*इनके पाप विधायक है इस लिए ये किसी को भी गाड़ी से उड़ा देते है ?* मध्यप्रदेश की सियासत में एक बार फिर सत्ता के नशे और कानून के डर के बीच की खाई खुलकर सामने आ गई है। शिवपुरी जिले की पिछोर विधानसभा से जुड़ा हालिया मामला सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि उस मानसिकता का आईना है जो सत्ता के करीब आते ही खुद को कानून से ऊपर समझने लगती है। आरोप है कि भाजपा विधायक प्रीतम लोधी के पुत्र ने अपनी गाड़ी से कई लोगों को कुचल दिया, जिससे कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना जितनी भयावह है, उससे कहीं ज्यादा चौंकाने वाला उसका बाद का व्यवहार है। आम तौर पर ऐसे मामलों में आरोपी भयभीत होता है, छिपने की कोशिश करता है या कानून की प्रक्रिया का सामना करता है। लेकिन यहां तस्वीर उलट दिखाई देती है आरोपी का बेखौफ होकर सामान्य जीवन में लौट जाना यह सवाल खड़ा करता है कि आखिर उसे यह भरोसा कहां से मिल रहा है? क्या यह विश्वास सिर्फ इसलिए है क्योंकि उसके पिता सत्ता में हैं? यह घटना किसी एक परिवार या एक नेता की नहीं, बल्कि उस व्यवस्था की पोल खोलती है जहां “पहचान” और “पद” न्याय से बड़ा बन जाता है। जब आम आदमी सड़क पर चलता है, तो उसे ट्रैफिक नियमों से लेकर कानून की हर धारा का डर होता है। लेकिन वहीं, अगर कोई रसूखदार परिवार से आता है, तो वही सड़क उसके लिए ताकत का प्रदर्शन करने का मंच बन जाती है। सबसे गंभीर सवाल यह है कि क्या इस मामले में कानून अपना काम पूरी निष्पक्षता से करेगा? या फिर यह भी उन फाइलों में दब जाएगा, जहां बड़े नामों के सामने जांच धीमी पड़ जाती है? जनता के मन में यह संदेह यूं ही पैदा नहीं हुआ है। इससे पहले भी कई मामलों में देखा गया है कि प्रभावशाली लोगों के खिलाफ कार्रवाई या तो देर से होती है या फिर कमजोर पड़ जाती है। इस पूरे प्रकरण में पीड़ितों की स्थिति पर भी ध्यान देना जरूरी है। जिन लोगों को कुचला गया, वे किसी के परिवार के सदस्य हैं, किसी के पिता, किसी के बेटे। उनके लिए यह घटना सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि जिंदगी भर का दर्द बन सकती है। सवाल यह है कि क्या उन्हें न्याय मिलेगा? क्या उनके जख्मों की भरपाई सिर्फ मुआवजे से हो सकती है? राजनीति में अक्सर “जनसेवा” की बात होती है, लेकिन जब जनता ही असुरक्षित महसूस करने लगे, तो यह शब्द खोखला लगने लगता है। सत्ता का मतलब जिम्मेदारी होना चाहिए, न कि दबंगई का लाइसेंस। यदि जनप्रतिनिधियों के परिवार ही कानून तोड़ने लगें और उन पर कार्रवाई न हो, तो यह लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों पर सीधा आघात है। यह भी गौर करने वाली बात है कि इस तरह की घटनाएं बार-बार सामने क्यों आती हैं। क्या राजनीतिक दल अपने नेताओं और उनके परिवारों के आचरण को लेकर कोई आंतरिक अनुशासन लागू करते हैं? या फिर जीत के बाद सब कुछ “मैनेज” हो जाने की मानसिकता हावी हो जाती है? समाज में कानून का सम्मान तभी बना रह सकता है जब हर व्यक्ति, चाहे वह कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, उसके