीं रहा… बल्कि यह आदिवासी प्रतिभाओं के उभार और सांस्कृतिक गौरव का उत्सव बन गया। जहां कर्नाटक ओवरऑल चैंपियन बना… वहीं मेजबान छत्तीसगढ़ ने अपने पारंपरिक खेल मलखंब में ऐसा प्रदर्शन किया कि पूरे देश में उसकी गूंज सुनाई दे रही है। बस्तर के अबूझमाड़ के दुर्गम जंगलों से निकलकर आए युवा खिलाड़ियों ने मलखंब के खंभों पर जो अद्भुत संतुलन, ताकत और कला दिखाई… उसने खेल जगत को चौंका दिया। नारायणपुर की अबूझमाड़ मलखंब एकेडमी के खिलाड़ियों ने इस प्रतियोगिता में अपनी छाप छोड़ते हुए पुरुष वर्ग में देशभर की 14 टीमों को पछाड़ दिया। 124.35 अंकों के साथ छत्तीसगढ़ ने प्रथम स्थान हासिल कर न सिर्फ राज्य बल्कि पूरे अबूझमाड़ का नाम राष्ट्रीय स्तर पर रोशन किया। वहीं बालिक वर्ग में 80.15 अंक के साथ प्रथम स्थान हासिल किया है। इस ऐतिहासिक जीत के नायक बने— मानू ध्रुव, मोनू नेताम, मंगडू पोडियाम, राजेश कोर्राम, राकेश कुमार बड़दा और आयुष सिदार। ये सभी खिलाड़ी उसी अबूझमाड़ क्षेत्र से आते हैं, जिसे कभी देश का सबसे दुर्गम इलाका माना जाता था। वहीं बालिका वर्ग में भी छत्तीसगढ़ की बेटियों ने कमाल कर दिखाया। मोनिका पोटाई, संताय पोटाई, सरिता पोयाम, अनिता गोटा, दुर्गेश्वरी कुमेटी और डिपी सिंह ने स्वर्ण पदक जीतकर यह साबित कर दिया कि प्रतिभा किसी संसाधन की मोहताज नहीं होती। खेल विशेषज्ञों और मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इस बार मलखंब प्रतियोगिता में छत्तीसगढ़ के खिलाड़ियों का प्रदर्शन तकनीकी रूप से बेहद मजबूत और संतुलित रहा, जिसने निर्णायकों और दर्शकों दोनों को प्रभावित किया। इस सफलता के पीछे कोच मनोज प्रसाद का मार्गदर्शन सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरा। उनके अनुशासन, समर्पण और वर्षों की मेहनत ने इन खिलाड़ियों को राष्ट्रीय मंच पर खड़ा कर दिया। पूरे आयोजन के दौरान रायपुर, जगदलपुर और सरगुजा खेल भावना से सराबोर नजर आए। 10 दिनों तक चले इस महाकुंभ में 30 राज्यों के करीब 3800 खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया। छत्तीसगढ़ ने कुल 19 पदक— 3 स्वर्ण, 10 रजत और 6 कांस्य जीतकर पदक तालिका में 9वां स्थान हासिल किया। हालांकि, सरगुजा में आयोजित मलखंब प्रतियोगिता में छत्तीसगढ़ का दबदबा सबसे अलग नजर आया… जहां अबूझमाड़ के खिलाड़ियों ने अपनी कला से पूरे देश को प्रभावित किया। इस उपलब्धि पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर खुशी जाहिर करते हुए लिखा— "बस्तर और सरगुजा के प्रतिभावान युवाओं ने मलखंब में अद्भुत प्रदर्शन किया है… यह सिर्फ खेल नहीं, हमारी संस्कृति का गौरव है।" उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार इन प्रतिभाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर और ओलंपिक तक पहुंचाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। अबूझमाड़ जो कभी नक्सल प्रभाव और दुर्गमता के लिए जाना जाता था आज वही क्षेत्र देश को प्रतिभा, संघर्ष और सफलता की नई कहानी सुना रहा है। मलखंब में छत्तीसगढ़ की यह जीत सिर्फ पदकों तक सीमित नहीं है, यह जीत है आत्मविश्वास की, अवसर की, और उस बदलाव की, जो बस्तर के युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ रहा है। अगर इसी तरह प्रशिक्षण, संसाधन और समर्थन मिलता रहा तो वह दिन दूर नहीं जब अबूझमाड़ के ये खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय मंच पर तिरंगा लहराते नजर आएंगे।1
