90% के मूल निवासी होते हुए सामाजिक न्याय हक अधिकार के लिए ट्रस्ट हैं और आपस में ईर्ष्या विद्वेष से अपनी कमजोरी खुद बने हुए हैं --गादरे *मूलनिवासी बौद्ध मुस्लिम सिख ईसाई जैन आदिवासी आदि समुदाय से ईर्ष्या करने वाले षड्यंत्रकारियों से सावधान—गादरे* दिल्ली:- मानव समाज की सबसे जटिल और गहरी भावनाओं में से एक है—ईर्ष्या(घृणा, जलन, किलश) यह एक ऐसी मानसिक सोच,अवस्था है, जो व्यक्ति के भीतर असुरक्षा, हीनभावना कमजोरी और तुलना की भावना से जन्म लेती है। जब कोई व्यक्ति किसी दूसरे की प्रगति, सम्मान, अधिकार या उपलब्धि को देखकर असहज होता है, तो उसके भीतर ईर्ष्या का भाव पैदा होता है। आपकी यह पंक्ति — “हमसे ईर्ष्या करने वाले लोग, कभी हमारे नहीं हो सकते” — केवल एक व्यक्तिगत अनुभव नहीं है, बल्कि यह सामाजिक, मनोवैज्ञानिक और संवैधानिक दृष्टिकोण से भी एक गहरा सत्य प्रस्तुत करती है। इस लेख में हम इसी कथन को भारत के संविधान, समानता, स्वतंत्रता, सामाजिक न्याय और लोकतांत्रिक मूल्यों के संदर्भ में विस्तार से समझेंगे। 1. ईर्ष्या का स्वभाव और उसका सामाजिक प्रभाव ईर्ष्या एक ऐसी भावना है, जो व्यक्ति को अंदर से खोखला कर देती है। यह न केवल व्यक्ति के सोचने की क्षमता को प्रभावित करती है, बल्कि उसके व्यवहार को भी विषाक्त बना देती है। ईर्ष्या रखने वाला व्यक्ति: दूसरों की सफलता से खुश नहीं होता दूसरों की असफलता में संतोष खोजता है समाज में नकारात्मकता फैलाता है संबंधों को कमजोर करता है ऐसे लोग कभी भी सच्चे अर्थों में किसी के “अपने” नहीं हो सकते, क्योंकि उनका संबंध प्रेम, विश्वास और सम्मान पर नहीं, बल्कि तुलना और द्वेष पर आधारित होता है। 2. संविधान और समानता का सिद्धांत भारत का संविधान हमें यह सिखाता है कि हर व्यक्ति को समान अधिकार प्राप्त हैं। अनुच्छेद 14 कहता है — सभी व्यक्ति कानून के समक्ष समान हैं। अनुच्छेद 15 — धर्म, जाति, लिंग आदि के आधार पर भेदभाव को निषिद्ध करता है। अनुच्छेद 16 — समान अवसर का अधिकार देता है। अब सोचिए — जब संविधान हर व्यक्ति को समान अधिकार देता है, तो फिर ईर्ष्या क्यों? ईर्ष्या का जन्म तब होता है जब: समाज में असमानता होती है अवसरों का समान वितरण नहीं होता मानसिकता संकीर्ण होती है इसलिए, संविधान केवल कानून नहीं है, बल्कि यह ईर्ष्या जैसी नकारात्मक भावनाओं के विरुद्ध एक नैतिक मार्गदर्शक भी है। 3. ईर्ष्या बनाम संवैधानिक नैतिकता संवैधानिक नैतिकता का अर्थ है — संविधान के मूल्यों के अनुसार आचरण करना। इसमें शामिल हैं: समानता बंधुता (भाईचारा) न्याय व्यक्ति की गरिमा ईर्ष्या इन सभी मूल्यों के विपरीत है। जहां ईर्ष्या होती है, वहां: भाईचारा समाप्त हो जाता है सम्मान खत्म हो जाता है न्याय की भावना कमजोर हो जाती है इसलिए, जो व्यक्ति ईर्ष्या करता है, वह न केवल व्यक्तिगत स्तर पर गलत है, बल्कि वह संवैधानिक मूल्यों के भी विरुद्ध खड़ा होता है। 