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प्रयागराज जनपद के घूरपुर में मुहर्रम की दसवीं, जिसे यौम-ए-आशूरा भी कहते हैं, के अवसर पर हज़रत इमाम हुसैन (अ.स.) और कर्बला के शहीदों की याद में परंपरागत ताजिया जुलूस निकाला गया। यह जुलूस श्रद्धा, अकीदत और गमगीन माहौल में संपन्न हुआ, जिसमें 'या अली' और 'या हुसैन' की सदाओं के साथ-साथ नौहा और मर्सिया गूंज रहे थे। इस मौके पर बड़ी संख्या में नौजवान, बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं शामिल हुईं। घूरपुर घोसियाना स्थित इमामबाड़े से शुरू होकर, ताजिया जुलूस रीवा रोड राष्ट्रीय राजमार्ग सहित निर्धारित मार्गों से होते हुए कर्बला पहुंचा, जहाँ धार्मिक परंपरा के अनुसार ताजियों को सुपुर्द-ए-खाक किया गया। पूरे मार्ग में अकीदतमंदों ने शहीद-ए-कर्बला को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इस्लामी इतिहास में आशूरा का दिन विशेष महत्व रखता है, क्योंकि इसी दिन कर्बला की धरती पर हज़रत इमाम हुसैन (अ.स.), उनके अहल-ए-बैत और वफादार साथियों ने सत्य, न्याय और इंसानियत की रक्षा के लिए अपनी जान कुर्बान कर दी थी। यह दिन अन्याय और अत्याचार के विरुद्ध संघर्ष तथा सत्य के मार्ग पर अडिग रहने की प्रेरणा देता है। जुलूस के दौरान युवाओं ने लाठी एवं पारंपरिक युद्ध-कौशल का प्रदर्शन कर अपनी कला का परिचय दिया। वहीं, विभिन्न स्थानों पर अकीदतमंदों द्वारा शरबत, खीचड़ा, जलेबी, बिस्कुट एवं अन्य खाद्य सामग्री का लंगर लगाकर लोगों की सेवा की गई। जुलूस को शांतिपूर्ण एवं सकुशल संपन्न कराने के लिए प्रशासन द्वारा व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की गई थी, जिसके तहत कौंधियारा एसीपी अब्दुल सलाम ने मौके पर पहुंचकर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया, जबकि घूरपुर थाना प्रभारी अतुल कुमार मिश्र पुलिस बल के साथ पूरे समय मुस्तैद रहे। इस प्रकार, घूरपुर में मुहर्रम का यह ताजिया जुलूस श्रद्धा और सौहार्द के साथ सकुशल संपन्न हुआ।

9 hrs ago
user_RAMBABU PATEL
RAMBABU PATEL
Insurance Agent Bara, Prayagraj•
9 hrs ago

प्रयागराज जनपद के घूरपुर में मुहर्रम की दसवीं, जिसे यौम-ए-आशूरा भी कहते हैं, के अवसर पर हज़रत इमाम हुसैन (अ.स.) और कर्बला के शहीदों की याद में परंपरागत ताजिया जुलूस निकाला गया। यह जुलूस श्रद्धा, अकीदत और गमगीन माहौल में संपन्न हुआ, जिसमें 'या अली' और 'या हुसैन' की सदाओं के साथ-साथ नौहा और मर्सिया गूंज रहे थे। इस मौके पर बड़ी संख्या में नौजवान, बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं शामिल हुईं। घूरपुर घोसियाना स्थित इमामबाड़े से शुरू होकर, ताजिया जुलूस रीवा रोड राष्ट्रीय राजमार्ग सहित निर्धारित मार्गों से होते हुए कर्बला पहुंचा, जहाँ धार्मिक परंपरा के अनुसार ताजियों को सुपुर्द-ए-खाक किया गया। पूरे मार्ग में अकीदतमंदों ने शहीद-ए-कर्बला को अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इस्लामी इतिहास में आशूरा का दिन विशेष महत्व रखता है, क्योंकि इसी दिन कर्बला की धरती पर हज़रत इमाम हुसैन (अ.