बेदू ग्राम पंचायत में कागज की चिट पर भुगतान? सवालों के घेरे में पंचायत के बिल नरसिंहपुर। ग्राम पंचायत में सरकारी राशि के भुगतान को लेकर अब गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। सामने आए दस्तावेजों में कहीं साधारण कागज पर हाथ से लिखा हिसाब दिखाई देता है तो कहीं हस्तलिखित कैश मेमो के आधार पर हजारों रुपये का लेन-देन दर्ज है। ये दस्तावेज केवल एक उदाहरण हैं। सवाल यह है कि क्या पंचायत में इसी तरह के कागजी हिसाब के आधार पर सरकारी भुगतान किए जा रहे हैं? सामने आए एक कैश मेमो में करीब ₹6,000 की राशि दर्ज है। वहीं अन्य दो हस्तलिखित पर्चियों में 1 जुलाई 2026 की तारीख के साथ करीब ₹10,300 और ₹8,700 का हिसाब लिखा दिखाई देता है। इन पर्चियों में सामान और राशि का विवरण हाथ से दर्ज है, लेकिन उपलब्ध तस्वीरों में औपचारिक टैक्स इनवॉइस अथवा विस्तृत खरीद बिल स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देता। सवाल सिर्फ बिल का नहीं, सरकारी पैसे के हिसाब का है ग्राम पंचायत में यदि किसी सामग्री की खरीद की गई है और उसके बदले सरकारी खाते से भुगतान हुआ है, तो उसके पीछे संबंधित खरीद का उचित दस्तावेज होना चाहिए। ऐसे में सवाल उठता है— क्या केवल साधारण कागज पर हाथ से लिखी पर्ची पंचायत के सरकारी भुगतान का आधार बन सकती है? यदि इन पर्चियों के आधार पर भुगतान किया गया है तो— - संबंधित खरीद का मूल बिल कहां है? - विक्रेता की फर्म का पूरा विवरण क्या है? - भुगतान किसके नाम और किस माध्यम से किया गया? - पंचायत की कैशबुक या ऑनलाइन भुगतान रिकॉर्ड में इसकी एंट्री है या नहीं? - खरीदी गई सामग्री वास्तव में पंचायत तक पहुंची या नहीं? - सामग्री की प्राप्ति का रिकॉर्ड और स्टॉक रजिस्टर में उसका उल्लेख है या नहीं? - एक ही तारीख अथवा अलग-अलग तारीखों में इसी तरह की कितनी पर्चियों पर भुगतान किया गया? - क्या इन भुगतानों पर पंचायत के जिम्मेदार अधिकारियों के हस्ताक्षर और स्वीकृति मौजूद हैं? एक पर्ची नहीं, पूरे रिकॉर्ड की जांच जरूरी यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि सिर्फ किसी हस्तलिखित पर्ची के सामने आने से उसे अपने आप फर्जी भुगतान नहीं कहा जा सकता। असली स्थिति पंचायत के मूल भुगतान रिकॉर्ड, वाउचर, कैशबुक, बैंक रिकॉर्ड, स्टॉक रजिस्टर और संबंधित विक्रेता के दस्तावेजों के मिलान से ही सामने आएगी। लेकिन यदि बड़ी रकम के भुगतान के लिए बार-बार इसी तरह की साधारण पर्चियों का इस्तेमाल हुआ है, तो यह निश्चित रूप से जांच का विषय है। जिम्मेदार अधिकारियों से जवाब जरूरी सबसे बड़ा सवाल यह है कि पंचायत के सरकारी धन के भुगतान में दस्तावेजी प्रक्रिया का पालन किस स्तर पर किया गया? क्या पंचायत के जिम्मेदार अधिकारी इन पर्चियों को वैध भुगतान दस्तावेज मानकर भुगतान कर रहे हैं? यदि हां, तो किस नियम के तहत? और यदि इन पर्चियों के पीछे बाकायदा मूल बिल, वाउचर और खरीद का पूरा रिकॉर्ड मौजूद है, तो उसे सार्वजनिक करने में आखिर परेशानी क्या है? सरकारी पैसा जनता का पैसा है। इसलिए उसके एक-एक रुपये का हिसाब कागज