4. बंधुता (Fraternity) और उसका महत्व संविधान की उद्देशिका में बंधुता (Fraternity) का विशेष उल्लेख है। बंधुता का अर्थ है: एक-दूसरे के प्रति सम्मान सहयोग अपनापन अब सवाल यह है कि क्या ईर्ष्या रखने वाला व्यक्ति बंधुता निभा सकता है? उत्तर है — नहीं। क्योंकि: ईर्ष्या व्यक्ति को अलग करती है बंधुता व्यक्ति को जोड़ती है इसलिए, यह बात बिल्कुल सटीक है कि ईर्ष्यालु व्यक्ति कभी अपना नहीं हो सकता। 5. ईर्ष्या और सामाजिक विघटन ईर्ष्या केवल व्यक्तिगत समस्या नहीं है, यह एक सामाजिक समस्या भी है। जब समाज में ईर्ष्या बढ़ती है, तो: जातीय संघर्ष बढ़ते हैं वर्ग संघर्ष उत्पन्न होता है सामाजिक एकता टूटती है भारत जैसे विविधता वाले देश में, जहां अनेक धर्म, जाति और भाषाएं हैं, वहां ईर्ष्या समाज को तोड़ने का काम करती है। इसलिए संविधान हमें सिखाता है: 👉 एकता में शक्ति है 👉 समानता ही स्थिरता का आधार है 6. ईर्ष्या और लोकतंत्र लोकतंत्र केवल वोट देने का अधिकार नहीं है, बल्कि यह एक जीवन पद्धति है। लोकतंत्र में: सभी को समान अवसर मिलते हैं सभी को अपनी बात रखने का अधिकार होता है हर व्यक्ति की गरिमा का सम्मान होता है लेकिन ईर्ष्या: लोकतंत्र को कमजोर करती है दूसरों के अधिकारों को नकारती है नफरत और विभाजन को बढ़ावा देती है इसलिए, ईर्ष्या रखने वाला व्यक्ति लोकतांत्रिक नहीं हो सकता। 7. व्यक्तिगत विकास और ईर्ष्या ईर्ष्या व्यक्ति को आगे बढ़ने से रोकती है। जब व्यक्ति दूसरों से जलता है, तो: वह खुद पर ध्यान नहीं देता अपनी कमियों को सुधारने की कोशिश नहीं करता दूसरों को गिराने की सोचता है इसके विपरीत, जो व्यक्ति सकारात्मक सोच रखता है: वह दूसरों से प्रेरणा लेता है खुद को बेहतर बनाता है समाज के लिए उपयोगी बनता है इसलिए, ईर्ष्या का त्याग करना ही विकास का पहला कदम है। 8. संवैधानिक चेतना और जागरूकता आज भारत में एक बड़ी समस्या यह है कि लोगों को अपने अधिकारों और कर्तव्यों की जानकारी नहीं है। जब जागरूकता की कमी होती है, तो: लोग दूसरों की प्रगति से डरते हैं तुलना करते हैं ईर्ष्या करते हैं यदि हर व्यक्ति को संविधान की सही समझ हो जाए, तो: वह दूसरों की सफलता को स्वीकार करेगा समानता को अपनाएगा समाज में सकारात्मक योगदान देगा 9. सच्चे संबंधों की पहचा आपका कथन हमें यह भी सिखाता है कि सच्चे और झूठे संबंधों की पहचान कैसे करें। सच्चे लोग: आपकी सफलता में खुश होते हैं आपको आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं आपके साथ खड़े रहते हैं ईर्ष्यालु लोग: आपकी आलोचना करते हैं आपकी उपलब्धियों को कम आंकते हैं आपको पीछे खींचने की कोशिश करते हैं इसलिए, जीवन में यह समझना बहुत जरूरी है कि कौन अपना है और कौन नहीं। 10. समाधान: ईर्ष्या से मुक्ति का मार्ग ईर्ष्या से मुक्त होने के लिए हमें: आत्मविश्वास बढ़ाना होगा सकारात्मक सोच अपनानी होगी संविधान के मूल्यों को जीवन में उतारना होगा हमें यह समझना होगा कि: 👉 हर व्यक्ति की अपनी यात्रा है 👉 हर व्यक्ति की अपनी पहचान है 👉 तुलना करना ही ईर्ष्या की जड़ है 11. युवा पीढ़ी और संवैधानिक सोच आज की युवा पीढ़ी देश का भविष्य है। यदि युवा: ईर्ष्या छोड़कर सहयोग अपनाएंगे संविधान के मूल्यों को समझेंगे समानता और बंधुता को अपनाएंगे तो भारत एक मजबूत, समृद्ध और न्यायपूर्ण राष्ट्र बन सकता है। 