स.), उनके अहल-ए-बैत और वफादार साथियों ने सत्य, न्याय और इंसानियत की रक्षा के लिए अपनी जान कुर्बान कर दी थी। यह दिन अन्याय और अत्याचार के विरुद्ध संघर्ष तथा सत्य के मार्ग पर अडिग रहने की प्रेरणा देता है। जुलूस के दौरान युवाओं ने लाठी एवं पारंपरिक युद्ध-कौशल का प्रदर्शन कर अपनी कला का परिचय दिया। वहीं, विभिन्न स्थानों पर अकीदतमंदों द्वारा शरबत, खीचड़ा, जलेबी, बिस्कुट एवं अन्य खाद्य सामग्री का लंगर लगाकर लोगों की सेवा की गई। जुलूस को शांतिपूर्ण एवं सकुशल संपन्न कराने के लिए प्रशासन द्वारा व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की गई थी, जिसके तहत कौंधियारा एसीपी अब्दुल सलाम ने मौके पर पहुंचकर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया, जबकि घूरपुर थाना प्रभारी अतुल कुमार मिश्र पुलिस बल के साथ पूरे समय मुस्तैद रहे। इस प्रकार, घूरपुर में मुहर्रम का यह ताजिया जुलूस श्रद्धा और सौहार्द के साथ सकुशल संपन्न हुआ।

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  • राज्यमंत्री राकेश राठौर ने कुकुरकटवा गाँव में तिहरे हत्याकांड के पीड़ित परिवार से मुलाकात की। इस मुलाकात के दौरान उन्होंने पीड़ित परिवार से उनकी समस्याओं को जाना और उन्हें हरसंभव पूरी मदद का भरोसा दिलाया। राज्यमंत्री ने यह भी कहा कि हत्यारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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    राज्यमंत्री राकेश राठौर ने कुकुरकटवा गाँव में तिहरे हत्याकांड के पीड़ित परिवार से मुलाकात की। इस मुलाकात के दौरान उन्होंने पीड़ित परिवार से उनकी समस्याओं को जाना और उन्हें हरसंभव पूरी मदद का भरोसा दिलाया। राज्यमंत्री ने यह भी कहा कि हत्यारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
    user_Umesh chandra patrkar
    Umesh chandra patrkar
    Advertising Photographer मेजा, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश•
    18 hrs ago
  • प्रयागराज में मासूम अली असगर का ऐतिहासिक झूला चक रौजा से बड़े अदब, एहतेराम और अकीदत के साथ उठाया गया। इस झूले को फूलों से बेहद खूबसूरती से सजाया गया था, जिसमें गौस माली ने अपनी कारीगरी का प्रदर्शन किया। चांदी के झूले में सोने का पंजा भी लगाया गया था, जो उसकी शोभा और बढ़ा रहा था। यह झूला हुसैन और हैदर के दिलबर का प्रतीक बताया गया, जिसमें मासूम सकीना के आंसू और असगर का झूला कासिम के हाथों की मेहंदी की तरह बोलेगा। जुलूस के आगे-आगे सिया हजरात नोहा पढ़ते और मातम करते हुए चल रहे थे, जिससे माहौल में गहरे गम और भक्ति का रंग घुल गया। 'या अली या हुसैन' के बुलंद नारों के बीच रौजे से झूला अपने तयशुदा वक्त पर उठाया गया, और हुसैन के सिपाही अपने मजबूत कंधों पर इसे गश्त कराने के लिए निकल पड़े। झूला जब सड़क पर आया तो हर तरफ केवल सिर ही सिर दिखाई दे रहे थे, ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे हुसैनी सैलाब उमड़ आया हो। यह जुलूस बहादुरगंज, जी.