प्रेस नोट / विशेष विश्लेषणात्मक आलेख जारीकर्ता: विशाल शर्मा (फ्रीलांसर जर्नलिस्ट एवं शोधार्थी) विषय: भारत-अमेरिका ट्रेड डील, एआई युग की चुनौतियाँ, प्रतिभा पलायन और राष्ट्रहित में पारदर्शिता की क्रांति प्रस्तावना: बदलाव की दहलीज पर खड़ा भारत आज जब भारत और अमेरिका के बीच ऐतिहासिक ट्रेड डील अपने अंतिम चरण में है, तो देश के भीतर एक नई वैचारिक बहस छिड़ गई है। एक तरफ जहाँ कुछ लोग इस समझौते को लेकर आशंकाएं व्यक्त कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ यह समझना अनिवार्य हो गया है कि देश के आर्थिक, औद्योगिक और तकनीकी भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए हमें सतही विरोध से ऊपर उठकर जमीनी हकीकत को देखना होगा। एक स्वतंत्र शोध और पत्रकारिता के दृष्टिकोण से, इस पूरी स्थिति का गहन विश्लेषण निम्नलिखित बिंदुओं के माध्यम से जनता के सामने रखना आवश्यक है: 1. एआई (AI) का दौर और पारंपरिक हुनर की सुरक्षा * हाल ही में तकनीकी मंचों पर ऐसे उदाहरण सामने आए हैं जहाँ विदेशी कंपनियाँ या एआई मॉडल हमारे पारंपरिक कारीगरों (जैसे दर्जी और स्थानीय हुनरमंदों) के काम और कौशल को डिजिटल रूप में कैप्चर करने की कोशिश कर रहे हैं। * यह हमारी युवा पीढ़ी के लिए एक बड़ी चुनौती है। यदि हम केवल उपभोक्ता बनकर रह गए, तो हमारा हुनर और बाजार दोनों प्रभावित हो सकते हैं। इसका तोड़ इसी में है कि देश के युवा अपनी तकनीक और मौलिकता को मजबूत करें ताकि कोई बाहरी ताकत हमारे कौशल का गलत फायदा न उठा सके। 2. प्रतिभा पलायन (Brain Drain): एक गंभीर चिंता * आज देश के लिए सबसे बड़ा चिंतन का विषय यह है कि हमारे बेहतरीन डॉक्टर, इंजीनियर, रिसर्चर और वैज्ञानिक बेहतर अवसरों की तलाश में देश छोड़कर बाहर जा रहे हैं। * जब तक हम अपने देश के भीतर ऐसा सशक्त, पारदर्शी और उच्च गुणवत्ता वाला इकोसिस्टम नहीं बनाएंगे जहाँ प्रतिभाओं को उचित सम्मान और आर्थिक सुरक्षा मिले, तब तक यह पलायन रुकेगा नहीं। हमें अपने सिस्टम को इतना सक्षम बनाना होगा कि हमारे खर्चे कम और आमदनी व संसाधन मजबूत हों। 3. सरकारी तंत्र और कार्यसंस्कृति में सुधार की जरूरत * जितनी मेहनत हमारे देश का श्रमिक विदेशों में जाकर ईमानदारी से करता है, यदि उसका आधा हिस्सा भी हमारा प्रशासनिक और सरकारी तंत्र पूरी निष्ठा के साथ देशहित में लगा दे, तो व्यवस्था को बदलना कोई मुश्किल काम नहीं है। * यदि तयशुदा ड्यूटी के घंटों में पूरी ईमानदारी और प्रोटोकॉल के साथ काम किया जाए, तो देश के भीतर भ्रष्टाचार और कालाबाजारी की जड़ें स्वतः उखड़ जाएंगी। 4. ट्रेड डील का विरोध करने वाले कौन हैं और वे क्या नहीं देख पा रहे? * जो लोग इस ट्रेड डील का आंख मूंदकर विरोध कर रहे हैं, उन्हें अपने गिरेबान में झांकने की जरूरत है। वे लोग गलत नहीं हैं, बल्कि उनकी दृष्टि सीमित है; वे केवल तात्कालिक व्यवधानों या राजनीतिक नफे-नुकसान को देख पा रहे हैं। * वे उस दूरदर्शी तस्वीर को नहीं देख पा रहे हैं जो देश के युवाओं और जागरूक बुद्धिजीवियों को दिख रही है—कि कैसे वैश्विक मानक देश के भीतर से मिलावटखोरी, टैक्स चोरी