सुलतानपुर में जिलाधिकारी इंद्रजीत सिंह की अध्यक्षता और मुख्य विकास अधिकारी विनय कुमार सिंह की उपस्थिति में कलेक्ट्रेट सभागार में जिला वृक्षारोपण समिति, जिला पर्यावरण समिति तथा जिला आर्द्रभूमि समिति की बैठकें आयोजित की गईं। इन बैठकों का मुख्य उद्देश्य वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए निर्धारित वृक्षारोपण लक्ष्यों के प्रभावी क्रियान्वयन और वित्तीय वर्ष 2025-26 में रोपित पौधों की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करना था। इसके साथ ही, पर्यावरण संरक्षण, हरित आवरण में वृद्धि और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण पर भी चर्चा हुई। जिलाधिकारी ने डीएफओ को विशेष रूप से इस बार मियावाकी पद्धति को प्रमुखता से अपनाने को कहा, जो कम जगह में अत्यधिक सघन पौधारोपण के लिए जानी जाती है। जिलाधिकारी ने जोर देकर कहा कि वृक्षारोपण केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और भावी पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण जनआंदोलन है। उन्होंने सभी विभागों को आवंटित वृक्षारोपण लक्ष्यों के अनुरूप समयबद्ध कार्ययोजना तैयार करने और निर्धारित स्थलों का चयन शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए। वर्ष 2025-26 में रोपित पौधों की जीवितता दर (सर्वाइवल रेट) की समीक्षा करते हुए, उन्होंने संबंधित विभागों को पौधों की नियमित देखभाल, सिंचाई, सुरक्षा और निगरानी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि वृक्षारोपण की सफलता केवल पौधे लगाने से नहीं, बल्कि उनके संरक्षण और विकास से सुनिश्चित होती है, और सभी पौधों के लिए फेंसिंग/ट्रीगार्ड की व्यवस्था सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए। बैठक के दौरान, वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए विभिन्न विभागों को आवंटित वृक्षारोपण लक्ष्यों की समीक्षा की गई, जिसमें रोपण स्थलों के चिन्हांकन, पौधों की उपलब्धता, जनसहभागिता और व्यापक प्रचार-प्रसार पर विशेष बल दिया गया। जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि वृक्षारोपण अभियान में शासकीय विभागों के साथ-साथ स्वयंसेवी संस्थाओं, शैक्षणिक संस्थानों, ग्राम पंचायतों और आम नागरिकों की सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित की जाए। उन्होंने सभी शैक्षणिक संस्थानों सहित कई अन्य विभागों को पौधारोपण हेतु स्थान चिन्हित करने के निर्देश दिए और बताया कि वह स्वयं लम्भुआ में पौधारोपण हेतु चिन्हित 500 हेक्टेयर के भू-खण्ड का निरीक्षण करेंगे। डीएफओ ने जानकारी दी कि कुल 47 लाख के लक्ष्य के मुकाबले 83 लाख पौधे नर्सरियों में तैयार किए जा चुके हैं। जिलाधिकारी ने भूगर्भ विभाग, सिंचाई विभाग तथा कादीपुर व लम्भुआ के अधिशासी अभियंताओं को बैठक में अनुपस्थित रहने पर कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश भी दिए। जिला पर्यावरण समिति की बैठक में वायु, जल एवं ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और पर्यावरणीय मानकों के अनुपालन की समीक्षा की गई, जहाँ जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को पर्यावरण संरक्षण संबंधी गतिविधियों को प्रभावी ढंग से संचालित करने के निर्देश दिए। जिला गंगा समिति की बैठक में गंगा एवं उसकी सहायक नदियों की स्वच्छता, प्रदूषण नियंत्रण और जनजागरूकता कार्यक्रमों की प्रगति की समीक्षा की गई, जिस पर