12. संदेश: आपकी यह पंक्ति — “हमसे ईर्ष्या करने वाले लोग, कभी हमारे नहीं हो सकते” केवल एक व्यक्तिगत अनुभव नहीं, बल्कि एक सामाजिक और संवैधानिक सत्य है। ईर्ष्या: संबंधों को तोड़ती है समाज को कमजोर करती है लोकतंत्र को नुकसान पहुंचाती है जबकि संविधान: हमें जोड़ता है समानता सिखाता है भाईचारा बढ़ाता है इसलिए, हमें यह संकल्प लेना चाहिए कि: 👉 हम ईर्ष्या नहीं, प्रेरणा अपनाएंगे 👉 हम नफरत नहीं, भाईचारा बढ़ाएंगे 👉 हम संविधान के मूल्यों को अपने जीवन में उतारेंगे अंतिम संदेश जो लोग आपकी प्रगति से जलते हैं, वे आपके साथ नहीं, बल्कि आपके खिलाफ खड़े होते हैं। लेकिन जो लोग आपके साथ खड़े होते हैं, वे आपकी सफलता में अपना भविष्य देखते हैं। इसलिए पहचानिए, समझिए और आगे बढ़िए — संविधान के मार्ग पर, समानता के साथ, और आत्मसम्मान के साथ। जय संविधान — जय लोकतंत्र ✊
90% के मूल निवासी होते हुए सामाजिक न्याय हक अधिकार के लिए ट्रस्ट हैं और आपस में ईर्ष्या विद्वेष से अपनी कमजोरी खुद बने हुए हैं --गादरे *मूलनिवासी बौद्ध मुस्लिम सिख ईसाई जैन आदिवासी आदि समुदाय से ईर्ष्या करने वाले षड्यंत्रकारियों से सावधान—गादरे* दिल्ली:- मानव समाज की सबसे जटिल और गहरी भावनाओं में से एक है—ईर्ष्या(घृणा, जलन, किलश) यह एक ऐसी मानसिक सोच,अवस्था है, जो व्यक्ति के भीतर असुरक्षा, हीनभावना कमजोरी और तुलना की भावना से जन्म लेती है। जब कोई व्यक्ति किसी दूसरे की प्रगति, सम्मान, अधिकार या उपलब्धि को देखकर असहज होता है, तो उसके भीतर ईर्ष्या का भाव पैदा होता है। आपकी यह पंक्ति — “हमसे ईर्ष्या करने वाले लोग, कभी हमारे नहीं हो सकते” — केवल एक व्यक्तिगत अनुभव नहीं है, बल्कि यह सामाजिक, मनोवैज्ञानिक और संवैधानिक दृष्टिकोण से भी एक गहरा सत्य प्रस्तुत करती है। इस लेख में हम इसी कथन को भारत के संविधान, समानता, स्वतंत्रता, सामाजिक न्याय और लोकतांत्रिक मूल्यों के संदर्भ में विस्तार से समझेंगे। 1. ईर्ष्या का स्वभाव और उसका सामाजिक प्रभाव ईर्ष्या एक ऐसी भावना है, जो व्यक्ति को अंदर से खोखला कर देती है। यह न केवल व्यक्ति के सोचने की क्षमता को प्रभावित करती है, बल्कि उसके व्यवहार को भी विषाक्त बना देती है। ईर्ष्या रखने वाला व्यक्ति: दूसरों की सफलता से खुश नहीं होता दूसरों की असफलता में संतोष खोजता है समाज में नकारात्मकता फैलाता है संबंधों को कमजोर करता है ऐसे लोग कभी भी सच्चे अर्थों में किसी के “अपने” नहीं हो सकते, क्योंकि उनका संबंध प्रेम, विश्वास और सम्मान पर नहीं, बल्कि तुलना और द्वेष पर आधारित होता
