निठारी कांड की शुरुआत साल 2005-2006 में नोएडा के सेक्टर-31 स्थित निठारी गांव से हुई थी पूरी कहानी केशव की जुबानी में देखे निठारी कांड की शुरुआत साल 2005-2006 में नोएडा के सेक्टर-31 स्थित निठारी गांव से हुई थी, जो भारतीय आपराधिक इतिहास के सबसे खौफनाक मामलों में से एक माना जाता है। सिलसिलेवार ढंग से पूरी कहानी इस प्रकार है:1. बच्चों की गुमशुदगी और पुलिस की लापरवाही (2005-2006)साल 2005 से 2006 के बीच निठारी गांव की झुग्गियों से अचानक छोटे बच्चे और युवतियां रहस्यमयी तरीके से गायब होने लगे।पीड़ित परिवार जब शिकायत लेकर पुलिस के पास जाते, तो पुलिस अक्सर उन्हें डांटकर भगा देती या गुमशुदगी की रिपोर्ट लिखने में टालमटोल करती थी।2. कंकालों की बरामदगी और खौफनाक खुलासा (दिसंबर 2006)29 दिसंबर 2006: निठारी गांव के पास स्थित एक बिजनेसमैन मोनिंदर सिंह पंढेर की कोठी (D-5) के पीछे बने नाले की खुदाई के दौरान इंसानी खोपड़ियां और बच्चों के कंकाल मिलने शुरू हुए।देखते ही देखते नाले और कोठी के पिछले हिस्से से करीब 19 महिलाओं और बच्चों के नरकंकाल और अवशेष बरामद हुए।पुलिस ने कोठी के मालिक मोनिंदर सिंह पंढेर और उसके घरेलू नौकर सुरेंद्र कोली को गिरफ्तार कर लिया।3. रोंगटे खड़े करने वाले आरोप (2007)जांच के दौरान सुरेंद्र कोली पर आरोप लगे कि वह बच्चों को टॉफी और चॉकलेट का लालच देकर कोठी के अंदर बुलाता था।इसके बाद उनके साथ दुष्कर्म, हत्या और शव के टुकड़े-टुकड़े करके नाले में फेंकने के गंभीर आरोप लगाए गए। पुलिस और शुरुआती बयानों में हत्या, बलात्कार, शव-मैथुन (necrophilia) और आदमखोरी (cannibalism) जैसी खौफनाक बातें सामने आईं, हालांकि बाद में अदालतों में इन दावों पर सवाल भी उठे।देशव्यापी गुस्से के बाद जनवरी 2007 में इस केस की जांच सीबीआई (CBI) को सौंप दी गई।4. निचली अदालत से कई बार मौत की सजा (2009-2021)सीबीआई ने दोनों के खिलाफ अलग-अलग मामलों के तहत चार्जशीट दाखिल की।2009: गाजियाबाद की विशेष सीबीआई कोर्ट ने पहली बार रिम्पा हलदर केस में सुरेंद्र कोली को दोषी ठहराते हुए मौत की सजा सुनाई।इसके बाद 2010 से 2021 के बीच अलग-अलग मुकदमों की सुनवाई में सुरेंद्र कोली को 12 से अधिक मामलों में फांसी की सजा सुनाई गई, जबकि पंढेर को भी कुछ मामलों में दोषी पाया गया।5. अदालती मोड़ और सबूतों की कमी (2023-2025)अक्टूबर 2023: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने इस मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए सुरेंद्र कोली और मोनिंदर सिंह पंढेर को कई मामलों में बरी कर दिया। कोर्ट ने जांच पर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि जांच बेहद घटिया और लापरवाही से की गई थी और पुलिस अंग तस्करी (organ trade) जैसे बड़े पहलुओं की जांच करने में पूरी तरह नाकाम रही।नवंबर 2025: आखिरकार सुप्रीम कोर्ट ने सुरेंद्र कोली के खिलाफ बचे आखिरी मामले में भी उनकी दोषमुक्ति (acquittal) को बरकरार रखा और करीब 19 साल बाद उन्हें जेल से रिहा करने का आदेश दिया। अदालत का मानना था कि जो कबूलनामे (confessions) लिए गए थे, वे प्रताड़ना के तहत लिए गए थे और उनके खिलाफ ठोस वैज्ञानिक व परिस्थितिजन्य साक्ष्य नहीं थे।6. रिहाई के बाद का जीवन और अंत (2026)जेल से पूरी तरह बरी होकर बाहर आने के बाद सुरेंद्र कोली उत्तराखंड के हरिद्वार चले गए।उन्होंने अपनी पहचान छुपाकर एक निजी फर्म में सुरक्षाकर्मी के तौर पर काम किया और हाल ही में भूपतवाला इलाके में चाय की दुकान शुरू की थी।18 सितंबर 2026: सुबह के समय उसी चाय की दुकान में सुरेंद्र कोली का शव फंदे से लटका हुआ पाया गया। पुलिस का शुरुआती अनुमान है कि यह आत्महत्या का मामला है, हालांकि मामले की जांच अभी जारी है।यह पूरा मामला लगभग दो दशकों तक भारत की कानूनी और जांच व्यवस्था की खामियों को उजागर करने वाला एक बेहद चर्चित और विवादित केस बना रहा