और शॉर्टकट संस्कृति को हमेशा के लिए समाप्त कर सकते हैं। निष्कर्ष: समय की मांग यह डील सिर्फ दो देशों के बीच व्यापार का सौदा नहीं है, बल्कि यह देश के उद्योग जगत को आईना दिखाने का एक अवसर है। यदि हम गुणवत्ता के मामले में समझौता करना बंद कर दें और ईमानदारी से अपनी क्षमता को पहचान लें, तो वह दिन दूर नहीं जब हम दुनिया को उत्पाद खरीदने वाले नहीं बल्कि सबसे बेहतरीन उत्पाद बेचने वाले राष्ट्र के रूप में जाने जाएंगे। अब समय आ गया है कि देश का युवा, शोधकर्ता और हर नागरिक अपनी जिम्मेदारी समझे और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखे। प्रेस नोट / विशेष विश्लेषणात्मक आलेख जारीकर्ता: विशाल शर्मा (फ्रीलांसर जर्नलिस्ट एवं शोधार्थी) विषय: भारत-अमेरिका ट्रेड डील, एआई युग की चुनौतियाँ, प्रतिभा पलायन और राष्ट्रहित में पारदर्शिता की क्रांति प्रस्तावना: बदलाव की दहलीज पर खड़ा भारत आज जब भारत और अमेरिका के बीच ऐतिहासिक ट्रेड डील अपने अंतिम चरण में है, तो देश के भीतर एक नई वैचारिक बहस छिड़ गई है। एक तरफ जहाँ कुछ लोग इस समझौते को लेकर आशंकाएं व्यक्त कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ यह समझना अनिवार्य हो गया है कि देश के आर्थिक, औद्योगिक और तकनीकी भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए हमें सतही विरोध से ऊपर उठकर जमीनी हकीकत को देखना होगा। एक स्वतंत्र शोध और पत्रकारिता के दृष्टिकोण से, इस पूरी स्थिति का गहन विश्लेषण निम्नलिखित बिंदुओं के माध्यम से जनता के सामने रखना आवश्यक है: 1. एआई (AI) का दौर और पारंपरिक हुनर की सुरक्षा * हाल ही में तकनीकी मंचों पर ऐसे उदाहरण सामने आए हैं जहाँ विदेशी कंपनियाँ या एआई मॉडल हमारे पारंपरिक कारीगरों (जैसे दर्जी और स्थानीय हुनरमंदों) के काम और कौशल को डिजिटल रूप में कैप्चर करने की कोशिश कर रहे हैं। * यह हमारी युवा पीढ़ी के लिए एक बड़ी चुनौती है। यदि हम केवल उपभोक्ता बनकर रह गए, तो हमारा हुनर और बाजार दोनों प्रभावित हो सकते हैं। इसका तोड़ इसी में है कि देश के युवा अपनी तकनीक और मौलिकता को मजबूत करें ताकि कोई बाहरी ताकत हमारे कौशल का गलत फायदा न उठा सके। 2. प्रतिभा पलायन (Brain Drain): एक गंभीर चिंता * आज देश के लिए सबसे बड़ा चिंतन का विषय यह है कि हमारे बेहतरीन डॉक्टर, इंजीनियर, रिसर्चर और वैज्ञानिक बेहतर अवसरों की तलाश में देश छोड़कर बाहर जा रहे हैं। * जब तक हम अपने देश के भीतर ऐसा सशक्त, पारदर्शी और उच्च गुणवत्ता वाला इकोसिस्टम नहीं बनाएंगे जहाँ प्रतिभाओं को उचित सम्मान और आर्थिक सुरक्षा मिले, तब तक यह पलायन रुकेगा नहीं। हमें अपने सिस्टम को इतना सक्षम बनाना होगा कि हमारे खर्चे कम और आमदनी व संसाधन मजबूत हों। 3. सरकारी तंत्र और कार्यसंस्कृति में सुधार की जरूरत * जितनी मेहनत हमारे देश का श्रमिक विदेशों में जाकर ईमानदारी से करता है, यदि उसका आधा हिस्सा भी हमारा प्रशासनिक और सरकारी तंत्र पूरी निष्ठा के साथ देशहित में लगा दे, तो व्यवस्था को बदलना कोई मुश्किल काम नहीं है। * यदि तयशुदा ड्यूटी के घंटों में पूरी ईमानदारी और प्रोटोकॉल के साथ काम किया जाए, तो देश के भीतर भ्रष्टाचार और कालाबाजारी की जड़ें स्वतः उखड़ जाएंगी। 