लाखन आर्मी के राष्ट्रीय अध्यक्ष सूरज पासी को उनके संघर्ष और समाज सेवा के माध्यम से 'पद से बड़े और कर्म से अमर' व्यक्ति के रूप में सराहा गया है। उनके बारे में कहा गया है कि 'ना थके हैं पांव कभी और न ही हिम्मत हारी है..! मैं कल भी सफर में था, आज भी हूं...'। पासी समाज के गौरवशाली इतिहास, स्वाभिमान और सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण के जनजागरण अभियान में वे निरंतर सक्रिय हैं। उनका नेतृत्व केवल भाषणों से नहीं, बल्कि समाज के सुख-दुख में सहभागी बनने, तपती धूप, बारिश और लंबी यात्राओं जैसी चुनौतियों के बीच लगातार समाज को जागरूक करने से स्थापित हुआ है। इसी कारण आज हजारों लोग सूरज पासी को विश्वास, संघर्ष और समर्पण का प्रतीक मानते हैं। 9 जून से शुरू हुई पासी स्वाभिमान यात्रा को केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि समाज को उसके गौरवशाली इतिहास से जोड़ने वाला एक व्यापक जनआंदोलन बताया गया है। हरदोई से शुरू होकर यह यात्रा उन्नाव, कानपुर, फतेहपुर, रायबरेली, अमेठी, सुलतानपुर, प्रतापगढ़, कौशांबी, प्रयागराज, मिर्जापुर और सोनभद्र सहित कई जनपदों में पहुंची है, जिससे समाज में एक नई चेतना का संचार हुआ है। इस यात्रा के दौरान दर्जन भर जिलों में 40 से अधिक सभाएं, रात्रि चौपाल और जनसंवाद कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं, जिनका उद्देश्य समाज को उसकी ऐतिहासिक विरासत के प्रति जागरूक करना है। अभियान का लक्ष्य केवल इतिहास को याद करना नहीं, बल्कि उन धरोहरों को बचाना भी है जो उपेक्षा के कारण विलुप्त होने की कगार पर हैं। राजा कंस के किले और प्राचीन शिव मंदिर सहित समाज की ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण का संकल्प लेकर निकली यह यात्रा आने वाली पीढ़ियों को उनके गौरवशाली अतीत से परिचित कराने का महत्वपूर्ण प्रयास है। ग्राम चौपालों के माध्यम से समाज के लोगों को एकजुट करके शासन-प्रशासन तक अपनी बात प्रभावी ढंग से पहुंचाई जा रही है। अंत में यह जोर दिया गया है कि समाज का इतिहास तभी जीवित रहता है जब उसे याद करने वाले लोग भी जीवित चेतना के साथ आगे बढ़ें। पासी स्वाभिमान यात्रा उसी चेतना का नाम है और सूरज पासी उस संकल्प के प्रतीक हैं, जो समाज को उसके गौरव, सम्मान और अधिकारों के लिए संगठित कर रहे हैं। कहा गया है कि जब कोई व्यक्ति समाज के इतिहास को बचाने के लिए स्वयं सड़क पर उतर जाए, तब वह केवल नेता नहीं रहता — वह एक आंदोलन बन जाता है।
लाखन आर्मी के राष्ट्रीय अध्यक्ष सूरज पासी को उनके संघर्ष और समाज सेवा के माध्यम से 'पद से बड़े और कर्म से अमर' व्यक्ति के रूप में सराहा गया है। उनके बारे में कहा गया है कि 'ना थके हैं पांव कभी और न ही हिम्मत हारी है..! मैं कल भी सफर में था, आज भी हूं...'। पासी समाज के गौरवशाली इतिहास, स्वाभिमान और सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण के जनजागरण अभियान में वे निरंतर सक्रिय हैं। उनका नेतृत्व केवल भाषणों से नहीं, बल्कि समाज के सुख-दुख में सहभागी बनने, तपती धूप, बारिश और लंबी यात्राओं जैसी चुनौतियों के बीच लगातार समाज को जागरूक करने से स्थापित हुआ है। इसी कारण आज हजारों लोग सूरज पासी को विश्वास, संघर्ष और समर्पण का प्रतीक मानते हैं। 