राज्य सरकार के निर्देशों के पालन में, राजसमंद जिले में बुधवार, 10 जून को विभिन्न मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन किया गया। इस दौरान जिला कलेक्टर सहित सभी उपखण्ड अधिकारियों और तहसीलदारों ने अपने-अपने कार्यक्षेत्र में चिन्हित धार्मिक स्थलों पर पहुंचकर प्रदेश और जिले की सुख-समृद्धि, खुशहाली और जनकल्याण के लिए विधिवत पूजा-अर्चना की। जिला मुख्यालय पर, राजनगर स्थित प्रभु श्री चारभुजानाथ जी मंदिर (बड़ा पाड़ा) में जिला कलेक्टर श्री अरुण कुमार हसीजा ने स्वयं श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना की और प्रदेशवासियों के सुखद एवं मंगलमय जीवन की प्रार्थना की। इस अवसर पर उनके साथ अतिरिक्त जिला कलेक्टर श्री नरेश बुनकर, तहसीलदार श्री पुष्पेन्द्र सिंह और विभिन्न विभागों के अन्य अधिकारी एवं कार्मिक भी उपस्थित रहे। पूजा-अर्चना के दौरान, अधिकारियों ने राज्य की निरंतर प्रगति, सामाजिक सौहार्द, समृद्धि और आमजन के कल्याण की कामना की। जिला कलेक्टर श्री हसीजा ने इस मौके पर कहा कि प्रदेश की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परम्पराएं समाज को एकता, सद्भाव और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करती हैं। उन्होंने ऐसे आयोजनों को सामाजिक समरसता को सुदृढ़ करने और जनमानस में आध्यात्मिक चेतना का संचार करने वाला बताया। यह आयोजन केवल जिला मुख्यालय तक सीमित नहीं रहा, बल्कि जिले के सभी उपखण्डों और तहसील मुख्यालयों पर भी अधिकारियों द्वारा स्थानीय धार्मिक स्थलों पर पहुंचकर पूजा-अर्चना की गई। इन आयोजनों में स्थानीय जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक और विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारी भी उपस्थित रहे, जिन्होंने राज्य सरकार की मंशानुसार प्रदेश की उन्नति एवं जनकल्याण की कामना की।
राज्य सरकार के निर्देशों के पालन में, राजसमंद जिले में बुधवार, 10 जून को विभिन्न मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना का आयोजन किया गया। इस दौरान जिला कलेक्टर सहित सभी उपखण्ड अधिकारियों और तहसीलदारों ने अपने-अपने कार्यक्षेत्र में चिन्हित धार्मिक स्थलों पर पहुंचकर प्रदेश और जिले की सुख-समृद्धि, खुशहाली और जनकल्याण के लिए विधिवत पूजा-अर्चना की। जिला मुख्यालय पर, राजनगर स्थित प्रभु श्री चारभुजानाथ जी मंदिर (बड़ा पाड़ा) में जिला कलेक्टर श्री अरुण कुमार हसीजा ने स्वयं श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना की
और प्रदेशवासियों के सुखद एवं मंगलमय जीवन की प्रार्थना की। इस अवसर पर उनके साथ अतिरिक्त जिला कलेक्टर श्री नरेश बुनकर, तहसीलदार श्री पुष्पेन्द्र सिंह और विभिन्न विभागों के अन्य अधिकारी एवं कार्मिक भी उपस्थित रहे। पूजा-अर्चना के दौरान, अधिकारियों ने राज्य की निरंतर प्रगति, सामाजिक सौहार्द, समृद्धि और आमजन के कल्याण की कामना की। जिला कलेक्टर श्री हसीजा ने इस मौके पर कहा कि प्रदेश की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परम्पराएं समाज को एकता, सद्भाव और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान
