बुखार का इलाज कराने गए डिगने यादव की इंजेक्शन के बाद बिगड़ी तबीयत, रेफर-दर-रेफर के बीच मौत बुखार का इलाज कराने गए डिगने यादव की इंजेक्शन के बाद बिगड़ी तबीयत, रेफर-दर-रेफर के बीच मौत गरियाबंद। बुखार का इलाज कराने निकले डिगने यादव की मौत के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था और कथित उपचार प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सराईपानी गांव, थाना इंदागांव, ब्लॉक मैनपुर निवासी डिगने यादव को परिजनों के मुताबिक अमलीपदर स्थित एक निजी क्लीनिक में इलाज के लिए ले जाया गया था। यहां उन्हें आर्टीसुनेट इंजेक्शन सहित दवाएं दी गईं। परिजनों का आरोप है कि करीब चार डोज दिए जाने के बाद उनकी तबीयत बिगड़ने लगी। हालांकि, इंजेक्शन और मरीज की मौत के बीच सीधा चिकित्सकीय संबंध है या नहीं, यह जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। लेकिन घटना ने उपचार प्रक्रिया, डॉक्टर की योग्यता, दवाओं के इस्तेमाल और मरीज की बिगड़ती हालत में अपनाई गई चिकित्सा व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। इंजेक्शन के बाद बिगड़ी हालत, फिर शुरू हुआ रेफर का सिलसिला तबीयत बिगड़ने के बाद डिगने यादव को सरकारी अस्पताल अमलीपदर ले जाया गया। वहां से गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें देवभोग रेफर किया गया। परिजनों के अनुसार, देवभोग के बाद मरीज को धर्मगढ़ अस्पताल ले जाना पड़ा। जन्माष्टमी के दिन देवभोग में डॉक्टर की उपलब्धता को लेकर भी परिजनों ने परेशानी का आरोप लगाया है। परिजनों का कहना है कि मरीज को एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल ले जाने के दौरान उसकी हालत लगातार गंभीर होती गई और धर्मगढ़ अस्पताल पहुंचने से पहले ही डिगने यादव की मौत हो गई। परिवार के सामने अब रोजी-रोटी का संकट डिगने यादव परिवार के कमाने वाले सदस्य बताए जा रहे हैं। उनके पीछे पत्नी, बच्चे और बुजुर्ग मां हैं। परिजनों के मुताबिक उनकी पत्नी करीब चार महीने की गर्भवती हैं। ऐसे में परिवार के सामने अब भावनात्मक सदमे के साथ आर्थिक संकट भी खड़ा हो गया है। परिजनों का कहना है कि इलाज के लिए डॉक्टर को करीब दो हजार रुपये दिए गए थे और कुछ राशि बाद में देने की बात हुई थी। परिवार अब जानना चाहता है कि उपचार के दौरान कौन-कौन सी दवाएं दी गईं, इंजेक्शन की कितनी डोज दी गई, किसके निर्देश पर दी गई और मरीज की हालत बिगड़ने के बाद तत्काल क्या चिकित्सा कदम उठाए गए। डॉक्टर की योग्यता और क्लीनिक की वैधता की जांच की मांग मामले में निजी क्लीनिक से जुड़े डॉक्टर मनीष कुमार सिन्हा को लेकर भी परिजन सवाल उठा रहे हैं। परिजनों ने उनके राजनीतिक गतिविधियों से जुड़े होने का दावा किया है। हालांकि किसी राजनीतिक संगठन या पद से जुड़ा होना अपने आप में चिकित्सा लापरवाही का प्रमाण नहीं है। जांच का वास्तविक विषय यह होना चाहिए कि संबंधित चिकित्सक की शैक्षणिक एवं चिकित्सकीय योग्यता क्या है, क्लीनिक के संचालन की अनुमति है या नहीं और संबंधित उपचार व दवाएं देने की