टी. रोड, बताशा मंडी, गुड़ मंडी, लोकनाथ, कोतवाली, बजाजा पट्टी, घंटाघर, सब्जी मंडी और गढी सराय जैसे अपने कदीमी रास्तों से होते हुए इमामबाड़े पहुंचा, जहां मासूम अली असगर का झूला रखा गया। इस ऐतिहासिक झूले की जियारत के लिए शिया, सुन्नी, हिंदू और मुस्लिम सभी समाजों के लाखों अकीदतमंदों ने शिरकत की, जो इस आयोजन की व्यापक पहुंच और एकता को दर्शाता है। पूरे रास्ते भर लंगर का इंतजाम था, जिसमें बालुशाही, शीरमल, बिरयानी, कैंपा, बंद चीजें, पानी और शरबत बांटा जा रहा था। कंधा देने वालों पर पानी, गुलाब जल और केवड़ा छिड़का जा रहा था। जब झूला बजाजा पट्टी पहुंचा, तो लाउडस्पीकर पर 'झूला झुलाए किस हम झूला झुलाए' का नोहा बज रहा था, जबकि दूसरी ओर 'या अली या हुसैन' के नारे गूंज रहे थे, जिससे कई लोगों की आंखें नम थीं और कलेजा फटने जैसा एहसास हो रहा था। इस धार्मिक आयोजन में सदर विधायक, दर्जनों पार्षद, कई समाजसेवी, सिविल डिफेंस के सदस्य, झूले के संयोजक गुलाब नबी, गुलाम मोहम्मद, चांद मियां, इसरार नियाजी, मोहन जी, टंडन, गुल्लू पहलवान, अजीम पहलवान, मोहम्मद आमिर, महबूब डाबर और अकरम शगुन सहित लाखों अकीदतमंद शामिल हुए।
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    प्रयागराज में मासूम अली असगर का ऐतिहासिक झूला चक रौजा से बड़े अदब, एहतेराम और अकीदत के साथ उठाया गया। इस झूले को फूलों से बेहद खूबसूरती से सजाया गया था, जिसमें गौस माली ने अपनी कारीगरी का प्रदर्शन किया। चांदी के झूले में सोने का पंजा भी लगाया गया था, जो उसकी शोभा और बढ़ा रहा था। यह झूला हुसैन और हैदर के दिलबर का प्रतीक बताया गया, जिसमें मासूम सकीना के आंसू और असगर का झूला कासिम के हाथों की मेहंदी की तरह बोलेगा।

जुलूस के आगे-आगे सिया हजरात नोहा पढ़ते और मातम करते हुए चल रहे थे, जिससे माहौल में गहरे गम और भक्ति का रंग घुल गया। 'या अली या हुसैन' के बुलंद नारों के बीच रौजे से झूला अपने तयशुदा वक्त पर उठाया गया, और हुसैन के सिपाही अपने मजबूत कंधों पर इसे गश्त कराने के लिए निकल पड़े। झूला जब सड़क पर आया तो हर तरफ केवल सिर ही सिर दिखाई दे रहे थे, ऐसा प्रतीत हो रहा था जैसे हुसैनी सैलाब उमड़ आया हो। यह जुलूस बहादुरगंज, जी.टी. रोड, बताशा मंडी, गुड़ मंडी, लोकनाथ, कोतवाली, बजाजा पट्टी, घंटाघर, सब्जी मंडी और गढी सराय जैसे अपने कदीमी रास्तों से होते हुए इमामबाड़े पहुंचा, जहां मासूम अली असगर का झूला रखा गया।

इस ऐतिहासिक झूले की जियारत के लिए शिया, सुन्नी, हिंदू और मुस्लिम सभी समाजों के लाखों अकीदतमंदों ने शिरकत की, जो इस आयोजन की व्यापक पहुंच और एकता को दर्शाता है। पूरे रास्ते भर लंगर का इंतजाम था, जिसमें बालुशाही, शीरमल, बिरयानी, कैंपा, बंद चीजें, पानी और शरबत बांटा जा रहा था। कंधा देने वालों पर पानी, गुलाब जल और केवड़ा छिड़का जा रहा था। जब झूला बजाजा पट्टी पहुंचा, तो लाउडस्पीकर पर 'झूला झुलाए किस हम झूला झुलाए' का नोहा बज रहा था, जबकि दूसरी ओर 'या अली या हुसैन' के नारे गूंज रहे थे, जिससे कई लोगों की आंखें नम थीं और कलेजा फटने जैसा एहसास हो रहा था।

इस धार्मिक आयोजन में सदर विधायक, दर्जनों पार्षद, कई समाजसेवी, सिविल डिफेंस के सदस्य, झूले के संयोजक गुलाब नबी, गुलाम मोहम्मद, चांद मियां, इसरार नियाजी, मोहन जी, टंडन, गुल्लू पहलवान, अजीम पहलवान, मोहम्मद आमिर, महबूब डाबर और अकरम शगुन सहित लाखों अकीदतमंद शामिल हुए।
    user_दैनिक राष्ट्रीय जगत न्यूज संपा