करती हैं। उन्होंने ऐसे आयोजनों को सामाजिक समरसता को सुदृढ़ करने और जनमानस में आध्यात्मिक चेतना का संचार करने वाला बताया। यह आयोजन केवल जिला मुख्यालय तक सीमित नहीं रहा, बल्कि जिले के सभी उपखण्डों और तहसील मुख्यालयों पर भी अधिकारियों द्वारा स्थानीय धार्मिक स्थलों पर पहुंचकर पूजा-अर्चना की गई। इन आयोजनों में स्थानीय जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक और विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारी भी उपस्थित रहे, जिन्होंने राज्य सरकार की मंशानुसार प्रदेश की उन्नति एवं जनकल्याण की कामना की।
- रानी के बिजोवा में आयोजित ग्रामीण सेवा शिविर के दौरान वर्षों से लंबित एक गंभीर समस्या का समाधान होने पर ग्रामीणों ने गहरी राहत महसूस की है। शिविर में मौजूद ग्रामीणों ने विकास अधिकारी नारायणसिंह राजपुरोहित के समक्ष तीन साल से बंद पड़े नाले को लेकर शिकायत दर्ज कराई थी, जिससे जल निकासी अवरुद्ध हो गई थी। शिकायत मिलते ही, बीडीओ नारायणसिंह राजपुरोहित बिना देरी किए मौके पर पहुंचे और समस्या का जायजा लिया। उन्होंने ग्राम पंचायत कार्मिकों और सफाईकर्मियों के सहयोग से नाले में जमा हुई मिट्टी और गाद को हटवाकर उसे खुलवाने का काम शुरू कराया। इस कार्य में करीब दो घंटे का समय लगा, और इस दौरान बीडीओ ने स्वयं फावड़ा उठाकर श्रमदान भी किया, जिससे काम में तेजी आई। नाले के खुलने से बारिश और घरों से निकलने वाले नालियों के पानी की निकासी अब सुचारु हो गई है, जिससे मोहल्ले के निवासियों को बड़ी राहत मिली है। इस शिविर में एसडीएम शिवा जोशी, तहसीलदार मोहनलाल मेघवाल सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी भी उपस्थित रहे।2
- पाली जिले के चांचोडी गांव में प्रजापति समाज द्वारा मंगलवार से दो दिवसीय धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन शुरू हुआ। इस कार्यक्रम के तहत भैरूजी और खेतलाजी की मूर्ति स्थापना से पहले, मंगलवार सुबह शुभ वेला में कलशयात्रा निकाली गई। दोपहर बाद, विधि-विधान से मंत्रोच्चारण के साथ सामूहिक हवन भी संपन्न हुआ। इस संपूर्ण हवन कार्यक्रम का संचालन बाबुलाल व्यास के सानिध्य में किया गया। इस धार्मिक अवसर पर ओटाराम, समाराम, शेषाराम, कानाराम, पकाराम, दलाराम, मोहनलाल सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।3
- वीरता, शौर्य, स्वाभिमान एवं त्याग के प्रतीक वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की जयंती के अवसर पर चित्तौड़गढ़ में एक पुष्पांजलि कार्यक्रम का आयोजन किया गया। शहर एवं ग्रामीण कांग्रेस के तत्वावधान में तथा पूर्व राज्यमंत्री सुरेंद्रसिंह जाड़ावत के नेतृत्व में यह कार्यक्रम बुधवार 17 जून को प्रातः 9:30 बजे जिला कलेक्टर निवास के सामने प्रताप सर्किल स्थित शहीद स्मारक पर सम्पन्न हुआ। इस कार्यक्रम में उपस्थित कांग्रेस पदाधिकारियों, जनप्रतिनिधियों एवं कार्यकर्ताओं ने महाराणा प्रताप की प्रतिमा पर श्रद्धापूर्वक पुष्प अर्पित किए। सभी ने उनके अद्वितीय साहस, राष्ट्रभक्ति, स्वाभिमान और मातृभूमि के प्रति अटूट समर्पण को स्मरण करते हुए उन्हें नमन किया। इस अवसर पर, पूर्व राज्यमंत्री सुरेंद्रसिंह जाड़ावत ने कहा कि महाराणा प्रताप का जीवन संघर्ष, स्वाभिमान और राष्ट्रप्रेम की एक अमिट गाथा है। उन्होंने जोर दिया कि महाराणा प्रताप ने विपरीत परिस्थितियों में भी अपने सिद्धांतों और स्वतंत्रता से कभी समझौता नहीं किया, और उनका जीवन आज भी देशवासियों, विशेषकर युवाओं के लिए प्रेरणा का एक महान स्रोत बना हुआ है।1