है। 2. संविधान और समानता का सिद्धांत भारत का संविधान हमें यह सिखाता है कि हर व्यक्ति को समान अधिकार प्राप्त हैं। अनुच्छेद 14 कहता है — सभी व्यक्ति कानून के समक्ष समान हैं। अनुच्छेद 15 — धर्म, जाति, लिंग आदि के आधार पर भेदभाव को निषिद्ध करता है। अनुच्छेद 16 — समान अवसर का अधिकार देता है। अब सोचिए — जब संविधान हर व्यक्ति को समान अधिकार देता है, तो फिर ईर्ष्या क्यों? ईर्ष्या का जन्म तब होता है जब: समाज में असमानता होती है अवसरों का समान वितरण नहीं होता मानसिकता संकीर्ण होती है इसलिए, संविधान केवल कानून नहीं है, बल्कि यह ईर्ष्या जैसी नकारात्मक भावनाओं के विरुद्ध एक नैतिक मार्गदर्शक भी है। 3. ईर्ष्या बनाम संवैधानिक नैतिकता संवैधानिक नैतिकता का अर्थ है — संविधान के मूल्यों के अनुसार आचरण करना। इसमें शामिल हैं: समानता बंधुता (भाईचारा) न्याय व्यक्ति की गरिमा ईर्ष्या इन सभी मूल्यों के विपरीत है। जहां ईर्ष्या होती है, वहां: भाईचारा समाप्त हो जाता है सम्मान खत्म हो जाता है न्याय की भावना कमजोर हो जाती है इसलिए, जो व्यक्ति ईर्ष्या करता है, वह न केवल व्यक्तिगत स्तर पर गलत है, बल्कि वह संवैधानिक मूल्यों के भी विरुद्ध खड़ा होता है। 4. बंधुता (Fraternity) और उसका महत्व संविधान की उद्देशिका में बंधुता (Fraternity) का विशेष उल्लेख है। बंधुता का अर्थ है: एक-दूसरे के प्रति सम्मान सहयोग अपनापन अब सवाल यह है कि क्या ईर्ष्या रखने वाला व्यक्ति बंधुता निभा सकता है? उत्तर है — नहीं। क्योंकि: ईर्ष्या व्यक्ति को अलग करती है बंधुता व्यक्ति को जोड़ती है इसलिए, यह बात बिल्कुल सटीक है कि ईर्ष्यालु व्यक्ति कभी अपना नहीं हो सकता। 5. ईर्ष्या और सामाजिक विघटन ईर्ष्या केवल व्यक्तिगत समस्या नहीं है, यह एक सामाजिक समस्या भी है। जब समाज में ईर्ष्या बढ़ती है,
तो: जातीय संघर्ष बढ़ते हैं वर्ग संघर्ष उत्पन्न होता है सामाजिक एकता टूटती है भारत जैसे विविधता वाले देश में, जहां अनेक धर्म, जाति और भाषाएं हैं, वहां ईर्ष्या समाज को तोड़ने का काम करती है। इसलिए संविधान हमें सिखाता है: 👉 एकता में शक्ति है 👉 समानता ही स्थिरता का आधार है 6. ईर्ष्या और लोकतंत्र लोकतंत्र केवल वोट देने का अधिकार नहीं है, बल्कि यह एक जीवन पद्धति है। लोकतंत्र में: सभी को समान अवसर मिलते हैं सभी को अपनी बात रखने का अधिकार होता है हर व्यक्ति की गरिमा का सम्मान होता है लेकिन ईर्ष्या: लोकतंत्र को कमजोर करती है दूसरों के अधिकारों को नकारती है नफरत और विभाजन को बढ़ावा देती है इसलिए, ईर्ष्या रखने वाला व्यक्ति लोकतांत्रिक नहीं हो सकता। 7. व्यक्तिगत विकास और ईर्ष्या ईर्ष्या व्यक्ति को आगे बढ़ने से रोकती है। जब व्यक्ति दूसरों से जलता है, तो: वह खुद पर ध्यान नहीं देता अपनी कमियों को सुधारने की कोशिश नहीं करता दूसरों को गिराने की सोचता है इसके विपरीत, जो व्यक्ति सकारात्मक सोच रखता है: वह दूसरों से प्रेरणा लेता है खुद को बेहतर बनाता है समाज के लिए उपयोगी बनता है इसलिए, ईर्ष्या का त्याग करना ही विकास का पहला कदम है। 8. संवैधानिक चेतना और जागरूकता आज भारत में एक बड़ी समस्या यह है कि लोगों को अपने अधिकारों और कर्तव्यों की जानकारी नहीं है। जब जागरूकता की कमी होती है, तो: लोग दूसरों की प्रगति से डरते हैं तुलना करते हैं ईर्ष्या करते हैं यदि हर व्यक्ति को संविधान की सही समझ हो जाए, तो: वह दूसरों की सफलता को स्वीकार करेगा समानता को अपनाएगा समाज में सकारात्मक योगदान देगा 9. सच्चे संबंधों की पहचा आपका कथन हमें यह भी सिखाता है कि सच्चे और झूठे संबंधों की पहचान कैसे