उन्हें वैधानिक अनुमति थी या नहीं। परिजनों ने आर्टीसुनेट इंजेक्शन को लेकर भी सवाल उठाए हैं। स्वास्थ्य विभाग की जांच में यह देखा जाना जरूरी होगा कि मरीज को यह दवा किस चिकित्सकीय आधार पर दी गई, दवा कहां से खरीदी गई, उसका बैच नंबर क्या था और उसकी खरीद-बिक्री का रिकॉर्ड उपलब्ध है या नहीं। दूसरे बच्चे की मौत का भी दावा परिजनों ने इस निजी क्लीनिक से जुड़े एक अन्य बच्चे की मौत का मामला पहले भी सामने आने का दावा किया है। हालांकि इस मामले में आधिकारिक जांच हुई थी या नहीं और यदि हुई तो उसका निष्कर्ष क्या रहा, इसकी स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हो सकी है। ऐसे में इस दावे की भी आधिकारिक जांच जरूरी है। स्वास्थ्य विभाग से निष्पक्ष जांच की मांग परिवार ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। इसमें उपचार पर्ची, मेडिकल रिकॉर्ड, इस्तेमाल की गई दवाओं, इंजेक्शन की डोज, डॉक्टर की योग्यता, क्लीनिक की अनुमति तथा दवाओं की खरीद-बिक्री के रिकॉर्ड की जांच शामिल करने की मांग की गई है। साथ ही लापरवाही प्रमाणित होने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई और परिवार को उचित मुआवजा दिए जाने की मांग भी उठाई गई है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि डिगने यादव की मौत आखिर किन परिस्थितियों में हुई? क्या यह बीमारी की गंभीरता का परिणाम था, उपचार के दौरान कोई जटिलता हुई या चिकित्सा प्रक्रिया में कोई लापरवाही हुई—इन सवालों का जवाब पोस्टमार्टम, मेडिकल रिकॉर्ड और विशेषज्ञ जांच से ही सामने आएगा। डिगने यादव अब वापस नहीं आएंगे। लेकिन पीछे छूटे परिवार और आने वाले बच्चे के भविष्य से जुड़ा सवाल जरूर खड़ा है—बुखार का इलाज कराने गए डिगने आखिर घर वापस क्यों नहीं लौटे? अब देखना होगा कि स्वास्थ्य विभाग की जांच इस सवाल का निष्पक्ष जवाब दे पाती है या नहीं।
बुखार का इलाज कराने गए डिगने यादव की इंजेक्शन के बाद बिगड़ी तबीयत, रेफर-दर-रेफर के बीच मौत बुखार का इलाज कराने गए डिगने यादव की इंजेक्शन के बाद बिगड़ी तबीयत, रेफर-दर-रेफर के बीच मौत गरियाबंद। बुखार का इलाज कराने निकले डिगने यादव की मौत के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था और कथित उपचार प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सराईपानी गांव, थाना इंदागांव, ब्लॉक मैनपुर निवासी डिगने यादव को परिजनों के मुताबिक अमलीपदर स्थित एक निजी क्लीनिक में इलाज के लिए ले जाया गया था। यहां उन्हें आर्टीसुनेट इंजेक्शन सहित दवाएं दी गईं। परिजनों का आरोप है कि करीब चार डोज दिए जाने के बाद उनकी तबीयत बिगड़ने लगी। हालांकि, इंजेक्शन और मरीज की मौत के बीच सीधा चिकित्सकीय संबंध है या नहीं, यह जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। लेकिन घटना ने उपचार प्रक्रिया, डॉक्टर की योग्यता, दवाओं के इस्तेमाल और मरीज की बिगड़ती हालत में अपनाई गई चिकित्सा व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। इंजेक्शन के बाद बिगड़ी हालत, फिर शुरू