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नबी करीम थाना पुलिस ने एक सेक्स रैकेट का भंडाफोड़ करते हुए एक सराहनीय कार्य किया है।
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नबी करीम थाना पुलिस ने एक सेक्स रैकेट का भंडाफोड़ करते हुए एक सराहनीय कार्य किया है।
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- नई दिल्ली से खबर है कि नीट (NEET) विवाद के बाद, देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षा 'यूपीएससी प्रीलिम्स 2026' भी अब विवादों के घेरे में आ गई है। कांग्रेस के छात्र संगठन एनएसयूआई (NSUI) ने परीक्षा में गड़बड़ी और संभावित पेपर लीक का गंभीर आरोप लगाया है। एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ ने एक संगीन दावा करते हुए कहा है कि यूपीएससी प्रीलिम्स के पेपर में पूछे गए 100 सवालों में से 82 सवाल 'अनंतम आईएएस' नामक कोचिंग इंस्टीट्यूट के स्टडी मटेरियल से हूबहू मेल खा रहे हैं। इस गंभीर आरोप के बाद, छात्र संगठन ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) से इस मामले में तुरंत स्थिति स्पष्ट करने और निष्पक्ष जांच कराने की मांग उठाई है।1
- ओमान तट पर हुए एक अमेरिकी हमले के कारण भारतीय क्रू का एक जहाज जलकर डूब गया।1
- फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अपनी मुलाकात का एक विशेष वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया है, जो कूटनीतिक गलियारों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर काफी तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो के बैकग्राउंड में बॉलीवुड फिल्म 'धुरंधर' का सुपरहिट रीमेक गाना 'आरी-आरी' (यारी यारी यारी) बज रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी आधिकारिक यात्रा के दौरान फ्रांस के नीस शहर पहुंचे थे, जहाँ राष्ट्रपति मैक्रों ने उनका बेहद गर्मजोशी से स्वागत किया। साझा किए गए वीडियो में दोनों वैश्विक नेता एक-दूसरे को गले लगाते, हाथ मिलाते और मुस्कुराते हुए साथ चलते नजर आ रहे हैं। रविवार को हुई इस बैठक में भारत और फ्रांस के बीच कुल 13 महत्वपूर्ण मुद्दों पर सहमति बनी है, जिनमें रक्षा, अंतरिक्ष, परमाणु ऊर्जा और व्यापार जैसे क्षेत्र शामिल हैं। इन समझौतों में अगले पांच वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने का लक्ष्य भी रखा गया है।1
- भारत के अग्रणी डायमंड मर्चेंट्स में शुमार और प्रतिष्ठित डायमंड मैन्युफैक्चरिंग कंपनी Djewels के संस्थापक एवं चेयरमैन श्री प्रवीण शर्मा ने नई दिल्ली स्थित अपने कार्यालय में एक विशेष पूजा-अनुष्ठान का आयोजन किया। इस अवसर पर, श्री कृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास के संस्थापक, कृष्ण जन्मभूमि केस के मुख्य याचिकाकर्ता तपस्वी संत दिनेश फलाहारी जी महाराज, और समाजसेवी हिंदूवादी नेता डॉ. सिद्धार्थ भट्टाचार्य को मुख्य अतिथि के तौर पर आमंत्रित किया गया। कार्यक्रम के दौरान आध्यात्मिक, सामाजिक एवं राष्ट्रीय विषयों पर सार्थक चर्चा हुई, जिसमें सनातन संस्कृति और धार्मिक जागरण के संदर्भ में समाज के विभिन्न वर्गों की भूमिका पर विचार-विमर्श किया गया। श्री प्रवीण शर्मा Djewels के संस्थापक एवं चेयरमैन होने के साथ-साथ युनिकोच –The Coach of Masters के भी संस्थापक हैं। इसके अतिरिक्त, वे श्री कृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास के प्रमुख ट्रस्टियों में से एक हैं और न्यास की कोर कमेटी से भी सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं। समाज सेवा, धार्मिक गतिविधियों, राष्ट्रहित एवं सनातन मूल्यों के संरक्षण के लिए उनके द्वारा निरंतर उल्लेखनीय कार्य किए जा रहे हैं, जिसके लिए उन्हें ग्लोबल एक्सीलेंस अवार्ड्स, सीईओ स्टार अवार्ड्स सहित कई अन्य पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। डॉ. सिद्धार्थ भट्टाचार्य, जो श्री कृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास से भी जुड़े हैं, करणी सेना के राष्ट्रीय संरक्षक होने के साथ-साथ विभिन्न सामाजिक, राष्ट्रवादी एवं सनातन संगठनों में सेवारत हैं। सनातन धर्म, राष्ट्रसेवा एवं सामाजिक जागरूकता के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए, संत-महात्माओं एवं धार्मिक आचार्यों द्वारा उन्हें "बजरंगी", "सनातनी सेवक" एवं "हिन्दू वीर" जैसी उपाधियों से अलंकृत किया जा चुका है, जिससे वे राष्ट्रवादी एवं सनातनी समाज में एक विशिष्ट