देश की सबसे बड़ी कोयला खदानों में से एक गेवरा खदान में मानसून की शुरुआती बारिश ने गंभीर हालात पैदा कर दिए हैं, जहाँ पूरा खदान परिसर खतरनाक दलदल और पानी के अथाह समंदर में तब्दील हो गया है। इस स्थिति ने वहाँ काम कर रही पीएनसी (PNC) कंपनी के सभी दावों और तैयारियों की पोल खोल दी है। सामने आए वीडियो में स्पष्ट दिख रहा है कि खदान के भीतर चारों ओर सिर्फ पानी और कीचड़ का सैलाब है, जिसमें करोड़ों रुपये की भारी-भरकम गाड़ियाँ और डंपर रेंगने को मजबूर हैं, जिससे किसी भी वक्त एक बड़े हादसे का खतरा मंडरा रहा है। आश्चर्यजनक रूप से, इतनी बड़ी कंपनी होने के बावजूद खदान के भीतर से पानी निकासी का कोई पुख्ता इंतजाम नहीं किया गया है। नियमों के अनुसार, मानसून से पहले खदानों में पानी निकासी के लिए विशेष पंप और नालियों की व्यवस्था होनी चाहिए ताकि काम सुचारु रूप से चलता रहे और मजदूरों की जान जोखिम में न पड़े, लेकिन पीएनसी कंपनी ने इन नियमों की पूरी तरह अनदेखी की है। इस बदहाली से कई गंभीर सवाल खड़े होते हैं: मजदूरों की जान से खिलवाड़ हो रहा है क्योंकि खदान के रास्ते पानी में डूबे हैं और दृश्यता कम होने के कारण डंपर चालकों के लिए गाड़ी चलाना मौत को दावत देने जैसा है। इसके चलते करोड़ों का नुकसान भी हो रहा है, क्योंकि पानी भरे होने से कोयला परिवहन पूरी तरह बाधित है, जिससे न केवल कंपनी बल्कि राजस्व को भी भारी क्षति पहुँच रही है। कंपनी प्रबंधन इस बदहाली के बावजूद गहरी नींद में है, और सवाल उठता है कि क्या किसी बड़े हादसे के बाद ही उनकी नींद टूटेगी। खदान के भीतर काम करने वाले कर्मचारियों में इस स्थिति को लेकर भारी आक्रोश है, उनका कहना है कि हर साल करोड़ों का टर्नओवर करने वाली कंपनी पानी निकालने का एक छोटा सा जुगाड़ तक नहीं कर पाई। अब यह देखना बाकी है कि इस वीडियो के सामने आने के बाद माइनिंग विभाग और प्रशासन पीएनसी कंपनी पर क्या कार्रवाई करते हैं, या फिर अधिकारियों की साठगांठ से इस गंभीर लापरवाही को हमेशा की तरह दबा दिया जाएगा।
देश की सबसे बड़ी कोयला खदानों में से एक गेवरा खदान में मानसून की शुरुआती बारिश ने गंभीर हालात पैदा कर दिए हैं, जहाँ पूरा खदान परिसर खतरनाक दलदल और पानी के अथाह समंदर में तब्दील हो गया है। इस स्थिति ने वहाँ काम कर रही पीएनसी (PNC) कंपनी के सभी दावों और तैयारियों की पोल खोल दी है। सामने आए वीडियो में स्पष्ट दिख रहा है कि खदान के भीतर चारों ओर सिर्फ पानी और कीचड़ का सैलाब है, जिसमें करोड़ों रुपये की भारी-भरकम गाड़ियाँ और डंपर रेंगने को मजबूर हैं, जिससे किसी भी वक्त एक बड़े हादसे का खतरा मंडरा रहा है। आश्चर्यजनक रूप से, इतनी बड़ी कंपनी होने के बावजूद खदान के भीतर से पानी निकासी का कोई पुख्ता इंतजाम नहीं किया गया है। नियमों के अनुसार, मानसून से पहले खदानों में पानी निकासी के लिए विशेष पंप और नालियों की व्यवस्था होनी चाहिए ताकि काम सुचारु रूप से चलता रहे और मजदूरों की जान जोखिम में न पड़े, लेकिन पीएनसी कंपनी ने इन नियमों की पूरी तरह अनदेखी की है। इस बदहाली से
