जिला कलक्टर डॉ इंद्रजीत यादव ने मेडिकल कॉलेज का किया निरीक्षण बांसवाड़ा, 18 फरवरी। जिला कलक्टर डॉ इंद्रजीत यादव ने बुधवार को राजकीय मेडिकल कॉलेज बांसवाड़ा का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने निर्माणाधीन मेडिकल कॉलेज एवं चिकित्सालय भवन का अवलोकन कर निर्माण कार्य की प्रगति और गुणवत्ता की समीक्षा की। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता का ध्यान रखें तथा सभी कार्य तय समय-सीमा में पूर्ण किए जाएं। उन्होंने निर्माण सामग्री की गुणवत्ता, सुरक्षा मानकों एवं तकनीकी मापदंडों का विशेष रूप से ध्यान रखने के निर्देश दिए। जिला कलक्टर ने कॉलेज परिसर में विभिन्न विभागों का भी भ्रमण किया और कॉलेज में संचालित शैक्षिक कार्यक्रमों एवं गतिविधियों के बारे में भी विस्तार से जानकारी प्राप्त की। उन्होंने चिकित्सकों से संवाद करते हुए स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति तथा भविष्य की आवश्यकताओं पर चर्चा की। इस अवसर पर कॉलेज प्राचार्य डॉ योगेश सहित संबंधित अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
जिला कलक्टर डॉ इंद्रजीत यादव ने मेडिकल कॉलेज का किया निरीक्षण बांसवाड़ा, 18 फरवरी। जिला कलक्टर डॉ इंद्रजीत यादव ने बुधवार को राजकीय मेडिकल कॉलेज बांसवाड़ा का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने निर्माणाधीन मेडिकल कॉलेज एवं चिकित्सालय भवन का
अवलोकन कर निर्माण कार्य की प्रगति और गुणवत्ता की समीक्षा की। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता का ध्यान रखें तथा सभी कार्य तय समय-सीमा में पूर्ण किए जाएं। उन्होंने निर्माण सामग्री की
गुणवत्ता, सुरक्षा मानकों एवं तकनीकी मापदंडों का विशेष रूप से ध्यान रखने के निर्देश दिए। जिला कलक्टर ने कॉलेज परिसर में विभिन्न विभागों का भी भ्रमण किया और कॉलेज में संचालित शैक्षिक कार्यक्रमों एवं गतिविधियों के बारे में भी
विस्तार से जानकारी प्राप्त की। उन्होंने चिकित्सकों से संवाद करते हुए स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति तथा भविष्य की आवश्यकताओं पर चर्चा की। इस अवसर पर कॉलेज प्राचार्य डॉ योगेश सहित संबंधित अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।
- बांसवाड़ा, 18 फरवरी/गायत्री मण्डल की ओर से संचालित श्री पीताम्बरा आश्रम में एमजी अस्पताल के नर्सिंग अधीक्षक आशीष अधिकारी की अध्यक्षता में आध्यात्मिक संगोष्ठी एवं प्रयोगधर्मा साहित्यसर्जक व मनीषी चिन्तक हरीश आचार्य का एकल सनातन काव्य पाठ कार्यक्रम हुआ। इसमें धर्म-अध्यात्म के विभिन्न तत्त्वों की सारगर्भित चर्चा हुई। इसमें मेघा सराफ, पुष्पा व्यास, राजेन्द्र नानालाल जोशी, यश सराफ, जुगल जयशंकर त्रिवेदी (मुम्बई), चन्द्रेश व्यास, अनिल नरहरि भट्ट, अनिता अधिकारी, आचार्य योगिता व्यास आदि ने विचार व्यक्त किए। संगोष्ठी के उपरान्त जाने-माने साहित्यकार हरीश आचार्य की आध्यात्मिक सांस्कृतिक रचनाओं पर केन्द्रित एकल काव्य पाठ ने काव्य रसिकों को आनंदित कर दिया। इस अवसर पर श्री पीताम्बरा आश्रम के साधक-साधिकाओं की ओर से पगड़ी, हार तथा उपरणे पहनाकर हरीश आचार्य का अभिनन्दन किया गया। इससे पूर्व आशीष अधिकारी एवं श्रीमती अनिता अधिकारी ने हनुमान पूजा की तथा आरती एवं पुष्पान्जलि विधान पूर्ण किया। हनुमान चालीसा के सामूहिक पाठ भी किए गए।1