- शर्मनाक! शादीशुदा महिला ने नाबालिग लड़के से दुष्कर्म किया, सोशल मीडिया दोस्ती के बहाने होटल बुलाकर भावनात्मक दबाव बनाया – कबीरधाम में सनसनीखेज मामला, आरोपी गिरफ्तार, पॉस्को एक्ट के तहत कार्रवाई नमस्कार जय जोहार जय छत्तीसगढ़ मैं योगेश कुमार साहू और आप देख रहे हैं द छत्तीसगढ़ आज हम आपको छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले से एक ऐसी घटना बता रहे हैं जो समाज के लिए सोचने का विषय है। आमतौर पर हम नाबालिग लड़कियों पर होने वाले अत्याचार की खबरें सुनते हैं, लेकिन आज की यह घटना उस सोच को चुनौती देती है। एक 27 वर्षीय शादीशुदा महिला ने एक नाबालिग लड़के के साथ दुष्कर्म किया। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए महिला को गिरफ्तार कर लिया है और मामले में पॉस्को एक्ट के तहत अपराध दर्ज किया गया है। दरअसल, पूरा मामला सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र का है। पीड़ित नाबालिग लड़के की शिकायत के अनुसार, उसकी मुलाकात आरोपी महिला से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर हुई थी। धीरे-धीरे दोनों के बीच बातचीत बढ़ी और मुलाकातों का सिलसिला शुरू हो गया। 1 अप्रैल 2026 को आरोपी महिला ने नाबालिग को भोरमदेव रोड स्थित एक होटल में बुलाया। वहाँ जाकर महिला ने लड़के पर भावनात्मक दबाव बनाया और उसके साथ दुष्कर्म किया। घटना के बाद आरोपी महिला ने पीड़ित को डराया-धमकाया, जिससे नाबालिग मानसिक दबाव में आ गया और तुरंत शिकायत दर्ज नहीं करा सका। लेकिन बाद में हिम्मत जुटाकर उसने थाने में रिपोर्ट लिखाई। कबीरधाम पुलिस ने तुरंत संज्ञान लिया, अपराध दर्ज किया और आरोपी महिला को गिरफ्तार कर लिया। फिलहाल उसे न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है। आशीष शुक्ला, एसडीओपी ने इस मामले की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि नाबालिग ने स्पष्ट रूप से रिपोर्ट में कहा कि शादीशुदा महिला ने होटल में ले जाकर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाए और बाद में डराया-धमकाया जा रहा था। पुलिस की टीम ने पीड़ित की शिकायत पर त्वरित कार्रवाई की और आरोपी को हिरासत में ले लिया। यह मामला सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि सोशल मीडिया के गलत इस्तेमाल की एक बड़ी चेतावनी भी है। आजकल युवा और नाबालिग सोशल मीडिया पर अनजान लोगों से आसानी से जुड़ जाते हैं। दोस्ती के नाम पर बातचीत शुरू होती है, फिर मुलाकातें होती हैं और कई बार यह रिश्ता खतरे में बदल जाता है। कबीरधाम पुलिस ने आम जनता से खास अपील की है – सोशल मीडिया पर किसी भी अनजान व्यक्ति से बात करते समय बेहद सावधानी बरतें। अगर कोई परेशान करे, डराए या आपराधिक इरादा दिखे, तो तुरंत पुलिस को सूचित करें। समय पर सूचना देने से कई घटनाओं को रोका जा सकता है। दोस्तों, इस घटना से हमें कई सबक मिलते हैं। सबसे बड़ा सबक यह कि अपराध की कोई लिंग सीमा नहीं होती। चाहे पीड़ित लड़का हो या लड़की, कानून सबके लिए समान है। पॉस्को एक्ट नाबालिगों की सुरक्षा के लिए बना है और इसमें लिंग के आधार पर कोई भेदभाव नहीं किया जाता। पुलिस की त्वरित कार्रवाई सराहनीय है, लेकिन समाज के रूप में हमें भी जिम्मेदार बनना होगा। माता-पिता को अपने बच्चों की सोशल मीडिया गतिविधियों पर नजर रखनी चाहिए। बच्चों को बताएं कि अनजान लोगों से दोस्ती करने से पहले सोचना जरूरी है। स्कूल-कॉलेज में भी बच्चों को जागरूक करने की जरूरत है कि भावनात्मक दबाव या लालच में आकर कोई भी गलत कदम न उठाएं। इस तरह की घटनाएं हमें याद दिलाती हैं कि सुरक्षा सिर्फ लड़कियों तक सीमित नहीं है। हमारे बेटे भी कमजोर हो सकते हैं। परिवार, समाज और पुलिस को मिलकर काम करना होगा ताकि हमारे बच्चे सुरक्षित रहें। सोशल मीडिया पर सावधानी बरतें, अनजान से दोस्ती न करें, अगर कोई परेशानी हो तो चुप न रहें – तुरंत पुलिस से संपर्क करें। अपने बच्चों को जागरूक करें, परिवार में खुलकर बात करें, ताकि कोई भी बच्चा मानसिक दबाव में अकेला न पड़े। कानून अपने काम करेगा, लेकिन जागरूक नागरिक बनकर हम अपराधों को रोक सकते हैं। अगर आपके आसपास ऐसी कोई घटना हो या कोई जानकारी हो, तो तुरंत कबीरधाम पुलिस या नजदीकी थाने में संपर्क करें। यह थी खबर कबीरधाम से। अधिक अपडेट्स के लिए बने रहिए द छत्तीसगढ़ के साथ। नमस्कार, जय छत्तीसगढ़!1