दायरे में आए। अगर कुछ लोगों को छूट मिलती रही, तो यह संदेश जाएगा कि कानून सिर्फ कमजोरों के लिए है। और यह स्थिति किसी भी लोकतंत्र के लिए बेहद खतरनाक होती है। आज जरूरत है एक निष्पक्ष और तेज कार्रवाई की। सिर्फ बयानबाजी से काम नहीं चलेगा। पुलिस और प्रशासन को यह साबित करना होगा कि वे किसी दबाव में नहीं हैं। अगर आरोपी दोषी है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए चाहे वह किसी भी परिवार से क्यों न आता हो। यह मामला सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि एक चेतावनी है। अगर अब भी व्यवस्था नहीं चेती, तो जनता का भरोसा पूरी तरह टूट सकता है। और जब जनता का विश्वास डगमगाता है, तो लोकतंत्र की नींव भी कमजोर पड़ जाती है। अब देखना यह है कि यह मामला भी बाकी मामलों की तरह समय के साथ ठंडा पड़ जाता है, या फिर सच में न्याय की मिसाल बनता है।
*इनके पाप विधायक है इस लिए ये किसी को भी गाड़ी से उड़ा देते है ?* मध्यप्रदेश की सियासत में एक बार फिर सत्ता के नशे और कानून के डर के बीच की खाई खुलकर सामने आ गई है। शिवपुरी जिले की पिछोर विधानसभा से जुड़ा हालिया मामला सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि उस मानसिकता का आईना है जो सत्ता के करीब आते ही खुद को कानून से ऊपर समझने लगती है। आरोप है कि भाजपा विधायक प्रीतम लोधी के पुत्र ने अपनी गाड़ी से कई लोगों को कुचल दिया, जिससे कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना जितनी भयावह है, उससे कहीं ज्यादा चौंकाने वाला उसका बाद का व्यवहार है। आम तौर पर ऐसे मामलों में आरोपी भयभीत होता है, छिपने की कोशिश करता है या कानून की प्रक्रिया का सामना करता है। लेकिन यहां तस्वीर उलट दिखाई देती है आरोपी का बेखौफ होकर सामान्य जीवन में लौट जाना यह सवाल खड़ा करता है कि आखिर उसे यह भरोसा कहां से मिल रहा है? क्या यह विश्वास सिर्फ इसलिए है क्योंकि उसके पिता सत्ता में हैं? यह घटना किसी एक परिवार या एक नेता की नहीं, बल्कि उस व्यवस्था की पोल खोलती है जहां “पहचान” और “पद” न्याय से बड़ा बन जाता है। जब आम आदमी सड़क पर चलता है, तो उसे ट्रैफिक नियमों से लेकर कानून की हर धारा का डर होता है। लेकिन वहीं, अगर कोई रसूखदार परिवार से आता है, तो वही सड़क उसके लिए ताकत का प्रदर्शन करने का मंच बन जाती है। सबसे गंभीर सवाल यह है कि क्या इस मामले में कानून अपना काम पूरी निष्पक्षता से करेगा? या फिर यह भी उन फाइलों में दब जाएगा, जहां बड़े नामों के सामने जांच धीमी पड़ जाती है? जनता के मन में यह संदेह यूं ही पैदा नहीं हुआ है। इससे पहले भी कई मामलों में देखा गया है कि प्रभावशाली लोगों के खिलाफ कार्रवाई या तो देर से होती है या फिर कमजोर पड़ जाती है। इस पूरे प्रकरण में पीड़ितों की स्थिति पर भी ध्यान देना जरूरी है। जिन लोगों को कुचला गया, वे किसी के परिवार के सदस्य हैं, किसी के पिता, किसी के बेटे। उनके लिए यह घटना सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि जिंदगी भर का दर्द बन सकती है। सवाल यह है कि क्या उन्हें न्याय