पंचायत चुनावों में वादों की बरसात, लेकिन सवाल वही — गरीबी, बेरोजगारी और नशे पर आखिर कब लगेगी लगाम? ऊना में पंचायत चुनावों का बिगुल बजते ही गांव-गांव की राजनीति गर्मा गई है। चौपालों से लेकर सोशल मीडिया तक आरोपों और दावों की ऐसी जंग छिड़ी है मानो वर्षों का हिसाब एक ही चुनाव में चुकता किया जाना हो। कोई पिछले प्रधानों को “विकास विरोधी” बता रहा है, तो कोई अपने कार्यकाल को गांव के इतिहास का सबसे सुनहरा दौर साबित करने में जुटा है। नए चेहरे बदलाव का सपना बेच रहे हैं, जबकि पुराने चेहरे अधूरे काम पूरे करने के नाम पर जनता से एक और मौका मांग रहे हैं। लेकिन इन तमाम भाषणों, नारों और राजनीतिक ड्रामों के बीच एक सवाल हर गांव, हर गली और हर घर में एक जैसा सुनाई दे रहा है — गरीबी कब खत्म होगी? बेरोजगार युवाओं को काम कब मिलेगा? और गांवों में फैलते नशे पर आखिर कौन लगाम लगाएगा? हैरानी की बात यह है कि दशकों से सत्ता बदलती रही, चेहरे बदलते रहे, लेकिन मुद्दे वही के वही खड़े हैं। चुनावी मंचों पर विकास के बड़े-बड़े दावे करने वाले नेता शायद यह भूल चुके हैं कि गांव का युवा आज भी नौकरी के लिए दर-दर भटक रहा है, गरीब परिवार आज भी सरकारी योजनाओं की फाइलों में दबे पड़े हैं और नशे का जहर गांवों की नसों में धीरे-धीरे उतरता जा रहा है। ऐसा लगने लगा है जैसे सरकारें इन समस्याओं को खत्म करने नहीं, बल्कि चुनावी मुद्दा बनाकर जिंदा रखने में ज्यादा दिलचस्पी रखती हों। हर पांच साल बाद वही वादे, वही भाषण और वही “बदलाव” का शोर… लेकिन जमीनी सच्चाई आज भी गांव की टूटी सड़कों, खाली जेबों और बर्बाद होती युवा पीढ़ी में साफ दिखाई देती है। उधर पंचायत चुनावों को लेकर पुलिस प्रशासन भी पूरी तरह सतर्क नजर आ रहा है। जिला पुलिस ऊना ने गांव-गांव निगरानी बढ़ा दी है और चप्पे-चप्पे पर पैनी नजर रखी जा रही है ताकि चुनावी माहौल शांतिपूर्ण बना रहे। फिलहाल गांवों में राजनीतिक शतरंज बिछ चुकी है… कोई जनता की सहानुभूति बटोर रहा है, कोई विकास के सपने दिखा रहा है और कोई बदलाव की क्रांति का दावा कर रहा है। अब देखना यह होगा कि इस बार जनता नारों पर भरोसा करती है या फिर वर्षों से अधूरे पड़े सवालों का हिसाब मांगती है।
पंचायत चुनावों में वादों की बरसात, लेकिन सवाल वही — गरीबी, बेरोजगारी और नशे पर आखिर कब लगेगी लगाम? ऊना में पंचायत चुनावों का बिगुल बजते ही गांव-गांव की राजनीति गर्मा गई है। चौपालों से लेकर सोशल मीडिया तक आरोपों और दावों की ऐसी जंग छिड़ी है मानो वर्षों का हिसाब एक ही चुनाव में चुकता किया जाना हो। कोई पिछले प्रधानों को “विकास विरोधी” बता रहा है, तो कोई अपने कार्यकाल को गांव के इतिहास का सबसे सुनहरा दौर साबित करने में जुटा है। नए चेहरे बदलाव का सपना बेच रहे हैं, जबकि पुराने चेहरे अधूरे काम पूरे करने के नाम पर जनता से एक और मौका मांग रहे हैं। लेकिन इन तमाम भाषणों, नारों और राजनीतिक ड्रामों के बीच एक सवाल हर गांव, हर गली और हर घर में एक जैसा सुनाई दे रहा है — गरीबी कब खत्म होगी? बेरोजगार युवाओं को काम कब मिलेगा? और गांवों में फैलते नशे पर आखिर कौन लगाम लगाएगा? हैरानी की बात यह है कि दशकों से सत्ता बदलती रही, चेहरे बदलते रहे, लेकिन मुद्दे वही के वही खड़े हैं। चुनावी मंचों पर विकास के बड़े-बड़े दावे करने वाले नेता शायद यह भूल चुके हैं कि गांव का युवा आज भी नौकरी के लिए दर-दर भटक रहा