हुआ रेफर का सिलसिला तबीयत बिगड़ने के बाद डिगने यादव को सरकारी अस्पताल अमलीपदर ले जाया गया। वहां से गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें देवभोग रेफर किया गया। परिजनों के अनुसार, देवभोग के बाद मरीज को धर्मगढ़ अस्पताल ले जाना पड़ा। जन्माष्टमी के दिन देवभोग में डॉक्टर की उपलब्धता को लेकर भी परिजनों ने परेशानी का आरोप लगाया है। परिजनों का कहना है कि मरीज को एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल ले जाने के दौरान उसकी हालत लगातार गंभीर होती गई और धर्मगढ़ अस्पताल पहुंचने से पहले ही
डिगने यादव की मौत हो गई। परिवार के सामने अब रोजी-रोटी का संकट डिगने यादव परिवार के कमाने वाले सदस्य बताए जा रहे हैं। उनके पीछे पत्नी, बच्चे और बुजुर्ग मां हैं। परिजनों के मुताबिक उनकी पत्नी करीब चार महीने की गर्भवती हैं। ऐसे में परिवार के सामने अब भावनात्मक सदमे के साथ आर्थिक संकट भी खड़ा हो गया है। परिजनों का कहना है कि इलाज के लिए डॉक्टर को करीब दो हजार रुपये दिए गए थे और कुछ राशि बाद में देने की बात हुई थी। परिवार अब जानना चाहता है कि उपचार के दौरान कौन-कौन सी दवाएं दी गईं, इंजेक्शन की कितनी डोज दी गई, किसके निर्देश पर दी गई और मरीज की हालत बिगड़ने के बाद तत्काल क्या चिकित्सा कदम उठाए गए। डॉक्टर की योग्यता और क्लीनिक की वैधता की जांच की मांग मामले में निजी क्लीनिक से जुड़े डॉक्टर मनीष कुमार सिन्हा को लेकर भी परिजन सवाल उठा रहे हैं। परिजनों ने उनके राजनीतिक गतिविधियों से जुड़े होने का दावा किया है। हालांकि किसी राजनीतिक संगठन या पद से जुड़ा होना अपने आप में चिकित्सा लापरवाही का प्रमाण नहीं है। जांच का वास्तविक विषय यह होना चाहिए कि संबंधित चिकित्सक की शैक्षणिक एवं चिकित्सकीय योग्यता क्या है, क्लीनिक के संचालन की अनुमति है या नहीं और संबंधित उपचार व दवाएं देने की उन्हें वैधानिक अनुमति थी या नहीं। परिजनों ने आर्टीसुनेट इंजेक्शन को लेकर भी सवाल उठाए हैं। स्वास्थ्य विभाग की जांच में यह देखा जाना जरूरी होगा कि मरीज को यह दवा किस चिकित्सकीय आधार पर दी गई, दवा कहां से खरीदी
गई, उसका बैच नंबर क्या था और उसकी खरीद-बिक्री का रिकॉर्ड उपलब्ध है या नहीं। दूसरे बच्चे की मौत का भी दावा परिजनों ने इस निजी क्लीनिक से जुड़े एक अन्य बच्चे की मौत का मामला पहले भी सामने आने का दावा किया है। हालांकि इस मामले में आधिकारिक जांच हुई थी या नहीं और यदि हुई तो उसका निष्कर्ष क्या रहा, इसकी स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हो सकी है। ऐसे में इस दावे की भी आधिकारिक जांच जरूरी है। स्वास्थ्य विभाग से निष्पक्ष जांच की मांग परिवार ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। इसमें उपचार पर्ची, मेडिकल रिकॉर्ड, इस्तेमाल की गई दवाओं, इंजेक्शन की डोज, डॉक्टर की योग्यता, क्लीनिक की अनुमति तथा दवाओं की खरीद-बिक्री के रिकॉर्ड की जांच शामिल करने की मांग की गई है। साथ ही लापरवाही प्रमाणित होने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई और परिवार को उचित मुआवजा दिए जाने की मांग भी उठाई गई है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि डिगने यादव की मौत आखिर किन परिस्थितियों में हुई? क्या यह बीमारी की गंभीरता का परिणाम था, उपचार के दौरान कोई जटिलता हुई या चिकित्सा प्रक्रिया में कोई लापरवाही हुई—इन सवालों का जवाब पोस्टमार्टम, मेडिकल रिकॉर्ड और विशेषज्ञ जांच से ही सामने आएगा। डिगने यादव अब वापस नहीं आएंगे। लेकिन पीछे छूटे परिवार और आने वाले बच्चे के भविष्य से जुड़ा सवाल जरूर खड़ा है—बुखार का इलाज कराने गए डिगने आखिर घर वापस क्यों नहीं लौटे? अब देखना होगा कि स्वास्थ्य विभाग की जांच इस सवाल का निष्पक्ष जवाब दे पाती है या नहीं।
- पखांजूर थाना अंतर्गत 8लीटर अवैध महुआ शराब के साथ पुलिस ने एक आरोपी को किया गिरफ्तार 15 सितंबर शाम साढ़े 5 बजे पुलिस से मिली जानकारी अनुसार,ऑपरेशन उजियारा के तहत,पखांजूर पुलिस ने अवैध शराब के खिलाफ कार्रवाई करते हुए, 8 लीटर हाथभट्ठी निर्मित महुआ शराब के साथ एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार मुखबिर की सूचना पर,पीव्ही 8 चाणक्यपुरी से पीव्ही 31 मार्ग के पास,घेराबंदी कर सुकुमार मल्लिक उम्र 30 वर्ष पिता स्वर्गीय खोखन मल्लिक निवासी पीव्ही 60 यशवंतनगर,थाना पखांजूर को पकड़ा गया। तलाशी में उसके कब्जे से करीब 8 लीटर महुआ शराब बरामद हुई। आरोपी के खिलाफ धारा 34(2) आबकारी अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर विवेचना में लिया। कार्रवाई में थाना प्रभारी निरीक्षक तेज कुमार वर्मा, प्रशिक्षु उप निरीक्षक पीपल राज कंवर, सउनि पुरुषोत्तम ठाकुर,आरक्षक बशीर, व बस्तर फाइटर आरक्षक सरोजित और पवन सोन शामिल रहें1
- गौवंश को कुचलकर ट्रक समेत भागा चालक, तीन दिन बाद पुलिस के शिकंजे में गौवंश को कुचलकर ट्रक समेत भागा चालक, तीन दिन बाद पुलिस के शिकंजे में कानापोड़ के पास तेज रफ्तार ट्रक ने ली गौवंश की जान, चारामा पुलिस ने आरोपी चालक को दबोचा कांकेर। रात के अंधेरे में तेज रफ्तार ट्रक ने गौवंश को कुचल दिया। हादसे में गौवंश की मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद चालक ट्रक लेकर फरार हो गया, लेकिन पुलिस की लगातार तलाश आखिरकार रंग लाई। चारामा पुलिस ने तीन दिन बाद आरोपी ट्रक चालक को पकड़ लिया और वाहन जब्त कर उसे न्यायालय में पेश किया। घटना 12 सितंबर की रात करीब 11:30 बजे कानापोड़ के पास की है। पुलिस को दी गई शिकायत के मुताबिक ट्रक क्रमांक सीजी-04-एनएन-9092 का चालक तेज एवं लापरवाहीपूर्वक वाहन चला रहा था। इसी दौरान ट्रक की चपेट में आने से गौवंश की मौत हो गई। हादसे के बाद चालक मौके पर रुकने के बजाय ट्रक लेकर फरार हो गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए चारामा पुलिस ने अपराध क्रमांक 192/26 दर्ज कर जांच शुरू की। पुलिस टीम ने घटना में इस्तेमाल ट्रक और उसके चालक की तलाश तेज कर दी। लगातार पतासाजी के बाद 15 सितंबर को ट्रक को पकड़ लिया गया। पूछताछ में खुला राज ट्रक को कब्जे में लेने