मिलेगा? क्या उनके जख्मों की भरपाई सिर्फ मुआवजे से हो सकती है? राजनीति में अक्सर “जनसेवा” की बात होती है, लेकिन जब जनता ही असुरक्षित महसूस करने लगे, तो यह शब्द खोखला लगने लगता है। सत्ता का मतलब जिम्मेदारी होना चाहिए, न कि दबंगई का लाइसेंस। यदि जनप्रतिनिधियों के परिवार ही कानून तोड़ने लगें और उन पर कार्रवाई न हो, तो यह लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों पर सीधा आघात है। यह भी गौर करने वाली बात है कि इस तरह की घटनाएं बार-बार सामने क्यों आती हैं। क्या राजनीतिक दल अपने नेताओं और उनके परिवारों के आचरण को लेकर कोई आंतरिक अनुशासन लागू करते हैं? या फिर जीत के बाद सब कुछ “मैनेज” हो जाने की मानसिकता हावी हो जाती है? समाज में कानून का सम्मान तभी बना रह सकता है जब हर व्यक्ति, चाहे वह कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, उसके दायरे में आए। अगर कुछ लोगों को छूट मिलती रही, तो यह संदेश जाएगा कि कानून सिर्फ कमजोरों के लिए है। और यह स्थिति किसी भी लोकतंत्र के लिए बेहद खतरनाक होती है। आज जरूरत है एक निष्पक्ष और तेज कार्रवाई की। सिर्फ बयानबाजी से काम नहीं चलेगा। पुलिस और प्रशासन को यह साबित करना होगा कि वे किसी दबाव में नहीं हैं। अगर आरोपी दोषी है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए चाहे वह किसी भी परिवार से क्यों न आता हो। यह मामला सिर्फ एक हादसा नहीं, बल्कि एक चेतावनी है। अगर अब भी व्यवस्था नहीं चेती, तो जनता का भरोसा पूरी तरह टूट सकता है। और जब जनता का विश्वास डगमगाता है, तो लोकतंत्र की नींव भी कमजोर पड़ जाती है। अब देखना यह है कि यह मामला भी बाकी मामलों की तरह समय के साथ ठंडा पड़ जाता है, या फिर सच में न्याय की मिसाल बनता है।
- ब्रेकिंग न्यूज़ राजधानी भोपाल में कानून-व्यवस्था को लेकर पुलिस का एक्शन लगातार जारी है। इसी कड़ी में पुलिस कमिश्नर संजय कुमार ने तलैया थाना क्षेत्र के इतवारा इलाके में आम जनता के साथ सीधा संवाद किया। इस जनसंवाद कार्यक्रम में स्थानीय लोगों ने अपनी समस्याएं खुलकर पुलिस कमिश्नर के सामने रखीं। कमिश्नर ने मौके पर ही संबंधित अधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि जनता की शिकायतों का त्वरित समाधान सुनिश्चित किया जाए और क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया जाए। इस दौरान तलैया थाना प्रभारी दीपक डहेरिया और एसीपी कोतवाली संभाग चंद्रशेखर पांडे भी मौजूद रहे। कमिश्नर ने साफ कहा कि अपराध और असामाजिक गतिविधियों पर सख्ती से कार्रवाई की जाएगी, साथ ही जनता और पुलिस के बीच विश्वास बढ़ाने के लिए ऐसे जनसंवाद कार्यक्रम आगे भी जारी रहेंगे। स्थानीय लोगों ने इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि पुलिस का यह कदम भरोसा बढ़ाने वाला है।1