है, गरीब परिवार आज भी सरकारी योजनाओं की फाइलों में दबे पड़े हैं और नशे का जहर गांवों की नसों में धीरे-धीरे उतरता जा रहा है। ऐसा लगने लगा है जैसे सरकारें इन समस्याओं को खत्म करने नहीं, बल्कि चुनावी मुद्दा बनाकर जिंदा रखने में ज्यादा दिलचस्पी रखती हों। हर पांच साल बाद वही वादे, वही भाषण और वही “बदलाव” का शोर… लेकिन जमीनी सच्चाई आज भी गांव की टूटी सड़कों, खाली जेबों और बर्बाद होती युवा पीढ़ी में साफ दिखाई देती है। उधर पंचायत चुनावों को लेकर पुलिस प्रशासन भी पूरी तरह सतर्क नजर आ रहा है। जिला पुलिस ऊना ने गांव-गांव निगरानी बढ़ा दी है और चप्पे-चप्पे पर पैनी नजर रखी जा रही है ताकि चुनावी माहौल शांतिपूर्ण बना रहे। फिलहाल गांवों में राजनीतिक शतरंज बिछ चुकी है… कोई जनता की सहानुभूति बटोर रहा है, कोई विकास के सपने दिखा रहा है और कोई बदलाव की क्रांति का दावा कर रहा है। अब देखना यह होगा कि इस बार जनता नारों पर भरोसा करती है या फिर वर्षों से अधूरे पड़े सवालों का हिसाब मांगती है।
- ऊना में आगामी पंचायत चुनावों के लिए कांग्रेस हाईकमान ने कोई आधिकारिक प्रत्याशी घोषित नहीं किया है। पार्टी की राष्ट्रीय सचिव प्रियंका ने ऊना में इसकी पुष्टि की, हालांकि युवा कांग्रेस ने शोभित गौतम को समर्थन दिया है।1
- ऊना कॉलेज में ₹1600 फीस लेने के बावजूद व्यवस्था न मिलने से अभिभावकों का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि फीस चुकाने के बाद भी छात्रों को बुनियादी सुविधाएँ नहीं मिल पा रही हैं।1
- पंजाब के रूपनगर नूरपुरबेदी में हुए गो*ली*कां*ड में नौजवान ने सोशल मीडिया पर लाइव होकर कबूल कर ली वा*र*दा*त,पुलिस जांच में जुटी। #himachalpunjabnews #punjabnewstoday #todaynewsupdates #followersシ #पंजाब #PunjabNews #NewsUpdate #himachalupdate #nurpurbedi #वारदात #fairing #CrimeNews #Crime1
- हमीरपुर के साई द घाट गाँव में साइकिल चलाते समय नाले में गिरने से 17 वर्षीय अंकित कुमार की दर्दनाक मौत हो गई। अपने माता-पिता का इकलौता बेटा अंकित 12वीं की परीक्षा पास कर चुका था, जिसकी मौत से पूरे क्षेत्र में शोक छा गया है। स्थानीय लोगों ने लोक निर्माण विभाग के पैराफिट की खराब गुणवत्ता पर सवाल उठाते हुए हादसे के लिए उसे जिम्मेदार ठहराया है।1
- आज मदर्स डे के अवसर पर हमिरपुर जिले में सभी माताओं को शुभकामनाएँ दी गईं। यह दिन माताओं के निस्वार्थ प्रेम और त्याग को समर्पित है।1
- गोंदपुर बनेहड़ा लोअर से उपप्रधान पद के युवा उम्मीदवार राहुल ठाकुर ने पंचायत विकास और युवाओं की भागीदारी पर विशेष बातचीत की। उन्होंने क्षेत्र की समस्याओं के समाधान, पारदर्शी व्यवस्था और युवाओं को साथ लेकर चलने का वादा किया।1
- हमीपुर जिले में एक अनजान संख्या को लेकर स्थानीय लोगों में उत्सुकता बढ़ गई है। इस रहस्यमय आंकड़े के पीछे की वजह जानने के लिए प्रशासन भी जांच में जुट गया है। यह मामला अब पूरे हमीपुर में चर्चा का विषय बन गया है।1
- भारतीय युवा कांग्रेस की राष्ट्रीय सचिव प्रियंका सनाप ऊना पहुंचीं और टक्का जिला परिषद वार्ड में कांग्रेस प्रत्याशी शोभित गौतम के समर्थन में चुनाव प्रचार किया। उन्होंने मतदाताओं से मुलाकात कर कांग्रेस की जनहित नीतियों और विकास की सोच के लिए वोट मांगे। सनाप ने दावा किया कि क्षेत्र की जनता बदलाव चाहती है और युवा कांग्रेस पूरी मजबूती से गौतम के साथ खड़ी है।2