निठारी कांड की शुरुआत साल 2005-2006 में नोएडा के सेक्टर-31 स्थित निठारी गांव से हुई थी पूरी कहानी केशव की जुबानी में देखे निठारी कांड की शुरुआत साल 2005-2006 में नोएडा के सेक्टर-31 स्थित निठारी गांव से हुई थी, जो भारतीय आपराधिक इतिहास के सबसे खौफनाक मामलों में से एक माना जाता है। सिलसिलेवार ढंग से पूरी कहानी इस प्रकार है:1. बच्चों की गुमशुदगी और पुलिस की लापरवाही (2005-2006)साल 2005 से 2006 के बीच निठारी गांव की झुग्गियों से अचानक छोटे बच्चे और युवतियां रहस्यमयी तरीके से गायब होने लगे।पीड़ित परिवार जब शिकायत लेकर पुलिस के पास जाते, तो पुलिस अक्सर उन्हें डांटकर भगा देती या गुमशुदगी की रिपोर्ट लिखने में टालमटोल करती थी।2. कंकालों की बरामदगी और खौफनाक खुलासा (दिसंबर 2006)29 दिसंबर 2006: निठारी गांव के पास स्थित एक बिजनेसमैन मोनिंदर सिंह पंढेर की कोठी (D-5) के पीछे बने नाले की खुदाई के दौरान इंसानी खोपड़ियां और बच्चों के कंकाल मिलने शुरू हुए।देखते ही देखते नाले और कोठी के पिछले हिस्से से करीब 19 महिलाओं और बच्चों के नरकंकाल और अवशेष बरामद हुए।पुलिस ने कोठी के मालिक मोनिंदर सिंह पंढेर और उसके घरेलू नौकर सुरेंद्र कोली को गिरफ्तार कर लिया।3. रोंगटे खड़े करने वाले आरोप (2007)जांच के दौरान सुरेंद्र कोली पर आरोप लगे कि वह बच्चों को टॉफी और चॉकलेट का लालच देकर कोठी के अंदर बुलाता था।इसके बाद उनके साथ दुष्कर्म, हत्या और शव के टुकड़े-टुकड़े करके नाले में फेंकने के गंभीर आरोप लगाए गए। पुलिस और शुरुआती बयानों में हत्या, बलात्कार, शव-मैथुन (necrophilia) और आदमखोरी (cannibalism) जैसी खौफनाक बातें सामने आईं, हालांकि बाद में अदालतों में इन दावों पर सवाल भी उठे।देशव्यापी गुस्से के बाद जनवरी 2007 में इस केस की जांच सीबीआई (CBI) को सौंप दी गई।4. निचली अदालत से कई बार मौत की सजा (2009-2021)सीबीआई ने दोनों के खिलाफ अलग-अलग मामलों के तहत चार्जशीट दाखिल की।2009: गाजियाबाद की विशेष सीबीआई कोर्ट ने पहली बार रिम्पा हलदर केस में सुरेंद्र कोली को दोषी ठहराते हुए मौत की सजा सुनाई।इसके बाद 2010 से 2021 के बीच अलग-अलग मुकदमों की सुनवाई में सुरेंद्र कोली को 12 से अधिक मामलों में फांसी की सजा सुनाई गई, जबकि पंढेर को भी कुछ मामलों में दोषी पाया गया।5. अदालती मोड़ और सबूतों की कमी (2023-2025)अक्टूबर 2023: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने इस मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए सुरेंद्र कोली और मोनिंदर सिंह पंढेर को कई मामलों में बरी कर दिया। कोर्ट ने जांच पर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि जांच बेहद घटिया और लापरवाही से की गई थी और पुलिस अंग तस्करी (organ trade) जैसे बड़े पहलुओं की जांच करने में पूरी तरह नाकाम रही।नवंबर 2025: आखिरकार सुप्रीम कोर्ट ने सुरेंद्र कोली के खिलाफ बचे आखिरी मामले में भी उनकी दोषमुक्ति (acquittal) को बरकरार रखा और करीब 19 साल बाद उन्हें जेल से रिहा करने का आदेश दिया। अदालत का मानना था कि जो कबूलनामे (confessions) लिए गए थे, वे प्रताड़ना के तहत लिए गए थे और उनके खिलाफ ठोस वैज्ञानिक व परिस्थितिजन्य साक्ष्य नहीं थे।