- *प्रेस नोट...* *ईको फ्रेंडली संपन्न हुआ राठौर समाज का सामूहिक विवाह एवं परिचय सम्मेलन* -पर्यावरण के अनुकूल सम्मेलन का आयोजन -प्लास्टिक मुक्त संपन्न पूरा सम्मेलन -तांबे, स्टील के लोटे से पानी पीने की व्यवस्था -कागज से बने डिस्पोजल का होगा इस्तेमाल -प्लास्टिक से बने डिस्पोजल पर प्रतिबंध रहा -कागज की बचत करते हुए डिजिटल निमंत्रण -कार्यक्रम के दौरान स्वच्छता का पूरा ध्यान रखा -दहेज प्रथा जैसी कुप्रथा को लेकर जागरूकता -ईरान युद्ध के चलते लकड़ी भट्टी को किया उपयोग ---------------------- राठौर संघ भोपाल ने सामूहिक विवाह एवं परिचय सम्मेलन पर्यावरण के अनुकूल तरीकों से आयोजित किया। इस सम्मेलन का उद्देश्य सिर्फ सामाजिक या सांस्कृतिक तक सीमित नहीं होता, बल्कि पर्यावरण के प्रति जागरूकता फैलाना भी होता है। सामाजिक जिम्मेदारी का निर्वाह करते हुए पर्यावरण के तहत कई मुख्य बातों को ध्यान रखा गया। यह आयोजन 20 अप्रैल 2026 (अक्षय तृतीया) को पंडित खुशीलाल शर्मा आयुर्वेदिक चिकित्सा संस्थान, दशहरा मैदान, कलियासोत डेम, नेहरू नगर, भोपाल में संपन्न हुआ। राठौर संघ भोपाल ने समाज के लोगों से मिली सहायता और दान राशि से सामूहिक विवाह एवं परिचय सम्मेलन का आयोजन किया। इस दौरान समाज की एक पत्रिका का प्रकाशन भी किया गया। राठौर संघ के अनुसार परिचय सम्मेलन में लगभग 250 युवक, युवतियां अपना परिचय दिया। कार्यक्रम का शुभारंभ सुबह 8:00 बजे दीप प्रज्वलन एवं श्री गणेश वंदना के साथ हुआ। इसके बाद सुबह 9:00 बजे से 12:00 बजे तक परिचय सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। परिचय सम्मेलन के बाद वैदिक रीति-रिवाजों से सामूहिक विवाह संस्कार संपन्न हुआ। इस अवसर पर नव दंपतियों को आशीर्वाद, अतिथियों एवं जनप्रतिनिधियों का अभिनंदन और विदाई समारोह आयोजित किया। कार्यक्रम के दौरान स्वल्पाहार और भोजन की भी व्यवस्था भी की गई थी। साथ ही इस सम्मेलन में दहेज जैसी कुप्रथा को लेकर समाज को जागरूक भी किया गया। *ईरान युद्ध के चलते लकड़ी भट्टी का फैसला...* ईरान युद्ध के बाद घरेलू गैस, पेट्रोल और डीजल को लेकर बनी स्थिति के मद्देनजर राठौर समाज ने लकड़ी भट्टी का फैसला लिया। सम्मेलन में बनने वाला भोजन अधिकांश लकड़ी की भट्टियों पर बनाया गया। *ईको फ्रेंडली संपन्न हुआ सम्मेलन...* राठौर संघ भोपाल ने सामूहिक विवाह एवं परिचय सम्मेलन को पूरी तरह पर्यावरण को समर्पित किया। पर्यावरण के अनुकूलता के अनुसार आयोजन किया। आयोजन को पूरी तरह प्लास्टिक मुक्त करने की कोशिश की गई। सम्मेलन में प्लास्टिक डिस्पोजल का नहीं, बल्कि कागज से बने डिस्पोजल का इस्तेमाल किया गया। इतना ही नहीं पानी पीने के लिए प्लास्टिक के ग्लास नहीं, बल्कि स्टील और तांबे के लोटे का उपयोग किया गया। *स्वच्छता का रखा पूरा ध्यान...* समारोह के दौरान स्वच्छता का पूरा ध्यान रखा गया। कार्यक्रम स्थल पर गंदगी और कचरा ना फैले। इसके लिए राठौर समाज की एक टीम ने साफ-सफाई का पूरा ध्यान रखा। कार्यक्रम स्थल पर होने वाले कचरे को तत्काल हटाया गया। इतना ही नहीं कार्यक्रम के बाद भी कार्यक्रम स्थल को क्लीन भी किया गया। *निवेदन...* राज कुमार राठौर (राजू), अध्यक्ष, राठौर संघ भोपाल संतोष राठौर (वसंत), उपाध्यक्ष मदनलाल राठौर, कार्यक्रम अध्यक्ष गणेश राठौर, कोषाध्यक्ष जीएल राठौर महामंत्री समस्त राठौर समाज टीम *1