करें। सच्चे लोग: आपकी सफलता में खुश होते हैं आपको आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं आपके साथ खड़े रहते हैं ईर्ष्यालु लोग: आपकी आलोचना करते हैं आपकी उपलब्धियों को कम आंकते हैं आपको पीछे खींचने की कोशिश करते हैं इसलिए, जीवन में यह समझना बहुत जरूरी है कि कौन अपना है और कौन नहीं। 10. समाधान: ईर्ष्या से मुक्ति का मार्ग ईर्ष्या से मुक्त होने के लिए हमें: आत्मविश्वास बढ़ाना होगा सकारात्मक सोच अपनानी होगी संविधान के मूल्यों को जीवन में उतारना होगा हमें यह समझना होगा कि: 👉 हर व्यक्ति की अपनी यात्रा है 👉 हर व्यक्ति की अपनी पहचान है 👉 तुलना करना ही ईर्ष्या की जड़ है 11. युवा पीढ़ी और संवैधानिक सोच आज की युवा पीढ़ी देश का भविष्य है। यदि युवा: ईर्ष्या छोड़कर सहयोग अपनाएंगे संविधान के मूल्यों को समझेंगे समानता और बंधुता को अपनाएंगे तो भारत एक मजबूत, समृद्ध और न्यायपूर्ण राष्ट्र बन सकता है। 12. संदेश: आपकी यह पंक्ति — “हमसे ईर्ष्या करने वाले लोग, कभी हमारे नहीं हो सकते” केवल एक व्यक्तिगत अनुभव नहीं, बल्कि एक सामाजिक और संवैधानिक सत्य है। ईर्ष्या: संबंधों को तोड़ती है समाज को कमजोर करती है लोकतंत्र को नुकसान पहुंचाती है जबकि संविधान: हमें जोड़ता है समानता सिखाता है भाईचारा बढ़ाता है इसलिए, हमें यह संकल्प लेना चाहिए कि: 👉 हम ईर्ष्या नहीं, प्रेरणा अपनाएंगे 👉 हम नफरत नहीं, भाईचारा बढ़ाएंगे 👉 हम संविधान के मूल्यों को अपने जीवन में उतारेंगे अंतिम संदेश जो लोग आपकी प्रगति से जलते हैं, वे आपके साथ नहीं, बल्कि आपके खिलाफ खड़े होते हैं। लेकिन जो लोग आपके साथ खड़े होते हैं, वे आपकी सफलता में अपना भविष्य देखते हैं। इसलिए पहचानिए, समझिए और आगे बढ़िए — संविधान के मार्ग पर, समानता के साथ, और आत्मसम्मान के साथ। जय संविधान — जय लोकतंत्र ✊
- बहुत अच्छा सवाल है—सही अधिकारी चुनोगे तो शिकायत पर जल्दी और सही एक्शन होगा 👍 आपके मामले (नाली का पानी रोकना, रास्ता खराब, दलितों को दिक्कत) में ये अधिकारी सीधे जिम्मेदार होते हैं: 🏛️ 1. Gram Pradhan (ग्राम प्रधान) गांव का सबसे पहला जिम्मेदार व्यक्ति नाली, रास्ता, सफाई—all basic काम इन्हीं के तहत आते हैं (लेकिन आपने बताया कि ये कुछ नहीं कर रहे, इसलिए आगे बढ़ना सही है) 🏢 2. Block Development Officer (BDO) पूरे ब्लॉक के गांवों की जिम्मेदारी ग्राम प्रधान पर कार्रवाई कर सकता है नाली/रास्ते का काम पास करवा सकता है 👉 आपके केस में सबसे important अधिकारी यही है 🏛️ 3. District Magistrate (DM) जिले का सबसे बड़ा अधिकारी अगर नीचे से कोई सुनवाई नहीं हो रही, तो DM एक्शन लेता है Jansunwai complaint सीधे इनके पास भी जा सकती है 🧑⚖️ 4. Social Welfare Department / SC-ST