के बाद चालक से पूछताछ की गई। पुलिस के अनुसार पूछताछ में चालक ने घटना को अंजाम देना स्वीकार किया। इसके बाद हितेश्वर यादव (26), पिता ओमप्रकाश यादव, निवासी पर्रेगुड़ा करहीबदर, जिला बालोद को गिरफ्तार कर लिया गया। आरोपी के खिलाफ बीएनएस की संबंधित धाराओं और पशु क्रूरता अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई है। ट्रक जब्त पुलिस ने घटना में प्रयुक्त ट्रक क्रमांक सीजी-04-एनएम-9092 जब्त किया है। आरोपी को न्यायालय के समक्ष पेश किया गया। पुलिस टीम की भूमिका आरोपी की पतासाजी और गिरफ्तारी में चारामा थाना प्रभारी निरीक्षक सुरेश कुमार राठौर, उपनिरीक्षक रूपेन्द्र पटेल और आरक्षक क्रमांक 553 ओमप्रकाश कुंजाम की महत्वपूर्ण भूमिका रही। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी संदिग्ध अथवा आपराधिक गतिविधि की सूचना तत्काल कांकेर पुलिस हेल्पलाइन 9479155125 पर दें। पुलिस के मुताबिक समय पर मिली छोटी-सी सूचना भी किसी बड़े अपराध को रोकने में अहम साबित हो सकती है।1
- कोंडागांव: हड़ेली-बेचा मार्ग निर्माण में देरी पर AAP ने उठाए सवाल, गुणवत्ता जांच की मांग कोंडागांव में हड़ेली-बेचा मार्ग के निर्माण में हो रही देरी और सड़क की गुणवत्ता को लेकर आम आदमी पार्टी ने सवाल उठाए हैं। AAP विधानसभा क्षेत्र नारायणपुर के विधानसभा अध्यक्ष मानसिंग नेताम ने 17.50 किलोमीटर लंबे सड़क निर्माण की उच्चस्तरीय तकनीकी एवं गुणवत्ता जांच की मांग की है। सड़क की स्वीकृत लागत 817.39 लाख रुपये बताई गई है। AAP ने अधूरे पुल-पुलियों का निर्माण जल्द पूरा कराने और अनियमितता पाए जाने पर जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।1
- पार्षद वार्ड के काम को लेकर कटिबंध लेकिन जॉन से उन्हें नहीं मिल रहा है सपोर्ट रायपुर नगर निगम के जोन क्रमांक 5 के अंतर्गत आने वाले वार्ड क्रमांक 60 का मामला1
- गणेश पर्व में हुड़दंग और शांति भंग करने वाले तीन असामाजिक तत्व जेल भेजे गए तिल्दा-नेवरा पुलिस की कार्रवाई, विवाद और मारपीट पर प्रतिबंधात्मक धाराओं के तहत एक्शन तिल्दा-नेवरा। गणेश पर्व के दौरान क्षेत्र में शांति एवं सौहार्दपूर्ण वातावरण बनाए रखने तिल्दा-नेवरा पुलिस द्वारा असामाजिक एवं उपद्रवी तत्वों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में विवाद और लड़ाई-झगड़ा कर शांति भंग करने की स्थिति पैदा करने वाले तीन लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। पुलिस के अनुसार थाना तिल्दा-नेवरा के सामने आम रोड तथा ग्राम किरना में विवाद और लड़ाई-झगड़े की सूचना मिली थी। सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया। पुलिस द्वारा संबंधित लोगों को समझाइश दी गई, लेकिन वे कथित तौर पर उग्र होकर मारपीट करने पर उतारू हो गए। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने प्रतिबंधात्मक धारा 170 बीएनएसएस के तहत तीनों को गिरफ्तार किया। इसके बाद आरोपियों को अनुविभागीय दंडाधिकारी न्यायालय, तिल्दा-नेवरा के समक्ष पेश किया गया। न्यायालय से जेल वारंट जारी होने के बाद तीनों को जेल निरुद्ध कर दिया गया। गिरफ्तार किए गए आरोपी 1. पवन कुमार ध्रुव, पिता मालिक राम ध्रुव, उम्र 31 वर्ष, निवासी वार्ड क्रमांक 15, दीनदयाल चौक, तिल्दा। 