9 जून से शुरू हुई पासी स्वाभिमान यात्रा को केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि समाज को उसके गौरवशाली इतिहास से जोड़ने वाला एक व्यापक जनआंदोलन बताया गया है। हरदोई से शुरू होकर यह यात्रा उन्नाव, कानपुर, फतेहपुर, रायबरेली, अमेठी, सुलतानपुर, प्रतापगढ़, कौशांबी, प्रयागराज, मिर्जापुर और सोनभद्र सहित कई जनपदों में पहुंची है, जिससे समाज में एक नई चेतना का संचार हुआ है। इस यात्रा के दौरान दर्जन भर जिलों में 40 से अधिक सभाएं, रात्रि चौपाल और जनसंवाद कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं, जिनका उद्देश्य समाज को उसकी ऐतिहासिक विरासत के प्रति जागरूक करना है। अभियान का लक्ष्य केवल इतिहास को याद करना नहीं, बल्कि उन धरोहरों को बचाना भी है जो उपेक्षा के कारण विलुप्त होने की कगार पर हैं। राजा कंस के किले और प्राचीन शिव मंदिर सहित समाज की ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण का संकल्प लेकर निकली यह यात्रा आने वाली पीढ़ियों को उनके गौरवशाली अतीत से परिचित कराने का महत्वपूर्ण प्रयास है। ग्राम चौपालों के माध्यम से समाज के लोगों को एकजुट करके शासन-प्रशासन तक अपनी बात प्रभावी ढंग से पहुंचाई जा रही है। अंत में यह जोर दिया गया है कि समाज का इतिहास तभी जीवित रहता है जब उसे याद करने वाले लोग भी जीवित चेतना के साथ आगे बढ़ें। पासी स्वाभिमान यात्रा उसी चेतना का नाम है और सूरज पासी उस संकल्प के प्रतीक हैं, जो समाज को उसके गौरव, सम्मान और अधिकारों के लिए संगठित कर रहे हैं। कहा गया है कि जब कोई व्यक्ति समाज के इतिहास को बचाने के लिए स्वयं सड़क पर उतर जाए, तब वह केवल नेता नहीं रहता — वह एक आंदोलन बन जाता है।
- उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले से एक दर्दनाक घटना सामने आई है। विकासखंड बिजुआ क्षेत्र के लखरावा में एक मोबाइल फोन फटने से दो साल की बच्ची की जान चली गई।1
- लखीमपुर खीरी जिले के ब्लॉक बिजुआ स्थित ग्राम पंचायत बसलीपुर में पिछले करीब 10 दिनों से चल रहे एक टूर्नामेंट का सेमीफाइनल मुकाबला आज संपन्न हुआ।1
- गोला गोकर्णनाथ में स्वच्छता व्यवस्था को बेहतर बनाने के उद्देश्य से पालिका अध्यक्ष विजय शुक्ला 'रिंकू' ने नगर में चल रहे नाला सफाई कार्यों का निरीक्षण किया। इस दौरान, उन्होंने संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों को सभी नालों की सफाई समयबद्ध और प्रभावी तरीके से पूर्ण कराने के निर्देश दिए। इस पहल का मुख्य लक्ष्य बरसात के मौसम में जलभराव जैसी समस्याओं से शहर को निजात दिलाना है।1