- दिनांक 15/ 2 /2026 को श्री रामचरित मानस मंडल द्वारा शिव पार्वती के शुभ विवाह पर बहुत ही धूमधाम से विधि विधान के साथ हल्दी रस एवं शुभ विवाह का आयोजन किया गया। शहर भ्रमण के साथ शोभायात्रा भक्ति जन शिव पार्वती शुभ विवाह के अवसर पर बाराती सजी। बहुत ही धूमधाम से घोड़े और ऊंट पर सवार होकर भगवान शिव पार्वती का शिव विवाह का स्वभाव यात्रा शहर भर में करते हुए। और महा आरती के पश्चात महाप्रसाद का आयोजन किया गया1
- Post by Pintu Meena Meena1
- Post by Bapulal Ahari1
- कुशलगढ़ जिला बांसवाड़ा राजस्थान रिपोर्टर धर्मेन्द्र कुमार सोनी बिजोरी छोटी में हुआ हिन्दू सम्मेलन : सनातनी परम्परा, माँ शबरी, रत्नाकर और एकलव्य का प्रेरक उदाहरण बताया राजस्थान के बांसवाड़ा जिले के कुशलगढ़ उप खंड क्षेत्र के खेड़ा धरती घाटा क्षेत्र के गांव बिजोरी छोटी में आयोजित हिन्दू सम्मेलन में सनातन संस्कृति की महान परम्पराओं पर विस्तार से प्रकाश डाला गया। वक्ताओं ने कहा कि सनातन धर्म केवल आस्था नहीं, बल्कि त्याग, तपस्या, समरसता और गुरु-भक्ति का जीवन दर्शन है। सम्मेलन में माँ शबरी का उदाहरण देते हुए बताया गया कि सच्ची भक्ति में जाति-पाति का कोई भेद नहीं होता। शबरी माता ने प्रेम और श्रद्धा से भगवान श्रीराम को बेर अर्पित किए, और भगवान ने उनकी भावना को स्वीकार किया। यह प्रसंग समरसता और समानता का संदेश देता है। इसी प्रकार रत्नाकर का उल्लेख किया गया, जो बाद में महर्षि वाल्मीकि बने और उन्होंने रामायण जैसे महान ग्रंथ की रचना की। यह उदाहरण दर्शाता है कि सनातन धर्म में आत्मपरिवर्तन और साधना के द्वारा महानता प्राप्त की जा सकती है। साथ ही एकलव्य का प्रेरक उदाहरण भी प्रस्तुत किया गया। एकलव्य ने गुरु द्रोणाचार्य को मन ही मन गुरु मानकर कठिन साधना की और अद्वितीय धनुर्धर बने। जब गुरु दक्षिणा के रूप में अंगूठा मांगा गया, तो उन्होंने बिना संकोच उसे अर्पित कर दिया। यह प्रसंग गुरु-भक्ति, समर्पण और दृढ़ संकल्प का प्रतीक है। सम्मेलन में यह संदेश दिया गया कि सनातन परम्परा हमें भक्ति (शबरी), आत्मपरिवर्तन (रत्नाकर) और गुरु-निष्ठा (एकलव्य) का मार्ग दिखाती है। समाज को इन आदर्शों को अपनाकर समरस, संस्कारित और संगठित बनाना चाहिए। इस अवसर पर वक्ता मधुसूदन व्यास नरसिंह गिरी महाराज लालचन्द भाभोर मानसीह डाबी सहित अन्य लोग भी मौजूद थे उक्त जानकारी भरत जी कुमावत ने दी4
- ग्राम अंबोदिया में ऐसे हाल है1
- Post by राघवेन्द्र सिंह1
- बांसवाड़ा विधायक अर्जुन सिंह बामनिया ने विधानसभा में टी ए डी छात्रावासों में भ्रष्टाचार का आरोप लगाया। टी ए डी छात्रावास में भ्रष्टाचार का आरोप, मंत्री बाबूलाल खराड़ी नहीं दे पाए जवाब1