पर नहीं, बल्कि पारदर्शी और सत्यापन योग्य दस्तावेजों में होना चाहिए। अब जरूरत इस बात की है कि संबंधित जनपद पंचायत और जिला पंचायत अधिकारी पूरे मामले के मूल भुगतान रिकॉर्ड की जांच कराएं और स्पष्ट करें कि सामने आई इन पर्चियों के आधार पर कोई भुगतान हुआ है या नहीं। अगर भुगतान हुआ है तो उसकी वैधता, वास्तविक खरीद और सामग्री की उपलब्धता की भी जांच होनी चाहिए। सवाल सीधा है—क्या ग्राम पंचायत में सरकारी भुगतान के लिए नियम-कायदे जरूरी हैं या सिर्फ एक कागज की चिट ही काफी है? बेदू ग्राम पंचायत में कागज की चिट पर भुगतान? सवालों के घेरे में पंचायत के बिल नरसिंहपुर। ग्राम पंचायत में सरकारी राशि के भुगतान को लेकर अब गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। सामने आए दस्तावेजों में कहीं साधारण कागज पर हाथ से लिखा हिसाब दिखाई देता है तो कहीं हस्तलिखित कैश मेमो के आधार पर हजारों रुपये का लेन-देन दर्ज है। ये दस्तावेज केवल एक उदाहरण हैं। सवाल यह है कि क्या पंचायत में इसी तरह के कागजी हिसाब के आधार पर सरकारी भुगतान किए जा रहे हैं? सामने आए एक कैश मेमो में करीब ₹6,000 की राशि दर्ज है। वहीं अन्य दो हस्तलिखित पर्चियों में 1 जुलाई 2026 की तारीख के साथ करीब ₹10,300 और ₹8,700 का हिसाब लिखा दिखाई देता है। इन पर्चियों में सामान और राशि का विवरण हाथ से दर्ज है, लेकिन उपलब्ध तस्वीरों में औपचारिक टैक्स इनवॉइस अथवा विस्तृत खरीद बिल स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देता। सवाल सिर्फ बिल का नहीं, सरकारी पैसे के हिसाब का है ग्राम पंचायत में यदि किसी सामग्री की खरीद की गई है और उसके बदले सरकारी खाते से भुगतान हुआ है, तो उसके पीछे संबंधित खरीद का उचित दस्तावेज होना चाहिए। ऐसे में सवाल उठता है— क्या केवल साधारण कागज पर हाथ से लिखी पर्ची पंचायत के सरकारी भुगतान का आधार बन सकती है? यदि इन पर्चियों के आधार पर भुगतान किया गया है तो— - संबंधित खरीद का मूल बिल कहां है? - विक्रेता की फर्म का पूरा विवरण क्या है? - भुगतान किसके नाम और किस माध्यम से किया गया? - पंचायत की कैशबुक या ऑनलाइन भुगतान रिकॉर्ड में इसकी एंट्री है या नहीं? - खरीदी गई सामग्री वास्तव में पंचायत तक पहुंची या नहीं? - सामग्री की प्राप्ति का रिकॉर्ड और स्टॉक रजिस्टर में उसका उल्लेख है या नहीं? - एक ही तारीख अथवा अलग-अलग तारीखों में इसी तरह की कितनी पर्चियों पर भुगतान किया गया? - क्या इन भुगतानों पर पंचायत के जिम्मेदार अधिकारियों के हस्ताक्षर और स्वीकृति मौजूद हैं? एक पर्ची नहीं, पूरे रिकॉर्ड की जांच जरूरी यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि सिर्फ किसी हस्तलिखित पर्ची के सामने आने से उसे अपने आप फर्जी भुगतान नहीं कहा जा सकता। असली स्थिति पंचायत के मूल भुगतान रिकॉर्ड, वाउचर, कैशबुक, बैंक रिकॉर्ड, स्टॉक रजिस्टर और संबंधित विक्रेता के दस्तावेजों के मिलान से ही सामने आएगी। लेकिन यदि बड़ी रकम के भुगतान के लिए बार-बार इसी तरह की साधारण पर्चियों का इस्तेमाल हुआ है, तो यह निश्चित रूप से जांच का