कई गंभीर सवाल खड़े होते हैं: मजदूरों की जान से खिलवाड़ हो रहा है क्योंकि खदान के रास्ते पानी में डूबे हैं और दृश्यता कम होने के कारण डंपर चालकों के लिए गाड़ी चलाना मौत को दावत देने जैसा है। इसके चलते करोड़ों का नुकसान भी हो रहा है, क्योंकि पानी भरे होने से कोयला परिवहन पूरी तरह बाधित है, जिससे न केवल कंपनी बल्कि राजस्व को भी भारी क्षति पहुँच रही है। कंपनी प्रबंधन इस बदहाली के बावजूद गहरी नींद में है, और सवाल उठता है कि क्या किसी बड़े हादसे के बाद ही उनकी नींद टूटेगी। खदान के भीतर काम करने वाले कर्मचारियों में इस स्थिति को लेकर भारी आक्रोश है, उनका कहना है कि हर साल करोड़ों का टर्नओवर करने वाली कंपनी पानी निकालने का एक छोटा सा जुगाड़ तक नहीं कर पाई। अब यह देखना बाकी है कि इस वीडियो के सामने आने के बाद माइनिंग विभाग और प्रशासन पीएनसी कंपनी पर क्या कार्रवाई करते हैं, या फिर अधिकारियों की साठगांठ से इस गंभीर लापरवाही को हमेशा की तरह दबा दिया जाएगा।
- कोरबा जिले के तरदा गांव में आधी रात चोरों ने धावा बोला। इस दौरान उन्होंने तीन दुकानों के ताले और शटर तोड़ दिए।1
- भीम रेजीमेंट ने पशु विभाग की बड़ी लापरवाही को लेकर कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक (एसपी) को एक ज्ञापन सौंपा है।1
- बिलासपुर प्रेस क्लब के कार्यक्रम "हमर पहुना" में शामिल हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश कुमार सिंह ने पुलिसिंग, कानून व्यवस्था, साइबर अपराध, नशा मुक्ति और युवाओं की भूमिका जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर खुलकर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने जोर देकर कहा कि पुलिस की वास्तविक शक्ति हथियार या वर्दी में नहीं, बल्कि जनता के भरोसे में निहित है। संवाद के दौरान, एसएसपी ने अपने व्यक्तिगत सफर को साझा किया, जिसमें ग्वालियर में एसपी कार्यालय के पास पढ़ाई करते हुए उनके भीतर एक पुलिस अधिकारी बनने का सपना पनपा। लोक सेवा आयोग की परीक्षा में सफलता हासिल करने के बाद, उन्होंने बस्तर से अपने पुलिस करियर की शुरुआत की और कई चुनौतीपूर्ण जिलों में सफलतापूर्वक अपनी सेवाएं दीं। बिलासपुर में पुलिस की कार्यप्रणाली पर प्रकाश डालते हुए, उन्होंने बताया कि यहाँ अपराधियों के खिलाफ लगातार सख्त कार्रवाई की जा रही है। गंभीर मामलों में 22 अपराधियों को आजीवन कारावास दिलवाना और लगभग 9.5 करोड़ रुपये की अवैध संपत्ति जब्त करना, पुलिस की प्रभावी कार्यशैली की प्रमुख उपलब्धियाँ हैं। उन्होंने यह भी बताया कि महिला सुरक्षा, नशा उन्मूलन और साइबर अपराध नियंत्रण वर्तमान में बिलासपुर पुलिस की शीर्ष प्राथमिकताओं में शामिल हैं। साइबर ठगी से बचाव के प्रयासों के बारे में, एसएसपी ने जानकारी दी कि थाना स्तर पर "हमर संगवारी" समूह गठित किए गए हैं, जिनके माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को डिजिटल सुरक्षा के संबंध में आवश्यक जानकारी प्रदान की जा रही है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि आधुनिक पुलिसिंग का मुख्य उद्देश्य केवल अपराधियों को पकड़ना ही नहीं है, बल्कि अपराध होने से पहले ही लोगों को जागरूक करना भी है। कार्यक्रम के समापन पर, एसएसपी ने युवाओं को राष्ट्र निर्माण, कानून का सम्मान करने और सामाजिक जिम्मेदारियों का निर्वहन करने का महत्वपूर्ण संदेश दिया। अंत में, बिलासपुर प्रेस क्लब ने उनका सम्मान किया, जिसमें प्रेस क्लब के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में वरिष्ठ पत्रकार उपस्थित रहे।2
