राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जयपुर तथा अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण खैरथल, शैलेंद्र व्यास के दिशा-निर्देशानुसार, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण खैरथल के सचिव अजीत कुडी ने शनिवार को स्वयं सिद्धा आश्रम, खैरथल का औचक निरीक्षण किया। इस निरीक्षण का मुख्य उद्देश्य आश्रम में रह रहे असहाय और वृद्धजनों को मिलने वाली सुविधाओं की जमीनी हकीकत को जांचना और विधिक सेवा प्राधिकरण के नियमों के तहत उनके अधिकारों की रक्षा करना था। निरीक्षण के दौरान सचिव ने पूरे परिसर का बारीकी से अवलोकन किया, जिसमें आश्रम की मूलभूत सुविधाओं, वृद्धजनों के दैनिक उपयोग की वस्तुओं, रसोई घर की स्थिति, शौचालय, स्नानागार की स्वच्छता, कमरों, साफ-सफाई, बिस्तरों, गद्दों, फर्नीचर और कार्यालय के महत्वपूर्ण रजिस्टरों का गहनता से भौतिक सत्यापन किया गया। आश्रम में सात से आठ वृद्धजन उपस्थित पाए गए, जिनसे अजीत कुडी ने आत्मीयता से बातचीत की, उनके स्वास्थ्य, भोजन-पानी की गुणवत्ता और चिकित्सा सुविधाओं की जानकारी ली। प्राप्त फीडबैक के आधार पर, उन्होंने मौके पर उपस्थित प्रबंधन को वृद्धजनों के बेहतर रख-रखाव और मानसिक व शारीरिक स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देने के आवश्यक निर्देश दिए। इस प्रशासनिक कार्यवाही के समय आश्रम के मुख्य संचालक अनुपस्थित थे, और व्यवस्थापक के रूप में कमलेश कुमार उपस्थित मिले, जिनसे संपूर्ण व्यवस्थाओं के संबंध में पूछताछ की गई। पूछताछ और रिकॉर्ड की जांच से पता चला कि आश्रम की कुल क्षमता 50 व्यक्तियों की है, लेकिन यह संस्थान वर्तमान में एक निजी किराए के मकान में संचालित हो रहा है, जिसमें कुल आठ व्यक्तियों का स्टाफ कार्यरत है। भौतिक निरीक्षण के दौरान यह भी पाया गया कि आश्रम के सभी कमरों में वृद्धजनों को गर्मी से राहत देने के लिए पंखों की व्यवस्था सुचारू रूप से थी, और रसोई घर में निर्धारित मेनू के अनुसार दाल और चपाती तैयार की जा रही थी। हालांकि, विस्तृत निरीक्षण में आश्रम प्रबंधन की कई बेहद गंभीर कमियां, प्रशासनिक खामियां और बड़ी लापरवाही के मामले सामने आए। सबसे चिंताजनक बात यह थी कि वृद्धजनों के स्वास्थ्य परीक्षण के लिए कोई नियमित डॉक्टरों की विजिट या जांच शिविर आयोजित नहीं किए जा रहे थे। इससे भी गंभीर लापरवाही यह उजागर हुई कि बुजुर्गों को बीमार होने पर बिना किसी अधिकृत चिकित्सक के लिखित परामर्श या प्रेस्क्रिप्शन के ही सीधे दवाइयां दी जा रही थीं, जो उनके स्वास्थ्य के लिए अत्यंत घातक हो सकती हैं। इसके अतिरिक्त, बुजुर्गों को अपने दैनिक कपड़े स्वयं हाथ से धोने पड़ते थे, जिसके लिए प्रबंधन केवल साबुन या सर्फ जैसी बुनियादी सामग्री ही उपलब्ध करवाता था। सुरक्षा व्यवस्था में भी भारी लापरवाही देखने को मिली, जहां पूरे परिसर के सीसीटीवी कैमरों में से केवल दो ही चालू पाए गए, जबकि बाकी सभी महत्वपूर्ण स्थानों पर लगे कैमरे बंद और निष्क्रिय थे, जिससे अंतःवासियों की सुरक्षा 'भगवान भरोसे' नजर आई। सचिव अजीत कुडी ने आश्रम में मिली इन तमाम अव्यवस्थाओं, सुरक्षात्मक कमियों और चिकित्सकीय लापरवाही पर गहरी नाराजगी और चिंता व्यक्त की। उन्होंने व्यवस्थापक कमलेश कुमार को चेतावनी देते हुए निर्देश दिए कि इन सभी कमियों को बिना देरी तुरंत सुधारा जाए। विशेष रूप से, उन्होंने वृद्धजनों के लिए डॉक्टरों की नियमित विजिट सुनिश्चित करने, बिना डॉक्टरी पर्ची के कोई दवा न देने, बंद पड़े सभी सीसीटीवी कैमरों को तत्काल ठीक करवाकर चालू करने तथा नियमानुसार उच्च स्तरीय चिकित्सा, बेहतर स्वच्छता व अन्य आवश्यक मूलभूत सुविधाएं मुहैया कराने का पाबंद किया, ताकि उनके गरिमामय जीवन के अधिकार का उल्लंघन न हो।
राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण जयपुर तथा अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण खैरथल, शैलेंद्र व्यास के दिशा-निर्देशानुसार, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण खैरथल के सचिव अजीत कुडी ने शनिवार को स्वयं सिद्धा आश्रम, खैरथल का औचक निरीक्षण किया। इस निरीक्षण का मुख्य उद्देश्य आश्रम में रह रहे असहाय और वृद्धजनों को मिलने वाली सुविधाओं की जमीनी हकीकत को जांचना और विधिक सेवा प्राधिकरण के नियमों के तहत उनके अधिकारों की रक्षा करना था। निरीक्षण के दौरान सचिव ने पूरे परिसर का बारीकी से अवलोकन किया, जिसमें आश्रम की मूलभूत सुविधाओं, वृद्धजनों के दैनिक उपयोग की वस्तुओं, रसोई घर की स्थिति, शौचालय, स्नानागार की स्वच्छता, कमरों, साफ-सफाई, बिस्तरों, गद्दों, फर्नीचर और कार्यालय के महत्वपूर्ण रजिस्टरों का गहनता से भौतिक सत्यापन किया गया। आश्रम में सात से आठ वृद्धजन उपस्थित पाए गए, जिनसे अजीत कुडी ने आत्मीयता से बातचीत की, उनके स्वास्थ्य, भोजन-पानी की गुणवत्ता और चिकित्सा सुविधाओं की जानकारी ली। प्राप्त फीडबैक के आधार पर, उन्होंने मौके पर उपस्थित प्रबंधन को वृद्धजनों के बेहतर रख-रखाव और मानसिक व शारीरिक स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देने के आवश्यक निर्देश दिए। इस प्रशासनिक कार्यवाही के समय आश्रम के
मुख्य संचालक अनुपस्थित थे, और व्यवस्थापक के रूप में कमलेश कुमार उपस्थित मिले, जिनसे संपूर्ण व्यवस्थाओं के संबंध में पूछताछ की गई। पूछताछ और रिकॉर्ड की जांच से पता चला कि आश्रम की कुल क्षमता 50 व्यक्तियों की है, लेकिन यह संस्थान वर्तमान में एक निजी किराए के मकान में संचालित हो रहा है, जिसमें कुल आठ व्यक्तियों का स्टाफ कार्यरत है। भौतिक निरीक्षण के दौरान यह भी पाया गया कि आश्रम के सभी कमरों में वृद्धजनों को गर्मी से राहत देने के लिए पंखों की व्यवस्था सुचारू रूप से थी, और रसोई घर में निर्धारित मेनू के अनुसार दाल और चपाती तैयार की जा रही थी। हालांकि, विस्तृत निरीक्षण में आश्रम प्रबंधन की कई बेहद गंभीर कमियां, प्रशासनिक खामियां और बड़ी लापरवाही के मामले सामने आए। सबसे चिंताजनक बात यह थी कि वृद्धजनों के स्वास्थ्य परीक्षण के लिए कोई नियमित डॉक्टरों की विजिट या जांच शिविर आयोजित नहीं किए जा रहे थे। इससे भी गंभीर लापरवाही यह उजागर हुई कि बुजुर्गों को बीमार होने पर बिना किसी अधिकृत चिकित्सक के लिखित परामर्श या प्रेस्क्रिप्शन के ही सीधे दवाइयां दी जा रही