विषय है। जिम्मेदार अधिकारियों से जवाब जरूरी सबसे बड़ा सवाल यह है कि पंचायत के सरकारी धन के भुगतान में दस्तावेजी प्रक्रिया का पालन किस स्तर पर किया गया? क्या पंचायत के जिम्मेदार अधिकारी इन पर्चियों को वैध भुगतान दस्तावेज मानकर भुगतान कर रहे हैं? यदि हां, तो किस नियम के तहत? और यदि इन पर्चियों के पीछे बाकायदा मूल बिल, वाउचर और खरीद का पूरा रिकॉर्ड मौजूद है, तो उसे सार्वजनिक करने में आखिर परेशानी क्या है? सरकारी पैसा जनता का पैसा है। इसलिए उसके एक-एक रुपये का हिसाब कागज पर नहीं, बल्कि पारदर्शी और सत्यापन योग्य दस्तावेजों में होना चाहिए। अब जरूरत इस बात की है कि संबंधित जनपद पंचायत और जिला पंचायत अधिकारी पूरे मामले के मूल भुगतान रिकॉर्ड की जांच कराएं और स्पष्ट करें कि सामने आई इन पर्चियों के आधार पर कोई भुगतान हुआ है या नहीं। अगर भुगतान हुआ है तो उसकी वैधता, वास्तविक खरीद और सामग्री की उपलब्धता की भी जांच होनी चाहिए। सवाल सीधा है—क्या ग्राम पंचायत में सरकारी भुगतान के लिए नियम-कायदे जरूरी हैं या सिर्फ एक कागज की चिट ही काफी है? *© Stringer24 News | सत्य और समाज के बीच की कड़ी*
बेदू ग्राम पंचायत में कागज की चिट पर भुगतान? सवालों के घेरे में पंचायत के बिल नरसिंहपुर। ग्राम पंचायत में सरकारी राशि के भुगतान को लेकर अब गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। सामने आए दस्तावेजों में कहीं साधारण कागज पर हाथ से लिखा हिसाब दिखाई देता है तो कहीं हस्तलिखित कैश मेमो के आधार पर हजारों रुपये का लेन-देन दर्ज है। ये दस्तावेज केवल एक उदाहरण हैं। सवाल यह है कि क्या पंचायत में इसी तरह के कागजी हिसाब के आधार पर सरकारी भुगतान किए जा रहे हैं? सामने आए एक कैश मेमो में करीब ₹6,000 की राशि दर्ज है। वहीं अन्य दो हस्तलिखित पर्चियों में 1 जुलाई 2026 की तारीख के साथ करीब ₹10,300 और ₹8,700 का हिसाब लिखा दिखाई देता है। इन पर्चियों में सामान और राशि का विवरण हाथ से दर्ज है, लेकिन उपलब्ध तस्वीरों में औपचारिक टैक्स इनवॉइस अथवा विस्तृत खरीद बिल स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देता। सवाल सिर्फ बिल का नहीं, सरकारी पैसे के हिसाब का है ग्राम पंचायत में यदि किसी सामग्री की खरीद की गई है और उसके बदले सरकारी खाते से भुगतान हुआ है, तो उसके पीछे संबंधित खरीद का उचित दस्तावेज होना चाहिए। ऐसे में सवाल उठता है— क्या केवल साधारण कागज पर हाथ से लिखी पर्ची पंचायत के सरकारी भुगतान का आधार बन सकती है? यदि इन पर्चियों के आधार पर भुगतान किया गया है तो— - संबंधित खरीद का मूल बिल कहां है? - विक्रेता की फर्म का पूरा विवरण क्या है? - भुगतान किसके नाम और किस माध्यम से किया गया? - पंचायत की कैशबुक या ऑनलाइन भुगतान रिकॉर्ड में इसकी एंट्री है या नहीं? - खरीदी गई सामग्री वास्तव में पंचायत तक पहुंची या नहीं? - सामग्री की प्राप्ति का रिकॉर्ड और स्टॉक रजिस्टर में उसका उल्लेख है या नहीं? - एक ही तारीख अथवा अलग-अलग तारीखों में इसी तरह की कितनी पर्चियों पर भुगतान किया गया? - क्या इन भुगतानों पर