- आज भोपाल में तमिल समागम द्वारा तमिल नव वर्ष मिलन एवं सम्मान समारोह आयोजित किया गया। तमिल समागम द्वारा 35 तमिल प्रतिभायों को सम्मानित किया गया। अध्यक्ष एवं महासचिव से हमारे संवाददाता ने विशेष बातचीत की7
- Post by Prem Prem10
- Post by शाहिद खान रिपोर्टर1
- भोपाल,रहा चलते बदमाशों ने किन्नर को बनाया अपना शिकार। बुधवारा डेरे की किन्नर सिमी ने उनके ऊपर जानलेवा हमला करने का आरोप लगाया है। सिमी ने कहा कि उनके साथ दो बार वारदात हो चुकी है लेकिन हमलावर अभी भी पुलिस् की गिरफ्त से दूर हैं। सिमी ने बताया कि आज मुझे 12 दिन हो गए हैं अभी तक बदमाशों के खिलाफ कोई करवायी नहीं हुई है अपने घर से डर के मारे निकल नहीं पा रही हूं पुलिस प्रशासन से अपील करती हूं बदमाशों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए नहीं तो किन्नर समाज थाने किन्नर समाज प्रदर्शन करेगा अगर वहां से करवाएं नहीं हुई तो सीएम हाउस का किन्नर समाज प्रदर्शन करेंगे1
- Post by Naved khan1
- छत्तीसगढ़ – जशपुर के घने जंगलों में एक प्राइवेट चार्टर प्लेन क्रैश होने की खबर सामने आई है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, पहाड़ी से टकराने के बाद विमान नीचे गिरा और उसमें आग लग गई। हादसे के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई। अभी तक विमान में सवार लोगों की संख्या और स्थिति को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। राहत और बचाव टीम मौके पर पहुंचकर जांच में जुटी हुई है।1
- *राजधानी भोपाल में कानून का टाइम अलग, रईसों का टाइम अलग* एक तरफ शहर में बढ़ते अपराधों पर लगाम कसने के लिए अधिकारियों के सख्त आदेश जारी होते हैं दुकानें समय पर बंद हों, भीड़भाड़ ना लगे, अवैध गतिविधियों पर रोक लगे। दूसरी तरफ हकीकत यह है कि राजधानी के कुछ पब और बार मानो कानून की किताब पढ़ते ही नहीं। होशंगाबाद रोड स्थित *THE MID NIGHT FUDDLE* क्लब में देर रात करीब 2 बजे तक शराब पार्टियां चलने की बात सामने आई है। सवाल सीधा है जब आम चाय की दुकान पर सख्ती हो सकती है, तो आलीशान क्लबों पर नरमी क्यों एक ही शहर, एक ही विभाग, एक ही अधिकारी… फिर कार्रवाई के पैमाने अलग क्यों? सूत्रों के मुताबिक पार्टी में मौजूद लोगों से खुलेआम कहा गया पुलिस सेट है, देर रात की भी दिक्कत नहीं। अगर यह सच है, तो यह सिर्फ बयान नहीं, कानून व्यवस्था पर तमाचा है। इन देर रात चलने वाले क्लबों और बारों को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। अक्सर ऐसी जगहों से झगड़े, मारपीट, नशे में हुड़दंग, सड़क हादसे और अपराध की नई पटकथाएँ लिखी जाती हैं। फिर भी सख्ती सिर्फ छोटे दुकानदारों तक सीमित क्यों दिखती है पुलिस आयुक्त के सख्त निर्देशों के बावजूद यदि आदेशों की खुलेआम अवहेलना हो रही है, तो जिम्मेदारी तय कौन करेगा थाना स्तर पर कार्रवाई क्यों नहीं क्या राजधानी में नियम सिर्फ कमजोरों के लिए हैं और रसूखदारों के लिए रात अभी जवान है भोपाल की जनता अब जवाब चाहती है—कानून सबके लिए बराबर है, या फिर कुछ लोगों के लिए लेट नाइट पास जारी है1