पहचान रखते हैं। कार्यक्रम के दौरान, डॉ. सिद्धार्थ भट्टाचार्य ने श्री प्रवीण शर्मा का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि, “प्रवीण शर्मा जी केवल एक प्रसिद्ध, धनी व्यक्तित्व ही नहीं, बल्कि मानवीय मूल्यों और सेवा भावना के भी सच्चे धनी हैं। उनका व्यक्तित्व विनम्रता, उदारता और समाज के प्रति समर्पण का उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने अपने व्यावसायिक जीवन में जो सफलता प्राप्त की है, उसी समर्पण के साथ वे धार्मिक, सामाजिक और राष्ट्रहित के कार्यों में भी योगदान दे रहे हैं। ऐसे व्यक्तित्व समाज के लिए प्रेरणा स्रोत होते हैं। मैं उनके प्रति अपनी हार्दिक शुभकामनाएँ और सम्मान व्यक्त करता हूँ तथा ईश्वर से उनके उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु और निरंतर प्रगति की कामना करता हूँ।”1
- सुप्रीम कोर्ट ने देशभर के सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की सरकारों को इमरजेंसी हेल्पलाइन नंबरों को लेकर एक अहम आदेश जारी किया है। इस फैसले के तहत, पुलिस के लिए इस्तेमाल होने वाले 100, एंबुलेंस के लिए 108 और फायर ब्रिगेड के लिए 101 जैसे मौजूदा इमरजेंसी नंबरों को बंद कर दिया जाएगा। अब इन सभी सेवाओं को एक ही हेल्पलाइन नंबर 112 से जोड़ा जाएगा, जिससे नागरिकों को विभिन्न नंबर याद रखने की परेशानी नहीं होगी। सुप्रीम कोर्ट ने इस आदेश का पालन करने के लिए सभी संबंधित सरकारों को 3 महीने की समयसीमा दी है। यह कदम आपातकालीन सुविधाओं तक पहुँच को आसान बनाने और देशव्यापी स्तर पर सेवाओं को सुव्यवस्थित करने के उद्देश्य से उठाया गया है।1
- गाजियाबाद के आदर्श नगर खोड़ा में आरोपी जानी ने घर में घुसकर दो सगी बहनों को गोली मार दी है, जिससे उनकी हालत गंभीर बनी हुई है। आरोपी जानी ने कबूल किया है कि उसने यह वारदात शादी टूटने के कारण अंजाम दी।1
- रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर मुकेश अंबानी के बेटे अनंत अंबानी ने मंगलवार को असम के गुवाहाटी स्थित कामाख्या मंदिर का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना की और भक्ति में लीन दिखाई दिए। अनंत अंबानी द्वारा की गई पूजा और मंदिर की परंपराओं के अनुसार किए गए अनुष्ठान, खासकर कबूतर उड़ाना और बकरे छोड़ना, अब चर्चा का विषय बन गए हैं। कामाख्या मंदिर भारत के प्रमुख शक्तिपीठों में से एक है और इसे तांत्रिक साधना का एक महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है। यहां देवी के योनि स्वरूप की पूजा की जाती है, जिसे पूरे ब्रह्मांड के जन्म और जीवन का स्रोत माना जाता है। माता कामाख्या ही समस्त जगत की माता हैं, और इसी प्रतीक स्वरूप में मंदिर में देवी का रजपर्व, जिसे अंबुवाची उत्सव के नाम से जाना जाता है, मनाया जाता है। यह मंदिर तांत्रिक परंपरा का सिद्ध स्थान भी है। समय के साथ, मंदिर में कई ऐसी लोक परंपराएं विकसित हुई हैं जो शास्त्रीय पूजा-पद्धति के साथ-साथ स्थानीय असमिया और जनजातीय मान्यताओं से भी प्रभावित हैं। इन्हीं परंपराओं में से एक है कबूतर उड़ाना और बकरा छोड़ना। ये परंपराएं लोक-आस्थाओं का हिस्सा मानी जाती हैं और इनका स्पष्ट जिक्र किसी शास्त्रीय ग्रंथ में नहीं मिलता, बल्कि ये स्थानीय धार्मिक संस्कृति और श्रद्धालुओं की मान्यताओं से विकसित हुई हैं। लोग मन्नत मांगने या पूरी होने पर भेंट के रूप में यहां कबूतर उड़ाते और बकरे छोड़ते हैं, जिसे जीवित अर्पण या जीवित बलि कहा जाता है। इस बलि में कोई रक्तपात, कष्ट या हिंसा नहीं होती, यह एक अहिंसक बलि है। कहा जाता है कि कबूतर मनुष्य के लालच, विकारों और घमंड का प्रतीक हैं। कबूतर उड़ाकर ये सभी विकार देवी को समर्पित कर दिए जाते हैं। एक लोककथा के अनुसार, एक दंपती ने संतान का आशीर्वाद मांगा और मनौती मानी थी। जब उन्हें संतान हुई, तो वे कपोत बलि देने आए। इस दौरान, कबूतर के साथियों और बच्चों की आवाज सुनकर दंपती भावुक हो गए और उन्होंने बलि का विचार त्याग कर कबूतर को माता को समर्पित करते हुए ऐसे ही उड़ा दिया। तभी से यह परंपरा बन गई। मान्यता है कि पक्षियों को आजाद करना पुण्य का कार्य है, जिससे देवी की कृपा प्राप्त होती है। कुछ लोग इसे बंधनों, कष्टों या नकारात्मकता से मुक्ति का प्रतीक भी मानते हैं।1
- सड़क पर एक एम्बुलेंस को 140 किलोमीटर प्रति घंटे की तेज रफ्तार से चलते देखा गया। जानकारी के अनुसार, एम्बुलेंस में हवा के लिए एयर कंडीशनर भी चलाया जा रहा था।1
- ले आए तो पकड़ रहूंगी1