- लखीमपुर खीरी जनपद के प्रसिद्ध आस्था केंद्र, कंजा बाबा स्थित बालाजी महाराज संकट मोचन हनुमान मंदिर में शनिवार, दिनांक 20 जून 2026 को भक्ति और श्रद्धा का अद्भुत संगम देखने को मिला। इस शुभ अवसर पर डॉ. निमिष गुप्ता एवं उनके परिवार द्वारा मंदिर परिसर में एक विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। भंडारे से पूर्व, विधि-विधान के साथ बालाजी महाराज की पूजा-अर्चना की गई और उन्हें भोग अर्पित किया गया। इसके बाद पूड़ी, सब्जी और बूंदी सहित विभिन्न प्रकार के प्रसाद की व्यवस्था की गई, जिसे बड़ी संख्या में उपस्थित श्रद्धालुओं और भक्तजनों के बीच वितरित किया गया। पूरे दिन मंदिर परिसर में भक्तिमय वातावरण बना रहा, जहां श्रद्धालुओं ने बालाजी महाराज के जयकारों के साथ प्रसाद ग्रहण किया और अपनी सुख-समृद्धि एवं मंगलकामना के लिए प्रार्थना की। स्थानीय लोगों का मानना है कि कंजा बाबा स्थित यह मंदिर क्षेत्र की गहरी आस्था का केंद्र है और सच्चे मन से मनोकामना करने वाले हर भक्त की इच्छा बालाजी महाराज अवश्य पूर्ण करते हैं। क्षेत्र के अनेक श्रद्धालुओं ने इस भंडारे में सहभागिता की और डॉ. निमिष गुप्ता एवं उनके परिवार के इस धार्मिक एवं सामाजिक प्रयास की सराहना की।4
- एक तेज रफ्तार रोडवेज बस की टक्कर के कारण हुए सड़क हादसे में एक बाइक चालक की जान चली गई।1
- यह एक दिल को छू लेने वाली कहानी है जिसमें एक भाई के अटूट प्रेम ने अपनी बहन के जन्मदिन को अविस्मरणीय बना दिया। इस प्यारे प्रसंग में छोटी, भैया और एक दयालु चाचा ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिससे यह जन्मदिन बेहद खास बन गया।1
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंगाल के हुगली स्थित तारकेश्वर से प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की तेईसवीं किस्त सीधे किसानों के बैंक खातों में हस्तांतरित की। इस महत्वपूर्ण अवसर पर, लखीमपुर खीरी जिले के मितौली विकासखंड सभागार में इस कार्यक्रम का सीधा प्रसारण दिखाया गया, जिसे क्षेत्र के किसानों ने बड़ी संख्या में देखा और सुना। कार्यक्रम के दौरान, एडीओ नैमिष यादव ने मुख्य अतिथि और विशिष्ट अतिथियों को पुष्पगुच्छ व स्मृति चिन्ह प्रदान कर सम्मानित किया। एडीओ पंचायत प्रमोद कुमार ने किसानों को संबोधित करते हुए उन्हें अन्नदाता बताया और इस बात पर जोर दिया कि किसानों के सम्मान व उनकी खेती को सुचारु रूप से चलाने में मदद के लिए हर वर्ष 6000 रुपये दिए जाते हैं। उन्होंने सरकार द्वारा चलाई जा रही विभिन्न योजनाओं की जानकारी भी किसानों के साथ साझा की। इसी कड़ी में, एडीओ कृषि नैमिष यादव ने सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं के बारे में विस्तृत जानकारी दी और उपस्थित किसानों को सम्मानित करते हुए कहा कि ऐसी योजनाएं किसानों को समृद्ध और सुखी बनाने में सहायक होंगी। इस पूरे कार्यक्रम का संचालन बीटी कृषि हरजेश कुमार ने कुशलतापूर्वक किया। इस आयोजन में मंडल अध्यक्ष कस्ता कौशल बाजपेई, अल्पसंख्यक मोर्चा के जिला अध्यक्ष समसाद अली, भाजपा मीडिया प्रभारी सुरेश शुक्ल, संदीप वर्मा, मुदित दीक्षित सहित मितौली क्षेत्र के कई सम्मानित किसान मौजूद रहे।3
- रेड हल्क, हल्क और वमिका गब्बी की भागीदारी वाले एक शानदार अंतरिक्ष मिशन की घोषणा की गई है, जिसका उद्देश्य भारत को सितारों तक पहुंचाना है। इस महाकाव्य मिशन के जरिए देश को अंतरिक्ष की गहराइयों में ले जाने की तैयारी की जा रही है।1