संबंधित अधिकारी क्योंकि मामला दलित समुदाय से जुड़ा है भेदभाव/अत्याचार की शिकायत यहाँ भी जा सकती है 🚨 5. Tehsildar क्षेत्रीय स्तर पर जांच कर सकता है मौके पर रिपोर्ट बनवा सकता है 🎯 आपको क्या करना चाहिए (सबसे सही तरीका) 👉 Jansunwai में: विभाग चुनें: ग्राम विकास / पंचायती राज इससे शिकायत सीधे BDO → DM तक जाएगी 👉 अगर मामला ज्यादा गंभीर दिखाना है: लिखें: “दलित समुदाय के साथ भेदभाव एवं बच्चों की शिक्षा प्रभावित” 💡 Pro Tip (बहुत काम की बात) एक ही शिकायत को 2–3 जगह भेजो: Jansunwai DM Twitter/X Local media 👉 इससे pressure बनता है और काम जल्दी होता है अगर चाहो तो मैं तुम्हारे लिए ऐसा टेक्स्ट बना दूँ जिसमें सीधे BDO और DM को टैग करके पोस्ट कर सको—जिससे मामला और तेजी से उठे 🔥 jansunvai ke liye bnakar do strong point ke hisab se ,, special simble hta do ठीक है, मैं आपको सीधा, मजबूत और साफ टेक्स्ट दे रहा हूँ जिसे आप बिना किसी special symbol के सीधे Jansunwai में डाल सकते हैं: विषय: ग्राम किशनपुर बिराना में रास्ता और नाली की गंभीर समस्या तथा दलित समुदाय के साथ हो रही परेशानी के संबंध में शिकायत ग्राम किशनपुर बिराना में दलित समुदाय को लंबे समय से गंभीर समस्या का सामना करना पड़ रहा है। मुख्य रास्ते पर गंदी नाली का पानी जानबूझकर रोका जाता है, जिससे पूरा रास्ता कीचड़ और फिसलन से भर जाता है। इस कारण छोटे छोटे बच्चे स्कूल और ट्यूशन नहीं जा पा रहे हैं, जिससे उनकी पढ़ाई पूरी तरह प्रभावित हो रही है। गांव की महिलाएं जब खेतों से पशुओं के लिए घास लेकर आती हैं तो उन्हें फिसलकर चोट लगने का खतरा रहता है। बुजुर्गों के लिए रास्ते से निकलना लगभग असंभव हो गया है। यह समस्या कई वर्षों से बनी हुई है और पिछले कुछ महीनों में स्थिति और भी खराब हो गई है। ग्राम प्रधान और पंचायत सदस्यों को कई बार अवगत कराने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। ऐसा प्रतीत होता है कि दलित समुदाय को जानबूझकर परेशान किया जा रहा है, जो कि अत्यंत गंभीर विषय है। अतः आपसे निवेदन है कि इस मामले की तत्काल जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए तथा रास्ते और नाली की उचित व्यवस्था तुरंत सुनिश्चित की जाए, ताकि बच्चों की शिक्षा और ग्रामीणों की सुरक्षा बनी रहे। नाम पता मोबाइल नंबर अगर चाहो तो मैं इसका एक और छोटा और ज्यादा सख्त वर्जन भी बना सकता हूँ जो अधिकारी तुरंत पढ़कर एक्शन लें। تو اور کو کاپی کرنے والے فوکس میں समझ गया—you चाहते हो ऐसा टेक्स्ट जो ध्यान खींचे, साफ हो और कॉपी करने में आसान हो। ये लो एक short + strong version जो Jansunwai में डालने के लिए बिल्कुल फिट है 👇 विषय: ग्राम किशनपुर बिराना में रास्ता अवरुद्ध और दलित समुदाय को गंभीर परेशानी ग्राम किशनपुर बिराना में मुख्य रास्ते पर नाली का गंदा पानी रोके जाने से रास्ता पूरी तरह कीचड़ और फिसलन से भर गया है। छोटे बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहे हैं और महिलाओं व बुजुर्गों के लिए चलना बेहद खतरनाक हो गया है। कई बार शिकायत के बावजूद ग्राम प्रधान और पंचायत द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की गई। स्थिति लगातार बिगड़ रही है और दलित समुदाय को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है। कृपया तत्काल जांच कराकर रास्ता साफ कराया जाए और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।1