जिलाधिकारी ने नदी संरक्षण से संबंधित कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर संचालित करने और जनसहभागिता बढ़ाने पर बल दिया। अंत में, जिला आर्द्रभूमि समिति की बैठक में जनपद की आर्द्रभूमियों के संरक्षण, संवर्धन एवं जैव विविधता के संरक्षण हेतु संचालित गतिविधियों की समीक्षा की गई और संबंधित विभागों को प्रभावी कार्ययोजना बनाकर कार्य करने के निर्देश दिए गए। बैठक में उपस्थित संबंधित विभागों के अधिकारियों को विभिन्न समितियों के कार्यों एवं प्रगति से अवगत कराया गया, और जिलाधिकारी ने सभी अधिकारियों को समन्वित प्रयासों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण एवं हरित विकास के लक्ष्यों को प्राप्त करने हेतु प्रतिबद्धता के साथ कार्य करने के निर्देश दिए।
सुलतानपुर में जिलाधिकारी इंद्रजीत सिंह की अध्यक्षता और मुख्य विकास अधिकारी विनय कुमार सिंह की उपस्थिति में कलेक्ट्रेट सभागार में जिला वृक्षारोपण समिति, जिला पर्यावरण समिति तथा जिला आर्द्रभूमि समिति की बैठकें आयोजित की गईं। इन बैठकों का मुख्य उद्देश्य वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए निर्धारित वृक्षारोपण लक्ष्यों के प्रभावी क्रियान्वयन और वित्तीय वर्ष 2025-26 में रोपित पौधों की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करना था। इसके साथ ही, पर्यावरण संरक्षण, हरित आवरण में वृद्धि और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण पर भी चर्चा हुई। जिलाधिकारी ने डीएफओ को विशेष रूप से इस बार मियावाकी पद्धति को प्रमुखता से अपनाने को कहा, जो कम जगह में अत्यधिक सघन पौधारोपण के लिए जानी जाती है। जिलाधिकारी ने जोर देकर कहा कि वृक्षारोपण केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और भावी पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण जनआंदोलन है। उन्होंने सभी विभागों को आवंटित वृक्षारोपण लक्ष्यों के अनुरूप समयबद्ध कार्ययोजना तैयार करने और निर्धारित स्थलों का चयन शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश दिए। वर्ष 2025-26 में रोपित पौधों की जीवितता दर (सर्वाइवल रेट) की समीक्षा करते हुए, उन्होंने संबंधित विभागों को पौधों की नियमित देखभाल, सिंचाई, सुरक्षा और निगरानी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि वृक्षारोपण की सफलता केवल पौधे लगाने से नहीं, बल्कि उनके संरक्षण और विकास से सुनिश्चित होती है, और सभी पौधों के लिए फेंसिंग/ट्रीगार्ड की व्यवस्था सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए। बैठक के दौरान, वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए विभिन्न विभागों को आवंटित वृक्षारोपण लक्ष्यों की समीक्षा की गई, जिसमें रोपण स्थलों के चिन्हांकन, पौधों की उपलब्धता, जनसहभागिता और व्यापक प्रचार-प्रसार पर विशेष बल दिया गया। जिलाधिकारी ने निर्देश दिया कि वृक्षारोपण अभियान में शासकीय विभागों के साथ-साथ स्वयंसेवी संस्थाओं, शैक्षणिक संस्थानों, ग्राम पंचायतों और आम नागरिकों की सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित की जाए। उन्होंने सभी शैक्षणिक संस्थानों सहित कई अन्य विभागों को पौधारोपण हेतु स्थान चिन्हित करने के निर्देश दिए और बताया कि वह स्वयं लम्भुआ में पौधारोपण हेतु चिन्हित 500 हेक्टेयर के भू-खण्ड का निरीक्षण करेंगे। डीएफओ ने जानकारी दी कि कुल 47 लाख के लक्ष्य के मुकाबले 83 लाख