- चित्तौड़गढ़ की पुण्य एवं वीरभूमि पर वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप जयंती अत्यंत श्रद्धा, उत्साह और गौरव के साथ मनाई गई। इस अवसर पर आदरणीय विधायक महोदय, वरिष्ठजन, युवा साथियों, मातृशक्ति और नन्हे-मुन्ने बच्चों सहित बड़ी संख्या में नागरिकों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। सभी ने अमर प्रतीक महाराणा प्रताप को श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए उनके महान आदर्शों को आत्मसात करने का संकल्प लिया। महाराणा प्रताप को केवल एक नाम नहीं, बल्कि त्याग, संघर्ष, आत्मसम्मान, राष्ट्रप्रेम और मातृभूमि के प्रति अटूट समर्पण की जीवंत मिसाल बताया गया। उनकी जयंती पर यह संदेश दिया गया कि महाराणा प्रताप ने सम्पूर्ण विश्व को सिखाया कि परिस्थितियाँ कितनी भी विपरीत क्यों न हों, अपने स्वाभिमान, संस्कृति और सिद्धांतों से कभी समझौता नहीं करना चाहिए। उन्हें "घास की रोटी खाकर भी जिसने स्वाभिमान बचाया था, मातृभूमि की रक्षा हेतु जिसने जीवन भर संघर्ष निभाया था" कहकर स्मरण किया गया, यह दोहराते हुए कि उनका जीवन इतिहास नहीं, बल्कि हर भारतवासी के हृदय में बसने वाली राष्ट्रभक्ति की चेतना और प्रेरणा है। इस अवसर पर, आयुष हॉस्पिटल (NABH सर्टिफाइड आयुर्वेद हॉस्पिटल), चित्तौड़गढ़, और डॉ. सी. पी. पटेल ने सभी नागरिकों को एक महत्वपूर्ण संदेश दिया। उन्होंने महाराणा प्रताप के आत्मबल, अनुशासन और दृढ़ संकल्प से प्रेरणा लेते हुए अपने जीवन में नित्य योग, आयुर्वेदिक दिनचर्या और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने का आग्रह किया। हॉस्पिटल ने बताया कि योग शरीर, मन और आत्मा को सशक्त बनाता है, जबकि स्वदेशी चिकित्सा पद्धति आयुर्वेद हमारी हजारों वर्षों पुरानी वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक धरोहर है, जो स्वस्थ, निरोग और संतुलित जीवन का आधार है। भारतीय संस्कृति को केवल जीवन जीना सिखाने वाली नहीं, बल्कि स्वस्थ, संस्कारित, अनुशासित और सम्मानपूर्ण जीवन का मार्ग दिखाने वाली अमूल्य विरासत बताया गया। विशेष रूप से युवाओं से आग्रह किया गया कि वे महाराणा प्रताप के जीवन से साहस, नेतृत्व, राष्ट्रभक्ति, आत्मसम्मान और संघर्षशीलता की प्रेरणा लेकर समाज एवं राष्ट्र निर्माण में अपना महत्वपूर्ण योगदान दें। यह भी बल दिया गया कि आज भारत को ऐसे युवाओं की आवश्यकता है जो अपने संस्कारों, संस्कृति और राष्ट्रहित को सर्वोपरि मानें। इस पावन अवसर पर, "जो अपनी संस्कृति का मान रखे, वही सच्चा वीर कहलाता है, योग, आयुर्वेद और राष्ट्रप्रेम से ही भारत विश्वगुरु बन पाता है" के संकल्प को दोहराया गया। सभी ने महाराणा प्रताप के आदर्शों पर चलने और एक स्वस्थ, स्वाभिमानी, संस्कारित एवं आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में योगदान देने का प्रण लिया, इस विश्वास के साथ कि जब तक सूर्य चंद्र रहेगा, मेवाड़ का गौरव अमर रहेगा।4