4. ट्रेड डील का विरोध करने वाले कौन हैं और वे क्या नहीं देख पा रहे? * जो लोग इस ट्रेड डील का आंख मूंदकर विरोध कर रहे हैं, उन्हें अपने गिरेबान में झांकने की जरूरत है। वे लोग गलत नहीं हैं, बल्कि उनकी दृष्टि सीमित है; वे केवल तात्कालिक व्यवधानों या राजनीतिक नफे-नुकसान को देख पा रहे हैं। * वे उस दूरदर्शी तस्वीर को नहीं देख पा रहे हैं जो देश के युवाओं और जागरूक बुद्धिजीवियों को दिख रही है—कि कैसे वैश्विक मानक देश के भीतर से मिलावटखोरी, टैक्स चोरी और शॉर्टकट संस्कृति को हमेशा के लिए समाप्त कर सकते हैं। निष्कर्ष: समय की मांग यह डील सिर्फ दो देशों के बीच व्यापार का सौदा नहीं है, बल्कि यह देश के उद्योग जगत को आईना दिखाने का एक अवसर है। यदि हम गुणवत्ता के मामले में समझौता करना बंद कर दें और ईमानदारी से अपनी क्षमता को पहचान लें, तो वह दिन दूर नहीं जब हम दुनिया को उत्पाद खरीदने वाले नहीं बल्कि सबसे बेहतरीन उत्पाद बेचने वाले राष्ट्र के रूप में जाने जाएंगे। अब समय आ गया है कि देश का युवा, शोधकर्ता और हर नागरिक अपनी जिम्मेदारी समझे और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखे।
प्रेस नोट / विशेष विश्लेषणात्मक आलेख जारीकर्ता: विशाल शर्मा (फ्रीलांसर जर्नलिस्ट एवं शोधार्थी) विषय: भारत-अमेरिका ट्रेड डील, एआई युग की चुनौतियाँ, प्रतिभा पलायन और राष्ट्रहित में पारदर्शिता की क्रांति प्रस्तावना: बदलाव की दहलीज पर खड़ा भारत आज जब भारत और अमेरिका के बीच ऐतिहासिक ट्रेड डील अपने अंतिम चरण में है, तो देश के भीतर एक नई वैचारिक बहस छिड़ गई है। एक तरफ जहाँ कुछ लोग इस समझौते को लेकर आशंकाएं व्यक्त कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ यह समझना अनिवार्य हो गया है कि देश के आर्थिक, औद्योगिक और तकनीकी भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए हमें सतही विरोध से ऊपर उठकर जमीनी हकीकत को देखना होगा। एक स्वतंत्र शोध और पत्रकारिता के दृष्टिकोण से, इस पूरी स्थिति का गहन विश्लेषण निम्नलिखित बिंदुओं के माध्यम से जनता के सामने रखना आवश्यक है: 1. एआई (AI) का दौर और पारंपरिक हुनर की सुरक्षा * हाल ही में तकनीकी मंचों पर ऐसे उदाहरण सामने आए हैं जहाँ विदेशी कंपनियाँ या एआई मॉडल हमारे पारंपरिक कारीगरों (जैसे दर्जी और स्थानीय हुनरमंदों) के काम और कौशल को डिजिटल रूप में कैप्चर करने की कोशिश कर रहे हैं। * यह हमारी युवा पीढ़ी के लिए एक बड़ी चुनौती है। यदि हम केवल उपभोक्ता बनकर रह गए, तो हमारा हुनर और बाजार दोनों प्रभावित हो सकते हैं। इसका तोड़ इसी में है कि देश के युवा अपनी तकनीक और मौलिकता को मजबूत करें ताकि कोई बाहरी ताकत हमारे कौशल का गलत फायदा न उठा सके। 2. प्रतिभा पलायन (Brain Drain): एक गंभीर चिंता * आज देश के लिए सबसे बड़ा चिंतन का विषय यह है कि हमारे बेहतरीन डॉक्टर, इंजीनियर, रिसर्चर और वैज्ञानिक बेहतर अवसरों की तलाश में देश छोड़कर बाहर जा रहे हैं। * जब तक हम अपने देश के भीतर ऐसा सशक्त, पारदर्शी और उच्च गुणवत्ता वाला इकोसिस्टम नहीं बनाएंगे जहाँ प्रतिभाओं को उचित सम्मान और आर्थिक सुरक्षा मिले, तब तक यह पलायन रुकेगा नहीं। हमें अपने सिस्टम को इतना सक्षम बनाना होगा कि हमारे खर्चे कम और आमदनी व संसाधन मजबूत हों। 