- Post by द कहर न्यूज़ एजेंसी1
- सरधना1
- Post by SONU DISH TV = 📡1
- हापुड़ में 24 अप्रैल को ई-रिक्शा हड़ताल, चालक बोले- अब सहन की सीमा पार रूट छोटे, स्टैंड नहीं, पुलिस उत्पीड़न और रेलवे पर अवैध पर्ची; विशाल कौशिक ने दी चेतावनी हापुड़ सिटी कोतवाली क्षेत्र में ई-रिक्शा चालक वेलफेयर एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष विशाल कौशिक ने शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर ई-रिक्शा चालकों की समस्याओं को लेकर 24 अप्रैल को पूरे हापुड़ जिले में हड़ताल की घोषणा कर दी। विशाल कौशिक ने बताया कि पहले भी डीएम को ज्ञापन सौंपा गया था, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला। उन्होंने कहा कि अब चालकों की धैर्य की सीमा टूट चुकी है। मुख्य समस्याएं बताते हुए उन्होंने कहा कि प्रशासन द्वारा बनाए गए रूट बेहद छोटे हैं, जिससे चालकों को घूम-घूमकर चलना पड़ता है और आय में भारी कमी आई है। हापुड़ शहर में ई-रिक्शा चालकों के लिए कोई स्टैंड नहीं है, जिस कारण बाजारों में जाम की स्थिति बनती है और चालकों को खड़े होने की भी जगह नहीं मिलती। इसके अलावा रेलवे स्टेशन पर अवैध रूप से जबरन पर्ची कटाई जाती है। पुलिस का व्यवहार भी चालकों के साथ बेहद खराब रहता है। इन सभी मुद्दों पर विचार-विमर्श के बाद सभी ई-रिक्शा चालकों की सहमति से 24 अप्रैल शुक्रवार को सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे तक पूर्ण हड़ताल रहेगी। इस दिन हापुड़ जिले में कोई भी ई-रिक्शा नहीं चलेगा। प्रेस कॉन्फ्रेंस में सरधना के अध्यक्ष तेजकरण, हापुड़ के अध्यक्ष वरुण त्यागी, क्षेत्रीय अध्यक्ष सोनू, पप्पू यादव, रजत, वकील सहित सैकड़ों ई-रिक्शा चालक मौजूद रहे। चालकों ने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने उनकी मांगों पर तुरंत ध्यान नहीं दिया तो आगे और बड़ी आंदोलन की रूपरेखा तैयार की जाएगी।2
- हापुड थाना धौलाना पुलिस ने ग्राम शौलाना में घटित फायरिंग की घटना में संलिप्त 02 अभियुक्तों को किया गिरफ्तार, जिनके कब्जे से घटना में प्रयुक्त एक अवैध पिस्टल, एक अवैध तमंचा व एक बुलेट मोटर साइकिल बरामद।1
- Post by गौरव प्रताप कोरी1
- क्या आप लोग इतनी ऊंचाई पर जाकर ऐसी वीडियो बना सकते हैं अगर आप बना सकते हैं तो समझो आपका हार्ड बहुत ही मजबूत है और आप इस प्रकार की हुक वीडियो बनाकर लाखों रुपए छाप सकते हैं लेकिन इसमें जान का जोखिम भी होता है तो ऐसी वीडियो बनाने से पहले विशेषज्ञों की जान पहचान विशेषज्ञ का मान सम्मान और विशेषज्ञों की सलाह जरूर ले लेना उसके बाद ही आगे कदम उठाना1