- सोशल मीडिया पर दोस्ती के नाम पर एक खतरनाक जालसाजी का खेल सामने आया है, जिसमें पहले इंस्टाग्राम पर दोस्ती की जाती है, फिर मिलने का बुलावा दिया जाता है। इसके बाद झूठे आरोपों का डर दिखाकर पीड़ितों पर दबाव बनाया जाता है और अंत में उनसे फिरौती वसूली जाती है। यह चेतावनी दी गई है कि सोशल मीडिया पर हर मुस्कुराता चेहरा और मीठी बातें करने वाला व्यक्ति भरोसे के लायक नहीं होता, क्योंकि कुछ लोग दोस्ती का जाल बिछाकर लोगों को फंसाते हैं और उनसे धन उगाही करने का प्रयास करते हैं। इसलिए, अनजान लोगों से दोस्ती करने से पहले पूरी जांच-पड़ताल करने की सलाह दी गई है, खासकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर अतिरिक्त सावधानी बरतने को कहा गया है। एक छोटी सी लापरवाही किसी की प्रतिष्ठा, मानसिक शांति और मेहनत की कमाई पर भारी पड़ सकती है। संदेश में लोगों से सतर्क रहने और सुरक्षित रहने का आग्रह किया गया है। यह जोर देकर कहा गया है कि दोस्ती हमेशा सोच-समझकर करनी चाहिए, क्योंकि हर फ्रेंड रिक्वेस्ट दोस्ती नहीं, कभी-कभी एक खतरनाक जाल भी हो सकती है। यह चेतावनी #सावधान, #सोशल_मीडिया_सुरक्षा, #ऑनलाइन_फ्रॉड और #जालसाज_गैंग जैसे हैशटैग के माध्यम से लोगों तक पहुंचाई जा रही है।1
- ब्यावर में भीम रोड पर स्थित कमली घाटी के स्तुति हॉस्पिटल के पास रतन सिंह रावत का पता बताया गया है।1
- चित्तौड़गढ़ के गणगौर गार्डन में योग दिवस की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। इन तैयारियों के तहत, राधा कृष्ण पार्क योग परिवार के सदस्यों के साथ पेंशनर समाज और वरिष्ठ नागरिक समाज के सभी सदस्य एक साथ मिलकर योग का अभ्यास कर रहे हैं। इस सामूहिक योग अभ्यास में अन्य लोगों को भी शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया है।4
- हमेशा की भांति, सेठ जी के अनुयायियों को आज भी उनके लाइव दर्शन करने का अवसर प्रदान किया गया है। यह आमंत्रण भक्तों को उनके दर्शनों का लाभ उठाने के लिए दिया गया है।1
- एक लेखक ने भारत में महिलाओं से जुड़े विभिन्न कथित अपराधों और व्यवहारों पर कड़ी चिंता व्यक्त की है, यह मानते हुए कि यदि उनकी बात से किसी को ठेस पहुँचे, तो भी वे अपने दिल की बात कह रहे हैं। उनका आरोप है कि महिलाओं के लिए कई संस्थागत सहायता प्रणालियाँ मौजूद हैं, जबकि पुरुषों के लिए ऐसी व्यवस्थाओं का अभाव है। लेखक ने महिलाओं पर अर्धनग्न होकर रील बनाने, अश्लील फिल्में और विज्ञापन करने, कम उम्र में कंडोम और गर्भनिरोधक गोलियों का उपयोग करने, शादी के बाद विवाहेतर संबंध बनाने, वेश्यावृत्ति और देह व्यापार में लिप्त होने, गर्भपात करवाने तथा बच्चे बेचने जैसे अपराधों में शामिल होने का आरोप लगाया है। इसके अतिरिक्त, झूठे दहेज और बलात्कार के मुकदमे दर्ज कराने, तीन तलाक और लव जिहाद जैसे मामलों में मुकदमे करने, तथा प्रेमी के साथ मिलकर पति या बच्चों की हत्या जैसे जघन्य अपराध करने का भी उल्लेख किया गया है। लेखक ने यहाँ तक कि चार लड़कियों द्वारा एक गरीब युवक के साथ कथित बलात्कार जैसी घटनाओं का भी हवाला दिया है। इन सब कथित कृत्यों के बावजूद, लेखक यह इंगित करते हैं कि महिलाओं के लिए महिला हेल्पलाइन, महिला थाना, मिशन शक्ति, महिला हेल्प डेस्क, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय और महिला आयोग जैसी विभिन्न सुविधाएँ और संस्थाएँ उपलब्ध हैं। वहीं, पुरुषों के लिए न तो कोई पुरुष आयोग है, न पुरुष हेल्पलाइन की समान व्यवस्था है और न ही पुरुषों के लिए कोई अलग संस्थागत संरक्षण मौजूद है। लेखक ने ज़ोर देकर कहा है कि न्याय और अधिकारों की चर्चा में प्रत्येक पीड़ित की आवाज़ सुनी जानी चाहिए, चाहे वह महिला हो या पुरुष।1