Aks@Tkd news ठाकुरद्वारा। अमृत विचार : ब्लॉक ठाकुरद्वारा क्षेत्र की ग्राम पंचायत राघुवाला के ग्रामीणों ने रसोई गैस बुकिंग व्यवस्था में कथित भेदभाव को लेकर प्रधानमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन भेजकर निर्णय वापस लेने की मांग की है। ज्ञापन में बताया गया कि 12 मार्च 2026 को केन्द्रीय मंत्री परिषद द्वारा लिए गए निर्णय के तहत शहरी उपभोक्ताओं को 25 दिन के अंतराल पर गैस बुकिंग की सुविधा दी गई है, जबकि ग्रामीण उपभोक्ताओं के लिए यह अवधि 45 दिन निर्धारित की गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि यह व्यवस्था शहरी और ग्रामीण जनता के बीच स्पष्ट भेदभाव पैदा करती है। ग्रामीणों ने इसे संविधान के अनुच्छेद 14 में प्रदत्त समानता के अधिकार का उल्लंघन बताते हुए कहा कि इस प्रकार का निर्णय ग्रामीण उपभोक्ताओं के साथ अन्याय है। उन्होंने कहा कि पहले ही ग्रामीण क्षेत्रों में गैस की उपलब्धता और वितरण में कई समस्याएं बनी रहती हैं, ऐसे में बुकिंग अंतराल बढ़ाना उनकी परेशानियों को और बढ़ा देगा। ज्ञापन में मांग की गई है कि उक्त निर्णय को तत्काल प्रभाव से वापस लेकर शहरी और ग्रामीण उपभोक्ताओं के लिए समान बुकिंग व्यवस्था लागू की जाए, ताकि सभी को समान सुविधा मिल सके। इस ज्ञापन पर ग्राम पंचायत राघुवाला के अनेक जनप्रतिनिधियों व ग्रामीणों के हस्ताक्षर हैं, जिन्होंने सरकार से शीघ्र सकारात्मक कार्रवाई की उम्मीद जताई है। ज्ञापन देने वालों में मास्टर हरकेश सिंह, रमेश शर्मा, सत्य प्रकाश सिंह, देवेंद्र सिंह,अनमोल सिंह, जयप्रकाश सिंह ,बबीता देवी,भारती देवी, सरोज देवी, राम अवतार ,शीला देवी, रमेश सिंह ,पूर्व प्रधान इलियास अंसारी आदि मौजूद रहे ।
Aks@Tkd news ठाकुरद्वारा। अमृत विचार : ब्लॉक ठाकुरद्वारा क्षेत्र की ग्राम पंचायत राघुवाला के ग्रामीणों ने रसोई गैस बुकिंग व्यवस्था में कथित भेदभाव को लेकर प्रधानमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन भेजकर निर्णय वापस लेने की मांग की है। ज्ञापन में बताया गया कि 12 मार्च 2026 को केन्द्रीय मंत्री परिषद द्वारा लिए गए निर्णय के तहत शहरी उपभोक्ताओं को 25 दिन के अंतराल पर गैस बुकिंग की सुविधा दी गई है, जबकि ग्रामीण उपभोक्ताओं के लिए यह अवधि 45 दिन निर्धारित की गई है। ग्रामीणों का आरोप है कि यह व्यवस्था शहरी और ग्रामीण जनता के बीच स्पष्ट भेदभाव पैदा करती है। ग्रामीणों ने इसे संविधान के अनुच्छेद 14 में प्रदत्त समानता के अधिकार का उल्लंघन बताते हुए कहा कि इस प्रकार का निर्णय ग्रामीण उपभोक्ताओं के साथ अन्याय है। उन्होंने कहा कि पहले ही ग्रामीण क्षेत्रों में गैस की उपलब्धता और वितरण में कई समस्याएं बनी रहती हैं, ऐसे में बुकिंग अंतराल बढ़ाना उनकी परेशानियों को और बढ़ा देगा। ज्ञापन में मांग की गई है कि उक्त