थीं, जो उनके स्वास्थ्य के लिए अत्यंत घातक हो सकती हैं। इसके अतिरिक्त, बुजुर्गों को अपने दैनिक कपड़े स्वयं हाथ से धोने पड़ते थे, जिसके लिए प्रबंधन केवल साबुन या सर्फ जैसी बुनियादी सामग्री ही उपलब्ध करवाता था। सुरक्षा व्यवस्था में भी भारी लापरवाही देखने को मिली, जहां पूरे परिसर के सीसीटीवी कैमरों में से केवल दो ही चालू पाए गए, जबकि बाकी सभी महत्वपूर्ण स्थानों पर लगे कैमरे बंद और निष्क्रिय थे, जिससे अंतःवासियों की सुरक्षा 'भगवान भरोसे' नजर आई। सचिव अजीत कुडी ने आश्रम में मिली इन तमाम अव्यवस्थाओं, सुरक्षात्मक कमियों और चिकित्सकीय लापरवाही पर गहरी नाराजगी और चिंता व्यक्त की। उन्होंने व्यवस्थापक कमलेश कुमार को चेतावनी देते हुए निर्देश दिए कि इन सभी कमियों को बिना देरी तुरंत सुधारा जाए। विशेष रूप से, उन्होंने वृद्धजनों के लिए डॉक्टरों की नियमित विजिट सुनिश्चित करने, बिना डॉक्टरी पर्ची के कोई दवा न देने, बंद पड़े सभी सीसीटीवी कैमरों को तत्काल ठीक करवाकर चालू करने तथा नियमानुसार उच्च स्तरीय चिकित्सा, बेहतर स्वच्छता व अन्य आवश्यक मूलभूत सुविधाएं मुहैया कराने का पाबंद किया, ताकि उनके गरिमामय जीवन के अधिकार का उल्लंघन न हो।
- अब घरों के भीतर दुकानें खोली नहीं जा सकेंगी। इसके साथ ही, ई-मित्र सहित कुल 17 सेवाओं पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया है।1
- राजस्थान के कोटपुतली बहरोड़ जिले की बानसूर तहसील के चीपड़ी गांव, पोस्ट हरसौरा में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत चल रहे सड़क निर्माण कार्य में गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाया गया है। स्थानीय निवासियों के अनुसार, लगभग 11 किलोमीटर लंबी इस सड़क के निर्माण में घटिया सामग्री का प्रयोग किया जा रहा है। विशेष रूप से, ठेकेदार के माध्यम से किए जा रहे पीसीसी (PCC) कार्य में गुणवत्ताहीन सामग्री का इस्तेमाल हो रहा है। जब इस संबंध में ठेकेदार के कर्मचारियों से पूछताछ की गई, तो उन्होंने कथित तौर पर कहा कि "यह ऐसे ही चलेगा और हम इसी तरीके से काम करेंगे।" इस जवाब से स्थानीय लोगों में गहरा रोष है, जिन्होंने इस मामले में समाधान और हस्तक्षेप की गुहार लगाई है।4
- अलवर में स्थित 'सिलीसेढ़ लेक पैलेस' अरावली की पहाड़ियों के मध्य एक बेहद खूबसूरत और ऐतिहासिक स्थल है। यह अलवर शहर से लगभग 13-14 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है और सरिस्का टाइगर रिजर्व के मार्ग में पड़ता है।1
- कोटपूतली-बहरोड़ जिले की बेटी और चौमूं के चित्तवाडी की बहू अनु मीणा ने अपने घर में फाँसी लगाकर आत्महत्या कर ली है। आरोप है कि उनके पति गौतम मीणा उन्हें रोज़ प्रताड़ित करते थे, जिससे पति-पत्नी का रिश्ता शर्मसार हुआ है। यह घटना सामने आने के बाद इलाके में आक्रोश है और अनु मीणा के लिए न्याय की मांग उठ रही है। इस मामले में सचिव कांग्रेस सेक्रेटरी शीशराम गुर्जर ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने बताया कि सरकार और प्रशासन ने इस विषय पर विचार करने के लिए दो दिन का समय मांगा है। गुर्जर ने स्पष्ट किया कि वे अनु मीणा को न्याय दिलाने के लिए किसी भी हद तक पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि दो दिन के भीतर न्याय नहीं मिला, तो वे शहीद स्मारक पर धरने पर बैठेंगे और प्रदर्शन करेंगे।1
- भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के खजाने से ₹8.7 करोड़ की बड़ी चोरी का मामला सामने आया है। इस चोरी से जुड़ी जानकारी अहमदाबाद से बताई जा रही है। हालांकि, पोस्ट में इस बात को लेकर उत्सुकता जताई गई है कि आखिर इस चोरी का खुलासा कैसे हुआ, लेकिन फिलहाल इस संबंध में कोई विस्तृत विवरण उपलब्ध नहीं है।1