3. सरकारी तंत्र और कार्यसंस्कृति में सुधार की जरूरत * जितनी मेहनत हमारे देश का श्रमिक विदेशों में जाकर ईमानदारी से करता है, यदि उसका आधा हिस्सा भी हमारा प्रशासनिक और सरकारी तंत्र पूरी निष्ठा के साथ देशहित में लगा दे, तो व्यवस्था को बदलना कोई मुश्किल काम नहीं है। * यदि तयशुदा ड्यूटी के घंटों में पूरी ईमानदारी और प्रोटोकॉल के साथ काम किया जाए, तो देश के भीतर भ्रष्टाचार और कालाबाजारी की जड़ें स्वतः उखड़ जाएंगी। 4. ट्रेड डील का विरोध करने वाले कौन हैं और वे क्या नहीं देख पा रहे? * जो लोग इस ट्रेड डील का आंख मूंदकर विरोध कर रहे हैं, उन्हें अपने गिरेबान में झांकने की जरूरत है। वे लोग गलत नहीं हैं, बल्कि उनकी दृष्टि सीमित है; वे केवल तात्कालिक व्यवधानों या राजनीतिक नफे-नुकसान को देख पा रहे हैं। * वे उस दूरदर्शी तस्वीर को नहीं देख पा रहे हैं जो देश के युवाओं और जागरूक बुद्धिजीवियों को दिख रही है—कि कैसे वैश्विक मानक देश के भीतर से मिलावटखोरी, टैक्स चोरी और शॉर्टकट संस्कृति को हमेशा के लिए समाप्त कर सकते हैं। निष्कर्ष: समय की मांग यह डील सिर्फ दो देशों के बीच व्यापार का सौदा नहीं है, बल्कि यह देश के उद्योग जगत को आईना दिखाने का एक अवसर है। यदि हम गुणवत्ता के मामले में समझौता करना बंद कर दें और ईमानदारी से अपनी क्षमता को पहचान लें, तो वह दिन दूर नहीं जब हम दुनिया को उत्पाद खरीदने वाले नहीं बल्कि सबसे बेहतरीन उत्पाद बेचने वाले राष्ट्र के रूप में जाने जाएंगे। अब समय आ गया है कि देश का युवा, शोधकर्ता और हर नागरिक अपनी जिम्मेदारी समझे और
राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखे। प्रेस नोट / विशेष विश्लेषणात्मक आलेख जारीकर्ता: विशाल शर्मा (फ्रीलांसर जर्नलिस्ट एवं शोधार्थी) विषय: भारत-अमेरिका ट्रेड डील, एआई युग की चुनौतियाँ, प्रतिभा पलायन और राष्ट्रहित में पारदर्शिता की क्रांति प्रस्तावना: बदलाव की दहलीज पर खड़ा भारत आज जब भारत और अमेरिका के बीच ऐतिहासिक ट्रेड डील अपने अंतिम चरण में है, तो देश के भीतर एक नई वैचारिक बहस छिड़ गई है। एक तरफ जहाँ कुछ लोग इस समझौते को लेकर आशंकाएं व्यक्त कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ यह समझना अनिवार्य हो गया है कि देश के आर्थिक, औद्योगिक और तकनीकी भविष्य को सुरक्षित रखने के लिए हमें सतही विरोध से ऊपर उठकर जमीनी हकीकत को देखना होगा। एक स्वतंत्र शोध और पत्रकारिता के दृष्टिकोण से, इस पूरी स्थिति का गहन विश्लेषण निम्नलिखित बिंदुओं के माध्यम से जनता के सामने रखना आवश्यक है: 1. एआई (AI) का दौर और पारंपरिक हुनर की सुरक्षा * हाल ही में तकनीकी मंचों पर ऐसे उदाहरण सामने आए हैं जहाँ विदेशी कंपनियाँ या एआई मॉडल हमारे पारंपरिक कारीगरों (जैसे दर्जी और स्थानीय हुनरमंदों) के काम और कौशल को डिजिटल रूप में कैप्चर करने की कोशिश कर रहे हैं। * यह हमारी युवा पीढ़ी के लिए एक बड़ी चुनौती है। यदि हम केवल उपभोक्ता बनकर रह गए, तो हमारा हुनर और बाजार दोनों प्रभावित हो सकते हैं। इसका तोड़ इसी में है कि देश के युवा अपनी तकनीक और मौलिकता को मजबूत करें ताकि कोई बाहरी ताकत हमारे कौशल का गलत फायदा न उठा सके। 