पंचायत के जिम्मेदार अधिकारियों के हस्ताक्षर और स्वीकृति मौजूद हैं? एक पर्ची नहीं, पूरे रिकॉर्ड की जांच जरूरी यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि सिर्फ किसी हस्तलिखित पर्ची के सामने आने से उसे अपने आप फर्जी भुगतान नहीं कहा जा सकता। असली स्थिति पंचायत के मूल भुगतान रिकॉर्ड, वाउचर, कैशबुक, बैंक रिकॉर्ड, स्टॉक रजिस्टर और संबंधित विक्रेता के दस्तावेजों के मिलान से ही सामने आएगी। लेकिन यदि बड़ी रकम के भुगतान के लिए बार-बार इसी तरह की साधारण पर्चियों का इस्तेमाल हुआ है, तो यह निश्चित रूप से जांच का विषय है। जिम्मेदार अधिकारियों से जवाब जरूरी सबसे बड़ा सवाल यह है कि पंचायत के सरकारी धन के भुगतान में दस्तावेजी प्रक्रिया का पालन किस स्तर पर किया गया? क्या पंचायत के जिम्मेदार अधिकारी इन पर्चियों को वैध भुगतान दस्तावेज मानकर भुगतान कर रहे हैं? यदि हां, तो किस नियम के तहत? और यदि इन पर्चियों के पीछे बाकायदा मूल बिल, वाउचर और खरीद का पूरा रिकॉर्ड मौजूद है, तो उसे सार्वजनिक करने में आखिर परेशानी क्या है? सरकारी पैसा जनता का पैसा है। इसलिए उसके एक-एक रुपये का हिसाब कागज पर नहीं, बल्कि पारदर्शी और सत्यापन योग्य दस्तावेजों में होना चाहिए। अब जरूरत इस बात की है कि संबंधित जनपद पंचायत और जिला पंचायत अधिकारी पूरे मामले के मूल भुगतान रिकॉर्ड की जांच कराएं और स्पष्ट करें कि सामने आई इन पर्चियों के आधार पर कोई भुगतान हुआ है या नहीं। अगर भुगतान हुआ है तो उसकी वैधता, वास्तविक खरीद और सामग्री की उपलब्धता की भी जांच होनी चाहिए। सवाल सीधा है—क्या ग्राम पंचायत में सरकारी भुगतान के लिए नियम-कायदे जरूरी हैं या सिर्फ एक कागज की चिट ही काफी है? बेदू ग्राम पंचायत में कागज की चिट पर भुगतान? सवालों के घेरे में पंचायत के बिल नरसिंहपुर। ग्राम पंचायत में सरकारी राशि के भुगतान को लेकर अब गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। सामने आए दस्तावेजों में कहीं साधारण कागज पर हाथ से लिखा हिसाब दिखाई देता है तो कहीं हस्तलिखित कैश मेमो के आधार पर हजारों रुपये का लेन-देन दर्ज है। ये दस्तावेज केवल एक उदाहरण हैं। सवाल यह है कि क्या पंचायत में इसी तरह के कागजी हिसाब के आधार पर सरकारी भुगतान किए जा रहे हैं? सामने आए एक कैश मेमो में करीब ₹6,000 की राशि दर्ज है। वहीं अन्य दो हस्तलिखित पर्चियों में 1 जुलाई 2026 की तारीख के साथ करीब ₹10,300 और ₹8,700 का हिसाब लिखा दिखाई देता है। इन पर्चियों में सामान और राशि का विवरण हाथ से दर्ज है, लेकिन उपलब्ध तस्वीरों में औपचारिक टैक्स इनवॉइस अथवा विस्तृत खरीद बिल स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देता। सवाल सिर्फ बिल का नहीं, सरकारी पैसे के हिसाब का है ग्राम पंचायत में यदि किसी सामग्री की खरीद की गई है और उसके बदले सरकारी खाते से भुगतान हुआ है, तो उसके पीछे संबंधित खरीद का उचित दस्तावेज होना चाहिए। ऐसे में सवाल उठता है— क्या केवल साधारण कागज पर हाथ से लिखी पर्ची पंचायत के सरकारी भुगतान का आधार बन सकती है? यदि इन पर्चियों के