6. रिहाई के बाद का जीवन और अंत (2026)जेल से पूरी तरह बरी होकर बाहर आने के बाद सुरेंद्र कोली उत्तराखंड के हरिद्वार चले गए।उन्होंने अपनी पहचान छुपाकर एक निजी फर्म में सुरक्षाकर्मी के तौर पर काम किया और हाल ही में भूपतवाला इलाके में चाय की दुकान शुरू की थी।18 सितंबर 2026: सुबह के समय उसी चाय की दुकान में सुरेंद्र कोली का शव फंदे से लटका हुआ पाया गया। पुलिस का शुरुआती अनुमान है कि यह आत्महत्या का मामला है, हालांकि मामले की जांच अभी जारी है।यह पूरा मामला लगभग दो दशकों तक भारत की कानूनी और जांच व्यवस्था की खामियों को उजागर करने वाला एक बेहद चर्चित और विवादित केस बना रहा
- यूपी में योगी के रामराज्य और कानून व्यवस्था के दावों पर पूर्व सीएम अखिलेश यादव का सीधा हमला इस सरकार में किसी की भी हत्या हो सकती है। यूपी में योगी के रामराज्य और कानून व्यवस्था के दावों पर पूर्व सीएम अखिलेश यादव का सीधा हमला इस सरकार में किसी की भी हत्या हो सकती है।1
- अधूरी सड़क पर टोल वसूली के विरोध में किसानों की बैठक, 30 सितंबर के धरना प्रदर्शन से पहले अधिकारियों ने की वार्ता जनता न्यूज़ टीवी ब्यूरो चीफ़ राजमणी पाण्डेय चंदौली1
- चौबेपुर थाना क्षेत्र के भगवानपुर खुर्द में घर में चोरी,लाखों के जेवर और नकदी पर हाथ साफ छत के रास्ते घुसे चोर,चार कमरों के ताले तोड़े, खेत में मिले खाली बक्से न्यूज टू इंडिया से संवाददाता विशाल जायसवाल की खास रिपोर्ट चौबेपुर क्षेत्र वाराणसी के थाना चौबेपुर गांव में भगवानपुर खुर्द में एक घर में चोरी का मामला सामने आया है पीड़ित तुलसी प्रसाद पुत्र राजनाथ पाल ने पुलिस को दिए प्रार्थना-पत्र में बताया कि रविवार रात 20 सितंबर 2026 को अज्ञात चोरों ने उनके घर में घुसकर चोरी की घटना को अंजाम दिया पीड़ित के अनुसार, चोर घर के पीछे से छत के रास्ते अंदर दाखिल हुए और चार कमरों के ताले तोड़कर घर में रखा सामान, मोबाइल, करीब 23 हजार रुपये नकद और आभूषण चोरी कर ले गए शिकायत में छोटे भाई की पत्नी के सोने के हार, तीन चेन, अंगूठी तथा चांदी की दो पायल सहित अन्य जेवरात और करीब 2 हजार रुपये नकद चोरी होने की बात कही गई है पीड़ित ने बताया कि सोमवार सुबह करीब 9:50 बजे मकान से लगभग 500 मीटर दूर धान के खेत में तीन बक्से मिले, बक्सों से साड़ियां और जरूरी कागजात बाहर बिखरे हुए मिले घटना के बाद पीड़ित ने गांव के कुछ लोगों और बाहरी व्यक्तियों पर चोरी में शामिल होने की आशंका जताई है, प्रार्थना-पत्र में कुछ संदिग्ध लोगों के बाइक से रात करीब 1 बजे आने-जाने तथा घर के पीछे से छत के सहारे अंदर आने की आशंका भी की गई है पीड़ित ने पुलिस से मामले की जांच कर चोरी का खुलासा करने और सामान बरामद कराने की मांग की है, पुलिस मामले की जांच में जुटी है।1
- वाराणसी में अतिक्रमण पर चला पुलिस का एक्सन, भोजूबीर-अर्दली बाजार में सड़क पर दुकान लगाने वालों को खदेड़ा न्यूज़ टू इंडिया से उप संपादक प्रदीप कुमार वर्मा उर्फ राजन की खास रिपोर्ट वाराणसी।यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाने के लिए यातायात निरीक्षक और कैंट पुलिस ने शुक्रवार देर रात भोजूबीर और अर्दली बाजार इलाके में अतिक्रमण के खिलाफ अभियान चलाया।इस दौरान सड़क पर बैग, सूटकेस और अन्य सामान लगाकर दुकानदारी कर रहे दुकानदारों को पुलिस ने कड़ी फटकार लगाते हुए सड़क खाली कराई।कई दुकानदारों ने फुटपाथ तक अपना सामान फैला रखा था, जिससे राहगीरों और वाहनों को निकलने में भारी परेशानी हो रही थी।यातायात निरीक्षक ने लाठी के इशारे से सभी को सामान पीछे करने और सड़क पर अतिक्रमण न करने की चेतावनी दी। पुलिस ने कहा कि दोबारा सड़क पर सामान मिला तो सामान जब्त कर चालान की कार्रवाई की जाएगी।इस कार्रवाई के बाद बाजार में अफरा-तफरी मच गई और दुकानदारों ने आनन-फानन में अपना सामान सड़क से हटाना शुरू कर दिया। पुलिस ने बताया कि त्योहारों के चलते बाजारों में भीड़ बढ़ गई है, इसलिए यह अभियान लगातार जारी रहेगा।1