2. हीरालाल नवरंगे, पिता स्व. भागीरथी नवरंगे, उम्र 30 वर्ष, निवासी वार्ड क्रमांक 02, प्राथमिक शाला के पीछे, ग्राम सांकरा। 3. उमेश कुमार वर्मा, पिता सुरेश कुमार वर्मा, उम्र 20 वर्ष, निवासी ग्राम किरना। त्यौहार में हुड़दंग करने वालों को स्पष्ट संदेश तिल्दा-नेवरा पुलिस द्वारा गणेश पर्व एवं आगामी त्यौहारों को देखते हुए क्षेत्र में लगातार पेट्रोलिंग, संदिग्ध व्यक्तियों की निगरानी और संवेदनशील इलाकों में भ्रमण किया जा रहा है। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि सार्वजनिक शांति भंग करने, विवाद करने अथवा कानून-व्यवस्था प्रभावित करने वाले लोगों के खिलाफ सख्त वैधानिक एवं प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि गणेश पर्व सहित सभी त्यौहारों को शांतिपूर्ण एवं सौहार्दपूर्ण वातावरण में मनाएं और किसी भी प्रकार के विवाद, हुड़दंग या कानून-व्यवस्था प्रभावित करने वाली गतिविधि से दूर रहें। तिल्दा-नेवरा से पवन बघेल की रिपोर्ट। PNBCG NEWS TILDA NEORA2
- युवती को पकड़कर सड़क किनारे बैठ गया युवक, मदद की गुहार पर जुटी भीड़ गुरुग्राम के सिविल लाइंस इलाके में सड़क किनारे एक युवक अचानक एक युवती को पकड़कर बैठ गया और राहगीरों से मदद की गुहार लगाने लगा। मौके पर भीड़ जुट गई और लोग वीडियो बनाने लगे। युवती ने लोगों से कैमरा बंद करने की अपील की। सूचना मिलने पर पुलिस ने युवक को शांत कराया। जांच में सामने आया कि युवक दिल्ली के उत्तम नगर का रहने वाला है और मानसिक तनाव से गुजर रहा है। परिजनों द्वारा इलाज से जुड़े दस्तावेज दिखाने के बाद पुलिस ने उसे परिवार के सुपुर्द कर दिया। ऐसी स्थिति में वीडियो बनाने के बजाय युवती को पकड़कर सड़क किनारे बैठ गया युवक, मदद की गुहार पर जुटी भीड़ गुरुग्राम के सिविल लाइंस इलाके में सड़क किनारे एक युवक अचानक एक युवती को पकड़कर बैठ गया और राहगीरों से मदद की गुहार लगाने लगा। मौके पर भीड़ जुट गई और लोग वीडियो बनाने लगे। युवती ने लोगों से कैमरा बंद करने की अपील की। सूचना मिलने पर पुलिस ने युवक को शांत कराया। जांच में सामने आया कि युवक दिल्ली के उत्तम नगर का रहने वाला है और मानसिक तनाव से गुजर रहा है। परिजनों द्वारा इलाज से जुड़े दस्तावेज दिखाने के बाद पुलिस ने उसे परिवार के सुपुर्द कर दिया। ऐसी स्थिति में वीडियो बनाने के बजाय संवेदनशीलता और मदद को प्राथमिकता देना जरूरी है।1