निर्णय को तत्काल प्रभाव से वापस लेकर शहरी और ग्रामीण उपभोक्ताओं के लिए समान बुकिंग व्यवस्था लागू की जाए, ताकि सभी को समान सुविधा मिल सके। इस ज्ञापन पर ग्राम पंचायत राघुवाला के अनेक जनप्रतिनिधियों व ग्रामीणों के हस्ताक्षर हैं, जिन्होंने सरकार से शीघ्र सकारात्मक कार्रवाई की उम्मीद जताई है। ज्ञापन देने वालों में मास्टर हरकेश सिंह, रमेश शर्मा, सत्य प्रकाश सिंह, देवेंद्र सिंह,अनमोल सिंह, जयप्रकाश सिंह ,बबीता देवी,भारती देवी, सरोज देवी, राम अवतार ,शीला देवी, रमेश सिंह ,पूर्व प्रधान इलियास अंसारी आदि मौजूद रहे ।
- ठाकुरद्वारा : ब्लॉक ठाकुरद्वारा में आज दिनांक 1 अप्रैल को विशेष संचारी रोग नियंत्रण अभियान एवं दस्तक अभियान का शुभारंभ रैली निकालकर किया गया। यह अभियान 1 अप्रैल (आज बुधवार ) से 30 अप्रैल तक चलेगा, जिसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में संचारी रोगों की रोकथाम एवं जागरूकता फैलाना है। बुधवार को कार्यक्रम का शुभारंभ खंड विकास अधिकारी ठाकुरद्वारा उमाकांत मुदगल ने किया। इस अवसर पर उनके साथ प्रधान संघ अध्यक्ष एवं ग्राम प्रधान सुरजन नगर वीर सिंह, सहायक विकास अधिकारी पंचायत ठाकुरद्वारा योगेंद्र सिंह, ब्लॉक कोर्डिनेटर पुष्पेंद्र सिंह, रिंकू सिंह तथा ब्लॉक के समस्त स्टाफ मौजूद रहे। सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने रैली में प्रतिभाग कर लोगों को संचारी रोगों से बचाव, साफ-सफाई, मच्छरजनित बीमारियों से सुरक्षा एवं घर-घर दस्तक देकर स्वास्थ्य परीक्षण के प्रति जागरूक किया। अधिकारियों ने बताया कि माह भर चलने वाले इस अभियान के तहत स्वास्थ्य विभाग की टीमें गांव-गांव जाकर लोगों को रोगों से बचाव के उपाय बताएंगी और आवश्यक दवाइयां भी वितरित करेंगी। इस दौरान खंड विकास अधिकारी ने सभी को अभियान को सफल बनाने एवं अधिक से अधिक लोगों को इससे जोड़ने का आह्वान किया।1
- बरेली कॉलेज के कैंपस में आज भारी हंगामा देखने को मिला। चीफ प्रॉक्टर आलोक खरे द्वारा नवरात्रि के पावन पर्व पर एक महिला साध्वी के खिलाफ की गई अमर्यादित फेसबुक पोस्ट से छात्रों का गुस्सा फूट पड़ा। एबीवीपी कार्यकर्ताओं और छात्राओं ने प्राचार्य कार्यालय का घेराव कर जमकर नारेबाजी की। विवाद इतना बढ़ा कि चीफ प्रॉक्टर के साथ हाथापाई तक की नौबत आ गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए कॉलेज प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए आलोक खरे को पद से बर्खास्त कर दिया है। उनकी जगह अब प्रोफेसर इंदिवर सिंह चौहान को नया चीफ प्रॉक्टर नियुक्त किया गया है। क्या एक जिम्मेदार पद पर बैठे व्यक्ति को ऐसी भाषा शोभा देती है? अपनी राय कमेंट में जरूर दें।1
- *पानी की टंकी पर लटका मिला युवक का शव, इलाके में मचा हड़कंप*1
- श्रीसत्यनारायणभगवान जी की कथा के बाद आरती...1