पौधे नर्सरियों में तैयार किए जा चुके हैं। जिलाधिकारी ने भूगर्भ विभाग, सिंचाई विभाग तथा कादीपुर व लम्भुआ के अधिशासी अभियंताओं को बैठक में अनुपस्थित रहने पर कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश भी दिए। जिला पर्यावरण समिति की बैठक में वायु, जल एवं ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और पर्यावरणीय मानकों के अनुपालन की समीक्षा की गई, जहाँ जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को पर्यावरण संरक्षण संबंधी गतिविधियों को प्रभावी ढंग से संचालित करने के निर्देश दिए। जिला गंगा समिति की बैठक में गंगा एवं उसकी सहायक नदियों की स्वच्छता, प्रदूषण नियंत्रण और जनजागरूकता कार्यक्रमों की प्रगति की समीक्षा की गई, जिस पर जिलाधिकारी ने नदी संरक्षण से संबंधित कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर संचालित करने और जनसहभागिता बढ़ाने पर बल दिया। अंत में, जिला आर्द्रभूमि समिति की बैठक में जनपद की आर्द्रभूमियों के संरक्षण, संवर्धन एवं जैव विविधता के संरक्षण हेतु संचालित गतिविधियों की समीक्षा की गई और संबंधित विभागों को प्रभावी कार्ययोजना बनाकर कार्य करने के निर्देश दिए गए। बैठक में उपस्थित संबंधित विभागों के अधिकारियों को विभिन्न समितियों के कार्यों एवं प्रगति से अवगत कराया गया, और जिलाधिकारी ने सभी अधिकारियों को समन्वित प्रयासों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण एवं हरित विकास के लक्ष्यों को प्राप्त करने हेतु प्रतिबद्धता के साथ कार्य करने के निर्देश दिए।
- कर्तव्य और अनुशासन की मिसाल के रूप में पहचाने जाने वाले अशोक पाण्डेय सम्मानपूर्वक सेवानिवृत्त हो गए हैं। उनकी विदाई के अवसर पर एक भावभीना समारोह आयोजित किया गया, जहाँ उन्हें सम्मानित किया गया।1
- वाराणसी की हरि-हर की नगरी में पुरुषोत्तम पूर्णिमा के विशेष अवसर पर नमामि गंगे ने सनातन धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण पंचक्रोशी परिक्रमा के यात्रियों पर पुष्प वर्षा की। इस दौरान मणिकर्णिका तीर्थ क्षेत्र 'हर-हर महादेव', 'जय श्री विष्णु' और 'जय श्री पुरुषोत्तम' के जयघोष से गूंज उठा। नमामि गंगे की टीम ने तीर्थों में सर्वोच्च मणिकर्णिका चक्र पुष्करिणी कुंड की आरती भी उतारी, जिसके माध्यम से जल संरक्षण की कामना की गई। नमामि गंगे काशी क्षेत्र के संयोजक और नगर निगम के स्वच्छता ब्रांड एम्बेसडर राजेश शुक्ला के नेतृत्व में, पंचक्रोशी यात्रियों को अंगवस्त्रम पहनाकर सम्मानित किया गया। लगभग 3300 वर्ष पुरानी 88 किलोमीटर लंबी पंचक्रोशी परिक्रमा पथ के यात्री चक्र पुष्करिणी कुंड की आरती और यह सम्मान पाकर अत्यंत प्रसन्न दिखे और सभी ने पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया। राजेश शुक्ला ने बताया कि पुरुषोत्तम मास भगवान विष्णु का महीना है, और इस मास में पंचक्रोशी परिक्रमा पूरी करने वाले व्यक्ति को 33 कोटि देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना तथा अश्वमेध यज्ञ कराने जैसा पुण्य लाभ मिलता है। पुराणों के अनुसार, 'इदं मम प्रियंक्षेत्रं पंचकोशीपरीमितः' कहकर काशी के इस पांच कोस तक विस्तृत क्षेत्र को भगवान भोलेनाथ का अत्यंत प्रिय बताया गया है। आयोजन के तहत नमामि गंगे की टीम ने गंगा किनारे मणिकर्णिका तीर्थ और चक्र पुष्करिणी कुंड के आस-पास विशेष सफाई अभियान भी चलाया। इस कार्यक्रम में राजेश शुक्ला के साथ रविंद्र मिश्रा, सिमरन कपूर, निधि मेहरोत्रा, रितु कपूर, नवरंग गुप्ता, तारा गुप्ता और बड़ी संख्या में पंचक्रोशी यात्री शामिल रहे।1