आधार पर भुगतान किया गया है तो— - संबंधित खरीद का मूल बिल कहां है? - विक्रेता की फर्म का पूरा विवरण क्या है? - भुगतान किसके नाम और किस माध्यम से किया गया? - पंचायत की कैशबुक या ऑनलाइन भुगतान रिकॉर्ड में इसकी एंट्री है या नहीं? - खरीदी गई सामग्री वास्तव में पंचायत तक पहुंची या नहीं? - सामग्री की प्राप्ति का रिकॉर्ड और स्टॉक रजिस्टर में उसका उल्लेख है या नहीं? - एक ही तारीख अथवा अलग-अलग तारीखों में इसी तरह की कितनी पर्चियों पर भुगतान किया गया? - क्या इन भुगतानों पर पंचायत के जिम्मेदार अधिकारियों के हस्ताक्षर और स्वीकृति मौजूद हैं? एक पर्ची नहीं, पूरे रिकॉर्ड की जांच जरूरी यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि सिर्फ किसी हस्तलिखित पर्ची के सामने आने से उसे अपने आप फर्जी भुगतान नहीं कहा जा सकता। असली स्थिति पंचायत के मूल भुगतान रिकॉर्ड, वाउचर, कैशबुक, बैंक रिकॉर्ड, स्टॉक रजिस्टर और संबंधित विक्रेता के दस्तावेजों के मिलान से ही सामने आएगी। लेकिन यदि बड़ी रकम के भुगतान के लिए बार-बार इसी तरह की साधारण पर्चियों का इस्तेमाल हुआ है, तो यह निश्चित रूप से जांच का विषय है। जिम्मेदार अधिकारियों से जवाब जरूरी सबसे बड़ा सवाल यह है कि पंचायत के सरकारी धन के भुगतान में दस्तावेजी प्रक्रिया का पालन किस स्तर पर किया गया? क्या पंचायत के जिम्मेदार अधिकारी इन पर्चियों को वैध भुगतान दस्तावेज मानकर भुगतान कर रहे हैं? यदि हां, तो किस नियम के तहत? और यदि इन पर्चियों के पीछे बाकायदा मूल बिल, वाउचर और खरीद का पूरा रिकॉर्ड मौजूद है, तो उसे सार्वजनिक करने में आखिर परेशानी क्या है? सरकारी पैसा जनता का पैसा है। इसलिए उसके एक-एक रुपये का हिसाब कागज पर नहीं, बल्कि पारदर्शी और सत्यापन योग्य दस्तावेजों में होना चाहिए। अब जरूरत इस बात की है कि संबंधित जनपद पंचायत और जिला पंचायत अधिकारी पूरे मामले के मूल भुगतान रिकॉर्ड की जांच कराएं और स्पष्ट करें कि सामने आई इन पर्चियों के आधार पर कोई भुगतान हुआ है या नहीं। अगर भुगतान हुआ है तो उसकी वैधता, वास्तविक खरीद और सामग्री की उपलब्धता की भी जांच होनी चाहिए। सवाल सीधा है—क्या ग्राम पंचायत में सरकारी भुगतान के लिए नियम-कायदे जरूरी हैं या सिर्फ एक कागज की चिट ही काफी है? *© Stringer24 News | सत्य और समाज के बीच की कड़ी*
- यही हकीकत है सरकार की लोगों को करना पड़ रहा है परेशानी का सामना नहीं बन पा रहा रोड ग्राम वासी कर रहे बार-बार आग्रह सरकार से यही हकीकत है सरकार की लोगों को करना पड़ रहा है परेशानी का सामना नहीं बन पा रहा रोड ग्राम वासी कर रहे बार-बार आग्रह सरकार से1