    दैनिक राष्ट्रीय जगत न्यूज संपा
    मेजा, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश•
    21 hrs ago
  • प्रयागराज के करछना थाना क्षेत्र में मोहर्रम की दसवीं बड़े ही धूमधाम और ग़मगीन माहौल में मनाई गई, जहाँ अक़ीदतमन्दों ने नम आँखों से ताज़िया, अलम, ताबूत, झूला और ज़ुलजनाह पर चढ़ाए गए फूलों को सुपुर्द-ए-खाक किया। करबला के मैदान में तीन दिन के भूखे-प्यासे खानदाने रिसालत की शहादत, यानि आशूरा की याद में, हर तरफ ग़म की चादर और आँखों में आँसू लिए अक़ीदतमन्दों ने नंगे पैर इमामबाड़ों से करबला तक का पैदल सफ़र तय किया। इस अवसर पर प्रवीण कुमार गौतम, थाना प्रभारी करछना, भी उपस्थित रहे। इस दौरान, बख्शी बाज़ार स्थित इमामबाड़ा नज़ीर हुसैन से, जिसे लगभग उन्नीस सौ अट्ठाईस (1928) में लड्डन मरहूम द्वारा क़ायम किया गया था, तुर्बत का क़दीमी जुलूस निकाला गया। मौलाना आमिरुर रिज़वी ने शहादत का मसायब पढ़ा। तुर्बत व अलम का यह जुलूस बख्शी बाज़ार, दायरा शाह अजमल, रानी मण्डी, बच्चा जी धर्मशाला से होते हुए ज़ैग़म अब्बास की मर्सिया ख्वानी करते हुए इमामबाड़ा मीर हुसैनी पहुँचा। इमामबाड़े में ज़ाकिरे अहलेबैत रज़ा अब्बास ज़ैदी ने ग़मगीन मसायब ए हुसैन पढ़े। मजलिस के बाद, अन्जुमन आबिदया के नौहाख्वान मिर्ज़ा काज़िम अली व वेज़ारत ने पुरदर्द नौहा पढ़ते हुए जुलूस को डॉ. चड्ढा रोड, कोतवाली, नखास कोहना, खुल्दाबाद, हिम्मतगंज होते हुए चकिया स्थित शिया करबला तक पहुँचाकर सम्पन्न कराया। वहीं, दूसरा क़दीमी दुलदुल जुलूस इमामबारगाह मिर्ज़ा नक़ी बेग से बशीर हुसैन की सरपरस्ती में निकाला गया, जिसमें अन्जुमन हैदरिया रानीमंडी के नौहाख्वान हसन रिज़वी व उनके साथियों ने पुरदर्द नौहों की सदाओं के साथ अपने परम्परागत मार्गों से होते हुए चकिया करबला पर पहुँचकर ताज़िये और फूलों को कर्बला में बनाए गए बड़े गड्ढ़े (गंजे शहीदां) में पुरसा पेश करते हुए दफ्न किया। इसके अतिरिक्त, दरियाबाद से आशूरा को निकाले गए जुलूस दरियाबाद स्थित क़ब्रिस्तान पहुँचे, जहाँ अक़ीदत के फूलों व ताज़िये को दरगाह इमाम हुसैन के पास बने छोटे-छोटे गड्ढों में सुपुर्द-ए-खाक किया गया। कर्बला में सैकड़ों अक़ीदतमन्दों ने खुले आसमान में आमाले आशूरा भी किया और नमाज़ अदा की। यह अमल छै माह के मासूम अली असग़र की शहादत के बाद हज़रत इमाम हुसैन द्वारा उनके बेशीर लाशे को खैमे में वापस ले जाते समय सात बार आगे बढ़ने और फिर अपने क़दमों को पीछे कर लेने के मरहले को याद दिलाता है। मौलाना रज़ा अब्बास ज़ैदी की क़यादत में यह आमाले आशूरा सम्पन्न हुआ। शाम को, चौदह सौ साल पहले करबला के मैदान में हज़रत इमाम हुसैन व अन्य खानदाने रिसालत के शहीद हो जाने के बाद यज़ीदी लश्कर द्वारा खैमों में आग लगा देने और लूटपाट की याद में 'शामें ग़रीबां' का जुलूस निकाला गया। रानीमंडी क़ाज़मी लॉज व इमामबाड़ा आबिदया में शामें ग़रीबां की मजलिस हुई, जहाँ हाय सकीना, हाय प्यास की सदाओं के साथ सड़कों, गलियों व घरों की सभी लाईटों को बन्द कर अंधेरे में या हुसैन या हुसैन की सदाओं के साथ जुलूस निकाला गया। नौहा 'भय्या तुझे घर जा के कहां पाएगी ज़ैनब, घबराएगी ज़ैनब' पढ़ा गया, जिससे हर तरफ आहो बुका