चित्रकूट के राजापुर में नागरिकों ने जंतर मंतर पर अनशन कर रहे शिक्षाविद सोनम वांगचुक के साथ हुए पुलिस दुर्व्यवहार और NEET पेपर लीक के विरोध में राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजा है। उपजिलाधिकारी राजापुर के माध्यम से 22 जुलाई 2026 को यह ज्ञापन सौंपा गया, जिसमें पुलिस की कार्रवाई और प्रशासनिक दबाव पर गहरा आक्रोश जताया गया है। ज्ञापन के मुताबिक, सोनम वांगचुक NEET पेपर लीक मामले में न्याय और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर 21 दिनों से अनशन पर बैठे थे। आरोप है कि 18 जुलाई 2026 को भारी पुलिस बल ने जंतर मंतर को घेरकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे युवाओं पर लाठीचार्ज कर दिया। 21 दिन के अनशन के कारण कमजोर हो चुके सोनम वांगचुक को पुलिस जबरन उठाकर अस्पताल ले गई। ज्ञापनकर्ताओं का कहना है कि 20 जुलाई को संसद सत्र शुरू होने पर सोनम वांगचुक ने संसद मार्च की घोषणा की थी, और उसी लोकतांत्रिक आवाज को दबाने के लिए प्रशासन पर दबाव बनाकर यह कार्रवाई कराई गई। इस दौरान कार्यकर्ता अभिजीत दीपक को भी हिरासत में लिया गया। ज्ञापन में कहा गया है कि सरकार किसानों, महिलाओं और अब युवाओं की आवाज को लाठियों व आंसू गैस से दबाने का प्रयास कर रही है। ज्ञापन में राष्ट्रपति से 4 प्रमुख मांगें रखी गई हैं, जिनमें शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान का तुरंत इस्तीफा, सोनम वांगचुक व युवाओं पर हुए लाठीचार्ज की उच्चस्तरीय जांच, छात्रों के भविष्य की सुरक्षा के लिए पेपर लीक रोधी सख्त कानून व रोजगार की ठोस नीतियां बनाने, और जंतर मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन के संवैधानिक अधिकार की रक्षा करना शामिल है। नागरिकों ने राष्ट्रपति से संविधान की रक्षक के रूप में युवाओं के भविष्य और लोकतांत्रिक मूल्यों को बचाने के लिए तुरंत हस्तक्षेप करने की गुहार लगाई है।
चित्रकूट के राजापुर में नागरिकों ने जंतर मंतर पर अनशन कर रहे शिक्षाविद सोनम वांगचुक के साथ हुए पुलिस दुर्व्यवहार और NEET पेपर लीक के विरोध में राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजा है। उपजिलाधिकारी राजापुर के माध्यम से 22 जुलाई 2026 को यह ज्ञापन सौंपा गया, जिसमें पुलिस की कार्रवाई और प्रशासनिक दबाव पर गहरा आक्रोश जताया गया है। ज्ञापन के मुताबिक, सोनम वांगचुक NEET पेपर लीक मामले में न्याय और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर 21 दिनों से अनशन पर बैठे थे। आरोप है कि 18 जुलाई 2026 को भारी पुलिस बल ने जंतर मंतर को घेरकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे युवाओं पर लाठीचार्ज कर दिया। 21 दिन के अनशन के कारण कमजोर हो चुके सोनम वांगचुक को पुलिस जबरन उठाकर अस्पताल ले गई। ज्ञापनकर्ताओं का कहना है कि 20 जुलाई को संसद सत्र शुरू होने पर सोनम वांगचुक ने संसद मार्च की घोषणा की थी, और उसी लोकतांत्रिक आवाज को दबाने के लिए प्रशासन पर दबाव बनाकर यह कार्रवाई कराई गई। इस दौरान कार्यकर्ता अभिजीत दीपक को भी हिरासत में लिया गया। ज्ञापन में कहा गया है कि सरकार किसानों, महिलाओं और अब युवाओं की आवाज को लाठियों व आंसू गैस से दबाने का प्रयास कर रही है। ज्ञापन में राष्ट्रपति से 4 प्रमुख मांगें रखी गई हैं, जिनमें शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान का तुरंत इस्तीफा, सोनम वांगचुक व युवाओं पर हुए लाठीचार्ज की उच्चस्तरीय जांच, छात्रों के भविष्य की सुरक्षा के लिए पेपर लीक रोधी सख्त कानून व रोजगार की ठोस नीतियां बनाने, और जंतर मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन के संवैधानिक अधिकार की रक्षा करना शामिल है। नागरिकों ने राष्ट्रपति से संविधान की रक्षक के रूप में युवाओं के भविष्य और लोकतांत्रिक मूल्यों को बचाने के लिए तुरंत हस्तक्षेप करने की गुहार लगाई है।