2. प्रतिभा पलायन (Brain Drain): एक गंभीर चिंता * आज देश के लिए सबसे बड़ा चिंतन का विषय यह है कि हमारे बेहतरीन डॉक्टर, इंजीनियर, रिसर्चर और वैज्ञानिक बेहतर अवसरों की तलाश में देश छोड़कर बाहर जा रहे हैं। * जब तक हम अपने देश के भीतर ऐसा सशक्त, पारदर्शी और उच्च गुणवत्ता वाला इकोसिस्टम नहीं बनाएंगे जहाँ प्रतिभाओं को उचित सम्मान और आर्थिक सुरक्षा मिले, तब तक यह पलायन रुकेगा नहीं। हमें अपने सिस्टम को इतना सक्षम बनाना होगा कि हमारे खर्चे कम और आमदनी व संसाधन मजबूत हों। 3. सरकारी तंत्र और कार्यसंस्कृति में सुधार की जरूरत * जितनी मेहनत हमारे देश का श्रमिक विदेशों में जाकर ईमानदारी से करता है, यदि उसका आधा हिस्सा भी हमारा प्रशासनिक और सरकारी तंत्र पूरी निष्ठा के साथ देशहित में लगा दे, तो व्यवस्था को बदलना कोई मुश्किल काम नहीं है। * यदि तयशुदा ड्यूटी के घंटों में पूरी ईमानदारी और प्रोटोकॉल के साथ काम किया जाए, तो देश के भीतर भ्रष्टाचार और कालाबाजारी की जड़ें स्वतः उखड़ जाएंगी। 4. ट्रेड डील का विरोध करने वाले कौन हैं और वे क्या नहीं देख पा रहे? * जो लोग इस ट्रेड डील का आंख मूंदकर विरोध कर रहे हैं, उन्हें अपने गिरेबान में झांकने की जरूरत है। वे लोग गलत नहीं हैं, बल्कि उनकी दृष्टि सीमित है; वे केवल तात्कालिक व्यवधानों या राजनीतिक नफे-नुकसान को देख पा रहे हैं। * वे उस दूरदर्शी तस्वीर को नहीं देख पा रहे हैं जो देश के युवाओं और जागरूक बुद्धिजीवियों को दिख रही है—कि कैसे वैश्विक मानक देश के भीतर से मिलावटखोरी, टैक्स चोरी और शॉर्टकट संस्कृति को हमेशा के लिए समाप्त कर सकते हैं। निष्कर्ष: समय की मांग यह डील सिर्फ दो देशों के बीच व्यापार का सौदा नहीं है, बल्कि यह देश के उद्योग जगत को आईना दिखाने का एक अवसर है। यदि हम गुणवत्ता के मामले में समझौता करना बंद कर दें और ईमानदारी से अपनी क्षमता को पहचान लें, तो वह दिन दूर नहीं जब हम दुनिया को उत्पाद खरीदने वाले नहीं बल्कि सबसे बेहतरीन उत्पाद बेचने वाले राष्ट्र के रूप में जाने जाएंगे। अब समय आ गया है कि देश का युवा, शोधकर्ता और हर नागरिक अपनी जिम्मेदारी समझे और राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखे।
- नेपाल में भोटेकोशी नदी का रौद्र रूप, तेज बहाव में देखते ही देखते बह गया पुल चीन के तिब्बत क्षेत्र से अचानक आई बाढ़ ने नेपाल के रसुवा जिले में भारी तबाही मचाई है। भोटेकोशी नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने से टिमुरे और स्याब्रुबेसी इलाकों में कई घरों, दुकानों और अन्य संपत्तियों को नुकसान पहुंचा है। तेज बहाव में कई वाहन और सामान बह गए, जबकि एक पुल के भी ढहने की सूचना है। बाढ़ के बाद टिमुरे बॉर्डर पोस्ट पर तैनात 9 पुलिसकर्मियों के लापता होने की खबर है। अधिकारियों के मुताबिक बाढ़ के बाद से उनसे संपर्क नहीं हो पाया है। हालांकि, बॉर्डर पोस्ट पर मौजूद 25 से 30 अन्य लोग सुरक्षित बताए जा रहे हैं। नेपाल में बाढ़ के असर को देखते हुए भारत के बिहार में भी अलर्ट जारी किया गया है। पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर, वैशाली, सीतामढ़ी और शिवहर जिलों को हाई अलर्ट पर रखा गया है।