- नरसिंहपुर - नगर में सजा राखियों का बाजार, स्टोन, ज़री और बच्चों के पसंदीदा कार्टून वाली राखियों की भारी डिमांड भाई-बहन के पवित्र प्रेम और अटूट विश्वास का प्रतीक पर्व रक्षाबंधन इस बार 28 अगस्तको मनाया जा रहा हैं।त्यौहार को लेकर नरसिंहपुर के बाजारों में जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है और चारों तरफ रौनक छाई हुई है। इस वर्ष बाजार में पसंद के अनुसार राखियों का विशाल संग्रह उपलब्ध है।राखी दुकानदार ने जानकारी देते हुए बताया कि ग्राहकों के लिए स्टोन वाली राखियां, ज़री वाली राखियां, और पारंपरिक भैया-भाभी राखियां भारी मात्रा में उपलब्ध हैं। माताएं और बहनें इस बार विशेष रूप से स्टोन वर्क वाली राखियां और भैया-भाभी (जोड़ी) राखियां सबसे ज्यादा पसंद कर रही हैं। छोटे बच्चों के लिए स्पाइडरमैन, पोकेमॉन, और मोटू-पतलू जैसे कार्टून किरदारों वाली फैंसी राखियां बच्चों को बेहद आकर्षित कर रही हैं।1
- तिल्दा, नेवरा-लखना में पार्थिव शिवलिंग का रुद्र अभिषेक किया गया1
- नरसिंहपुर से सतीश विश्वकर्मा की रिपोर्ट स्काई इंडिया टीवी चैनल। सर्जन सेंटर में जो है स्पाइन मैनेजमेंट किया जाता है यह कंपनी 70 देश में चल रही है 22 सालों से चल रही है और हमारे इंडिया की बात करें तो इंडिया में सेरेजम के 530 सेंटर है ऐसे ही एक सेंटर हमारे शहर नरसिंहपुर में ओपन हुआ है जिसका एड्रेस है नगर पालिका चौराहा हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी विजय कंपलेक्स रोटी पार्क के साइड में यहां पर स्पिन मैनेजमेंट किया जाता है और स्पिन मैनेजमेंट से हमारे जो सारे ऑर्गन्स एक्टिव होते हैं वह सारे ऑर्गन्स को एक्टिव करके ब्लड सर्कुलेशन को सही करता है जिससे काफी सारे मेंबर्स को यहां पर आराम मिला है और हम आप सभी से यह अपील करते हैं कि हमारा जो सेंटर है कि डेमो सेंटर सर्विस सेंटर है और इस डेमो का कोई पैसा नहीं लगता है तो यहां पर आप जरूर जरूर लिए धन्यवाद1
- गाडरवारा सावन के आखरी सोमवार को श्रावण मास के चलते उज्जैन की अनुरूप नर्मदेश्वर महाकाल की शाही सवारी बड़े ही धूमधाम से निकाली गई इस यात्रा का शहर वासियों ने जगह जगह पुष्प वर्षा के साथ पूजन अर्चन कर स्वागत किया सवारी शिवधाम डमरू घाटी से प्रारंभ हुई और शिवालय चोक पर ऋणमुक्तेश्वर धाम में समापन किया गया1
- नरसिंहपुर में रेलवे ट्रैक पर अज्ञात व्यक्ति का शव मिलने से क्षेत्र में फैली सनसनी, पुलिस ने घटनास्थल पहुंचकर की कार्यवाही मध्यप्रदेश के नरसिंहपुर जिले के गोटेगांव थाना क्षेत्र में एक अज्ञात युवक का शव रेलवे ट्रैक पर मिलने से क्षेत्र में सनसनी फैल गई । स्थानीय लोगों के द्वारा घटनास्थल पहुंचकर मृतक युवक की पहचान करने की कोशिश की गई । लेकिन पहचान ना हो सकी जिसके बाद रेलवे द्वारा पुलिस को सूचना देकर घटना की जानकारी दी गई और पुलिस ने आंगे की कार्यवाही शुरू की ।1
- …जिम्मेदारों से सवाल—आखिर कब बनेगा घधरोला खुर्द का पक्का रास्ता?”* एंकर — नरसिंहपुर जिले के गाडरवारा तहसील के ग्राम घधरोला खुर्द में सड़क की बदहाली अब ग्रामीणों के साथ-साथ स्कूली बच्चों के लिए भी बड़ी परेशानी बन गई है। हालात ऐसे हैं कि अपनी समस्या प्रशासन तक पहुंचाने के लिए गांव के छोटे-छोटे पढ़ने वाले मासूम बच्चे भी ग्रामीणों के साथ शिकायत करने पहुंचे। गांव से घधरोला कला तक करीब 3 किलोमीटर का रास्ता आज भी पक्की सड़क के इंतजार में है। बारिश के दिनों में कच्चे रास्ते पर कीचड़ और पानी के कारण आवागमन मुश्किल हो जाता है। बच्चों को स्कूल आने-जाने में परेशानी होती