- वाराणसी मे पुलिसिंग पर लगा आरोप चौकी में पीड़ित को न्याय नहीं वाराणसी मे पुलिस कमिश्नर लाख दावे करते हो कि पुलिस का बर्ताव आम नागरिक के साथ दोस्ताना रखा जाए पर ऐसा जमीन पर होता नहीं। मामला कचहरी पुलिस चौकी पर एक परिवार ने आरोप लगाया है कि चौकी में उनके साथ पुलिस का रवैया सही नहीं था। Varanasi Breking News1
- तालाब में पैर फिसलने से महिला की डूबकर मौत, परिवार में मचा कोहराम तालाब में पैर फिसलने से महिला की डूबकर मौत वाराणसी।कपसेठी थाना क्षेत्र के हरिभानपुर गांव में सोमवार सुबह करीब 05 बजे तालाब में डूबने से एक महिला की मौत हो गई। घटना के बाद परिजनों में कोहराम मच गया। मिली जानकारी के अनुसार हरिभानपुर गांव निवासी मंजू देवी सोमवार सुबह करीब 05 बजे नित्य क्रिया के लिए गई थीं। जिसके के बाद वह पानी छूने के लिए तालाब में उतरीं। इसी दौरान अचानक उनका पैर फिसल गया और वह तालाब के गहरे पानी में चली गईं। आसपास किसी के मौजूद नहीं होने के कारण तत्काल मदद नहीं मिल सकी। काफी देर तक मंजू देवी के घर वापस नहीं लौटने पर परिजनों ने उनकी तलाश शुरू की। खोजबीन के दौरान परिजन तालाब के किनारे पहुंचे, जहां उन्हें मंजू देवी का शव पानी में दिखाई दिया। परिजनों ने तत्काल उन्हें तालाब से बाहर निकाला और उपचार के लिए क्षेत्र स्थित एक निजी चिकित्सालय ले गए। वहां चिकित्सकों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। घटना की सूचना मिलते ही कपसेठी पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर आवश्यक कार्रवाई पूरी की और पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। घटना के बाद परिवार में मातम पसरा हुआ है।1
- वाराणसी के दो भाइयों ने फेसबुक पर हासिल किया एक मिलियन फॉलोअर्स का लक्ष्य1
- सर्पदंश से इकलौते पुत्र की मौत, परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल फोटो नम्बर सर्पदंश से मृत हर्ष यादव न्यूज टू इंडिया से संवाददाता विनीत कुमार गुप्ता जिला चीफ ब्यूरो की खास रिपोर्ट चहनियां, बलुआ थाना क्षेत्र के महमदपुर (रामगढ़) गांव में सोमवार को विषैले सर्प के दंश से 13 वर्षीय बालक हर्ष यादव की मौत हो गई घटना की जानकारी मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया और देखते ही देखते बड़ी संख्या में ग्रामीण,क्षेत्रीय लोग मृतक के दरवाजे पर जुट गए बताया जाता है कि संजय यादव का पुत्र हर्ष घर में रखे उपले में छिपे विषैले सर्प ने डस लिया। वह वहां पर कुछ काम के लिए गया था । सर्पदंश के बाद परिजनों ने उसे बचाने का प्रयास किया, लेकिन उसकी मौत हो गई। इकलौते पुत्र की असमय मौत से पिता संजय यादव, माता सुषमा यादव सहित पूरा परिवार सदमे में है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल रहा। घटना की सूचना पर ग्राम प्रधान गुड्डू विश्वकर्मा भी गहरा दुःख व्यक्त करते हुए परिजनों को ढांढस बंधाया। उन्होंने आकस्मिक घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए घटना की जानकारी अधिकारियों को दिया । बालक की मौत की खबर से पूरे गांव में शोक की लहर दौड़ गई।1
- 52 बीघा हवा बनियापुर रिंग रोड चौराहे पर जाम, राहगीरों और एंबुलेंस को हुई परेशानी जनता न्यूज़ टीवी संवाददाता हरीशचंद्र पटेल वाराणसी1