- ऑपरेशन उजियारा के तहत पखांजूर पुलिस की कार्रवाई, 8 लीटर हाथभट्ठी महुआ शराब जब्त महुआ शराब बेचने निकला था आरोपी, पुलिस ने रास्ते में दबोचा ऑपरेशन उजियारा के तहत पखांजूर पुलिस की कार्रवाई, 8 लीटर हाथभट्ठी महुआ शराब जब्त कांकेर। अवैध शराब के कारोबार पर शिकंजा कसने के लिए चलाए जा रहे ऑपरेशन उजियारा के तहत पखांजूर पुलिस ने एक और कार्रवाई की है। ग्राहक तलाश रहे एक व्यक्ति को पुलिस ने घेराबंदी कर पकड़ लिया। तलाशी में उसके कब्जे से 8 लीटर हाथभट्ठी निर्मित महुआ शराब बरामद हुई। जब्त शराब की कीमत करीब 960 रुपए बताई गई है। पुलिस को 15 सितंबर को मुखबिर से सूचना मिली थी कि पी.व्ही.-60 यशवंतनगर निवासी सुकुमार मल्लिक (30) अवैध रूप से महुआ शराब रखकर उसे बेचने के लिए ग्राहक तलाश रहा है। सूचना मिलते ही पुलिस टीम सक्रिय हुई और पी.व्ही.-08 चाणक्यपुरी से पी.व्ही.-31 जाने वाले मार्ग के पास घेराबंदी कर संदिग्ध को धर दबोचा। तलाशी के दौरान उसके कब्जे से 8 लीटर महुआ शराब बरामद हुई। पुलिस ने शराब जब्त करते हुए आरोपी के खिलाफ थाना पखांजूर में अपराध क्रमांक 155/2026, धारा 34(2) आबकारी अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर वैधानिक कार्रवाई की। ऑपरेशन उजियारा में लगातार कार्रवाई जिले में अवैध नशे के कारोबार पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए पुलिस द्वारा ऑपरेशन उजियारा चलाया जा रहा है। इसी अभियान के तहत पखांजूर पुलिस की टीम लगातार अवैध शराब और नशे के कारोबार पर नजर रख रही है। पुलिस का कहना है कि अवैध नशे के कारोबार के खिलाफ कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। ये रहे कार्रवाई में शामिल कार्रवाई में थाना प्रभारी निरीक्षक तेज कुमार वर्मा, प्रशिक्षु उप निरीक्षक पीपल राज कंवर, सहायक उपनिरीक्षक पुरुषोत्तम ठाकुर, आरक्षक बशीर खान, ब.फ. आरक्षक सरोजीत विश्वास और आरक्षक पवन सोन की भूमिका रही। पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि अवैध शराब, मादक पदार्थ या किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तत्काल कांकेर पुलिस हेल्पलाइन 94791-55125 पर दें। सूचना देने वाले की पहचान गोपनीय रखी जाएगी।1
- कोमल देव जिला अस्पताल में निकला सांप,लोगो ने दहशद,सांप का किया सफल रेस्क्यू 15 सितंबर सुबह 11 बजे कोमल देव जिला अस्पताल में उस समय अफरा तफरी मच गई जब,लगभग 5 फीट लंबा सांप अस्पताल के किचन में घुस गया।इसने लंबे और बड़े सांप को देख कर वहां काम करने वाले कर्मचारी,डरकर चिल्लाते हुए किचन से बाहर निकल गए। किचन में सांप घुसने की जानकारी वन विभाग को दिया गया।वन विभाग की रेस्क्यू टीम अस्पताल पहुंच कर, सांप का सुरक्षित रेस्क्यू कर,सांप को कर अपने साथ ले गए।तब जा कर वहां के लोगों ने राहत की सास ली।1
- बड़ेराजपुर: ग्राम कोपरा में 11 दिवसीय गणेशोत्सव का शुभारंभ, भक्तिमय हुआ माहौल ग्राम कोपरा, बड़ेराजपुर में 11 दिवसीय गणेश चतुर्थी उत्सव का श्रद्धा और भक्तिमय वातावरण में शुभारंभ हुआ। भगवान श्री गणेश की प्रतिमा स्थापित कर विधि-विधान एवं मंत्रोच्चार के साथ प्राण प्रतिष्ठा की गई। इसके बाद आरती एवं पूजा-अर्चना कर क्षेत्र की सुख-शांति और समृद्धि की कामना की गई। पूरे 11 दिनों तक बाल मंडली समिति द्वारा सुबह-शाम पूजा एवं आरती के साथ विभिन्न धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। गणेशोत्सव को लेकर ग्रामवासियों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है।1