है और किसी आपात स्थिति में मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाना भी चुनौती बन जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क निर्माण के लिए कई बार पंचायत और अधिकारियों से गुहार लगाई गई, लेकिन अब तक सड़क निर्माण नहीं हो सका। अब ग्रामीणों के साथ मासूम बच्चे भी जिम्मेदारों से सड़क की मांग कर रहे हैं। बाइट — निकिता नोरिया, छात्रा बाइट — ग्रामीण **सड़क के लिए मासूमों की गुहार…जिम्मेदारों से सवाल—आखिर कब बनेगा घधरोला खुर्द का पक्का रास्ता?”* एंकर — नरसिंहपुर जिले के गाडरवारा तहसील के ग्राम घधरोला खुर्द में सड़क की बदहाली अब ग्रामीणों के साथ-साथ स्कूली बच्चों के लिए भी बड़ी परेशानी बन गई है। हालात ऐसे हैं कि अपनी समस्या प्रशासन तक पहुंचाने के लिए गांव के छोटे-छोटे पढ़ने वाले मासूम बच्चे भी ग्रामीणों के साथ शिकायत करने पहुंचे। गांव से घधरोला कला तक करीब 3 किलोमीटर का रास्ता आज भी पक्की सड़क के इंतजार में है। बारिश के दिनों में कच्चे रास्ते पर कीचड़ और पानी के कारण आवागमन मुश्किल हो जाता है। बच्चों को स्कूल आने-जाने में परेशानी होती है और किसी आपात स्थिति में मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाना भी चुनौती बन जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क निर्माण के लिए कई बार पंचायत और अधिकारियों से गुहार लगाई गई, लेकिन अब तक सड़क निर्माण नहीं हो सका। अब ग्रामीणों के साथ मासूम बच्चे भी जिम्मेदारों से सड़क की मांग कर रहे हैं। बाइट — निकिता नोरिया, छात्रा बाइट — ग्रामीण3
- सेठान चौराहे पर दर्दनाक हादसा: डंपर की चपेट में आईं 8 गौमाताएं, 6 की मौके पर मौत सेठान चौराहे पर दर्दनाक हादसा: डंपर की चपेट में आईं 8 गौमाताएं, 6 की मौके पर मौत साईंखेड़ा। बुधवार रात करीब 1 बजे सेठान चौराहे पर एक बेहद दर्दनाक हादसा सामने आया। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार तेज रफ्तार डंपर ने सड़क पर मौजूद 8 गौमाताओं को कुचल दिया, जिसमें 6 गौमाताओं की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि 2 गंभीर रूप से घायल होकर खून से लथपथ हालत में सड़क पर तड़पती मिलीं। घटना के बाद मौके पर पहुंचे गौभक्तों और स्वयंसेवकों में आक्रोश फैल गया। उन्होंने डंपरों को रोकना शुरू कर दिया। देखते ही देखते सेठान चौराहे पर करीब 50–60 डंपर खड़े हो गए, जिससे स्थिति तनावपूर्ण हो गई। इस हृदयविदारक घटना ने क्षेत्र के लोगों को झकझोर कर रख दिया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि भारी वाहनों की तेज रफ्तार और लगातार आवागमन के कारण इस मार्ग पर पशुओं के साथ-साथ आम लोगों की सुरक्षा भी खतरे में है। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि हादसे की निष्पक्ष जांच कर दोषी वाहन चालक के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए और भारी वाहनों की गति व आवागमन पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जाए। समाचार लिखे जाने तक घटना की आधिकारिक पुष्टि एवं पुलिस कार्रवाई की जानकारी सामने नहीं आई थी।1