- Moradabadथाना सिविल लाईन पुलिस द्वारा 01 चरस तस्कर को पुलिस मुठभेड़ में किया गया गिरफ्तार, जिसके सम्बन्ध में पुलिस अधीक्षक नगर, मुरादाबाद की बाइट ।*1
- कालाढुंगी (चकलुवा) से बड़ी खबर कालाढुंगी क्षेत्र के चकलुवा में एक सनसनीखेज मामला सामने आया है, जहां एक युवक पर जानलेवा हमला करने की कोशिश की गई। प्राप्त जानकारी के अनुसार, चकलुवा निवासी हिमांशु देवपा अपने परिजनों के साथ अपनी गाड़ी पर बैठे हुए थे, तभी अचानक एक ट्रैक्टर चालक ने उन पर हमला कर दिया। बताया जा रहा है कि ट्रैक्टर सवार युवक ने बार-बार उन्हें कुचलने की कोशिश की। स्थिति को भांपते हुए हिमांशु देवपा ने मौके से भागकर अपनी जान बचाई। घटना के बाद आरोपी युवक मौके से फरार हो गया। यह पूरी घटना पास में लगे CCTV कैमरे में कैद हो गई है, जो अब पुलिस जांच का अहम हिस्सा बन चुकी है। पुलिस जांच में जुटी घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी है। आरोपी की तलाश जारी है।1
- Post by वसीम खान संपादक1
- इन दिनों उत्तराखंड की राजनीति में भीमताल विधानसभा एक ऐसे प्रसंग का साक्षी बनती दिखाई दे रही है, जहाँ एक व्यक्ति की उपस्थिति मात्र से विमर्श की दिशा परिवर्तित होती प्रतीत हो रही है। लाखन सिंह नेगी का कांग्रेस में प्रवेश केवल राजनीतिक औपचारिकता भर नहीं, बल्कि उस अंतर्धारा का संकेत भी माना जा सकता है, जो सत्ता और प्रतिरोध के बीच निरंतर प्रवाहित होती रहती है। जिला पंचायत सदस्य अपहरण कांड ने जिस प्रकार लोकतांत्रिक संस्थाओं की संवेदनशीलता पर प्रश्नचिह्न अंकित किए, और उसके साथ-साथ जिन परिस्थितियों में नेगी के व्यक्तिगत व सामाजिक जीवन को प्रभावित करने के प्रयासों की चर्चाएँ सामने आईं, उसने इस समूचे घटनाक्रम को एक व्यापक राजनीतिक आख्यान में परिवर्तित कर दिया। ऐसे समय में, जब सत्ता का प्रभाव अनेक स्तरों पर अनुभव किया जाता है, उसके प्रतिकूल खड़े रहना केवल राजनीतिक साहस का नहीं, बल्कि धैर्य और स्थिरता का भी परिचायक माना जाता है। हिमालय की भाँति अडिग रहने का रूपक यहाँ मात्र अलंकार नहीं, बल्कि उस मनोवृत्ति का संकेत है, जो प्रतिकूल परिस्थितियों में भी स्वयं को विचलित नहीं होने देती। किंतु राजनीति केवल प्रतीकों और रूपकों की भूमि नहीं होती; वह परिणामों की कसौटी पर भी परखी जाती है। अतः 2027 का चुनावी परिदृश्य यह निर्धारित करेगा कि यह संघर्षशील छवि और जन-आकांक्षाओं का यह संयोग किस दिशा में परिणत होता है क्या यह जनादेश में रूपांतरित होगा, या फिर समय की धारा कोई अन्य कथा रच देगी। फिलहाल इतना अवश्य कहा जा सकता है कि लाखन सिंह नेगी का कांग्रेस के चेहरे के तौर पर यह आगमन भीमताल ही नहीं, बल्कि उत्तराखंड की समकालीन राजनीति में एक नए अध्याय की प्रस्तावना जैसा प्रतीत होता है, जिसकी पूर्ण कथा अभी लिखी जानी शेष है।1