- मुरादाबाद के कुंदरकी थाना क्षेत्र स्थित चकफाजलपुर गांव में 21 वर्षीय फरहत ने अपने पिता की लाइसेंसी बंदूक से गोली मारकर आत्महत्या कर ली। इस पूरी घटना का युवक ने वीडियो भी बनाया। परिजनों ने बताया है कि फरहत कुछ समय से मानसिक तनाव और अवसाद से जूझ रहा था। घटना के समय मौके पर कुछ बच्चे भी मौजूद थे।1
- पुरुषोत्तम पूर्णिमा के पावन अवसर पर वाराणसी की हरि-हर नगरी भगवान विष्णु के जयकारों से गूंज उठी। सनातन धर्म में विशेष महत्व रखने वाले पुरुषोत्तम मास की पूर्णिमा के दिन नमामि गंगे ने 33 कोटि देवी-देवताओं को प्रसन्न करने वाली पंचक्रोशी परिक्रमा के यात्रियों पर पुष्प वर्षा की। इस दौरान तीर्थों में सर्वोच्च माने जाने वाले मणिकर्णिका चक्र पुष्करिणी कुंड की आरती भी उतारी गई, जिसमें जल संरक्षण की कामना की गई। मणिकर्णिका तीर्थ क्षेत्र हर-हर महादेव, जय श्री विष्णु और जय श्री पुरुषोत्तम के घोष से गुंजायमान रहा। नमामि गंगे काशी क्षेत्र के संयोजक और नगर निगम के स्वच्छता ब्रांड एम्बेसडर राजेश शुक्ला के नेतृत्व में यह आयोजन हुआ, जहाँ पंचक्रोशी यात्रियों को अंगवस्त्रम पहनाकर सम्मानित किया गया। लगभग 3300 वर्ष पुरानी और 88 किलोमीटर लंबी पंचक्रोशी परिक्रमा के यात्री चक्र पुष्करिणी कुंड की आरती और सम्मान पाकर बेहद प्रसन्न नज़र आए। सभी यात्रियों ने पर्यावरण संरक्षण का संकल्प भी लिया। नमामि गंगे टीम ने गंगा किनारे मणिकर्णिका तीर्थ और चक्र पुष्करिणी कुंड के आस-पास सफाई भी की। राजेश शुक्ला ने बताया कि पुरुषोत्तम मास भगवान विष्णु का महीना है और इस मास में पंचक्रोशी परिक्रमा पूरी करने वाले व्यक्ति को 33 कोटि देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना और अश्वमेध यज्ञ कराने जैसा पुण्य लाभ मिलता है। पुराणों के अनुसार, पाँच कोस तक फैला काशी क्षेत्र भगवान भोलेनाथ को अत्यंत प्रिय है। इस आयोजन में राजेश शुक्ला के साथ रविंद्र मिश्रा, सिमरन कपूर, निधि मेहरोत्रा, रितु कपूर, नवरंग गुप्ता, तारा गुप्ता सहित कई पंचक्रोशी यात्री शामिल रहे।1
- थाना बीजपुर क्षेत्र के अंतर्गत ग्राम धरतीदाड़ के पास जंगल में एक महिला का कंकाल पाया गया है। इस घटना के संबंध में क्षेत्राधिकारी दुद्धी, श्री राजेश कुमार राय ने अपना बयान जारी किया है।1
- बनारस के चौबेपुर क्षेत्र में सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे का एक गंभीर मामला सामने आया है। इस मामले में सीधे तौर पर एक लेखपाल पर कब्जा करने का आरोप लगाया गया है। पीड़ित का कहना है कि बनारस में कानून नाम की कोई चीज नहीं बची है, और सरकारी जमीनों पर खुलेआम कब्जा किया जा रहा है, जिससे कानून-व्यवस्था की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।1
- मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जी ने भारत की ऋषि परंपरा के गहरे महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारतीय ऋषि परंपरा हमें 'अहिंसा परमो धर्मः, धर्म हिंसा तथैव च' का प्रेरणादायी संदेश देती है, जो धर्म के लिए अहिंसा और आवश्यकता पड़ने पर हिंसा, दोनों के महत्व को दर्शाता है।1
- सोनबरसा में बहुउद्देशीय पंचायत भवन का निर्माण कार्य एक बार फिर से शुरू हो गया है। इस निर्माण कार्य के पुनः आरंभ होने से स्थानीय ग्रामीणों में हर्ष का माहौल है।1