की सदा गूंजने लगी। काली चादर में ढ़ला ज़ीन का दुलदुल भी निकाला गया, जिसमें बच्चे व छोटी बच्चियां हाथों में खाली कूज़े और मशालें लेकर 'हाय सकीना हाय प्यास, अम्मू मैं प्यासी हूं' की सदा बुलन्द करते हुए जुलूस के साथ चलती रहीं। दरियाबाद में दरगाह इमाम हुसैन के बाहर क़ब्रिस्तान में भी अक़ीदतमन्दों ने मजलिस व मातम किया और मोमबत्ती की रौशनी में ज़ुलजनाह निकाला गया। मौलाना आमिरुर रिज़वी के अज़ाखाने पर देर रात शामें ग़रीबां की मजलिस हुई, जिसे अशरफ अब्बास खां ने खिताब किया। शानू नक़वी व शादाब नक़वी ने सवाल व जवाबी नौहा पढ़ा, तो वहीं अन्जुमन नक़विया के नौहाख्वानो शबीह हसन शाहरुख व अन्य ने भी नौहा पढ़ा, जिससे माहौल संजीदा हो गया।
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    प्रयागराज के करछना थाना क्षेत्र में मोहर्रम की दसवीं बड़े ही धूमधाम और ग़मगीन माहौल में मनाई गई, जहाँ अक़ीदतमन्दों ने नम आँखों से ताज़िया, अलम, ताबूत, झूला और ज़ुलजनाह पर चढ़ाए गए फूलों को सुपुर्द-ए-खाक किया। करबला के मैदान में तीन दिन के भूखे-प्यासे खानदाने रिसालत की शहादत, यानि आशूरा की याद में, हर तरफ ग़म की चादर और आँखों में आँसू लिए अक़ीदतमन्दों ने नंगे पैर इमामबाड़ों से करबला तक का पैदल सफ़र तय किया। इस अवसर पर प्रवीण कुमार गौतम, थाना प्रभारी करछना, भी उपस्थित रहे।

इस दौरान, बख्शी बाज़ार स्थित इमामबाड़ा नज़ीर हुसैन से, जिसे लगभग उन्नीस सौ अट्ठाईस (1928) में लड्डन मरहूम द्वारा क़ायम किया गया था, तुर्बत का क़दीमी जुलूस निकाला गया। मौलाना आमिरुर रिज़वी ने शहादत का मसायब पढ़ा। तुर्बत व अलम का यह जुलूस बख्शी बाज़ार, दायरा शाह अजमल, रानी मण्डी, बच्चा जी धर्मशाला से होते हुए ज़ैग़म अब्बास की मर्सिया ख्वानी करते हुए इमामबाड़ा मीर हुसैनी पहुँचा। इमामबाड़े में ज़ाकिरे अहलेबैत रज़ा अब्बास ज़ैदी ने ग़मगीन मसायब ए हुसैन पढ़े। मजलिस के बाद, अन्जुमन आबिदया के नौहाख्वान मिर्ज़ा काज़िम अली व वेज़ारत ने पुरदर्द नौहा पढ़ते हुए जुलूस को डॉ. चड्ढा रोड, कोतवाली, नखास कोहना, खुल्दाबाद, हिम्मतगंज होते हुए चकिया स्थित शिया करबला तक पहुँचाकर सम्पन्न कराया। वहीं, दूसरा क़दीमी दुलदुल जुलूस इमामबारगाह मिर्ज़ा नक़ी बेग से बशीर हुसैन की सरपरस्ती में निकाला गया, जिसमें अन्जुमन हैदरिया रानीमंडी के नौहाख्वान हसन रिज़वी व उनके साथियों ने पुरदर्द नौहों की सदाओं के साथ अपने परम्परागत मार्गों से होते हुए चकिया करबला पर पहुँचकर ताज़िये और फूलों को कर्बला में बनाए गए बड़े गड्ढ़े (गंजे शहीदां) में पुरसा पेश करते हुए दफ्न किया। इसके अतिरिक्त, दरियाबाद से आशूरा को निकाले गए जुलूस दरियाबाद स्थित क़ब्रिस्तान पहुँचे, जहाँ अक़ीदत के फूलों व ताज़िये को दरगाह इमाम हुसैन के पास बने छोटे-छोटे गड्ढों में सुपुर्द-ए-खाक किया गया।

कर्बला में सैकड़ों अक़ीदतमन्दों ने खुले आसमान में आमाले आशूरा भी किया और नमाज़ अदा की। यह अमल छै माह के मासूम अली असग़र की शहादत के बाद हज़रत इमाम हुसैन द्वारा उनके बेशीर लाशे को खैमे में वापस ले जाते समय सात बार आगे बढ़ने और फिर अपने क़दमों को पीछे कर लेने के मरहले को याद दिलाता है। मौलाना रज़ा अब्बास ज़ैदी की क़यादत में यह आमाले आशूरा सम्पन्न हुआ।