- बिलासपुर हाईकोर्ट ने बारिश के मौसम में बार-बार बिजली गुल होने और घंटों तक आपूर्ति बहाल न होने की गंभीर समस्या पर स्वतः संज्ञान लिया है। यह संज्ञान बिलासपुर क्षेत्र में निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने और संबंधित विभागों की जवाबदेही तय करने के उद्देश्य से लिया गया है। अदालत ने ऊर्जा विभाग, छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड (सीएसपीडीसीएल), और नगर निगम को व्यक्तिगत शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है। इन शपथपत्रों में उन्हें स्पष्ट रूप से बताना होगा कि निर्बाध बिजली आपूर्ति बनाए रखने और जलभराव को रोकने के लिए उन्होंने क्या ठोस कदम उठाए हैं। इस आदेश का संदर्भ हाल ही में हुई बारिश है, जहाँ 11 केवी लाइन पर पेड़ गिरने के कारण कई इलाकों में घंटों तक बिजली बाधित रही थी, जिससे आम जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा था। इस मामले की अगली सुनवाई 7 जुलाई 2026 को निर्धारित की गई है, जिस दिन इन विभागों द्वारा उठाए गए कदमों पर कोर्ट विचार करेगा।1
- बुधवार को बिलासपुर के बेलतरा विधानसभा क्षेत्र के मंगला में लगभग 10 करोड़ रुपये की लागत वाले विभिन्न विकास कार्यों का भूमिपूजन किया गया। यह कार्यक्रम माता चौरा परिसर में आयोजित किया गया, जहाँ केंद्रीय आवासन एवं शहरी विकास राज्य मंत्री तोखन साहू और उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने इन कार्यों की आधारशिला रखी। इस अवसर पर, उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने मंगला के मुक्तिधाम के लिए 50 लाख रुपये, सामुदायिक भवन निर्माण के लिए 1 करोड़ रुपये, और मंगला के लिए एक पृथक जल आवर्धन योजना की भी घोषणा की। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू ने बताया कि केंद्र और राज्य सरकार विकास को एक मिशन के रूप में आगे बढ़ा रही हैं। उन्होंने 'डबल इंजन' सरकार के समन्वित प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि इससे विकास कार्यों में तेजी आई है और अब न केवल भूमिपूजन बल्कि समयबद्ध लोकार्पण भी सुनिश्चित किया जा रहा है। साहू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बिलासपुर सहित पूरे छत्तीसगढ़ में सड़क, रेल, पेयजल और शहरी विकास के क्षेत्र में हो रहे बड़े कार्यों का जिक्र किया, जिनसे आम जनता लाभान्वित हो रही है। उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने जोर दिया कि प्रदेश सरकार विकास कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है, और उन्होंने जानकारी दी कि पिछले दो वर्षों में बिलासपुर नगर निगम को 437 करोड़ रुपये उपलब्ध कराए गए हैं। उन्होंने यह भी आश्वस्त किया कि शहर और आसपास के क्षेत्रों की पेयजल व्यवस्था को भविष्य में और मजबूत किया जाएगा ताकि नागरिकों को पानी की समस्या का सामना न करना पड़े, और जनता की जरूरतों के अनुरूप विकास कार्यों में कोई कमी नहीं आने दी जाएगी। बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला ने बताया कि विधानसभा क्षेत्र में अब तक 1,000 करोड़ रुपये से अधिक के विकास कार्य पूरे किए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में सड़क, नाली, पेयजल, सामुदायिक भवन सहित आधारभूत सुविधाओं का निरंतर विस्तार हो रहा है और विकास की यह गति आगे भी जारी रहेगी। इस कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ पाठ्यपुस्तक निगम के अध्यक्ष राजा पांडे, महापौर पूजा विधानी, जिला पंचायत अध्यक्ष राजेश सूर्यवंशी, नगर निगम आयुक्त प्रकाश सर्वे सहित अनेक जनप्रतिनिधि, अधिकारी और बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक मौजूद रहे। स्थानीय लोगों ने उम्मीद जताई है कि इन विकास कार्यों के पूर्ण होने से मंगला और आसपास के क्षेत्रों में मूलभूत सुविधाएँ बेहतर होंगी, जिससे क्षेत्र के समग्र विकास को नई गति मिलेगी।4
- छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा 200 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित एक सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल को PPP मॉडल पर निजीकरण करने की कथित तैयारियों पर कांग्रेस ने गंभीर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस नेता विजय केशरवानी ने जनता की गाढ़ी कमाई से बने इस अस्पताल को PPP मॉडल पर सौंपने की सरकार की कोशिशों पर चिंता व्यक्त की है, आरोप है कि सरकार इसे निजी हाथों में देने की तैयारी में है।1
- रतनपुर पुलिस ने एक त्वरित कार्रवाई करते हुए 70 लीटर कच्ची महुआ शराब जब्त की है। यह कार्रवाई पुलिस द्वारा लगातार जारी अवैध गतिविधियों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान का हिस्सा है।3
- छत्तीसगढ़ ड्राइवर महासंघ ने सरकार के समक्ष अपनी 15 प्रमुख मांगें प्रस्तुत की हैं। यह जानकारी महासंघ द्वारा सरकार के सामने रखी गई अपनी मुख्य मांगों के संदर्भ में सामने आई है।1
- रायगढ़ पुलिस के "ऑपरेशन क्लीन हंट" अभियान के तहत तमनार पुलिस ने बड़ी सफलता हासिल की है, जिसके तहत CHP चौक लिबरा हिंसा कांड के मुख्य आरोपी राजेश मरकाम को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है। आरोपी राजेश मरकाम पुलिस पर प्राणघातक हमला, लूटपाट, आगजनी, बलवा, शासकीय कार्य में बाधा और आर्म्स एक्ट सहित चार गंभीर आपराधिक मामलों में नामजद था और घटना के बाद से लगातार फरार चल रहा था। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह के निर्देश पर फरार आरोपियों की धरपकड़ के लिए चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत, तमनार और पूंजीपथरा पुलिस की संयुक्त टीम को मुखबिर से सूचना मिली कि आरोपी राजेश मरकाम ग्राम बरपाली आया हुआ है। सूचना मिलने पर पुलिस ने घेराबंदी कर उसे हिरासत में लिया और पूछताछ के बाद विधिवत गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया। पुलिस के अनुसार, यह घटना दिसंबर 2025 से गारे पेलमा सेक्टर-01 कोयला परियोजना की जनसुनवाई के विरोध में CHP चौक लिबरा में चल रहे धरना-प्रदर्शन और आर्थिक नाकेबंदी से जुड़ी है। 27 दिसंबर 2025 को यह आंदोलन हिंसक हो गया, जिसमें आरोपियों ने भीड़ को उकसाकर पुलिस बल पर लाठी, डंडे, टांगी और पत्थरों से हमला कर दिया। इस दौरान कई पुलिसकर्मी घायल हुए, शासकीय वॉकी-टॉकी और मोबाइल लूट लिए गए, साथ ही पुलिस और प्रशासन के वाहनों में तोड़फोड़ कर आग लगा दी गई। प्लांट में भी बड़े पैमाने पर तोड़फोड़ की गई थी। इस हिंसक घटना के संबंध में थाना तमनार में कुल 16 अलग-अलग अपराध दर्ज किए गए हैं। अब तक 22 आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेजा जा चुका है, जबकि अन्य फरार आरोपियों की तलाश जारी है। गिरफ्तार आरोपी राजेश मरकाम थाना तमनार के अपराध क्रमांक 303/2025, 306/2025, 307/2025 और 308/2025 में नामजद था। पूछताछ में उसने आंदोलनकारियों के साथ मिलकर हिंसक घटनाओं में शामिल होने की बात स्वीकार की। विवेचना के दौरान आंदोलनकारियों को दुष्प्रेरित करने में उसकी भूमिका सामने आने पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 49 भी प्रकरण में जोड़ी गई है। एसएसपी शशि मोहन सिंह ने स्पष्ट किया है कि कानून व्यवस्था से खिलवाड़ करने, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और हिंसा फैलाने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे तत्वों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई लगातार जारी रहेगी।2