आपदा प्रबंधन विभाग ने गंडक नदी में करीब 3 मीटर ऊंची फ्लैश फ्लड वेव आने की आशंका जताई है। इसके मद्देनजर नदी किनारे और निचले इलाकों में प्रशासन को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।1
- नगर पालिका परिषद कैराना की अपेक्षा का शिकार नवाब तालाब नवाब तालाब का रास्ता बदहाल, राहगीर परेशान कैराना। ऐतिहासिक नवाब तालाब की ओर जाने वाला मार्ग इन दिनों बदहाली का शिकार है। सड़क पर जगह-जगह अव्यवस्था और बारिश के मौसम में जलभराव के कारण राहगीरों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। नगर पालिका परिषद कैराना की ओर से बीते करीब एक वर्ष से नाला निर्माण कर मार्ग को बेहतर बनाने का दावा किया जा रहा है, लेकिन निर्माण कार्य की धीमी गति और ठेकेदार की कथित कछुआ चाल के चलते लोगों की मुश्किलें कम होने के बजाय बढ़ती नजर आ रही हैं। बारिश के दौरान नालियां उफनने और पानी की निकासी बाधित होने से मार्ग की स्थिति और खराब हो गई है। एक ओर नगर पालिका ऐतिहासिक नवाब तालाब के सौंदर्यीकरण और नाला निर्माण के लिए करोड़ों रुपये के प्रस्तावों का हवाला दे रही है, वहीं दूसरी ओर मौके पर बदहाल रास्ता और परेशान राहगीर पालिका की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहे हैं। स्थानीय लोगों ने नगर पालिका प्रशासन से निर्माण कार्य में तेजी लाने, नालियों की सफाई और जलनिकासी की समुचित व्यवस्था कराने की मांग की है, ताकि बारिश के मौसम में राहगीरों को राहत मिल सके। पीके7 न्यूज़ की खास रिपोर्ट—देखिए नवाब तालाब की सड़कों का हाल।1
- दरबार गाजियाबाद यूपी 14 🙏 राम भैया भगत जी गाजियाबाद Ph 8527233646 #protest #यूपी #UttarPradesh #ViralVideoFacebook #viral #बाला जी ##1
- नांगलोई में बहुत पानी जमा हो रहा है दिल्ली के कम रेखा गुप्ता जी इस पर ध्यान दें दिल्ली के माननीय सीएम रेखा गुप्ता जी से निवेदन है कि इस समस्या का समाधान करें वहां पर लोगों को बहुत समस्या हो रही है सड़के टूटे नल टूटे और आवाज में बहुत दिक्कत होती है कृपया ऐसी बात पर गौर कर जाए सड़क की सफाई करवाई जाए नाल सफाई करवाई जाए कई सालों से यह ऐसे ही जी रहे हैं वहां के लोग1
- sadbhavna park ke paas ghandgi sadbhavna park ke aas paas gandgi hai aur kaise dino se hai kahan walk karein1
- Post by Raaz1
- Sangam Vihar मे विकास या महाविनाश !! Majeedia Hospital1
- नेपाल के रसुवा जिले में भोटे कोशी नदी में अचानक बाढ़ आ गई। रिपोर्ट्स के मुताबिक, बड़ी संख्या में लोग बाढ़ में बह गए हैं। कई बाजार, गांव और हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट भी प्रभावित हुए हैं। सेना को तैनात किया गया है।1