शाम को, चौदह सौ साल पहले करबला के मैदान में हज़रत इमाम हुसैन व अन्य खानदाने रिसालत के शहीद हो जाने के बाद यज़ीदी लश्कर द्वारा खैमों में आग लगा देने और लूटपाट की याद में 'शामें ग़रीबां' का जुलूस निकाला गया। रानीमंडी क़ाज़मी लॉज व इमामबाड़ा आबिदया में शामें ग़रीबां की मजलिस हुई, जहाँ हाय सकीना, हाय प्यास की सदाओं के साथ सड़कों, गलियों व घरों की सभी लाईटों को बन्द कर अंधेरे में या हुसैन या हुसैन की सदाओं के साथ जुलूस निकाला गया। नौहा 'भय्या तुझे घर जा के कहां पाएगी ज़ैनब, घबराएगी ज़ैनब' पढ़ा गया, जिससे हर तरफ आहो बुका की सदा गूंजने लगी। काली चादर में ढ़ला ज़ीन का दुलदुल भी निकाला गया, जिसमें बच्चे व छोटी बच्चियां हाथों में खाली कूज़े और मशालें लेकर 'हाय सकीना हाय प्यास, अम्मू मैं प्यासी हूं' की सदा बुलन्द करते हुए जुलूस के साथ चलती रहीं। दरियाबाद में दरगाह इमाम हुसैन के बाहर क़ब्रिस्तान में भी अक़ीदतमन्दों ने मजलिस व मातम किया और मोमबत्ती की रौशनी में ज़ुलजनाह निकाला गया। मौलाना आमिरुर रिज़वी के अज़ाखाने पर देर रात शामें ग़रीबां की मजलिस हुई, जिसे अशरफ अब्बास खां ने खिताब किया। शानू नक़वी व शादाब नक़वी ने सवाल व जवाबी नौहा पढ़ा, तो वहीं अन्जुमन नक़विया के नौहाख्वानो शबीह हसन शाहरुख व अन्य ने भी नौहा पढ़ा, जिससे माहौल संजीदा हो गया।
    user_Susheel Kumar
    Susheel Kumar
    करछना, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश•
    9 hrs ago
  • कौशांबी के कोखराज थाना क्षेत्र स्थित कोखराज (हंडिया बाईपास) टोल प्लाजा पर शनिवार सुबह करीब 6:30 बजे कानपुर से वाराणसी जा रहे एक गैस टैंकर में संदिग्ध लीकेज के बाद भीषण आग लग गई। देखते ही देखते पूरा टैंकर धू-धू कर जलने लगा और इसकी चपेट में आने से टोल प्लाजा के चैम्बर भी जल गए। इस हादसे में चार टोलकर्मी झुलस गए, जिनमें से दो की हालत गंभीर बताई जा रही है। घायलों को पुलिस, स्थानीय लोगों और एम्बुलेंस की सहायता से तत्काल जिला अस्पताल मंझनपुर भेजा गया। सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की टीम आग बुझाने के काम में जुट गई, वहीं मौके पर भारी पुलिस बल भी तैनात किया गया है।
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    कौशांबी के कोखराज थाना क्षेत्र स्थित कोखराज (हंडिया बाईपास) टोल प्लाजा पर शनिवार सुबह करीब 6:30 बजे कानपुर से वाराणसी जा रहे एक गैस टैंकर में संदिग्ध लीकेज के बाद भीषण आग लग गई। देखते ही देखते पूरा टैंकर धू-धू कर जलने लगा और इसकी चपेट में आने से टोल प्लाजा के चैम्बर भी जल गए।

इस हादसे में चार टोलकर्मी झुलस गए, जिनमें से दो की हालत गंभीर बताई जा रही है। घायलों को पुलिस, स्थानीय लोगों और एम्बुलेंस की सहायता से तत्काल जिला अस्पताल मंझनपुर भेजा गया। सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की टीम आग बुझाने के काम में जुट गई, वहीं मौके पर भारी पुलिस बल भी तैनात किया गया है।
    user_राजेश कुमार
    राजेश कुमार
    रिपोर्टर मेजा, प्रयागराज, उत्तर प्रदेश•
    11 hrs ago
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