- अखिल भारतीय किसान मजदूर सभा (एआईकेएमएस) का उत्तर प्रदेश राज्य सम्मेलन 25 और 26 जुलाई को गोहनिया स्थित स्वास्तिक गेस्ट हाउस में आयोजित किया जाएगा। इस सम्मेलन में एआईकेएमएस किसानों के अधिकारों पर मंथन करने के लिए जुटेगा। कार्यक्रम की शुरुआत संगठन के राष्ट्रीय सचिव कॉमरेड अशोक मेहता द्वारा उद्घाटन के साथ होगी। वहीं 25 जुलाई को सुबह 11 बजे सम्मेलन का खुला सत्र आयोजित किया जाएगा, जिसकी अध्यक्षता स्वागत समिति के अध्यक्ष विजय चितौरी करेंगे।1
- प्रयागराज के शंकरगढ़ स्थित रानीगंज तिराहे पर भारतीय किसान यूनियन (टिकैत ग्रुप) के कार्यकर्ताओं ने देश के शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का पुतला दहन कर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। कार्यकर्ता जंतर-मंतर पर आंदोलन कर रहे छात्रों पर पुलिस द्वारा किए गए लाठीचार्ज की घटना से बेहद आक्रोशित थे। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने पुलिस की इस कार्रवाई के खिलाफ नारेबाजी की और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पद से तुरंत बर्खास्त करने की मांग उठाई।1
- भारतीय किसान सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुरेश चंद्र उपाध्याय ने सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए उसकी कार्यप्रणाली को तानाशाही करार दिया है। उन्होंने कहा कि पुलिस का काम व्यवस्था संभालना है, लेकिन सरकार को जवाब देना चाहिए कि सफेदपोश लोग कहां से आ रहे हैं। उन्होंने यह गंभीर आरोप भी लगाया कि मौजूदा समय में लड़कों के ऊपर ट्रकों से गिट्टी लाकर डलवाई जा रही है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि जवाबदेही से बचने के लिए नेता सदन और प्रधानमंत्री नीट परीक्षा तथा अन्य प्रमुख मुद्दों पर सदन छोड़कर भाग रहे हैं, जबकि इसी देश ने कभी उनके लिए थाली, घंटा और हथौड़ी बजाई थी। उपाध्याय ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के चंदा चोरी से जुड़े बयान पर सवाल उठाते हुए मांग की कि दूध का दूध और पानी का पानी अलग करके स्थिति साफ की जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि हनुमान गढ़ी पर जानबूझकर विवाद पैदा करने की कोशिश हो रही है, जबकि उसका निर्माण एक मुस्लिम ने कराया था और वहां इसका शिलापट भी लगा है। किसान नेता ने सरकार पर देश को बांटने और डर के माहौल में काम करने का आरोप लगाते हुए कहा कि आज जनता और विपक्ष के साथ न्याय नहीं हो रहा है।1
- दिल्ली के जंतर-मंतर पर सरकार के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन देखने को मिला है। इस प्रदर्शन के दौरान लोगों ने सरकार के खिलाफ अपनी आवाज़ बुलंद की और कड़ा विरोध दर्ज कराया।1
- भागलपुर जिले के जटामा और मोहानी के बीच परिजन अपने ही तीन मासूम बच्चों को सड़क किनारे लावारिस हालत में छोड़कर फरार हो गए। घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय लोगों ने बच्चों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया और मामले की सूचना पुलिस को दी। सड़क किनारे मिले इन बच्चों में से एक की उम्र करीब डेढ़ महीने, दूसरे की करीब डेढ़ साल और तीसरे बच्चे की उम्र ढाई से तीन साल के बीच बताई गई है।1